RBSE Class 12th 2018 -SS-84-2018 Previous Year Papers

You opened the RBSE Class 12th 2018 -SS-84-2018 Previous Year Papers page — a focused place to read the real previous year question paper for that subject and year. RBSE Solution keeps exam-year sets together so you can practise the same cycle your seniors faced.

Previous year papers reward patience: read instructions, note mark distribution, then attempt questions before peeking at solutions elsewhere on the site. This URL always loads the same free previous year papers content for -SS-84-2018 (2018).

Use the details table to confirm class and year, then scroll to the paper images or PDF below. More subjects from 2018 are linked later on this page.

Paper details

Quick reference for this previous year papers page — confirm board, class, and year & subject before you study.

Board RBSE
Class Class 12th
Exam year 2018
Subject -SS-84-2018
Resource type Previous Year Papers
Category RBSE Previous Year Question Papers
Website RBSE Solution

The table summarises this Previous Year Papers resource. Confirm RBSE, Class 12th, year 2018, and subject -SS-84-2018 before studying.

RBSE Solution organises previous year papers so each URL carries chapter-specific guidance — better for students and for search engines than one generic paragraph for the whole class.

How to practise with this question paper

Stage one: read the -SS-84-2018 question paper from 2018 without a timer and highlight command words — explain, prove, calculate, discuss. Stage two: attempt selected questions closed-book. Stage three: compare with solutions or teacher feedback.

Previous Year Papers work best when you log mistakes by topic, not only by question number. That log becomes your revision index before pre-boards.

RBSE Class 12th 2018 -SS-84-2018

Scroll through the Previous Year Papers pages for -SS-84-2018 (2018).

RBSE Class 12th 2018 -SS-84-2018 Previous Year Papers 0
https://rbsesolution.com
RBSE Class 12th 2018 -SS-84-2018 Previous Year Papers 1
https://rbsesolution.com
RBSE Class 12th 2018 -SS-84-2018 Previous Year Papers 2
https://rbsesolution.com
RBSE Class 12th 2018 -SS-84-2018 Previous Year Papers 3
https://rbsesolution.com
RBSE Class 12th 2018 -SS-84-2018 Previous Year Papers 4
https://rbsesolution.com
RBSE Class 12th 2018 -SS-84-2018 Previous Year Papers 5
https://rbsesolution.com
RBSE Class 12th 2018 -SS-84-2018 Previous Year Papers 6
https://rbsesolution.com

Rajasthan Board Class 12th -SS-84-2018 2018 solved Previous Year Question Papers

उच्च माध्यमिक पूरक परीक्षा, 2018

SENIOR SECONDARY SUPPLEMENTARY EXAMINATION, 2018

कृषि विज्ञान / AGRICULTURE

समय : 3¼ घण्टे    पूर्णांक : 56

No. of Questions : 30    SS-84-Agriculture (Supp.)

No. of Printed Pages : 07


परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :

GENERAL INSTRUCTIONS TO THE EXAMINEES :

  1. परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न पत्र पर नामांक अनिवार्यतः लिखें।
    Candidate must write first his / her Roll No. on the question paper compulsorily.
  2. सभी प्रश्न करने अनिवार्य हैं।
    All the questions are compulsory.
  3. प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें।
    Write the answer to each question in the given answer-book only.
  4. जिन प्रश्नों में आन्तरिक खण्ड हैं, उन सभी के उत्तर एक साथ ही लिखें।
    For questions having more than one part the answers to those parts are to be written together in continuity.
  5. प्रश्न पत्र के हिन्दी व अंग्रेजी रूपान्तर में किसी प्रकार की त्रुटि / अन्तर / विरोधाभास होने पर हिन्दी भाषा के प्रश्न को सही मानें।
    If there is any error / difference / contradiction in Hindi & English versions of the question paper, the question of Hindi version should be treated valid.

SLNo. : TT TPT.    नामांक / Roll No.

प्रश्न पत्र को खोलने के लिए यहाँ से काटिए
TEAR HERE TO OPEN THE QUESTION PAPER

SS-84-Agriculture   275   [ Turn Over ]

प्रश्न 2 से 7 (लघु उत्तरीय प्रश्न)

2. कोई दो औषधीय पौधों के नाम लिखिए।

Write the name of any two medicinal plants.

