RBSE Class 12th 2018 Economics-SS-10-2018 Previous Year Papers
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Paper details
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| Board | RBSE |
|---|---|
| Class | Class 12th |
| Exam year | 2018 |
| Subject | Economics-SS-10-2018 |
| Resource type | Previous Year Papers |
| Category | RBSE Previous Year Question Papers |
| Website | RBSE Solution |
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RBSE Class 12th 2018 Economics-SS-10-2018
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Rajasthan Board Class 12th Economics-SS-10-2018 2018 solved Previous Year Question Papers
उच्च माध्यमिक परीक्षा, 2018
SENIOR SECONDARY EXAMINATION, 2018
अर्थशास्त्र
ECONOMICS
समय : 3¼ घण्टे पूर्णांक : 80
परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :
GENERAL INSTRUCTIONS TO THE EXAMINEES :
- परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न पत्र पर नामांक अनिवार्यत: लिखें।
Candidate must write first his / her Roll No. on the question paper compulsorily. - सभी प्रश्न करने अनिवार्य हैं।
All the questions are compulsory. - प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें।
Write the answer to each question in the given answer-book only. - जिन प्रश्नों में आन्तरिक खण्ड हैं, उन सभी के उत्तर एक साथ ही लिखें।
For questions having more than one part, the answers to those parts are to be written together in continuity.
No. of Questions — 30 SS-0-Econ.
No. of Printed Pages — 07
SS-0-Econ. 045 [ Turn Over
Tear Here
प्रश्न पत्र को खोलने के लिए यहाँ से फाड़ें
TEAR HERE TO OPEN THE QUESTION PAPER
प्रश्न पत्र के हिन्दी व अंग्रेजी रूपान्तर में किसी प्रकार की त्रुटि / अन्तर /विरोधाभास होने पर हिन्दी भाषा के प्रश्न को सही मानें।
If there is any error / difference / contradiction in Hindi & English versions of the question paper, the question of Hindi version should be treated valid.
खण्ड / Section
| खण्ड | प्रश्न संख्या | अंक प्रत्येक प्रश्न | उत्तर की शब्द सीमा |
|---|---|---|---|
| A | 1-0 | 0 | 0 शब्द |
| B | 11 - 8 | 2 | 20 शब्द |
| C | 9 - 27 | 4 | 30-40 शब्द |
| D | 28 - 30 | 6 | 250-300 शब्द |
Section
| Section | Q. Nos. | Marks per question | Word limit of answer |
|---|---|---|---|
| A | 1-0 | 0 | 0 words |
| B | 11 - 8 | 2 | 20 words |
| C | 9 - 27 | 4 | 30-40 words |
| D | 28 - 30 | 6 | 250-300 words |
प्रश्न क्रमांक 28, 29 तथा 30 में आन्तरिक विकल्प हैं।
Question Nos. 28, 29 and 30 have internal choices.
SS-0-Econ. 045
खण्ड - अ
SECTION - A
-
अर्थशास्त्र में व्यष्टि एवं समष्टि शब्दों का सर्वप्रथम प्रयोग किस अर्थशास्त्री ने किया?
Which economist for the first time used Micro and Macro terms in economics?
उत्तर: रैगनर फ्रिश (Ragnar Frisch) ने अर्थशास्त्र में व्यष्टि एवं समष्टि शब्दों का सर्वप्रथम प्रयोग किया।
-
सामाजिक लागतें किसे कहते हैं?
What are the social costs?
उत्तर: सामाजिक लागतें वे लागतें हैं जो किसी उत्पादन या आर्थिक गतिविधि के कारण समाज को समग्र रूप से वहन करनी पड़ती हैं, जैसे प्रदूषण, स्वास्थ्य पर प्रभाव, और पर्यावरणीय क्षति। ये निजी लागतों से भिन्न होती हैं।
-
उत्पादन फलन किन दो चरों के मध्य सम्बन्ध दर्शाता है?
Production function shows relationship between which two variables?
उत्तर: उत्पादन फलन उत्पादन के साधनों (इनपुट) और उत्पादित वस्तुओं (आउटपुट) के मध्य सम्बन्ध दर्शाता है।
-
क्रताओं एवं विक्रेताओं की अत्यधिक संख्या किस बाजार में होती है?
In which market form the number of buyers and sellers are large?
