RBSE Class 12th 2019 Public Administration-SS-06-2019 Previous Year Papers
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Paper details
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| Board | RBSE |
|---|---|
| Class | Class 12th |
| Exam year | 2019 |
| Subject | Public Administration-SS-06-2019 |
| Resource type | Previous Year Papers |
| Category | RBSE Previous Year Question Papers |
| Website | RBSE Solution |
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RBSE Class 12th 2019 Public Administration-SS-06-2019
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Rajasthan Board Class 12th Public Administration-SS-06-2019 2019 solved Previous Year Question Papers
उच्च माध्यमिक परीक्षा, 2019
SENIOR SECONDARY EXAMINATION, 2019
लोक प्रशासन
PUBLIC ADMINISTRATION
समय : 3 घण्टे पूर्णांक : 80
परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :
GENERAL INSTRUCTIONS TO THE EXAMINEES:
- परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न पत्र पर नामांक अनिवार्यत: लिखें।
Candidate must write first his/her Roll No. on the question paper compulsorily. - सभी प्रश्न करने अनिवार्य हैं।
All the questions are compulsory. - प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें।
Write the answer to each question in the given answer-book only. - जिन प्रश्नों में आन्तरिक खण्ड है, उन सभी के उत्तर एक साथ ही लिखें।
For questions having more than one part the answers to those parts are to be written together in continuity.
No. of Questions — 30 S S-06-Pub. Adm.
No. of Printed Pages — 07
नामांक Roll No. : ____________________
SI.No. : TLTELITI I
Tear Here
प्रश्न पत्र को खोलने के लिए यहाँ फाड़ें
TEAR HERE TO OPEN THE QUESTION PAPER
SS_06—Pub. Adm. 304 [ Turn Over
5) प्रश्न पत्र के हिन्दी व अंग्रेजी रूपान्तर में किसी प्रकार की त्रुटि / अन्तर / विरोधाभास होने पर हिन्दी भाषा के प्रश्न को सही मानें ।
If there is any error/difference/contradiction in Hindi & English versions of the question paper, the question of Hindi version should be treated valid.
6) खण्ड एवं संख्या अंक प्रत्येक प्रश्न
| खण्ड | प्रश्न संख्या | प्रति प्रश्न अंक |
|---|---|---|
| अ (A) | 1 – 8 | 2 |
| ब (B) | 9 – 27 | 4 |
| स (C) | 28 – 30 | 6 |
7) प्रश्न क्रमांक 28 से 30 में आंतरिक विकल्प हैं ।
There are internal choices in Question Nos. 28 to 30.
खण्ड - अ (SECTION - A)
1) विशेषज्ञ से क्या अभिप्राय है? [4]
What do you mean by specialist?
उत्तर / Answer: विशेषज्ञ से अभिप्राय उस व्यक्ति से है जो किसी विशेष क्षेत्र या विषय में गहन ज्ञान, कौशल और अनुभव रखता हो। विशेषज्ञ अपने क्षेत्र में उच्च स्तर की दक्षता प्राप्त करता है और जटिल समस्याओं का समाधान करने में सक्षम होता है। लोक प्रशासन में विशेषज्ञों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है क्योंकि वे तकनीकी और विशिष्ट कार्यों को कुशलतापूर्वक संपादित करते हैं।
A specialist is a person who possesses deep knowledge, skills, and experience in a particular field or subject. A specialist achieves a high level of proficiency in their area and is capable of solving complex problems. In public administration, specialists play an important role as they efficiently perform technical and specific tasks.
2) वैज्ञानिक प्रबन्धन विचार धारा का जनक किसे माना जाता है? [1]
Who is considered as father of Scientific Management?
उत्तर / Answer: वैज्ञानिक प्रबन्धन विचार धारा का जनक एफ. डब्ल्यू. टेलर (F. W. Taylor) को माना जाता है। टेलर ने वैज्ञानिक प्रबन्धन के सिद्धांतों का प्रतिपादन किया और कार्य कुशलता बढ़ाने पर बल दिया।
The father of Scientific Management is considered to be F. W. Taylor. Taylor propounded the principles of scientific management and emphasized increasing work efficiency.
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3) भारतीय लोक प्रशासन संस्थान की स्थापना किस वर्ष की गई थी? [2]
In which year The Indian Institute of Public Administration has been established?
