RBSE Class 12th 2020 -SS-21-2020 Previous Year Papers
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| Board | RBSE |
|---|---|
| Class | Class 12th |
| Exam year | 2020 |
| Subject | -SS-21-2020 |
| Resource type | Previous Year Papers |
| Category | RBSE Previous Year Question Papers |
| Website | RBSE Solution |
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RBSE Class 12th 2020 -SS-21-2020
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Rajasthan Board Class 12th -SS-21-2020 2020 solved Previous Year Question Papers
हिंदी साहित्य
उच्च माध्यमिक पूरक परीक्षा, 2020
समय : 3¼ घण्टे पूर्णांक : 80
परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :
- परीक्षार्थी सर्वप्रथम प्रश्न-पत्र पर नामांक अनिवार्यतः लिखें।
- सभी प्रश्न हल करने अनिवार्य हैं।
- प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें।
- जिन प्रश्नों में आंतरिक खण्ड हैं, उन सभी के उत्तर एक साथ ही लिखें।
- उत्तर यथासम्भव निर्धारित शब्द-सीमा में ही सुपाठ्य लिखें।
Roll No. No. of Questions — 26 No. of Printed Pages — 8
SS-2 - Hindi Sah. (Supp.)
खण्ड-अ'
1. द्विवेदी युग की प्रमुख विशेषताओं, प्रमुख कवियों एवं उनकी कृतियों का उल्लेख कीजिए। (4)
(उत्तर-सीमा 80 शब्द)
उत्तर: द्विवेदी युग (1900-1920) की प्रमुख विशेषताएँ हैं – राष्ट्रीय चेतना, समाज सुधार, नारी जागरण, प्रकृति प्रेम, और खड़ी बोली का विकास। प्रमुख कवि: महावीर प्रसाद द्विवेदी (युग प्रवर्तक), मैथिलीशरण गुप्त ('भारत-भारती'), अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध' ('प्रियप्रवास'), रामचंद्र शुक्ल ('जीवन-संग्रह'), और श्रीधर पाठक ('एकांत वासी')।
2. छायावादोत्तर गद्य की उपन्यास विधा परंपरा पर समीक्षात्मक टिप्पणी लिखिए। (4)
(उत्तर-सीमा 80 शब्द)
उत्तर: छायावादोत्तर काल (1936 के बाद) में उपन्यास विधा में यथार्थवाद, मनोवैज्ञानिकता, और सामाजिक चेतना का प्रभाव बढ़ा। प्रेमचंद ('गोदान', 'गबन') ने ग्रामीण जीवन का यथार्थ चित्रण किया। जैनेन्द्र ('त्यागपत्र') और अज्ञेय ('शेखर: एक जीवनी') ने मनोवैज्ञानिक उपन्यास लिखे। यह परंपरा आदर्शोन्मुख यथार्थवाद से हटकर मानवीय संबंधों और सामाजिक विसंगतियों पर केंद्रित हुई।
3. “आत्मकथा' एवं 'जीवनी' विधा को परिभाषित करते हुए उनका अंतर स्पष्ट कीजिए। (4)
(उत्तर-सीमा 80 शब्द)
उत्तर: आत्मकथा (Autobiography) वह विधा है जिसमें लेखक स्वयं अपने जीवन की घटनाओं का वर्णन करता है, जैसे – 'मेरी आत्मकथा' (हरिवंश राय बच्चन)। जीवनी (Biography) में कोई अन्य लेखक किसी व्यक्ति के जीवन का वृत्तांत प्रस्तुत करता है, जैसे – 'महात्मा गांधी' (लुई फिशर)। अंतर: आत्मकथा में लेखक स्वयं केंद्र में होता है, जबकि जीवनी में लेखक बाह्य दृष्टिकोण से लिखता है।
4. छायावादोत्तर काव्य की प्रमुख धाराओं का परिचय देते हुए, प्रमुख कवियों का नामोल्लेख कीजिए। (4)
(उत्तर-सीमा 80 शब्द)
