RBSE Class 12th 2017 Biology-SS-42-2017 Previous Year Papers
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Paper details
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| Board | RBSE |
|---|---|
| Class | Class 12th |
| Exam year | 2017 |
| Subject | Biology-SS-42-2017 |
| Resource type | Previous Year Papers |
| Category | RBSE Previous Year Question Papers |
| Website | RBSE Solution |
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RBSE Class 12th 2017 Biology-SS-42-2017
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Rajasthan Board Class 12th Biology-SS-42-2017 2017 solved Previous Year Question Papers
उच्च माध्यमिक परीक्षा, 2017
SENIOR SECONDARY EXAMINATION, 2017
जीव विज्ञान
BIOLOGY
समय : 3¼ घण्टे पूर्णांक : 56
परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :
GENERAL INSTRUCTIONS TO THE EXAMINEES :
- परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न पत्र पर नामांक अनिवार्यतः लिखें।
Candidate must write first his / her Roll No. on the question paper compulsorily. - सभी प्रश्न करने अनिवार्य हैं।
All the questions are compulsory. - प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें।
Write the answer to each question in the given answer-book only. - जिन प्रश्नों में आन्तरिक खण्ड हैं, उन सभी के उत्तर एक साथ ही लिखें।
For questions having more than one part the answers to those parts are to be written together in continuity.
SS-42-Bio. 837 [ Turn Over
खण्ड - अ / SECTION - A
प्रश्न 1. आकारिकीय एवं आनुवंशिक रूप से समान जीवों को क्या कहा जाता है? [ ]
What are the morphologically and genetically alike individuals called?
उत्तर: क्लोन (Clones)
क्लोन वे जीव हैं जो आकारिकीय (morphological) और आनुवंशिक (genetic) रूप से एक-दूसरे के समान होते हैं, जो अलैंगिक प्रजनन या कृत्रिम विधियों द्वारा उत्पन्न होते हैं।
प्रश्न 2. भ्रूणोद्भव की परिभाषा बताइये। [ ]
Define embryogenesis.
उत्तर: भ्रूणोद्भव (Embryogenesis) वह प्रक्रिया है जिसमें निषेचित अंडाणु (युग्मनज) विभाजन, विभेदन और विकास के माध्यम से एक पूर्ण भ्रूण में परिवर्तित होता है।
यह प्रक्रिया कोशिका विभाजन (cleavage), कोशिका स्तरीकरण (gastrulation) और अंग निर्माण (organogenesis) के चरणों से होकर गुजरती है।
प्रश्न 3. खीस की उपयोगिता बताइये। [ ]
Write the importance of colostrum.
उत्तर: खीस (Colostrum) माँ के दूध का पहला स्राव है, जो नवजात शिशु के लिए अत्यंत लाभदायक होता है।
इसमें प्रचुर मात्रा में प्रतिरक्षी (antibodies), विशेषकर IgA, और पोषक तत्व होते हैं, जो शिशु की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करते हैं और संक्रमण से बचाते हैं।
नोट: प्रश्न पत्र के हिन्दी व अंग्रेजी रूपान्तर में किसी प्रकार की अशुद्धि / अन्तर / विरोधाभास होने पर हिन्दी भाषा के प्रश्न को सही मानें।
If there is any error / difference / contradiction in Hindi & English versions of the question paper, the question of Hindi version should be treated valid.
| खण्ड (Section) | प्रश्न संख्या (Q. Nos.) | अंक प्रति प्रश्न (Marks per question) |
|---|---|---|
| A | 1-3 | 1 |
| B | 4-24 | 2 |
| C | 25-27 | 3 |
| D | 28-30 | 4 |
नोट: प्रश्न क्रमांक 24, 27, 28, 29 व 30 में आन्तरिक विकल्प हैं।
Question Nos. 24, 27, 28, 29 and 30 have internal choices.
SS_42-Bio. 837
4) आई वी एफ का पूरा नाम लिखिये।
Write the full form of IVF.
पूरा नाम: इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (In Vitro Fertilization)
5) किसी एक अंतर्गर्भाशयी युक्ति का नाम बताइये।
Name any one Intra uterine device.
उत्तर: कॉपर-टी (Copper-T) / लिप्पेस लूप (Lippes Loop) / सर्पिल (Spiral) — इनमें से कोई एक।
6) क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम से ग्रसित व्यक्ति का जीन प्रारूप क्या होता है?
What is the genotype of a person having Klinefelter syndrome?
जीन प्रारूप: 47, XXY (पुरुष में एक अतिरिक्त X गुणसूत्र)
7) आनुवंशिक कूट असंदिग्ध एवं विशिष्ट होता है। समझाइये।
‘Genetic code is unambiguous and specific.’ Explain.
व्याख्या: आनुवंशिक कूट असंदिग्ध (unambiguous) होता है, अर्थात प्रत्येक त्रिक (कोडॉन) केवल एक ही अमीनो अम्ल को निर्दिष्ट करता है। यह विशिष्ट (specific) भी है, क्योंकि एक ही कोडॉन कभी भी दो भिन्न अमीनो अम्लों के लिए कूटबद्ध नहीं करता। उदाहरण: UUU केवल फेनिलएलानिन को कूटबद्ध करता है, किसी अन्य अमीनो अम्ल को नहीं।
8) जैव विकास के अंगों की उपयोगिता अनुपयोगिता के सिद्धान्त का प्रतिपादन किसने किया?
