RBSE Class 12th 2018 Hindi (Compulsory)-SS-01-2018 Previous Year Papers
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| Board | RBSE |
|---|---|
| Class | Class 12th |
| Exam year | 2018 |
| Subject | Hindi (Compulsory)-SS-01-2018 |
| Resource type | Previous Year Papers |
| Category | RBSE Previous Year Question Papers |
| Website | RBSE Solution |
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RBSE Class 12th 2018 Hindi (Compulsory)-SS-01-2018
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Rajasthan Board Class 12th Hindi (Compulsory)-SS-01-2018 2018 solved Previous Year Question Papers
उच्च माध्यमिक परीक्षा, 2018
SENIOR SECONDARY EXAMINATION, 2018
हिन्दी (अनिवार्य)
HINDI (Compulsory)
समय : 3¼ घण्टे | पूर्णांक : 80
No. of Questions : 29 | No. of Printed Pages : 7
परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :
- परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न पत्र पर नामांक अनिवार्यतः लिखें।
- सभी प्रश्न करने अनिवार्य हैं।
- प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में निर्धारित शब्द-सीमा में लिखें।
- जिस प्रश्न के आ, ब, स, द भाग हैं, उन सभी भागों का हल एक साथ सतत् लिखें।
Roll No. : _______________
SLNo. : _______________
यहाँ से काटिए
SS—01-Hindi (Compulsory) | [ Turn Over ]
खण्ड - क
1) निम्नलिखित अपठित गद्यांश को पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए : [2+2=4]
(उत्तर सीमा 20 से 30 शब्द)
मनुष्य समाज की इकाई है और परिवार उसका अभिन्न अंग है। अतः सर्व प्रथम पारिवारिक शान्ति, सद्भाव और प्रेम इसलिए आवश्यक है कि उनके द्वारा वह अपने आपको समाज के हित-चिंतन में लगा सके। जिस समाज में मनुष्य परस्पर मिल कर कार्य करते हैं, वहाँ उस देश में श्री, सम्पन्नता और समृद्धि स्वतः ही उपलब्ध होती है। वस्तुतः वह देश प्रशंसनीय है, जिनके निवासियों में देश के प्रति गर्व की भावना विद्यमान हो तथा मातृ-भूमि पर स्वाभिमान हो और सह-अस्तित्व की भावना जाग्रत हो। ऐसे देश में सामाजिक, राजनीतिक तथा आर्थिक समृद्धियाँ निरन्तर व्याप्त रहती हैं।
(अ) समाज के कल्याण के लिए मनुष्य को सर्वप्रथम क्या करना आवश्यक है? [2]
समाज के कल्याण के लिए मनुष्य को सर्वप्रथम पारिवारिक शान्ति, सद्भाव और प्रेम स्थापित करना आवश्यक है, ताकि वह समाज के हित-चिंतन में लग सके।
(ब) किसी देश को प्रशंसनीय बनाने में किन तत्वों का योगदान होता है? [2]
देश को प्रशंसनीय बनाने में निवासियों में देश के प्रति गर्व की भावना, मातृ-भूमि पर स्वाभिमान तथा सह-अस्तित्व की भावना का योगदान होता है।
2) निम्नलिखित अपठित पद्यांश को पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए : [2+2=4]
(उत्तर सीमा 20 से 30 शब्द)
कार्य आदि में अवश्य अंत को विचारिए।
हानि-लाभ, ऊँच-नीच, बुद्धि से विचारिए।
भाइयों? स्वदेश बीच पूर्ण प्रीति कीजिए।
सदा परोपकार में स्वचित्त दीजिए।
जाति-पाँति की प्रथा वृथा न अब बढ़ाइए।
शुद्ध प्रीति रीति-नीति में प्रतीति लाइए।
देश के सुधार के सदा उपाय सोचिए।