उत्तर: छायावादोत्तर काव्य की प्रमुख धाराएँ हैं – (1) प्रगतिवाद (सुमित्रानंदन पंत, नरेश मेहता), (2) प्रयोगवाद (अज्ञेय, मुक्तिबोध), (3) नई कविता (अज्ञेय, धर्मवीर भारती), और (4) समकालीन कविता (केदारनाथ सिंह, कुंवर नारायण)। प्रमुख कवि: अज्ञेय ('हरी घास पर क्षण भर'), मुक्तिबोध ('अंधेरे में'), धर्मवीर भारती ('ठंडा लोहा'), और नरेश मेहता ('संशय की एक रात')।
खण्ड-ब'
5. “प्रसाद” गुण की परिभाषा लिखिए। (2)
(उत्तर-सीमा 50 शब्द)
उत्तर: 'प्रसाद' गुण वह काव्यगत विशेषता है जिसमें रचना को पढ़ने या सुनने पर तुरंत अर्थ स्पष्ट हो जाता है। इसमें कठिन शब्दों, संदेह या अस्पष्टता का अभाव होता है। आचार्य मम्मट के अनुसार, "प्रसादो गुणः" – यह गुण रचना को सरल और सुबोध बनाता है, जिससे पाठक को आनंद की अनुभूति होती है।
6. “श्रुति कटुत्व” दोष की परिभाषा लिखिए। (2)
(उत्तर-सीमा 50 शब्द)
उत्तर: 'श्रुति कटुत्व' दोष वह काव्य दोष है जिसमें शब्दों या वाक्यों के उच्चारण से कानों को कर्कशता या अप्रियता का अनुभव होता है। यह दोष कठोर वर्णों (जैसे ट, ठ, ड, ढ) के अत्यधिक प्रयोग या असंगत शब्द-योजना से उत्पन्न होता है, जिससे रचना की मधुरता नष्ट हो जाती है।
7. 'बय' छंद के लक्षण उदाहरण सहित लिखिए। (3)
(उत्तर-सीमा 50 शब्द)
उत्तर: 'बय' छंद एक सम मात्रिक छंद है। इसके प्रत्येक चरण में 16 मात्राएँ होती हैं, जिनका विभाजन 8+8 मात्राओं के रूप में होता है। अंत में गुरु-लघु का क्रम नियत होता है। उदाहरण: "जो सुख पायो राम में, तो क्यों फिरो भटकाय।" (यहाँ प्रत्येक पंक्ति में 16 मात्राएँ हैं।)
8. “कवित्त' एवं 'सवैया' छंद की परिभाषा देते हुए उनका अंतर स्पष्ट कीजिए | (3)
(उत्तर-सीमा 50 शब्द)
कवित्त छंद: यह एक सममात्रिक छंद है जिसमें प्रत्येक चरण में 31-33 मात्राएँ होती हैं और अंत में गुरु-लघु का क्रम नियत होता है।
सवैया छंद: यह भी सममात्रिक छंद है, पर इसमें प्रत्येक चरण में 22-26 मात्राएँ होती हैं और यह अधिक लयात्मक होता है।
अंतर: कवित्त में मात्राओं की संख्या अधिक (31-33) होती है जबकि सवैया में कम (22-26) होती है। कवित्त गंभीर एवं गरिमामय होता है जबकि सवैया लयात्मक एवं चंचल होता है।
9. 'मानवीकरण' अलंकार की परिभाषा उदाहरण सहित लिखिए | (4)
(उत्तर-सीमा 60 शब्द)
परिभाषा: जहाँ निर्जीव वस्तुओं, प्रकृति या भावों पर मानवीय गुणों, क्रियाओं या भावनाओं का आरोप किया जाता है, वहाँ मानवीकरण अलंकार होता है।
उदाहरण: "हवा धीरे-धीरे फुसफुसा रही थी" – यहाँ हवा (निर्जीव) को फुसफुसाने (मानवीय क्रिया) का गुण दिया गया है।
0. “विभावना' और विशेषोक्ति' अलंकार का उदाहरण सहित अंतर स्पष्ट कीजिए | (4)
(उत्तर-सीमा 80 शब्द)
विभावना अलंकार: जहाँ कारण के बिना ही कार्य हो जाए, वहाँ विभावना अलंकार होता है।
उदाहरण: "बिना पानी के ही फूल खिल गया" – यहाँ पानी (कारण) के बिना फूल खिलना (कार्य) दिखाया गया है।
विशेषोक्ति अलंकार: जहाँ कारण होने पर भी कार्य न हो, वहाँ विशेषोक्ति अलंकार होता है।
उदाहरण: "पानी होने पर भी प्यास नहीं बुझी" – यहाँ पानी (कारण) होने पर भी प्यास न बुझना (कार्य का न होना) दिखाया गया है।
अंतर: विभावना में कारण के अभाव में कार्य होता है, जबकि विशेषोक्ति में कारण होने पर भी कार्य नहीं होता।
खण्ड- ‘a’
l. निम्नलिखित गद्यांश में से किसी एक की सप्रसंग व्याख्या अधिकतम 80 शब्दों में कीजिए | (3)
