RBSE Class 12th 2017 Agriculture-SS-84-2017 Previous Year Papers

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Paper details

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Board RBSE
Class Class 12th
Exam year 2017
Subject Agriculture-SS-84-2017
Resource type Previous Year Papers
Category RBSE Previous Year Question Papers
Website RBSE Solution

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RBSE Class 12th 2017 Agriculture-SS-84-2017

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Rajasthan Board Class 12th Agriculture-SS-84-2017 2017 solved Previous Year Question Papers

उच्च माध्यमिक परीक्षा, 2017

SENIOR SECONDARY EXAMINATION, 2017

कृषि विज्ञान

AGRICULTURE

समय : 3¼ घण्टे | पूर्णांक : 56

परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :

GENERAL INSTRUCTIONS TO THE EXAMINEES :

  1. परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न पत्र पर नामांक अनिवार्यत: लिखें।
    Candidate must write first his / her Roll No. on the question paper compulsorily.
  2. सभी प्रश्न करने अनिवार्य हैं।
    All the questions are compulsory.
  3. प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें।
    Write the answer to each question in the given answer-book only.
  4. जिन प्रश्नों में आन्तरिक खण्ड हैं, उन सभी के उत्तर एक साथ ही लिखें।
    For questions having more than one part the answers to those parts are to be written together in continuity.
  5. प्रश्न पत्र के हिन्दी व अंग्रेजी रूपान्तर में किसी प्रकार की त्रुटि / अन्तर / विरोधाभास होने पर हिन्दी भाषा के प्रश्न को सही मानें।
    If there is any error / difference / contradiction in Hindi & English versions of the question paper, the question of Hindi version should be treated valid.

प्रश्न पत्र को खोलने के लिए यहाँ फाड़ें | TEAR HERE TO OPEN THE QUESTION PAPER

SLNo. : ___________ | नामांक Roll No. : ___________

No. of Questions — 30 | S S -84- Agriculture | No. of Printed Pages — 07

SS-84-Agriculture 838 [ Turn Over

प्रश्न 2

टिकाऊ खेती के चार प्रमुख अवयव लिखिए।

Write four main components of sustainable farming.

उत्तर: टिकाऊ खेती के चार प्रमुख अवयव निम्नलिखित हैं:

  1. मृदा स्वास्थ्य का संरक्षण एवं संवर्धन
  2. जल संसाधनों का कुशल उपयोग
  3. जैव विविधता का संरक्षण
  4. रासायनिक आगतों का न्यूनतम उपयोग

प्रश्न 3

मसाले वाली चार फसलों के नाम लिखिए।

Write the name of four spice crops.

उत्तर: मसाले वाली चार फसलों के नाम निम्नलिखित हैं:

  1. मिर्च (Chilli)
  2. हल्दी (Turmeric)
  3. अदरक (Ginger)
  4. धनिया (Coriander)

प्रश्न 4

गेहूँ की फसल में बुवाई के कितने दिनों बाद आइसोप्रोटयूरॉन खरपतवार नाशी का प्रयोग किया जाता है?

"Isoproturan" weedicide is used in wheat crop after how many days of sowing?

उत्तर: गेहूँ की फसल में बुवाई के 30-35 दिनों बाद आइसोप्रोटयूरॉन खरपतवार नाशी का प्रयोग किया जाता है।

प्रश्न 5

धान में जिंक की कमी से होने वाले रोग का नाम लिखिए।

Write the name of disease caused by Zinc deficiency in Paddy.

उत्तर: धान में जिंक की कमी से होने वाले रोग को खैरा रोग (Khaira disease) कहते हैं।

प्रश्न 6

फसलों में कैल्सियम की कमी के कोई दो लक्षण लिखिए।

Write any two Calcium deficiency symptoms in crops.

उत्तर: फसलों में कैल्सियम की कमी के दो प्रमुख लक्षण निम्नलिखित हैं:

  1. नई पत्तियों का मुड़ना एवं विकृत होना
  2. फलों में सड़न (Blossom end rot) का होना

प्रश्न 7

टॉप ड्रैसिंग किसे कहते हैं?