उत्तर: पूर्ण प्रतियोगिता (Perfect Competition) बाजार में क्रताओं एवं विक्रेताओं की अत्यधिक संख्या होती है।
-
मध्यवर्ती वस्तुओं के कोई दो उदाहरण दीजिए।
Give any two examples of intermediate goods.
उत्तर: मध्यवर्ती वस्तुओं के दो उदाहरण हैं: (1) गेहूँ (जिससे आटा बनाया जाता है), (2) लकड़ी (जिससे फर्नीचर बनाया जाता है)।
-
मुद्रा की परिभाषा लिखिए।
Write the definition of money.
उत्तर: मुद्रा वह वस्तु है जिसे विनिमय के माध्यम, मूल्य के मापक, मूल्य संचय, और भविष्य में भुगतान के मानक के रूप में सार्वभौमिक रूप से स्वीकार किया जाता है।
-
अधिविकर्ष से क्या तात्पर्य है?
What is meant by overdraft?
उत्तर: अधिविकर्ष (Overdraft) एक बैंकिंग सुविधा है जिसमें बैंक ग्राहक को उसके खाते में उपलब्ध राशि से अधिक राशि निकालने की अनुमति देता है, जिसे बाद में ब्याज सहित चुकाना होता है।
-
उपभोग की सीमान्त प्रवृत्ति ज्ञात करने का सूत्र लिखिए।
Write the formula to calculate marginal propensity to consume.
उत्तर: उपभोग की सीमान्त प्रवृत्ति (MPC) का सूत्र है: MPC = ΔC / ΔY, जहाँ ΔC उपभोग में परिवर्तन और ΔY आय में परिवर्तन है।
खण्ड - ब / SECTION - B
9) समग्र मांग किसे कहते हैं?
What is meant by aggregate demand?
समग्र मांग (Aggregate Demand): समग्र मांग से तात्पर्य एक अर्थव्यवस्था में सभी उपभोक्ताओं, निवेशकों, सरकार और विदेशी क्षेत्रों द्वारा एक निश्चित समय अवधि में वस्तुओं एवं सेवाओं पर किए गए कुल व्यय से है। इसे AD = C + I + G + (X - M) के रूप में व्यक्त किया जाता है, जहाँ C = उपभोग व्यय, I = निवेश व्यय, G = सरकारी व्यय, X = निर्यात, M = आयात।
Aggregate demand refers to the total expenditure on goods and services in an economy by all consumers, investors, government, and foreign sectors over a specific period. It is expressed as AD = C + I + G + (X - M), where C = consumption expenditure, I = investment expenditure, G = government expenditure, X = exports, M = imports.
10) खुली अर्थव्यवस्था का अर्थ लिखिए।
Write the meaning of open economy.
खुली अर्थव्यवस्था (Open Economy): खुली अर्थव्यवस्था वह अर्थव्यवस्था है जो अन्य देशों के साथ वस्तुओं, सेवाओं, पूंजी और श्रम का आदान-प्रदान करती है। इसमें अंतर्राष्ट्रीय व्यापार, विदेशी निवेश और वित्तीय प्रवाह शामिल होते हैं।
Open economy is an economy that engages in the exchange of goods, services, capital, and labor with other countries. It involves international trade, foreign investment, and financial flows.
11) उपयोगिता से आप क्या समझते हैं?
What do you understand by utility?
उपयोगिता (Utility): उपयोगिता से तात्पर्य किसी वस्तु या सेवा की वह क्षमता है जो मानवीय आवश्यकताओं को संतुष्ट करती है। यह एक व्यक्तिपरक अवधारणा है, जो व्यक्ति की पसंद और आवश्यकता पर निर्भर करती है। उपयोगिता को संतुष्टि की इकाइयों (जैसे 'यूटिल') में मापा जाता है।
Utility refers to the ability of a good or service to satisfy human wants. It is a subjective concept, depending on individual preferences and needs. Utility is measured in units of satisfaction (e.g., 'utils').
12) प्रतिस्थापन प्रभाव को उदाहरण द्वारा समझाइए।
Explain the substitution effect with example.
