RBSE Class 12th 2018 Physics-SS-40-1-2018 Previous Year Papers
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Paper details
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| Board | RBSE |
|---|---|
| Class | Class 12th |
| Exam year | 2018 |
| Subject | Physics-SS-40-1-2018 |
| Resource type | Previous Year Papers |
| Category | RBSE Previous Year Question Papers |
| Website | RBSE Solution |
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RBSE Class 12th 2018 Physics-SS-40-1-2018
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Rajasthan Board Class 12th Physics-SS-40-1-2018 2018 solved Previous Year Question Papers
उच्च माध्यमिक परीक्षा, 2018
SENIOR SECONDARY EXAMINATION, 2018
भौतिक विज्ञान
PHYSICS
समय : 3¼ घण्टे पूर्णांक : 56
परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :
GENERAL INSTRUCTIONS TO THE EXAMINEES :
- परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न पत्र पर नामांक अनिवार्यतः लिखें।
Candidate must write first his/her Roll No. on the question paper compulsorily. - सभी प्रश्न करना अनिवार्य हैं।
All the questions are compulsory. - प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें।
Write the answer to each question in the given answer-book only. - जिन प्रश्नों में आन्तरिक खण्ड हैं, उन सभी के उत्तर एक साथ ही लिखें।
For questions having more than one part, the answers to those parts are to be written together in continuity. - प्रश्न पत्र के हिन्दी व अंग्रेजी रूपान्तर में किसी प्रकार की त्रुटि / अन्तर / विरोधाभास होने पर हिन्दी भाषा के प्रश्न को सही मानें।
If there is any error/ difference/ contradiction in Hindi & English versions of the question paper, the question of Hindi version should be treated valid.
SLNo. : ___________ नामांक / Roll No. : ___________
No. of Questions — 30 S S-40--Phy.
No. of Printed Pages — 07
SS—40-I-Phy. 069 | [ Turn Over
Tear Here
प्रश्न पत्र को खोलने के लिए यहाँ से काटिए
TEAR HERE TO OPEN THE QUESTION PAPER
प्रश्न संख्या एवं अंक योजना
| प्रश्न संख्या | अंक प्रति प्रश्न |
|---|---|
| 1-3 | 1 |
| 4-24 | 2 |
| 25-27 | 3 |
| 28-30 | 4 |
| Q. Nos. | Marks per question |
|---|---|
| 1-3 | 1 |
| 4-24 | 2 |
| 25-27 | 3 |
| 28-30 | 4 |
प्रश्न संख्या 2 तथा 27 से 30 में आन्तरिक विकल्प हैं।
There are internal choices in Q.Nos. 2 and 27 to 30.
परीक्षा में कैलकुलेटर के उपयोग की अनुमति नहीं है।
Use of calculator is not allowed in the examination.
प्रश्न 1
उस भौतिक राशि का नाम लिखिए जिसका मात्रक जूल/कूलाम है। बताइये कि यह राशि सदिश है या अदिश ? [2+½=2½]
Write the name of physical quantity whose unit is J/C. State whether this quantity is a vector or scalar?
उत्तर: भौतिक राशि का नाम विद्युत विभव (Electric Potential) है। यह एक अदिश (Scalar) राशि है।
Reason: J/C = Volt, which is electric potential. Potential is a scalar quantity as it has magnitude only and no direction.
प्रश्न 2
अति चालकता को परिभाषित कीजिए। [1]
Define Super Conductivity.
उत्तर: अति चालकता (Superconductivity) वह घटना है जिसमें किसी पदार्थ का विद्युत प्रतिरोध एक निश्चित क्रांतिक तापमान (Tc) से नीचे शून्य हो जाता है, और पदार्थ पूर्ण चालक बन जाता है।
Definition: Superconductivity is the phenomenon in which the electrical resistance of a material becomes exactly zero below a certain critical temperature (Tc), and the material becomes a perfect conductor.
प्रश्न 3
धारामापी के लिए दक्षतांक की परिभाषा लिखिए। [1]
Write the definition of figure of merit of Galvanometer.
उत्तर: धारामापी का दक्षतांक (Figure of Merit) वह न्यूनतम धारा है जो धारामापी की सुई में एक स्केल विभाजन का विक्षेपण उत्पन्न करती है। इसे k = I/θ से व्यक्त किया जाता है, जहाँ I धारा और θ विक्षेपण है।
Definition: The figure of merit of a galvanometer is the current required to produce a deflection of one scale division. It is given by k = I/θ, where I is current and θ is deflection.
प्रश्न 4
एक लौहचुम्बकीय पदार्थ के लिए शैथिल्य वक्र (B-H वक्र) बनाइये। [1]
Draw hysteresis curve (B-H curve) for a ferromagnetic substance.
उत्तर: लौहचुम्बकीय पदार्थ के लिए शैथिल्य वक्र (B-H curve) एक बंद लूप होता है जो चुम्बकीय क्षेत्र प्रबलता (H) और चुम्बकीय फ्लक्स घनत्व (B) के बीच संबंध दर्शाता है। इसमें:
- प्रारंभिक चुम्बकन वक्र (O से A तक)
- संतृप्ति बिंदु (A)
- अवशेष चुम्बकत्व (Retentivity) - B पर B का मान
- निग्रह बल (Coercivity) - C पर H का मान
- पूरा लूप (ABCDA) शैथिल्य दर्शाता है
Note: वक्र का आकार लौहचुम्बकीय पदार्थ की विशेषता है।
प्रश्न 5
प्रत्यावर्ती धारा को शिखर मान से शून्य तक पहुँचने में लगा समय ज्ञात कीजिए। प्रत्यावर्ती धारा की आवृति 50Hz है। [1]
Find the time taken by alternating current to attain zero from peak value. The frequency of alternating current is 50Hz.
