RBSE Class 12th 2018 Business Studies-SS-31-2018 Previous Year Papers

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Paper details

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Board RBSE
Class Class 12th
Exam year 2018
Subject Business Studies-SS-31-2018
Resource type Previous Year Papers
Category RBSE Previous Year Question Papers
Website RBSE Solution

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RBSE Class 12th 2018 Business Studies-SS-31-2018

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Rajasthan Board Class 12th Business Studies-SS-31-2018 2018 solved Previous Year Question Papers

उच्च माध्यमिक परीक्षा, 2018
SENIOR SECONDARY EXAMINATION, 2018

व्यवसाय अध्ययन
(BUSINESS STUDIES)

समय : 3¼ घण्टे   पूर्णांक : 80

SLNo. : शिक्षा निदेशालय | नामांक Roll No.

No. of Questions — 30   SS-3—Bus.Studies
No. of Printed Pages — 07

परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :
GENERAL INSTRUCTIONS TO THE EXAMINEES :

  1. परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न पत्र पर नामांक अनिवार्यत: लिखें।
    Candidate must write first of all his / her Roll No. on the question paper compulsorily.
  2. सभी प्रश्न करने अनिवार्य हैं।
    All the questions are compulsory.
  3. प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें।
    Write the answer to each question in the given answer-book only.
  4. जिन प्रश्नों में आन्तरिक खण्ड हैं, उन सभी के उत्तर एक साथ ही लिखें।
    For questions having more than one part the answers to those parts are to be written together in continuity.
  5. प्रश्न पत्र के हिन्दी व अंग्रेजी रूपान्तर में किसी प्रकार की त्रुटि / अन्तर / विरोधाभास होने पर हिन्दी भाषा के प्रश्न को सही मानें।
    If there is any error / difference / contradiction in Hindi & English versions of the question paper, the question of Hindi version should be treated valid.

Tear Here   प्रश्न पत्र को खोलने के   TEAR HERE TO OPEN THE QUESTION PAPER   यहाँ से काटिए

SS-3I-Bus.Studies 064] [ Turn Over

खण्ड - अ / SECTION - A

प्रश्न 1:

उद्देश्यों द्वारा प्रबन्ध के प्रतिपादक कौन है?

Who is the propounder of 'Management by Objectives'?

उत्तर: उद्देश्यों द्वारा प्रबन्ध (Management by Objectives - MBO) के प्रतिपादक पीटर एफ. ड्रकर (Peter F. Drucker) हैं।

Answer: The propounder of Management by Objectives (MBO) is Peter F. Drucker.

प्रश्न 2:

प्रबन्ध का एक सामाजिक उद्देश्य बताइए।

Mention one social objective of management.

उत्तर: प्रबन्ध का एक सामाजिक उद्देश्य है - समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाना, जैसे कि पर्यावरण संरक्षण, रोजगार के अवसर प्रदान करना, या समाज कल्याण में योगदान देना।

Answer: One social objective of management is fulfilling its responsibility towards society, such as environmental protection, providing employment opportunities, or contributing to social welfare.


प्रश्न संख्या और अंक विवरण / Question Numbers and Marks Details

प्रश्न संख्या / Q. Nos. अंक प्रत्येक प्रश्न / Marks per question उत्तर की शब्द/पृष्ठ सीमा / Word/Page limit of answer
1-0 2 20 शब्द / 20 words
11-8 2 आधे पृष्ठ / Half page
9-27 4 एक पृष्ठ / One page
28 - 30 6 तीन पृष्ठ / Three pages

नोट: प्रश्न क्रमांक 28 से 30 में आन्तरिक विकल्प है।

Note: Question Nos. 28 to 30 have internal choices.

3. अनुबन्ध में प्रतिफल से आपका क्या आशय है? [1]

What do you mean by consideration in contract?

प्रतिफल का अर्थ है किसी अनुबन्ध में प्रत्येक पक्ष द्वारा दूसरे पक्ष को दिया गया कुछ मूल्य (लाभ या हानि)। यह अनुबन्ध का एक आवश्यक तत्व है।

Consideration means something of value (benefit or detriment) given by each party to the other in a contract. It is an essential element of a valid contract.

4. “वैध अनुबन्ध के लिए वैध प्रतिफल होना अनिवार्य है।” कैसे? [1]

"Valid consideration to legal contract is mandatory" How?

