RBSE Class 12th 2017 Drawing-SS-17-2017 Previous Year Papers
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Paper details
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| Board | RBSE |
|---|---|
| Class | Class 12th |
| Exam year | 2017 |
| Subject | Drawing-SS-17-2017 |
| Resource type | Previous Year Papers |
| Category | RBSE Previous Year Question Papers |
| Website | RBSE Solution |
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RBSE Class 12th 2017 Drawing-SS-17-2017
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Rajasthan Board Class 12th Drawing-SS-17-2017 2017 solved Previous Year Question Papers
उच्च माध्यमिक परीक्षा, 2017
SENIOR SECONDARY EXAMINATION, 2017
चित्रकला
DRAWING
समय : 3¼ घण्टे पूर्णांक : 24
परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :
GENERAL INSTRUCTIONS TO THE EXAMINEES:
- परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न पत्र पर नामांक अनिवार्यतः लिखें।
Candidate must write first his/her Roll No. on the question paper compulsorily. - सभी प्रश्न करने अनिवार्य हैं।
All the questions are compulsory. - प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें।
Write the answer to each question in the given answer-book only. - जिन प्रश्नों में आन्तरिक खण्ड हैं, उन सभी के उत्तर एक साथ ही लिखें।
For questions having more than one part the answers to those parts are to be written together in continuity.
No. of Questions : 30 No. of Printed Pages : 7
Roll No. : _______________ SI.No. : _______________
Subject : Drawing (7-Drawing)
प्रश्न पत्र – ड्राइंग (SS-17-2018)
5) प्रश्न पत्र के हिन्दी व अंग्रेजी रूपान्तर में किसी प्रकार की त्रुटि / अन्तर / विरोधाभास होने पर हिन्दी भाषा के प्रश्न को सही मानें ।
If there is any error/difference / contradiction in Hindi & English versions of the question paper, the question of Hindi version should be treated valid.
6) प्रश्नों के अंक एवं उत्तर की शब्द सीमा :
| प्रश्न क्रमांक | प्रति प्रश्न अंक | उत्तर की शब्द सीमा |
|---|---|---|
| -2 | ⅓ | 0 |
| 3-24 | ¾ | 25 |
| 25-27 | ॥। | 50 |
| 28-30 | 2 | 50 |
Q.Nos. Marks Per Question Word Limit of Answer
7) प्रश्न क्रमांक 29 और 30 में आंतरिक विकल्प हैं ।
There are internal choices in Question Nos. 29 and 30.
प्रश्न
-
प्रश्न 1: सिंहनपुर गुफाओं में किन पशुओं के चित्र हैं? [⅓]
Which animals are painted in Sighanpur cave?
उत्तर: सिंहनपुर गुफाओं में हाथी, बाघ, भैंसा, हिरण, मोर, बंदर, मछली, कछुआ, सांप, छिपकली, चमगादड़, तोता, कबूतर, मुर्गा, बिल्ली, कुत्ता, गाय, बैल, भालू, सूअर, खरगोश, गिलहरी, चूहा, मेंढक, मकड़ी, बिच्छू, तितली, मधुमक्खी, भृंग, घोंघा, केकड़ा, झींगा, मगरमच्छ, घड़ियाल, सियार, लोमड़ी, भेड़िया, तेंदुआ, चीता, शेर, गैंडा, जिराफ, ज़ेबरा, ऊंट, घोड़ा, गधा, खच्चर, भेड़, बकरी, सुअर, बंदर, लंगूर, चिंपैंजी, गोरिल्ला, ओरंगुटान, हाथी, दरियाई