RBSE Class 12th 2018 -SS-17-2018 Previous Year Papers
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Paper details
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| Board | RBSE |
|---|---|
| Class | Class 12th |
| Exam year | 2018 |
| Subject | -SS-17-2018 |
| Resource type | Previous Year Papers |
| Category | RBSE Previous Year Question Papers |
| Website | RBSE Solution |
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RBSE Class 12th 2018 -SS-17-2018
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Rajasthan Board Class 12th -SS-17-2018 2018 solved Previous Year Question Papers
उच्च माध्यमिक पूरक परीक्षा, 2018
SENIOR SECONDARY SUPPLEMENTARY EXAMINATION, 2018
चित्रकला / DRAWING
समय : 3¼ घण्टे पूर्णांक : 24
परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :
GENERAL INSTRUCTIONS TO THE EXAMINEES:
- परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न पत्र पर नामांक अनिवार्यतः लिखें।
Candidate must write first his/her Roll No. on the question paper compulsorily. - सभी प्रश्न करने अनिवार्य हैं।
All the questions are compulsory. - प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें।
Write the answer to each question in the given answer-book only. - जिन प्रश्नों में आन्तरिक खण्ड हैं, उन सभी के उत्तर एक साथ ही लिखें।
For questions having more than one part the answers to those parts are to be written together in continuity.
No. of Questions : 30 No. of Printed Pages : 7
SS-17-Drawing (Supp.)
SS-17-Drawing [ Turn Over ]
खण्ड (अ) / SECTION (A)
-
प्रश्न 1: 'तुजूक - ए - आसफी' किस शैली का चित्रित ग्रन्थ हैं? [1]
To which school belongs the manuscript "Tujuk - E - Aasafi"?
उत्तर: 'तुजूक - ए - आसफी' मुगल शैली का चित्रित ग्रन्थ है। यह मुगल काल में लिखा गया एक ऐतिहासिक ग्रन्थ है जो मुगल चित्रकला शैली को दर्शाता है।
Answer: The manuscript "Tujuk - E - Aasafi" belongs to the Mughal school of painting. It is a historical manuscript written during the Mughal period, reflecting the Mughal painting style.
-
प्रश्न 2: बहमनी सलतनत कितने राज्यों में बटी थी? [1]
In how many states was the Bahamani Sultanate divided?
उत्तर: बहमनी सलतनत 5 राज्यों में बटी थी। ये राज्य थे: बीजापुर, गोलकुंडा, अहमदनगर, बरार और बीदर।
Answer: The Bahamani Sultanate was divided into 5 states. These states were: Bijapur, Golconda, Ahmednagar, Berar, and Bidar.
नोट: प्रश्न क्रमांक 29 और 30 में आंतरिक विकल्प हैं।
Note: There are internal choices in Question Nos. 29 and 30.
महत्वपूर्ण: प्रश्न पत्र के हिन्दी व अंग्रेजी रूपान्तर में किसी प्रकार की त्रुटि/अन्तर/विरोधाभास होने पर हिन्दी भाषा के प्रश्न को सही मानें।
Important: If there is any error/difference/contradiction in Hindi & English versions of the question paper, the question of Hindi version should be treated valid.
| प्रश्न संख्या Q. Nos. |
अंक प्रति प्रश्न Marks Per Question |
उत्तर की शब्द सीमा Word Limit of Answer |
|---|---|---|
| 1-2 | 1 | 0 |
| 3-20 | 1 | 25 |
| 21-25 | 2 | 50 |
| 26-28 | 2 | 20 |
| 29-30 | 3 | 200 |
SS-7- Drawing 26
प्रश्न 3
“पूर्व का राफेल” किस चित्रकार को कहते हैं?
Who is known as the ‘Raphael of east’?
उत्तर: अब्दुर्रहीम खानखाना को 'पूर्व का राफेल' कहा जाता है।
Answer: Abdur Rahim Khan-i-Khanan is known as the 'Raphael of the East'.
प्रश्न 4
जहाँगीर का प्रिय चित्रकार कौन था?
Who was the loving artist of Jahangir?
उत्तर: उस्ताद मंसूर जहाँगीर का प्रिय चित्रकार था।
Answer: Ustad Mansur was the favorite artist of Jahangir.
