RBSE Class 12th 2018 Agriculture-SS-84-2018 Previous Year Papers
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Paper details
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| Board | RBSE |
|---|---|
| Class | Class 12th |
| Exam year | 2018 |
| Subject | Agriculture-SS-84-2018 |
| Resource type | Previous Year Papers |
| Category | RBSE Previous Year Question Papers |
| Website | RBSE Solution |
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RBSE Class 12th 2018 Agriculture-SS-84-2018
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Rajasthan Board Class 12th Agriculture-SS-84-2018 2018 solved Previous Year Question Papers
उच्च माध्यमिक परीक्षा, 2018
SENIOR SECONDARY EXAMINATION, 2018
कृषि विज्ञान
AGRICULTURE
समय : 3¼ घण्टे पूर्णांक : 56
No. of Questions : 30 Code : SS-84-Agriculture
No. of Printed Pages : 07
परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :
GENERAL INSTRUCTIONS TO THE EXAMINEES :
-
परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न पत्र पर नामांक अनिवार्यत: लिखें।
Candidate must write first his / her Roll No. on the question paper compulsorily. -
सभी प्रश्न करने अनिवार्य हैं।
All the questions are compulsory. -
प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें।
Write the answer to each question in the given answer-book only. -
जिन प्रश्नों में आन्तरिक खण्ड हैं, उन सभी के उत्तर एक साथ ही लिखें।
For questions having more than one part the answers to those parts are to be written together in continuity. -
प्रश्न पत्र के हिन्दी व अंग्रेजी रूपान्तर में किसी प्रकार की त्रुटि / अन्तर / विरोधाभास होने पर हिन्दी भाषा के प्रश्न को सही मानें।
If there is any error / difference / contradiction in Hindi & English versions of the question paper, the question of Hindi version should be treated valid.
Tear Here
प्रश्न पत्र को खोलने के लिए यहाँ से काटिए
TEAR HERE TO OPEN THE QUESTION PAPER
SS-84-Agriculture 4072 [ Turn Over
प्रश्न 2 से 7 (लघु उत्तरीय प्रश्न)
प्रश्न 2
टिकाऊ खेती की परिभाषा लिखिए । [2]
Write the definition of sustainable farming.
उत्तर: टिकाऊ खेती (Sustainable Farming) एक ऐसी कृषि पद्धति है जो पर्यावरणीय स्वास्थ्य, आर्थिक लाभप्रदता, और सामाजिक एवं आर्थिक समानता को बनाए रखते हुए वर्तमान और भविष्य की पीढ़ियों की खाद्य एवं वस्त्र आवश्यकताओं को पूरा करती है। इसमें प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण, जैव विविधता को बढ़ावा देना, और रासायनिक आदानों के उपयोग को न्यूनतम करना शामिल है।
प्रश्न 3
पूसा का पूरा नाम लिखिए । [2]
Write full name of "PUSA".
उत्तर: PUSA का पूरा नाम “भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान” (Indian Agricultural Research Institute – IARI) है। यह नई दिल्ली में स्थित एक प्रमुख कृषि अनुसंधान संस्थान है, जिसे पूसा के नाम से भी जाना जाता है।
प्रश्न 4
मूंगफली की फसल में बुआई के कितने दिन बाद “पेन्डीमिथेलिन” खरपतवार नाशी के प्रयोग का सुझाव देंगे । [2]
Suggest after how many days of sowing of groundnut crop the weedicide "Pendimethaline" should be used.
उत्तर: मूंगफली की फसल में बुआई के 2 से 3 दिन बाद (बुआई के तुरंत बाद या अंकुरण से पहले) “पेन्डीमिथेलिन” खरपतवार नाशी का प्रयोग करने का सुझाव दिया जाता है। यह एक पूर्व-उद्भव (pre-emergence) खरपतवारनाशी है, जो खरपतवारों के अंकुरण को रोकता है।
प्रश्न 5
यदि नींबू पर पीले धब्बे दिखाई देते हैं तो इस रोग के निवारण हेतु आवश्यक तत्व सुझाइये । [2]
If yellow spots appear on Lemon, suggest necessary elements for remedy of this disease.