हल:
प्रत्यावर्ती धारा का समीकरण: I = I₀ sin(ωt)
शिखर मान (I₀) से शून्य तक पहुँचने का अर्थ है sin(ωt) = 0 से sin(ωt) = 1 तक का समय अंतराल।
sin(ωt) = 1 पर ωt = π/2
sin(ωt) = 0 पर ωt = 0
अतः समय अंतराल Δt = (π/2)/ω = π/(2ω)
ω = 2πf = 2π × 50 = 100π rad/s
Δt = π/(2 × 100π) = 1/200 = 0.005 सेकंड
उत्तर: 0.005 सेकंड (या 5 मिलीसेकंड)
Solution: For AC, I = I₀ sin(ωt). From peak (sin=1) to zero (sin=0), phase changes by π/2. Time = (π/2)/ω = π/(2×2πf) = 1/(4f) = 1/(4×50) = 1/200 = 0.005 s.
6) मैलस का नियम लिखिए। [4]
Write Malus law.
मैलस का नियम (Malus Law): जब एक ध्रुवित प्रकाश तरंग किसी विश्लेषक (पोलरॉइड) से गुजरती है, तो उसकी तीव्रता, आपतित ध्रुवित प्रकाश के ध्रुवण तल और विश्लेषक के अक्ष के बीच के कोण (θ) के कोसाइन के वर्ग के समानुपाती होती है।
गणितीय रूप: I = I₀ cos²θ, जहाँ I₀ आपतित ध्रुवित प्रकाश की तीव्रता है और I संचरित प्रकाश की तीव्रता है।
7) किसी धातु के लिए कार्यफलन से क्या तात्पर्य है? [1]
What does mean by work function for metals?
कार्यफलन (Work Function): किसी धातु की सतह से एक इलेक्ट्रॉन को बाहर निकालने के लिए आवश्यक न्यूनतम ऊर्जा को कार्यफलन कहते हैं। इसे प्रायः ϕ (phi) से दर्शाया जाता है और इसका मात्रक इलेक्ट्रॉन-वोल्ट (eV) होता है।
8) 0.4 वोल्ट से त्वरित इलेक्ट्रॉन से सम्बद्ध दे-ब्रॉग्ली तरंग दैर्घ्य ज्ञात कीजिए। [1]
Find the de-Broglie wave length related to an electron accelerated by 0.4 volt.
हल: दे-ब्रॉग्ली तरंगदैर्घ्य का सूत्र: λ = h / √(2mE)
यहाँ, V = 0.4 वोल्ट, e = 1.6 × 10⁻¹⁹ C, m = 9.1 × 10⁻³¹ kg, h = 6.63 × 10⁻³⁴ Js
गतिज ऊर्जा E = eV = 1.6 × 10⁻¹⁹ × 0.4 = 6.4 × 10⁻²⁰ J
λ = 6.63 × 10⁻³⁴ / √(2 × 9.1 × 10⁻³¹ × 6.4 × 10⁻²⁰)
λ = 6.63 × 10⁻³⁴ / √(1.1648 × 10⁻⁴⁹) = 6.63 × 10⁻³⁴ / 3.413 × 10⁻²⁵
λ ≈ 1.94 × 10⁻⁹ m = 1.94 nm
अतः दे-ब्रॉग्ली तरंगदैर्घ्य लगभग 1.94 nm है।
9) प्रकाश उत्सर्जक डायोड (LED) बनाने के लिए उपयोग में लिये जाने वाले किसी एक अपमिश्रित अर्द्धचालक का नाम लिखिए। [1]
Write the name of any one dopped semiconductor used for making light emitting diode (LED).
उत्तर: गैलियम आर्सेनाइड फॉस्फाइड (GaAsP) या गैलियम नाइट्राइड (GaN) जैसे अपमिश्रित अर्द्धचालकों का उपयोग LED बनाने में किया जाता है।
10) एकल स्लिट द्वारा विवर्तन में तीव्रता वितरण का वक्र बनाइये। [1]
Draw the curve for intensity distribution in diffraction by single slit.
तीव्रता वितरण वक्र: एकल स्लिट विवर्तन में, केंद्र पर अधिकतम तीव्रता (प्राथमिक उच्चिष्ठ) होती है, जो दोनों ओर घटती जाती है और द्वितीयक उच्चिष्ठ (गौण उच्चिष्ठ) बनाती है। तीव्रता केंद्र से दूरी बढ़ने पर तेजी से घटती है।
वक्र का वर्णन: केंद्र पर सबसे ऊँचा शिखर, फिर दोनों ओर छोटे शिखर (द्वितीयक उच्चिष्ठ) और उनके बीच न्यूनतम तीव्रता (अदीप्त फ्रिंज)।
11) एक समान दर से चलने वाली श्रृंखला अभिक्रिया के लिए न्यूट्रॉन गुणन गुणांक का मान कितना होगा? [1]
What will be the value of neutron multiplication factor for controlled chain reactions?
उत्तर: नियंत्रित श्रृंखला अभिक्रिया (समान दर से चलने वाली) के लिए न्यूट्रॉन गुणन गुणांक (k) का मान 1 (एक) होता है। इसे क्रांतिक अवस्था (critical state) कहते हैं।
12) आयाम मॉडुलित तरंग का चित्र बनाइये। [1]
Draw a diagram of amplitude modulated wave.
आयाम मॉडुलित तरंग का चित्र: इसमें एक उच्च आवृत्ति की वाहक तरंग (carrier wave) का आयाम, निम्न आवृत्ति के संदेश संकेत (modulating signal) के अनुसार बदलता है। परिणामी तरंग का आवरण (envelope) संदेश संकेत के आकार का होता है।
विवरण: वाहक तरंग के शीर्ष बिंदुओं को जोड़ने पर संदेश संकेत का आकार प्राप्त होता है।
13) कोई दो मैक्सवेल समीकरण लिखिए। [1]
Write any two Maxwell's equations.