Who propounded the biological evolution theory of use and disuse of organs?
उत्तर: जीन बैप्टिस्ट लैमार्क (Jean Baptiste Lamarck) ने इस सिद्धांत का प्रतिपादन किया।
9) नील क्रांति की उपयोगिता बताइये।
Mention the importance of Blue Revolution.
उपयोगिता: नील क्रांति (Blue Revolution) का उद्देश्य मत्स्य पालन (जलीय कृषि) को बढ़ावा देना है। इससे मछली उत्पादन में वृद्धि, पोषण सुरक्षा, रोजगार सृजन, और निर्यात आय में वृद्धि होती है।
10) सूर्य से आने वाली पराबैंगनी विकिरण सजीवों को किस प्रकार प्रभावित करती है?
How do ultraviolet rays coming from sun affect the living organisms?
प्रभाव: पराबैंगनी (UV) विकिरण सजीवों की त्वचा और आँखों को नुकसान पहुँचाती है। यह DNA में उत्परिवर्तन (mutation) उत्पन्न कर सकती है, जिससे त्वचा कैंसर, मोतियाबिंद, और प्रतिरक्षा तंत्र का दमन हो सकता है। यह कोशिकाओं में डाइमर (जैसे थाइमिन डाइमर) बनाकर DNA प्रतिकृति को बाधित करती है।
11) शैवाल प्रस्फुटन के दुष्प्रभाव बताइये।
What are the ill effects of Algal blooms?
दुष्प्रभाव: शैवाल प्रस्फुटन (Algal bloom) से जल में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है (यूट्रोफिकेशन), जिससे जलीय जीवों की मृत्यु होती है। कुछ शैवाल विषैले पदार्थ (toxins) उत्पन्न करते हैं, जो मनुष्यों और पशुओं के लिए हानिकारक होते हैं। इससे जल की गुणवत्ता खराब होती है और पारिस्थितिकी तंत्र असंतुलित हो जाता है।
12) पुनर्योगज DNA की परिभाषा दीजिये।
Define Recombinant DNA.
परिभाषा: पुनर्योगज DNA (Recombinant DNA) वह DNA होता है जो दो भिन्न स्रोतों (जैविक प्रजातियों) के DNA खंडों को जोड़कर कृत्रिम रूप से निर्मित किया जाता है। इसे जैव प्रौद्योगिकी में वांछित जीन को वेक्टर (जैसे प्लाज्मिड) में डालकर बनाया जाता है।
13) बीटी द्वारा उत्पादित Bt जीवविष से बेसीलस तो नहीं मरता है, जबकि कीट मर जाते हैं। क्यों?
The Bt toxin produced by Bt does not kill bacillus but kills insect. Why?
कारण: Bt विष (Cry प्रोटीन) एक प्रोटॉक्सिन (निष्क्रिय अग्रदूत) के रूप में उत्पन्न होता है। यह केवल कीटों की क्षारीय आंत (pH 9-10) में सक्रिय होता है, जहाँ यह विघटित होकर सक्रिय विष बनता है और आंत की कोशिकाओं को नष्ट करता है। बेसीलस (Bacillus thuringiensis) स्वयं इस विष के प्रति प्रतिरोधी होता है क्योंकि इसकी कोशिका में उपयुक्त रिसेप्टर नहीं होते और यह क्षारीय वातावरण में नहीं रहता।
खण्ड - ब / SECTION - B
4. शुक्राणु जनन किसे कहते है? शुक्र जनन की क्रिया का आरेखीय निरूपण कीजिये। [1+2=3]
What is spermiogenesis? Demonstrate diagrammatically the process of spermatogenesis.
शुक्राणु जनन (Spermiogenesis): यह वह प्रक्रिया है जिसमें शुक्रजनक कोशिकाओं (spermatids) से परिपक्व शुक्राणु (spermatozoa) बनते हैं। यह शुक्रजनन (spermatogenesis) का अंतिम चरण है।
शुक्रजनन की क्रिया का आरेखीय निरूपण:
(आरेख: शुक्रजनन के चरण - शुक्रजनक कोशिका → प्राथमिक शुक्राणुजन कोशिका → द्वितीयक शुक्राणुजन कोशिका → शुक्रजनक कोशिका → शुक्राणु)
Explanation: Spermiogenesis is the transformation of spermatids into mature spermatozoa. The diagram shows the sequence: spermatogonium → primary spermatocyte → secondary spermatocyte → spermatid → spermatozoon.
5. अनुलेखन किसे कहते हैं? डी एन ए में अनुलेखन ईकाई के भाग क्या है? अनुलेखन क्रिया में इनका योगदान क्या है? [1+1+1=3]
What is transcription? What are the different parts of a DNA transcription unit? What is their role in the process of transcription?