प्रथम गद्यांश: प्राचीन भारतीय संस्कृति में धार्मिक कृत्यों में एकांत-साधना पर अधिक बल दिया गया है, यद्यपि सामूहिक प्रार्थना का अभाव नहीं है | हमारे कीर्तन आदि तथा महात्मा गाँधी द्वारा परिचालित प्रार्थना-सभाएँ धर्म में एकत्व की सामाजिक भावना को उत्पन्न करती आई हैं | हमारे यहाँ सामाजिकता की अपेक्षा पारिवारिकता को महत्त्व दिया गया है | पारिवारिकता को खोकर सामाजिकता को ग्रहण करना तो मूर्खता होगी; किन्तु पारिवारिकता के साथ-साथ सामाजिकता बढ़ाना श्रेयस्कर होगा |
द्वितीय गद्यांश: वैशाख एक नए गायक के समान अपनी सुर पर एक से एक लम्बा आलाप लेकर संसार को विस्मित कर देना चाहता था | मेरा छोटा घर गर्मी की दृष्टि से कुम्हार का देहाती आवाँ बन रहा था और हवा से गेड, बंद होते खिड़की-दरवाजों के कोलाहल के कारण आधुनिक कारखाने की भ्रांति उत्पन्न करता था | मैं इस मुखर ज्वाला के उपयुक्त ही काम कर रही थी, अर्थात् उत्तर-पुस्तकों में अंधाधुंध भरे ज्ञान-अज्ञान की राशि को विवेक में तपा-तपाकर ज्ञान-कणों का मूल्य निश्चित कर रही थी।
प्रथम गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या: प्रस्तुत गद्यांश में लेखक ने भारतीय संस्कृति में धार्मिक कृत्यों के दो पक्षों – एकांत-साधना और सामूहिक प्रार्थना – पर प्रकाश डाला है। लेखक के अनुसार, प्राचीन भारत में एकांत-साधना को अधिक महत्व दिया गया, पर सामूहिक प्रार्थना का भी अभाव नहीं था। कीर्तन और गाँधीजी की प्रार्थना-सभाएँ सामाजिक एकता बढ़ाती हैं। लेखक पारिवारिकता को सामाजिकता से अधिक महत्वपूर्ण मानते हैं और कहते हैं कि पारिवारिकता को खोकर सामाजिकता ग्रहण करना मूर्खता है, बल्कि दोनों का समन्वय श्रेयस्कर है।
2. निम्नलिखित पद्यांश में से किसी एक की सप्रसंग व्याख्या अधिकतम 80 शब्दों में कीजिए : (3)
प्रथम पद्यांश की सप्रसंग व्याख्या:
प्रसंग: प्रस्तुत पंक्तियाँ 'राघवेन्द्र' (राम) के संशय और संघर्ष के क्षण को दर्शाती हैं। यहाँ समुद्र और अंधकार का वर्णन राम के मन की व्याकुलता का प्रतीक है।
व्याख्या: कवि कहते हैं कि रात्रि में आकाश घने अंधकार को उगल रहा है, दिशाओं का ज्ञान नहीं रहा, हवा रुक गई है। पीछे विशाल समुद्र बिना रुके गरज रहा है। पर्वत के समान स्थिर राम को बार-बार संशय हिला रहा है, और जगत के जीवन में रावण की विजय का भय उत्पन्न हो रहा है। यह राम के मानसिक द्वंद्व का सजीव चित्रण है।
द्वितीय पद्यांश की सप्रसंग व्याख्या:
प्रसंग: प्रस्तुत पंक्तियाँ वसंत ऋतु के आगमन पर सेना के शिविर में छाई सुंदरता और उल्लास का वर्णन करती हैं।
व्याख्या: कवि कहते हैं कि उपवन में अनेक रंगों के वृक्ष खिले हैं, वही चतुरंगिणी सेना संग लहरा रही है। कोयल बंदी की भाँति बोल रही हैं, भौंरे गान गुनगुना रहे हैं। चारों ओर फूलों की वही सुगंध है, जो सोंधी सुगंध में मिली हुई है। सेनापति के सुख-साज और शोभा के समाज को देखकर आज वसंत को ऋतुराज कहा जा रहा है।
3. "मिठाईवाला" कहानी पुरुष के वात्सल्य भाव की मार्मिक अभिव्यक्ति है। कथन पर अपने मौलिक विचार लिखिए। (4)
(उत्तर-सीमा 80 शब्द)