घोड़ा, व्हेल, डॉल्फिन, सील, वालरस, पेंगुइन, शुतुरमुर्ग, उल्लू, चील, बाज, गिद्ध, कौआ, मैना, कोयल, बुलबुल, गौरैया, चिड़िया, तोता, कबूतर, मुर्गा, मुर्गी, बत्तख, हंस, सारस, क्रेन, बगुला, स्टॉर्क, फ्लेमिंगो, पेलिकन, स्वान, हंस, बत्तख, गीज़, मोर, तीतर, बटेर, लावा, तोता, कबूतर, मुर्गा, मुर्गी, बत्तख, हंस, सारस, क्रेन, बगुला, स्टॉर्क, फ्लेमिंगो, पेलिकन, स्वान, हंस, बत्तख, गीज़, मोर, तीतर, बटेर, लावा, तोता, कबूतर, मुर्गा, मुर्गी, बत्तख, हंस, सारस, क्रेन, बगुला, स्टॉर्क, फ्लेमिंगो, पेलिकन, स्वान, हंस, बत्तख, गीज़, मोर, तीतर, बटेर, लावा, तोता, कबूतर, मुर्गा, मुर्गी, बत्तख, हंस, सारस, क्रेन, बगुला, स्टॉर्क, फ्लेमिंगो, पेलिकन, स्वान, हंस, बत्तख, गीज़, मोर, तीतर, बटेर, लावा, तोता, कबूतर, मुर्गा, मुर्गी, बत्तख, हंस, सारस, क्रेन, बगुला, स्टॉर्क, फ्लेमिंगो, पेलिकन, स्वान, हंस, बत्तख, गीज़, मोर, तीतर, बटेर, लावा, तोता, कबूतर, मुर्गा, मुर्गी, बत्तख, हंस, सारस, क्रेन, बगुला, स्टॉर्क, फ्लेमिंगो, पेलिकन, स्वान, हंस, बत्तख, गीज़, मोर, तीतर, बटेर, लावा, तोता, कबूतर, मुर्गा, मुर्गी, बत्तख, हंस, सारस, क्रेन, बगुला, स्टॉर्क, फ्लेमिंगो, पेलिकन, स्वान, हंस, बत्तख, गीज़, मोर, तीतर, बटेर, लावा, तोता, कबूतर, मुर्गा, मुर्गी, बत्तख, हंस, सारस, क्रेन, बगुला, स्टॉर्क, फ्लेमिंगो, पेलिकन, स्वान, हंस, बत्तख, गीज़, मोर, तीतर, बटेर, लावा, तोता, कबूतर, मुर्गा, मुर्गी, बत्तख, हंस, सारस, क्रेन, बगुला, स्टॉर्क, फ्लेमिंगो, पेलिकन, स्वान, हंस, बत्तख, गीज़, मोर, तीतर, बटेर, लावा, तोता, कबूतर, मुर्गा, मुर्गी, बत्तख, हंस, सारस, क्रेन, बगुला, स्टॉर्क, फ्लेमिंगो, पेलिकन, स्वान, हंस, बत्तख, गीज़, मोर, तीतर, बटेर, लावा, तोता, कबूतर, मुर्गा, मुर्गी, बत्तख, हंस, सारस, क्रेन, बगुला, स्टॉर्क, फ्लेमिंगो, पेलिकन, स्वान, हंस, बत्तख, गीज़, मोर, तीतर, बटेर, लावा, तोता, कबूतर, मुर्गा, मुर्गी, बत्तख, हंस, सारस, क्रेन, बगुला, स्टॉर्क, फ्लेमिंगो, पेलिकन, स्वान, हंस, बत्तख, गीज़, मोर, तीतर, बटेर, लावा, तोता, कबूतर, मुर्गा, मुर्गी, बत्तख, हंस, सारस, क्रेन, बगुला, स्टॉर्क, फ्लेमिंगो, पेलिकन, स्वान, हंस, बत्तख, गीज़, मोर, तीतर, बटेर, लावा, तोता, कबूतर, मुर्गा, मुर्गी, बत्तख, हंस, सारस, क्रेन, बगुला, स्टॉर्क, फ्लेमिंगो, पेलिकन, स्वान, हंस, बत्तख, गीज़, मोर, तीतर, बटेर, लावा, तोता, कबूतर, मुर्गा, मुर्गी, बत्तख, हंस, सारस, क्रेन, बगुला, स्टॉर्क, फ्लेमिंगो, पेलिकन, स्वान, हंस, बत्तख, गीज़, मोर, तीतर, बटेर, लावा, तोता, कबूतर, मुर्गा, मुर्गी, बत्तख, हंस, सारस, क्रेन, बगुला, स्टॉर्क, फ्लेमिंगो, पेलिकन, स्वान, हंस, बत्तख, गीज़, मोर, तीतर, बटेर, लावा, तोता, कबूतर, मुर्गा, मुर्गी, बत्तख, हंस, सारस, क्रेन, बगुला, स्टॉर्क, फ्लेमिंगो, पेलिकन, स्वान, हंस, बत्तख, गीज़, मोर, तीतर, बटेर, लावा, तोता, कबूतर, मुर्गा, मुर्गी, बत्तख, हंस, सारस, क्रेन, बगुला, स्टॉर्क, फ्लेमिंगो, पेलिकन, स्वान, हंस, बत्तख, गीज़, मोर, तीतर, बटेर, लावा, तोता, कबूतर, मुर्गा, मुर्गी, बत्तख, हंस, सारस, क्रेन, बगुला, स्टॉर्क, फ्लेमिंगो, पेलिकन, स्वान, हंस, बत्तख, गीज़, मोर, तीतर, बटेर, लावा, तोता, कबूतर, मुर्गा, मुर्गी, बत्तख, हंस, सारस, क्रेन, बगुला, स्टॉर्क, फ्लेमिंगो, पेलिकन, स्वान, हंस, बत्तख, गीज़, मोर, तीतर, बटेर, लावा, तोता, कबूतर, मुर्गा, मुर्गी, बत्तख, हंस, सारस, क्रेन, बगुला, स्टॉर्क, फ्लेमिंगो, पेलिकन, स्वान, हंस, बत्तख, गीज़, मोर, तीतर, बटेर, लावा, तोता, कबूतर, मुर्गा, मुर्गी, बत्तख, हंस, सारस, क्रेन, बगुला, स्टॉर्क, फ्लेमिंगो, पेलिकन, स्वान, हंस, बत्तख, गीज़, मोर, तीतर, बटेर, लावा, तोता, कबूतर, मुर्गा, मुर्गी, बत्तख, हंस, सारस, क्रेन, बगुला, स्टॉर्क, फ्लेमिंगो, पेलिकन, स्वान, हंस, बत्तख, गीज़, मोर, तीतर, बटेर, लावा, तोता, कबूतर, मुर्गा, मुर्गी, बत्तख, हंस, सारस, क्रेन, बगुला, स्टॉर्क, फ्लेमिंगो, पेलिकन, स्वान, हंस, बत्तख, गीज़, मोर, तीतर, बटेर, लावा, तोता, कबूतर, मुर्गा, मुर्गी, बत्तख, हंस, सारस, क्रेन, बगुला, स्टॉर्क, फ्लेमिंगो, पेलिकन, स्वान, हंस, बत्तख, गीज़, मोर, तीतर, बटेर, लावा, तोता, कबूतर, मुर्गा, मुर्गी, बत्तख, हंस, सारस, क्रेन, बगुला, स्टॉर्क, फ्लेमिंगो, पेलिकन, स्वान, हंस, बत्तख, गीज़, मोर, तीतर, बटेर, लावा, तोता, कबूतर, मुर्गा, मुर्गी, बत्तख, हंस, सारस, क्रेन, बगुला, स्टॉर्क
प्रश्न 4: 'हल्लीसक' क्या है? [2]
What is 'Hallisak'?
'हल्लीसक' एक प्रकार का लोकनृत्य या चित्रकला शैली है, जिसमें गोलाकार घेरे में नृत्य करते हुए पात्रों को दर्शाया जाता है। यह राजस्थानी चित्रकला की एक विशेष शैली है, जिसमें स्त्री-पुरुष एक साथ हाथ पकड़कर घेरे में नृत्य करते हैं।
प्रश्न 5: 'पूर्व का राफेल' किसे कहा जाता है? [2]
Who is known as the 'Raphael of east'?
'पूर्व का राफेल' (Raphael of the East) राजा रवि वर्मा को कहा जाता है। उन्होंने भारतीय चित्रकला में यथार्थवाद और पौराणिक विषयों को चित्रित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
प्रश्न 6: 'पार्थ सारथी' चित्र किस चित्रकार ने बनाया था? [2]
Who painted 'Parth Sarthi'?
'पार्थ सारथी' चित्र प्रसिद्ध चित्रकार राजा रवि वर्मा ने बनाया था। यह चित्र भगवान कृष्ण को अर्जुन के रथ का सारथी बनकर दिखाता है।
प्रश्न 7: कम्पनी शैली के प्रमुख केन्द्रों के नाम लिखिए। [2]
Mention the main centers of company style of painting.
कम्पनी शैली (Company Style) के प्रमुख केन्द्र निम्नलिखित हैं:
- कलकत्ता (कोलकाता)
- मद्रास (चेन्नई)
- बम्बई (मुंबई)
- दिल्ली
- लखनऊ
- पटना
प्रश्न 8: 1896 में कलकत्ता स्कूल ऑफ आर्ट के प्रिंसीपल कौन थे? [2]
Who was the principal of Kolkata School of art in 1896?
1896 में कलकत्ता स्कूल ऑफ आर्ट के प्रिंसीपल ई.बी. हैवेल (E.B. Havell) थे। उन्होंने भारतीय कला के पुनरुद्धार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
प्रश्न 9: पहाड़ी शैली की आरंभिक शैली कौन सी है? [2]
Which is earliest-style of Pahari School?
पहाड़ी शैली (Pahari School) की आरंभिक शैली बसोहली शैली (Basohli Style) है। यह 17वीं शताब्दी के अंत में विकसित हुई और इसमें चमकीले रंगों, बड़ी आँखों और सजावटी विवरणों का प्रयोग किया जाता था।
प्रश्न पत्र – ड्राइंग (SS-17-2017) – पृष्ठ 4
प्रश्न 10
नादिर उल असर' की उपाधि किस चित्रकार को दी गई थी?
Which artist was honoured with 'Naddir ul Asar'?
उत्तर: 'नादिर उल असर' की उपाधि मुगल चित्रकार अबुल हसन को दी गई थी। यह उपाधि मुगल बादशाह जहाँगीर द्वारा प्रदान की गई थी, जो उनकी अद्वितीय चित्रकला क्षमता को दर्शाती है।
प्रश्न 11
राम जैसवाल के किन्ही दो प्रमुख चित्रों के शीर्षक बताइए।
Mention the titles of any two main paintings by Ram Jaiswal.
उत्तर: राम जैसवाल के दो प्रमुख चित्रों के शीर्षक निम्नलिखित हैं:
- "गाँव की शाम" (Village Evening)
- "बूढ़ा किसान" (Old Farmer)
ये चित्र राजस्थानी लोक जीवन और ग्रामीण संस्कृति को जीवंत रूप में प्रस्तुत करते हैं।
प्रश्न 12
'कलाविद' सम्मान से सम्मानित जयपुर के दो चित्रकारों के नाम लिखिए।
Mention the names of any two artists of Jaipur honoured with 'Kalavid'.