उत्तर: नींबू पर पीले धब्बे दिखाई देने पर यह जिंक (Zinc) की कमी का लक्षण हो सकता है। इस रोग के निवारण हेतु जिंक सल्फेट (ZnSO₄) का 0.5% घोल बनाकर पत्तियों पर छिड़काव करना चाहिए। इसके अलावा, मैग्नीशियम (Mg) की कमी से भी पीले धब्बे हो सकते हैं, अतः मैग्नीशियम सल्फेट का प्रयोग भी लाभदायक होता है।
प्रश्न 6
विटामिन “डी” की कमी से होने वाले एक रोग का नाम लिखिए । [2]
Write the name of a disease caused by deficiency of Vitamin "D".
उत्तर: विटामिन “डी” की कमी से होने वाला एक प्रमुख रोग “रिकेट्स” (Rickets) है। यह रोग बच्चों में हड्डियों के मुलायम और कमजोर होने का कारण बनता है। वयस्कों में इस कमी से ऑस्टियोमैलेशिया (Osteomalacia) नामक रोग हो सकता है।
प्रश्न 7
कम्पोस्टिंग किसे कहते हैं? [2]
What is Composting?
उत्तर: कम्पोस्टिंग (Composting) एक जैविक प्रक्रिया है जिसमें कार्बनिक पदार्थों (जैसे पत्तियां, खाद्य अपशिष्ट, गोबर आदि) को सूक्ष्मजीवों (बैक्टीरिया, कवक) की सहायता से नियंत्रित परिस्थितियों में विघटित करके पोषक तत्वों से भरपूर खाद (कम्पोस्ट) में परिवर्तित किया जाता है। यह मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने का एक प्राकृतिक तरीका है।
प्रश्न 8
केंचुआ खाद की कोई दो विशेषतायें लिखिए । [2]
Write any two characteristics of vermi compost.
उत्तर: केंचुआ खाद (Vermicompost) की दो प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
- पोषक तत्वों से भरपूर: इसमें नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश, कैल्शियम, मैग्नीशियम जैसे आवश्यक पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जो पौधों की वृद्धि के लिए लाभदायक होते हैं।
- मृदा संरचना में सुधार: यह मिट्टी की जल धारण क्षमता, वायु संचार और जीवांश पदार्थ की मात्रा को बढ़ाता है, जिससे मिट्टी की उर्वरता और संरचना में सुधार होता है।
प्रश्न 8 से 15 (लघु उत्तरीय प्रश्न)
प्रश्न 8
बाजरा की बीज दर प्रति हैक्टर लिखिए।
Write seed rate per hectare of pearl millet.
उत्तर: बाजरा (पर्ल मिलेट) के लिए बीज दर 3.5 से 4 किग्रा प्रति हैक्टर होती है। यह किस्म और बुवाई विधि पर निर्भर करती है।
प्रश्न 9
ज्वार की फसल में पत्तियों पर हल्के लाल-गुलाबी धब्बे दिखाई देते हैं। किसान को इसके नियंत्रण के लिए किस रसायन का अनुप्रयोग करना चाहिए?
There are Light Red-Pinkish spots appears on leaves of Sorghum crop. Which chemical is to be used by farmer to control it.
उत्तर: यह लक्षण ज्वार में लाल धब्बा रोग (एन्थ्रेक्नोज) के हैं। नियंत्रण के लिए किसान को मैन्कोजेब (2.5 ग्राम/लीटर पानी) या कार्बेन्डाजिम (1 ग्राम/लीटर पानी) का छिड़काव करना चाहिए।
प्रश्न 10
सरसों में सिंचाई की क्रान्तिक अवस्थायें लिखिए।
Write the critical stages for Irrigation in mustered crop.