मैक्सवेल के दो समीकरण:
- गॉस का नियम (विद्युत क्षेत्र के लिए): ∇·E = ρ/ε₀ (या ∮ E·dA = Q/ε₀) — किसी बंद पृष्ठ से गुजरने वाला कुल विद्युत फ्लक्स, पृष्ठ के अंदर कुल आवेश का 1/ε₀ गुना होता है।
- फैराडे का प्रेरण का नियम: ∇×E = -∂B/∂t (या ∮ E·dl = -dΦ_B/dt) — समय के साथ चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन, विद्युत क्षेत्र उत्पन्न करता है।
14) 10 cm त्रिज्या के आवेशित गोलीय कोश के पृष्ठ पर विभव का मान 50 वोल्ट है। गोलीय कोश के केन्द्र से 20 cm दूरी पर विद्युत विभव का मान ज्ञात कीजिए। [2]
Electric Potential on the surface of a charged spherical shell of radius 10 cm is 50 volt. Find the value of electric potential at a distance of 20 cm from the centre of spherical shell.
हल: गोलीय कोश के पृष्ठ पर विभव V_s = kQ/R = 50 V (जहाँ R = 10 cm = 0.1 m)
केन्द्र से r = 20 cm = 0.2 m दूरी पर (कोश के बाहर), विभव V = kQ/r
चूँकि kQ = V_s × R = 50 × 0.1 = 5 Vm
अतः V = 5 / 0.2 = 25 V
अतः 20 cm दूरी पर विद्युत विभव 25 वोल्ट है।
15) 0°C ताप पर एक चालक का प्रतिरोध XΩ है। वह ताप ज्ञात कीजिए जिस पर चालक का प्रतिरोध 3XΩ हो जाता है? चालक का प्रतिरोध ताप गुणांक नियत है जिसका मान 0.4 × 10⁻³ °C⁻¹ है। [2]
The Resistance of a conductor is XΩ at 0°C temp. Find the temperature at which the resistance of conductor becomes 3XΩ. The temp. coefficient of resistance for conductor is 0.4 × 10⁻³ °C⁻¹ which is constant.
हल: प्रतिरोध ताप गुणांक का सूत्र: R_t = R₀ (1 + αt)
यहाँ, R₀ = XΩ, R_t = 3XΩ, α = 0.4 × 10⁻³ °C⁻¹
3X = X (1 + 0.4 × 10⁻³ × t)
3 = 1 + 0.4 × 10⁻³ t
2 = 0.4 × 10⁻³ t
t = 2 / (0.4 × 10⁻³) = 2 / 0.0004 = 5000 °C
अतः चालक का प्रतिरोध 3XΩ, 5000°C ताप पर होगा।
6)
किरखॉफ के नियम का उपयोग करते हुए व्हीट स्टोन सेतु की संतुलन अवस्था के लिए आवश्यक प्रतिबन्ध प्राप्त कीजिए। आवश्यक परिपथ चित्र बनाइये। [1+1=2]
Obtain necessary condition for balancing state of Wheat Stone Bridge by using Kirchhoff's law. Draw necessary circuit diagram.
Solution:
व्हीटस्टोन सेतु में चार प्रतिरोध P, Q, R, S एक वर्गाकार रूप में जुड़े होते हैं। सेतु की संतुलन अवस्था में गैल्वेनोमीटर से कोई धारा नहीं बहती है।
किरखॉफ के नियमों का उपयोग करके संतुलन की शर्त प्राप्त की जाती है:
P/Q = R/S
परिपथ चित्र:
[यहाँ एक व्हीटस्टोन सेतु का चित्र होना चाहिए जिसमें चार प्रतिरोध P, Q, R, S, एक गैल्वेनोमीटर G, और एक बैटरी E दिखाई गई हो।]
7)
एम्पीयर के नियम का उपयोग करते हुए अनन्त लम्बाई के सीधे धारावाही चालक के कारण चुम्बकीय क्षेत्र का व्यंजक प्राप्त कीजिए। [2]
Obtain an expression for magnetic field due to infinitely long straight current carrying conductor by using Ampere's law.
Solution:
एम्पीयर के नियम के अनुसार, किसी बंद पथ के चारों ओर चुम्बकीय क्षेत्र का रेखीय समाकलन उस पथ से गुजरने वाली कुल धारा के μ₀ गुना के बराबर होता है:
∮ B·dl = μ₀ I
अनन्त लम्बाई के सीधे धारावाही चालक के लिए, हम चालक के चारों ओर त्रिज्या r का एक वृत्ताकार पथ लेते हैं। चुम्बकीय क्षेत्र B इस पथ पर स्पर्शरेखीय और स्थिर होता है।
∮ B·dl = B × 2πr = μ₀ I
अतः B = μ₀ I / (2πr)
यह अनन्त लम्बाई के सीधे धारावाही चालक के कारण चुम्बकीय क्षेत्र का व्यंजक है।
8)
एक धारामापी का प्रतिरोध 99Ω है। इसके पूर्ण स्केल पर विक्षेप के लिए आवश्यक धारा 1mA है। यदि धारामापी के साथ 1Ω का शण्ट जोड़ दिया जाये तो धारामापी द्वारा मापी जा सकने वाली अधिकतम धारा का मान ज्ञात करो। [2]
The resistance of a galvanometer is 99Ω. The necessary current for full scale deflection is 1mA. If a shunt of 1Ω is connected with galvanometer then find the value of maximum current which can be measured by this galvanometer.
Solution:
दिया गया है:
- धारामापी का प्रतिरोध G = 99Ω
- पूर्ण स्केल विक्षेप धारा Ig = 1 mA = 0.001 A
- शण्ट प्रतिरोध S = 1Ω
शण्ट के साथ, धारामापी द्वारा मापी जा सकने वाली अधिकतम धारा I है:
I = Ig × (G + S) / S
I = 0.001 × (99 + 1) / 1
I = 0.001 × 100
I = 0.1 A = 100 mA
अतः धारामापी द्वारा मापी जा सकने वाली अधिकतम धारा 100 mA है।
9)
a) लौह चुम्बकीय पदार्थों के लिए क्यूरी ताप की परिभाषा लिखिए।
b) कक्षीय इलेक्ट्रॉन का चुम्बकीय आघूर्ण ज्ञात करने के लिए व्यंजक प्राप्त कीजिए। [1+1=2]
a) Write definition of Curie temperature for ferromagnetic substances.
b) Obtain an expression for magnetic moment of an orbital electron.