What is Top dressing?

उत्तर: टॉप ड्रैसिंग कृषि में उर्वरक प्रयोग की एक विधि है जिसमें फसल की बुवाई या रोपाई के बाद खड़ी फसल में नाइट्रोजन उर्वरक (जैसे यूरिया) का प्रयोग किया जाता है। इसका उद्देश्य फसल की वृद्धि के महत्वपूर्ण चरणों में पोषक तत्वों की पूर्ति करना है।

प्रश्न 8

हरी खाद के लिए प्रयोग की जाने वाली चार फलीदार / दलहनी फसलों के नाम लिखिए।

Mention the name of any four leguminous crops used for green manuring.

उत्तर: हरी खाद के लिए प्रयोग की जाने वाली चार फलीदार/दलहनी फसलों के नाम निम्नलिखित हैं:

  1. सनई (Sunn hemp)
  2. ढैंचा (Dhaincha)
  3. लोबिया (Cowpea)
  4. ग्वार (Cluster bean)

प्रश्न 9

चने के बीज की मात्रा प्रति हैक्टर लिखिये।

Write the seed rate of Gram (kg/hact.).

उत्तर: चने के बीज की मात्रा 75-80 किलोग्राम प्रति हैक्टर होती है।

प्रश्न 9

मूंगफली की फसल में पत्तियों पर हल्के भूरे से गहरे भूरे व गोलाकार धब्बे किस रोग में उभरते हैं?

Light to dark brown and circular spots on the leaves of groundnut are found in which disease?

उत्तर: यह लक्षण मूंगफली के टिक्का रोग (Tikka disease) में पाए जाते हैं, जो कवक Cercospora personata और Cercospora arachidicola के कारण होता है।

प्रश्न 10

फसलीय पौधों में वृद्धि की क्रान्तिक अवस्था को परिभाषित कीजिए। (सिंचाई के लिए)

Define the critical stage of crop growth for irrigation.

उत्तर: फसलीय पौधों में वृद्धि की क्रान्तिक अवस्था वह समय होता है जब पौधे की वृद्धि और उपज पर पानी की कमी का सबसे अधिक प्रभाव पड़ता है। सिंचाई के लिए यह वह अवस्था है जिसमें नमी की कमी से फसल की पैदावार में गंभीर कमी आ सकती है। उदाहरण के लिए, गेहूँ में कल्ले निकलने और बाली आने की अवस्था, तथा धान में शीर्षासन (panicle initiation) अवस्था क्रान्तिक होती है।

प्रश्न 11

बूंद-बूंद / ड्रिप सिंचाई विधि का आविष्कार किस देश में हुआ था?

In which country the drip irrigation system was invented?

उत्तर: ड्रिप सिंचाई विधि का आविष्कार इज़राइल (Israel) देश में हुआ था।

प्रश्न 12

विटामिन 'A' की कमी से होने वाले किसी एक रोग का नाम लिखिये।

Write the name of any one disease caused by Vitamin 'A' deficiency.

उत्तर: विटामिन 'A' की कमी से रतौंधी (Night blindness) रोग होता है।

प्रश्न 13

सब्जी की फसलों में हेर फेर अथवा फसल चक्र के कोई दो लाभ लिखिये।

Write any two advantages of crop rotation in vegetable crops.

उत्तर: सब्जी की फसलों में फसल चक्र के दो लाभ निम्नलिखित हैं:

  1. मृदा उर्वरता का संरक्षण: विभिन्न फसलें मिट्टी से अलग-अलग पोषक तत्व लेती हैं, जिससे मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है और किसी एक तत्व की कमी नहीं होती।
  2. रोग एवं कीट नियंत्रण: एक ही फसल को बार-बार उगाने से विशिष्ट रोग और कीट बढ़ जाते हैं, जबकि फसल चक्र से उनका जीवन चक्र टूट जाता है और नियंत्रण आसान हो जाता है।

प्रश्न 14

खरपतवार नियंत्रण के किन्हीं चार उपायों का वर्णन कीजिए।

Describe any four methods of weed control.