बिना वैध प्रतिफल के अनुबन्ध शून्य (void) होता है। प्रतिफल अनुबन्ध को कानूनी रूप से बाध्यकारी बनाता है, क्योंकि यह दर्शाता है कि दोनों पक्षों ने कुछ मूल्य का आदान-प्रदान किया है। उदाहरण: यदि A, B को ₹100 देने का वादा करता है, लेकिन B कुछ नहीं देता, तो यह अनुबन्ध नहीं है।

Without valid consideration, a contract is void. Consideration makes the contract legally binding as it shows both parties exchanged something of value. Example: If A promises to give ₹100 to B but B gives nothing, it is not a contract.

5. उद्यमिता की एक विशेषता बताइए। [1]

Mention one characteristic of entrepreneurship.

जोखिम उठाना – उद्यमिता में अनिश्चितता और वित्तीय जोखिम का सामना करना शामिल है।

Risk-taking – Entrepreneurship involves facing uncertainty and financial risk.

6. “उद्यमिता देश के आर्थिक विकास का आधार है।” कैसे? [1]

"Entrepreneurship is the basis of economic development of the nation. How?

उद्यमिता नए उद्योगों का सृजन करती है, रोजगार के अवसर बढ़ाती है, नवाचार को बढ़ावा देती है, और राष्ट्रीय आय में वृद्धि करती है, जिससे आर्थिक विकास होता है।

Entrepreneurship creates new industries, increases employment opportunities, promotes innovation, and boosts national income, leading to economic development.

7. ‘प्रधान मंत्री सुरक्षा बीमा योजना’ का प्रारम्भ कब हुआ? [1]

When did the ‘Pradhan Mantri Bima Yojana’ start?

प्रधान मंत्री सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY) 9 मई, 2015 को शुरू हुई।

Pradhan Mantri Suraksha Bima Yojana (PMSBY) started on 9 May 2015.

8. अल्प बीमा से आपका क्या आशय है? [1]

What do you mean by ‘Under Insurance’?

अल्प बीमा का अर्थ है किसी वस्तु या संपत्ति का उसके वास्तविक मूल्य से कम मूल्य पर बीमा कराना। ऐसी स्थिति में क्षति होने पर बीमा कंपनी बीमित राशि तक ही भुगतान करती है।

Under insurance means insuring an item or property for less than its actual value. In case of loss, the insurance company pays only up to the insured amount.

9. भारत में सेवा कर की शुरूआत कब हुई? [1]

When did service tax start in India?

भारत में सेवा कर 1 जुलाई, 1994 को शुरू हुआ।

Service tax started in India on 1 July 1994.

10. सर्वप्रथम बिक्री कर भारत के कौन से राज्य में लागू हुआ? [1]

In which state did the law of sales tax come into force for the first time in India?

सर्वप्रथम बिक्री कर मध्य प्रदेश राज्य में लागू हुआ।

Sales tax was first implemented in the state of Madhya Pradesh.

खण्ड - ब / SECTION - B

4. प्रबन्ध की 'सूचनात्मक भूमिका' के कोई दो बिन्दुओं को समझाइए। [2]

Explain any two points of 'Informational role' of management.

उत्तर: प्रबन्ध की सूचनात्मक भूमिका के दो बिन्दु निम्नलिखित हैं:

  1. निगरानीकर्ता (Monitor): प्रबन्धक बाहरी और आन्तरिक वातावरण से सूचनाएँ एकत्र करता है और संगठन के प्रदर्शन की निगरानी करता है।
  2. प्रसारक (Disseminator): प्रबन्धक एकत्रित सूचनाओं को संगठन के अन्य सदस्यों तक पहुँचाता है, ताकि निर्णय लेने में सहायता मिले।

5. एक पेशेवर प्रबन्धक के रूप में, पेशेवर प्रबन्ध की कोई दो विशेषताएँ बताइए। [2]

As a professional manager, mention any two characteristics of professional management.

उत्तर: पेशेवर प्रबन्ध की दो विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

  1. विशिष्ट ज्ञान (Specialized Knowledge): पेशेवर प्रबन्धकों के पास प्रबन्धन के सिद्धान्तों और तकनीकों का गहन ज्ञान होता है, जो औपचारिक शिक्षा और प्रशिक्षण द्वारा प्राप्त होता है।
  2. सेवा भावना (Service Motive): पेशेवर प्रबन्धक लाभ कमाने के साथ-साथ समाज और संगठन की सेवा को प्राथमिकता देते हैं, तथा नैतिक मूल्यों का पालन करते हैं।

6. क्रय बिन्दु विज्ञापन से आपका क्या आशय है? [2]

What do you mean by purchase point advertisement?

