RBSE Class 12th 2018 Typewriting Hindi-SS-34-1-2018 Previous Year Papers
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Paper details
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| Board | RBSE |
|---|---|
| Class | Class 12th |
| Exam year | 2018 |
| Subject | Typewriting Hindi-SS-34-1-2018 |
| Resource type | Previous Year Papers |
| Category | RBSE Previous Year Question Papers |
| Website | RBSE Solution |
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How to practise with this question paper
Stage one: read the Typewriting Hindi-SS-34-1-2018 question paper from 2018 without a timer and highlight command words — explain, prove, calculate, discuss. Stage two: attempt selected questions closed-book. Stage three: compare with solutions or teacher feedback.
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RBSE Class 12th 2018 Typewriting Hindi-SS-34-1-2018
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Rajasthan Board Class 12th Typewriting Hindi-SS-34-1-2018 2018 solved Previous Year Question Papers
उच्च माध्यमिक परीक्षा, 2018
SENIOR SECONDARY EXAMINATION, 2018
हिन्दी टंकण लिपि
(TYPEWRITING HINDI)
समय : 1 घण्टा पूर्णांक : 40
परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :
- परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न पत्र पर नामांक अनिवार्यतः लिखें।
- प्रत्येक कागज के एक तरफ टंकण करें।
- प्रत्येक प्रश्न को नये पृष्ठ से आरम्भ करना है।
- प्रत्येक लाइन के बीच में द्विगुणित अवकाश (Double Spacing) देकर टंकण करना है।
- प्रत्येक प्रश्न के लिए 2 अंक सजावट के निर्धारित हैं।
प्रश्न पत्र को खोलने के लिए यहाँ फाड़ें
SLNo. : Roll No. : | No. of Questions — 3 SS-34--T.W.(Hindi) F
No. of Printed Pages — 7
SS-34- -T.W. (Hindi) 067 [ Turn Over
निम्न अवतरण को टंकित कीजिए :
अंक - 8 | सजावट - 2 | कुल - 20
दो पीढ़ियों में सामंजस्य का रास्ता
परिवार निर्माण एक साधना है। एक ही परिवार में विभिन्न आयु एवं चिंतन के सदस्य एक साथ रहते हैं। उनके सोचने की शैली अलग-अलग होती है। यह दो पीढ़ियों के बीच विचारों का अन्तर सदियों से चला आ रहा है। यह एक सच्चाई है। आज यह एक समस्या का रूप ले चुका है। इस सच्चाई को न तो पुराने लोग समझने को तैयार हैं और न आज की युवा पीढ़ी। हर एक व्यक्ति अपने जमाने और विचारों को सही कहता है। यह अन्तर सोच में आया है, विचारों में आया है। हर कोई एक दूसरे को गलत समझता है। दादी, नानी अपने जमाने के गुण गाती हैं, वैसा ही दूसरों से अपेक्षा रखती है।
नया रक्त तो आज के हिसाब से जीना चाहता है। उसे अपने जमाने, अपने विचारों पर गर्व है। वह कुछ ऐसा करना चाहता है, जो विस्फोटक हो, चमत्कारिक हो, सबसे अलग हो, नई जमाने की पीढ़ी। वृद्धों के लिए अतीत...
