RBSE Class 12th 2018 -SS-31-2018 Previous Year Papers

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Paper details

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Board RBSE
Class Class 12th
Exam year 2018
Subject -SS-31-2018
Resource type Previous Year Papers
Category RBSE Previous Year Question Papers
Website RBSE Solution

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Rajasthan Board Class 12th -SS-31-2018 2018 solved Previous Year Question Papers

उच्च माध्यमिक पूरक परीक्षा, 2018

SENIOR SECONDARY SUPPLEMENTARY EXAMINATION, 2018

व्यवसाय अध्ययन
BUSINESS STUDIES

समय : 3¼ घण्टे      पूर्णाक : 80


परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :
GENERAL INSTRUCTIONS TO THE EXAMINEES :

  1. परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न पत्र पर नामांक अनिवार्यतः लिखें।
    Candidate must write first of all his / her Roll No. on the question paper compulsorily.
  2. सभी प्रश्न करने अनिवार्य हैं।
    All the questions are compulsory.
  3. प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें।
    Write the answer to each question in the given answer-book only.
  4. जिन प्रश्नों में आन्तरिक खण्ड हैं, उन सभी के उत्तर एक साथ ही लिखें।
    For questions having more than one part the answers to those parts are to be written together in continuity.

SS-31-Bus. Studies    270    [ Turn Over

निर्देश (Instructions)

5) प्रश्न पत्र के हिन्दी व अंग्रेजी रूपान्तर में किसी प्रकार की त्रुटि / अन्तर / विरोधाभास होने पर हिन्दी भाषा के प्रश्न को ही सही मानें।

If there is any error / difference / contradiction in Hindi & English versions of the question paper, the question of Hindi version should be treated valid.

6) खण्ड प्रश्न संख्या अंक प्रत्येक प्रश्न उत्तर की शब्द/पृष्ठ सीमा

खण्ड (Section) प्रश्न संख्या (Q. Nos.) अंक प्रत्येक प्रश्न (Marks per question) उत्तर की शब्द/पृष्ठ सीमा (Word/page limit of answer)
A 1-8 1 20 शब्द (20 words)
B 9-27 2 आधे पृष्ठ (Half page)
C 28-30 4 एक पृष्ठ (One page)
D 31-33 6 तीन पृष्ठ (Three pages)

7) प्रश्न क्रमांक 28 से 30 में आन्तरिक विकल्प हैं।

Question Nos. 28 to 30 have internal choices.

SS-3I-Bus. Studies ॥270

खण्ड - अ / SECTION - A

  1. प्रबन्ध से आप क्या समझते हैं?
    What do you mean by management?

    उत्तर: प्रबन्ध (Management) एक सतत प्रक्रिया है जिसके अन्तर्गत संगठन के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए उपलब्ध संसाधनों (मानव, वित्तीय, भौतिक एवं सूचना) का कुशलतापूर्वक नियोजन, संगठन, निर्देशन एवं नियंत्रण किया जाता है। यह कार्यों को सही ढंग से एवं सही समय पर पूरा करने की कला एवं विज्ञान है।

  2. उदारीकरण के पूर्व व पश्चात् बाजार का स्वभाव बताइए।
    State the nature of market before and after liberalization.

    उत्तर: उदारीकरण (1991) से पूर्व भारतीय बाजार बन्द एवं संरक्षित था, जहाँ सरकारी नियंत्रण, लाइसेंस राज, आयात प्रतिबन्ध एवं सीमित प्रतिस्पर्धा थी। उदारीकरण के पश्चात् बाजार खुला, प्रतिस्पर्धात्मक एवं वैश्विक हो गया, जहाँ निजीकरण, विदेशी निवेश, आयात-निर्यात में ढील एवं उपभोक्ता-केन्द्रित दृष्टिकोण प्रमुख हो गया।

  3. प्रबन्ध प्रक्रिया का अर्थ बताइए।
    Mention the meaning of management process.

    उत्तर: प्रबन्ध प्रक्रिया से तात्पर्य उन क्रमबद्ध एवं सम्बन्धित क्रियाओं से है जिनके माध्यम से प्रबन्धक संगठन के लक्ष्यों को प्राप्त करता है। इसमें मुख्यतः नियोजन, संगठन, निर्देशन, समन्वय एवं नियंत्रण जैसे कार्य शामिल होते हैं, जो एक चक्रीय एवं सतत प्रक्रिया के रूप में कार्य करते हैं।

  4. 21वीं सदी के प्रबन्ध गुरू का नाम बताइए।
    Mention the name of management guru in twenty-first century.