उत्तर: भारतीय लोक प्रशासन संस्थान (IIPA) की स्थापना वर्ष 1954 में की गई थी।
4) POSDCORB विचार धारा में CO से क्या अभिप्राय है? [1]
What is meant by CO in POSDCORB Approach?
उत्तर: POSDCORB में 'CO' का अर्थ Coordinating (समन्वय) है। यह विभिन्न विभागों और कार्यों के बीच सामंजस्य स्थापित करने की प्रक्रिया को दर्शाता है।
5) नवीन लोक प्रशासन की कोई दो विशेषताएँ बताइए। [2]
Give any two features of New Public Administration.
उत्तर: नवीन लोक प्रशासन की दो प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
- सामाजिक समानता (Social Equity): यह प्रशासन में न्याय और समानता पर बल देता है, विशेषकर वंचित वर्गों के कल्याण के लिए।
- ग्राहक-केंद्रितता (Client-Centric): यह नागरिकों को सेवा का प्रमुख केन्द्र मानता है और उनकी आवश्यकताओं के अनुसार नीतियाँ बनाने पर जोर देता है।
6) विकास प्रशासन का प्रमुख लक्ष्य बताइए। [1]
State a major Goal of Development Administration.
उत्तर: विकास प्रशासन का प्रमुख लक्ष्य सामाजिक-आर्थिक विकास (Socio-economic Development) को गति देना और जीवन स्तर में सुधार लाना है।
7) स्थायी तथा अस्थायी कार्यपालिका में एक अंतर बताइए। [2]
State any one difference between Permanent and Temporary Executive.
उत्तर: स्थायी कार्यपालिका (जैसे सिविल सेवक) सरकार बदलने पर भी अपने पद पर बनी रहती है, जबकि अस्थायी कार्यपालिका (जैसे मंत्री) सरकार बदलने या चुनाव हारने पर अपना पद खो देती है।
8) बजट क्या है? [4]
What is Budget?
उत्तर: बजट एक निश्चित अवधि (प्रायः एक वर्ष) के लिए सरकार की अनुमानित आय और व्यय का एक विस्तृत वित्तीय विवरण है। यह सरकार की नीतियों और प्राथमिकताओं को दर्शाता है तथा संसाधनों के आवंटन का एक उपकरण है।
9) भारत में वित्तीय वर्ष की अवधि बताइए। [1]
Mention the duration of Financial Year in India.
उत्तर: भारत में वित्तीय वर्ष 1 अप्रैल से 31 मार्च तक होता है।
10) प्रशासनिक विकास की कोई दो चुनौतियाँ बताइए। [2]
State any two challenges of Administrative Development.
उत्तर: प्रशासनिक विकास की दो प्रमुख चुनौतियाँ निम्नलिखित हैं:
- भ्रष्टाचार (Corruption): प्रशासनिक तंत्र में भ्रष्टाचार विकास प्रक्रिया में बाधा डालता है और संसाधनों के दुरुपयोग का कारण बनता है।
- लालफीताशाही (Red-tapism): अत्यधिक नियमों और प्रक्रियाओं के कारण निर्णय लेने में देरी होती है, जिससे विकास कार्य प्रभावित होते हैं।
खण्ड -ब
SECTION - B
-
नवीन लोक प्रबन्धन के 3 ‘E’ कौन-कौन से हैं?
What are the 3 ‘E’s of New Public Management?
नवीन लोक प्रबन्धन के तीन 'E' हैं: अर्थव्यवस्था (Economy), दक्षता (Efficiency), और प्रभावशीलता (Effectiveness)।
-
नवीन लोक प्रशासन में 'नया' क्या है?
What is 'New' in New Public Administration?
नवीन लोक प्रशासन में 'नया' इस बात पर जोर देना है कि प्रशासन को सामाजिक न्याय, समानता, और मानवीय मूल्यों के प्रति संवेदनशील होना चाहिए। यह पारंपरिक तटस्थता के बजाय मूल्य-आधारित दृष्टिकोण अपनाता है।
-
एफ डब्ल्यू टेलर के अनुसार विभेदात्मक मजदूरी दर प्रणाली क्या है?
What is Differential Piece Rate System according to F.W. Taylor?