प्रतिस्थापन प्रभाव (Substitution Effect): प्रतिस्थापन प्रभाव वह परिवर्तन है जो किसी वस्तु की कीमत में परिवर्तन होने पर उपभोक्ता द्वारा उस वस्तु की खपत में होता है, जबकि वास्तविक आय स्थिर रहती है। जब किसी वस्तु की कीमत घटती है, तो वह अन्य वस्तुओं की तुलना में सस्ती हो जाती है, जिससे उपभोक्ता उस वस्तु का अधिक उपभोग करता है और अन्य वस्तुओं का कम।
उदाहरण (Example): मान लीजिए एक उपभोक्ता चाय और कॉफी दोनों पीता है। यदि चाय की कीमत घट जाती है, तो चाय कॉफी की तुलना में सस्ती हो जाती है। उपभोक्ता अब चाय का अधिक सेवन करेगा और कॉफी का कम, क्योंकि वह चाय को कॉफी का सस्ता विकल्प मानता है। यह प्रतिस्थापन प्रभाव है।
Substitution effect is the change in consumption of a good due to a change in its price, keeping real income constant. When the price of a good falls, it becomes cheaper relative to other goods, leading consumers to consume more of it and less of others.
Example: Suppose a consumer drinks both tea and coffee. If the price of tea falls, tea becomes cheaper than coffee. The consumer will now consume more tea and less coffee, as tea is seen as a cheaper substitute for coffee. This is the substitution effect.
13) स्टॉक एवं प्रवाह में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
Clarify the difference between stock and flow.
| क्रमांक (S.No.) | स्टॉक (Stock) | प्रवाह (Flow) |
|---|---|---|
| 1. | स्टॉक एक निश्चित समय बिंदु पर मापा जाता है। | प्रवाह एक समय अवधि में मापा जाता है। |
| 2. | उदाहरण: किसी देश में धन की कुल मात्रा, जलाशय में पानी की मात्रा। | उदाहरण: राष्ट्रीय आय, नदी में पानी का बहाव। |
| 3. | स्टॉक में समय आयाम नहीं होता। | प्रवाह में समय आयाम होता है (जैसे प्रति वर्ष, प्रति माह)। |
| 4. | स्टॉक स्थिर होता है। | प्रवाह गतिशील होता है। |
14) राष्ट्रीय आय की दो विशेषताएँ बताइए।
Mention two characteristics of national income.
राष्ट्रीय आय की दो विशेषताएँ (Two characteristics of national income):
- वस्तुओं एवं सेवाओं का माप (Measurement of goods and services): राष्ट्रीय आय एक निश्चित समय अवधि (सामान्यतः एक वर्ष) में किसी देश में उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं एवं सेवाओं के कुल मूल्य को मापती है।
- मौद्रिक माप (Monetary measurement): राष्ट्रीय आय को मौद्रिक इकाइयों (जैसे रुपये, डॉलर) में मापा जाता है, जिससे विभिन्न वस्तुओं और सेवाओं के मूल्यों की तुलना संभव होती है।
Two characteristics of national income:
- Measurement of goods and services: National income measures the total value of all final goods and services produced in a country over a specific period (usually a year).
- Monetary measurement: National income is measured in monetary units (e.g., rupees, dollars), allowing comparison of values of different goods and services.
15) सकल घरेलू उत्पाद एवं सकल राष्ट्रीय उत्पाद में अन्तर बताइए।
Distinguish between gross domestic product and gross national product.
| क्रमांक (S.No.) | सकल घरेलू उत्पाद (GDP) | सकल राष्ट्रीय उत्पाद (GNP) |
|---|---|---|
| 1. | GDP किसी देश की भौगोलिक सीमाओं के भीतर उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं एवं सेवाओं का कुल मूल्य है। | GNP किसी देश के निवासियों द्वारा देश के अंदर और बाहर उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं एवं सेवाओं का कुल मूल्य है। |
| 2. | GDP में विदेशी निवासियों का देश के अंदर उत्पादन शामिल होता है। | GNP में देश के निवासियों का विदेश में उत्पादन शामिल होता है। |
| 3. | GDP = C + I + G + (X - M) | GNP = GDP + विदेशों से शुद्ध कारक आय (NFIA) |
| 4. | GDP क्षेत्रीय उत्पादन को दर्शाता है। | GNP राष्ट्रीय आय को दर्शाता है। |
6) मुद्रा पूर्ति की M₁ एवं M₂ अवधारणाओं को समझाइए। [1+1=2]
Explain the M₁ and M₂ concepts of Money Supply.