देश हानि-कारिणी कुचाल शीघ्र मोचिए।
(अ) किसी भी कार्य को प्रारम्भ करने से पूर्व हमें क्या करना चाहिए? [2]
किसी भी कार्य को प्रारम्भ करने से पूर्व हमें उसके अंत (परिणाम) पर विचार करना चाहिए तथा हानि-लाभ और ऊँच-नीच को बुद्धि से समझना चाहिए।
(ब) देश के सुधार के लिए हमें क्या-क्या उपाय करने चाहिए? [2]
देश के सुधार के लिए हमें सदा उपाय सोचने चाहिए, देश के लिए हानिकारक कुचालों (बुरी आदतों) को शीघ्र छोड़ना चाहिए, स्वदेश से प्रेम करना चाहिए और परोपकार में मन लगाना चाहिए।
खण्ड - ख
निम्नांकित प्रश्नों के उत्तर एक-से-दो पक्तियों में दीजिए : [1+1=2]
A) खड़ी बोली हिन्दी ने अपने शब्द-भण्डार का विकास किस प्रकार किया है? [1]
खड़ी बोली हिन्दी ने अपने शब्द-भण्डार का विकास संस्कृत, फारसी, अरबी, तुर्की, अंग्रेजी आदि भाषाओं से शब्द ग्रहण करके तथा नए शब्दों का निर्माण करके किया है।
a) हिन्दी व्याकरण के बारे में संक्षेप में लिखिए। [1]
हिन्दी व्याकरण हिन्दी भाषा के शुद्ध रूप में बोलने, लिखने और समझने के नियमों का समूह है। इसमें वर्ण, शब्द, वाक्य, संधि, समास, कारक, काल, वाच्य आदि का अध्ययन किया जाता है।
रेखांकित शब्दों का पद परिचय दीजिए : [1+1=2]
a) चीन साम्राज्य विस्तार नीति पर कार्य करता है।
रेखांकित शब्द: साम्राज्य
पद परिचय: साम्राज्य - जातिवाचक संज्ञा, पुल्लिंग, एकवचन, कर्ता कारक, 'चीन' का विशेषण।
a) रजनी समय से पहले आ गई।
रेखांकित शब्द: रजनी
पद परिचय: रजनी - व्यक्तिवाचक संज्ञा, स्त्रीलिंग, एकवचन, कर्ता कारक, 'आ गई' क्रिया का कर्ता।
चमेली का पुष्प श्वेत वर्ण का सुगंधित पुष्प है।' उपर्युक्त वाक्य किस शब्द शक्ति का है? स्पष्ट कीजिए। [1+1=2]
यह वाक्य अभिधा शब्द शक्ति का उदाहरण है। अभिधा शब्द शक्ति में शब्द का सीधा, शाब्दिक अर्थ ग्रहण किया जाता है। यहाँ 'चमेली का पुष्प' का सीधा अर्थ चमेली के फूल से है, जो श्वेत और सुगंधित होता है।
“अजों तरयौना ही वन, श्रुति सेवत इक अंग। नाक बास बेसरि लह्यों बसि मुकुतन के अंग।।" - उपर्युक्त दोहे में कौनसा अलंकार है और क्यों? [1+1=2]
इस दोहे में अनुप्रास अलंकार है। कारण: इसमें 'अ' और 'ब' वर्णों की आवृत्ति हुई है - 'अजों तरयौना', 'बास बेसरि', 'बसि मुकुतन' में समान वर्णों की पुनरावृत्ति से अनुप्रास अलंकार उत्पन्न हुआ है।
निम्नांकित शब्दों के हिन्दी में अर्थ लिखिए : [1+1=2]
अ) Schedule [1]
अनुसूची / समय-सारणी
a) Project [1]
परियोजना / योजना
स्वयं को शासन सचिव, शिक्षा विभाग रविकुमार मानते हुए राज्य के समस्त संस्था प्रधानों को "गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा" की सुनिश्चितता हेतु एक अर्द्ध शासकीय पत्र का प्रारूप लिखिए। [2]
प्रारूप:
सेवा में,
समस्त संस्था प्रधान,
राज्य के सभी शासकीय/अशासकीय विद्यालय।
विषय: गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा की सुनिश्चितता हेतु।
महोदय,
मैं शासन सचिव, शिक्षा विभाग, राज्य सरकार की ओर से आपको सूचित करना चाहता हूँ कि राज्य में गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए निम्नलिखित बिंदुओं पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है:
- पाठ्यक्रम का समय पर पूर्ण करना।