उत्तर: दो औषधीय पौधों के नाम निम्नलिखित हैं:

  1. तुलसी (Holy Basil / Ocimum sanctum)
  2. नीम (Neem / Azadirachta indica)

(अन्य उदाहरण: अश्वगंधा, एलोवेरा, हल्दी आदि भी मान्य हैं।)

3. ट्रायकोग्रामा के उपयोग से किस समस्या का नियंत्रण होता है?

Which problem is controlled by the use of Trichograma?

उत्तर: ट्रायकोग्रामा एक परजीवी ततैया (parasitic wasp) है, जिसका उपयोग कीटों के अंडों को नष्ट करके फसलों में कीट समस्या के जैविक नियंत्रण के लिए किया जाता है। यह विशेष रूप से तना छेदक (stem borer) और अन्य कीटों के अंडों में अपने अंडे देकर उन्हें नष्ट कर देता है।

4. मक्का की फसल में बुवाई के कितने दिन बाद एट्राजिन खरपतवारनाशी का प्रयोग किया जाता है?

After how many days of sowing of Maize crop one should use the Atrazin weedicide?

उत्तर: मक्का की फसल में बुवाई के 2-3 दिनों के भीतर (अंकुरण से पहले) एट्राजिन खरपतवारनाशी का प्रयोग किया जाता है। इसे बुवाई के तुरंत बाद या पहली सिंचाई से पहले छिड़काव करना चाहिए ताकि खरपतवार अंकुरित होने से पहले ही नष्ट हो जाएं।

5. पौधों में नत्रजन की कमी के कोई दो लक्षण लिखिए।

Write any two symptoms of nitrogen deficiency in plants.

उत्तर: पौधों में नत्रजन (नाइट्रोजन) की कमी के दो प्रमुख लक्षण:

  1. पत्तियों का पीला पड़ना (क्लोरोसिस): पुरानी पत्तियां पीली हो जाती हैं, विशेषकर निचली पत्तियों में यह लक्षण पहले दिखाई देता है।
  2. पौधों की वृद्धि रुक जाना: पौधे बौने रह जाते हैं, तने पतले होते हैं और पत्तियां छोटी रह जाती हैं।

6. मक्का में जिंक की कमी की पहचान कैसे करेंगे?

How could you identify deficiency of Zinc in maize crop?

उत्तर: मक्का में जिंक की कमी की पहचान निम्नलिखित लक्षणों से की जा सकती है:

  • सफेद धब्बे: नई पत्तियों के आधार पर सफेद या पीले धब्बे (white bands) दिखाई देते हैं।
  • पत्तियों का मुड़ना: पत्तियां मुड़ जाती हैं और उनके किनारे सूखने लगते हैं।
  • बौनी वृद्धि: पौधों की वृद्धि रुक जाती है और बालियां छोटी रह जाती हैं।

7. (क) हरी खाद किसे कहते हैं?

What is green manure?

उत्तर: हरी खाद (Green Manure) वह जैविक खाद है जो हरे पौधों (जैसे ढैंचा, सनई, लोबिया आदि) को खेत में जुताई करके मिट्टी में मिला देने से प्राप्त होती है। इन पौधों को उगाकर फूल आने से पहले मिट्टी में दबा दिया जाता है, जिससे मिट्टी में कार्बनिक पदार्थ और पोषक तत्वों की मात्रा बढ़ जाती है।

7. (ख) सांद्रित कार्बनिक खाद के कोई दो उदाहरण दीजिए।

Give any two examples of concentrated organic manure.

उत्तर: सांद्रित कार्बनिक खाद (Concentrated Organic Manure) के दो उदाहरण:

  1. खली (Oil cakes): सरसों की खली, मूंगफली की खली आदि।
  2. रक्त खाद (Blood meal) या अस्थि खाद (Bone meal): ये पशु उत्पादों से प्राप्त सांद्रित खाद हैं।

8. बाजरा में बीज दर प्रति हैक्टर लिखिए।

Write per hectare seed rate in maize crop.

उत्तर: बाजरा (मक्का) में बीज दर 20-25 किग्रा प्रति हैक्टर होती है।

Answer: The seed rate for maize (bajra) crop is 20-25 kg per hectare.

9. ज्वार फसल में तनाछेदक कीट के नियंत्रण हेतु किसान को सुझाव दीजिए।

Give suggestion to a farmer for control of stemborer in sorghum crop.