अनुलेखन (Transcription): यह वह प्रक्रिया है जिसमें DNA के एक खंड से mRNA का संश्लेषण होता है। इसमें DNA का एक स्ट्रैंड टेम्पलेट के रूप में कार्य करता है।
DNA अनुलेखन इकाई के भाग:
- प्रवर्तक (Promoter): यह वह क्षेत्र है जहाँ RNA पॉलीमरेज़ जुड़ता है और अनुलेखन शुरू करता है।
- संरचनात्मक जीन (Structural Gene): यह वह क्षेत्र है जिसका अनुलेखन होता है और mRNA बनता है।
- समापक (Terminator): यह वह क्षेत्र है जहाँ अनुलेखन समाप्त होता है।
इनका योगदान: प्रवर्तक अनुलेखन की शुरुआत को नियंत्रित करता है, संरचनात्मक जीन से mRNA बनता है, और समापक अनुलेखन को रोकता है।
6. आकृति विज्ञान (आकारिकी) आधार पर जैव विकास की क्रिया उदाहरण सहित समझाइये। [2]
With the help of examples explain the process of biological evolution on the basis of morphological evidences.
आकृति विज्ञान आधार पर जैव विकास: आकृति विज्ञान (morphology) के आधार पर जीवों की संरचनात्मक समानताएँ और भिन्नताएँ विकास को दर्शाती हैं।
उदाहरण:
- समजात अंग (Homologous organs): मनुष्य का हाथ, चमगादड़ का पंख, और व्हेल का फ्लिपर - इनकी संरचना समान है लेकिन कार्य भिन्न हैं। यह दर्शाता है कि ये एक सामान्य पूर्वज से विकसित हुए हैं।
- समरूप अंग (Analogous organs): पक्षी का पंख और कीट का पंख - इनकी संरचना भिन्न है लेकिन कार्य समान (उड़ना) है। यह दर्शाता है कि ये अलग-अलग पूर्वजों से विकसित हुए हैं।
Explanation: Morphological evidence shows evolution through homologous structures (same structure, different function) and analogous structures (different structure, same function).
7. पादप प्रजनन के मुख्य चरण क्रमश: लिखिये। इसकी उपयोगिता बताइये। [1+1=2]
Write down in sequence the main steps of plant breeding. What is its importance?
पादप प्रजनन के मुख्य चरण (क्रमशः):
- वांछित लक्षणों वाले पादपों का चयन (Selection of plants with desired traits)
- चयनित पादपों का संकरण (Hybridization of selected plants)
- संकर पादपों का मूल्यांकन और चयन (Evaluation and selection of hybrid plants)
- नई किस्मों का परीक्षण और प्रसार (Testing and multiplication of new varieties)
उपयोगिता: पादप प्रजनन से फसलों की उपज, रोग प्रतिरोधक क्षमता, और गुणवत्ता में सुधार होता है, जिससे खाद्य सुरक्षा बढ़ती है।
8. भूमि की उत्पादकता बढ़ाने के लिए आप किसान को क्या सलाह देंगे? समझाइये। [2]
What suggestion will you give a farmer to increase the productivity of his field? Explain.
सुझाव:
- जैविक खाद का उपयोग: गोबर की खाद, कम्पोस्ट, और हरी खाद का प्रयोग करें।
- फसल चक्र: एक ही फसल बार-बार न लगाएँ, बल्कि फलियांदार फसलों को शामिल करें।
- सिंचाई प्रबंधन: ड्रिप सिंचाई या स्प्रिंकलर का उपयोग करें।
- उन्नत बीज: उच्च उपज देने वाली किस्मों का चयन करें।
- कीट नियंत्रण: एकीकृत कीट प्रबंधन (IPM) अपनाएँ।
Explanation: These methods improve soil fertility, water efficiency, and crop yield, leading to higher productivity.
9. औद्योगिक उत्पादों में सूक्ष्म जीवों की भूमिका किण्वित पेय पदार्थ के संदर्भ में समझाइये। [2]
With reference to fermented beverages explain the role of microbes in Industrial products.
किण्वित पेय पदार्थों में सूक्ष्म जीवों की भूमिका:
- बीयर: Saccharomyces cerevisiae (यीस्ट) का उपयोग जौ के माल्ट को किण्वित करके बीयर बनाने में किया जाता है।
- वाइन: अंगूर के रस को Saccharomyces cerevisiae द्वारा किण्वित करके वाइन बनाई जाती है।
- व्हिस्की, रम: अनाज या गन्ने के रस को यीस्ट द्वारा किण्वित करके आसवन द्वारा ये पेय बनाए जाते हैं।
Explanation: Microbes like yeast convert sugars into alcohol and carbon dioxide through fermentation, which is essential for producing alcoholic beverages.
10. पारितंत्र में कार्बन चक्र का वर्णन कीजिये। कार्बन चक्र का आरेखी निरूपण बनाइये। [2+2=4]
Explain carbon cycle in ecosystem. Give a linear diagram of carbon cycle.