- शिक्षण विधियों में नवाचार अपनाना।
- नियमित मूल्यांकन एवं फीडबैक।
- शिक्षकों का प्रशिक्षण एवं विकास।
- विद्यार्थियों की उपस्थिति सुनिश्चित करना।
आपसे अनुरोध है कि उपरोक्त बिंदुओं को प्राथमिकता देते हुए कार्य करें।
धन्यवाद।
भवदीय,
(रविकुमार)
शासन सचिव, शिक्षा विभाग
निम्नांकित विषयों में से किसी एक विषय पर लगभग 300 शब्दों में सारगर्भित निबन्ध लिखिए : [4]
अ) बालिका शिक्षा
बालिका शिक्षा का अर्थ है लड़कियों को शिक्षा प्रदान करना। यह किसी भी समाज की प्रगति के लिए अत्यंत आवश्यक है। शिक्षित बालिका एक शिक्षित परिवार और समाज का निर्माण करती है।
बालिका शिक्षा के महत्व को समझते हुए सरकार ने 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' जैसी योजनाएँ शुरू की हैं। इससे लड़कियों की शिक्षा में सुधार हुआ है। शिक्षित बालिकाएँ आत्मनिर्भर बनती हैं और देश के विकास में योगदान देती हैं।
हालाँकि, अभी भी कई क्षेत्रों में बालिका शिक्षा में बाधाएँ हैं जैसे गरीबी, सामाजिक रूढ़ियाँ, और बाल विवाह। इन बाधाओं को दूर करने के लिए जागरूकता अभियान चलाने और कानूनी सहायता प्रदान करने की आवश्यकता है।
निष्कर्षतः, बालिका शिक्षा एक सशक्त समाज की नींव है। हमें सभी बालिकाओं को शिक्षा का अवसर देने के लिए मिलकर प्रयास करना चाहिए।
ब) नदी जल स्वच्छता अभियान
नदी जल स्वच्छता अभियान भारत सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है जिसका उद्देश्य नदियों के जल को प्रदूषण मुक्त करना है। नदियाँ हमारी सभ्यता का आधार हैं, लेकिन औद्योगिकीकरण और शहरीकरण के कारण इनमें प्रदूषण बढ़ रहा है।
इस अभियान के तहत नदियों में गिरने वाले औद्योगिक अपशिष्ट और घरेलू कचरे को रोकने के प्रयास किए जाते हैं। सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाए जाते हैं और जन जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं।
नदी जल स्वच्छता से न केवल पेयजल की गुणवत्ता में सुधार होता है, बल्कि जलीय जीवन और कृषि को भी लाभ मिलता है। यह अभियान पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
हम सभी को नदियों को स्वच्छ रखने में अपना योगदान देना चाहिए, जैसे कि नदियों में कचरा न फेंकना और दूसरों को भी जागरूक करना।
स) समाचार पत्र
समाचार पत्र जनसंचार का एक महत्वपूर्ण माध्यम है जो हमें देश-विदेश की घटनाओं की जानकारी देता है। यह लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माना जाता है।
समाचार पत्र विभिन्न विषयों पर समाचार प्रस्तुत करता है - राजनीति, अर्थव्यवस्था, खेल, मनोरंजन, विज्ञान आदि। यह जनमत को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
डिजिटल युग में भी समाचार पत्रों का महत्व कम नहीं हुआ है। यह विश्वसनीय स्रोत है और गहन विश्लेषण प्रस्तुत करता है। समाचार पत्र पढ़ने से ज्ञान में वृद्धि होती है और भाषा कौशल में सुधार होता है।
समाचार पत्र समाज में जागरूकता फैलाने और सरकार की नीतियों पर निगरानी रखने का कार्य करता है। यह एक जिम्मेदार नागरिक के लिए आवश्यक उपकरण है।
द) रंग-बिरंग राजस्थान
राजस्थान अपनी रंगीन संस्कृति, परंपराओं और विरासत के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ के रंग-बिरंगे परिधान, त्योहार, और कला इसे विशेष बनाते हैं।