उत्तर: ज्वार फसल में तनाछेदक कीट के नियंत्रण हेतु निम्नलिखित सुझाव दिए जा सकते हैं:

  • प्रभावित पौधों को उखाड़कर नष्ट करें।
  • फसल कटाई के बाद खेत की गहरी जुताई करें।
  • कार्बोफ्यूरान 3G या क्लोरपाइरीफॉस 20 EC का प्रयोग करें।
  • जैविक नियंत्रण के लिए ट्राइकोग्रामा अंड परजीवी का उपयोग करें।

Answer: For control of stemborer in sorghum crop, the following suggestions can be given:

  • Remove and destroy affected plants.
  • Deep ploughing after harvest.
  • Use Carbofuran 3G or Chlorpyrifos 20 EC.
  • Use Trichogramma egg parasitoid for biological control.

10. यदि किसान के पास दो सिंचाई का पानी हो तो सुझाव दीजिए कि वह चने की फसल में किन दो क्रांतिक अवस्थाओं में सिंचाई करेगा?

If a farmer have water for two irrigations than suggest the two critical stages.

उत्तर: चने की फसल में दो सिंचाई के लिए क्रांतिक अवस्थाएँ निम्नलिखित हैं:

  1. फूल आने की अवस्था (Flowering stage): यह अवस्था फसल के लिए सबसे महत्वपूर्ण होती है।
  2. फली भरने की अवस्था (Pod filling stage): इस अवस्था में सिंचाई से उपज में वृद्धि होती है।

Answer: The two critical stages for irrigation in chickpea crop are:

  1. Flowering stage: This is the most critical stage for the crop.
  2. Pod filling stage: Irrigation at this stage increases yield.

11. फव्वारा नोजल का चित्र बनाइये।

Draw a diagram of sprinkler nozzle.

उत्तर: फव्वारा नोजल का चित्र नीचे दर्शाया गया है:

        /\
       /  \
      /    \
     /______\
    |        |
    |  Nozzle|
    |________|
        ||
       /  \
      /    \
     /______\
    |  Pipe  |
    |________|
  

Answer: The diagram of a sprinkler nozzle is shown above.

12. विटामिन डी की कमी से होने वाले किसी एक रोग का नाम लिखिए।

Write the name of any one disease due to deficiency of vitamin D.

उत्तर: विटामिन डी की कमी से रिकेट्स (Rickets) रोग होता है।

Answer: Deficiency of vitamin D causes Rickets disease.

13. सब्जियों को पकाते समय आप कौनसी दो सावधानियाँ रखेंगे?

Write any two precautions taken by you during cooking vegetables.

उत्तर: सब्जियों को पकाते समय निम्नलिखित दो सावधानियाँ रखनी चाहिए:

  1. सब्जियों को अधिक न पकाएं ताकि उनके पोषक तत्व नष्ट न हों।
  2. सब्जियों को ढककर पकाएं ताकि विटामिन और खनिज सुरक्षित रहें।

Answer: Two precautions during cooking vegetables are:

  1. Do not overcook vegetables to preserve nutrients.
  2. Cook vegetables with a lid to retain vitamins and minerals.

14. गेहूँ की फसल के किन्हीं चार खरपतवारों के नाम लिखिए।

Write the names of any four weeds of wheat crop.

उत्तर: गेहूँ की फसल के चार प्रमुख खरपतवार निम्नलिखित हैं:

  1. गेहूँ का कनक (Wild oat / जई)
  2. हिरनखुरी (Chenopodium album / बथुआ)
  3. मोथा (Cyperus rotundus / नागरमोथा)
  4. दूब (Cynodon dactylon / बरमूडा घास)

Answer: Four common weeds of wheat crop are:

  1. Wild oat (Avena fatua)
  2. Chenopodium album (Lamb's quarters)
  3. Cyperus rotundus (Purple nutsedge)
  4. Cynodon dactylon (Bermuda grass)

15. मृदा उर्वरता व मृदा उत्पादकता में कोई दो अंतर स्पष्ट कीजिए।

Explain any two differences between soil fertility & soil productivity.