Solution:
a) क्यूरी ताप की परिभाषा: लौह चुम्बकीय पदार्थों के लिए क्यूरी ताप वह तापमान है जिसके ऊपर पदार्थ अपने लौह चुम्बकीय गुणों को खो देता है और अनुचुम्बकीय बन जाता है। इस तापमान पर पदार्थ की चुम्बकीय प्रवृत्ति तेजी से घटती है।
b) कक्षीय इलेक्ट्रॉन का चुम्बकीय आघूर्ण:
एक इलेक्ट्रॉन जो त्रिज्या r के वृत्ताकार कक्षा में v वेग से घूम रहा है, उसका चुम्बकीय आघूर्ण μ = I × A होता है, जहाँ I धारा है और A क्षेत्रफल है।
धारा I = e/T = e/(2πr/v) = ev/(2πr)
क्षेत्रफल A = πr²
अतः μ = (ev/(2πr)) × πr² = evr/2
कोणीय संवेग L = mvr होता है, इसलिए:
μ = (e/2m) × L
यह कक्षीय इलेक्ट्रॉन के चुम्बकीय आघूर्ण का व्यंजक है।
20)
एक वर्गाकार लूप की भुजा की लम्बाई 4m है तथा यह 2.5 T के एक समान चुम्बकीय क्षेत्र में रखा है। लूप के बाहर चुम्बकीय क्षेत्र का मान शून्य है। यदि लूप 2m/s के वेग से चुम्बकीय क्षेत्र के लम्बवत गति करता हुआ क्षेत्र से बाहर आ रहा हो तो एक सेकण्ड पश्चात् लूप में प्रेरित वि.वा. बल का मान ज्ञात कीजिये। [2]
The length of side of a square loop is 4m. This loop is placed in an uniform magnetic field of 2.5 T. Outside the loop, the magnetic field is zero and it is coming out side from magnetic field perpendicularly with velocity 2m/s. Find the value of induced emf in loop after one second.
Solution:
दिया गया है:
- लूप की भुजा की लम्बाई l = 4 m
- चुम्बकीय क्षेत्र B = 2.5 T
- वेग v = 2 m/s
- समय t = 1 s
एक सेकण्ड में लूप द्वारा तय की गई दूरी = v × t = 2 × 1 = 2 m
इस समय में लूप का क्षेत्रफल जो चुम्बकीय क्षेत्र में है, वह घटता है। लूप की चौड़ाई 4 m है, और यह 2 m बाहर आ चुका है, अतः क्षेत्र में शेष भाग की लम्बाई = 4 - 2 = 2 m
प्रेरित विद्युत वाहक बल (emf) = B × l × v = 2.5 × 4 × 2 = 20 V
अतः एक सेकण्ड पश्चात् लूप में प्रेरित वि.वा. बल 20 V है।
2)
हाइड्रोजन स्पैक्ट्रम में बामर श्रेणी की रेखाओं के अधिकतम तरंगदैर्ध्य एवं न्यूनतम तरंगदैर्ध्य का अनुपात ज्ञात कीजिये। [2]
अथवा
एक रेडियोएक्टिव प्रतिदर्श में सक्रिय नाभिकों की संख्या 6 घण्टे में अपने प्रारम्भिक मान की 6.25% रह जाती है। रेडियोएक्टिव प्रतिदर्श की अर्द्ध आयु ज्ञात कीजिए। [2]
Solution (पहला विकल्प):
बामर श्रेणी के लिए, तरंगदैर्ध्य का सूत्र:
1/λ = R (1/2² - 1/n²), जहाँ n = 3, 4, 5, ...
अधिकतम तरंगदैर्ध्य (n=3 के लिए):
1/λmax = R (1/4 - 1/9) = R (5/36)
λmax = 36/(5R)
न्यूनतम तरंगदैर्ध्य (n=∞ के लिए):
1/λmin = R (1/4 - 0) = R/4
λmin = 4/R
अनुपात λmax / λmin = (36/(5R)) / (4/R) = 36/(5×4) = 36/20 = 9/5
अतः अधिकतम एवं न्यूनतम तरंगदैर्ध्य का अनुपात 9:5 है।
Solution (दूसरा विकल्प):
दिया गया है:
- प्रारम्भिक संख्या N₀
- 6 घण्टे बाद संख्या N = 6.25% of N₀ = 0.0625 N₀
- समय t = 6 घण्टे
रेडियोएक्टिव क्षय के नियम से: N = N₀ e-λt
0.0625 N₀ = N₀ e-λ×6
0.0625 = e-6λ
ln(0.0625) = -6λ
ln(1/16) = -6λ
-ln(16) = -6λ
λ = ln(16)/6 = (4 ln 2)/6 = (2 ln 2)/3
अर्द्ध आयु T1/2 = ln 2 / λ = ln 2 / ((2 ln 2)/3) = 3/2 = 1.5 घण्टे
अतः रेडियोएक्टिव प्रतिदर्श की अर्द्ध आयु 1.5 घण्टे है।
22. Find the ratio of maximum wavelength to minimum wavelength for the lines of Balmer series in hydrogen spectrum.
OR
In a radioactive sample the numbers of active nuclei remains 6.25% of its initial value in 6 hr. Find the half life of radioactive sample.
Solution (Balmer series):
For Balmer series, the wavelength λ is given by:
1/λ = R (1/2² − 1/n²), where n = 3, 4, 5, ... and R is Rydberg constant.
Minimum wavelength (λmin) occurs when n → ∞, so 1/λmin = R/4.
Maximum wavelength (λmax) occurs when n = 3, so 1/λmax = R (1/4 − 1/9) = R (5/36).
Thus, λmax / λmin = (R/4) / (5R/36) = (1/4) × (36/5) = 9/5 = 1.8.
Ratio = 9 : 5 or 1.8.
Solution (Radioactive half-life):
Given: N/N₀ = 6.25% = 1/16, time t = 6 hr.