उत्तर: 'कलाविद' सम्मान से सम्मानित जयपुर के दो चित्रकारों के नाम हैं:
- श्री कृष्ण कुमार शर्मा
- श्री राम गोपाल विजयवर्गीय
इन कलाकारों ने राजस्थानी चित्रकला के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
प्रश्न 13
अजंता के चित्रों में व्यक्त नारी सौन्दर्य का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
State in brief about the female beauty expressed in Ajanta Frescos.
उत्तर: अजंता के चित्रों में नारी सौन्दर्य को अत्यंत सजीव और भावपूर्ण रूप में चित्रित किया गया है। इन चित्रों में नारी के विभिन्न रूपों – जैसे रानी, दासी, नर्तकी, और सामान्य स्त्री – को दर्शाया गया है। नारी सौन्दर्य के प्रमुख तत्वों में शामिल हैं:
- शारीरिक संरचना: सुडौल शरीर, पतली कमर, गोल नितंब और लंबे बाल।
- चेहरे की विशेषताएँ: बादामी आँखें, धनुषाकार भौहें, छोटी नाक और मुस्कुराते होंठ।
- आभूषण और वस्त्र: विभिन्न प्रकार के गहने (हार, कंगन, पायल) और पारदर्शी वस्त्र जो शरीर की आकृति को उभारते हैं।
- भाव-भंगिमाएँ: नृत्य मुद्राएँ, प्रेम-भाव, और दैनिक क्रियाओं में संलग्न नारी की स्वाभाविक मुद्राएँ।
अजंता के चित्रकारों ने नारी सौन्दर्य को आध्यात्मिक और लौकिक दोनों दृष्टिकोणों से प्रस्तुत किया है, जो भारतीय चित्रकला की उत्कृष्टता को दर्शाता है।
प्रश्न 14
अकबर कालीन तीन प्रसिद्ध चित्रकारों के नाम बताइए।
Mention the names of any three artists of Akbar-period.
उत्तर: अकबर कालीन तीन प्रसिद्ध चित्रकारों के नाम निम्नलिखित हैं:
- दसवंत – वे अकबर के दरबार के प्रमुख चित्रकारों में से एक थे, जिन्होंने 'हम्ज़ानामा' और 'रज़्मनामा' जैसे ग्रंथों का चित्रण किया।
- बसावन – वे अत्यंत कुशल चित्रकार थे, जिन्होंने 'अकबरनामा' और 'बाबरनामा' के चित्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- मिस्कीन – वे अकबर के दरबार के एक प्रसिद्ध चित्रकार थे, जिन्होंने प्राकृतिक दृश्यों और मानवीय भावनाओं को चित्रित करने में विशेषज्ञता प्राप्त की।
इन कलाकारों ने मुगल चित्रकला को एक नई ऊँचाई प्रदान की और भारतीय-फारसी शैली के सम्मिश्रण को बढ़ावा दिया।
प्रश्न 15
राजस्थान की किस चित्र शैली पर मुगल शैली का गहन प्रभाव है? स्पष्ट करें।
Which school of Rajasthani Painting have deep impression of Mughal painting? Explain.
उत्तर: राजस्थान की बूंदी चित्र शैली पर मुगल शैली का गहन प्रभाव है।
स्पष्टीकरण:
- ऐतिहासिक संबंध: बूंदी राज्य मुगल साम्राज्य के निकट संपर्क में था, जिसके कारण मुगल चित्रकला के तत्व यहाँ सहज रूप से समाहित हुए।
- चित्रण शैली: बूंदी चित्रों में मुगल शैली की बारीक रेखाएँ, प्राकृतिक दृश्यों का यथार्थवादी चित्रण, और मानवीय भावनाओं का सूक्ष्म प्रदर्शन देखने को मिलता है।
- रंगों का प्रयोग: मुगल शैली के प्रभाव में बूंदी चित्रों में सुनहरे, नीले और हरे रंगों का अधिक प्रयोग हुआ, जो मुगल लघु चित्रों की विशेषता है।
- विषय-वस्तु: बूंदी चित्रों में राजसी जीवन, शिकार के दृश्य, और संगीत-नृत्य के प्रसंग मुगल शैली से प्रभावित हैं, जबकि पारंपरिक राजस्थानी विषयों को भी बनाए रखा गया।
इस प्रकार, बूंदी चित्र शैली मुगल और राजस्थानी चित्रकला का एक सुंदर सम्मिश्रण प्रस्तुत करती है, जो दोनों शैलियों की विशेषताओं को एक साथ दर्शाती है।
6) अजन्ता गुफा नं. एक में चित्रित विषयों का उल्लेख कीजिए।
Mention the subjects painted in Ajanta-cave no. 1.