राजस्थान के लोक नृत्य जैसे घूमर, कालबेलिया, और भवाई अपने रंगीन परिधानों और संगीत के लिए जाने जाते हैं। यहाँ के त्योहार जैसे तीज, गणगौर, और दिवाली रंगों से भरे होते हैं।
राजस्थान के किले और महल जैसे आमेर, जयगढ़, और मेहरानगढ़ अपनी वास्तुकला और रंगीन सजावट के लिए प्रसिद्ध हैं। यहाँ की हस्तकला, ब्लॉक प्रिंटिंग, और आभूषण भी रंगीन होते हैं।
राजस्थान का रंग-बिरंगा वातावरण पर्यटकों को आकर्षित करता है और यह राज्य की पहचान है। यह विविधता में एकता का प्रतीक है।
खण्ड - 7
10. निम्नांकित पद्यांशों में से किसी एक पद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए : [1+2+1=4]
(उत्तर-सीमा लगभग 80 शब्द)
पद्यांश:
कदली, सीप, भुजंग-मुख, स्वाति एक गुन तीन।
जैसी संगति बैठिए, तैसोई फल दीन।।
मान सहित विष खाय के, संभु भयो जगदीस।
बिना मान अमृत पिये, राहु कटायो सीस॥
सप्रसंग व्याख्या:
प्रसंग: प्रस्तुत पद्यांश कवि कबीरदास द्वारा रचित है। इसमें संगति के महत्व को दर्शाया गया है।
व्याख्या: कवि कहते हैं कि केला, सीप, सर्प का मुख और स्वाति नक्षत्र की बूँद – इनमें एक ही गुण है, लेकिन संगति के कारण अलग-अलग फल मिलते हैं। केला (कदली) स्वाति की बूँद पड़ने पर मोती नहीं देता, सीप देता है; सर्प के मुख में पड़ने पर विष बनता है। इसी प्रकार, भगवान शंकर ने विष को सम्मानपूर्वक पीकर जगदीश पद पाया, जबकि राहु ने बिना सम्मान के अमृत पीकर अपना सिर कटवा लिया। अतः संगति और आदर का फल अलग-अलग होता है।
अथवा
पद्यांश:
पुलक रहे थे अंग, मुझमें कौतूहल था छलक रहा।
मुँह पर थी आह्लाद लालिमा, विजय गर्व था झलक रहा।
मैंने पूछा, यह क्या लायी? बोल उठी, “माँ काओ।”
हुआ प्रफुल्लित हृदय खुशी से, मैंने कहा, “तुम खाओ?”
पाया मैंने बचपन फिर से बचपन बेटी बन आया।
उसकी मूर्ति देखकर मुझमें नवजीवन आया।
सप्रसंग व्याख्या:
प्रसंग: प्रस्तुत पद्यांश हरिवंशराय बच्चन की कविता ‘बचपन’ से लिया गया है। इसमें कवि अपनी बेटी में बचपन को देखकर प्रसन्न होते हैं।
व्याख्या: कवि की बेटी के अंग पुलकित हैं और कवि के मन में कौतूहल छलक रहा है। बेटी के मुँह पर खुशी की लालिमा और विजय का गर्व झलक रहा है। कवि पूछता है कि वह क्या लायी है, तो बेटी कहती है “माँ काओ” (माँ काटो)। कवि का हृदय खुशी से प्रफुल्लित हो जाता है और वह कहता है कि तुम खाओ। कवि को लगता है कि उसका बचपन बेटी के रूप में लौट आया है, जिससे उसमें नवजीवन आ गया है।
11. निम्नांकित गद्यांशों में से किसी एक गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए : [1+2+1=4]
(उत्तर-सीमा लगभग 80 शब्द)
गद्यांश:
मुझे तो मनुष्य के हाथ से बने हुए कामों में उनकी प्रेममय पवित्र आत्मा की सुगंध आती है। राफेल आदि के चित्रित चित्रों में उनकी कला-कुशलता को देख इतनी सदियों के बाद भी उनके अंत: करण के सारे भावों का अनुभव होने लगता है। केवल चित्र का ही दर्शन नहीं, किंतु साथ ही उसमें छिपी हुई चित्रकार की आत्मा तक के दर्शन हो जाते हैं; परन्तु यंत्रों की सहायता से बने हुए फोटो निर्जीव से प्रतीत होते हैं। उनमें और हाथ के चित्रों में उतना ही भेद है जितना कि बस्ती और मशान में।