एफ डब्ल्यू टेलर के अनुसार, विभेदात्मक मजदूरी दर प्रणाली में श्रमिकों को उनके उत्पादन के आधार पर अलग-अलग दरों पर भुगतान किया जाता है। यदि कोई श्रमिक निर्धारित मानक से अधिक उत्पादन करता है, तो उसे उच्च दर (प्रीमियम) मिलती है, और यदि कम उत्पादन करता है, तो उसे कम दर मिलती है। इससे श्रमिकों को अधिक उत्पादन करने के लिए प्रोत्साहन मिलता है।
-
अभिप्रेरणा की कोई दो प्रमुख विशेषताएँ बताइए।
State any two features of Motivation.
- लक्ष्य-उन्मुख: अभिप्रेरणा व्यक्ति को किसी विशिष्ट लक्ष्य की प्राप्ति की ओर प्रेरित करती है।
- मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया: यह एक आंतरिक मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया है जो व्यवहार को सक्रिय, निर्देशित और बनाए रखती है।
-
कार्यक्रमित निर्णय से आप क्या समझते हैं?
What do you mean by Programmed Decision?
कार्यक्रमित निर्णय वे निर्णय होते हैं जो नियमित, दोहराए जाने वाले और पूर्व-निर्धारित नियमों या नीतियों पर आधारित होते हैं। ये सामान्यतः निचले स्तर के प्रबंधकों द्वारा लिए जाते हैं और इनमें मानक संचालन प्रक्रियाओं का पालन किया जाता है।
-
फ्रेड रिग्ज द्वारा बताई गई तुलनात्मक लोक प्रशासन की प्रवृत्तियों का उल्लेख कीजिए।
Describe the trends of comparative Public Administration according to Fred Riggs.
फ्रेड रिग्ज ने तुलनात्मक लोक प्रशासन की तीन प्रमुख प्रवृत्तियाँ बताई हैं:
- सामान्य सिद्धांत की ओर झुकाव: विभिन्न देशों के प्रशासनिक ढाँचों की तुलना करके सार्वभौमिक सिद्धांत विकसित करने का प्रयास।
- अनुभवजन्य अनुसंधान पर बल: सैद्धांतिक मॉडलों के बजाय वास्तविक दुनिया के आँकड़ों और अवलोकनों पर आधारित अध्ययन।
- पारिस्थितिक दृष्टिकोण: प्रशासनिक प्रणालियों को उनके सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिवेश के संदर्भ में समझने पर जोर।
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7) नागरिक अधिकार पत्रों को प्रभावी बनाने हेतु कोई दो सुझाव दीजिए। [2]
Give any two suggestions to improve the Citizen's Charters.
उत्तर / Answer:
नागरिक अधिकार पत्रों को प्रभावी बनाने के लिए दो सुझाव निम्नलिखित हैं:
- जागरूकता अभियान: नागरिकों को उनके अधिकारों और सेवा मानकों के बारे में जागरूक करने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाना चाहिए, जिससे वे अपने अधिकारों का दावा कर सकें।
- नियमित समीक्षा और अद्यतन: चार्टर में उल्लिखित सेवा मानकों और समय-सीमाओं की नियमित समीक्षा की जानी चाहिए तथा बदलती आवश्यकताओं के अनुसार उन्हें अद्यतन किया जाना चाहिए।
8) नीति आयोग योजना आयोग से किस प्रकार भिन्न है? [2]
How NITI Aayog is different from Planning Commission.
उत्तर / Answer:
नीति आयोग और योजना आयोग में निम्नलिखित प्रमुख अंतर हैं:
- प्रकृति: योजना आयोग एक शीर्ष निकाय था जो ऊपर से नीचे की ओर योजना बनाता था, जबकि नीति आयोग एक नीति थिंक टैंक है जो सहकारी संघवाद पर बल देता है।
- कार्यक्षेत्र: योजना आयोग का ध्यान पंचवर्षीय योजनाओं और संसाधन आवंटन पर था, जबकि नीति आयोग दीर्घकालिक रणनीतिक नीति निर्माण, राज्यों के साथ साझेदारी और नवाचार को बढ़ावा देने पर केंद्रित है।
- लचीलापन: नीति आयोग अधिक लचीला है और इसमें योजना आयोग की तरह कोई अनिवार्य योजना प्रक्रिया नहीं है।
9) मंत्री-लोक सेवक विवाद के प्रमुख कारणों का उल्लेख कीजिए। [4]
Describe major reasons of Minister - Civil Servant Conflicts.