SS-34—I-T.W.(Hindi) 067
पीढ़ी का अंतर
सुखद होता है, तो तरुण भविष्य के सुनहरे सपने देखता है। वर्तमान से दोनों संतुष्ट नहीं हैं। वृद्ध अतीत को वर्तमान में देखना चाहते हैं जबकि तरुण भविष्य के सपने आज ही पूरा कर लेना चाहते हैं। हर पीढ़ी को अपना वर्तमान सुखद लगता है। तीन पीढ़ियों में तो सामंजस्य की संभावना ही नहीं रहती है।
आज की पीढ़ी नए युग के साथ चलना पसंद करती है, वहीं परंपरागत सोच से ग्रस्त पुराने लोग किसी भी बदलाव को सरलता से स्वीकार नहीं कर पाते। वे चाहते हैं कि सब कुछ उनकी इच्छानुसार चले। वे अपने परंपरागत विचार, रीति-रिवाज सब आज की पीढ़ी पर थोपना चाहते हैं, जो युवाओं को स्वीकार नहीं है। एक तरफ नई पीढ़ी को पुरानी पीढ़ी के लोग कम पढ़े-लिखे, दकियानूसी और परिवर्तन विरोधी लगते हैं, तो दूसरी तरफ पुरानी पीढ़ी, तीसरी पीढ़ी को अधिक भौतिकवादी और संस्कारहीन मानती है। इसी वजह से दोनों पीढ़ियों में तालमेल नहीं हो पाता है। दोनों के बीच विचारों की ये दूरियाँ आज की कहानी नहीं है। सदियों से यह क्रम चला आ रहा है। प्रत्येक पीढ़ी अपने जमाने के गुण गाती है और नई पीढ़ी में कमी निकालती है। पर इससे बेफिक्र होकर नौजवान भी बड़े-बूढ़ों की किसी बात की परवाह किए बिना, परिवर्तन की राह पर अग्रसर होना चाहते हैं। यही अलग तरह के विचार एक-दूसरे से सामंजस्य बनाने में रुकावट डालते हैं।
बदलता वक्त हर चीज को बदल देता है। वक्त के साथ न केवल हमारे काम करने के तौर-तरीके बदलते हैं, बल्कि हमारी सोच में भी अंतर आ जाता है। अगर आज की युवा पीढ़ी बदलते वक्त के साथ बदलना चाहती है तो उसके साथ सामंजस्य बिठाने की थोड़ी कोशिश तो पुरानी पीढ़ी को भी करनी ही पड़ेगी, लेकिन ऐसा होता नहीं है। पुरानी पीढ़ी एक ही ढर्रे पर चलना चाहती है। वह बदलाव नहीं चाहती, जबकि युवा पीढ़ी परंपरागत कायदे-कानून को बिना वजह का बंधन मानती है।
भारतीय संस्कृति और पीढ़ीगत संवाद
भारतीय संस्कृति अपने बड़ों के सामने सिर झुकाकर उनकी बात सुन लेने का ही पक्ष लेती है, इसलिए बुजुर्ग लोग यही उम्मीद अपने से छोटों से रखते हैं। वे बार-बार इसके लिए बच्चों को रोकते हैं। बार-बार टोकने से बच्चों में आक्रोश बढ़ता है। इसलिए इन परिस्थितियों से बचना चाहिए।
आज की परिस्थितियों के लिए सोशल साइट्स, टीवी, फिल्में तो जिम्मेदार हैं ही, मगर माता-पिता भी कम जिम्मेदार नहीं हैं। उनके पास अपने बच्चों के लिए पर्याप्त वक्त नहीं है। ऐसे में बालक-बालिकाओं पर परिवार की अपेक्षा बाहर का असर भी रहता है। इन परिस्थितियों से उबरने के लिए दोनों पीढ़ियों को समझदारी और धैर्य की आवश्यकता है। ऐसे में बुजुर्ग नई पीढ़ी से तकनीकी बातें सीखें और युवा बुजुर्गों से उनके अनुभव साझा करें तो मन-मुराव व रकराव में कमी होने की संभावना नजर आएगी। इस प्रकार समस्या का समाधान निकाला जा सकता है।
व्याख्या: यह गद्यांश भारतीय संस्कृति में बड़ों के प्रति सम्मान और पीढ़ीगत अंतर (जनरेशन गैप) की समस्या पर केंद्रित है। लेखक के अनुसार, बुजुर्ग बच्चों से सिर झुकाकर बात सुनने की अपेक्षा रखते हैं, लेकिन बार-बार टोकने से बच्चों में आक्रोश बढ़ता है। आज के समय में सोशल साइट्स, टीवी और फिल्मों के साथ-साथ माता-पिता का बच्चों के लिए समय न निकालना भी इस समस्या का कारण है। समाधान के लिए दोनों पीढ़ियों को समझदारी और धैर्य से काम लेना चाहिए—बुजुर्ग तकनीक सीखें और युवा अनुभव साझा करें, जिससे मनमुटाव कम हो सके।
SS-34-I-T.W.(Hindi) 067
पत्र लेखन (व्यावसायिक पत्र)
मैसर्स श्यामदास सुखराम एण्ड कम्पनी
(नमक के थोक व्यापारी एवं कमीशन एजेन्ट)
टेलीफोन : 098-222775, सी-8, गीता भवन मार्ग,
जी.एस.टी. : 74-82200, मुकन्दरा टावर, लखनऊ
ई-मेल : 08-95876 (3. प्र.)