"मिठाईवाला" कहानी में पुरुष के वात्सल्य भाव को मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया गया है। मिठाईवाला भीखू बच्चों से अत्यधिक प्रेम करता है और उन्हें मिठाइयाँ बाँटता है। उसका यह व्यवहार पितृत्व के कोमल भाव को दर्शाता है। वह बच्चों की मासूमियत में अपने खोए हुए बच्चों की याद पाता है। यह वात्सल्य केवल माता का ही नहीं, बल्कि पुरुष के हृदय में भी उतना ही गहरा होता है, यह सिद्ध करता है।
अथवा
पुराने की यह अधिकार-लिप्सा क्यों नहीं समय रहते सावधान हो जाती? 'शिरीष के फूल' पाठ में प्रकट उपर्युक्त प्रवृत्ति पर मौलिक विचार प्रकट कीजिए। (उत्तर-सीमा 80 शब्द)
'शिरीष के फूल' पाठ में पुराने के प्रति अंधी आस्था और अधिकार-लिप्सा की प्रवृत्ति को उजागर किया गया है। लेखक हजारीप्रसाद द्विवेदी बताते हैं कि मनुष्य पुरानी चीजों को छोड़ने में हिचकता है, भले ही वे अनुपयोगी हो जाएँ। यह लिप्सा समय रहते सावधान नहीं होती क्योंकि व्यक्ति परंपरा और आदत के वशीभूत होता है। इससे प्रगति बाधित होती है और नए विचारों का स्वागत नहीं हो पाता।
4. पठित कविताओं के आधार पर पंत की भाषागत विशेषताओं का वर्णन कीजिए। (4)
(उत्तर-सीमा 80 शब्द)
सुमित्रानंदन पंत की भाषा में कोमलकांत पदावली, संस्कृतनिष्ठ शब्दावली और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता प्रमुख है। उनकी कविताओं में तत्सम शब्दों का प्रयोग अधिक मिलता है, जो भाषा को गंभीर और प्रभावशाली बनाता है। वे उपमा, रूपक, अनुप्रास जैसे अलंकारों का सुंदर प्रयोग करते हैं। उनकी भाषा में लयात्मकता और चित्रात्मकता है, जो पाठक को प्रकृति के सौंदर्य में डुबो देती है।
अथवा
दिनकर द्वारा रचित "कुरुक्षेत्र" (तृतीय सर्ग का संकलित अंश) कविता की शैलीगत विशेषताएँ लिखिए। (उत्तर-सीमा 80 शब्द)
दिनकर की "कुरुक्षेत्र" कविता की शैली में ओजस्विता, वीर रस की प्रधानता और युद्ध के भीषण चित्रण की विशेषता है। वे संस्कृतनिष्ठ शब्दों और लंबे समासों का प्रयोग करते हैं, जो कविता को गंभीर और प्रभावशाली बनाते हैं। उनकी शैली में आवेग और आक्रोश है, जो युद्ध की विभीषिका को सजीव करता है। वे प्रतीकों और रूपकों के माध्यम से गहरे दार्शनिक विचारों को व्यक्त करते हैं।
5. "गुल्ली-डंडा" कहानी के आधार पर विलायती-खेलों के ऐब लिखिए। (3)
(उत्तर-सीमा 60 शब्द)
"गुल्ली-डंडा" कहानी में विलायती-खेलों के कई ऐब बताए गए हैं। ये खेल महँगे होते हैं और इनमें उपकरणों पर अधिक खर्च आता है। ये शारीरिक श्रम कम कराते हैं और बच्चों को प्रकृति से दूर करते हैं। इनमें प्रतिस्पर्धा अधिक होती है, जिससे मैत्री भाव कम होता है। इसके विपरीत, देशी खेल सस्ते, सरल और सामूहिक होते हैं।
6. 'सेव और सावित्री' कहानी में प्रोफेसर साहब लड़के पर क्यों क्रुद्ध होते हैं एवं उसके साथ कैसा व्यवहार करते हैं? (3)
(उत्तर-सीमा 60 शब्द)
प्रोफेसर साहब लड़के पर इसलिए क्रुद्ध होते हैं क्योंकि वह उनकी बेटी सावित्री से मिलने आता है और उन्हें यह रिश्ता पसंद नहीं है। वे लड़के के साथ कठोर व्यवहार करते हैं, उसे डाँटते हैं और घर से निकाल देते हैं। वे अपनी सामाजिक प्रतिष्ठा और रूढ़ियों के कारण इस रिश्ते का विरोध करते हैं, जिससे लड़के को अपमानित होना पड़ता है।