उत्तर: खरपतवार नियंत्रण के चार उपाय निम्नलिखित हैं:

  1. यांत्रिक विधि: हाथ से निराई, कुदाल या ट्रैक्टर चलित उपकरणों द्वारा खरपतवारों को हटाना।
  2. सांस्कृतिक विधि: फसल चक्र अपनाना, घनी बुवाई करना, और उचित सिंचाई प्रबंधन द्वारा खरपतवारों की वृद्धि को रोकना।
  3. रासायनिक विधि: खरपतवारनाशी रसायनों (जैसे 2,4-D, ग्लाइफोसेट) का प्रयोग करना।
  4. जैविक विधि: खरपतवारों को खाने वाले कीटों या जीवों (जैसे कुछ प्रकार के फफूंद) का उपयोग करना।

प्रश्न 15

मृदा उर्वरता को प्रभावित करने वाले किन्हीं दो प्राकृतिक कारकों का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।

Describe in brief any two natural causes affecting the soil fertility.

उत्तर: मृदा उर्वरता को प्रभावित करने वाले दो प्राकृतिक कारक निम्नलिखित हैं:

  1. जलवायु: वर्षा, तापमान और आर्द्रता मिट्टी में कार्बनिक पदार्थों के अपघटन और पोषक तत्वों की उपलब्धता को प्रभावित करते हैं। अधिक वर्षा से पोषक तत्वों का निक्षालन (leaching) हो सकता है।
  2. मूल पदार्थ (Parent Material): जिस चट्टान से मिट्टी बनी है, उसकी खनिज संरचना मिट्टी की उर्वरता निर्धारित करती है। उदाहरण के लिए, बेसाल्ट चट्टानों से बनी मिट्टी अधिक उपजाऊ होती है जबकि बलुआ पत्थर से बनी मिट्टी कम उपजाऊ होती है।

प्रश्न 16

भारत की "मिश्रित लाल व काली मृदाओं" का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।

Describe in brief "mixed red and black soils" of India.

उत्तर: भारत की मिश्रित लाल व काली मृदाएँ मुख्यतः दक्षिण भारत के कुछ भागों (जैसे तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक) में पाई जाती हैं। ये मृदाएँ लाल मृदा (जो लौह ऑक्साइड के कारण लाल होती है) और काली मृदा (जो कैल्शियम कार्बोनेट से भरपूर होती है) के मिश्रण से बनी होती हैं। इनमें जल धारण क्षमता मध्यम होती है और ये कपास, मूंगफली, तथा बाजरा जैसी फसलों के लिए उपयुक्त होती हैं।

प्रश्न 7: फल एवं सब्जियों के कोई चार महत्व लिखिये।

Write any four importance of fruits and vegetables.

फल एवं सब्जियों के चार महत्व:

  1. पोषण का स्रोत: ये विटामिन (A, C, E), खनिज (आयरन, कैल्शियम) और फाइबर प्रदान करते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए आवश्यक हैं।
  2. रोग प्रतिरोधक क्षमता: एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होने के कारण ये शरीर को रोगों से बचाते हैं और प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं।
  3. आर्थिक महत्व: फल और सब्जियों की खेती किसानों को अच्छी आय प्रदान करती है और कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाती है।
  4. पाचन में सहायक: इनमें मौजूद फाइबर पाचन तंत्र को स्वस्थ रखता है और कब्ज जैसी समस्याओं से बचाता है।

प्रश्न 8: निजी उद्यान एवं सार्वजनिक उद्यान पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।

Write short notes on Private garden and Public garden.

निजी उद्यान (Private Garden): यह व्यक्तिगत उपयोग के लिए घर या आवासीय क्षेत्र में बनाया जाता है। इसमें फूल, फल, सब्जियां और सजावटी पौधे लगाए जाते हैं। इसका आकार छोटा होता है और इसका रखरखाव मालिक स्वयं करता है। यह मनोरंजन और सौंदर्य प्रदान करता है।

सार्वजनिक उद्यान (Public Garden): यह सरकार या स्थानीय निकाय द्वारा जनता के मनोरंजन और शिक्षा के लिए बनाया जाता है। इसमें विभिन्न प्रकार के पौधे, फूल, घास के मैदान, झीलें और बैठने की व्यवस्था होती है। इसका रखरखाव सरकारी एजेंसियां करती हैं और यह सभी के लिए खुला होता है।

प्रश्न 9: बाग लगाने हेतु फलदार पौधों का चुनाव करते समय ध्यान देने योग्य किन्हीं दो बिन्दुओं का उल्लेख कीजिए।

Write any two points considered at the time of selection of fruit plants for an Orchard.