उत्तर: सरसों की फसल में सिंचाई की क्रान्तिक अवस्थाएँ निम्नलिखित हैं:
- बुवाई के 25-30 दिन बाद (शाखाओं का विकास)
- फूल आने की अवस्था (बुवाई के 45-50 दिन बाद)
- फली भरने की अवस्था (बुवाई के 65-70 दिन बाद)
प्रश्न 11
सिंचाई की चैक बेसिन विधि का चित्र बनाइए।
Draw diagram of check basin method of irrigation.
उत्तर: चैक बेसिन विधि में खेत को छोटे-छोटे वर्गाकार या आयताकार बेसिनों में बाँट दिया जाता है। प्रत्येक बेसिन के चारों ओर मेड़ बनाई जाती है। पानी को एक बेसिन से दूसरे बेसिन में नहरों के माध्यम से पहुँचाया जाता है।
┌──────┬──────┬──────┐
│ B1 │ B2 │ B3 │
├──────┼──────┼──────┤
│ B4 │ B5 │ B6 │
├──────┼──────┼──────┤
│ B7 │ B8 │ B9 │
└──────┴──────┴──────┘
(B = बेसिन, मेड़ों से घिरा हुआ)
प्रश्न 12
कैल्सियम की कमी से होने वाले किसी एक रोग का नाम लिखिए।
Write the name of any one disease caused by Calcium deficiency.
उत्तर: कैल्सियम की कमी से होने वाला एक प्रमुख रोग टमाटर का फूल सड़न (Blossom End Rot) है। इसमें फल के निचले सिरे पर काले-भूरे धब्बे बन जाते हैं।
प्रश्न 13
फसल विविधता के कोई दो महत्व लिखिए।
Write any two importance of crop diversity.
उत्तर: फसल विविधता के दो महत्व:
- यह मृदा की उर्वरता बनाए रखने में सहायक होती है, क्योंकि विभिन्न फसलें मिट्टी से अलग-अलग पोषक तत्व लेती हैं।
- यह कीटों एवं रोगों के प्रकोप को कम करती है, क्योंकि एक ही फसल की बार-बार बुवाई से कीटों का प्रकोप बढ़ता है।
प्रश्न 14
पूर्ण व सम्बन्धित खरपतवार में अंतर स्पष्ट कीजिए।
Explain the difference between absolute weed and relative weed.
उत्तर:
| पूर्ण खरपतवार (Absolute Weed) | सम्बन्धित खरपतवार (Relative Weed) |
|---|---|
| ये सभी परिस्थितियों में अवांछनीय होते हैं। | ये केवल विशिष्ट परिस्थितियों में अवांछनीय होते हैं। |
| इनका कोई उपयोगी मूल्य नहीं होता। | इनका कुछ उपयोगी मूल्य हो सकता है (जैसे चारा)। |
| उदाहरण: कांस (बरमूडा ग्रास) | उदाहरण: मक्का के खेत में गेहूँ का पौधा |
प्रश्न 15
मृदा निर्माण में सहायक किन्हीं दो कारकों का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
Describe in brief any two factors helpful in soil formation.
उत्तर: मृदा निर्माण में सहायक दो कारक:
- जलवायु (Climate): तापमान और वर्षा चट्टानों के अपक्षय को प्रभावित करते हैं। उच्च तापमान और वर्षा से रासायनिक अपक्षय तेज होता है, जिससे मृदा निर्माण में तेजी आती है।
- जीवांश (Organisms): पौधे, सूक्ष्मजीव और केंचुए मृदा में कार्बनिक पदार्थ मिलाते हैं और मृदा की संरचना में सुधार करते हैं। जड़ें चट्टानों को तोड़ने में सहायक होती हैं।
प्रश्न 6
जलोढ मृदाओं का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
Describe in brief "Alluvial" soils.
उत्तर: जलोढ़ मृदा नदियों द्वारा बहाकर लाई गई मिट्टी से बनती है। यह उत्तर भारत के मैदानों में पाई जाती है। इसमें रेत, गाद और मिट्टी के कण होते हैं। यह फसलों के लिए बहुत उपजाऊ होती है और इसमें पोटाश प्रचुर मात्रा में पाया जाता है, लेकिन नाइट्रोजन और फास्फोरस की कमी होती है।
प्रश्न 7
फल व सब्जियों के प्रसंस्करण उद्योग पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
Write short note on fruit and vegetable processing industry.