    उत्तर: 21वीं सदी के प्रमुख प्रबन्ध गुरुओं में पीटर ड्रकर (Peter Drucker), स्टीफन कोवी (Stephen Covey), गैरी हैमेल (Gary Hamel), एवं सी.के. प्रहलाद (C.K. Prahalad) का नाम उल्लेखनीय है। इनमें से पीटर ड्रकर को आधुनिक प्रबन्ध का जनक माना जाता है।

  5. प्रबन्ध के सामाजिक उत्तरदायित्व को समझाइए।
    Explain the social responsibilities of business.

    उत्तर: प्रबन्ध के सामाजिक उत्तरदायित्व का अर्थ है कि व्यवसाय को केवल लाभ कमाने पर ध्यान केन्द्रित न करके समाज के प्रति अपने कर्तव्यों का निर्वाह करना चाहिए। इसमें उपभोक्ताओं को सुरक्षित उत्पाद देना, कर्मचारियों के कल्याण का ध्यान रखना, पर्यावरण संरक्षण, सामुदायिक विकास एवं नैतिक व्यवहार शामिल हैं।

  6. निगमिय सामाजिक उत्तरदायित्व का आशय स्पष्ट कीजिए।
    Clarify the meaning of corporate social responsibility.

    उत्तर: निगमिय सामाजिक उत्तरदायित्व (Corporate Social Responsibility - CSR) से तात्पर्य है कि कम्पनियाँ अपने व्यावसायिक संचालन में सामाजिक एवं पर्यावरणीय चिन्ताओं को एकीकृत करें। यह स्वैच्छिक प्रयास है जिसमें कम्पनी अपने हितधारकों (कर्मचारी, समुदाय, पर्यावरण) के प्रति जिम्मेदारी निभाती है, जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास आदि में निवेश।

  7. "नवाचार उद्यमिता का विशिष्ट उपकरण है।" समझाइए।
    Explain, "Innovation is specific tool of entrepreneurship".

    उत्तर: पीटर ड्रकर के अनुसार, नवाचार (Innovation) उद्यमिता का विशिष्ट उपकरण है क्योंकि यह उद्यमी को बदलते परिवेश में नए अवसरों की पहचान करने और उनका लाभ उठाने में सक्षम बनाता है। नवाचार के माध्यम से ही उद्यमी नए उत्पाद, सेवाएँ, प्रक्रियाएँ या व्यवसाय मॉडल विकसित करता है, जो प्रतिस्पर्धा में बढ़त दिलाते हैं।

  8. "उद्यमिता अवसर की खोज की प्रक्रिया है।" कैसे?
    "Entrepreneurship is the process of searching opportunities". How?

    उत्तर: उद्यमिता अवसर की खोज की प्रक्रिया है क्योंकि एक उद्यमी लगातार बाजार में मौजूद समस्याओं, अनसुलझी आवश्यकताओं, तकनीकी बदलावों या सामाजिक परिवर्तनों को पहचानता है। वह इन अवसरों को भुनाने के लिए नवीन विचारों को विकसित करता है, संसाधन जुटाता है और जोखिम उठाकर नया उद्यम स्थापित करता है। इस प्रकार, अवसर की पहचान एवं उसका दोहन ही उद्यमिता का मूल है।

  9. सामाजिक उत्तरदायित्व के संदर्भ में "मेरे लिए जो अच्छा है, वह मेरे देश के लिए अच्छा है" को समझाइए।
    Explain 'what's good for me is good for my country' in reference of social responsibilities.

    उत्तर: इस कथन का तात्पर्य है कि जब कोई व्यवसाय अपने हित में नैतिक एवं सामाजिक रूप से जिम्मेदार कार्य करता है, तो उसका लाभ अप्रत्यक्ष रूप से देश को भी मिलता है। उदाहरण के लिए, यदि कोई कम्पनी पर्यावरण-अनुकूल उत्पाद बनाती है, तो उसे ग्राहकों का विश्वास मिलता है (व्यवसाय के लिए अच्छा) और साथ ही पर्यावरण संरक्षण होता है (देश के लिए अच्छा)। इस प्रकार, व्यवसाय का स्वार्थ एवं सामाजिक उत्तरदायित्व एक-दूसरे के पूरक हैं।

SS-31-Bus. Studies || 270

प्रबन्ध के सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना के विकास के प्रथम स्तर को समझाइए।

Explain the first level of development of the spirit of social responsibility of management.