फलदार पौधों के चुनाव के दो महत्वपूर्ण बिंदु:

  1. जलवायु और मिट्टी की उपयुक्तता: पौधे का चयन क्षेत्र की जलवायु (तापमान, वर्षा) और मिट्टी के प्रकार (pH, जल निकासी) के अनुसार करना चाहिए ताकि वह अच्छी तरह विकसित हो सके।
  2. बाजार की मांग और आर्थिक लाभ: ऐसी किस्मों का चयन करें जिनकी स्थानीय बाजार में अच्छी मांग हो और जो अधिक उत्पादन दे सकें, जिससे किसान को अधिक लाभ हो।

प्रश्न 20: फलोद्यान में पौधे लगाने की आयताकार व षट्भुजाकार विधि का वर्णन कीजिए।

Describe the Rectangular and Hexagonal method of planting of Orchard.

आयताकार विधि (Rectangular Method): इस विधि में पौधों को आयताकार पैटर्न में लगाया जाता है, जहाँ पंक्तियों के बीच की दूरी और पौधों के बीच की दूरी समान नहीं होती। इसमें पंक्तियाँ सीधी होती हैं और पौधे एक-दूसरे के सामने होते हैं। यह विधि सरल है और इसमें अंतर-फसल लेना आसान होता है।

षट्भुजाकार विधि (Hexagonal Method): इस विधि में पौधों को षट्भुज (hexagon) के कोनों पर लगाया जाता है, जिससे प्रत्येक पौधा छह अन्य पौधों से समान दूरी पर होता है। यह विधि अधिक पौधे लगाने की अनुमति देती है और भूमि का अधिकतम उपयोग करती है। इसमें पौधों को समान दूरी मिलती है, जिससे प्रकाश और पोषक तत्वों का समान वितरण होता है।

प्रश्न 2: क्लाइमैक्ट्रिक फल व नॉन-क्लाइमैक्ट्रिक फल में अन्तर स्पष्ट कीजिए।

Differentiate between climactric fruit and non-climactric fruit.

क्लाइमैक्ट्रिक फल (Climacteric Fruit) नॉन-क्लाइमैक्ट्रिक फल (Non-Climacteric Fruit)
तोड़ने के बाद पकते रहते हैं (जैसे सेब, केला, आम)। तोड़ने के बाद नहीं पकते (जैसे अंगूर, संतरा, स्ट्रॉबेरी)।
पकने के दौरान एथिलीन गैस का उत्पादन अधिक होता है। एथिलीन उत्पादन बहुत कम होता है।
श्वसन दर में अचानक वृद्धि (climacteric rise) होती है। श्वसन दर धीरे-धीरे कम होती है, कोई अचानक वृद्धि नहीं होती।
इन्हें कृत्रिम रूप से पकाया जा सकता है। कृत्रिम पकाना संभव नहीं है।

प्रश्न 22: "मिश्रित या सर्पाकार दाब" विधि का सचित्र वर्णन कीजिए।

Describe the method of compound or serpentine layering with suitable diagram.

मिश्रित या सर्पाकार दाब विधि (Compound or Serpentine Layering): इस विधि में एक लंबी शाखा को जमीन पर मोड़कर कई स्थानों पर दबाया जाता है, जिससे एक ही शाखा से कई पौधे तैयार होते हैं। शाखा को सर्प (snake) की तरह मोड़ा जाता है, जहाँ प्रत्येक मोड़ पर मिट्टी से ढका जाता है और बीच का भाग खुला रहता है। प्रत्येक दबे हुए भाग से जड़ें निकलती हैं और फिर उन्हें अलग करके नए पौधे के रूप में लगाया जाता है। यह विधि अंगूर, चमेली आदि में उपयोगी है।

(चित्र: एक लंबी शाखा को जमीन पर सर्पाकार मोड़कर कई स्थानों पर मिट्टी से ढका गया है, जहाँ से जड़ें निकल रही हैं।)

प्रश्न 23: मूलवृन्त व सांकुर डाली में अन्तर स्पष्ट कीजिए।

Differentiate between Root stock and Scion.