उत्तर: क्रय बिन्दु विज्ञापन (Purchase Point Advertisement) से आशय उस विज्ञापन से है जो उस स्थान पर किया जाता है जहाँ उपभोक्ता वस्तु खरीदता है, जैसे दुकान, शॉपिंग मॉल, या सुपरमार्केट। इसका उद्देश्य खरीदारी के समय उपभोक्ता का ध्यान आकर्षित करना और तत्काल खरीद को प्रोत्साहित करना होता है। उदाहरण: दुकानों पर लगे बैनर, डिस्प्ले, या पोस्टर।

7. निम्नलिखित को समझाइए। [2]

Explain the following.

i) निष्पादित अनुबन्ध (Executed contract)

ii) निष्पादनीय अनुबन्ध (Executable contract)

उत्तर:

  1. निष्पादित अनुबन्ध (Executed Contract): वह अनुबन्ध जिसमें दोनों पक्षों द्वारा अपने-अपने कर्तव्यों का पूर्ण रूप से पालन कर लिया गया हो, निष्पादित अनुबन्ध कहलाता है। उदाहरण: यदि कोई व्यक्ति किसी दुकान से सामान खरीदता है और तुरन्त भुगतान कर देता है, तो यह निष्पादित अनुबन्ध है।
  2. निष्पादनीय अनुबन्ध (Executable Contract): वह अनुबन्ध जिसमें एक या दोनों पक्षों द्वारा कर्तव्यों का पालन अभी बाकी हो, निष्पादनीय अनुबन्ध कहलाता है। उदाहरण: यदि कोई व्यक्ति किसी वस्तु को खरीदने का वादा करता है और भुगतान बाद में करने का समझौता होता है, तो यह निष्पादनीय अनुबन्ध है।

8. अनुबन्ध में 'कपट पूर्ण मिथ्या कथन' को समझाइए। [2]

Explain the 'Fraudulent misrepresentation' in contract.

उत्तर: अनुबन्ध में 'कपट पूर्ण मिथ्या कथन' (Fraudulent Misrepresentation) का अर्थ है कि अनुबन्ध करते समय एक पक्ष द्वारा जानबूझकर झूठा तथ्य प्रस्तुत करना, ताकि दूसरे पक्ष को धोखा दिया जा सके और वह अनुबन्ध करने के लिए प्रेरित हो। इसमें धोखा देने का इरादा (Mens Rea) होता है। उदाहरण: यदि कोई विक्रेता किसी पुरानी कार को नई बताकर बेचता है, तो यह कपट पूर्ण मिथ्या कथन है। इस स्थिति में पीड़ित पक्ष अनुबन्ध को रद्द कर सकता है और क्षतिपूर्ति का दावा कर सकता है।

9. आपके विचार में, क्या उद्यमिता अवसर खोजने की प्रक्रिया है? कैसे? [2]

In your opinion, is entrepreneurship a process of searching opportunity? How?

उत्तर: हाँ, उद्यमिता अवसर खोजने की प्रक्रिया है। उद्यमी बाजार में मौजूद अवसरों को पहचानता है और उनका लाभ उठाने के लिए नए उत्पाद या सेवाएँ विकसित करता है। यह प्रक्रिया निम्नलिखित चरणों में होती है:

  1. अवसर की पहचान: उद्यमी बाजार की आवश्यकताओं, समस्याओं या रुझानों का विश्लेषण करता है।
  2. अवसर का मूल्यांकन: पहचाने गए अवसर की व्यवहार्यता, लाभप्रदता और जोखिम का आकलन किया जाता है।
  3. अवसर का दोहन: उद्यमी संसाधनों को जुटाकर उस अवसर को एक व्यवसाय में बदलता है।

10. "बीमा सुरक्षा प्रदान करता है।" क्या आप इस कथन से सहमत हैं? [2]

"Insurance provides protection." Do you agree with the statement?