उत्तर: मृदा उर्वरता और मृदा उत्पादकता में दो अंतर निम्नलिखित हैं:

क्रमांक मृदा उर्वरता (Soil Fertility) मृदा उत्पादकता (Soil Productivity)
1. यह मृदा में पोषक तत्वों की उपलब्धता को दर्शाती है। यह मृदा की फसल उत्पादन क्षमता को दर्शाती है।
2. उर्वरता मृदा का एक गुण है जो पोषक तत्वों पर निर्भर करता है। उत्पादकता मृदा के सभी गुणों (जल, वायु, संरचना आदि) पर निर्भर करती है।

Answer: Two differences between soil fertility and soil productivity are:

S.No. Soil Fertility Soil Productivity
1. It indicates the availability of nutrients in the soil. It indicates the crop production capacity of the soil.
2. Fertility is a property of soil that depends on nutrients. Productivity depends on all soil properties (water, air, structure, etc.).

प्रश्न 6

राजस्थान की पीली भूरी मृदाओं की विशेषताओं का संक्षिप्त वर्णन कीजिए। [2]

Describe in brief the characteristics of yellow brown soils of Rajasthan.

विशेषताएँ:

  • ये मृदाएँ हल्की बनावट वाली, रेतीली दोमट होती हैं।
  • इनमें जल धारण क्षमता कम होती है।
  • इनका रंग पीला से भूरा होता है, जो आयरन ऑक्साइड की उपस्थिति के कारण होता है।
  • ये मृदाएँ फॉस्फोरस और नाइट्रोजन जैसे पोषक तत्वों में कम होती हैं।
  • ये मुख्यतः राजस्थान के पूर्वी और दक्षिणी भागों में पाई जाती हैं।

प्रश्न 7

फसल विविधता को परिभाषित कीजिए। इसके कोई दो महत्व भी लिखिए। [2]

Define crop diversity. Also write any two importance of it.

परिभाषा: फसल विविधता से तात्पर्य किसी क्षेत्र में उगाई जाने वाली विभिन्न प्रकार की फसलों की विविधता से है, जिसमें अनाज, दलहन, तिलहन, सब्जियाँ, फल आदि शामिल हैं।

महत्व:

  1. यह मृदा की उर्वरता बनाए रखने में सहायक होती है क्योंकि विभिन्न फसलें अलग-अलग पोषक तत्वों का उपयोग करती हैं।
  2. यह कीटों और रोगों के प्रकोप को कम करती है, जिससे फसल सुरक्षा बढ़ती है।

प्रश्न 8

बाड़ (हेज) एवम् कोर सज्जा (एज) में अंतर स्पष्ट कीजिए। [2]

Differentiate between hedge and edge.

बाड़ (हेज) कोर सज्जा (एज)
यह झाड़ियों या पौधों की एक पंक्ति होती है जो सीमा निर्धारण या सुरक्षा के लिए लगाई जाती है। यह बगीचे या फूलों की क्यारी के किनारे पर सजावटी पौधों की एक पंक्ति होती है।
इसका मुख्य उद्देश्य सुरक्षा और सीमा चिह्नित करना है। इसका मुख्य उद्देश्य सौंदर्यीकरण और सजावट है।
यह आमतौर पर ऊँची और घनी होती है। यह आमतौर पर नीची और सीमित ऊँचाई वाली होती है।

प्रश्न 9

फलोद्यान के लिए स्थान का चुनाव करते समय बागवान को किन दो बिन्दुओं पर ध्यान देना चाहिए? [2]

Suggest two points of consideration for gardener while selecting site for orchard.

  1. जल निकासी: स्थान में अच्छी जल निकासी होनी चाहिए ताकि जलभराव न हो, जो फलों के पेड़ों की जड़ों को नुकसान पहुँचा सकता है।
  2. मृदा की उर्वरता: मृदा उपजाऊ होनी चाहिए और इसमें आवश्यक पोषक तत्वों की पर्याप्त मात्रा होनी चाहिए ताकि पेड़ों की अच्छी वृद्धि हो सके।

प्रश्न 20

पूरक वृक्ष किसे कहते हैं? इसके दो उदाहरण दीजिए। [2]

What is filler tree? Give any two examples of it.

परिभाषा: पूरक वृक्ष वे पौधे होते हैं जिन्हें बगीचे में मुख्य फलदार पेड़ों के बीच खाली स्थान को भरने के लिए लगाया जाता है, जब तक कि मुख्य पेड़ पूर्ण आकार नहीं ले लेते। ये अस्थायी पौधे होते हैं जो जल्दी फल देते हैं।

उदाहरण:

  1. पपीता (Papaya)
  2. केला (Banana)

प्रश्न 2 (संभवतः प्रश्न 21)

काटछांट व सधाई में अंतर स्पष्ट कीजिए। [2]

Differentiate between pruning and training.