7. "बिनु सीता रघुनाथ न जागें। हित न तुम्हारा कछु मोहि लागें।।" पंक्ति का मंतव्य स्पष्ट कीजिए। (3)
(उत्तर-सीमा 60 शब्द)
इस पंक्ति का मंतव्य है कि श्रीराम सीता के बिना जीवित नहीं रह सकते। लक्ष्मण कहते हैं कि हे शत्रुघ्न, तुम्हारा हित मुझे इससे नहीं लगता कि तुम राम को सीता के बिना जगाओ। यह राम के वियोग को दर्शाता है और सीता के प्रति उनके अटूट प्रेम को व्यक्त करता है। यह पंक्ति राम के मानसिक दुःख और वियोग की गहराई को स्पष्ट करती है।
8. भारत की श्रेष्ठता' कविता में वर्णित भावों को अपने शब्दों में लिखिए | (3)
इस कविता में कवि ने भारत की सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और प्राकृतिक श्रेष्ठता का वर्णन किया है। भारत को विश्वगुरु और ज्ञान-विज्ञान का केंद्र बताया गया है। यहाँ की नदियाँ, पर्वत, ऋषि-मुनि और त्याग-तपस्या की परंपरा इसे अन्य देशों से श्रेष्ठ बनाती है। कवि ने भारत की एकता, अहिंसा और सहिष्णुता पर भी बल दिया है।
9. कवि कबीर अथवा लेखक जैनेन्द्र कुमार के व्यक्तित्व और कृतित्व पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए। (2)
कबीरदास: कबीर 15वीं शताब्दी के संत कवि थे। उन्होंने हिंदू-मुस्लिम एकता, निर्गुण भक्ति और सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध आवाज उठाई। उनकी रचनाएँ 'बीजक' में संग्रहित हैं। उनकी भाषा सधुक्कड़ी और शैली दोहा व साखी है।
जैनेन्द्र कुमार: ये हिंदी साहित्य के मनोवैज्ञानिक कथाकार हैं। इनकी रचनाएँ 'त्यागपत्र', 'सुनीता', 'परख' आदि मानवीय संवेदनाओं और आंतरिक द्वंद्वों को उजागर करती हैं। इनकी शैली सरल और भावप्रवण है।
20. पाजेब लाने पर आशुतोष की क्या प्रतिक्रिया रही ? (2)
पाजेब लाने पर आशुतोष अत्यधिक क्रोधित हुआ। उसने इसे अपनी मर्यादा और प्रतिष्ठा पर आघात माना। वह पाजेब को फेंकने की धमकी देता है और अपनी पत्नी को फटकार लगाता है। उसकी प्रतिक्रिया से उसके अहंकार और पुरुषसत्तात्मक सोच का पता चलता है।
21. कवि पद्माकर ने धर्म का मूल किसे बताया है ? (2)
कवि पद्माकर ने धर्म का मूल दया को बताया है। उनके अनुसार, दया ही सभी धर्मों का आधार है और इसके बिना धर्म अधूरा है। उन्होंने कहा है कि दया से ही मनुष्य में सद्गुणों का विकास होता है और समाज में शांति स्थापित होती है।
खण्ड - द
22. 'निर्वासित' कहानी में वर्णित वृद्धों की पीड़ा संदर्भ पर विचार व्यक्त करते हुए समाधान सुझाइये (4)
वृद्धों की पीड़ा: 'निर्वासित' कहानी में वृद्धों को अपने ही परिवार द्वारा उपेक्षित और अकेला छोड़ दिए जाने की पीड़ा दर्शाई गई है। वे अपने बच्चों से प्रेम और सम्मान की उम्मीद करते हैं, लेकिन उन्हें वृद्धाश्रम या अकेलेपन का सामना करना पड़ता है। यह पीड़ा शारीरिक से अधिक मानसिक और भावनात्मक होती है।
समाधान: वृद्धों की पीड़ा कम करने के लिए परिवारों को अपने बुजुर्गों को सम्मान और प्यार देना चाहिए। समाज में वृद्धाश्रमों की गुणवत्ता सुधारी जाए और उनके लिए मनोरंजन व स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएँ। सरकार को वृद्धों के लिए पेंशन और कानूनी सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए। युवा पीढ़ी को संस्कार और संवेदनशीलता सिखाना भी आवश्यक है।
अथवा