उत्तर / Answer:
मंत्री-लोक सेवक विवाद के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:
- भूमिका में अस्पष्टता: नीति निर्माण और प्रशासन में मंत्री और लोक सेवक की भूमिकाओं में स्पष्ट सीमांकन का अभाव विवाद का कारण बनता है।
- राजनीतिक बनाम प्रशासनिक दृष्टिकोण: मंत्री राजनीतिक लाभ और लोकप्रियता पर ध्यान देते हैं, जबकि लोक सेवक नियमों, निष्पक्षता और दक्षता पर बल देते हैं, जिससे टकराव होता है।
- हस्तक्षेप: मंत्रियों द्वारा प्रशासनिक कार्यों में अनुचित हस्तक्षेप, जैसे स्थानांतरण या पदोन्नति में दबाव, विवाद को जन्म देता है।
- सूचना का अधिकार: मंत्री कभी-कभी लोक सेवकों से पूर्ण और सटीक जानकारी नहीं मिलने की शिकायत करते हैं, जबकि लोक सेवक मंत्रियों द्वारा नीतियों को विकृत करने का आरोप लगाते हैं।
20) राज्य लोक सेवा आयोग के सदस्यों को पद से हटाने संबंधी प्रावधानों का संक्षिप्त वर्णन कीजिए। [4]
Describe briefly the provisions for dismissal or removal of the members of State Public Service Commission.
उत्तर / Answer:
राज्य लोक सेवा आयोग के सदस्यों को पद से हटाने के प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 317 के अंतर्गत आते हैं:
- दुर्व्यवहार के आधार पर हटाना: किसी सदस्य को केवल दुर्व्यवहार के आधार पर हटाया जा सकता है, जब राष्ट्रपति मामले की जांच के लिए उच्चतम न्यायालय को निर्देशित करें और न्यायालय जांच के बाद हटाने की सिफारिश करे।
- अन्य आधार: यदि कोई सदस्य दिवालिया घोषित हो जाता है, अपने पद के कर्तव्यों के दौरान किसी अन्य लाभ के पद पर नियुक्त होता है, या शारीरिक या मानसिक अक्षमता के कारण अपने कर्तव्यों का पालन करने में असमर्थ होता है, तो राष्ट्रपति उसे हटा सकते हैं।
- निलंबन: राष्ट्रपति किसी सदस्य को निलंबित कर सकते हैं जब मामला उच्चतम न्यायालय को भेजा गया हो।
2) भारत में लोक सेवाओं में भर्ती की प्रक्रिया की प्रमुख कमियों को गिनाइए। [4]
Give an account for the major weakness in the process of recruitment of Civil Services in India.
उत्तर / Answer:
भारत में लोक सेवाओं में भर्ती की प्रक्रिया की प्रमुख कमियाँ निम्नलिखित हैं:
- सैद्धांतिक परीक्षा पर अत्यधिक जोर: भर्ती प्रक्रिया में मुख्यतः सैद्धांतिक ज्ञान का मूल्यांकन किया जाता है, जबकि व्यावहारिक कौशल, नेतृत्व क्षमता और समस्या समाधान की क्षमता को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जाता।
- विविधता का अभाव: भर्ती प्रक्रिया में सामाजिक, आर्थिक और क्षेत्रीय विविधता को पर्याप्त रूप से प्रतिबिंबित नहीं किया जाता, जिससे प्रशासन में असंतुलन होता है।
- पारदर्शिता का अभाव: साक्षात्कार और मूल्यांकन प्रक्रिया में कभी-कभी पारदर्शिता की कमी होती है, जिससे पक्षपात की संभावना बनी रहती है।
- लंबी और जटिल प्रक्रिया: भर्ती प्रक्रिया अत्यधिक लंबी और जटिल है, जिससे प्रतिभाशाली उम्मीदवार हतोत्साहित हो सकते हैं और प्रशासन में देरी होती है।
22) निष्पादन बजट के प्रमुख उद्देश्यों का उल्लेख कीजिए। [4]
Describe the major objectives of performance Budgeting.