कार्बन चक्र: पारितंत्र में कार्बन विभिन्न रूपों में चक्रित होता है। वायुमंडल में CO₂ पौधों द्वारा प्रकाश-संश्लेषण में ग्रहण की जाती है। पौधों का उपभोग करने वाले जीवों में कार्बन स्थानांतरित होता है। श्वसन, अपघटन, और जीवाश्म ईंधन के दहन से CO₂ वापस वायुमंडल में आती है।
कार्बन चक्र का रैखिक आरेख:
वायुमंडलीय CO₂ → (प्रकाश-संश्लेषण) → पौधे → (उपभोग) → जंतु → (श्वसन/अपघटन) → वायुमंडलीय CO₂
Explanation: The carbon cycle involves the movement of carbon between the atmosphere, plants, animals, and back through respiration, decomposition, and combustion.
SS_42-Bio. 837
खण्ड - B (SECTION - B)
22. अनुकूलन किसे कहते हैं? कार्यिकीय अनुकूलन को तुंगता बीमारी के उदाहरण से समझाइए। [2]
What is adaptation? Explain physiological adaptation taking an example of altitude illness.
अनुकूलन (Adaptation): अनुकूलन वह प्रक्रिया है जिसमें जीव अपने पर्यावरण में बेहतर ढंग से जीवित रहने और प्रजनन करने के लिए अपने शरीर, व्यवहार या कार्यप्रणाली में परिवर्तन करता है।
कार्यिकीय अनुकूलन (Physiological Adaptation): यह शरीर के आंतरिक कार्यों में होने वाला अनुकूलन है।
तुंगता बीमारी (Altitude Sickness) का उदाहरण: जब कोई व्यक्ति समुद्र तल से ऊँचाई पर जाता है, तो वहाँ ऑक्सीजन का स्तर कम होता है। प्रारंभ में, शरीर में ऑक्सीजन की कमी के कारण सिरदर्द, थकान और सांस लेने में कठिनाई होती है (तुंगता बीमारी)। लेकिन कुछ दिनों में शरीर कार्यिकीय अनुकूलन करता है—लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या बढ़ जाती है, हृदय गति बढ़ जाती है, और फेफड़ों की क्षमता बढ़ जाती है, जिससे शरीर कम ऑक्सीजन में भी सामान्य रूप से कार्य करने लगता है। यह कार्यिकीय अनुकूलन का एक उदाहरण है।
23. समष्टि की कोई चार विशेषताएं बताइये। सहपरोपकारिता को विस्तार से समझाइये। [1+1=2]
Give four attributes of a population. Explain in detail the process of Mutualism.
समष्टि (Population) की चार विशेषताएं:
- जन्म दर (Natality): किसी समष्टि में नए व्यक्तियों के जन्म की दर।
- मृत्यु दर (Mortality): किसी समष्टि में व्यक्तियों की मृत्यु की दर।
- आयु संरचना (Age Structure): समष्टि में विभिन्न आयु वर्गों (पूर्व-प्रजनन, प्रजनन, प्रजननोत्तर) में व्यक्तियों का वितरण।
- जनसंख्या घनत्व (Population Density): प्रति इकाई क्षेत्र या आयतन में व्यक्तियों की संख्या।
सहपरोपकारिता (Mutualism): यह एक प्रकार का अंतर-जातीय संबंध है जिसमें दोनों सहभागी जीवों को लाभ होता है। यह संबंध अनिवार्य या ऐच्छिक हो सकता है। उदाहरण: लाइकेन में कवक और शैवाल का सहजीवी संबंध—कवक शैवाल को आश्रय और खनिज प्रदान करता है, जबकि शैवाल प्रकाश-संश्लेषण द्वारा कवक के लिए भोजन बनाता है।
24. अपघटन किसे कहते हैं? इसके चरण लिखिये। एक स्थलीय पारितंत्र में अपघटन चक्र का आरेखी निरूपण कीजिये। [1+1+2=4]
What is decomposition? Write down its steps. Give a diagrammatic representation of decomposition cycle in a terrestrial ecosystem.
अपघटन (Decomposition): यह वह प्रक्रिया है जिसमें मृत कार्बनिक पदार्थ (जैसे पत्तियां, शाखाएं, मृत जीव) सूक्ष्मजीवों (जैसे जीवाणु और कवक) द्वारा सरल अकार्बनिक पदार्थों में टूट जाते हैं।
अपघटन के चरण:
- खंडीकरण (Fragmentation): मृत कार्बनिक पदार्थ का छोटे-छोटे टुकड़ों में टूटना (जैसे केंचुआ द्वारा)।
- लीचिंग (Leaching): पानी के साथ घुलनशील पोषक तत्वों का मिट्टी में नीचे की ओर जाना।
- अपचय (Catabolism): सूक्ष्मजीवों द्वारा एंजाइमों की सहायता से कार्बनिक पदार्थों का सरल यौगिकों में विघटन।
- खनिजीकरण (Mineralization): सरल कार्बनिक यौगिकों का अकार्बनिक पोषक तत्वों (जैसे नाइट्रेट, फॉस्फेट) में रूपांतरण।
स्थलीय पारितंत्र में अपघटन चक्र का आरेखीय निरूपण:
मृत कार्बनिक पदार्थ (पत्तियां, शाखाएं)
↓
खंडीकरण (केंचुआ, मिलीपीड)
↓
लीचिंग (पानी द्वारा)
↓
अपचय (जीवाणु, कवक)
↓
खनिजीकरण
↓
अकार्बनिक पोषक तत्व (N, P, K, आदि)
↓
पौधों द्वारा पुनः ग्रहण
25. जैव विविधता की क्षति के चार कारण बताइये। विदेशी जातियों के स्थानीय रूप से स्थापन के फलस्वरूप स्थानीय जातियों पर दुष्प्रभाव समझाइये। [1+1=2]
Give four causes of loss in biodiversity. Explain the adverse effects on native species on invasion of Alien species in a habitat.