M₁ (संकीर्ण मुद्रा): इसमें जनता के पास उपलब्ध करेंसी (नोट व सिक्के) तथा बैंकों में जमा मांग जमाएँ (चालू खाता व बचत खाता) शामिल होती हैं। यह सर्वाधिक तरल मुद्रा आपूर्ति है।
M₂ (विस्तृत मुद्रा): इसमें M₁ के साथ-साथ डाकघर बचत बैंकों में जमा राशि भी शामिल होती है। यह M₁ की तुलना में कम तरल होती है।
7) बजट के दो उद्देश्यों का उल्लेख कीजिए। [1+1=2]
Describe two objectives of budget.
- पुनर्वितरण: आय और संपत्ति के असमान वितरण को कम करना, जैसे करों और सरकारी खर्च के माध्यम से गरीबों को लाभ पहुँचाना।
- आर्थिक स्थिरता: मूल्य स्तर को नियंत्रित करना, मुद्रास्फीति या अपस्फीति से बचना और आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देना।
8) नकदी विहीन लेन-देन के दो लाभ बताइए। [1+1=2]
Explain two benefits of cashless transactions.
- सुविधा: बड़ी राशि ले जाने की आवश्यकता नहीं; डिजिटल भुगतान (UPI, कार्ड) से तुरंत लेन-देन संभव है।
- पारदर्शिता: सभी लेन-देन का डिजिटल रिकॉर्ड रहता है, जिससे कर चोरी और काले धन पर नियंत्रण होता है।
खण्ड - स / SECTION - C
9) व्यष्टि अर्थशास्त्र एवं समष्टि अर्थशास्त्र में कोई चार अन्तर बताइए। [1+1+1+1=4]
Mention any four differences between micro economics and macro economics.
| क्रम | व्यष्टि अर्थशास्त्र | समष्टि अर्थशास्त्र |
|---|---|---|
| 1. | व्यक्तिगत इकाइयों (जैसे एक उपभोक्ता, एक फर्म) का अध्ययन। | समग्र अर्थव्यवस्था (जैसे राष्ट्रीय आय, कुल रोजगार) का अध्ययन। |
| 2. | कीमत निर्धारण, उपभोक्ता संतुलन, उत्पादन सिद्धांत पर केंद्रित। | राष्ट्रीय आय, मुद्रास्फीति, बेरोजगारी, आर्थिक वृद्धि पर केंद्रित। |
| 3. | "व्यक्तिगत मांग" और "व्यक्तिगत पूर्ति" जैसी अवधारणाएँ। | "कुल मांग" और "कुल पूर्ति" जैसी अवधारणाएँ। |
| 4. | इसे "मूल्य सिद्धांत" भी कहा जाता है। | इसे "आय और रोजगार सिद्धांत" भी कहा जाता है। |
10) तटस्थता वक्र का अर्थ बताइए। इसकी तीन विशेषताओं का उल्लेख कीजिए। [1+3=4]
Give the meaning of indifference curve. Mention its three features.
अर्थ: तटस्थता वक्र (Indifference Curve) एक ऐसा वक्र है जो दो वस्तुओं के उन सभी संयोजनों को दर्शाता है जो उपभोक्ता को समान संतुष्टि प्रदान करते हैं। उपभोक्ता इनमें से किसी भी संयोजन को चुनने में तटस्थ (उदासीन) रहता है।
तीन विशेषताएँ:
- ऋणात्मक ढाल: तटस्थता वक्र बाएँ से दाएँ नीचे की ओर झुका होता है, क्योंकि एक वस्तु की मात्रा बढ़ाने पर दूसरी वस्तु की मात्रा घटानी पड़ती है ताकि संतुष्टि समान रहे।
- उत्तल मूल बिंदु की ओर: यह मूल बिंदु की ओर उत्तल होता है, जो सीमांत प्रतिस्थापन दर (MRS) में कमी को दर्शाता है।
- कभी एक-दूसरे को नहीं काटते: दो तटस्थता वक्र एक-दूसरे को प्रतिच्छेद नहीं कर सकते, क्योंकि इससे संतुष्टि स्तर में विरोधाभास उत्पन्न होगा।
11) बाजार मांग की अवधारणा को एक मांग तालिका की सहायता से समझाइए। [2+2=4]
Explain the concept of market demand with the help of demand schedule.