मूलवृन्त (Rootstock) सांकुर डाली (Scion)
यह पौधे का निचला भाग होता है जिसमें जड़ प्रणाली होती है। यह पौधे का ऊपरी भाग होता है जिसमें तना, पत्तियाँ और फल लगते हैं।
यह मिट्टी से पानी और पोषक तत्वों को अवशोषित करता है। यह प्रकाश संश्लेषण करता है और फल/फूल उत्पन्न करता है।
यह पौधे को रोगों और कीटों से बचाता है। यह वांछित किस्म के फलों की गुणवत्ता निर्धारित करता है।
यह पौधे के आकार और वृद्धि को नियंत्रित करता है। यह पौधे की ऊपरी संरचना बनाता है।

प्रश्न 24: नहर द्वारा सिंचाई के दो लाभ व दो हानियाँ लिखिये।

Write any two advantages and two disadvantages of canal irrigation.

नहर सिंचाई के दो लाभ:

  1. नियमित जल आपूर्ति: नहरें नदियों या बांधों से पानी लाकर खेतों तक नियमित रूप से पहुँचाती हैं, जिससे फसलों को समय पर पानी मिलता है।
  2. बड़े क्षेत्र की सिंचाई: नहरें बड़े भू-भाग को कवर कर सकती हैं, जिससे एक साथ कई खेतों की सिंचाई संभव होती है।

नहर सिंचाई की दो हानियाँ:

  1. जलभराव और लवणता: अत्यधिक सिंचाई से भूमि में जलभराव हो सकता है और मिट्टी में लवणता बढ़ सकती है, जिससे फसल उत्पादन प्रभावित होता है।
  2. पानी की बर्बादी: नहरों से रिसाव और वाष्पीकरण के कारण बहुत सा पानी बर्बाद हो जाता है, जिससे जल संसाधनों का कुशल उपयोग नहीं हो पाता।

25) परिरक्षण को परिभाषित कीजिए। तेल एवं सिरका खाद्य पदार्थों के परिरक्षण में किस प्रकार सहायक है? समझाइये।

Define preservation. How oil and vinegar are helpful in preservation of food material? Explain.

परिरक्षण की परिभाषा: खाद्य पदार्थों को सूक्ष्मजीवों, एंजाइमों और अन्य कारकों से होने वाली खराबी से बचाने की प्रक्रिया को परिरक्षण कहते हैं। इसका उद्देश्य खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता, स्वाद और पोषण मूल्य को लंबे समय तक बनाए रखना है।

तेल एवं सिरका की भूमिका:

  • तेल: तेल खाद्य पदार्थों पर एक परत बना देता है, जिससे हवा (ऑक्सीजन) और नमी का संपर्क नहीं हो पाता। इससे सूक्ष्मजीवों (जैसे बैक्टीरिया और फफूंद) की वृद्धि रुक जाती है, क्योंकि उन्हें जीवित रहने के लिए ऑक्सीजन और नमी की आवश्यकता होती है।
  • सिरका: सिरका में एसिटिक अम्ल होता है, जो अम्लीय वातावरण बनाता है। अधिकांश सूक्ष्मजीव अम्लीय वातावरण में जीवित नहीं रह सकते। यह खाद्य पदार्थों के pH को कम करके उन्हें खराब होने से बचाता है।

इस प्रकार, तेल और सिरका दोनों ही खाद्य पदार्थों के परिरक्षण में प्रभावी रूप से सहायक होते हैं।

26) खरपतवारों द्वारा होने वाली छ: हानियों का वर्णन कीजिए।

अथवा / OR

खरपतवार विस्तार की किन्हीं छ: विधियों का वर्णन कीजिए।

Describe any six disadvantages of weeds. OR Describe any six methods of weed dissemination.