काटछांट (Pruning) सधाई (Training)
इसमें पौधे के कुछ भागों (जैसे शाखाओं, टहनियों) को काटकर हटाया जाता है। इसमें पौधे को एक विशेष आकार या ढाँचा देने के लिए उसकी शाखाओं को निर्देशित किया जाता है।
इसका उद्देश्य पौधे के स्वास्थ्य, उत्पादन और आकार को नियंत्रित करना है। इसका उद्देश्य पौधे को एक मजबूत और वांछित संरचना प्रदान करना है।
यह आमतौर पर परिपक्व पौधों पर किया जाता है। यह आमतौर पर युवा पौधों पर किया जाता है।

प्रश्न 22

साधारण दाब विधि का चित्र बनाइए। [2]

Draw a diagram of simple layering method.

साधारण दाब विधि का विवरण: इस विधि में, एक शाखा को मोड़कर जमीन में दबा दिया जाता है, जबकि उसका सिरा बाहर रहता है। दबे हुए भाग से जड़ें निकलती हैं, जिससे एक नया पौधा तैयार होता है।

(चित्र: एक शाखा को मोड़कर मिट्टी में दबाया गया है, जिसमें से जड़ें निकल रही हैं।)

प्रश्न 23

शर्बरी बोर्डर किसे कहते हैं? शर्बरी बोर्डर के लिए दो ऊँचाई वाली झाड़ियों के नाम सुझाइए। [2]

What is shrubbery border? Suggest name of two tall shrubs for shrubbery border.

परिभाषा: शर्बरी बोर्डर बगीचे या पार्क में झाड़ियों की एक सीमा या पंक्ति होती है, जिसे सजावटी उद्देश्यों के लिए लगाया जाता है। यह एक प्रकार की हरी दीवार या सीमा का काम करती है।

दो ऊँचाई वाली झाड़ियों के नाम:

  1. हिबिस्कस (Hibiscus)
  2. बोगनविलिया (Bougainvillea)

24. फसलों की जलमांग की परिभाषा लिखिए | जलवायु जलमांग को किस तरह प्रभावित करती है?

फसलों की जलमांग की परिभाषा: फसलों की जलमांग से तात्पर्य उस कुल जल की मात्रा से है जो किसी फसल को उसकी पूर्ण वृद्धि और विकास के लिए आवश्यक होती है, जिसमें वाष्पोत्सर्जन (evapotranspiration) और अन्य हानियाँ शामिल होती हैं।

जलवायु का प्रभाव: जलवायु जलमांग को निम्नलिखित प्रकार से प्रभावित करती है:

  • तापमान: उच्च तापमान पर वाष्पीकरण और वाष्पोत्सर्जन की दर बढ़ जाती है, जिससे जलमांग बढ़ती है।
  • आर्द्रता: कम आर्द्रता (शुष्क वायु) में जलमांग अधिक होती है, जबकि उच्च आर्द्रता में यह कम होती है।
  • वायु की गति: तेज हवाएँ वाष्पोत्सर्जन को बढ़ाकर जलमांग को बढ़ा देती हैं।
  • सूर्य का प्रकाश: अधिक धूप और लंबे दिन के कारण प्रकाश-संश्लेषण और वाष्पोत्सर्जन बढ़ता है, जिससे जलमांग बढ़ती है।

सारांश: जलवायु के तत्व (तापमान, आर्द्रता, वायु, प्रकाश) फसलों की जलमांग को सीधे प्रभावित करते हैं। गर्म, शुष्क और हवादार जलवायु में जलमांग अधिक होती है, जबकि ठंडी और आर्द्र जलवायु में यह कम होती है।

25. फल परिरक्षण को परिभाषित कीजिए | शर्करा व लवण खाद्य पदार्थों के परिरक्षण में किस प्रकार सहायक है?