उत्तर: हाँ, मैं इस कथन से सहमत हूँ। बीमा वित्तीय सुरक्षा प्रदान करता है क्योंकि यह अनिश्चित घटनाओं (जैसे दुर्घटना, आग, बीमारी, मृत्यु) से होने वाले वित्तीय नुकसान की भरपाई करता है। बीमा पॉलिसीधारक को एक निश्चित प्रीमियम के बदले में, जोखिम होने पर क्षतिपूर्ति का आश्वासन मिलता है, जिससे वह मानसिक और आर्थिक रूप से सुरक्षित रहता है।

8) वस्तु एवं सेवा कर की कोई दो विशेषताएँ बताइए।

Mention any two characteristics of goods and service tax.

वस्तु एवं सेवा कर (GST) की दो विशेषताएँ:

  1. यह एक बहु-स्तरीय, गंतव्य-आधारित कर है जो उपभोग के स्थान पर लगाया जाता है।
  2. यह पूर्ववर्ती अप्रत्यक्ष करों (जैसे वैट, सेवा कर, उत्पाद शुल्क) को समाहित कर एक एकीकृत कर प्रणाली बनाता है, जिससे कर-पर-कर की समस्या समाप्त होती है।

Two characteristics of Goods and Services Tax (GST):

  1. It is a multi-stage, destination-based tax levied at the point of consumption.
  2. It subsumes multiple indirect taxes (like VAT, service tax, excise duty) into a single tax, eliminating the cascading effect of tax-on-tax.

9) खण्ड - स / SECTION - C

हेनरी फैयोल द्वारा प्रतिपादित निम्नलिखित सिद्धान्तों को समझाइए।

Explain the following principles propounded by Henri Fayol.

i) आदेश की एकता (Unity of Command)

इस सिद्धांत के अनुसार, एक कर्मचारी को केवल एक ही वरिष्ठ से आदेश प्राप्त करने चाहिए। यह सुनिश्चित करता है कि कर्मचारी को परस्पर विरोधी निर्देश न मिलें, जिससे कार्य में स्पष्टता और जवाबदेही बनी रहती है।

According to this principle, an employee should receive orders from only one superior. This ensures that the employee does not receive conflicting instructions, leading to clarity and accountability in work.

ii) निर्देश की एकता (Unity of Direction)

इस सिद्धांत के अनुसार, एक ही उद्देश्य वाली सभी गतिविधियों का नेतृत्व एक ही प्रबंधक द्वारा और एक ही योजना के तहत किया जाना चाहिए। यह संगठन में समन्वय और एकरूपता लाता है।

According to this principle, all activities with the same objective should be led by one manager and under one plan. This brings coordination and unity in the organization.

अभिप्रेरणा की ‘X’ विचारधारा की कोई चार मान्यताएँ बताइए।

Mention any four assumptions of 'X' theory of motivation.

  1. सामान्य मनुष्य को कार्य करने में स्वाभाविक अरुचि होती है और वह जितना हो सके कार्य से बचना चाहता है।
  2. अधिकांश लोगों को कार्य करने के लिए बाध्य, नियंत्रित, निर्देशित और दंड की धमकी दी जानी चाहिए।
  3. सामान्य मनुष्य निर्देशित होना पसंद करता है, वह उत्तरदायित्व लेने से बचता है, उसकी महत्वाकांक्षा कम होती है और वह सुरक्षा को सर्वोपरि मानता है।
  4. अधिकांश लोगों में रचनात्मकता और समस्या-समाधान की क्षमता का अभाव होता है।

Assumptions of Theory X:

  1. The average human being has an inherent dislike of work and will avoid it if possible.
  2. Most people must be coerced, controlled, directed, and threatened with punishment to get them to work.
  3. The average human being prefers to be directed, wishes to avoid responsibility, has relatively little ambition, and wants security above all.
  4. Most people lack creativity and problem-solving ability.

2]) निम्नलिखित बिन्दुओं के आधार पर अभिप्रेरणा का महत्व समझाइए।

Explain the importance of motivation on the basis of following points.

i) कार्य संतुष्टि में अभिवृद्धि (Increase in job satisfaction)

अभिप्रेरणा कर्मचारियों को उनके कार्य के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने में मदद करती है। जब कर्मचारियों को पहचान, पुरस्कार और प्रोत्साहन मिलता है, तो वे अपने काम से अधिक संतुष्ट होते हैं। इससे कार्यस्थल पर मनोबल बढ़ता है और कर्मचारी अपने कार्य को अधिक उत्साह से करते हैं।

Motivation helps employees develop a positive attitude towards their work. When employees receive recognition, rewards, and encouragement, they become more satisfied with their jobs. This boosts morale in the workplace and employees perform their tasks with greater enthusiasm.