उत्तर: फल व सब्जी प्रसंस्करण उद्योग कृषि उपज को मूल्यवर्धित उत्पादों (जैसे जूस, अचार, जैम, डिब्बाबंद सब्जियां) में बदलता है। यह उद्योग फसलों की बर्बादी कम करता है, किसानों की आय बढ़ाता है, और रोजगार के अवसर पैदा करता है। भारत में यह उद्योग तेजी से बढ़ रहा है और निर्यात में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
प्रश्न 8
गृह वाटिका को परिभाषित कीजिए। इसके प्रकार भी लिखिए।
Define kitchen garden. Also write its types.
उत्तर: गृह वाटिका (किचन गार्डन) घर के पास का छोटा बगीचा है जहां परिवार की जरूरत के लिए सब्जियां, फल और मसाले उगाए जाते हैं। इसके प्रकार हैं:
- जमीनी वाटिका: सीधे जमीन पर क्यारियां बनाकर उगाना।
- गमले या कंटेनर वाटिका: गमलों, टबों या पुराने बर्तनों में पौधे लगाना।
- छत वाटिका: छत या बालकनी पर गमलों या बेड में उगाना।
प्रश्न 9
फलोद्यान लगाने हेतु स्थान का चुनाव करते समय किसान किन दो बिंदुओं को ध्यान में रखेगा।
Write two points should considered by farmer while selecting the site for orchard establishment.
उत्तर: फलोद्यान (बाग) लगाने के लिए स्थान चुनते समय किसान निम्नलिखित दो बिंदुओं पर ध्यान देगा:
- जल निकासी: भूमि में जल निकासी अच्छी होनी चाहिए ताकि जड़ों में पानी न भरे।
- मिट्टी की उर्वरता: मिट्टी गहरी, उपजाऊ और पोषक तत्वों से भरपूर होनी चाहिए।
प्रश्न 20
खुला केन्द्र प्रणाली का चित्र बनाइये।
Draw a diagram of open central system.
उत्तर: खुला केन्द्र प्रणाली (Open Central System) में पेड़ के मध्य भाग को खुला रखा जाता है ताकि सूर्य का प्रकाश और हवा अंदर तक पहुंच सके। इसमें मुख्य तने को काट दिया जाता है और शाखाओं को बाहर की ओर फैलने दिया जाता है। (चित्र में एक वृत्ताकार केंद्र और चारों ओर फैली शाखाएं दिखाई जाती हैं।)
प्रश्न 22
विरलन व छंगाई में अंतर स्पष्ट कीजिए।
Differentiate between Thinning and Heading back.
उत्तर:
| विरलन (Thinning) | छंगाई (Heading back) |
|---|---|
| इसमें शाखा को उसके आधार से पूरी तरह काट दिया जाता है। | इसमें शाखा के केवल ऊपरी भाग को काटा जाता है, आधार छोड़ दिया जाता है। |
| इससे पेड़ का आकार कम नहीं होता, बल्कि घनत्व कम होता है। | इससे पेड़ का आकार छोटा हो जाता है और नई शाखाएं निकलती हैं। |
| इसका उपयोग मृत या रोगग्रस्त शाखाओं को हटाने के लिए किया जाता है। | इसका उपयोग पेड़ को आकार देने और फलन बढ़ाने के लिए किया जाता है। |
प्रश्न 23
साधारण दाब विधि का चित्र बनाइए।
Draw a diagram of simple layering.
उत्तर: साधारण दाब विधि (Simple Layering) में एक शाखा को मोड़कर जमीन में दबा दिया जाता है, जबकि उसका सिरा बाहर रहता है। दबे हुए भाग से जड़ें निकलती हैं और नया पौधा तैयार होता है। (चित्र में एक शाखा को जमीन में दबाकर और उसके सिरे को ऊपर दिखाया जाता है।)
प्रश्न 24
कलिकायन व उपरोपण में अंतर स्पष्ट कीजिए।
Differentiate between budding and grafting.