फल परिरक्षण की परिभाषा: फल परिरक्षण वह प्रक्रिया है जिसमें फलों को खराब होने (सड़न, फफूंदी, जीवाणु वृद्धि) से बचाने के लिए विभिन्न विधियों (जैसे शर्करा, लवण, सुखाना, डिब्बाबंदी) का उपयोग किया जाता है, जिससे उनकी शेल्फ लाइफ बढ़ जाती है।

शर्करा और लवण की भूमिका:

  • शर्करा (चीनी): उच्च सांद्रता में शर्करा परासरणी दाब (osmotic pressure) बढ़ाकर सूक्ष्मजीवों (जीवाणु, फफूंद) से जल निकाल लेती है, जिससे वे नष्ट हो जाते हैं या उनकी वृद्धि रुक जाती है। यह जैम, जेली, मुरब्बा आदि में प्रयोग होती है।
  • लवण (नमक): नमक भी परासरणी दाब बढ़ाकर सूक्ष्मजीवों को निर्जलित करता है। यह अचार, सब्जियों के परिरक्षण में उपयोगी है। नमक एंजाइमों की क्रिया को भी रोकता है और खाद्य पदार्थों में नमी को कम करता है।

व्याख्या: शर्करा और लवण दोनों ही उच्च सांद्रता पर सूक्ष्मजीवों के लिए प्रतिकूल वातावरण बनाते हैं, जिससे खाद्य पदार्थ लंबे समय तक सुरक्षित रहते हैं।

26. “जैविक खरपतवार नियंत्रण” क्या है? इसे अपनाने में आने वाली चार कठिनाईयों का उल्लेख कीजिए |

जैविक खरपतवार नियंत्रण की परिभाषा: जैविक खरपतवार नियंत्रण वह विधि है जिसमें खरपतवारों को नियंत्रित करने के लिए जीवित जीवों (जैसे कीट, रोगजनक, प्रतिस्पर्धी पौधे) का उपयोग किया जाता है, न कि रासायनिक खरपतवारनाशियों का।

चार कठिनाइयाँ:

  1. धीमी प्रक्रिया: जैविक नियंत्रण में परिणाम दिखने में लंबा समय लगता है, जबकि रासायनिक विधियाँ तत्काल प्रभाव देती हैं।
  2. विशिष्टता: अधिकांश जैविक नियंत्रण एजेंट केवल एक विशेष खरपतवार प्रजाति पर प्रभावी होते हैं, जिससे विविध खरपतवारों वाले क्षेत्रों में यह विधि अप्रभावी हो सकती है।
  3. पारिस्थितिकी असंतुलन: कभी-कभी नियंत्रण के लिए लाए गए जीव स्वयं आक्रामक हो सकते हैं और लाभकारी पौधों या जीवों को नुकसान पहुँचा सकते हैं।
  4. जलवायु पर निर्भरता: जैविक एजेंटों की प्रभावशीलता तापमान, आर्द्रता और मौसम पर निर्भर करती है, जिससे यह विधि सभी परिस्थितियों में विश्वसनीय नहीं होती।

अथवा

“खरपतवार नाशी रसायन” से क्या अभिप्राय है?

खरपतवार नाशी रसायन (वीडीसाइड) की परिभाषा: खरपतवार नाशी रसायन वे रासायनिक पदार्थ हैं जिनका उपयोग अवांछित पौधों (खरपतवारों) को नष्ट करने या उनकी वृद्धि को रोकने के लिए किया जाता है।

रासायनिक खरपतवार नियंत्रण के चार लाभ:

  1. त्वरित प्रभाव: रासायनिक वीडीसाइड तेजी से काम करते हैं और खरपतवारों को शीघ्र नष्ट कर देते हैं।
  2. श्रम की बचत: हाथ से निराई-गुड़ाई की तुलना में रासायनिक नियंत्रण में कम श्रम और समय लगता है।
  3. चयनात्मकता: कई वीडीसाइड चयनात्मक होते हैं, जो केवल खरपतवारों को मारते हैं और फसल को नुकसान नहीं पहुँचाते।
  4. बड़े क्षेत्रों में प्रभावी: रासायनिक विधि बड़े खेतों में आसानी से लागू की जा सकती है और व्यापक नियंत्रण प्रदान करती है।

27. जैम व जेली में अंतर स्पष्ट कीजिए | जैली निर्माण के समय पैक्टिन की जांच कैसे करेंगे?