ii) अच्छे श्रम सम्बन्धों का निर्माण (Build good labour relations)

अभिप्रेरणा प्रबंधन और कर्मचारियों के बीच विश्वास और सहयोग का वातावरण बनाती है। जब कर्मचारी महसूस करते हैं कि उनके प्रयासों की सराहना की जाती है और उनकी आवश्यकताओं का ध्यान रखा जाता है, तो वे संगठन के प्रति वफादार रहते हैं। इससे श्रमिक संघों और प्रबंधन के बीच टकराव कम होता है और सामंजस्यपूर्ण संबंध स्थापित होते हैं।

Motivation creates an environment of trust and cooperation between management and employees. When employees feel that their efforts are appreciated and their needs are taken care of, they remain loyal to the organization. This reduces conflicts between labor unions and management, establishing harmonious relations.

22) एक प्रबन्धक के रूप में, सरकार के प्रति कोई चार सामाजिक दायित्वों को बताइए। [4]

As a manager, mention any four social responsibilities towards government.

उत्तर / Answer: एक प्रबन्धक के रूप में सरकार के प्रति चार सामाजिक दायित्व निम्नलिखित हैं:

  1. करों का समय पर भुगतान करना (Paying taxes on time)
  2. सरकारी नियमों और कानूनों का पालन करना (Complying with government rules and laws)
  3. सरकारी नीतियों का समर्थन करना (Supporting government policies)
  4. सरकारी योजनाओं में सहयोग देना (Cooperating in government schemes)

23) अर्ध अनुबन्ध के कोई दो प्रकार बताइए। [4]

Mention any two types of quasi contract.

उत्तर / Answer: अर्ध अनुबन्ध (Quasi Contract) के दो प्रकार निम्नलिखित हैं:

  1. आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति का अनुबन्ध (Contract for supply of necessaries) – जब कोई व्यक्ति किसी असमर्थ व्यक्ति को आवश्यक वस्तुएँ प्रदान करता है, तो वह उनका मूल्य प्राप्त करने का हकदार होता है।
  2. गलती से भुगतान की गई राशि की वसूली का अनुबन्ध (Contract for recovery of money paid by mistake) – यदि कोई व्यक्ति गलती से किसी दूसरे व्यक्ति को भुगतान कर देता है, तो वह उस राशि को वापस पाने का हकदार होता है।

24) निम्नलिखित बिन्दुओं के आधार पर उद्यमिता का महत्व समझाइए। [4]

Explain the importance of entrepreneurship on the basis of following points.

i) पूँजी निर्माण को प्रोत्साहन (Promotes capital formation)

ii) संतुलित आर्थिक विकास (Balanced economic development)

उत्तर / Answer: उद्यमिता का महत्व निम्नलिखित बिन्दुओं के आधार पर समझाया गया है:

  1. पूँजी निर्माण को प्रोत्साहन (Promotes capital formation): उद्यमिता नए उद्योगों और व्यवसायों की स्थापना करके पूँजी निर्माण को बढ़ावा देती है। उद्यमी बचत को निवेश में परिवर्तित करते हैं, जिससे देश की आर्थिक वृद्धि होती है।
  2. संतुलित आर्थिक विकास (Balanced economic development): उद्यमिता विभिन्न क्षेत्रों और क्षेत्रों में उद्योग स्थापित करके संतुलित आर्थिक विकास में सहायक होती है। यह ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में रोजगार और आय के अवसर पैदा करती है, जिससे क्षेत्रीय असमानताएँ कम होती हैं।

25) बीमा के क्षेत्र एवं प्रकार के आधार पर 'अग्नि बीमा' को समझाइए। [4]

Explain the 'Fire Insurance' on the basis of scope and kinds of insurance.

उत्तर / Answer: अग्नि बीमा (Fire Insurance) बीमा का एक प्रकार है जो संपत्ति को आग से होने वाले नुकसान से बचाता है। बीमा के क्षेत्र एवं प्रकार के आधार पर इसकी व्याख्या इस प्रकार है:

  • क्षेत्र (Scope): अग्नि बीमा का क्षेत्र आग से होने वाली क्षति तक सीमित होता है। इसमें आग, बिजली गिरना, विस्फोट आदि से होने वाली क्षति शामिल है। यह केवल संपत्ति (भवन, मशीनरी, स्टॉक आदि) के लिए होता है, व्यक्तिगत जीवन के लिए नहीं।
  • प्रकार (Kinds): बीमा के प्रकारों में अग्नि बीमा एक सामान्य बीमा (General Insurance) का प्रकार है। यह सामान्य बीमा के अंतर्गत आता है, जो जीवन बीमा से भिन्न है। अग्नि बीमा में बीमाकर्ता आग से हुई वास्तविक क्षति की भरपाई करता है, लाभ नहीं देता।

26) एक प्रबन्धक के रूप में, ग्राहकों के प्रति कोई चार सामाजिक दायित्वों को बताइए। [4]

As a manager, mention any four social responsibilities towards customers.