संदर्भ : 7/958 दिनांक : 7/06/2017
सेवा में,
सर्वश्री बालाजी फूड प्रोडक्टस,
पोस्ट बॉक्स संख्या : 10 बी,
सिविल लाइन रोड,
कानपुर।
विषय : आपके द्वारा उत्पादित माल की एजेन्सी लेने बाबत।
प्रिय महोदय,
अत्यन्त हर्ष के साथ लिखना पड़ रहा है कि आप हमारे शहर में आपके द्वारा उत्पादित माल की एजेन्सी देना चाहते हैं। हमारी फर्म आप द्वारा उत्पादित माल की एजेन्सी लेने की इच्छुक है।
जैसा कि आपको सर्व विदित है कि हमारी फर्म पिछले 5 वर्षों से आप द्वारा उत्पादित माल को बेचने का कार्य कर रही है। पिछले चार वर्षों से आपके माल का सर्वाधिक विक्रय करने के कारण लगातार आप हमें कानपुर में आयोजित कार्यक्रमों में बुलाकर हमारा सम्मान भी करते आ रहे हैं।
भवदीय,
(मैसर्स श्यामदास सुखराम एण्ड कम्पनी)
व्याख्या : यह एक व्यावसायिक पत्र है जिसमें मैसर्स श्यामदास सुखराम एण्ड कम्पनी, लखनऊ, बालाजी फूड प्रोडक्टस, कानपुर को उनके उत्पादित माल की एजेन्सी लेने की इच्छा व्यक्त कर रही है। पत्र में फर्म के पिछले 5 वर्षों के अनुभव और सर्वाधिक विक्रय के कारण मिले सम्मान का उल्लेख किया गया है।
पत्र लेखन (व्यावसायिक पत्र)
आप द्वारा बताई गई शर्तें हम पूर्ण करने में सक्षम हैं। हमारे पास पर्याप्त गोदाम 100 गुणा 50 फुट व दूसरा गोदाम 50 गुणा 200 फुट है।
वित्तीय दृष्टि से हम आपके पास 10 लाख रुपये अग्रिम जमा के रूप में रखने को तैयार हैं।
अतः आपसे निवेदन है कि यह एजेंसी हमें देने का कष्ट करें।
धन्यवाद।
भवदीय,
श्यामदास सुखराम के लिए
सुखराम
साझेदार
SS-34—I-T.W.(Hindi) 067
प्रश्न 3: निम्नलिखित सारणी को यथोचित रूप देकर टंकित कीजिए :
अंक विभाजन: सारणी - 8 अंक, सजावट - 2 अंक, कुल - 10 अंक
निर्देश: उपरोक्त सारणी को टंकित करते समय निम्नलिखित बातों का ध्यान रखें:
- सारणी का शीर्षक "प्रमुख जिलेवार छात्र-छात्राओं का उपस्थिति विवरण (प्रतिशत में)" स्पष्ट रूप से लिखें।
- स्तंभ शीर्षक (क्र., जिला का नाम, 206, 207) को बोल्ड और केंद्रित करें।
- 206 और 207 के अंतर्गत छात्र और छात्रा के कॉलम अलग-अलग बनाएँ।
- सभी आँकड़ों को सही स्थान पर और सटीकता से टाइप करें।
- सारणी को आकर्षक बनाने के लिए उचित सीमाएँ (borders) और पृष्ठभूमि रंग का प्रयोग करें।
- सारणी के नीचे अंक विभाजन स्पष्ट रूप से लिखें।