जैम और जेली में अंतर:

क्र. जैम (Jam) जेली (Jelly)
1. इसमें फल के टुकड़े या गूदा मौजूद होता है। यह फल के रस से बनाई जाती है, इसमें फल के टुकड़े नहीं होते।
2. बनावट गाढ़ी और दानेदार होती है। बनावट पारदर्शी, चिकनी और जेल जैसी होती है।
3. इसमें पेक्टिन की मात्रा कम हो सकती है। जेली बनाने के लिए पर्याप्त पेक्टिन आवश्यक है।
4. इसे फलों के गूदे को चीनी के साथ पकाकर बनाया जाता है। इसे फलों के रस को चीनी और पेक्टिन के साथ पकाकर बनाया जाता है।

जेली निर्माण में पेक्टिन की जांच: जेली बनाते समय पेक्टिन की जांच के लिए निम्नलिखित विधि अपनाई जाती है:

  1. थोड़ी मात्रा में फलों का रस लें और उसे ठंडा करें।
  2. इसमें समान मात्रा में एथिल अल्कोहल (90% या अधिक) मिलाएँ।
  3. यदि रस में पर्याप्त पेक्टिन है, तो अल्कोहल मिलाने पर एक जेल जैसा थक्का (clot) बन जाएगा।
  4. यदि थक्का नहीं बनता या बहुत कमजोर है, तो पेक्टिन की मात्रा कम है और जेली बनाने के लिए बाहरी पेक्टिन मिलाना आवश्यक होगा।

अथवा

डिब्बाबन्दी व बोतलबन्दी में अंतर स्पष्ट कीजिए | किसान को बोतल बन्दी के दो लाभ सुझाइए |

डिब्बाबंदी और बोतलबंदी में अंतर:

क्र. डिब्बाबंदी (Canning) बोतलबंदी (Bottling)
1. इसमें धातु के डिब्बों का उपयोग होता है। इसमें कांच की बोतलों का उपयोग होता है।
2. डिब्बे हल्के और टिकाऊ होते हैं, परिवहन में सुविधाजनक। बोतलें भारी और नाजुक होती हैं, परिवहन में सावधानी आवश्यक।
3. डिब्बे में उत्पाद को लंबे समय तक संग्रहीत किया जा सकता है। बोतलों में उत्पाद दिखाई देता है, जो विपणन में लाभदायक है।
4. डिब्बे खोलने के बाद पुन: उपयोग नहीं किए जा सकते। बोतलों को धोकर पुन: उपयोग किया जा सकता है।

किसान को बोतलबंदी के दो लाभ:

  1. उत्पाद की दृश्यता: बोतलबंदी में उत्पाद (जैसे जूस, अचार) दिखाई देता है, जिससे ग्राहक गुणवत्ता देखकर खरीद सकते हैं, जिससे बिक्री बढ़ती

प्रश्न 29

कपास की वैज्ञानिक खेती का वर्णन निम्नलिखित बिन्दुओं के आधार पर कीजिए :

  1. चार उन्नत किस्में
  2. बीज दर प्रति हैक्टर
  3. बीज उपचार
  4. दो प्रमुख कीट

अथवा

चने की वैज्ञानिक खेती का वर्णन निम्नलिखित बिन्दुओं के आधार पर कीजिए :

  1. चार उन्नत किस्में
  2. बीज दर प्रति हैक्टर
  3. बीज उपचार
  4. दो प्रमुख कीट

Describe the Scientific cultivation of cotton on the basis of following points :

  1. Four improved varieties
  2. Seed rate per hectare
  3. Seed treatment
  4. Two important pest

OR

Describe the scientific cultivation of gram crop on the basis of following points :

  1. Four improved varieties
  2. Seed rate per hectare
  3. Seed treatment
  4. Two important pest

उत्तर (कपास की वैज्ञानिक खेती)

  1. चार उन्नत किस्में: आर.एच.एच.-100, आर.एच.एच.-200, आर.एच.एच.-300, और आर.एच.एच.-400 (राजस्थान के लिए उपयुक्त)।
  2. बीज दर प्रति हैक्टर: कपास के लिए बीज दर 15-20 किग्रा प्रति हैक्टर (बीज के आकार और किस्म पर निर्भर करता है)।
  3. बीज उपचार: बीज को बुवाई से पहले कवकनाशी (जैसे थीरम या कार्बेन्डाजिम) से उपचारित करें ताकि मृदा जनित रोगों से बचाव हो।
  4. दो प्रमुख कीट: गुलाबी सुंडी (Pink bollworm) और हरा तेला (Jassid) कपास के प्रमुख कीट हैं।

उत्तर (चने की वैज्ञानिक खेती)