उत्तर / Answer:
निष्पादन बजट के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं:
- दक्षता में सुधार: संसाधनों के उपयोग को कार्यक्रमों और गतिविधियों के परिणामों से जोड़कर सरकारी खर्च की दक्षता बढ़ाना।
- जवाबदेही सुनिश्चित करना: विभागों और एजेंसियों को उनके द्वारा प्राप्त धन के बदले में विशिष्ट लक्ष्यों और प्रदर्शन मानकों के लिए जवाबदेह बनाना।
- पारदर्शिता बढ़ाना: बजट आवंटन और वास्तविक प्रदर्शन के बीच संबंध को स्पष्ट करके सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन में पारदर्शिता लाना।
- नीति निर्माण में सहायता: प्रदर्शन डेटा प्रदान करके नीति निर्माताओं को संसाधनों के पुन: आवंटन और कार्यक्रमों में सुधार के बारे में सूचित निर्णय लेने में मदद करना।
23) जिला आयोजना समितियों को प्रभावशाली बनाने हेतु चार सुझाव दीजिए | [4]
Give any four suggestion to make District Planning Committees more effective.
चार सुझाव:
- समिति में सभी स्थानीय निकायों (पंचायतों, नगरपालिकाओं) के निर्वाचित प्रतिनिधियों को शामिल किया जाए ताकि जमीनी स्तर की आवश्यकताओं का सही आकलन हो सके।
- योजना निर्माण में तकनीकी विशेषज्ञों (जैसे कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य) की सलाह अनिवार्य की जाए।
- समिति को पर्याप्त वित्तीय संसाधन और प्रशासनिक अधिकार दिए जाएं ताकि वह अपनी योजनाओं को स्वतंत्र रूप से क्रियान्वित कर सके।
- योजना निर्माण में पारदर्शिता और जनभागीदारी सुनिश्चित करने के लिए सार्वजनिक सुनवाई और फीडबैक तंत्र को मजबूत किया जाए।
24) नीति आयोग की स्थापना के प्रमुख उद्देश्यों का वर्णन कीजिए | [4]
Describe the main objectives for the establishment of NITI Aayog.
नीति आयोग के प्रमुख उद्देश्य:
- राज्यों के साथ साझेदारी में नीति निर्माण को बढ़ावा देना और सहकारी संघवाद को मजबूत करना।
- दीर्घकालिक रणनीतिक योजनाएं तैयार करना और राष्ट्रीय विकास प्राथमिकताएं निर्धारित करना।
- गरीबी उन्मूलन, स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में नवाचार और तकनीकी हस्तक्षेप को प्रोत्साहित करना।
- केंद्र और राज्यों के बीच नीतिगत समन्वय स्थापित करना तथा संसाधनों के कुशल आवंटन हेतु मार्गदर्शन प्रदान करना।
25) लोक सेवकों को प्राप्त संवैधानिक संरक्षणों का वर्णन कीजिए | [4]
Describe the Constitutional Protections available to Civil Servants.
लोक सेवकों को प्राप्त प्रमुख संवैधानिक संरक्षण:
- अनुच्छेद 311: किसी भी सरकारी कर्मचारी को बिना उचित जांच और सुनवाई के न तो हटाया जा सकता है और न ही पदावनत किया जा सकता है।
- अनुच्छेद 310: सिविल सेवक राष्ट्रपति या राज्यपाल की इच्छा पर कार्य करते हैं, लेकिन उन्हें मनमाने ढंग से नहीं हटाया जा सकता।
- अनुच्छेद 314: भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) और अन्य अखिल भारतीय सेवाओं के सदस्यों को सेवा शर्तों में बदलाव से संरक्षण प्रदान करता है।
- अनुच्छेद 320: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और राज्य लोक सेवा आयोगों से अनुशासनात्मक मामलों में परामर्श लेना अनिवार्य है।
26) चार संवैधानिक निकायों के नाम तथा उनसे संबंधित अनुच्छेद बताइए | [4]
Name any four Constitutional bodies and their related Constitutional Articles.
| संवैधानिक निकाय | संबंधित अनुच्छेद |
|---|---|
| संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) | अनुच्छेद 315-323 |
| निर्वाचन आयोग | अनुच्छेद 324 |
| भारत का नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) | अनुच्छेद 148-151 |
| राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग | अनुच्छेद 338 |
27) विकास प्रशासन एवं प्रशासनिक विकास में अर्न्तसंबंध बताइए | [4]
Explain the inter-relationship between Development Administration and Administrative Development.