प्रश्न 5
राजस्थान की “ललितकला अकादमी” की स्थापना कब हुई?
When was established "Lalit kala Academy" of Rajasthan?
उत्तर: राजस्थान ललित कला अकादमी की स्थापना सन् 1957 में हुई थी।
Answer: The Rajasthan Lalit Kala Academy was established in the year 1957.
प्रश्न 6
“मोर का चितेरा” नाम से कौनसा चित्रकार जाना जाता है?
Which artist is known "morka chitera"?
उत्तर: 'मोर का चितेरा' नाम से चित्रकार मोहनलाल चतुर्वेदी जाने जाते हैं।
Answer: The artist known as 'Mor ka Chitera' is Mohanlal Chaturvedi.
प्रश्न 7
द्वारका प्रसाद शर्मा का जन्म कहाँ हुआ था?
When was born artist Dwarka prasad sharma?
उत्तर: द्वारका प्रसाद शर्मा का जन्म राजस्थान के कोटा जिले में हुआ था।
Answer: Artist Dwarka Prasad Sharma was born in Kota district of Rajasthan.
प्रश्न 8
“भैंस का चितेरा” किसे कहते हैं?
Who is known 'Bhaison ka chitrakar'?
उत्तर: 'भैंस का चितेरा' नाम से चित्रकार रामगोपाल विजयवर्गीय जाने जाते हैं।
Answer: The artist known as 'Bhains ka Chitera' is Ramgopal Vijayvargiya.
प्रश्न 9
“कैलाशनाथ मन्दिर” का निर्माण किसने करवाया था?
Who built the "Kailash Nath Temple"?
उत्तर: कैलाशनाथ मंदिर का निर्माण राष्ट्रकूट राजा कृष्ण प्रथम ने करवाया था।
Answer: The Kailashnath Temple was built by the Rashtrakuta king Krishna I.
[SS-17-Drawing 26] [Turn Over]
खण्ड (a) SECTION (8)
प्रश्न 0
'महाबलिपुरम् मन्दिर किस नाम से जाने जाते हैं? [4]
By which name is known "Mahabalipuram temple"?
प्रश्न 1
कालीबंगा सभ्यता के अवशेष कहाँ मिले हैं? [4]
Where the ruins are found of Kalibanga civilization?
प्रश्न 2
'सास-बहू' का मन्दिर कहाँ स्थित है? [4]
Where the temple is situated "Saas - Bahu"?
प्रश्न 3
चाँद बीबी पोलो खेलते हुए' किस शैली का चित्र है? [4]
To which school belongs the picture "Chand Bibi Polo Khelte Hue"?
प्रश्न 4
राजा रवि वर्मा के दो चित्रों के नाम लिखिए। [4 + 4 = 8]
Write name of any two paintings of Raja Ravi Verma.
- शकुंतला (Shakuntala)
- हंस-दमयंती (Hamsa-Damayanti)
राजा रवि वर्मा भारतीय चित्रकला के महान चित्रकार थे जिन्होंने पौराणिक और ऐतिहासिक विषयों पर अनेक चित्र बनाए।
प्रश्न 5
पैग (PAG) का पूरा नाम क्या है, इसके दो चित्रकारों के नाम बताइये? [4 + 4 = 8]
What is full form of PAG, and write two names of any artists of it?
- एम. एफ. हुसैन (M. F. Husain)
- एस. एच. रज़ा (S. H. Raza)
PAG की स्थापना 1947 में मुंबई में हुई थी और इसने भारतीय आधुनिक कला को नई दिशा दी।
खण्ड (ब) / SECTION (B)
-
दिल्ली शिल्पी चक्र की स्थापना कब हुई और किसने की? [4 + 44 - ४2]
Who composed the group "Delhi shipi chakra" and when?
उत्तर: दिल्ली शिल्पी चक्र की स्थापना सन् 1947 में मूर्तिकार देवी प्रसाद राय चौधरी ने की थी। इस समूह का उद्देश्य भारतीय मूर्तिकला को आधुनिक रूप देना था।
-
कोणार्क का सूर्य मन्दिर कहाँ है, इसका निर्माण किसने करवाया? [4 + 44 - ४2]
Where is the 'Sun temple of konark' and who built it?