जैव विविधता की क्षति के चार कारण:
- आवास का विनाश (Habitat Destruction): वनों की कटाई, शहरीकरण और कृषि विस्तार।
- अत्यधिक दोहन (Overexploitation): शिकार, मछली पकड़ना और वन्यजीवों का अवैध व्यापार।
- प्रदूषण (Pollution): जल, वायु और मृदा प्रदूषण।
- विदेशी जातियों का आक्रमण (Invasion of Alien Species): विदेशी प्रजातियों का स्थानीय पारितंत्र में प्रवेश।
विदेशी जातियों के स्थानीय रूप से स्थापन के दुष्प्रभाव: विदेशी जातियाँ स्थानीय जातियों के साथ भोजन, स्थान और अन्य संसाधनों के लिए प्रतिस्पर्धा करती हैं। वे स्थानीय जातियों का शिकार कर सकती हैं या उनमें रोग फैला सकती हैं। इससे स्थानीय जातियों की संख्या घट जाती है और कई बार वे विलुप्त हो जाती हैं। उदाहरण: नीलगिरी (Eucalyptus) का भारत में आक्रमण।
अथवा (OR)
जैवविविधता का संरक्षण कितनी प्रकार से किया जाता है? किसी जीव को विलोपन के संकट से बचाने के लिये किस प्रकार से संरक्षण करेंगे? [2]
How is conservation of biodiversity done? How will we conserve an animal to save it from extinction.
जैवविविधता का संरक्षण दो प्रकार से किया जाता है:
- स्थान-स्थित संरक्षण (In-situ Conservation): जीवों को उनके प्राकृतिक आवास में संरक्षित करना, जैसे राष्ट्रीय उद्यान, अभयारण्य, बायोस्फीयर रिजर्व।
- स्थान-बाह्य संरक्षण (Ex-situ Conservation): जीवों को उनके प्राकृतिक आवास से बाहर संरक्षित करना, जैसे चिड़ियाघर, बीज बैंक, जीन बैंक।
किसी जीव को विलोपन से बचाने के लिए संरक्षण: किसी जीव को विलोपन के संकट से बचाने के लिए हम निम्नलिखित कदम उठाएंगे:
- उसके प्राकृतिक आवास की रक्षा करना और उसे पुनर्स्थापित करना।
- अवैध शिकार और व्यापार पर रोक लगाना।
- प्रजनन कार्यक्रम चलाना (जैसे कैप्टिव ब्रीडिंग)।
- स्थानीय समुदायों को जागरूक करना और उन्हें संरक्षण में शामिल करना।
खण्ड - C (SECTION - C)
26. पी सी आर तकनीक का उपयोग करते हुए लाभकारी जीन का प्रवर्धन किस प्रकार किया जाता है? चित्र की सहायता से समझाइये। [2+1=3]
How is the amplification of gene done using the technique of PCR? Explain with the help of diagram.
PCR (पॉलीमरेज़ चेन रिएक्शन) तकनीक: यह एक इन-विट्रो तकनीक है जिसका उपयोग किसी विशिष्ट DNA अनुक्रम (जीन) की लाखों प्रतियाँ बनाने के लिए किया जाता है।
प्रवर्धन की प्रक्रिया:
- विकृतीकरण (Denaturation): DNA को 94-98°C तक गर्म किया जाता है, जिससे दोहरी कुंडली खुल जाती है और दो एकल स्ट्रैंड बनते हैं।
- एनीलिंग (Annealing): तापमान को 50-65°C तक कम किया जाता है, जिससे प्राइमर (छोटे DNA टुकड़े) लक्ष्य DNA अनुक्रम से जुड़ जाते हैं।
- विस्तारण (Extension): तापमान को 72°C तक बढ़ाया जाता है, जहाँ Taq पॉलीमरेज़ एंजाइम प्राइमर से शुरू करके नए DNA स्ट्रैंड का संश्लेषण करता है।
इन तीन चरणों को 25-35 बार दोहराया जाता है, जिससे DNA की संख्या दोगुनी होती जाती है और कुछ ही घंटों में लाखों प्रतियाँ बन जाती हैं।
चित्र (आरेखीय निरूपण):
चक्र 1: DNA → विकृतीकरण → एनीलिंग → विस्तारण → 2 DNA चक्र 2: 2 DNA → विकृतीकरण → एनीलिंग → विस्तारण → 4 DNA चक्र 3: 4 DNA → विकृतीकरण → एनीलिंग → विस्तारण → 8 DNA ... चक्र n: 2^n DNA प्रतियाँ
27. चिकित्सा में जैव प्रौद्योगिकी के उपयोग का क्या महत्व है? जैव प्रौद्योगिकी मानव इन्सुलिन के उत्पादन में किस प्रकार सहायक है? [1+2=3]
What is the importance of biotechnology application in medicine? How does biotechnology help in the production of human insulin.