खरपतवारों द्वारा होने वाली छ: हानियाँ:

  1. पोषक तत्वों की प्रतिस्पर्धा: खरपतवार मुख्य फसलों से पानी, खनिज और पोषक तत्व छीन लेते हैं, जिससे फसल की वृद्धि प्रभावित होती है।
  2. प्रकाश की प्रतिस्पर्धा: तेजी से बढ़ने वाले खरपतवार फसलों पर छाया कर देते हैं, जिससे प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया बाधित होती है।
  3. उपज में कमी: खरपतवारों के कारण फसलों की पैदावार में 20-30% तक की कमी आ सकती है।
  4. फसल की गुणवत्ता में गिरावट: खरपतवारों के बीज फसल के साथ मिल जाते हैं, जिससे अनाज की गुणवत्ता खराब हो जाती है।
  5. रोगों और कीटों का प्रसार: कई खरपतवार रोगजनकों और कीटों के मेजबान होते हैं, जो फसलों में रोग फैलाते हैं।
  6. सिंचाई और कटाई में बाधा: घने खरपतवार सिंचाई के पानी के प्रवाह को रोकते हैं और कटाई के कार्य को कठिन बनाते हैं।

अथवा, खरपतवार विस्तार की छ: विधियाँ:

  1. वायु द्वारा: हल्के बीज (जैसे साइप्रस) हवा के झोंकों से दूर-दूर फैल जाते हैं।
  2. जल द्वारा: पानी में तैरने वाले बीज (जैसे नारियल) नदियों और नहरों के माध्यम से फैलते हैं।
  3. जंतुओं द्वारा: बीज जानवरों के शरीर से चिपककर या उनके मल के माध्यम से फैलते हैं।
  4. मानव द्वारा: कृषि उपकरणों, बीजों या परिवहन के माध्यम से खरपतवार एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुँचते हैं।
  5. कीटों द्वारा: कुछ कीट बीजों को एक स्थान से दूसरे स्थान ले जाते हैं।
  6. विस्फोट द्वारा: कुछ खरपतवारों के फल पकने पर फट जाते हैं और बीज चारों ओर बिखर जाते हैं।

27) जैम क्या है? जैम बनाने की विधि का वर्णन कीजिए।

अथवा / OR

केचप क्या है? केचप बनाने की विधि का वर्णन कीजिए।

What is Jam? Explain the method of Jam preparation. OR What is Ketchup? Explain the method of Ketchup preparation.

जैम: जैम एक गाढ़ा, मीठा फलों का उत्पाद है जिसमें फलों के टुकड़े चीनी और पेक्टिन के साथ पकाकर बनाए जाते हैं। इसमें फलों का गूदा और रस दोनों होते हैं।

जैम बनाने की विधि:

  1. फलों का चयन और धुलाई: ताजे, पके हुए फल (जैसे स्ट्रॉबेरी, आम) लें और उन्हें अच्छी तरह धो लें।
  2. फलों को काटना: फलों के छिलके उतारकर छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें।
  3. पकाना: फलों के टुकड़ों को एक बर्तन में डालकर धीमी आंच पर पकाएं जब तक वे नरम न हो जाएं।
  4. चीनी मिलाना: फलों में बराबर मात्रा में चीनी (1:1 अनुपात) मिलाएं और अच्छी तरह मिलाएं।
  5. पेक्टिन मिलाना: यदि फलों में प्राकृतिक पेक्टिन कम है, तो थोड़ा सा पेक्टिन पाउडर मिलाएं।
  6. गाढ़ा होने तक पकाना: मिश्रण को तब तक पकाएं जब तक वह गाढ़ा न हो जाए और चम्मच से लेने पर टपकने लगे।
  7. पैकेजिंग: गर्म जैम को स्टरलाइज़ किए गए जार में भरकर सील कर दें।

केचप: केचप एक गाढ़ा, मीठा और खट्टा सॉस है जो मुख्य रूप से टमाटर से बनाया जाता है।