बाजार मांग: किसी वस्तु की बाजार मांग से तात्पर्य उस वस्तु की उस कुल मात्रा से है जिसे एक निश्चित समय में, दिए गए मूल्य पर, सभी उपभोक्ता मिलकर खरीदने को तैयार हों। यह व्यक्तिगत मांगों का योग होती है।
उदाहरण (मांग तालिका): मान लीजिए बाजार में केवल दो उपभोक्ता A और B हैं।
| मूल्य (₹) | उपभोक्ता A की मांग | उपभोक्ता B की मांग | बाजार मांग (A+B) |
|---|---|---|---|
| 10 | 5 | 3 | 8 |
| 8 | 7 | 5 | 12 |
| 6 | 10 | 8 | 18 |
जैसे-जैसे मूल्य घटता है, बाजार मांग बढ़ती है, जो मांग के नियम को दर्शाता है।
12) औसत उत्पाद एवं सीमान्त उत्पाद की अवधारणाओं को समझाइए। [2+2=4]
Explain the concepts of average product and marginal product.
औसत उत्पाद (Average Product - AP): यह प्रति इकाई परिवर्तनशील साधन (जैसे श्रम) पर प्राप्त कुल उत्पादन है। सूत्र: AP = कुल उत्पाद / श्रम की इकाइयाँ।
सीमान्त उत्पाद (Marginal Product - MP): यह परिवर्तनशील साधन की एक अतिरिक्त इकाई लगाने से कुल उत्पादन में होने वाला परिवर्तन है। सूत्र: MP = कुल उत्पाद में परिवर्तन / श्रम में परिवर्तन।
उदाहरण: यदि 5 श्रमिक 100 इकाई उत्पादन करते हैं, तो AP = 20. यदि 6 श्रमिक 120 इकाई उत्पादन करते हैं, तो MP = 20 (120-100).
13) सकल निवेश एवं शुद्ध निवेश में अन्तर स्पष्ट कीजिए। [2+2=4]
Clarify the difference between gross investment and net investment.
| क्रम | सकल निवेश (Gross Investment) | शुद्ध निवेश (Net Investment) |
|---|---|---|
| 1. | यह एक निश्चित अवधि में पूंजीगत वस्तुओं (मशीनरी, भवन) पर कुल व्यय है। | यह सकल निवेश में से मूल्यह्रास (घिसावट) घटाने के बाद बचा निवेश है। |
| 2. | इसमें पुरानी मशीनरी के प्रतिस्थापन का व्यय भी शामिल है। | यह अर्थव्यवस्था में पूंजी स्टॉक में वास्तविक वृद्धि को दर्शाता है। |
| 3. | सूत्र: सकल निवेश = शुद्ध निवेश + मूल्यह्रास | सूत्र: शुद्ध निवेश = सकल निवेश - मूल्यह्रास |
| 4. | यह हमेशा धनात्मक होता है। | यह धनात्मक, ऋणात्मक या शून्य हो सकता है। |
24) एकाधिकारात्मक प्रतियोगिता की चार विशेषताएँ समझाइए।
Explain four features of the monopolistic competition.
एकाधिकारात्मक प्रतियोगिता की चार विशेषताएँ (Four Features of Monopolistic Competition):
- अनेक विक्रेता (Large Number of Sellers): बाजार में बड़ी संख्या में विक्रेता होते हैं, लेकिन प्रत्येक का बाजार पर सीमित नियंत्रण होता है।
- उत्पाद विभेदीकरण (Product Differentiation): प्रत्येक विक्रेता अपने उत्पाद को ब्रांड, गुणवत्ता, डिज़ाइन या पैकेजिंग के आधार पर दूसरों से अलग करता है, जिससे उत्पाद सजातीय नहीं होते।
- प्रवेश एवं निकास की स्वतंत्रता (Free Entry and Exit): फर्में बाजार में स्वतंत्र रूप से प्रवेश कर सकती हैं या बाजार से बाहर निकल सकती हैं, जिससे दीर्घकाल में सामान्य लाभ की स्थिति बनती है।
- गैर-मूल्य प्रतियोगिता (Non-Price Competition): फर्में मूल्य के बजाय विज्ञापन, ब्रांडिंग और उत्पाद विभेदीकरण के माध्यम से प्रतिस्पर्धा करती हैं।
25) पूंजी की सीमान्त कार्यकुशलता को रेखाचित्र द्वारा समझाइए।
Explain the marginal efficiency of capital with the help of diagram.