सप्रसंग व्याख्या:
प्रसंग: प्रस्तुत गद्यांश ‘हाथ और यंत्र’ शीर्षक निबंध से लिया गया है। इसमें हाथ से बनी कला और यंत्रों से बनी कला में अंतर बताया गया है।
व्याख्या: लेखक कहता है कि मनुष्य के हाथ से बनी वस्तुओं में उसकी प्रेममय आत्मा की सुगंध आती है। राफेल जैसे चित्रकारों के चित्रों में सदियों बाद भी उनके भावों का अनुभव होता है। हाथ के चित्रों में चित्रकार की आत्मा के दर्शन होते हैं, जबकि यंत्रों से बने फोटो निर्जीव लगते हैं। दोनों में उतना ही अंतर है जितना बस्ती (गाँव) और मशान (श्मशान) में होता है।
अथवा
गद्यांश:
इस प्रकार अपने ज्ञान बल, हृदयबल और शरीरबल की वृद्धि के साथ वह दुःख की छाया मानों हटाता चलता है। समस्त मनुष्य-जाति की सभ्यता के विकास का ही यही क्रम रहा है। भूतों का भय तो अब बहुत कुछ छूट गया है, पशुओं की बाधा भी मनुष्य के लिए प्राय: नहीं रह गई है; पर मनुष्य के लिए मनुष्य का भय बना हुआ है। इस भय के छूटने के लक्षण भी नहीं दिखाई देते। अब मनुष्यों के दुःख का कारण मनुष्य ही है। सभ्यता से अंतर केवल इतना ही पड़ा है कि दुःख-दान की विधियाँ बहुत गूढ़ और जटिल हो गई हैं।
सप्रसंग व्याख्या:
प्रसंग: प्रस्तुत गद्यांश ‘सभ्यता का रहस्य’ शीर्षक निबंध से लिया गया है। इसमें सभ्यता के विकास के साथ मनुष्य के दुखों की प्रकृति में बदलाव को दर्शाया गया है।
व्याख्या: लेखक कहता है कि मनुष्य ज्ञान, हृदय और शरीर बल बढ़ाकर दुखों को दूर करता चला गया। सभ्यता के विकास के साथ भूत-प्रेत का भय और पशुओं का भय समाप्त हो गया, लेकिन मनुष्य के लिए मनुष्य का भय बना हुआ है। अब मनुष्य ही मनुष्य के दुख का कारण है। सभ्यता ने केवल दुख देने के तरीकों को जटिल और गूढ़ बना दिया है, मूल समस्या वही है।
— SS—01—Hindi(C) 04 —
प्रश्न 2
बाज़ार में एक जादू है- इस कथन को “बाज़ार-दर्शन' अध्याय के आधार पर उचित उदाहरणों द्वारा स्पष्ट कीजिए। (उत्तर-सीमा 80 शब्द) [4]
उत्तर: बाज़ार में एक जादू है जो व्यक्ति को अपनी ओर आकर्षित करता है। यह जादू वस्तुओं की सजावट, रोशनी, और विज्ञापनों में छिपा होता है। उदाहरण के लिए, दुकानों पर सजे रंग-बिरंगे कपड़े या चमकीले गहने देखकर लोग बिना आवश्यकता के भी खरीदारी कर लेते हैं। यह जादू उपभोक्ता को मोहित कर उसकी इच्छाओं को जगाता है।
प्रश्न 2 (वैकल्पिक)
“किसी ऐसे ही क्षण में, ऐसे ही ढेलों पर हिमालयों से घिरकर ही तो तुलसी ने नहीं कहा था-कबहूँक हों यहि रहनि रहोंगो........... ।!” - इस कथन के आधार पर हिमालय के सौंदर्य का वर्णन कीजिए। (उत्तर-सीमा 80 शब्द) [4]
उत्तर: हिमालय का सौंदर्य अद्वितीय और भव्य है। यहाँ बर्फ से ढकी चोटियाँ, घने जंगल, और शांत वातावरण मन को मोह लेते हैं। तुलसीदास ने इसी प्राकृतिक छटा में डूबकर भक्ति की रचना की। हिमालय की ऊँचाई और विशालता मनुष्य को अपनी लघुता का अहसास कराती है, जबकि इसकी सुंदरता आत्मिक शांति प्रदान करती है। यह स्थान ध्यान और साधना के लिए प्रेरित करता है।
प्रश्न 3
“कवि हरिवंश राय बच्चन की कविता 'आत्म-परिचय' अपनी अस्मिता, अपनी पहचान का बोध कराती है।” - उपर्युक्त कथन की उदाहरण सहित व्याख्या “आत्म-परिचय' कविता के आधार पर कीजिए। [4] (उत्तर-सीमा लगभग 80 शब्द)