Using N = N₀ (1/2)t/T, we get 1/16 = (1/2)6/T.
Since 1/16 = (1/2)⁴, we have (1/2)⁴ = (1/2)6/T, so 4 = 6/T.
Thus, T = 6/4 = 1.5 hr.
Half-life = 1.5 hours.
23. Derive Einstein's Photoelectric equation. Explain photoelectric effect with help of this equation.
Einstein's Photoelectric Equation:
Einstein proposed that light consists of quanta (photons) each with energy hν, where h is Planck's constant and ν is frequency.
When a photon strikes a metal surface, its energy is used to overcome the work function (φ) and give kinetic energy to the emitted electron:
hν = φ + K.E.max
Since K.E.max = ½ mvmax², we get:
hν = φ + ½ mvmax²
This is Einstein's photoelectric equation.
Explanation of photoelectric effect:
- If hν < φ, no electrons are emitted (threshold frequency ν₀ = φ/h).
- If hν > φ, electrons are emitted with kinetic energy proportional to (ν − ν₀).
- Increasing intensity increases number of photons, hence number of emitted electrons, but not their kinetic energy.
- The effect is instantaneous as energy transfer is direct from photon to electron.
24. a) What are logic gates?
b) Draw a circuit diagram for dual-input AND Gate by using two diodes.
a) Logic gates: Logic gates are electronic circuits that operate on one or more input signals to produce an output signal based on Boolean algebra. They are the basic building blocks of digital systems. Common gates include AND, OR, NOT, NAND, NOR, XOR, and XNOR.
b) Dual-input AND Gate using two diodes:
The circuit uses two diodes (D1 and D2) with their anodes connected to inputs A and B respectively, and cathodes connected together to output Y through a resistor R to +Vcc (e.g., 5V).
When both inputs are high (5V), both diodes are reverse-biased, so output Y is high (5V). If either input is low (0V), the corresponding diode conducts, pulling output low (0V).
Circuit diagram description: Two diodes with anodes at A and B, cathodes joined at Y. A resistor R connects Y to +Vcc. Ground is common.
25. Establish a relation between maximum distance of broadcast and height of antenna in space wave propagation.
Relation:
In space wave propagation, the maximum distance d (line-of-sight) from an antenna of height h (in meters) to the horizon is given by:
d = √(2Rh)
where R is the radius of Earth (≈ 6.4 × 10⁶ m).
Thus, d ∝ √h. For broadcast, the maximum distance between transmitter and receiver is dmax = √(2RhT) + √(2RhR), where hT and hR are heights of transmitting and receiving antennas.
If both antennas are at same height h, then dmax = 2√(2Rh).
26. a) What does mean by magnifying power of a Microscope?
b) An object is placed at 20 cm from a convex lens. If 3 times magnified real image is formed by the lens then find the focal length of lens.
a) Magnifying power of a microscope: It is the ratio of the angle subtended by the image at the eye to the angle subtended by the object at the eye when placed at the least distance of distinct vision (D = 25 cm). For a simple microscope, M = 1 + D/f, where f is focal length.
b) Given: u = −20 cm (object distance, sign convention: object on left), magnification m = −3 (real image, inverted, so negative).
Using m = v/u, we get v = m × u = (−3) × (−20) = +60 cm.
Lens formula: 1/f = 1/v − 1/u = 1/60 − 1/(−20) = 1/60 + 1/20 = (1+3)/60 = 4/60 = 1/15.
Thus, f = +15 cm.
Focal length = 15 cm.
27. What does mean by mass defect? Establish relation between mass defect and nuclear binding energy. And hence write the expression for binding energy per nucleon.
Mass defect: The difference between the sum of masses of individual nucleons (protons and neutrons) and the actual mass of the nucleus is called mass defect (Δm).
Δm = [Z mp + (A−Z) mn] − Mnucleus
where Z = atomic number, A = mass number, mp = mass of proton, mn = mass of neutron, Mnucleus = actual nuclear mass.
Relation with binding energy: According to Einstein's mass-energy equivalence, the binding energy (B.E.) is the energy equivalent of mass defect:
B.E. = Δm × c²
where c is speed of light.
Binding energy per nucleon:
B.E. per nucleon = (Δm × c²) / A
This represents the average energy required to remove one nucleon from the nucleus.