  1. चार उन्नत किस्में: राजस्थान चना-1, राजस्थान चना-2, राजस्थान चना-3, और राजस्थान चना-4 (राजस्थान के लिए विकसित)।
  2. बीज दर प्रति हैक्टर: चने के लिए बीज दर 60-80 किग्रा प्रति हैक्टर (बीज के आकार और किस्म पर निर्भर करता है)।
  3. बीज उपचार: बीज को बुवाई से पहले राइजोबियम कल्चर और कवकनाशी (जैसे थीरम) से उपचारित करें ताकि जड़ ग्रंथियों का निर्माण और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़े।
  4. दो प्रमुख कीट: चने की इल्ली (Gram pod borer) और चने का माहू (Aphid) चने के प्रमुख कीट हैं।

30) पपीते की वैज्ञानिक खेती का वर्णन निम्नलिखित बिन्दुओं के आधार पर कीजिए :

i) जलवायु (Climate)

पपीते की खेती के लिए उष्ण एवं उपोष्ण जलवायु उपयुक्त होती है। इसके लिए 25°C से 30°C तापमान तथा 100-150 सेमी वार्षिक वर्षा आवश्यक है। पाला एवं अत्यधिक वर्षा पौधों के लिए हानिकारक होती है।

ii) चार उन्नत किस्में (Four Improved Varieties)

  • पूसा ड्वार्फ: छोटे कद की किस्म, अधिक उपज देने वाली।
  • पूसा जाइंट: बड़े फल वाली, अधिक उपज देने वाली किस्म।
  • कोयम्बटूर-1: मध्यम आकार के फल, रोग प्रतिरोधी।
  • रेड लेडी: लाल गूदे वाली, मीठे स्वाद की किस्म।

iii) पौध रोपण (Plantation)

पौध रोपण के लिए 2 मीटर x 2 मीटर की दूरी पर गड्ढे तैयार किए जाते हैं। गड्ढों में अच्छी सड़ी गोबर की खाद मिलाई जाती है। रोपण का उपयुक्त समय जून-जुलाई (वर्षा ऋतु) या फरवरी-मार्च (वसंत ऋतु) है। प्रति गड्ढे में 2-3 बीज बोए जाते हैं।

iv) विरलन (Thinning)

जब पौधे 15-20 सेमी ऊँचे हो जाएं, तब कमजोर पौधों को हटाकर प्रति गड्ढे में केवल एक स्वस्थ पौधा रखा जाता है। इस प्रक्रिया को विरलन कहते हैं। इससे पौधों को पर्याप्त स्थान, प्रकाश एवं पोषक तत्व मिलते हैं, जिससे उपज बढ़ती है।

अथवा

आलू की वैज्ञानिक खेती का वर्णन निम्नलिखित बिन्दुओं के आधार पर कीजिए :

i) जलवायु (Climate)

आलू की खेती के लिए ठंडी जलवायु उपयुक्त होती है। कंद निर्माण के लिए 15°C-20°C तापमान आदर्श है। अधिक गर्मी या पाला फसल को नुकसान पहुंचाता है। पर्याप्त नमी एवं धूप की आवश्यकता होती है।

ii) चार उन्नत किस्में (Four Improved Varieties)

  • कुफरी चंद्रमुखी: अधिक उपज देने वाली, पछेती झुलसा रोग प्रतिरोधी।
  • कुफरी बहार: जल्दी पकने वाली, उत्तर भारत के मैदानों के लिए उपयुक्त।
  • कुफरी सिंदूरी: लाल छिलके वाली, अधिक उपज देने वाली।
  • कुफरी ज्योति: सफेद छिलके वाली, विभिन्न रोगों के प्रति सहनशील।

iii) बीज उपचार (Seed Treatment)

बीज कंदों को रोपण से पहले कवकनाशी (जैसे- मैंकोजेब 0.2%) या बोर्डो मिश्रण से उपचारित किया जाता है। इससे कंदों में लगने वाले रोगों (जैसे- झुलसा, स्कैब) से बचाव होता है। उपचार के बाद कंदों को छाया में सुखाकर रोपण करना चाहिए।

iv) मिट्टी चढ़ाने का उपयुक्त समय (Appropriate Time of Mounting)

मिट्टी चढ़ाने (हिलिंग) की प्रक्रिया रोपण के 20-25 दिन बाद, जब पौधे 15-20 सेमी ऊँचे हो जाएं, की जाती है। दूसरी बार मिट्टी चढ़ाने का कार्य रोपण के 40-45 दिन बाद किया जाता है। इससे कंदों का विकास अच्छा होता है, खरपतवार नियंत्रण होता है, और कंद हरे नहीं होते।