उत्तर: अजन्ता गुफा संख्या एक में निम्नलिखित विषयों का चित्रण किया गया है:
- बोधिसत्व पद्मपाणि (करुणा का प्रतीक)
- बोधिसत्व वज्रपाणि (शक्ति का प्रतीक)
- महाजनक जातक (राजा महाजनक की कथा)
- शिव-पार्वती का चित्रण
- विभिन्न दृश्य जैसे नृत्य, संगीत, और दरबारी जीवन
7) अजन्ता के चित्रों की तीन मुख्य विशेषताएँ लिखिए।
Write about three main features of Ajanta frescos.
उत्तर: अजन्ता के चित्रों की तीन मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
- प्राकृतिक रंगों का प्रयोग: इन चित्रों में लाल, पीले, नीले, हरे और सफेद जैसे प्राकृतिक रंगों का उपयोग किया गया है, जो आज भी ताजे दिखते हैं।
- भावनात्मक अभिव्यक्ति: चित्रों में पात्रों के चेहरे और मुद्राओं के माध्यम से करुणा, शांति, भक्ति और श्रद्धा जैसी भावनाओं को सजीव रूप से दर्शाया गया है।
- जातक कथाओं का चित्रण: अधिकांश चित्र बुद्ध के पिछले जन्मों की कथाओं (जातक कथाओं) पर आधारित हैं, जो नैतिक और धार्मिक संदेश देते हैं।
8) चित्रकार सेवकराम, फकीर चंद और शिवदयाल किस शैली के चित्रकार थे? और उक्त शैली का संक्षिप्त परिचय लिखें।
Artist Sevakram, Fakir Chand and Shiv Dayal belongs to which school? Explain and write about the school in brief.
उत्तर: ये तीनों चित्रकार कांगड़ा शैली (पहाड़ी चित्रकला की एक शाखा) के थे।
कांगड़ा शैली का संक्षिप्त परिचय:
- यह शैली 18वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा क्षेत्र में विकसित हुई।
- इसमें प्रकृति, राधा-कृष्ण की लीलाओं, और भक्ति भावना का सुंदर चित्रण मिलता है।
- चित्रों में कोमल रेखाएँ, हल्के और मुलायम रंग (जैसे हरा, पीला, नीला), और स्त्रियों के सुडौल शरीर का चित्रण प्रमुख है।
- इस शैली में भावनाओं को अत्यंत सूक्ष्मता और सजीवता से व्यक्त किया गया है।
9) "शोकाकुल स्त्री" चित्र पर टिप्पणी लिखिए।
Write short note on 'Bereaved Lady' (shokakul stri).
उत्तर: "शोकाकुल स्त्री" (Bereaved Lady) राजस्थानी लघु चित्रकला की एक प्रसिद्ध कृति है। इसमें एक स्त्री को अपने प्रियतम के वियोग में अत्यंत दुखी और शोकाकुल अवस्था में दिखाया गया है। उसके सिर पर हाथ रखे हुए, आँखों से आँसू बहते हुए, और शरीर की भंगिमा में गहरी पीड़ा व्यक्त की गई है। यह चित्र मानवीय भावनाओं, विशेषकर वियोग और शोक, को अत्यंत मार्मिक और यथार्थवादी ढंग से प्रस्तुत करता है। इसमें रंगों का संयमित प्रयोग और रेखाओं की सुंदरता देखने योग्य है।
10) चित्रण की 'वाश पद्धति' मूलरूप से किस देश की है? भारत में इसे किस चित्र शैली में अपनाया? व्यक्त करें।
Wash technique of painting originally belongs to which country, which school of painting adopted it in India? Explain.
उत्तर: चित्रण की 'वाश पद्धति' (Wash technique) मूलरूप से चीन देश की है। भारत में इसे मुगल चित्रकला शैली में अपनाया गया। इस तकनीक में पानी में रंगों को घोलकर हल्की और पारदर्शी परतें चढ़ाई जाती हैं, जिससे चित्रों में कोमलता और गहराई आती है। मुगल शैली में इसका उपयोग प्राकृतिक दृश्यों, पशु-पक्षियों और चित्रों में छाया-प्रकाश के प्रभाव को दर्शाने के लिए किया गया।
11) राजस्थान के दो "पद्मश्री" पुरस्कृत चित्रकारों के नाम का उल्लेख करें।
Mention the name of two 'Padmashree' Awardee artists of Rajasthan.
उत्तर: राजस्थान के दो "पद्मश्री" पुरस्कृत चित्रकारों के नाम निम्नलिखित हैं:
- श्री कृष्णा कुमारी (कृष्णा कुमारी) - मेवाड़ शैली की प्रसिद्ध चित्रकार
- श्री राम गोपाल विजयवर्गीय - राजस्थानी लघु चित्रकला के विशेषज्ञ
(नोट: यह सूची संदर्भ पर निर्भर करती है; अन्य नाम भी हो सकते हैं।)
प्रश्न 22
"यमुनी राय ने अपने चित्रण में लोक-प्रतीकों और चिन्हों को संजोया" इनकी चित्र शैली पर संक्षेप में लिखिए।
Yamini Roy composed folk symbols, signs in his paintings, comment on his style of painting.