पूंजी की सीमान्त कार्यकुशलता (Marginal Efficiency of Capital - MEC): यह पूंजी की एक अतिरिक्त इकाई से प्राप्त अपेक्षित प्रतिफल की दर है। इसे रेखाचित्र द्वारा समझाया गया है:
रेखाचित्र का विवरण: एक ग्राफ लें जिसमें X-अक्ष पर पूंजी की मात्रा (Capital Stock) और Y-अक्ष पर MEC (प्रतिशत में) दर्शाया गया है। MEC वक्र बाएं से दाएं नीचे की ओर झुका होता है, जो दर्शाता है कि जैसे-जैसे पूंजी की मात्रा बढ़ती है, उसकी सीमान्त कार्यकुशलता घटती जाती है। यह वक्र ब्याज दर (Interest Rate) के साथ मिलकर निवेश का स्तर निर्धारित करता है। जब MEC ब्याज दर से अधिक होता है, तो निवेश लाभदायक होता है।
26) यदि सीमान्त उपभोग प्रवृत्ति 0.5 है तो निवेश गुणक का मान ज्ञात कीजिए।
If the marginal propensity to consume is 0.5, calculate the value of investment multiplier.
हल (Solution):
निवेश गुणक (Investment Multiplier) का सूत्र है:
K = 1 / (1 - MPC)
जहाँ, MPC = सीमान्त उपभोग प्रवृत्ति (Marginal Propensity to Consume) = 0.5
अतः, K = 1 / (1 - 0.5) = 1 / 0.5 = 2
निवेश गुणक का मान 2 है। इसका अर्थ है कि निवेश में एक इकाई की वृद्धि होने पर राष्ट्रीय आय में 2 इकाई की वृद्धि होगी।
27) अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार की आवश्यकता के कोई चार कारण बताइए।
Mention any four reasons for the need of international trade.
अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार की आवश्यकता के चार कारण (Four Reasons for the Need of International Trade):
- संसाधनों का असमान वितरण (Unequal Distribution of Resources): विभिन्न देशों में प्राकृतिक संसाधन, जलवायु और श्रम कौशल अलग-अलग होते हैं, जिससे व्यापार आवश्यक हो जाता है।
- लागत में अंतर (Difference in Costs): तुलनात्मक लागत सिद्धांत के अनुसार, देश उन वस्तुओं का उत्पादन करते हैं जिनमें उनकी लागत कम होती है और दूसरों से व्यापार करते हैं।
- विशेषज्ञता और पैमाने की अर्थव्यवस्थाएँ (Specialization and Economies of Scale): अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार देशों को विशेषज्ञता प्राप्त करने और बड़े पैमाने पर उत्पादन करने में सक्षम बनाता है।
- उपभोक्ताओं के लिए विविधता (Variety for Consumers): यह उपभोक्ताओं को विभिन्न देशों के उत्पादों तक पहुँच प्रदान करता है, जिससे विकल्प बढ़ते हैं और जीवन स्तर में सुधार होता है।
खण्ड - द (SECTION - D)
28) परिवर्तनशील अनुपातों के नियम की तीन अवस्थाओं को रेखाचित्र की सहायता से समझाइए।
Explain the three stages of law of variable proportions with the help of diagram.
परिवर्तनशील अनुपातों का नियम (Law of Variable Proportions): यह नियम बताता है कि जब एक साधन (जैसे श्रम) को स्थिर साधन (जैसे भूमि) के साथ बढ़ाया जाता है, तो कुल उत्पादन में तीन अवस्थाएँ होती हैं:
तीन अवस्थाएँ (Three Stages):
- प्रथम अवस्था - बढ़ते प्रतिफल (Stage I - Increasing Returns): इस अवस्था में सीमान्त उत्पाद (MP) बढ़ता है और कुल उत्पाद (TP) तीव्र गति से बढ़ता है। यह तब तक रहता है जब तक MP अधिकतम न हो जाए।
- द्वितीय अवस्था - घटते प्रतिफल (Stage II - Diminishing Returns): इस अवस्था में सीमान्त उत्पाद घटने लगता है लेकिन धनात्मक रहता है, और कुल उत्पाद धीमी गति से बढ़ता है। यह तब तक रहता है जब तक MP शून्य न हो जाए। यह सबसे महत्वपूर्ण अवस्था है।
- तृतीय अवस्था - ऋणात्मक प्रतिफल (Stage III - Negative Returns): इस अवस्था में सीमान्त उत्पाद ऋणात्मक हो जाता है और कुल उत्पाद घटने लगता है।
रेखाचित्र: एक ग्राफ में X-अक्ष पर श्रम (परिवर्तनशील साधन) और Y-अक्ष पर उत्पादन दर्शाया जाता है। TP वक्र पहले तीव्र गति से बढ़ता है, फिर धीमी गति से, और अंत में गिरने लगता है। MP वक्र पहले बढ़ता है, फिर घटता है, और अंत में ऋणात्मक हो जाता है।
अथवा (OR)
कुल स्थिर लागत, कुल परिवर्ती लागत एवं कुल लागत की अवधारणाओं को सारणी की सहायता से समझाइए।
Explain the concepts of total cost, total variable cost and total cost with help of a schedule.