उत्तर: प्रबन्ध के सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना के विकास का प्रथम स्तर "सामाजिक दायित्व" (Social Obligation) है। इस स्तर पर व्यवसाय केवल कानूनी और आर्थिक बाध्यताओं का पालन करता है। उद्देश्य केवल लाभ कमाना और कानून का पालन करना होता है, सामाजिक कल्याण के लिए कोई अतिरिक्त प्रयास नहीं किए जाते।


खण्ड - ब / SECTION - B

1) उद्यमिता विकास कार्यक्रम के कोई दो उद्देश्य बताइए।

State any two objectives of entrepreneurship development programme.

उत्तर: उद्यमिता विकास कार्यक्रम के दो प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं:

  1. व्यक्तियों में उद्यमशीलता के गुणों (जैसे जोखिम लेने की क्षमता, नवाचार, नेतृत्व) का विकास करना।
  2. नए उद्योगों और व्यवसायों की स्थापना को प्रोत्साहित करके रोजगार के अवसर सृजित करना तथा आर्थिक विकास को गति देना।

2) निम्न को समझाइए:

Explain the following:

i) गर्भित अनुबन्ध (Implied contract)

उत्तर: गर्भित अनुबन्ध वह अनुबन्ध है जो पक्षकारों के मौखिक या लिखित समझौते के बिना, उनके आचरण, परिस्थितियों या कानूनी आवश्यकता से बनता है। उदाहरण के लिए, जब कोई व्यक्ति डॉक्टर के पास इलाज कराने जाता है, तो यह मान लिया जाता है कि वह फीस देने के लिए सहमत है, भले ही कोई लिखित अनुबंध न हुआ हो।

ii) प्रस्ताव (Proposal)

उत्तर: प्रस्ताव (या ऑफर) एक व्यक्ति द्वारा दूसरे व्यक्ति को किसी कार्य को करने या न करने की इच्छा व्यक्त करना है, जिस पर दूसरे व्यक्ति की सहमति मिलने पर एक वैध अनुबंध बन सकता है। उदाहरण: "मैं आपको यह पुस्तक ₹100 में बेचूंगा" एक प्रस्ताव है।

3) बीमा “जोखिम से सुरक्षा का उपाय है” कैसे?

Insurance is "Device of protection against risks" How?

उत्तर: बीमा जोखिम से सुरक्षा का उपाय है क्योंकि यह किसी अप्रत्याशित घटना (जैसे दुर्घटना, आग, चोरी, मृत्यु) से होने वाली आर्थिक हानि को कम करता है। बीमा कंपनी बीमित व्यक्ति से प्रीमियम लेती है और जोखिम होने पर उसे वित्तीय क्षतिपूर्ति प्रदान करती है। इस प्रकार, बीमा अनिश्चितता को कम करके आर्थिक सुरक्षा प्रदान करता है।

4) एश्योरेन्स व इन्श्योरेन्स में अन्तर कीजिए।

Differentiate between assurance and insurance.

आधार एश्योरेन्स (Assurance) इन्श्योरेन्स (Insurance)
अर्थ यह एक निश्चित घटना (जैसे मृत्यु) के लिए सुरक्षा प्रदान करता है, जो घटित होना निश्चित है, लेकिन समय अनिश्चित है। यह एक अनिश्चित घटना (जैसे दुर्घटना, आग) के लिए सुरक्षा प्रदान करता है, जो घटित हो भी सकती है और नहीं भी।
उदाहरण जीवन बीमा (Life Assurance) अग्नि बीमा, दुर्घटना बीमा (Fire Insurance, Accident Insurance)

5) अभिप्रेरणा को पारिभाषित कीजिए।

Define motivation.