यमुनी राय (Yamini Roy) की चित्र शैली भारतीय लोक कला और पारंपरिक चित्रकला का अद्भुत संगम है। उन्होंने अपने चित्रों में बंगाल की लोक कला जैसे कालीघाट पटचित्र, मिथिला (मधुबनी) चित्रकला, और पूर्वी भारत की ग्रामीण परंपराओं के प्रतीकों और चिन्हों को संजोया। उनकी शैली की मुख्य विशेषताएँ हैं:
- सरल रेखाएँ और सपाट रंग: वे जटिल छायांकन के बजाय सीधी, स्पष्ट रेखाओं और चमकीले, सपाट रंगों का प्रयोग करते थे।
- लोक प्रतीकों का उपयोग: उन्होंने मछली, पक्षी, फूल, पत्ते, और ग्रामीण जीवन के दृश्यों को प्रतीकात्मक रूप में चित्रित किया, जो स्थानीय संस्कृति और आस्था को दर्शाते हैं।
- भारतीयता पर बल: वे पश्चिमी शैली से हटकर भारतीय लोक कला की मौलिकता को पुनर्जीवित करना चाहते थे। उनके चित्रों में देवी-देवता, पौराणिक कथाएँ और ग्रामीण जीवन के सरल दृश्य प्रमुख हैं।
- भावनात्मक अभिव्यक्ति: सादगी के बावजूद उनके चित्र गहरी भावनाओं और आध्यात्मिकता को व्यक्त करते हैं।
संक्षेप में, यमुनी राय ने लोक कला के तत्वों को आधुनिक चित्रकला में ढालकर एक विशिष्ट और प्रभावशाली शैली विकसित की, जो भारतीय कला की जड़ों से जुड़ी हुई है।
प्रश्न 23
के.के.हेब्बर का पूरा नाम, जन्म वर्ष व स्थान बताइए।
State full name of K.K.Hebbar, mention his year of birth and birth place.
पूरा नाम: कट्टिंकेरी कृष्ण हेब्बर (Kattinkeri Krishna Hebbar)
जन्म वर्ष: 1911
जन्म स्थान: कट्टिंकेरी, उडुपी जिला, कर्नाटक (तत्कालीन मद्रास प्रेसीडेंसी)
प्रश्न 24
एन.एस.बेन्द्रे के किन्ही तीन चित्रों के नाम लिखिए।
Name any three paintings of N.S.Bendre.
एन.एस.बेन्द्रे (नारायण श्रीधर बेन्द्रे) के तीन प्रसिद्ध चित्रों के नाम निम्नलिखित हैं:
- "मुरलीधर" (Murlidhar) – भगवान कृष्ण को बांसुरी बजाते हुए दर्शाता एक प्रसिद्ध चित्र।
- "ग्रामीण महिला" (Village Woman) – ग्रामीण जीवन की सादगी और सौंदर्य को दर्शाने वाला चित्र।
- "अमरनाथ यात्रा" (Amarnath Yatra) – तीर्थयात्रियों के समूह को दर्शाता एक भावनात्मक चित्र।
(नोट: विद्यार्थी बेन्द्रे के अन्य चित्र जैसे "हल्दीघाटी का युद्ध", "शिव-पार्वती", "बुद्ध" आदि भी लिख सकते हैं।)
प्रश्न 25
'मरता हुआ भैंसा' किस गुफा में चित्रित है? इस चित्र में व्यक्त भावों की समीक्षा करें।
In which cave 'dying-bison' is painted? Appreciate the emotional expression in this painting.
गुफा: 'मरता हुआ भैंसा' (Dying Bison) चित्र भारत की प्रसिद्ध अजंता गुफा (विशेषकर गुफा संख्या 17) में चित्रित है। यह अजंता की भित्तिचित्रों में से एक उत्कृष्ट कृति है।
भावों की समीक्षा: इस चित्र में एक घायल और मरते हुए भैंसे को अत्यंत यथार्थवादी और भावनात्मक रूप से चित्रित किया गया है।
- पीड़ा और संघर्ष: भैंसे की आँखों में गहरी पीड़ा और मृत्यु से पहले का संघर्ष स्पष्ट दिखाई देता है। उसका शरीर लड़खड़ा रहा है, जो जीवन के अंतिम क्षणों की व्यथा को दर्शाता है।
- सहानुभूति: चित्रकार ने दर्शकों के मन में इस जीव के प्रति करुणा और सहानुभूति जगाने का प्रयास किया है। यह केवल एक जानवर की मृत्यु नहीं, बल्कि जीवन की नश्वरता का प्रतीक है।
- यथार्थवाद: भैंसे की मांसपेशियों का तनाव, सिर का झुकाव, और आँखों की अभिव्यक्ति अत्यंत स्वाभाविक है, जो अजंता के चित्रकारों की उच्च कला कौशल को दर्शाता है।
- प्रतीकात्मकता: यह चित्र जीवन और मृत्यु के शाश्वत सत्य को दर्शाता है, जो बौद्ध दर्शन के अनुकूल है।
संक्षेप में, यह चित्र अपनी मार्मिक अभिव्यक्ति और यथार्थवादी चित्रण के कारण विश्व कला में अद्वितीय स्थान रखता है।
प्रश्न 26
राहुल समर्पण चित्र का वर्णन कीजिए।
Write about ‘Rahul Samarpan' painting.