27) P-N संधि के उत्क्रम अभिनति अभिलाक्षणिक वक्र प्राप्त करने के लिए प्रायोगिक व्यवस्था का परिपथ चित्र बनाइए।
परिपथ चित्र:
एक P-N संधि डायोड को एक परिवर्ती DC वोल्टता स्रोत (V) तथा एक माइक्रोएमीटर (μA) के साथ श्रेणीक्रम में जोड़ा जाता है। डायोड के सिरों पर वोल्टता मापने के लिए एक वोल्टमीटर (V) समानांतर क्रम में जोड़ा जाता है। उत्क्रम अभिनति के लिए, बैटरी का धनात्मक सिरा N-क्षेत्र से तथा ऋणात्मक सिरा P-क्षेत्र से जोड़ा जाता है।
(चित्र में: बैटरी का धन टर्मिनल → N-साइड, ऋण टर्मिनल → P-साइड; श्रेणी में μA; समानांतर में V)
उत्क्रम भंजन की घटना की व्याख्या:
(i) ऐवेलांशी भंजन (Avalanche Breakdown): उच्च उत्क्रम वोल्टता पर, अल्पसंख्यक वाहक (इलेक्ट्रॉन व होल) अवक्षय क्षेत्र में त्वरित होकर उच्च गति प्राप्त कर लेते हैं। ये तीव्र गति से चलते हुए सहसंयोजी बंधों से इलेक्ट्रॉनों को मुक्त करते हैं, जिससे नए इलेक्ट्रॉन-होल जोड़े बनते हैं। ये नए वाहक पुनः अन्य परमाणुओं से टकराकर और अधिक वाहक उत्पन्न करते हैं। इस प्रकार हिमस्खलन (avalanche) की तरह धारा अचानक बहुत अधिक बढ़ जाती है, जिसे ऐवेलांशी भंजन कहते हैं।
(ii) जेनर भंजन (Zener Breakdown): अत्यधिक डोपित P-N संधि में, अवक्षय क्षेत्र बहुत पतला होता है। अपेक्षाकृत कम उत्क्रम वोल्टता पर ही, अवक्षय क्षेत्र में विद्युत क्षेत्र इतना प्रबल (लगभग 10⁷ V/m) हो जाता है कि यह सहसंयोजी बंधों को सीधे तोड़ देता है, जिससे बड़ी संख्या में इलेक्ट्रॉन-होल जोड़े उत्पन्न होते हैं और धारा अचानक बढ़ जाती है। इसे जेनर भंजन कहते हैं।
अथवा
NPN-ट्रांजिस्टर के उभयनिष्ठ आधार विन्यास में अभिलाक्षणिक वक्र प्राप्त करने के लिए परिपथ चित्र बनाइए।
परिपथ चित्र:
NPN ट्रांजिस्टर के उभयनिष्ठ आधार (CB) विन्यास में, आधार (Base) उभयनिष्ठ टर्मिनल होता है। उत्सर्जक-आधार जंक्शन अग्र अभिनत होता है (बैटरी VEE धन से उत्सर्जक, ऋण से आधार) तथा संग्राहक-आधार जंक्शन उत्क्रम अभिनत होता है (बैटरी VCC धन से संग्राहक, ऋण से आधार)। उत्सर्जक धारा (IE) मापने के लिए मिलीएमीटर, संग्राहक धारा (IC) मापने के लिए मिलीएमीटर तथा वोल्टता मापने के लिए वोल्टमीटर जोड़े जाते हैं।
(चित्र में: VEE श्रेणी में उत्सर्जक-आधार लूप; VCC श्रेणी में संग्राहक-आधार लूप; IE और IC के लिए मीटर)
धारा लाभ गुणांकों में संबंध:
उभयनिष्ठ आधार विन्यास में धारा लाभ गुणांक (α) को परिभाषित किया जाता है:
α = ΔIC / ΔIE (VCB स्थिर रखने पर)
उभयनिष्ठ उत्सर्जक विन्यास में धारा लाभ गुणांक (β) को परिभाषित किया जाता है:
β = ΔIC / ΔIB (VCE स्थिर रखने पर)
हम जानते हैं कि IE = IB + IC
अतः, ΔIE = ΔIB + ΔIC
α = ΔIC / ΔIE = ΔIC / (ΔIB + ΔIC)
इस समीकरण को ΔIC से भाग देने पर:
α = 1 / ( (ΔIB/ΔIC) + 1 ) = 1 / ( (1/β) + 1 )
अतः, α = β / (1 + β) या β = α / (1 - α)
यही α और β के बीच अभीष्ट संबंध है।
विद्युत क्षेत्र की तीव्रता की परिभाषा लिखिए। एक आवेशित चालक की सतह पर विद्युत बल एवं विद्युत दाब के लिए व्यंजक प्राप्त कीजिए। आवश्यक चित्र बनाइए।
विद्युत क्षेत्र की तीव्रता (E) की परिभाषा: किसी बिंदु पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता उस बिंदु पर रखे एकांक धन परीक्षण आवेश पर लगने वाले विद्युत बल के बराबर होती है। इसे निम्न प्रकार व्यक्त किया जाता है:
E = F / q₀
जहाँ F परीक्षण आवेश q₀ पर लगने वाला बल है। यह एक सदिश राशि है, जिसका SI मात्रक N/C या V/m है।
आवेशित चालक की सतह पर विद्युत बल एवं दाब:
मान लीजिए किसी चालक की सतह पर पृष्ठीय आवेश घनत्व σ है। सतह के निकट विद्युत क्षेत्र E = σ/ε₀ होता है (जहाँ ε₀ निर्वात की विद्युतशीलता है)।
सतह पर स्थित किसी अल्पांश dA पर विचार करें। इस अल्पांश पर आवेश dq = σ dA है। यह आवेश शेष चालक द्वारा उत्पन्न विद्युत क्षेत्र E' में स्थित होता है। चालक के ठीक बाहर कुल क्षेत्र E = σ/ε₀ है, जो स्वयं अल्पांश के क्षेत्र (σ/2ε₀) तथा शेष चालक के क्षेत्र (σ/2ε₀) का योग होता है। अतः शेष चालक द्वारा उत्पन्न क्षेत्र E' = σ/2ε₀ होता है।