उत्तर:
| कलिकायन (Budding) | उपरोपण (Grafting) |
|---|---|
| इसमें एक कली को दूसरे पौधे पर लगाया जाता है। | इसमें एक तने या शाखा के टुकड़े (स्कियन) को दूसरे पौधे पर लगाया जाता है। |
| इसमें केवल एक कली का उपयोग होता है। | इसमें कई कलियों वाला तना का टुकड़ा उपयोग होता है। |
| यह विधि छोटे पौधों के लिए उपयुक्त है। | यह विधि बड़े पौधों के लिए उपयुक्त है। |
प्रश्न 2
जल गृहण प्रबंधन के कोई चार सिद्धान्त लिखिए।
Write any four principles of water shed.
उत्तर: जल गृहण प्रबंधन (Watershed Management) के चार सिद्धांत हैं:
- जल संरक्षण: वर्षा जल को रोककर भूमि में समाहित करना और अपवाह को कम करना।
- मृदा संरक्षण: मिट्टी के कटाव को रोकने के लिए वनस्पति आवरण बनाए रखना।
- भूमि उपयोग योजना: ढलान और मिट्टी के अनुसार फसलें और वृक्षारोपण करना।
- सामुदायिक भागीदारी: स्थानीय लोगों को योजना और कार्यान्वयन में शामिल करना।
प्रश्न 25
फल व सब्जी परिरक्षण के कोई तीन सिद्धान्तों का वर्णन कीजिए।
Describe any three principles of fruit and vegetable preservation.
फल एवं सब्जी परिरक्षण के तीन प्रमुख सिद्धांत:
- सूक्ष्मजीवों का नियंत्रण: परिरक्षण का मुख्य सिद्धांत सूक्ष्मजीवों (बैक्टीरिया, फफूंद, यीस्ट) की वृद्धि को रोकना है। यह उच्च ताप (पाश्चुरीकरण, स्टरलाइज़ेशन), निम्न ताप (रेफ्रिजरेशन), या रासायनिक पदार्थों (नमक, चीनी, सिरका) के उपयोग से किया जाता है।
- एंजाइमों का निष्क्रियीकरण: फलों और सब्जियों में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले एंजाइम पकने और सड़ने की प्रक्रिया को तेज करते हैं। इन एंजाइमों को निष्क्रिय करने के लिए ताप उपचार (ब्लैंचिंग) या अम्लीय माध्यम का उपयोग किया जाता है।
- नमी की मात्रा में कमी: सूक्ष्मजीवों और एंजाइमों की सक्रियता के लिए नमी आवश्यक है। नमी हटाकर (सुखाना, निर्जलीकरण) या नमी को बांधकर (चीनी या नमक मिलाकर) खाद्य पदार्थों को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है।
प्रश्न 26
खरपतवार उन्मूलन के किन्हीं छः निरोधी उपायों का वर्णन कीजिए।
Describe any six preventive measures of eradication of weeds.
अथवा / OR
खरपतवारों की रोकथाम की छः यांत्रिक विधियों का वर्णन कीजिए।
Describe any six preventive mechanical measures of weed control.
खरपतवार उन्मूलन के छः निरोधी उपाय (यांत्रिक विधियाँ):
- हाथ से निराई: खेत से खरपतवारों को हाथ या छोटे औजारों से निकालना सबसे पुरानी और प्रभावी विधि है।
- गुड़ाई करना: कुदाल या हैरो से मिट्टी को उलटने पर खरपतवार जड़ से उखड़ जाते हैं और सूर्य की रोशनी में सूख जाते हैं।
- जुताई: गहरी जुताई करने से बारहमासी खरपतवारों की जड़ें मिट्टी की सतह पर आ जाती हैं, जो बाद में नष्ट हो जाती हैं।
- जलाना: खेत की सतह पर आग लगाकर या फ्लेमर का उपयोग करके खरपतवारों को जलाया जाता है।
- मल्चिंग: फसलों के बीच प्लास्टिक या जैविक पदार्थ (पुआल, पत्तियां) बिछाकर खरपतवारों को प्रकाश न मिलने देना, जिससे वे अंकुरित नहीं हो पाते।
- जल प्रबंधन: खेत में पानी भरकर (जलमग्न करके) खरपतवारों को ऑक्सीजन की कमी से मारा जा सकता है, विशेषकर धान की फसल में।
प्रश्न 27
जैली बनाते समय आप द्वारा प्रयुक्त चरण लिखिए।
Describe the steps taken by you during Jelly preparation.