उत्तर: 'आत्म-परिचय' कविता में कवि अपनी पहचान को स्पष्ट करते हैं। वे कहते हैं, “मैं नहीं हूँ वह जो दिखता हूँ” – यह पंक्ति दर्शाती है कि बाहरी रूप से भिन्न दिखने के बावजूद उनकी आत्मा अलग है। कवि अपने संघर्षों और विचारों को स्वीकार करते हुए अपनी अस्मिता को परिभाषित करते हैं। यह कविता पाठक को अपने अस्तित्व पर चिंतन करने के लिए प्रेरित करती है।
प्रश्न 3 (वैकल्पिक)
“बिहारी के काव्य में उक्ति वैचित्रय, अन्योक्ति, अर्थ-गाम्भीर्य, अर्थ-विस्तार, आलंकारिता तथा कल्पना की समाहार शक्ति का विलक्षण समावेश है।” - इस कथन को उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए। (उत्तर सीमा लगभग 80 शब्द) [4]
उत्तर: बिहारी के काव्य में उक्ति वैचित्र्य का उदाहरण है – “मेरी भव बाधा हरौ, राधा नागरि सोइ” जहाँ वे राधा को नागरी कहकर अन्योक्ति का प्रयोग करते हैं। अर्थ-गाम्भीर्य के लिए “जिनके मन रम गोपाल” पंक्ति में भक्ति का गहरा अर्थ छिपा है। आलंकारिता में श्लेष और उपमा का सुंदर प्रयोग मिलता है। कल्पना की समाहार शक्ति उनके दोहों में विविध भावों को एक साथ प्रस्तुत करती है।
प्रश्न 4
'प्रेमाभक्ति' की अमृतधारा, सूरदास के पदों में निर्बाध प्रवाहित हुई है। 'भ्रमरगीत' पठितांश के आधार पर स्पष्ट कीजिए। (उत्तर सीमा लगभग 40 शब्द) [2]
उत्तर: सूरदास के पदों में प्रेमाभक्ति की धारा निरंतर बहती है। 'भ्रमरगीत' में गोपियाँ कृष्ण के प्रति अपने प्रेम को व्यक्त करती हैं, जो भक्ति का सर्वोच्च रूप है। यह प्रेम सांसारिक न होकर आध्यात्मिक है, जो भक्त को ईश्वर से जोड़ता है।
प्रश्न 5
तुलसीदास जी ने बुरे समय के साथी किसे बताया है और क्यों? (उत्तर-सीमा लगभग 40 शब्द) [2]
उत्तर: तुलसीदास जी ने बुरे समय के साथी धैर्य और साहस को बताया है। क्योंकि कठिन परिस्थितियों में धैर्य ही व्यक्ति को संयमित रखता है और साहस उसे आगे बढ़ने की शक्ति देता है। ये दोनों गुण मनुष्य को विपत्ति में डटे रहने में सहायक होते हैं।
प्रश्न 6
शासन की दृष्टि में समानता की बात महत्त्वपूर्ण क्यों है? 'सफल प्रजातन्त्रवाद के लिए आवश्यक बातें' अध्याय के आधार पर स्पष्ट कीजिए। (उत्तर-सीमा लगभग 40 शब्द) [2]
उत्तर: शासन की दृष्टि में समानता महत्त्वपूर्ण है क्योंकि यह लोकतंत्र की नींव है। बिना समानता के नागरिकों को न्याय और अधिकार नहीं मिल सकते। सफल प्रजातंत्र के लिए सभी को समान अवसर और कानूनी संरक्षण आवश्यक है, जिससे सामाजिक सद्भाव बना रहे।
प्रश्न 7
पिता के द्वारा उत्कोच स्वीकार करने पर 'ममता' के हृदयगत भावों को स्पष्ट कीजिए। [2] (उत्तर-सीमा लगभग 40 शब्द)
उत्तर: पिता द्वारा उत्कोच स्वीकार करने पर 'ममता' के हृदय में गहरी पीड़ा और निराशा होती है। वह अपने पिता के इस कृत्य को अनैतिक मानती है और उनके प्रति सम्मान खो देती है। उसके मन में संघर्ष और शर्मिंदगी के भाव उत्पन्न होते हैं।
प्रश्न 8
कवि कुँवर नारायण अथवा साहित्यकार कन्हैयालाल मिश्र प्रभाकर का साहित्यिक परिचय दीजिए। [4] (उत्तर-सीमा लगभग 80 शब्द)