अंतर्संबंध: विकास प्रशासन और प्रशासनिक विकास एक-दूसरे के पूरक हैं। विकास प्रशासन का उद्देश्य आर्थिक और सामाजिक विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करना है, जबकि प्रशासनिक विकास प्रशासनिक तंत्र को अधिक कुशल, लचीला और जवाबदेह बनाने पर केंद्रित है। प्रभावी विकास प्रशासन के लिए एक मजबूत और विकसित प्रशासनिक ढांचा आवश्यक है। दूसरी ओर, प्रशासनिक विकास तभी सार्थक होता है जब वह विकासात्मक लक्ष्यों की प्राप्ति में सहायक हो। इस प्रकार, दोनों एक-दूसरे को प्रभावित और सुदृढ़ करते हैं।
SECTION - D
28) लूथर गुलिक द्वारा प्रतिपादित मुख्यालय - क्षेत्रीय कार्यालय संबंध की अवधारणा का वर्णन कीजिए। [6]
अथवा
एफ. डब्ल्यू. टेलर द्वारा प्रतिपादित कार्यात्मक फॉरमेंनवाद की तकनीक को समझाइए |
Describe the concept of Head-quarter-field offices Relationship as propounded by Luther Gullick.
OR
Explain The Functional Foremanship Technique as propounded by F.W. Taylor.
लूथर गुलिक का मुख्यालय-क्षेत्रीय कार्यालय संबंध: लूथर गुलिक के अनुसार, मुख्यालय (Headquarters) नीति निर्माण, योजना, समन्वय और नियंत्रण का कार्य करता है, जबकि क्षेत्रीय कार्यालय (Field Offices) इन नीतियों को लागू करते हैं और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार कार्य करते हैं। मुख्यालय क्षेत्रीय कार्यालयों को मार्गदर्शन, संसाधन और समर्थन प्रदान करता है, जबकि क्षेत्रीय कार्यालय मुख्यालय को कार्यान्वयन की प्रगति और स्थानीय चुनौतियों की जानकारी देते हैं। यह संबंध दोतरफा संचार और समन्वय पर आधारित है, जिससे संगठन में एकरूपता और लचीलापन दोनों बना रहता है।
अथवा
एफ.डब्ल्यू. टेलर का कार्यात्मक फोरमैनशिप: टेलर ने पारंपरिक एकल फोरमैन प्रणाली के स्थान पर आठ विशेषज्ञ फोरमैन की सिफारिश की, जो श्रमिकों को अलग-अलग कार्यों में मार्गदर्शन देते हैं। इनमें से चार फोरमैन कार्यशाला में (जैसे गति निरीक्षक, मरम्मत फोरमैन) और चार योजना कक्ष में (जैसे कार्य निर्देशक, समय निर्धारक) कार्य करते हैं। इस तकनीक का उद्देश्य श्रमिकों को विशेषज्ञ पर्यवेक्षण प्रदान करना, उत्पादकता बढ़ाना और कार्य को वैज्ञानिक आधार पर व्यवस्थित करना था।
29) हर्बट साइमन द्वारा दिए गए सीमित विवेकता मॉडल अथवा प्रशासनिक मानव अवधारणा का वर्णन कीजिए। [6]
हर्बर्ट साइमन का सीमित विवेकता मॉडल (Bounded Rationality Model):
हर्बर्ट साइमन ने शास्त्रीय अर्थशास्त्र के 'पूर्ण तर्कसंगत मानव' (Economic Man) की अवधारणा को चुनौती दी। उनके अनुसार, मनुष्य पूर्णतः तर्कसंगत नहीं होता, बल्कि उसकी तर्कशक्ति सीमित होती है। इस मॉडल की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
- सीमित जानकारी: निर्णयकर्ता के पास सभी विकल्पों और उनके परिणामों की पूर्ण जानकारी नहीं होती।
- संतोषप्रद विकल्प (Satisficing): साइमन के अनुसार, व्यक्ति अधिकतम लाभ (Maximizing) के बजाय संतोषप्रद विकल्प (Satisficing) चुनता है, अर्थात वह ऐसा विकल्प चुनता है जो उसकी न्यूनतम आवश्यकताओं को पूरा करता हो।
- प्रशासनिक मानव (Administrative Man): यह 'आर्थिक मानव' के विपरीत है। प्रशासनिक मानव सीमित तर्कशक्ति के साथ काम करता है और संगठन के नियमों, प्रक्रियाओं और मानदंडों से प्रभावित होता है।