उत्तर: कोणार्क का सूर्य मन्दिर ओडिशा राज्य के पुरी जिले में स्थित है। इसका निर्माण गंग वंश के राजा नरसिंहदेव प्रथम ने 13वीं शताब्दी (लगभग 1250 ई.) में करवाया था।
-
सचिया माता मन्दिर कहाँ है, इसका निर्माण किसने करवाया? [4 + 44 5 ४2]
Where sachiyamata temple, is situated and who built it?
उत्तर: सचिया माता मन्दिर राजस्थान के ओसियाँ (जोधपुर) में स्थित है। इसका निर्माण प्रतिहार वंश के राजा वत्सराज ने 8वीं-9वीं शताब्दी में करवाया था।
-
देलवाड़ा मन्दिरों के मूर्तिशिल्प का विषय क्या है? [८]
What is subject of sculpture in Delwada Temple group?
उत्तर: देलवाड़ा मन्दिरों (माउंट आबू, राजस्थान) के मूर्तिशिल्प का मुख्य विषय जैन धर्म से संबंधित दृश्य हैं। इनमें तीर्थंकरों की प्रतिमाएँ, देवी-देवता, पुष्प, पशु-पक्षी और ज्यामितीय आकृतियाँ उत्कीर्ण हैं।
-
"बणी - ठणी" मूर्तिशिल्प के मूर्तिकार का नाम लिखिए। [८]
Who built the sculpture "Bani - thani"?
उत्तर: "बणी-ठणी" मूर्तिशिल्प के मूर्तिकार मोलाराम (Mola Ram) थे। यह एक प्रसिद्ध राजस्थानी लघु चित्रकला है, जिसमें एक सुंदर स्त्री का चित्रण है।
खण्ड (स) / SECTION (C)
-
कम्पनी शैली के उद्भव व विकास पर संक्षिप्त टिप्पणी कीजिए। [I]
Write a short note on origin and development of company school.
उत्तर: कम्पनी शैली (Company School) का उद्भव 18वीं शताब्दी के अंत में भारत में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के शासनकाल में हुआ। यह शैली भारतीय लघु चित्रकला और यूरोपीय यथार्थवादी शैली का मिश्रण थी।
विकास:
- प्रारंभ में कंपनी के अधिकारियों ने भारतीय कलाकारों को यूरोपीय शैली में प्रशिक्षित किया।
- इस शैली में प्राकृतिक दृश्य, वनस्पति, पशु-पक्षी, स्मारक और भारतीय जीवन के दृश्य चित्रित किए गए।
- प्रमुख केंद्र: कलकत्ता, मद्रास, बॉम्बे, दिल्ली, लखनऊ और तंजौर।
- इस शैली ने भारतीय कला में यथार्थवाद और परिप्रेक्ष्य (perspective) का समावेश किया।
- 19वीं शताब्दी के मध्य तक यह शैली लोकप्रिय रही, बाद में फोटोग्राफी के आगमन से इसका पतन हुआ।
खण्ड (स) / SECTION (C)
22) जगदीश स्वामीनाथन की कला पर संक्षिप्त लेख लिखिए। [2]
Write a short essay on the art of Jagadeesh Swaminathan.
जगदीश स्वामीनाथन (1928-1994) भारतीय आधुनिक कला के एक प्रमुख चित्रकार थे। उनकी कला की मुख्य विशेषताएँ:
- वे भारतीय लोक कला और आदिवासी कला से गहरे प्रभावित थे।
- उनकी पेंटिंग्स में प्रायः पक्षी, पशु, और मानव आकृतियाँ सरल, बोल्ड रेखाओं में चित्रित होती हैं।
- उन्होंने अपनी कला में भारतीय मिथकों और प्रतीकों का आधुनिक व्याख्या के साथ प्रयोग किया।
- वे 'ग्रुप 1890' के संस्थापक सदस्य थे, जिसने भारतीय कला में नए प्रयोगों को बढ़ावा दिया।
- उनकी कला में रंगों का संयमित और प्रभावशाली उपयोग देखने को मिलता है।
23) राम जैसवाल के चित्रण माध्यम व तकनीक के बारे में बताइये। [2+1=3]
Describe the medium and technique of Ram Jaiswal paintings.