अवधारणाएँ (Concepts):
- कुल स्थिर लागत (Total Fixed Cost - TFC): यह वह लागत है जो उत्पादन के स्तर में परिवर्तन के साथ नहीं बदलती, जैसे किराया, बीमा, आदि। यह सभी उत्पादन स्तरों पर स्थिर रहती है।
- कुल परिवर्ती लागत (Total Variable Cost - TVC): यह वह लागत है जो उत्पादन के स्तर में परिवर्तन के साथ बदलती है, जैसे कच्चा माल, मजदूरी, आदि। यह उत्पादन बढ़ने पर बढ़ती है।
- कुल लागत (Total Cost - TC): यह TFC और TVC का योग है। TC = TFC + TVC
सारणी (Schedule):
| उत्पादन (इकाइयाँ) | TFC (₹) | TVC (₹) | TC (₹) |
|---|---|---|---|
| 0 | 100 | 0 | 100 |
| 1 | 100 | 50 | 150 |
| 2 | 100 | 90 | 190 |
| 3 | 100 | 120 | 220 |
| 4 | 100 | 160 | 260 |
व्याख्या: उपरोक्त सारणी से स्पष्ट है कि TFC सभी उत्पादन स्तरों पर ₹100 स्थिर है। TVC उत्पादन बढ़ने के साथ बढ़ता है, और TC, TFC और TVC का योग है।
प्रश्न 29
मांग एवं पूर्ति द्वारा बाजार संतुलन निर्धारण को रेखाचित्र की सहायता से समझाइए। [4+2=6]
अथवा
मांग एवं पूर्ति दोनों में एक साथ वृद्धि होने पर साम्य कीमत पर क्या प्रभाव पड़ता है? रेखाचित्र की सहायता से समझाइए। [4+2=6]
Explain the determination of market equilibrium through demand and supply with the help of diagram.
OR
What is the effect of simultaneous increase in demand and supply on equilibrium price? Explain with the help of diagram.
उत्तर (पहला विकल्प): बाजार संतुलन का निर्धारण
बाजार संतुलन वह स्थिति है जहाँ किसी वस्तु की मांग और पूर्ति बराबर होती है। इसे मांग वक्र और पूर्ति वक्र के प्रतिच्छेद बिंदु द्वारा दर्शाया जाता है।
- मांग वक्र (DD) नीचे की ओर ढलान वाला होता है, जो दर्शाता है कि कीमत बढ़ने पर मांग घटती है।
- पूर्ति वक्र (SS) ऊपर की ओर ढलान वाला होता है, जो दर्शाता है कि कीमत बढ़ने पर पूर्ति बढ़ती है।
- जहाँ ये दोनों वक्र एक-दूसरे को काटते हैं, वहाँ साम्य कीमत (Equilibrium Price) और साम्य मात्रा (Equilibrium Quantity) निर्धारित होती है।
रेखाचित्र: एक ग्राफ बनाएँ जिसमें X-अक्ष पर मात्रा और Y-अक्ष पर कीमत हो। मांग वक्र (DD) नीचे की ओर और पूर्ति वक्र (SS) ऊपर की ओर खींचें। प्रतिच्छेद बिंदु E पर साम्य कीमत P* और साम्य मात्रा Q* होगी। यदि कीमत P* से अधिक है, तो अतिरिक्त पूर्ति होगी, जो कीमत को नीचे लाएगी। यदि कीमत P* से कम है, तो अतिरिक्त मांग होगी, जो कीमत को ऊपर ले जाएगी। इस प्रकार बाजार स्वतः संतुलन की ओर बढ़ता है।
उत्तर (दूसरा विकल्प): मांग और पूर्ति में एक साथ वृद्धि का प्रभाव
जब मांग और पूर्ति दोनों में एक साथ वृद्धि होती है, तो साम्य कीमत पर प्रभाव अनिश्चित होता है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि वृद्धि किस अनुपात में हुई है:
- यदि मांग में वृद्धि पूर्ति में वृद्धि से अधिक हो: साम्य कीमत बढ़ जाएगी।