- निर्णय प्रक्रिया: साइमन ने निर्णय प्रक्रिया को तीन चरणों में बांटा: (1) खुफिया गतिविधि (Intelligence Activity) – समस्या की पहचान, (2) डिजाइन गतिविधि (Design Activity) – विकल्पों का विकास, (3) चयन गतिविधि (Choice Activity) – सर्वोत्तम विकल्प का चयन।
प्रशासनिक मानव की अवधारणा: यह मॉडल बताता है कि प्रशासनिक मानव पूर्णतः तर्कसंगत नहीं है, बल्कि वह संगठनात्मक संरचना, नियमों और सीमित संज्ञानात्मक क्षमता के कारण 'सीमित तर्कसंगतता' (Bounded Rationality) के साथ निर्णय लेता है।
अथवा
संप्रेषण क्या है? संप्रेषण के प्रकारों तथा प्रभावी संप्रेषण हेतु पूर्व शर्तों का उल्लेख कीजिए। [6]
संप्रेषण (Communication): संप्रेषण का अर्थ है सूचना, विचारों, भावनाओं और संदेशों का एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक आदान-प्रदान करना। यह प्रशासनिक प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण अंग है।
संप्रेषण के प्रकार:
- औपचारिक संप्रेषण (Formal Communication): यह संगठन की आधिकारिक संरचना के अनुसार होता है। इसमें ऊर्ध्वाधर (ऊपर से नीचे या नीचे से ऊपर) और क्षैतिज (समान स्तर के अधिकारियों के बीच) संप्रेषण शामिल है।
- अनौपचारिक संप्रेषण (Informal Communication): यह संगठन के अनौपचारिक संबंधों पर आधारित होता है, जैसे अंगूर-दाख (Grapevine) संप्रेषण।
- मौखिक संप्रेषण (Oral Communication): बोलकर संदेश देना, जैसे बैठकें, भाषण, टेलीफोन वार्ता।
- लिखित संप्रेषण (Written Communication): पत्र, ज्ञापन, रिपोर्ट, ईमेल आदि के माध्यम से।
- अशाब्दिक संप्रेषण (Non-verbal Communication): शरीर की भाषा, चेहरे के भाव, आँखों का संपर्क आदि।
प्रभावी संप्रेषण हेतु पूर्व शर्तें (Pre-conditions for Effective Communication):
- स्पष्टता (Clarity): संदेश स्पष्ट और सरल भाषा में होना चाहिए।
- पूर्णता (Completeness): संदेश में सभी आवश्यक जानकारी शामिल होनी चाहिए।
- संक्षिप्तता (Conciseness): अनावश्यक विवरण से बचना चाहिए।
- सहानुभूति (Empathy): प्रेषक को प्राप्तकर्ता की भावनाओं और दृष्टिकोण को समझना चाहिए।
- प्रतिपुष्टि (Feedback): संदेश की समझ सुनिश्चित करने के लिए प्रतिक्रिया लेना आवश्यक है।
- उपयुक्त माध्यम (Appropriate Medium): संदेश के अनुसार सही माध्यम (मौखिक, लिखित, इलेक्ट्रॉनिक) का चयन करना।
- शोर से बचाव (Avoiding Noise): संप्रेषण में बाधा डालने वाले कारकों (भौतिक, मनोवैज्ञानिक, भाषाई) को कम करना।
30) भारत में हुए प्रशासनिक सुधारों पर एक लेख लिखिए। [6]
भारत में प्रशासनिक सुधार (Administrative Reforms in India):
भारत में प्रशासनिक सुधारों की शुरुआत स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद से ही हो गई थी। इन सुधारों का उद्देश्य प्रशासन को अधिक कुशल, जवाबदेह और जन-केंद्रित बनाना है। प्रमुख सुधार निम्नलिखित हैं:
- प्रथम प्रशासनिक सुधार आयोग (1966): मोरारजी देसाई की अध्यक्षता में गठित इस आयोग ने लोक प्रशासन में सुधार के लिए व्यापक सिफारिशें कीं, जिनमें लोक शिकायत निवारण, कार्यप्रणाली में सुधार और प्रशिक्षण पर जोर दिया गया।
- द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग (2005): वीरप्पा मोइली की अध्यक्षता में गठित इस आयोग ने शासन के विभिन्न पहलुओं पर 15 रिपोर्टें प्रस्तुत कीं, जिनमें सुशासन, ई-गवर्नेंस, पारदर्शिता और जवाबदेही पर बल दिया गया।