उत्तर: अभिप्रेरणा (Motivation) वह आंतरिक या बाह्य प्रक्रिया है जो किसी व्यक्ति को एक निश्चित लक्ष्य की प्राप्ति के लिए कार्य करने के लिए प्रेरित करती है। यह व्यक्ति की आवश्यकताओं, इच्छाओं और आकांक्षाओं को सक्रिय करती है, जिससे वह अपने कार्य में उच्च स्तर का प्रयास करता है।

6. आपकी राय में, प्रबन्ध के कोई दो प्राथमिक उद्देश्यों को स्पष्ट कीजिए। [2]

In your opinion, explain any two primary objectives of management.

प्रबन्ध के दो प्राथमिक उद्देश्य:

  1. संगठनात्मक उद्देश्यों की प्राप्ति: प्रबन्ध का प्राथमिक उद्देश्य संगठन के निर्धारित लक्ष्यों (जैसे लाभ, वृद्धि, बाजार हिस्सेदारी) को प्रभावी ढंग से प्राप्त करना है। यह संसाधनों के समुचित उपयोग और समन्वय द्वारा होता है।
  2. सामाजिक उत्तरदायित्व का निर्वहन: प्रबन्ध का दूसरा प्रमुख उद्देश्य समाज के प्रति अपने दायित्वों का पालन करना है, जैसे पर्यावरण संरक्षण, रोजगार सृजन, और उपभोक्ता हितों की रक्षा।

7. आप एक नेता हैं, नेतृत्व की निम्न विशेषताओं को समझाइए- [2]

You are a leader, explain the following characteristics of leadership:

  1. प्रभावित करने की कला (Art of influencing)
  2. हितों की एकता (Community of interests)

व्याख्या:

  1. प्रभावित करने की कला: नेतृत्व में यह क्षमता होती है कि नेता अपने अनुयायियों के व्यवहार, दृष्टिकोण और कार्यों को प्रभावित कर सके। यह प्रभाव आदेश, प्रेरणा या उदाहरण द्वारा होता है, जिससे अनुयायी स्वेच्छा से नेता का अनुसरण करते हैं।
  2. हितों की एकता: नेतृत्व में नेता और अनुयायियों के हितों में समानता होती है। नेता व्यक्तिगत लक्ष्यों को संगठनात्मक लक्ष्यों से जोड़ता है, जिससे सभी एक साझा उद्देश्य की दिशा में कार्य करते हैं।

8. एक विज्ञापन एजेन्सी के रूप में, निम्न को स्पष्ट कीजिए- [2]

Being an advertising agency, explain the following:

  1. छूट (Rebate)
  2. ग्राहक से पूछताछ (Enquiry from customers)

व्याख्या:

  1. छूट (Rebate): विज्ञापन एजेन्सी द्वारा ग्राहकों को दी जाने वाली मूल्य में कटौती या वापसी राशि। यह प्रोत्साहन के रूप में दी जाती है, जैसे बल्क ऑर्डर पर छूट या समय पर भुगतान पर नकद छूट।
  2. ग्राहक से पूछताछ (Enquiry from customers): विज्ञापन एजेन्सी ग्राहकों से उनकी आवश्यकताओं, बजट, लक्षित दर्शकों और विज्ञापन अभियान के उद्देश्यों के बारे में जानकारी प्राप्त करती है। यह प्रक्रिया प्रभावी विज्ञापन रणनीति बनाने में सहायक होती है।

खण्ड - स (SECTION - C)

9. अभिप्रेरणा के महत्व के कोई चार बिन्दु बताइए। [4]

Mention any four points of importance of motivation.

अभिप्रेरणा के चार महत्वपूर्ण बिन्दु:

  1. कार्यक्षमता में वृद्धि: अभिप्रेरणा कर्मचारियों को अधिक मेहनत और समर्पण से कार्य करने के लिए प्रेरित करती है, जिससे उत्पादकता बढ़ती है।
  2. कर्मचारी संतुष्टि: प्रेरित कर्मचारी अपने कार्य से अधिक संतुष्ट रहते हैं, जिससे कार्यस्थल पर सकारात्मक वातावरण बनता है।
  3. टर्नओवर में कमी: अच्छी अभिप्रेरणा कर्मचारियों को संगठन से जोड़े रखती है, जिससे नौकरी छोड़ने की दर कम होती है।
  4. लक्ष्य प्राप्ति में सहायता: अभिप्रेरणा कर्मचारियों को संगठनात्मक लक्ष्यों की दिशा में कार्य करने के लिए प्रेरित करती है, जिससे लक्ष्यों की प्राप्ति आसान होती है।

20. संयोगिक अनुबन्ध सम्बन्धी वैधानिक प्रावधानों को समझाइए। [4]

Explain the legal provisions related with contingent contract.