चिकित्सा में जैव प्रौद्योगिकी का महत्व: जैव प्रौद्योगिकी ने चिकित्सा क्षेत्र में क्रांति ला दी है। इसके उपयोग से मानव इंसुलिन, वृद्धि हार्मोन, टीके, एंटीबायोटिक्स और जीन थेरेपी जैसे उत्पाद विकसित किए गए हैं। यह आनुवंशिक रोगों के निदान और उपचार में भी सहायक है।
मानव इंसुलिन के उत्पादन में जैव प्रौद्योगिकी की भूमिका:
-
खण्ड - द (Section - D)
27. डी एन ए एक आनुवंशिकी पदार्थ है।' इसकी पुष्टि हर्ष एवं चेस के प्रयोग द्वारा कीजिये। प्रयोग का आरेखित चित्र बनाइये। [2+½=3]
हर्ष-चेस प्रयोग (1952): अल्फ्रेड हर्षे और मार्था चेस ने बैक्टीरियोफेज (विषाणु) का उपयोग करके यह सिद्ध किया कि DNA ही आनुवंशिक पदार्थ है।
- प्रयोग विधि: उन्होंने फेज के प्रोटीन को 35S (रेडियोधर्मी सल्फर) और DNA को 32P (रेडियोधर्मी फॉस्फोरस) से लेबल किया।
- संक्रमण: लेबल किए गए फेज को E. coli बैक्टीरिया से संक्रमित किया गया।
- पृथक्करण: ब्लेंडर में हिलाकर फेज के खोल को बैक्टीरिया से अलग किया गया।
- परिणाम: 35S (प्रोटीन) बैक्टीरिया के बाहर पाया गया, जबकि 32P (DNA) बैक्टीरिया के अंदर पाया गया। नई पीढ़ी के फेज में भी 32P पाया गया।
निष्कर्ष: DNA ही आनुवंशिक पदार्थ है, प्रोटीन नहीं।
(प्रयोग का आरेखित चित्र: फेज को बैक्टीरिया से जुड़ा, DNA को अंदर प्रवेश करता, और प्रोटीन खोल को बाहर दिखाते हुए रेखाचित्र बनाएं।)
अथवा
“डी एन ए का अर्ध संरक्षी प्रतिकृतियन होता है। मैथूमेसेल्सन व फ्रेंकलिन स्टाल के प्रयोग द्वारा इसकी पुष्टि कीजिये। प्रयोग का आरेखी चित्र बनाइये।
मेसेल्सन-स्टाल प्रयोग (1958): मैथ्यू मेसेल्सन और फ्रैंकलिन स्टाल ने E. coli में DNA प्रतिकृति का अध्ययन किया।
- लेबलिंग: बैक्टीरिया को 15NH4Cl (भारी नाइट्रोजन) युक्त माध्यम में उगाया गया, जिससे DNA भारी हो गया।
- स्थानांतरण: फिर बैक्टीरिया को 14NH4Cl (हल्का नाइट्रोजन) माध्यम में स्थानांतरित किया गया।
- सेंट्रीफ्यूजेशन: विभिन्न पीढ़ियों (0, 1, 2) के DNA का सीज़ियम क्लोराइड ग्रेडिएंट में सेंट्रीफ्यूजेशन किया गया।
- परिणाम: पहली पीढ़ी में एक ही बैंड (संकर DNA) मिला, दूसरी पीढ़ी में दो बैंड (एक संकर, एक हल्का) मिले।
निष्कर्ष: DNA प्रतिकृति अर्ध-संरक्षी है – प्रत्येक नए DNA अणु में एक पुराना और एक नया स्ट्रैंड होता है।
(प्रयोग का आरेखित चित्र: विभिन्न पीढ़ियों के DNA बैंड को सेंट्रीफ्यूज ट्यूब में दिखाते हुए रेखाचित्र बनाएं।)
28. मादा युग्मोद्मिद् के विकास की क्रिया विस्तार से समझाइये। इसका चित्र बनाइये। [3+½=4]
मादा युग्मोद्भिद् (भ्रूणकोष) का विकास: यह बीजांड के भ्रूणकोष में होता है।
- प्रारंभिक अवस्था: बीजांड के न्यूसेलस में एक द्विगुणित कोशिका (मेगास्पोर मातृ कोशिका) अर्धसूत्री विभाजन द्वारा चार अगुणित मेगास्पोर बनाती है।
- कार्यात्मक मेगास्पोर: तीन मेगास्पोर नष्ट हो जाते हैं, केवल एक (चालाज़ल सिरे पर) कार्यात्मक रहता है।
- तीन समसूत्री विभाजन: कार्यात्मक मेगास्पोर तीन बार समसूत्री विभाजन करके 8 अगुणित केंद्रक बनाता है।
- कोशिका विभाजन: ये 8 केंद्रक एक विशिष्ट व्यवस्था में आते हैं:
- अंड तंत्र (Egg apparatus): माइक्रोपाइलर सिरे पर 3 केंद्रक – एक अंड कोशिका और दो सहायक कोशिकाएँ।