उत्तर: कुँवर नारायण हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध कवि हैं। उनका जन्म 1927 में हुआ। उनकी कविताओं में आधुनिकता और मानवीय संवेदनाओं का गहरा चित्रण मिलता है। प्रमुख रचनाएँ हैं – 'चक्रव्यूह', 'आत्मजयी' और 'वाजश्रवा के बहाने'। उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
अथवा
कन्हैयालाल मिश्र प्रभाकर हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध लेखक और पत्रकार थे। उनका जन्म 1906 में हुआ। उन्होंने निबंध, कहानी और उपन्यास विधाओं में लेखन किया। प्रमुख रचनाएँ हैं – 'आकाश के तारे', 'जीवन के प्रकाश' और 'साहित्य का मर्म'। उनकी शैली सरल और प्रभावशाली है।
खण्ड – ग
19) भाषा, बिम्ब और लय का अद्भुत संयोग कवि 'शमशेर बहादुर सिंह' की कविता में लक्षित होता है। इस कथन के आधार पर 'शमशेर बहादुर सिंह' द्वारा लिए गए नए उपमानों को लिखिए। [2]
(उत्तर सीमा लगभग 20 शब्द)
उत्तर: शमशेर बहादुर सिंह ने 'धूप का कुत्ता', 'अँधेरे का दीया', 'पानी का पहिया' जैसे नए और मौलिक उपमानों का प्रयोग किया है।
20) “जीवन का भेद बाह्य तड़क-भड़क में नहीं, अन्तर की दृढ़ता में है।” इस कथन के आधार पर 'आँवले' की दो चारित्रिक विशेषताएँ बताइए। [2]
(उत्तर सीमा लगभग 20 शब्द)
उत्तर: आँवले की दो चारित्रिक विशेषताएँ हैं – (1) बाहरी सादगी के बावजूद आंतरिक दृढ़ता, (2) कठिन परिस्थितियों में भी अपने सिद्धांतों पर अडिग रहना।
खण्ड – घ
21) 'मनुष्य और उसका काम' – इस विषय पर गाँधीजी के क्या विचार थे? [2]
(उत्तर सीमा लगभग 40 शब्द)
उत्तर: गाँधीजी के अनुसार, काम केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि मनुष्य के नैतिक और आध्यात्मिक विकास का माध्यम है। उन्होंने श्रम की गरिमा पर बल दिया और कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपना काम स्वयं करना चाहिए, चाहे वह छोटा या बड़ा हो।
22) “कल; देखते नहीं, यह रेशम से सिला हुआ सालू।” – लड़की के इस कथन का बालक लहनसिंह के मन और व्यवहार पर क्या प्रभाव पड़ा? [2]
(उत्तर सीमा लगभग 40 शब्द)
उत्तर: लड़की के इस कथन से लहनसिंह को अपनी गरीबी और अभाव का एहसास हुआ। उसके मन में हीन भावना जागी और वह अपने फटे-पुराने कपड़ों के कारण शर्मिंदा हुआ। इससे उसके व्यवहार में संकोच और उदासी आ गई।
23) ऐसी कौन-सी बात थी जिसे जानकर महादेवी जी को कष्ट व आश्चर्य, दोनों की अनुभूति हुई? [2]
(उत्तर सीमा लगभग 40 शब्द)
उत्तर: महादेवी जी को यह जानकर कष्ट और आश्चर्य हुआ कि उनके पिता ने उनकी अनुपस्थिति में उनका विवाह तय कर दिया था। यह उनके लिए अप्रत्याशित था क्योंकि वे स्वतंत्र विचारों वाली थीं और अपने जीवन के निर्णय स्वयं लेना चाहती थीं।
अथवा
एलोरा की गुफा-श्रृंखला के प्रमुख अंग कौन-कौन से हैं? उनकी विशेषताएँ भी लिखिए। [2]
(उत्तर सीमा लगभग 40 शब्द)
उत्तर: एलोरा की गुफा-श्रृंखला के प्रमुख अंग हैं – बौद्ध, हिंदू और जैन गुफाएँ। बौद्ध गुफाओं में विहार और चैत्य हैं, हिंदू गुफाओं में कैलाश मंदिर प्रमुख है, और जैन गुफाओं में तीर्थंकरों की मूर्तियाँ हैं। ये सभी अपनी वास्तुकला और मूर्तिकला के लिए प्रसिद्ध हैं।
24) देवनारायण जी, रामदेव जी व संत जम्भेश्वर को 'राजस्थान के गौरव' क्यों कहा जाता है? 'राजस्थान के गौरव' अध्याय के आधार पर लिखिए। [2+2+2=6]
(उत्तर सीमा लगभग 80 से 100 शब्द)