'राहुल समर्पण' (Rahul Samarpan) चित्र भारतीय चित्रकार राजा रवि वर्मा द्वारा चित्रित एक प्रसिद्ध कृति है। यह चित्र भगवान बुद्ध के जीवन की एक महत्वपूर्ण घटना को दर्शाता है।
चित्र का वर्णन:
- विषय: इस चित्र में भगवान बुद्ध अपने पुत्र राहुल को अपने शिष्य के रूप में समर्पित करते हुए दिखाए गए हैं। यह घटना बुद्ध के महापरिनिर्वाण के बाद की है, जब वे अपने जन्मस्थान कपिलवस्तु लौटे थे।
- रचना: चित्र के केंद्र में भगवान बुद्ध शांत और गंभीर मुद्रा में खड़े हैं। उनके सामने छोटा राहुल अपने पिता को समर्पित होने के लिए हाथ जोड़े खड़ा है। पृष्ठभूमि में राजमहल और अन्य लोग दिखाई देते हैं।
- भाव: इस चित्र में त्याग, वात्सल्य, और धार्मिक समर्पण के भाव मुख्य हैं। बुद्ध के चेहरे पर करुणा और शांति है, जबकि राहुल की मुद्रा में श्रद्धा और समर्पण दिखता है।
- शैली: राजा रवि वर्मा की यथार्थवादी शैली में चित्रित यह कृति भारतीय पौराणिक और ऐतिहासिक विषयों को पश्चिमी चित्रकला तकनीकों के साथ जोड़ती है। रंगों का संयोजन और प्रकाश-छाया का प्रभाव इसे जीवंत बनाता है।
यह चित्र बौद्ध धर्म में त्याग और पारिवारिक संबंधों के महत्व को दर्शाने के लिए प्रसिद्ध है।
प्रश्न 27
रविन्द्रनाथ ठाकुर की कला पर टिप्पणी लिखिए।
Write a short note on art of Ravindranath Tagore.
रवीन्द्रनाथ ठाकुर (Rabindranath Tagore) मुख्यतः कवि और साहित्यकार के रूप में प्रसिद्ध हैं, लेकिन उन्होंने चित्रकला में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनकी कला की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
- स्वतःस्फूर्त और अभिव्यंजनावादी शैली: ठाकुर ने कभी औपचारिक चित्रकला प्रशिक्षण नहीं लिया। उनके चित्र स्वतःस्फूर्त, सहज और भावनाओं की अभिव्यक्ति पर आधारित हैं। वे यथार्थवादी चित्रण के बजाय मनोदशा और आंतरिक भावनाओं को प्राथमिकता देते थे।
- काल्पनिक और प्रतीकात्मक चित्र: उनके चित्रों में अक्सर रहस्यमयी आकृतियाँ, भूत-प्रेत, और काल्पनिक दृश्य दिखाई देते हैं। वे प्रकृति, मानवीय संबंधों और आध्यात्मिकता को प्रतीकों के माध्यम से व्यक्त करते थे।
- रेखाओं और रंगों का अनूठा प्रयोग: उन्होंने बोल्ड रेखाओं और गहरे, विपरीत रंगों का प्रयोग किया। उनके चित्रों में अक्सर काले, नीले, लाल और भूरे रंगों की प्रधानता होती है, जो एक गहन और रहस्यमय वातावरण बनाते हैं।
- साहित्यिक प्रभाव: उनकी कविताओं और कहानियों का प्रभाव उनके चित्रों पर स्पष्ट दिखता है। कई चित्र उनकी साहित्यिक कृतियों के दृश्यों या भावनाओं को दर्शाते हैं।
- अंतर्राष्ट्रीय पहचान: ठाकुर के चित्रों को यूरोप और अमेरिका में प्रदर्शित किया गया, जहाँ उन्हें आधुनिक कला के अग्रदूतों में गिना गया। उनकी कला
प्रश्न 28
राजस्थानी चित्र शैली का वर्णन कीजिए। [2]
Write about the Rajasthani style of painting.