राम जैसवाल एक प्रसिद्ध भारतीय चित्रकार थे। उनके चित्रण माध्यम और तकनीक:
- माध्यम: उन्होंने मुख्यतः जलरंग (वॉटर कलर) और तैल रंग (ऑयल कलर) का प्रयोग किया।
- तकनीक: उनकी तकनीक में यथार्थवादी चित्रण के साथ भावनात्मक अभिव्यक्ति पर जोर था। वे प्रकाश-छाया (काइरोस्कोरो) का प्रभावी उपयोग करते थे।
- उन्होंने भारतीय ग्रामीण जीवन, विशेषकर राजस्थान के लोक जीवन को अपने चित्रों का विषय बनाया।
- उनकी ब्रशवर्क बहुत सटीक और संवेदनशील होती थी, जिसमें बारीक विवरणों पर विशेष ध्यान दिया जाता था।
24) "महाबलिपुरम् मन्दिर" कहाँ है? प्रमुख मूर्तिशिल्प के नाम बताइये। [2+1=3]
Where is 'Mahabalipuram temple' situated? Write the names of its popular sculptures.
स्थान: महाबलिपुरम् मन्दिर (जिसे मामल्लपुरम् भी कहा जाता है) तमिलनाडु राज्य में, चेन्नई से लगभग 60 किमी दक्षिण में, बंगाल की खाड़ी के तट पर स्थित है।
प्रमुख मूर्तिशिल्प:
- गंगावतरण (अर्जुन की तपस्या) - विश्व का सबसे बड़ा शैलचित्र
- पाँच रथ (पंच पांडव रथ)
- कृष्ण मंडप
- महिषासुरमर्दिनी गुफा मंदिर
- तटीय मंदिर (शोर टेम्पल)
- वराह गुफा मंदिर
25) ऊषारानी हजा के कृतित्व व व्यक्तित्व का संक्षिप्त वर्णन कीजिए। [2]
Describe the work and personality of Usha Rani Hooja.
ऊषारानी हजा (Usha Rani Hooja) एक प्रसिद्ध भारतीय चित्रकार और कला शिक्षिका थीं।
- कृतित्व: उन्होंने मुख्यतः जलरंग और तैल रंग में काम किया। उनके चित्रों में प्रकृति, महिलाएँ, और भारतीय लोक जीवन के दृश्य प्रमुख रूप से चित्रित हुए। वे राजस्थान स्कूल ऑफ आर्ट से जुड़ी रहीं और कई युवा कलाकारों को प्रशिक्षित किया।
- व्यक्तित्व: वे एक सरल, संवेदनशील और समर्पित कलाकार थीं। उनका व्यक्तित्व विनम्र और कला के प्रति गहरी निष्ठा रखने वाला था। उन्होंने अपने जीवन में कला को ही अपना धर्म बनाया।
खण्ड (ड) / SECTION (D)
26) पहाड़ी चित्रकला की उपशैलियों कौन-कौन सी हैं? बसौली शैली के चित्रों की विशेषता लिखिए। [1+1=2]
Which are the sub-schools of Pahadi painting? Write the characteristics of Basohli school paintings.
पहाड़ी चित्रकला की उपशैलियाँ:
- बसौली शैली
- गुलेर शैली
- कांगड़ा शैली
- चम्बा शैली
- कुल्लू शैली
- मंडी शैली
- बिलासपुर शैली
बसौली शैली के चित्रों की विशेषताएँ:
- इस शैली में आँखें बड़ी और कमल के समान चित्रित की जाती हैं।
- रंगों का प्रयोग बहुत तीव्र और चमकीला होता है, विशेषकर लाल, पीला और नीला रंग।
- चित्रों में एक विशेष प्रकार की भव्यता और शाही ठाठ देखने को मिलता है।
- प्रकृति चित्रण में वृक्षों और पत्तियों को ज्यामितीय रूपों में दर्शाया जाता है।
- चेहरे के भावों में एक विशेष प्रकार की गंभीरता और तेजस्विता होती है।
- यह पहाड़ी चित्रकला की सबसे प्राचीन शैली मानी जाती है (17वीं-18वीं शताब्दी)।
27) 'सलीम का जन्म' और "कबीर और रैदास" चित्र का संक्षिप्त वर्णन कीजिए। [1+1=2]
Briefly describe these paintings: "Salim Ka Janm" and "Kabir and Raidas".