अल्पांश dA पर बल: dF = dq × E' = (σ dA) × (σ/2ε₀) = (σ²/2ε₀) dA
यह बल सतह के अभिलंबवत बाहर की ओर लगता है।
विद्युत दाब (P): प्रति एकांक क्षेत्रफल पर लगने वाला बल विद्युत दाब कहलाता है।
P = dF/dA = σ²/2ε₀
आवश्यक चित्र: एक आवेशित चालक की सतह का एक छोटा भाग दिखाएँ, जिस पर पृष्ठीय आवेश घनत्व σ है। सतह के बाहर विद्युत क्षेत्र रेखाएँ अभिलंबवत बाहर की ओर दिखाएँ। अल्पांश dA पर बल dF को बाहर की ओर तीर द्वारा प्रदर्शित करें।
अथवा
संधारित्र में संचित ऊर्जा से क्या तात्पर्य है? सिद्ध कीजिए- दो आवेशित चालकों को जोड़ने पर उनके विभव में परिवर्तनों का अनुपात चालकों की धारिताओं के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
संधारित्र में संचित ऊर्जा: जब किसी संधारित्र को आवेशित किया जाता है, तो उसकी प्लेटों पर आवेश एकत्र करने में बैटरी द्वारा कार्य किया जाता है। यह कार्य विद्युत स्थितिज ऊर्जा के रूप में संधारित्र में संचित हो जाता है। संचित ऊर्जा (U) का व्यंजक है:
U = (1/2) C V² = Q²/(2C) = (1/2) Q V
जहाँ C धारिता, V विभवांतर तथा Q आवेश है।
प्रमाण: मान लीजिए दो चालकों की धारिताएँ C₁ और C₂ हैं। इनके प्रारंभिक आवेश क्रमशः Q₁ और Q₂ तथा विभव V₁ और V₂ हैं।
प्रारंभिक विभव: V₁ = Q₁/C₁, V₂ = Q₂/C₂
जब इन्हें एक पतले तार द्वारा जोड़ा जाता है, तो आवेशों का पुनर्वितरण होता है। मान लीजिए अंतिम उभयनिष्ठ विभव V है। आवेश संरक्षण के नियम से:
Q₁ + Q₂ = C₁V + C₂V = V(C₁ + C₂)
अतः, V = (Q₁ + Q₂) / (C₁ + C₂)
पहले चालक के विभव में परिवर्तन: ΔV₁ = V - V₁ = V - Q₁/C₁
दूसरे चालक के विभव में परिवर्तन: ΔV₂ = V - V₂ = V - Q₂/C₂
अब, ΔV₁ / ΔV₂ = (V - Q₁/C₁) / (V - Q₂/C₂)
V का मान रखने पर:
ΔV₁ = (Q₁+Q₂)/(C₁+C₂) - Q₁/C₁ = [C₁(Q₁+Q₂) - Q₁(C₁+C₂)] / [C₁(C₁+C₂)] = [C₁Q₂ - C₂Q₁] / [C₁(C₁+C₂)]
ΔV₂ = (Q₁+Q₂)/(C₁+C₂) - Q₂/C₂ = [C₂(Q₁+Q₂) - Q₂(C₁+C₂)] / [C₂(C₁+C₂)] = [C₂Q₁ - C₁Q₂] / [C₂(C₁+C₂)]
अतः, ΔV₁ / ΔV₂ = [ (C₁Q₂ - C₂Q₁) / (C₁(C₁+C₂)) ] / [ (C₂Q₁ - C₁Q₂) / (C₂(C₁+C₂)) ]
= (C₁Q₂ - C₂Q₁) / C₁ × C₂ / (C₂Q₁ - C₁Q₂)
= - (C₂Q₁ - C₁Q₂) / C₁ × C₂ / (C₂Q₁ - C₁Q₂)
= - C₂ / C₁
अतः, |ΔV₁ / ΔV₂| = C₂ / C₁
अर्थात, विभव परिवर्तनों का अनुपात धारिताओं के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
समरूप आवेशित अचालक गोले के कारण विद्युत क्षेत्र व दूरी के मध्य आरेख बनाइए।
आरेख (ग्राफ):
एक समरूप आवेशित अचालक गोले (त्रिज्या R, कुल आवेश Q) के लिए विद्युत क्षेत्र (E) और केंद्र से दूरी (r) के बीच ग्राफ इस प्रकार होता है:
- गोले के अंदर (r < R): विद्युत क्षेत्र r के अनुक्रमानुपाती होता है। E = (1/4πε₀) × (Qr/R³) अर्थ
प्रश्न 29
दिष्ट धारा की तुलना में प्रत्यावर्ती धारा की एक विशेषता एवं एक दोष लिखिए।
शुद्ध प्रेरकत्व युक्त प्रत्यावर्ती धारा परिपथ में निम्नलिखित के लिए व्यंजक ज्ञात कीजिए-
- धारा का तात्क्षणिक मान
- परिपथ का प्रतिघात
- धारा का शिखर मान
शुद्ध प्रेरकत्व परिपथ के लिए शक्ति आरेख बनाइये। [1+2+1=4]
अथवा
अर्द्ध-शक्ति बिन्दु आवृत्तियों से क्या अभिप्राय है? एक LCR श्रेणी परिपथ के लिए बैण्ड चौड़ाई ज्ञात करने का व्यंजक प्राप्त कीजिए। प्रत्यावर्ती धारा व आवृत्ति के मध्य वक्र में अर्द्धशक्ति बिन्दु आवृत्तियों को दर्शाइए। [1+2+1=4]
Write one merit and one de-merit of alternating current in comparision of direct current.
Obtain expression for followings in a pure inductive alternating current circuit-
- Instantaneous value of current
- Reactance of circuit
- Peak value of current
Draw curve for power in pure inductive circuit.
OR
What does meant by half power point frequencies.
Obtain an expression for bandwidth in a LCR series circuit.
Show half power point frequencies in curve between alternating current and frequency.