अथवा / OR
डिब्बा बंदी करते समय आप द्वारा प्रयुक्त चरण लिखिए।
Describe the steps taken by you during the process of Canning.
जैली बनाने के चरण:
- फलों का चयन और धुलाई: अच्छी गुणवत्ता वाले, पके हुए फल (जैसे अमरूद, सेब, अंगूर) चुनें और उन्हें अच्छी तरह धो लें।
- फलों को तोड़ना और पकाना: फलों को छोटे टुकड़ों में काटकर पानी में उबालें जब तक वे नरम न हो जाएं।
- रस निकालना: उबले हुए फलों को मलमल के कपड़े या छलनी से छानकर साफ रस अलग कर लें।
- चीनी और अम्ल मिलाना: रस में बराबर मात्रा में चीनी (या स्वादानुसार) और थोड़ा नींबू का रस (पेक्टिन सेटिंग के लिए) मिलाएं।
- उबालना और जेल परीक्षण: मिश्रण को तब तक उबालें जब तक वह गाढ़ा न हो जाए। जेल परीक्षण के लिए एक चम्मच मिश्रण को ठंडी प्लेट पर डालें; यदि वह जम जाए और उंगली से खींचने पर सिकुड़े, तो जैली तैयार है।
- भराई और सील करना: गर्म जैली को स्टरलाइज़ किए गए जार में भरें और तुरंत ढक्कन लगाकर सील कर दें।
डिब्बा बंदी (कैनिंग) के चरण:
- सामग्री तैयार करना: फलों या सब्जियों को धोकर, छीलकर और आवश्यकतानुसार काट लें।
- ब्लैंचिंग: सामग्री को उबलते पानी में 2-5 मिनट तक डालकर एंजाइमों को निष्क्रिय करें और फिर ठंडे पानी में डालें।
- डिब्बों की स्टरलाइज़ेशन: खाली डिब्बों और ढक्कनों को उबलते पानी में 10 मिनट तक उबालकर कीटाणुरहित करें।
- भराई: तैयार सामग्री को गर्म अवस्था में ही डिब्बों में भरें, ऊपर से गर्म नमकीन पानी या चीनी का घोल डालें (हेडस्पेस छोड़कर)।
- एयर वेंटिंग और सीलिंग: डिब्बे के ढक्कन को हल्का बंद करके भाप निकलने दें, फिर तुरंत कसकर सील कर दें।
- प्रोसेसिंग और ठंडा करना: सील किए गए डिब्बों को प्रेशर कुकर या बॉयलर में निर्धारित समय तक उबालें, फिर ठंडा करके स्टोर करें।
प्रश्न 28
फसलों की जल मांग की परिभाषा लिखिए। फसलों की जल मांग को प्रभावित करने वाले कारकों का वर्णन कीजिए।
Write definition of water requirement of crops. Describe factors affecting water requirement of crops.