- सिविल सेवा सुधार: सिविल सेवाओं में सुधार के लिए कई समितियाँ (जैसे सुरैंद्र नाथ समिति, हुडा समिति) गठित की गईं, जिन्होंने प्रशिक्षण, मूल्यांकन और पदोन्नति में सुधार की सिफारिश की।
- ई-गवर्नेंस: डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के तहत प्रशासनिक सेवाओं को ऑनलाइन करने, पारदर्शिता बढ़ाने और भ्रष्टाचार कम करने के प्रयास किए गए।
- सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम, 2005: इसने नागरिकों को सरकारी सूचनाओं तक पहुँच प्रदान कर पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा दिया।
- लोकपाल और लोकायुक्त: भ्रष्टाचार निवारण के लिए लोकपाल (केंद्र स्तर) और लोकायुक्त (राज्य स्तर) जैसी संस्थाओं का गठन किया गया।
- वित्तीय सुधार: सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (PFMS) और प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) जैसी योजनाओं ने सरकारी खर्च में पारदर्शिता लाई।
इन सुधारों के बावजूद, प्रशासन में अभी भी लालफीताशाही, भ्रष्टाचार और जनता से दूरी जैसी समस्याएँ हैं, जिनके समाधान के लिए निरंतर प्रयास आवश्यक हैं।
अथवा
"उदारीकरण के पश्चात् प्रशासनिक सुधारों की दिशा परिवर्तित हुई है।" स्पष्ट कीजिए। [6]
उदारीकरण के बाद प्रशासनिक सुधारों की बदली दिशा:
1991 में भारत में आर्थिक उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण (LPG) की नीति अपनाए जाने के बाद प्रशासनिक सुधारों की दिशा में महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए। ये परिवर्तन निम्नलिखित हैं:
- नियामक राज्य से सक्षम राज्य (From Regulatory to Enabling State): उदारीकरण से पहले राज्य का ध्यान अर्थव्यवस्था पर नियंत्रण और लाइसेंस-परमिट राज पर था। उदारीकरण के बाद राज्य ने नियंत्रण कम करके निजी क्षेत्र को प्रोत्साहित किया और स्वयं को एक सक्षमकर्ता (Enabler) के रूप में स्थापित किया।
- विकेंद्रीकरण और जनभागीदारी: 73वें और 74वें संविधान संशोधनों के माध्यम से स्थानीय स्वशासन को मजबूत किया गया, जिससे निर्णय लेने की प्रक्रिया में जनता की भागीदारी बढ़ी।
- सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP): बुनियादी ढाँचे और सेवाओं के विकास में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ी, जैसे सड़क, बिजली, शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्रों में।
- ई-गवर्नेंस और प्रौद्योगिकी का उपयोग: प्रशासन में सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग को बढ़ावा दिया गया, जिससे सेवाएँ अधिक पारदर्शी और सुलभ हुईं।
- परिणाम-उन्मुख प्रशासन (Outcome-oriented Administration): पारंपरिक इनपुट-आधारित मूल्यांकन के बजाय परिणामों और प्रभावों पर ध्यान केंद्रित किया गया। प्रदर्शन मूल्यांकन और परिणाम-आधारित बजटिंग को अपनाया गया।
- ग्राहक-केंद्रित दृष्टिकोण (Citizen-centric Approach): नागरिकों को 'ग्राहक' मानते हुए सेवा वितरण में सुधार किया गया, जैसे सेवा का अधिकार (Right to Service) अधिनियम और एकल खिड़की प्रणाली।
- भ्रष्टाचार निवारण और पारदर्शिता: सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम, लोकपाल अधिनियम और डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा देकर भ्रष्टाचार कम करने के प्रयास किए गए।
इस प्रकार, उदारीकरण के बाद प्रशासनिक सुधारों ने नियंत्रण और केंद्रीकरण से हटकर सक्षमीकरण, विकेंद्रीकरण, पारदर्शिता और जन-केंद्रितता की ओर रुख किया है।