- प्रतिकेंद्रक (Antipodals): चालाज़ल सिरे पर 3 केंद्रक।
- द्वितीयक केंद्रक (Secondary nucleus): केंद्र में 2 केंद्रक (ध्रुवीय केंद्रक) मिलकर एक द्विगुणित केंद्रक बनाते हैं।
इस प्रकार 8-केंद्रकीय, 7-कोशिकीय भ्रूणकोष (मादा युग्मोद्भिद्) बनता है।
(चित्र: भ्रूणकोष का नामांकित चित्र बनाएं जिसमें अंड कोशिका, सहायक कोशिकाएँ, प्रतिकेंद्रक और द्वितीयक केंद्रक दिखाएं।)
अथवा
लघु बीजाणुधानी की संरचना समझाते हुए इसके विभिन्न स्तरों के कार्य बताइये। भित्ति पत्तों को प्रदर्शित करते हुए एक लघुबीजाणुधानी का नामांकित चित्र बनाइये।
लघुबीजाणुधानी (माइक्रोस्पोरैंगियम) की संरचना: यह परागकोष का भाग है। अनुप्रस्थ काट में निम्नलिखित स्तर दिखते हैं:
- एपिडर्मिस (बाह्यत्वचा): सबसे बाहरी सुरक्षात्मक स्तर।
- एंडोथीशियम (अंतस्त्वचा): कोशिकाओं में रेशेदार मोटाई; परागकोष के खुलने (डिहिसेंस) में सहायक।
- मध्य स्तर (Middle layers): 1-3 कोशिका मोटी; पोषण प्रदान करती है और बाद में नष्ट हो जाती है।
- टेपीटम (अस्तर): सबसे भीतरी स्तर; पॉलीप्लॉइड कोशिकाएँ; परागकणों को पोषण प्रदान करती हैं और स्पोरोपोलेनिन (बाहरी भित्ति) के निर्माण में सहायक।
- लघुबीजाणु कोशिकाएँ (Microspore mother cells): केंद्र में स्थित; अर्धसूत्री विभाजन द्वारा चार अगुणित लघुबीजाणु (परागकण) बनाती हैं।
(चित्र: लघुबीजाणुधानी का अनुप्रस्थ काट दिखाते हुए नामांकित चित्र बनाएं जिसमें एपिडर्मिस, एंडोथीशियम, मध्य स्तर, टेपीटम और लघुबीजाणु कोशिकाएँ दिखाई दें।)
29. निम्न बिन्दुओं के आधार पर एड्स रोग का वर्णन कीजिये - [½+½+1+1+1=4]
i) रोगजनक का नाम
ii) रोग की पुष्टि हेतु परीक्षण
iii) रोग के प्रमुख लक्षण
iv) रोकथाम के उपाय
v) पश्च विषाणु की प्रतिकृतियन का चित्र- रोगजनक का नाम: ह्यूमन इम्यूनोडेफिशिएंसी वायरस (HIV) – एक रेट्रोवायरस।
- रोग की पुष्टि हेतु परीक्षण: ELISA (एंजाइम-लिंक्ड इम्यूनोसॉर्बेंट एसे) परीक्षण; पुष्टि के लिए वेस्टर्न ब्लॉट परीक्षण।
- रोग के प्रमुख लक्षण:
- प्रारंभिक: बुखार, गले में खराश, लिम्फ नोड्स में सूजन।
- बाद में: वजन कम होना, बार-बार संक्रमण, टी-लिम्फोसाइट (CD4) की संख्या में कमी।
- अंतिम चरण (एड्स): अवसरवादी संक्रमण (जैसे निमोनिया, टीबी) और कैंसर।
- रोकथाम के उपाय:
- सुरक्षित यौन संबंध (कंडोम का उपयोग)।
- संक्रमित रक्त/सुइयों से बचाव।
- गर्भवती महिलाओं की जांच और एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी।
- जागरूकता और शिक्षा।
- पश्च विषाणु की प्रतिकृतियन का चित्र: (रेट्रोवायरस प्रतिकृति चक्र का रेखाचित्र बनाएं: संलग्नता → प्रवेश → रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन → एकीकरण → प्रतिलेखन → अनुवाद → संयोजन → बाहर निकलना।)
अथवा
(प्रश्न का दूसरा भाग उपलब्ध नहीं है।)
प्रश्न 30
निम्न बिन्दुओं के आधार पर टाइफाइड रोग का वर्णन कीजिये -
- रोगजनक का नाम
- रोग की पुष्टि हेतु परीक्षण
- संक्रमण का तरीका
- रोग के प्रमुख लक्षण
- प्रतिरक्षी अणु की संरचना का चित्र
अथवा
Describe AIDS disease on the basis of following points -
- Name of pathogen
- Test for confirmation of disease
- Main symptoms of disease
- Ways of prevention
- Diagram of replication of retrovirus.