1. 'सलीम का जन्म' (Salim Ka Janm):
- यह चित्र मुगल लघु चित्रकला की एक प्रसिद्ध कृति है।
- इसमें मुगल बादशाह अकबर के पुत्र सलीम (जहाँगीर) के जन्म के अवसर पर हर्ष और उल्लास के दृश्य को दर्शाया गया है।
- चित्र में महिलाएँ, नौकर-चाकर और दरबारी खुशी मनाते हुए दिखाई देते हैं।
- इसमें मुगल कालीन वास्तुकला, वस्त्र और आभूषणों का बारीक चित्रण किया गया है।
2. 'कबीर और रैदास' (Kabir and Raidas):
- यह चित्र भक्ति काल के दो महान संतों - कबीर और रैदास (रविदास) को दर्शाता है।
- इसमें दोनों संतों को एक साथ बैठे हुए आध्यात्मिक चर्चा करते हुए दिखाया गया है।
- कबीर को जुलाहा (बुनकर) के रूप में और रैदास को चमार (चर्मकार) के रूप में सरल वेशभूषा में चित्रित किया गया है।
- यह चित्र भारतीय समाज में व्याप्त जातिगत भेदभाव से ऊपर उठकर आध्यात्मिक समानता का संदेश देता है।
SS-7- Drawing 26
प्रश्न 28
सतीश गुजराल का आधुनिक भारतीय मूर्तिकला के विकास में क्या योगदान हैं? अपने विचार लिखिए। [2]
Write your opinion about Satish Gujaral's contribution in development of sculpture of contemporary India.
उत्तर: सतीश गुजराल (1925-2020) आधुनिक भारतीय मूर्तिकला के अग्रणी कलाकार थे। उन्होंने पारंपरिक मूर्तिकला को आधुनिक दृष्टिकोण से जोड़ा। उनकी कृतियों में मानवीय भावनाओं, सामाजिक मुद्दों और अमूर्त रूपों का अनूठा मिश्रण देखने को मिलता है। उन्होंने धातु, पत्थर और लकड़ी जैसी विभिन्न सामग्रियों का प्रयोग कर भारतीय मूर्तिकला को नई दिशा दी। उनकी प्रसिद्ध कृतियों में 'द वॉक', 'बर्ड्स' और 'मैन एंड वुमन' शामिल हैं। उनके योगदान ने भारतीय मूर्तिकला को वैश्विक पहचान दिलाई।
प्रश्न 29
राजस्थानी चित्रशैली के शैलीगत वर्गीकरण को विस्तार से समझाते हुए, इसकी शैलीगत विशेषता बताइये। [1½ + 1½ = 3]
Define elaboration of classification of Rajasthani paintings and write characteristics of school.
उत्तर: राजस्थानी चित्रशैली का शैलीगत वर्गीकरण मुख्यतः चार प्रमुख शैलियों में किया जाता है:
- मेवाड़ शैली: यह सबसे प्राचीन शैली है, जिसमें रागमाला चित्र और कृष्ण लीला के दृश्य प्रमुख हैं। इसमें लाल, पीले और नीले रंगों का प्रयोग अधिक होता है।
- मारवाड़ शैली: इसमें जोधपुर, बीकानेर और जैसलमेर की चित्रकला शामिल है। इसमें शाही दरबारों और शिकार के दृश्यों का चित्रण प्रमुख है।
- हाड़ौती शैली: कोटा और बूंदी की इस शैली में प्रकृति चित्रण और जलाशयों के दृश्य विशेष रूप से मिलते हैं।
- ढूंढाड़ शैली: जयपुर और आमेर की इस शैली में मुगल प्रभाव स्पष्ट दिखाई देता है, जिसमें लघु चित्र और वनस्पति चित्रण प्रमुख हैं।
शैलीगत विशेषताएँ:
- चमकीले और जीवंत रंगों का प्रयोग
- सूक्ष्म रेखांकन और विस्तृत चित्रण
- धार्मिक और पौराणिक विषयों पर आधारित
- प्रकृति और वन्य जीवन का सुंदर चित्रण
- मानवीय भावनाओं का सजीव प्रदर्शन
अथवा
निम्न पर टिप्पणी लिखिए - [1½ + 1½ = 3]
i) रवीन्द्रनाथ ठाकुर ii) ई.बी. हैवेल
Write short notes on the following:
i) Ravindranath Thakur. ii) E.B. Havel.