फसलों की जल मांग की परिभाषा: फसलों की जल मांग (Water Requirement) से तात्पर्य उस कुल पानी की मात्रा से है जो एक फसल को अपनी पूर्ण वृद्धि और विकास के लिए आवश्यक होती है, जिसमें वाष्पोत्सर्जन (Transpiration) और वाष्पीकरण (Evaporation) द्वारा खोई गई नमी शामिल है। इसे सामान्यतः मिलीमीटर (mm) या हैक्टर-सेंटीमीटर (ha-cm) में मापा जाता है।
फसलों की जल मांग को प्रभावित करने वाले कारक:
- जलवायु: तापमान, आर्द्रता, हवा की गति और सूर्य के प्रकाश की तीव्रता जल मांग को प्रभावित करते हैं। गर्म और शुष्क जलवायु में जल मांग अधिक होती है।
- फसल का प्रकार: विभिन्न फसलों की जल आवश्यकता अलग-अलग होती है। धान जैसी फसलों को अधिक पानी चाहिए, जबकि बाजरा जैसी फसलों को कम।
- मिट्टी का प्रकार: बलुई मिट्टी में पानी जल्दी रिसता है, जिससे जल मांग बढ़ जाती है, जबकि चिकनी मिट्टी में पानी अधिक समय तक रुकता है।
- फसल की वृद्धि अवस्था: फसल के विभिन्न चरणों (अंकुरण, वानस्पतिक वृद्धि, फूल आना, दाना भरना) में जल की मांग बदलती रहती है। सबसे अधिक मांग फूल आने और दाना भरने के समय होती है।
- भूजल स्तर: यदि भूजल स्तर ऊंचा है, तो फसलें जड़ों द्वारा भूजल का उपयोग कर सकती हैं, जिससे सिंचाई की आवश्यकता कम हो जाती है।
- कृषि पद्धतियां: फसल चक्र, मल्चिंग, और खरपतवार नियंत्रण जैसी विधियां मिट्टी की नमी को संरक्षित करके जल मांग को प्रभावित करती हैं।
प्रश्न 29
मूंगफली की वैज्ञानिक खेती हेतु निम्नलिखित बिन्दुओं पर प्रकाश डालिए:
Highlight the following points for scientific cultivation of groundnut:
- चार उन्नत किस्में (Four improved varieties)
- बीज की मात्रा प्रति हैक्टर (Seed rate per hectare)
- दो प्रमुख कीट (Two major pests)
- उपज प्रति हैक्टर (Yield per hectare)
मूंगफली की वैज्ञानिक खेती:
- चार उन्नत किस्में:
- जी.जी. 2 (GG 2) – अधिक उपज देने वाली, रोग प्रतिरोधी किस्म।
- जी.जी. 7 (GG 7) – सूखा सहनशील और तेल की मात्रा अधिक।
- टी.जी. 37ए (TG 37A) – जल्दी पकने वाली किस्म।
- एम. 13 (M 13) – बीज बड़े आकार के और उपज अच्छी।
- बीज की मात्रा प्रति हैक्टर: मूंगफली की बुवाई के लिए प्रति हैक्टर लगभग 100-120 किलोग्राम बीज की
प्रश्न 29 (वैकल्पिक)
अथवा
मक्का की वैज्ञानिक खेती हेतु निम्नलिखित बिन्दुओं पर प्रकाश डालिए |
- चार उन्नत किस्में
- बीज की मात्रा प्रति हैक्टर
- दो प्रमुख कीट
- उपज प्रति हैक्टर
OR
Describe scientific cultivation of Ground nut on the basis of following points.
- Four improved varieties
- Seed rate per hectare
- Two important pests
- Yield per hectare
OR
Scientific cultivation of Maize on the basis of following points :
- Four improved varieties
- Seed rate per hectare
- Two important pests
- Yield per hectare
उत्तर (मक्का के लिए):
- चार उन्नत किस्में: गंगा-5, गंगा-11, देवी, प्रताप (या कोई अन्य प्रमुख किस्में जैसे एचएम-4, पीईएचएम-2)।
- बीज की मात्रा प्रति हैक्टर: 20-25 किग्रा प्रति हैक्टर (संकर किस्मों के लिए 15-20 किग्रा)।
- दो प्रमुख कीट: तना छेदक (Stem borer) और दीमक (Termite)।
- उपज प्रति हैक्टर: 50-60 क्विंटल प्रति हैक्टर (संकर किस्मों से 80-100 क्विंटल तक)।
Answer (for Maize):
- Four improved varieties: Ganga-5, Ganga-11, Devi, Pratap (or other prominent varieties like HM-4, PEHM-2).