केचप बनाने की विधि:

  1. टमाटर का चयन: पके हुए लाल टमाटर लें और उन्हें धो लें।
  2. टमाटर को पकाना: टमाटर को पानी में उबालकर या भाप में पकाकर नरम कर लें, फिर छिलका उतार दें।
  3. प्यूरी बनाना: टमाटर को मैश करके या मिक्सर में पीसकर प्यूरी बना लें।
  4. मसाले मिलाना: प्यूरी में चीनी, सिरका, नमक, लहसुन, प्याज और अन्य मसाले (जैसे लौंग, दालचीनी) मिलाएं।
  5. गाढ़ा होने तक पकाना: मिश्रण को धीमी आंच पर तब तक पकाएं जब तक वह गाढ़ा न हो जाए और आधा रह जाए।
  6. ठंडा करना और पैकेजिंग: केचप को ठंडा करके स्टरलाइज़ किए गए बोतलों में भरें और सील करें।

28) i) सिंचाई की थाला विधि का सचित्र वर्णन कीजिए।

ii) चना एवं मक्का में सिंचाई की दो-दो क्रांतिक अवस्थाओं का उल्लेख कीजिए।

i) Describe the method of Ring irrigation with suitable diagram. ii) Write critical stages of growth for irrigation in Gram and Maize (any two in each).

i) सिंचाई की थाला विधि (Ring Irrigation):

थाला विधि में पेड़ या पौधे के चारों ओर एक गोलाकार या अर्ध-गोलाकार थाला (गड्ढा) बनाया जाता है। इस थाले में पानी भर दिया जाता है, जो धीरे-धीरे जड़ों तक पहुँचता है। यह विधि विशेष रूप से फलों के पेड़ों और बागवानी फसलों के लिए उपयोगी है।

चित्र (Diagram): (एक गोलाकार थाला जिसके बीच में पेड़ है, और थाले में पानी भरा हुआ दिखाया गया है।)

        पानी
    ┌─────────┐
    │  थाला   │
    │   🌳    │
    │  (पेड़)  │
    └─────────┘

ii) चना एवं मक्का में सिंचाई की क्रांतिक अवस्थाएँ:

  • चना (Gram):
    1. फूल आने की अवस्था: फूल आने के समय नमी की कमी से फूल झड़ सकते हैं और उपज प्रभावित होती है।
    2. फली भरने की अवस्था: फलियों में दाने भरने के समय सिंचाई आवश्यक है, अन्यथा दाने छोटे रह जाते हैं।
  • मक्का (Maize):
    1. बाली निकलने की अवस्था: बाली निकलने के समय पानी की कमी से परागण प्रभावित होता है और बाली में दाने नहीं बनते।
    2. दाना भरने की अवस्था: दानों में स्टार्च भरने के समय सिंचाई आवश्यक है, जिससे दाने मोटे और भारी होते हैं।

प्रश्न 29 (4 अंक)

सरसों की वैज्ञानिक खेती हेतु निम्न बिन्दुओं पर प्रकाश डालिये।

  1. चार उन्नत किस्में
  2. बीज की मात्रा प्रति हैक्टर
  3. दो प्रमुख कीट
  4. उपज प्रति हैक्टर

अथवा

अरहर की वैज्ञानिक खेती हेतु निम्न बिन्दुओं पर प्रकाश डालिये।

  1. चार उन्नत किस्में
  2. बीज की मात्रा प्रति हैक्टर
  3. दो प्रमुख कीट
  4. उपज प्रति हैक्टर

For scientific cultivation of Mustard explain the following points:

  1. Four improved varieties
  2. Seed rate per hectare
  3. Two important insect pests
  4. Yield per hectare

OR

For scientific cultivation of Pigeon Pea explain the following points:

  1. Four improved varieties
  2. Seed rate per hectare
  3. Two important insect pests
  4. Yield per hectare

उत्तर (सरसों के लिए)