i) रवीन्द्रनाथ ठाकुर (1861-1941): वे एक महान कवि, चित्रकार और दार्शनिक थे। उन्होंने बंगाल स्कूल ऑफ आर्ट को प्रभावित किया और अपनी चित्रकला में भावनात्मक गहराई और प्रकृति के प्रति प्रेम को दर्शाया। उनकी कृतियों में मानवीय संवेदनाओं और आध्यात्मिकता का अनूठा मिश्रण देखने को मिलता है।
ii) ई.बी. हैवेल (1861-1934): वे एक ब्रिटिश कला इतिहासकार और कला प्रशासक थे, जिन्होंने कलकत्ता के गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ आर्ट में प्रिंसिपल के रूप में कार्य किया। उन्होंने भारतीय पारंपरिक कला को पुनर्जीवित करने और पश्चिमी शैली के बजाय भारतीय शैली को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे बंगाल स्कूल ऑफ आर्ट के प्रमुख समर्थक थे।
प्रश्न 30
बंगाल शैली का आरम्भ एक आन्दोलन के रूप में हुआ, समझाते हुए बंगाल शैली के चित्रों की विशेषता बताइये। [3]
Origin of Bengal school was the movement, describe characteristics through its paintings.
उत्तर: बंगाल शैली का आरम्भ 20वीं शताब्दी के प्रारंभ में एक सांस्कृतिक आन्दोलन के रूप में हुआ, जिसे 'बंगाल स्कूल ऑफ आर्ट' या 'स्वदेशी आन्दोलन' के नाम से जाना जाता है। इसका उद्देश्य ब्रिटिश शासन के दौरान पश्चिमी कला के प्रभाव को कम करके भारतीय पारंपरिक कला को पुनर्जीवित करना था। अबनिन्द्रनाथ टैगोर और ई.बी. हैवेल इसके प्रमुख प्रवर्तक थे।
बंगाल शैली के चित्रों की विशेषताएँ:
- भारतीय पौराणिक और ऐतिहासिक विषयों पर आधारित
- मुलायम और तरल रेखाओं का प्रयोग
- जल रंग (वॉटर कलर) का प्रमुखता से उपयोग
- भावनात्मक अभिव्यक्ति और आध्यात्मिकता पर बल
- अजंता और मुगल लघु चित्रकला से प्रेरित शैली
- प्रकृति और मानवीय भावनाओं का सजीव चित्रण
अथवा
निम्न पर टिप्पणी कीजिए - [1½ + 1½ = 3]
i) बूंदी शैली ii) जयपुर शैली
Comment on the following:
i) Bundi school ii) Jaipur school
i) बूंदी शैली: यह राजस्थानी चित्रकला की हाड़ौती शैली का एक प्रमुख भाग है। इस शैली में प्रकृति चित्रण, विशेषकर जलाशयों, बगीचों और वन्य जीवन का सुंदर चित्रण मिलता है। इसमें नीले, हरे और सुनहरे रंगों का प्रयोग अधिक होता है। रागमाला चित्र और कृष्ण लीला के दृश्य इस शैली में विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं।
ii) जयपुर शैली: यह राजस्थानी चित्रकला की ढूंढाड़ शैली का भाग है। इस शैली पर मुगल चित्रकला का गहरा प्रभाव है। इसमें शाही दरबारों, शिकार के दृश्यों और वनस्पति चित्रण का विस्तृत वर्णन मिलता है। जयपुर शैली में लाल, पीले और नीले रंगों का प्रयोग प्रमुख है, और इसमें सूक्ष्म रेखांकन और सजावटी तत्वों पर विशेष ध्यान दिया जाता है।