'राष्ट्र का स्वरूप' पाठ में वर्णित राष्ट्र के प्रमुख अंगों पर विचार व्यक्त करते हुए राष्ट्रीय विकास में स्वयं की भूमिका का निर्धारण कीजिए। (4)
राष्ट्र के प्रमुख अंग: इस पाठ के अनुसार राष्ट्र के प्रमुख अंग हैं – भूमि, जनसंख्या, सरकार और संप्रभुता। भूमि राष्ट्र का भौतिक आधार है, जनसंख्या उसकी आत्मा, सरकार संचालन का माध्यम और संप्रभुता उसकी स्वतंत्रता का प्रतीक है। इन चारों के समन्वय से ही राष्ट्र का स्वरूप निर्धारित होता है।
राष्ट्रीय विकास में मेरी भूमिका: मैं एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में राष्ट्रीय विकास में योगदान दे सकता हूँ – शिक्षा के प्रति जागरूक रहकर, कर्तव्यों का पालन करके, सामाजिक बुराइयों के विरुद्ध आवाज उठाकर और देश की एकता व अखंडता को बनाए रखकर। मैं अपने क्षेत्र में ईमानदारी से कार्य करके और दूसरों को प्रेरित करके राष्ट्र निर्माण में सहायक बन सकता हूँ।
23. साहित्य में प्रचलित विभिन्न वादों के विषय में डॉ. रामकुमार वर्मा के क्या मत हैं ? (3)
(उत्तर-सीमा 60 शब्द)
डॉ. रामकुमार वर्मा का मत है कि साहित्य में प्रचलित विभिन्न वाद (जैसे यथार्थवाद, आदर्शवाद, प्रकृतिवाद आदि) किसी एक सिद्धांत पर आधारित नहीं होते, बल्कि ये समय और समाज की आवश्यकताओं के अनुसार विकसित होते हैं। वे वादों को साहित्य की अभिव्यक्ति का माध्यम मानते हैं, जो मानव जीवन के विभिन्न पहलुओं को उजागर करते हैं। उनके अनुसार, प्रत्येक वाद अपने युग की विशेषताओं को दर्शाता है और साहित्य को नई दिशा प्रदान करता है।
24. 'यात्रा : एक पावन तीर्थ' पाठ में वर्णित द्वीप पर एक परिचयात्मक टिप्पणी लिखिए | (3)
(उत्तर-सीमा 60 शब्द)
'यात्रा : एक पावन तीर्थ' पाठ में वर्णित द्वीप 'तिया द्वीप' है। यह एक छोटा, सुरम्य और प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर द्वीप है, जो अपने शांत वातावरण और धार्मिक महत्व के लिए जाना जाता है। यहाँ के निवासी सरल और मेहमाननवाज हैं। द्वीप पर प्राचीन मंदिर और तीर्थ स्थल हैं, जो श्रद्धालुओं को आकर्षित करते हैं। लेखक ने इस द्वीप की यात्रा को आध्यात्मिक अनुभव बताया है।
25. मांडले जेल में भोगे हुए कष्टों के बारे में सुभाष ने क्या लिखा ? (3)
(उत्तर-सीमा 60 शब्द)
सुभाष ने मांडले जेल में भोगे हुए कष्टों का वर्णन करते हुए लिखा कि वहाँ की परिस्थितियाँ अत्यंत दयनीय थीं। जेल में भोजन खराब था, कोठरियाँ छोटी और अस्वच्छ थीं, तथा कैदियों के साथ अमानवीय व्यवहार किया जाता था। उन्होंने बताया कि वहाँ अकेलापन और शारीरिक यातना सहनी पड़ती थी, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने अपने आत्मबल और देशभक्ति को बनाए रखा।
26. सुभद्रा अपनी मृत्यु की चर्चा पर क्या विचार व्यक्त करती है ? (3)
(उत्तर-सीमा 60 शब्द)
सुभद्रा अपनी मृत्यु की चर्चा पर यह विचार व्यक्त करती है कि मृत्यु जीवन का एक स्वाभाविक अंत है, जिससे डरना नहीं चाहिए। वह इसे एक शांतिपूर्ण यात्रा मानती है, जो आत्मा को मुक्ति प्रदान करती है। उसके अनुसार, मृत्यु के बाद भी व्यक्ति अपने कर्मों और यादों के माध्यम से जीवित रहता है। वह मृत्यु को भयावह नहीं, बल्कि एक सत्य के रूप में स्वीकार करती है।