संयोगिक अनुबन्ध (Contingent Contract) से सम्बन्धित वैधानिक प्रावधान (भारतीय संविदा अधिनियम, 1872 के अनुसार):

  1. परिभाषा (धारा 31): संयोगिक अनुबन्ध वह अनुबन्ध है जिसमें किसी कार्य को करने या न करने का वादा किसी भविष्य की अनिश्चित घटना के घटित होने या न होने पर निर्भर करता है।
  2. प्रवर्तनीयता (धारा 32): यदि भविष्य की घटना अनिश्चित है, तो अनुबन्ध तभी प्रवर्तनीय होगा जब वह घटना घटित हो। यदि घटना असंभव हो जाती है, तो अनुबन्ध शून्य हो जाता है।
  3. घटना के घटित होने पर निर्भर अनुबन्ध (धारा 33): यदि अनुबन्ध किसी घटना के घटित होने पर निर्भर है, तो वह तभी प्रवर्तनीय होगा जब वह घटना घटित हो।
  4. घटना के न घटित होने पर निर्भर अनुबन्ध (धारा 34): यदि अनुबन्ध किसी घटना के न घटित होने पर निर्भर है, तो वह तभी प्रवर्तनीय होगा जब वह घटना न घटित हो या उसका घटित होना असंभव हो जाए।

2. उद्यमिता के कोई चार महत्व लिखिए। [4]

Write any four importance of entrepreneurship.

उद्यमिता के चार महत्व:

  1. रोजगार सृजन: उद्यमिता नए व्यवसायों और उद्योगों की स्थापना करके बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा करती है।
  2. आर्थिक विकास: यह नवाचार, उत्पादन और सेवाओं के माध्यम से देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) और आर्थिक वृद्धि में योगदान देती है।
  3. नवाचार को बढ़ावा: उद्यमिता नए विचारों, उत्पादों और प्रौद्योगिकियों के विकास को प्रोत्साहित करती है, जिससे बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ती है।
  4. क्षेत्रीय संतुलन: उद्यमिता पिछड़े और ग्रामीण क्षेत्रों में उद्योग स्थापित करके क्षेत्रीय असमानताओं को कम करने में सहायक होती है।

खण्ड - स (Section - C)

22) अनुबन्ध पर संक्षिप्त में टिप्पणी कीजिए। [4]

अनुबन्ध (Quasi Contract) पर टिप्पणी:

अनुबन्ध वे सम्बन्ध हैं जो पक्षकारों के बीच किसी वास्तविक समझौते के अभाव में भी कानून द्वारा निर्मित होते हैं। ये वास्तविक अनुबन्ध नहीं होते, बल्कि कानून उन्हें अनुबन्ध मान लेता है ताकि न्याय और निष्पक्षता सुनिश्चित हो सके। भारतीय अनुबन्ध अधिनियम, 1872 की धारा 68 से 72 तक इन्हें नियंत्रित करती हैं। उदाहरण के लिए, यदि कोई व्यक्ति किसी दूसरे के माल का उपयोग करता है या उससे लाभ उठाता है, तो कानून उसे उस माल के मूल्य का भुगतान करने के लिए बाध्य करता है, भले ही कोई स्पष्ट अनुबन्ध न हुआ हो।

23) कम्पनी कानून 2013 के निम्न प्रावधानों को समझाइए- [4]
i) लागू होना
ii) समिति के कार्य।

कम्पनी अधिनियम 2013 के प्रावधान:

i) लागू होना (Applicability): यह अधिनियम पूरे भारत में लागू है। यह सभी प्रकार की कम्पनियों पर लागू होता है, चाहे वे सार्वजनिक हों या निजी। कुछ प्रावधान विशिष्ट प्रकार की कम्पनियों (जैसे, एक व्यक्ति कम्पनी, छोटी कम्पनी) पर अलग तरह से लागू हो सकते हैं। यह अधिनियम कम्पनी के निर्माण, संचालन, प्रबंधन और समापन से संबंधित नियम प्रदान करता है।

ii) समिति के कार्य (Functions of Committee): कम्पनी अधिनियम 2013 के तहत विभिन्न समितियों का गठन किया जाता है, जैसे लेखापरीक्षा समिति, नामांकन एवं पारिश्रमिक समिति, सतत विकास समिति आदि। इन समितियों के कार्यों में शामिल हैं: वित्तीय विवरणों की समीक्षा, आंतरिक नियंत्रण प्रणाली की निगरानी, निदेशकों की नियुक्ति और पारिश्रमिक की सिफारिश करना, तथा कम्पनी के सतत विकास से संबंधित मामलों पर ध्यान देना।