- यदि पूर्ति में वृद्धि मांग में वृद्धि से अधिक हो: साम्य कीमत घट जाएगी।
- यदि दोनों में समान वृद्धि हो: साम्य कीमत अपरिवर्तित रहेगी।
रेखाचित्र: प्रारंभिक मांग वक्र D₁D₁ और पूर्ति वक्र S₁S₁ लें, जो बिंदु E₁ पर प्रतिच्छेद करते हैं। अब मांग वक्र दाईं ओर खिसककर D₂D₂ हो जाता है और पूर्ति वक्र भी दाईं ओर खिसककर S₂S₂ हो जाता है। नया प्रतिच्छेद बिंदु E₂ होगा। यदि D₂D₂ का खिसकाव S₂S₂ से अधिक है, तो E₂ पर कीमत अधिक होगी; यदि कम है, तो कीमत कम होगी; यदि बराबर है, तो कीमत समान रहेगी।
प्रश्न 30
व्यापारिक बैंक को परिभाषित कीजिए। व्यापारिक बैंक के किन्हीं चार कार्यों का वर्णन कीजिए। [2+4=6]
अथवा
केन्द्रीय बैंक को परिभाषित कीजिए। केन्द्रीय बैंक के किन्हीं चार कार्यों का वर्णन कीजिए। [2+4=6]
Define commercial bank. Describe any four functions of commercial bank.
OR
Define central bank. Describe any four functions of the central bank.
उत्तर (पहला विकल्प): व्यापारिक बैंक
परिभाषा: व्यापारिक बैंक एक वित्तीय संस्था है जो जनता से जमा स्वीकार करती है और व्यवसायों एवं व्यक्तियों को ऋण प्रदान करती है। इसका मुख्य उद्देश्य लाभ कमाना होता है।
चार कार्य:
- जमा स्वीकार करना: बैंक बचत, चालू और सावधि जमा के रूप में जनता से धन स्वीकार करता है।
- ऋण प्रदान करना: बैंक व्यक्तियों और व्यवसायों को विभिन्न प्रकार के ऋण (जैसे व्यक्तिगत ऋण, व्यावसायिक ऋण) प्रदान करता है।
- भुगतान की सुविधा: बैंक चेक, ड्राफ्ट, इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसफर आदि के माध्यम से भुगतान की सुविधा प्रदान करता है।
- विदेशी मुद्रा विनिमय: बैंक विदेशी मुद्रा के क्रय-विक्रय की सुविधा प्रदान करता है, जिससे अंतर्राष्ट्रीय व्यापार सुगम होता है।
उत्तर (दूसरा विकल्प): केन्द्रीय बैंक
परिभाषा: केन्द्रीय बैंक किसी देश की सर्वोच्च मौद्रिक संस्था होती है जो देश की मुद्रा और ऋण प्रणाली को नियंत्रित करती है। यह सरकार का बैंकर और बैंकों का बैंक होता है। भारत में यह भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) है।
चार कार्य:
- मुद्रा जारी करना: केन्द्रीय बैंक देश में मुद्रा (नोट और सिक्के) जारी करने का एकाधिकार रखता है।
- बैंकों का बैंक: यह वाणिज्यिक बैंकों को ऋण प्रदान करता है और उनके नकद आरक्षित अनुपात (CRR) को नियंत्रित करता है।
- सरकार का बैंकर: केन्द्रीय बैंक सरकार के खाते रखता है, सरकार को ऋण देता है और सरकार की ओर से वित्तीय लेन-देन करता है।
- मौद्रिक नीति का संचालन: यह ब्याज दरों, मुद्रा आपूर्ति और ऋण नियंत्रण के माध्यम से देश की मौद्रिक नीति तैयार और कार्यान्वित करता है, जिससे मूल्य स्थिरता और आर्थिक विकास सुनिश्चित होता है।
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