उत्तर / Answer: एक प्रबन्धक के रूप में ग्राहकों के प्रति चार सामाजिक दायित्व निम्नलिखित हैं:

  1. सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण उत्पाद प्रदान करना (Providing safe and quality products)
  2. उचित मूल्य पर उत्पाद उपलब्ध कराना (Making products available at fair prices)
  3. उत्पाद के बारे में सही जानकारी देना (Providing accurate information about the product)
  4. ग्राहकों की शिकायतों का समाधान करना (Resolving customer complaints)

27) निम्नलिखित बिन्दुओं को समझाइए। [4]

Explain the following points.

i) बिक्री का विवरण (Statement of sales)

ii) खरीद का विवरण (Statement of purchase)

उत्तर / Answer: निम्नलिखित बिन्दुओं की व्याख्या:

  1. बिक्री का विवरण (Statement of sales): यह एक दस्तावेज है जो किसी निश्चित अवधि में की गई सभी बिक्री का विवरण प्रस्तुत करता है। इसमें बिक्री की तिथि, ग्राहक का नाम, बेचे गए उत्पाद, मात्रा, मूल्य और कुल राशि शामिल होती है। यह व्यवसाय की आय और बिक्री प्रदर्शन को ट्रैक करने में मदद करता है।
  2. खरीद का विवरण (Statement of purchase): यह एक दस्तावेज है जो किसी निश्चित अवधि में की गई सभी खरीद का विवरण प्रस्तुत करता है। इसमें खरीद की तिथि, आपूर्तिकर्ता का नाम, खरीदे गए उत्पाद, मात्रा, मूल्य और कुल राशि शामिल होती है। यह व्यवसाय के खर्चों और स्टॉक प्रबंधन में सहायक होता है।

खण्ड - द (Section - D)

28) प्रबन्ध में प्रबन्धकों की निर्णयात्मक भूमिका को समझाइए। [6]

प्रबन्धकों की निर्णयात्मक भूमिका (Decisional Role of Managers): प्रबन्धकों की निर्णयात्मक भूमिका में वे निर्णय लेते हैं जो संगठन के संचालन और विकास को प्रभावित करते हैं। हेनरी मिंट्ज़बर्ग के अनुसार, प्रबन्धकों की चार प्रमुख निर्णयात्मक भूमिकाएँ होती हैं:

  1. उद्यमी (Entrepreneur): प्रबन्धक नए अवसरों की पहचान करता है और संगठन में सुधार लाने के लिए पहल करता है।
  2. समस्या समाधानकर्ता (Disturbance Handler): जब संगठन में कोई अप्रत्याशित समस्या या संकट उत्पन्न होता है, तो प्रबन्धक उसे हल करने के लिए निर्णय लेता है।
  3. संसाधन आवंटक (Resource Allocator): प्रबन्धक संगठन के संसाधनों (धन, समय, सामग्री, मानव संसाधन) का विभिन्न गतिविधियों में आवंटन करता है।
  4. वार्ताकार (Negotiator): प्रबन्धक संगठन के हितों की रक्षा के लिए अन्य पक्षों (जैसे कर्मचारी, आपूर्तिकर्ता, ग्राहक) के साथ बातचीत करता है।

ये भूमिकाएँ प्रबन्धक को संगठन के लक्ष्यों को प्राप्त करने में सक्षम बनाती हैं।

अथवा

प्रबन्ध के किन्हीं छः कार्यों को समझाइए।

प्रबन्ध के छः कार्य (Six Functions of Management):