24) जी.एस.टी की कोई चार विशेषताओं को समझाइए। [4]

जी.एस.टी (GST) की चार विशेषताएँ:

  1. दोहरी संरचना (Dual Structure): जी.एस.टी को केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा संयुक्त रूप से लागू किया जाता है। इसमें केंद्रीय जी.एस.टी (CGST) और राज्य जी.एस.टी (SGST) शामिल हैं। अंतर-राज्यीय लेन-देन के लिए एकीकृत जी.एस.टी (IGST) लागू होता है।
  2. व्यापक कर (Comprehensive Tax): यह एक व्यापक अप्रत्यक्ष कर है जो वस्तुओं और सेवाओं की आपूर्ति पर लगाया जाता है। इसने केंद्र और राज्य स्तर पर लगने वाले कई अप्रत्यक्ष करों (जैसे, उत्पाद शुल्क, सेवा कर, वैट, प्रवेश कर आदि) को समाहित कर लिया है।
  3. इनपुट टैक्स क्रेडिट (Input Tax Credit): जी.एस.टी की एक प्रमुख विशेषता इनपुट टैक्स क्रेडिट की सुविधा है। इसके तहत, किसी व्यवसाय को अपने इनपुट पर चुकाए गए कर को अपने आउटपुट पर देय कर से समायोजित करने की अनुमति है, जिससे कर-पर-कर की समस्या समाप्त हो जाती है।
  4. राजस्व तटस्थता (Revenue Neutrality): जी.एस.टी को इस प्रकार डिज़ाइन किया गया है कि यह सरकार के राजस्व पर तटस्थ प्रभाव डाले। इसका उद्देश्य कर अनुपालन को सरल बनाना और कर चोरी को कम करना है, जिससे लंबे समय में राजस्व में वृद्धि हो सके।

25) जी.एस.टी के पंजीकरण आवेदन के साथ लगने वाले किन्ही चार दस्तावेजों को बताइए। [4]

जी.एस.टी पंजीकरण आवेदन के साथ आवश्यक चार दस्तावेज:

  1. आवेदक का पैन कार्ड (PAN Card)
  2. व्यवसाय का पता प्रमाण (जैसे, बिजली का बिल, किराया समझौता, या स्वामित्व दस्तावेज)
  3. आधार कार्ड (Aadhaar Card) - व्यक्तिगत पहचान के लिए
  4. बैंक खाता विवरण (Bank Account Statement) या कैंसिल चेक

26) आपके विचार से, प्रबन्ध को कला क्यों कहते हैं? [4]

प्रबन्ध को कला कहने के कारण:

प्रबन्ध को कला इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसमें कला के समान ही निम्नलिखित विशेषताएँ पाई जाती हैं:

  1. व्यक्तिगत कौशल (Personal Skill): कला की तरह प्रबन्ध में भी प्रबन्धक को अपने व्यक्तिगत ज्ञान, अनुभव और कौशल का उपयोग करना होता है।
  2. व्यावहारिक ज्ञान (Practical Knowledge): प्रबन्ध केवल सैद्धांतिक ज्ञान नहीं है, बल्कि इसे व्यवहार में लागू करना होता है, जैसे कला में कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करता है।
  3. रचनात्मकता (Creativity): प्रबन्ध में नई समस्याओं के समाधान के लिए रचनात्मक दृष्टिकोण अपनाना पड़ता है, जो कला की एक प्रमुख विशेषता है।
  4. लक्ष्य-उन्मुख (Goal-Oriented): कला की तरह प्रबन्ध का भी एक उद्देश्य होता है - संगठन के लक्ष्यों को प्राप्त करना।

27) आप एक बीमा एजेण्ट हैं, आप में क्या-क्या योग्यताएँ होनी चाहिए? [4]