उत्तर (प्रथम विकल्प)
दिष्ट धारा की तुलना में प्रत्यावर्ती धारा की एक विशेषता एवं एक दोष:
- विशेषता (Merit): प्रत्यावर्ती धारा को ट्रांसफार्मर की सहायता से उच्च वोल्टता पर लंबी दूरी तक आसानी से संचारित किया जा सकता है, जिससे ऊर्जा हानि कम होती है।
- दोष (Demerit): प्रत्यावर्ती धारा को सीधे बैटरी चार्ज करने या विद्युत अपघटन जैसे कार्यों में उपयोग नहीं किया जा सकता, इसके लिए इसे दिष्ट धारा में परिवर्तित करना पड़ता है।
शुद्ध प्रेरकत्व युक्त प्रत्यावर्ती धारा परिपथ के लिए व्यंजक:
माना प्रत्यावर्ती वोल्टता V = V₀ sin ωt है, जहाँ V₀ शिखर वोल्टता और ω कोणीय आवृत्ति है। शुद्ध प्रेरकत्व L के लिए, प्रेरित विद्युत वाहक बल -L (dI/dt) होता है।
- धारा का तात्क्षणिक मान: परिपथ समीकरण V₀ sin ωt = L (dI/dt) से समाकलन करने पर, I = (V₀/ωL) sin (ωt - π/2) अर्थात I = I₀ sin (ωt - π/2), जहाँ I₀ = V₀/ωL। धारा वोल्टता से π/2 कला पश्च होती है।
- परिपथ का प्रतिघात (Reactance): प्रेरकीय प्रतिघात XL = ωL = 2πfL, जहाँ f आवृत्ति है। इसका मात्रक ओम (Ω) है।
- धारा का शिखर मान: I₀ = V₀ / XL = V₀ / (ωL)।
शुद्ध प्रेरकत्व परिपथ के लिए शक्ति आरेख:
शुद्ध प्रेरकत्व परिपथ में, वोल्टता और धारा के बीच 90° का कला अंतर होने के कारण औसत शक्ति शून्य होती है। शक्ति वक्र धनात्मक और ऋणात्मक मानों के बीच दोलन करता है, जो ऊर्जा के स्रोत और प्रेरक के बीच आदान-प्रदान को दर्शाता है। (आरेख में समय अक्ष पर शक्ति का ज्या वक्र दिखाया जाता है जो धनात्मक और ऋणात्मक क्षेत्रफल बराबर होने के कारण औसत शून्य देता है।)
उत्तर (द्वितीय विकल्प)
अर्द्ध-शक्ति बिन्दु आवृत्तियाँ: किसी LCR श्रेणी अनुनादी परिपथ में, वे आवृत्तियाँ जिन पर परिपथ में व्यय शक्ति, अनुनादी आवृत्ति पर व्यय अधिकतम शक्ति की आधी होती है, अर्द्ध-शक्ति बिन्दु आवृत्तियाँ कहलाती हैं। इन्हें f₁ और f₂ द्वारा दर्शाया जाता है, जहाँ f₁ < f₀ < f₂ और f₀ अनुनादी आवृत्ति है।
बैण्ड चौड़ाई का व्यंजक: बैण्ड चौड़ाई Δf = f₂ - f₁ होती है। LCR श्रेणी परिपथ के लिए, बैण्ड चौड़ाई का व्यंजक है:
Δf = R / (2πL)
जहाँ R प्रतिरोध, L प्रेरकत्व है। इसे गुणवत्ता गुणांक Q के पदों में भी व्यक्त किया जा सकता है: Δf = f₀ / Q, जहाँ Q = (1/R) √(L/C)।
प्रत्यावर्ती धारा व आवृत्ति के मध्य वक्र: इस वक्र में, अनुनादी आवृत्ति f₀ पर धारा अधिकतम होती है। f₁ और f₂ पर धारा का मान अधिकतम धारा का 1/√2 गुना होता है, जहाँ शक्ति आधी हो जाती है। वक्र एक घंटी के आकार का होता है जिसमें f₁ और f₂ के बीच की दूरी बैण्ड चौड़ाई दर्शाती है।
प्रश्न 30
प्रकाश के व्यतिकरण के लिए आवश्यक कोई दो शर्तें लिखिए। यंग के द्वि-स्लिट प्रयोग में व्यतिकरण फ्रिन्जों की चौड़ाई ज्ञात करने का व्यंजक प्राप्त कीजिए। यंग के द्वि-स्लिट प्रयोग में तीव्रता वितरण का आरेख खींचिए। [1+2+1=4]
अथवा
'कम्पन तल तथा ध्रुवण तल' की परिभाषा लिखिए। निकॉल प्रिज्म द्वारा समतल ध्रुवित प्रकाश प्राप्त करने की कार्य-विधि समझाइए। आवश्यक चित्र बनाइये। [1+2+1=4]
Write any two necessary conditions for interference of light.
Obtain an expression for fringe width in Young's double slit experiment.
Draw curve for intensity distribution in Young's double slit experiment.
OR
Write definitions of plane of vibration and plane of polarisation.
Explain the working process to obtain plane polarised light by Nicol Prism.
Draw necessary diagram.
उत्तर (प्रथम विकल्प)
प्रकाश के व्यतिकरण के लिए आवश्यक दो शर्तें:
- दोनों प्रकाश स्रोत सुसंगत (coherent) होने चाहिए, अर्थात उनके बीच कला अंतर समय के साथ स्थिर रहे।
- दोनों स्रोतों से उत्सर्जित तरंगों की आवृत्ति समान होनी चाहिए।
यंग के द्वि-स्लिट प्रयोग में फ्रिन्ज चौड़ाई का व्यंजक:
माना दो स्लिटों S₁ और S₂ के बीच की दूरी d है, स्लिटों से पर्दे की दूरी D है, और प्रकाश की तरंगदैर्ध्य λ है। पर्दे पर किसी बिंदु P पर पथांतर Δx = d sinθ होता है। दीप्त फ्रिन्ज के लिए d sinθ = nλ और अदीप्त फ्रिन्ज के लिए d sinθ = (2n+1)λ/2।
छोटे कोणों के लिए sinθ ≈ tanθ = y/D, जहाँ y केंद्र से बिंदु की दूरी है। अतः nवीं दीप्त फ्रिन्ज की स्थिति yn = nλD/d। दो क्रमागत दीप्त फ्रिन्जों के बीच की दूरी (फ्रिन्ज चौड़ाई) β = yn+1 - yn = λD/d।
तीव्रता वितरण का आरेख: यंग के प्रयोग में, पर्दे पर तीव्रता वितरण एक कोज्या वर्ग (cos²) वक्र के अनुसार होता है। केंद्र पर अधिकतम तीव्रता होती है, और दोनों ओर समान दूरी पर दीप्त और अदीप्त फ्रिन्जें बनती हैं। आरेख में क्षैतिज अक्ष पर पर्दे पर स्थिति और ऊर्ध्वाधर अक्ष पर तीव्रता दिखाई जाती है, जो एक नियमित दोलनशील वक्र बनाती है।
उत्तर (द्वितीय विकल्प)
कम्पन तल (Plane of Vibration) की परिभाषा: वह तल जिसमें प्रकाश तरंग के विद्युत क्षेत्र सदिश का कम्पन होता है, कम्पन तल कहलाता है।
ध्रुवण तल (Plane of Polarisation) की परिभाषा: वह तल जो कम्पन तल के लंबवत होता है और जिसमें प्रकाश तरंग का संचरण होता है, ध्रुवण तल कहलाता है।
निकॉल प्रिज्म