  1. नियोजन (Planning): यह सबसे पहला कार्य है जिसमें भविष्य के लिए लक्ष्य निर्धारित किए जाते हैं और उन्हें प्राप्त करने के लिए कार्य-योजना बनाई जाती है।
  2. संगठन (Organizing): इसमें कार्यों को विभाजित करना, अधिकार और उत्तरदायित्व सौंपना, और संसाधनों को व्यवस्थित करना शामिल है।
  3. स्टाफिंग (Staffing): इसमें संगठन के लिए उपयुक्त कर्मचारियों की भर्ती, चयन, प्रशिक्षण और विकास शामिल है।
  4. निर्देशन (Directing): इसमें कर्मचारियों को कार्य करने के लिए प्रेरित करना, नेतृत्व प्रदान करना और संचार स्थापित करना शामिल है।
  5. समन्वय (Coordinating): इसमें विभिन्न विभागों और कर्मचारियों के कार्यों में सामंजस्य स्थापित करना शामिल है ताकि सभी एक साथ मिलकर लक्ष्य प्राप्त कर सकें।
  6. नियंत्रण (Controlling): इसमें वास्तविक प्रदर्शन को मानकों से तुलना करना, विचलनों को पहचानना और सुधारात्मक कार्रवाई करना शामिल है।

29) आपकी राय में, विज्ञापन की आवश्यकता को स्पष्ट कीजिए। [6]

विज्ञापन की आवश्यकता (Need of Advertisement): विज्ञापन आधुनिक व्यवसाय का एक महत्वपूर्ण अंग है। इसकी आवश्यकता निम्नलिखित कारणों से है:

  1. उत्पादों की जानकारी देना: विज्ञापन उपभोक्ताओं को नए और मौजूदा उत्पादों की विशेषताओं, उपयोग और लाभों के बारे में जानकारी प्रदान करता है।
  2. बिक्री बढ़ाना: विज्ञापन उपभोक्ताओं को उत्पाद खरीदने के लिए प्रेरित करता है, जिससे बिक्री और राजस्व में वृद्धि होती है।
  3. ब्रांड जागरूकता बनाना: विज्ञापन ब्रांड की पहचान और छवि बनाने में मदद करता है, जिससे उपभोक्ता ब्रांड को याद रखते हैं।
  4. प्रतिस्पर्धा में बने रहना: प्रतिस्पर्धी बाजार में विज्ञापन कंपनी को अपने प्रतिस्पर्धियों से अलग दिखने और बाजार हिस्सेदारी बनाए रखने में मदद करता है।
  5. नए ग्राहकों तक पहुँचना: विज्ञापन कंपनी को व्यापक दर्शकों तक पहुँचने और नए ग्राहकों को आकर्षित करने में सक्षम बनाता है।
  6. उपभोक्ता शिक्षा: विज्ञापन उपभोक्ताओं को उत्पादों के सही उपयोग और देखभाल के बारे में शिक्षित करता है।

अथवा

राष्ट्र के लिए विपणन के महत्व को आप किस प्रकार स्पष्ट करेंगे?

राष्ट्र के लिए विपणन का महत्व (Importance of Marketing for Nation): विपणन राष्ट्र के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसे निम्नलिखित प्रकार से स्पष्ट किया जा सकता है:

  1. आर्थिक विकास: विपणन उत्पादन और वितरण को प्रोत्साहित करता है, जिससे राष्ट्रीय आय और सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में वृद्धि होती है।
  2. रोजगार सृजन: विपणन गतिविधियाँ (जैसे विज्ञापन, वितरण, बिक्री) बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर पैदा करती हैं।
  3. जीवन स्तर में सुधार: विपणन उपभोक्ताओं को विभिन्न प्रकार के उत्पाद और सेवाएँ उपलब्ध कराता है, जिससे उनके जीवन स्तर में सुधार होता है।
  4. औद्योगिक विकास: विपणन उद्योगों को अपने उत्पादों के लिए बाजार प्रदान करता है, जिससे औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलता है।
  5. निर्यात को बढ़ावा: विपणन देश के उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में पहुँचाने में मदद करता है, जिससे विदेशी मुद्रा अर्जित होती है।
  6. संसाधनों का कुशल उपयोग: विपणन उपभोक्ता मांग के अनुसार उत्पादन को निर्देशित करता है, जिससे देश के संसाधनों का कुशलतापूर्वक उपयोग होता है।

30) अनुबन्ध अधिनियम में उत्पीड़न सम्बन्धी वैधानिक प्रावधानों को समझाइए। [6]