बीमा एजेण्ट के लिए आवश्यक योग्यताएँ:

  1. शैक्षणिक योग्यता: कम से कम 12वीं पास होना आवश्यक है। बीमा क्षेत्र में डिग्री या डिप्लोमा अतिरिक्त लाभप्रद है।
  2. बीमा परीक्षा उत्तीर्ण: भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) द्वारा आयोजित एजेण्ट परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य है।
  3. संचार कौशल: ग्राहकों को बीमा योजनाओं को स्पष्ट रूप से समझाने और उनकी आवश्यकताओं को समझने के लिए उत्कृष्ट संचार कौशल आवश्यक है।
  4. बिक्री कौशल: बीमा पॉलिसियों को बेचने और ग्राहकों को समझाने की क्षमता होनी चाहिए।
  5. ईमानदारी और विश्वसनीयता: ग्राहकों के पैसे और विश्वास की रक्षा करना एजेण्ट का प्रमुख कर्तव्य है।

खण्ड - द (Section - D)

28) प्रबन्ध के किन्ही छ: सार्वभौमिक स्वीकार्य सिद्धान्तों का वर्णन कीजिए। [6]

प्रबन्ध के छ: सार्वभौमिक स्वीकार्य सिद्धान्त:

  1. श्रम विभाजन (Division of Work): कार्य को छोटे-छोटे भागों में बाँटने से विशेषज्ञता बढ़ती है और उत्पादकता में वृद्धि होती है।
  2. अधिकार और उत्तरदायित्व (Authority and Responsibility): जिसे अधिकार दिया जाए, उस पर उत्तरदायित्व भी होना चाहिए। दोनों का आपस में गहरा संबंध है।
  3. अनुशासन (Discipline): संगठन के नियमों और आदेशों का पालन करना आवश्यक है। अच्छा अनुशासन संगठन की सफलता के लिए महत्वपूर्ण है।
  4. एकता का आदेश (Unity of Command): प्रत्येक कर्मचारी को केवल एक ही वरिष्ठ से आदेश प्राप्त करने चाहिए। इससे भ्रम और संघर्ष की संभावना कम होती है।
  5. एकता का निर्देशन (Unity of Direction): एक ही उद्देश्य के लिए कार्य करने वाले सभी कर्मचारियों को एक ही योजना और एक ही नेतृत्व के तहत काम करना चाहिए।
  6. पारिश्रमिक (Remuneration): कर्मचारियों को उनके कार्य के अनुसार उचित और न्यायसंगत वेतन मिलना चाहिए, जो उन्हें संतुष्ट और प्रेरित रखे।

अथवा

प्रबन्ध की छ: विशेषताएँ:

  1. लक्ष्य-उन्मुख (Goal-Oriented): प्रबन्ध का उद्देश्य संगठन के निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करना होता है।
  2. सार्वभौमिक (Universal): प्रबन्ध के सिद्धान्त सभी प्रकार के संगठनों (व्यावसायिक, सरकारी, सामाजिक) पर लागू होते हैं।
  3. सतत प्रक्रिया (Continuous Process): प्रबन्ध एक सतत चलने वाली प्रक्रिया है, जो योजना, संगठन, निर्देशन, समन्वय और नियंत्रण के चरणों से गुज़रती है।
  4. अमूर्त शक्ति (Intangible Force): प्रबन्ध को देखा नहीं जा सकता, लेकिन इसके प्रभाव को संगठन के कार्यों और परिणामों में महसूस किया जा सकता है।
  5. गतिशील (Dynamic): प्रबन्ध को बदलते परिवेश और परिस्थितियों के अनुसार स्वयं को ढालना पड़ता है।
  6. समूह गतिविधि (Group Activity): प्रबन्ध में व्यक्तिगत प्रयास नहीं, बल्कि समूह के सामूहिक प्रयासों का समन्वय किया जाता है।

SS-31-Bus. Studies || 270

29. अनुबन्ध के आवश्यक तत्व / Essential Elements of a Contract

अनुबन्ध के किन्हीं छः आवश्यक तत्व (Any six essential elements of a valid contract):

