RBSE Class 12th 2020 -SS-84-2020 Previous Year Papers

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Paper details

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Board RBSE
Class Class 12th
Exam year 2020
Subject -SS-84-2020
Resource type Previous Year Papers
Category RBSE Previous Year Question Papers
Website RBSE Solution

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Rajasthan Board Class 12th -SS-84-2020 2020 solved Previous Year Question Papers

कृषि विज्ञान (AGRICULTURE)

उच्च माध्यमिक पूरक परीक्षा, 2020

समय : ३.१५ घण्टे     पूर्णांक : 56

No. of Questions — 30

No. of Printed Pages — 8


परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :

GENERAL INSTRUCTIONS TO THE EXAMINEES :

  1. परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न-पत्र पर नामांक अनिवार्यतः लिखें।
    Candidate must write first his/her Roll No. on the question paper compulsorily.
  2. सभी प्रश्न करने अनिवार्य हैं।
    All the questions are compulsory.
  3. प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें।
    Write the answer to each question in the given answer-book only.
  4. जिन प्रश्नों में आन्तरिक खण्ड हैं, उन सभी के उत्तर एक साथ ही लिखें।
    For questions having more than one part, the answers to those parts are to be written together in continuity.
  5. प्रश्न-पत्र के हिन्दी व अंग्रेजी रूपांतर में किसी प्रकार की त्रुटि/अंतर/विरोधाभास होने पर हिन्दी भाषा के प्रश्न को ही सही मानें।
    If there is any error / difference / contradiction in Hindi & English versions of the question paper, the question of Hindi version should be treated valid.

SS-84-Agriculture (Supp.)    [ Turn over ]

प्रश्न पत्र – कृषि (पूरक) SS-84-2020 (पृष्ठ 2)

  1. मृदा उत्पादकता को परिभाषित कीजिए।
    Define Soil productivity.

    उत्तर: मृदा उत्पादकता से तात्पर्य किसी मृदा की फसलों को उगाने और अच्छी पैदावार देने की क्षमता से है। यह मृदा की भौतिक, रासायनिक एवं जैविक गुणों पर निर्भर करती है।

    Answer: Soil productivity is the capacity of soil to produce crops and yield good harvest. It depends on the physical, chemical, and biological properties of the soil.

  2. कोई दो जैव उर्वरक के नाम लिखिए।
    Write the name of any two biofertilizers.

    उत्तर: दो जैव उर्वरकों के नाम निम्नलिखित हैं:

    1. राइजोबियम (Rhizobium)
    2. एजोटोबैक्टर (Azotobacter)

    Answer: Two biofertilizers are:

    1. Rhizobium
    2. Azotobacter
  3. आलू की फसल में सिंचाई की क्रांतिक अवस्थाएँ लिखिए।
    Write the critical stages of irrigation in Potato crop.

    उत्तर: आलू की फसल में सिंचाई की क्रांतिक अवस्थाएँ निम्नलिखित हैं:

    1. कंद निर्माण (Tuber initiation) के समय
    2. कंद वृद्धि (Tuber bulking) के समय

    Answer: The critical stages of irrigation in Potato crop are:

    1. At the time of tuber initiation
    2. At the time of tuber bulking
  4. परजीवी खरपतवार के कोई दो उदाहरण लिखिए।
    Write any two example of parasitic weeds.

    उत्तर: परजीवी खरपतवार के दो उदाहरण निम्नलिखित हैं:

    1. अमरबेल (Cuscuta / Dodder)
    2. ओरोबैंकी (Orobanche / Broomrape)

    Answer: Two examples of parasitic weeds are:

    1. Cuscuta (Dodder)
    2. Orobanche (Broomrape)
  5. मिश्रित फसल किसे कहते हैं?
    What is Mixed Cropping?

    उत्तर: मिश्रित फसल वह कृषि पद्धति है जिसमें एक ही खेत में एक साथ दो या दो से अधिक फसलों को बिना किसी निश्चित पंक्ति क्रम के उगाया जाता है।

    Answer: Mixed cropping is an agricultural practice in which two or more crops are grown simultaneously in the same field without any definite row arrangement.

  6. द्वितीयक भू-परिष्करण से क्या अभिप्राय है?
    What is meant by Secondary Tillage?

    उत्तर: द्वितीयक भू-परिष्करण से अभिप्राय प्राथमिक जुताई के बाद की जाने वाली हल्की जुताई से है, जिसका उद्देश्य मिट्टी को भुरभुरा बनाना, खरपतवार नियंत्रण करना और बीज बोने के लिए उपयुक्त क्यारी तैयार करना होता है।

    Answer: Secondary tillage refers to the lighter tillage operations performed after primary tillage, aimed at pulverizing the soil, controlling weeds, and preparing a suitable seedbed for sowing.