  1. चार उन्नत किस्में: वरुणा (T-59), पूसा बोल्ड, पूसा जय किसान, और आरएच-30 (RH-30)।
  2. बीज की मात्रा प्रति हैक्टर: 4-5 किग्रा प्रति हैक्टर (बुवाई विधि और किस्म पर निर्भर)।
  3. दो प्रमुख कीट: (क) माहू (एफिड्स) – पत्तियों और फूलों से रस चूसते हैं; (ख) पत्ती खाने वाली सुंडी (कैटरपिलर) – पत्तियों को खाकर नुकसान पहुँचाती है।
  4. उपज प्रति हैक्टर: उन्नत किस्मों और उचित प्रबंधन से 15-20 क्विंटल प्रति हैक्टर तक प्राप्त होती है।

उत्तर (अरहर के लिए)

  1. चार उन्नत किस्में: पूसा-9, बहार, मालवीय-13, और आईपीएच-09-5 (IPH 09-5)।
  2. बीज की मात्रा प्रति हैक्टर: 12-15 किग्रा प्रति हैक्टर (बुवाई विधि और किस्म पर निर्भर)।
  3. दो प्रमुख कीट: (क) फली छेदक (पॉड बोरर) – फलियों में छेद कर दानों को नुकसान पहुँचाता है; (ख) तना मक्खी (स्टेम फ्लाई) – तने में छेद कर पौधे को कमजोर करती है।
  4. उपज प्रति हैक्टर: उन्नत किस्मों और उचित प्रबंधन से 12-15 क्विंटल प्रति हैक्टर तक प्राप्त होती है।

प्रश्न 30

आम की वैज्ञानिक खेती हेतु निम्न बिन्दुओं पर प्रकाश डालिये।

  1. उपयुक्त जलवायु
  2. चार उन्नत किस्में
  3. दो प्रमुख रोग
  4. प्रवर्धन (Propagation)

अथवा

टमाटर की वैज्ञानिक खेती हेतु निम्न बिन्दुओं पर प्रकाश डालिये।

  1. उपयुक्त जलवायु
  2. चार उन्नत किस्में
  3. बीज की मात्रा प्रति हैक्टर
  4. उपज प्रति हैक्टर

For scientific cultivation of Mango explain the following points:

  1. Suitable Climate
  2. Four improved varieties
  3. Two important diseases
  4. Propagation

OR

For scientific cultivation of Tomato explain the following points:

  1. Suitable Climate
  2. Four improved varieties
  3. Seed rate per hectare
  4. Yield per hectare

उत्तर (आम के लिए):

i) उपयुक्त जलवायु: आम की खेती के लिए उष्ण एवं उपोष्ण जलवायु उपयुक्त होती है। इसके लिए 24°C से 30°C तापमान तथा 75-250 सेमी वार्षिक वर्षा आवश्यक है। पाले से बचाव आवश्यक है।

ii) चार उन्नत किस्में: दशहरी, लंगड़ा, चौसा, और आम्रपाली।

iii) दो प्रमुख रोग: एन्थ्रेक्नोज (कवक जनित) और मृदु रोमिल आसिता (पाउडरी मिल्ड्यू)।

iv) प्रवर्धन: आम का प्रवर्धन प्रायः कलम विधि (ग्राफ्टिंग) द्वारा किया जाता है, जैसे वी-ग्राफ्टिंग या साइड-ग्राफ्टिंग। बीज द्वारा प्रवर्धन कम प्रचलित है।

उत्तर (टमाटर के लिए):

i) उपयुक्त जलवायु: टमाटर की खेती के लिए समशीतोष्ण जलवायु उपयुक्त है। 20°C से 25°C तापमान तथा 60-100 सेमी वार्षिक वर्षा आदर्श है। अधिक गर्मी या पाला हानिकारक है।

ii) चार उन्नत किस्में: पूसा रूबी, पूसा गौरव, अर्का विकास, और सीओ-3।

iii) बीज की मात्रा प्रति हैक्टर: उन्नत किस्मों के लिए 400-500 ग्राम बीज प्रति हैक्टर पर्याप्त होता है।

iv) उपज प्रति हैक्टर: उचित प्रबंधन से 25-30 टन प्रति हैक्टर तक उपज प्राप्त की जा सकती है।