- Seed rate per hectare: 20-25 kg per hectare (15-20 kg for hybrid varieties).
- Two important pests: Stem borer and Termite.
- Yield per hectare: 50-60 quintals per hectare (80-100 quintals for hybrid varieties).
प्रश्न 30
अमरूद की वैज्ञानिक खेती हेतु निम्नलिखित बिन्दुओं पर प्रकाश डालिए | [+++=4]
- जलवायु
- चार उन्नत किस्में
- सिंचाई
- प्रमुख रोग
(नोट: OCR में कुछ शब्द अस्पष्ट थे, जैसे "feat" और "vasa" तथा "awe रोग" — इन्हें संदर्भानुसार सही किया गया है।)
उत्तर:
- जलवायु: अमरूद उष्ण एवं उपोष्ण जलवायु में अच्छी तरह उगता है। इसके लिए 20-30°C तापमान और 100-200 सेमी वार्षिक वर्षा उपयुक्त होती है। पाला हानिकारक होता है।
- चार उन्नत किस्में: अलाहाबाद सफेदा, लखनऊ-49, सरदार (L-49), हिसार सफेदा, अर्का मृदुला (कोई भी चार प्रमुख किस्में)।
- सिंचाई: फल लगने के समय और गर्मियों में नियमित सिंचाई आवश्यक है। सर्दियों में 10-15 दिन और गर्मियों में 5-7 दिन के अंतराल पर सिंचाई करें।
- प्रमुख रोग: फल सड़न (Fruit rot), पत्ती धब्बा (Leaf spot), तना सड़न (Stem canker) और जड़ गाँठ सूत्रकृमि (Root knot nematode)।
अथवा / OR
फूल गोभी की वैज्ञानिक खेती (Scientific Cultivation of Cauliflower)
निम्नलिखित बिन्दुओं पर प्रकाश डालिए:
- जलवायु (Climate): फूल गोभी ठंडी जलवायु की फसल है। इसके लिए 15°C से 20°C तापमान उपयुक्त रहता है। अधिक गर्मी या पाला फसल को नुकसान पहुंचाता है।
- चार उन्नत किस्में (Four Improved Varieties):
- पूसा कटकी
- पूसा स्नोबॉल K-1
- पूसा हाइब्रिड-2
- अर्ली कुंवारी
- बीज दर प्रति हैक्टर (Seed Rate per Hectare): उन्नत किस्मों के लिए 400-500 ग्राम बीज प्रति हैक्टर पर्याप्त होता है। पौध तैयार करने के लिए नर्सरी में बुवाई की जाती है।
- रोपाई (Transplanting): जब पौध 4-6 सप्ताह के हो जाएं और उनमें 4-5 पत्तियां आ जाएं, तब खेत में 60×45 सेमी की दूरी पर रोपाई करें। रोपाई के बाद हल्की सिंचाई आवश्यक है।
व्याख्या: फूल गोभी की वैज्ञानिक खेती में जलवायु, उन्नत किस्मों का चयन, उचित बीज दर और सही रोपाई विधि महत्वपूर्ण हैं। ठंडी जलवायु में अच्छी पैदावार होती है।
अमरूद की वैज्ञानिक खेती (Scientific Cultivation of Guava)
Describe on the basis of following points:
- Climate: Guava grows well in tropical and subtropical climates. It requires warm temperatures (20°C-30°C) and can tolerate drought. It is sensitive to frost.
- Four Improved Varieties:
- Allahabad Safeda
- Lucknow-49 (Sardar)
- Apple Colour
- Chittidar
- Propagation: Guava is propagated through seeds, layering, or grafting. For commercial cultivation, air layering or budding on seedling rootstocks is common to maintain quality.
- Two Important Diseases:
- Wilt (Fusarium oxysporum) – causes yellowing and wilting of leaves.
- Anthracnose (Colletotrichum gloeosporioides) – causes fruit rot and leaf spots.
Explanation: Guava cultivation requires warm climate, improved varieties like Allahabad Safeda, propagation through layering, and management of diseases like wilt and anthracnose for better yield.