OR
Describe Typhoid disease on the basis of following points -
- Name of pathogen
- Test for confirmation of disease
- Ways of infection
- Main symptoms of disease
- Diagram showing structure of an antibody molecule
टाइफाइड रोग का वर्णन
- रोगजनक का नाम: Salmonella typhi (जीवाणु)
- रोग की पुष्टि हेतु परीक्षण: विडाल परीक्षण (Widal test) – यह रक्त में टाइफाइड के प्रति एंटीबॉडी की उपस्थिति की जाँच करता है।
- संक्रमण का तरीका: दूषित भोजन और पानी के सेवन से (मल-मौखिक मार्ग)।
- रोग के प्रमुख लक्षण: तेज बुखार (जो धीरे-धीरे बढ़ता है), सिरदर्द, पेट दर्द, कब्ज या दस्त, और कमजोरी।
- प्रतिरक्षी अणु की संरचना का चित्र: एंटीबॉडी (IgG) Y-आकार का होता है, जिसमें दो भारी श्रृंखलाएँ (heavy chains) और दो हल्की श्रृंखलाएँ (light chains) होती हैं। इसमें परिवर्तनशील क्षेत्र (variable region) एंटीजन से जुड़ता है, और स्थिर क्षेत्र (constant region) प्रतिरक्षा कोशिकाओं से संपर्क करता है।
AIDS Disease Description
- Name of pathogen: Human Immunodeficiency Virus (HIV) – a retrovirus.
- Test for confirmation: ELISA (Enzyme-Linked Immunosorbent Assay) followed by Western blot for confirmation.
- Main symptoms: Persistent fever, weight loss, chronic diarrhea, opportunistic infections (e.g., tuberculosis, pneumonia), and weakened immune system.
- Ways of prevention: Use of condoms, avoiding sharing needles, screening blood before transfusion, and antiretroviral therapy (ART) to reduce viral load.
- Diagram of replication of retrovirus: HIV attaches to host cell → reverse transcriptase converts RNA to DNA → viral DNA integrates into host genome → transcription and translation produce new viral proteins → assembly and budding of new virus particles.
प्रश्न 31
मेण्डल के एकल संकर प्रयोग को समझाइये। इस प्रयोग के आधार पर प्रतिपादित नियम लिखिये। प्रयोग का पनेटवर्ग का उपयोग करते हुए चित्र बनाइये। [2+2+4=8]
अथवा
सहप्रभाविता किसे कहते है? इसे मानव में रूधिर वर्ग निर्धारण के द्वारा समझाइये। तालिका द्वारा मानव जनसंख्या में रूधिर वर्गों का आनुवंशिक आधार दर्शाइये।
Explain Mendel's monohybridization experiment. Write the rules proposed on the basis of this experiment. Draw its diagram using punnet square.
OR
What is co-dominance. Explain it through determination of blood groups in human. Draw a table showing the genetic basis of blood groups in Human population.
मेण्डल का एकल संकर प्रयोग
प्रयोग: मेण्डल ने मटर के पौधों पर एकल संकर प्रयोग किया, जिसमें उन्होंने एक ही लक्षण (जैसे तने की ऊँचाई) के लिए दो विपरीत जातियों (लंबा और बौना) के बीच संकरण कराया।
- F1 पीढ़ी: सभी पौधे लंबे थे (प्रभावी लक्षण)।
- F2 पीढ़ी: स्व-परागण से 3:1 का अनुपात (लंबा : बौना) प्राप्त हुआ।
प्रतिपादित नियम: पृथक्करण का नियम (Law of Segregation) – प्रत्येक लक्षण के लिए दो कारक (एलील) होते हैं, जो युग्मक निर्माण के समय पृथक हो जाते हैं।
पनेट वर्ग (Punnett Square):
♂ / ♀ T t T TT (लंबा) Tt (लंबा) t Tt (लंबा) tt (बौना) परिणाम: जीनोटाइप अनुपात 1:2:1 (TT:Tt:tt) और फेनोटाइप अनुपात 3:1 (लंबा:बौना)।
सहप्रभाविता (Co-dominance) और रूधिर वर्ग
सहप्रभाविता: यह एक आनुवंशिक स्थिति है जिसमें दोनों एलील (जीन के रूप) एक साथ व्यक्त होते हैं, और कोई भी दूसरे पर प्रभावी नहीं होता। उदाहरण: मानव में AB रूधिर वर्ग।
मानव रूधिर वर्ग निर्धारण: ABO रूधिर वर्ग तीन एलील – IA, IB, और i – द्वारा नियंत्रित होता है। IA और IB सहप्रभावी हैं, जबकि i अप्रभावी है।
तालिका: मानव जनसंख्या में रूधिर वर्गों का आनुवंशिक आधार
रूधिर वर्ग जीनोटाइप एंटीजन (लाल रक्त कोशिकाओं पर) एंटीबॉडी (प्लाज्मा में) A IAIA या IAi A anti-B B IBIB या IBi B anti-A AB IAIB A और B (सहप्रभाविता) कोई नहीं O ii कोई नहीं anti-A और anti-B स्पष्टीकरण: AB वर्ग में IA और IB दोनों एलील एक साथ व्यक्त होते हैं, जिससे लाल रक्त कोशिकाओं पर A और B दोनों एंटीजन पाए जाते हैं – यह सहप्रभाविता का उदाहरण है।