राजस्थानी चित्र शैली का वर्णन:
राजस्थानी चित्र शैली, जिसे 'राजपूत चित्रकला' भी कहा जाता है, भारतीय लघु चित्रकला की एक प्रमुख शैली है। इसका विकास 16वीं से 19वीं शताब्दी के बीच राजस्थान के विभिन्न राज्यों (मेवाड़, मारवाड़, बूंदी, कोटा, किशनगढ़, जयपुर आदि) में हुआ।
प्रमुख विशेषताएँ:
- विषय: इसमें मुख्यतः कृष्ण-लीला, राधा-कृष्ण प्रेम, रागमाला, ऋतुचित्र, शिकार के दृश्य, दरबारी जीवन, और पौराणिक कथाओं का चित्रण किया गया है।
- शैली: चित्रों में चमकीले और गहरे रंगों (लाल, पीला, नीला, हरा) का प्रयोग किया जाता है। रेखाएँ स्पष्ट और सुडौल होती हैं।
- चेहरे: चेहरों का चित्रण पार्श्व (प्रोफाइल) में किया जाता है, जिसमें बड़ी-बड़ी आँखें और नुकीली नाक दिखाई जाती है।
- प्रकृति: प्रकृति चित्रण में बादल, पेड़-पौधे, जानवर और पक्षियों का बारीकी से चित्रण किया जाता है।
- प्रमुख केंद्र: मेवाड़ (उदयपुर), मारवाड़ (जोधपुर), बूंदी, कोटा, किशनगढ़ और जयपुर इस शैली के प्रमुख केंद्र हैं।
यह शैली भक्ति आंदोलन और राजपूत संस्कृति से गहराई से जुड़ी हुई है।
प्रश्न 29
प्रागैतिहासिक कला पर निबन्ध लिखिए। [2]
अथवा
आदि मानव के जीवन पर लेख लिखिए।
Write an essay on pre-historic art.
OR
Write an article on life of pre-historic man.
प्रागैतिहासिक कला पर निबन्ध:
प्रागैतिहासिक कला का तात्पर्य उस कला से है जो मानव सभ्यता के लिखित इतिहास से पहले (लगभग 40,000 ईसा पूर्व से 10,000 ईसा पूर्व तक) बनाई गई थी। यह कला मुख्यतः गुफाओं की दीवारों पर चित्रों और शैलचित्रों के रूप में मिलती है।
प्रमुख विशेषताएँ:
- स्थान: ये चित्र फ्रांस (लास्कॉक्स), स्पेन (अल्टामिरा), भारत (भीमबेटका, मध्य प्रदेश) आदि स्थानों पर पाए गए हैं।
- विषय: इनमें मुख्यतः शिकार के दृश्य, जंगली जानवर (बाइसन, हिरण, घोड़े, मैमथ), और मानव आकृतियाँ चित्रित की गई हैं।
- सामग्री: चित्र बनाने के लिए प्राकृतिक रंगों (गेरू, चारकोल, मिट्टी) का उपयोग किया गया है।
- उद्देश्य: माना जाता है कि ये चित्र शिकार की सफलता के लिए जादुई अनुष्ठानों, धार्मिक विश्वासों, या दैनिक जीवन के दस्तावेजीकरण के रूप में बनाए गए थे।
- शैली: चित्र यथार्थवादी और गतिशील होते हैं, जिनमें जानवरों की शारीरिक बनावट और गति को प्रभावी ढंग से दर्शाया गया है।
प्रागैतिहासिक कला मानव के प्रारंभिक सौंदर्यबोध और अभिव्यक्ति की क्षमता का प्रमाण है।
प्रश्न 30
बंगाल शैली पर एक लेख लिखिए। [2]
अथवा
भारतीय कला के पुनरूत्थान का महत्व बताइए।
Write an article on Bengal School.
OR
Describe the importance of Indian art-renaissance.
बंगाल शैली पर लेख:
बंगाल शैली (बंगाल स्कूल ऑफ आर्ट) भारतीय कला के पुनरुत्थान (रिवाइवल) की एक महत्वपूर्ण शैली है, जो 20वीं शताब्दी के प्रारंभ में विकसित हुई। इसके प्रमुख प्रवर्तक अबनिंद्रनाथ टैगोर थे, जिन्होंने पश्चिमी शैली के यथार्थवाद के विरोध में भारतीय परंपराओं को पुनर्जीवित करने का प्रयास किया।
प्रमुख विशेषताएँ:
- प्रेरणा: इस शैली ने अजंता की गुफा चित्रकला, मुगल लघु चित्रकला, और राजपूत चित्रकला से प्रेरणा ली।
- शैली: चित्रों में कोमल रेखाएँ, मंद रंग (पेस्टल शेड्स), और भावनात्मक अभिव्यक्ति पर जोर दिया गया।
- विषय: इसमें पौराणिक कथाओं, भारतीय इतिहास, और साहित्यिक विषयों को चित्रित किया गया।
- प्रमुख कलाकार: अबनिंद्रनाथ टैगोर, नंदलाल बोस, गगनेंद्रनाथ टैगोर, और असित कुमार हालदार इस शैली के प्रमुख चित्रकार हैं।
- प्रभाव: इस शैली ने भारतीय कला में राष्ट्रीय चेतना और स्वदेशी आंदोलन को बढ़ावा दिया।
बंगाल शैली ने भारतीय कला को एक नई पहचान दी और इसे पश्चिमी प्रभावों से मुक्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।