अनुबन्ध अधिनियम में उत्पीड़न (Coercion) सम्बन्धी वैधानिक प्रावधान: भारतीय अनुबन्ध अधिनियम, 1872 की धारा 15 के अनुसार, उत्पीड़न का अर्थ है किसी व्यक्ति को किसी कार्य को करने के लिए बाध्य करने हेतु उसके विरुद्ध किसी ऐसे कार्य का करना या करने की धमकी देना जो भारतीय दण्ड संहिता के अंतर्गत निषिद्ध है। मुख्य प्रावधान इस प्रकार हैं:

  1. धारा 15 - उत्पीड़न की परिभाषा: उत्पीड़न वह कार्य है जो किसी व्यक्ति को अनुबन्ध करने के लिए बाध्य करने के उद्देश्य से किया जाता है। इसमें किसी व्यक्ति की संपत्ति को अवैध रूप से रोकना भी शामिल है।
  2. धारा 19 - उत्पीड़न द्वारा अनुबन्ध: यदि किसी अनुबन्ध के लिए सहमति उत्पीड़न के माध्यम से प्राप्त की गई है, तो वह अनुबन्ध विकल्पीय (voidable) होता है, अर्थात पीड़ित पक्ष के पास अनुबन्ध को रद्द करने का अधिकार होता है।
  3. धारा 72 - उत्पीड़न द्वारा प्राप्त लाभ की वापसी: यदि कोई व्यक्ति उत्पीड़न के माध्यम से किसी अन्य व्यक्ति से कोई लाभ प्राप्त करता है, तो उसे वह लाभ वापस करना होगा या उसकी क्षतिपूर्ति करनी होगी।
  4. उत्पीड़न का प्रभाव: उत्पीड़न के कारण अनुबन्ध शून्यकरणीय (voidable) हो जाता है, और पीड़ित पक्ष अनुबन्ध को समाप्त कर सकता है या उसे लागू करवा सकता है।
  5. उत्पीड़न और दबाव में अंतर: उत्पीड़न में अवैध कार्य या धमकी शामिल है, जबकि दबाव (undue influence) में किसी व्यक्ति पर अपने प्रभाव का दुरुपयोग करना शामिल है।
  6. अपवाद: यदि उत्पीड़न किसी तीसरे पक्ष द्वारा किया गया है और अनुबन्ध करने वाले पक्ष को इसकी जानकारी नहीं है, तो अनुबन्ध वैध माना जा सकता है।

अथवा

अनुबन्ध अधिनियम में व्यर्थ ठहराव सम्बन्धी किन्हीं छः वैधानिक प्रावधानों को समझाइए।

अनुबन्ध अधिनियम में व्यर्थ ठहराव (Void Agreement) सम्बन्धी छः वैधानिक प्रावधान: भारतीय अनुबन्ध अधिनियम, 1872 के अनुसार, निम्नलिखित अनुबन्ध व्यर्थ (void) माने जाते हैं:

  1. धारा 20 - तथ्य की भूल (Mistake of Fact): यदि अनुबन्ध के दोनों पक्ष किसी आवश्यक तथ्य के बारे में गलती में हैं, तो अनुबन्ध व्यर्थ होता है।
  2. धारा 23 - अवैध उद्देश्य (Unlawful Consideration or Object): यदि अनुबन्ध का उद्देश्य या प्रतिफल अवैध है (जैसे किसी अपराध को करना), तो अनुबन्ध व्यर्थ होता है।
  3. धारा 24 - आंशिक अवैधता (Partial Illegality): यदि अनुबन्ध का एक भाग अवैध है और उसे अलग नहीं किया जा सकता, तो पूरा अनुबन्ध व्यर्थ होता है।
  4. धारा 25 - प्रतिफल के बिना अनुबन्ध (Agreement without Consideration): सामान्यतः बिना प्रतिफल के अनुबन्ध व्यर्थ होता है, सिवाय कुछ अपवादों के (जैसे प्राकृतिक प्रेम और स्नेह पर आधारित अनुबन्ध)।
  5. धारा 26 - विवाह के प्रतिबंध में अनुबन्ध (Agreement in Restraint of Marriage): किसी व्यक्ति के विवाह की स्वतंत्रता को प्रतिबंधित करने वाला अनुबन्ध व्यर्थ होता है।
  6. धारा 27 - व्यापार के प्रतिबंध में अनुबन्ध (Agreement in Restraint of Trade): किसी व्यक्ति के व्यापार करने के अधिकार को प्रतिबंधित करने वाला अनुबन्ध व्यर्थ होता है, सिवाय कुछ अपवादों के।