उत्तर: देवनारायण जी, रामदेव जी और संत जम्भेश्वर को 'राजस्थान के गौरव' कहा जाता है क्योंकि इन्होंने राजस्थान की संस्कृति, धर्म और समाज को नई दिशा दी। देवनारायण जी ने गुर्जर समाज में एकता और भक्ति का संचार किया। रामदेव जी ने समाज में समानता और सेवा का संदेश दिया। संत जम्भेश्वर ने विष्णोई समाज की स्थापना कर पर्यावरण संरक्षण और अहिंसा का पाठ पढ़ाया। इनके योगदान ने राजस्थान को गौरवान्वित किया।
अथवा
“तुलसीदास ने लोक-कल्याण के लिए संन्यास धारण किया, तो रत्नावली ने भी तपस्विनी भारतीय नारी की तरह उनका साथ दिया।” इस कथन को 'मानस का हंस' उपन्यास के पठित अंशों के आधार पर स्पष्ट कीजिए। [6]
(उत्तर सीमा लगभग 80 से 100 शब्द)
उत्तर: 'मानस का हंस' उपन्यास के अनुसार, तुलसीदास ने लोक-कल्याण के लिए संन्यास धारण किया ताकि वे रामकथा का प्रचार कर सकें। रत्नावली ने पत्नी होते हुए भी तपस्विनी भारतीय नारी की तरह उनका साथ दिया। उन्होंने तुलसीदास के संन्यास को स्वीकार किया और उनके कार्यों में सहयोग किया। रत्नावली का त्याग और समर्पण भारतीय नारी के आदर्श को दर्शाता है, जो पति के धर्म और कर्तव्य में बाधा नहीं बनती।
खण्ड - ड
25) टीवी समाचारों की विशेषताएँ संक्षेप में लिखिए।
(उत्तर सीमा लगभग 40 शब्द)
टीवी समाचारों की प्रमुख विशेषताएँ हैं: दृश्य-श्रव्य माध्यम होना, त्वरित प्रसारण, व्यापक दर्शक वर्ग, चित्रों और ध्वनि के माध्यम से प्रभावी संप्रेषण, तथा घटनास्थल का सजीव चित्रण। ये समाचार अधिक प्रभावशाली और विश्वसनीय होते हैं।
26) संपादक के नाम पत्र लिखते समय किन बातों का ध्यान रखा जाना चाहिए?
(उत्तर सीमा लगभग 40 शब्द)
संपादक के नाम पत्र लिखते समय ध्यान रखें: विषय स्पष्ट और संक्षिप्त हो, भाषा सरल और विनम्र हो, तथ्य सटीक हों, पत्र में दिनांक और लेखक का पूरा पता हो, तथा पत्र सार्वजनिक हित से संबंधित हो।
27) किसी साक्षात्कार को लिखने के बाद व प्रकाशन से पूर्व कौन से कार्य करने चाहिए?
(उत्तर सीमा लगभग 40 शब्द)
साक्षात्कार लिखने के बाद प्रकाशन से पूर्व निम्न कार्य करने चाहिए: संपादन और प्रूफ-रीडिंग, साक्षात्कारकर्ता से अनुमोदन, तथ्यों की पुष्टि, भाषा की शुद्धता की जाँच, तथा उचित शीर्षक और चित्र का चयन।
28) यदि आप को पत्रकार बनना पड़े तो आप किस प्रकार की पत्रकारिता करना चाहेंगे और क्यों?
(उत्तर सीमा 60 शब्द)
यदि मुझे पत्रकार बनना पड़े, तो मैं जांच पत्रकारिता करना चाहूँगा। इसके माध्यम से समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार, अन्याय और असमानता को उजागर किया जा सकता है। जांच पत्रकारिता सत्य की खोज करती है और शोषितों को आवाज देती है, जिससे समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।
29) यात्रा की विशेषताओं के संदर्भ में मोहन राकेश के विचारों को स्पष्ट कीजिए।
(उत्तर सीमा लगभग 60 शब्द)
मोहन राकेश के अनुसार, यात्रा केवल स्थान परिवर्तन नहीं, बल्कि आत्म-खोज का माध्यम है। यात्रा में नए अनुभव, संस्कृतियों का ज्ञान और मानवीय संबंधों की गहराई निहित होती है। वे यात्रा को जीवन के प्रति दृष्टिकोण बदलने वाला अनुभव मानते हैं, जो व्यक्ति को संवेदनशील और समझदार बनाती है।