  1. प्रस्ताव एवं स्वीकृति (Offer and Acceptance): एक पक्ष द्वारा प्रस्ताव दिया जाना चाहिए और दूसरे पक्ष द्वारा उसे बिना किसी शर्त के स्वीकार किया जाना चाहिए।
  2. प्रतिफल (Consideration): अनुबंध में दोनों पक्षों के बीच कुछ मूल्य का आदान-प्रदान होना चाहिए (धन, वस्तु या सेवा)।
  3. सक्षम पक्ष (Competent Parties): अनुबंध करने वाले पक्ष विधिक रूप से सक्षम होने चाहिए – वयस्क, स्वस्थ मानसिकता वाले और विधि द्वारा अयोग्य न हों।
  4. स्वतंत्र सहमति (Free Consent): सहमति बिना दबाव, धोखा, गलत बयानी या अनुचित प्रभाव के स्वतंत्र रूप से दी जानी चाहिए।
  5. वैध उद्देश्य (Lawful Object): अनुबंध का उद्देश्य विधि विरुद्ध या सार्वजनिक नीति के विपरीत नहीं होना चाहिए।
  6. लिखित एवं पंजीकृत (Writing and Registration): कुछ अनुबंध (जैसे भूमि बिक्री) को लिखित रूप में और पंजीकृत होना आवश्यक है।

अथवा

प्रस्ताव सम्बन्धी छः वैधानिक नियम (Legal provisions related to proposals):

  1. प्रस्ताव स्पष्ट, निश्चित और पूर्ण होना चाहिए।
  2. प्रस्ताव दूसरे पक्ष को सूचित किया जाना चाहिए।
  3. प्रस्ताव में स्वीकृति की शर्तें स्पष्ट होनी चाहिए।
  4. प्रस्ताव को वापस लिया जा सकता है, जब तक स्वीकृति न हो।
  5. प्रस्ताव केवल उसी व्यक्ति को किया जा सकता है जिसे वह संबोधित है।
  6. प्रस्ताव विधि द्वारा निषिद्ध नहीं होना चाहिए।

30. विपणन प्रबन्धक के कार्य / Marketing Manager Functions

विपणन प्रबन्धक के रूप में किये जाने वाले छः कार्य (Functions of a marketing manager):

  1. बाजार अनुसंधान (Market Research): उपभोक्ताओं की आवश्यकताओं, प्रतिस्पर्धा और बाजार के रुझानों का अध्ययन करना।
  2. उत्पाद योजना एवं विकास (Product Planning & Development): नए उत्पादों का डिजाइन, ब्रांडिंग और पैकेजिंग तय करना।
  3. मूल्य निर्धारण (Pricing): उत्पाद की लागत, प्रतिस्पर्धा और मांग के आधार पर उचित मूल्य निर्धारित करना।
  4. वितरण प्रबंधन (Distribution Management): उत्पाद को उपभोक्ता तक पहुँचाने के लिए चैनल (थोक, खुदरा) का चयन करना।
  5. प्रचार एवं विज्ञापन (Promotion & Advertising): उत्पाद की जानकारी देने और बिक्री बढ़ाने के लिए विज्ञापन, जनसंपर्क आदि का उपयोग करना।
  6. विक्रय प्रबंधन (Sales Management): बिक्री टीम का प्रशिक्षण, लक्ष्य निर्धारण और प्रदर्शन का मूल्यांकन करना।

अथवा

नए व्यापार में विक्रय वृद्धि के लिए छः उपभोक्ता संवर्द्धन विधियाँ (Consumer promotion methods for increasing sales):

  1. निःशुल्क नमूने (Free Samples): नए उत्पाद का परीक्षण कराने के लिए मुफ्त नमूने देना।
  2. कूपन एवं छूट (Coupons & Discounts): निश्चित मूल्य पर छूट या कूपन प्रदान करना।
  3. उपहार एवं प्रीमियम (Gifts & Premiums): उत्पाद खरीदने पर मुफ्त उपहार देना।
  4. प्रतियोगिताएँ एवं स्वीपस्टेक (Contests & Sweepstakes): ग्राहकों को भाग लेने और पुरस्कार जीतने का अवसर देना।
  5. लॉयल्टी कार्यक्रम (Loyalty Programs): बार-बार खरीदारी करने वालों को अंक या विशेष लाभ देना।
  6. प्रदर्शन एवं मेले (Demonstrations & Fairs): उत्पाद का लाइव प्रदर्शन या व्यापार मेलों में भाग लेना।