  7. भैंस के दूध का रासायनिक संघटन लिखिए।
    Write the chemical composition of Buffalo Milk.

    उत्तर: भैंस के दूध का रासायनिक संघटन (लगभग प्रतिशत में) निम्नलिखित है:

    • जल (Water): 82.7%
    • वसा (Fat): 7.4%
    • प्रोटीन (Protein): 3.8%
    • लैक्टोज (Lactose): 4.8%
    • खनिज (Minerals): 0.8%

    Answer: The approximate chemical composition of Buffalo Milk is:

    • Water: 82.7%
    • Fat: 7.4%
    • Protein: 3.8%
    • Lactose: 4.8%
    • Minerals: 0.8%
  8. अविक्स्त्र भेड़ की नस्ल का उत्पत्ति स्थान लिखिए।
    Write the origin of Avivastra Sheep Breed.

    उत्तर: अविक्स्त्र भेड़ की नस्ल का उत्पत्ति स्थान राजस्थान (भारत) है।

    Answer: The origin of Avivastra Sheep Breed is Rajasthan (India).

  9. पशुओं में होने वाले पशु माता (पशु प्लेग) रोग के रोग कारक का नाम लिखिए।
    Write down the name of causal organism of Rinderpest disease in animals.

    उत्तर: पशु माता (पशु प्लेग) रोग का रोग कारक रिंडरपेस्ट वायरस (Rinderpest virus) है, जो एक RNA वायरस है।

    Answer: The causal organism of Rinderpest disease in animals is Rinderpest virus, which is an RNA virus.

प्रश्न 10. पशुओं में गलघोंटू रोग के कोई दो लक्षण लिखिए।

Write the any two symptoms of Haemorrhagic septicemia disease in animals.

उत्तर: गलघोंटू रोग (Haemorrhagic Septicemia) के दो प्रमुख लक्षण निम्नलिखित हैं:

  1. शरीर का तापमान अचानक बहुत अधिक बढ़ जाना (तेज बुखार आना)।
  2. गले और सीने में सूजन आ जाना, जिससे सांस लेने में कठिनाई होती है और लार टपकती है।

प्रश्न 11. आई.सी.डी.पी. का पूरा नाम लिखिए।

Write the full name of I.C.D.P.

उत्तर: I.C.D.P. का पूरा नाम Integrated Child Development Services (एकीकृत बाल विकास सेवाएँ) है।

प्रश्न 12. डेरी में ऑपरेशन फ्लड का द्वितीय चरण कब प्रारम्भ हुआ?

When did the second phase of operation flood started in dairy?

उत्तर: डेरी में ऑपरेशन फ्लड का द्वितीय चरण वर्ष 1981 में प्रारम्भ हुआ।

प्रश्न 13. बौछारी सिंचाई विधि के कोई दो लाभ लिखिए।

Write any two advantages of sprinkler irrigation method.

उत्तर: बौछारी सिंचाई (Sprinkler Irrigation) के दो लाभ निम्नलिखित हैं:

  1. इस विधि में पानी की बचत होती है क्योंकि पानी बूंदों के रूप में फसलों पर गिरता है और वाष्पीकरण तथा रिसाव का नुकसान कम होता है।
  2. यह विधि ढलान वाली तथा असमतल भूमि पर भी आसानी से उपयोग की जा सकती है, जहाँ अन्य सिंचाई विधियाँ कठिन होती हैं।

प्रश्न 14. निम्न पर टिप्पणी लिखिए:

Write short notes on following:

(a) बीज का वास्तविक उपयोगिता मान (Real utility value of seed)

(b) प्रजनक बीज (Breeder seed)

उत्तर:

(a) बीज का वास्तविक उपयोगिता मान (Real Utility Value of Seed): यह बीज की गुणवत्ता का एक माप है। इसे निम्न सूत्र द्वारा ज्ञात किया जाता है:
वास्तविक उपयोगिता मान = (शुद्धता प्रतिशत × अंकुरण प्रतिशत) / 100
यह मान बताता है कि दिए गए बीज के नमूने में कितने प्रतिशत बीज वास्तव में उपयोगी हैं और उनसे स्वस्थ पौधे उग सकते हैं।

(b) प्रजनक बीज (Breeder Seed): यह बीज उच्चतम गुणवत्ता वाला बीज होता है जिसे किसी किस्म के विकासकर्ता (ब्रीडर) द्वारा तैयार किया जाता है। यह आनुवंशिक रूप से शुद्ध होता है और इससे आगे प्रमाणित बीज (Certified Seed) तैयार किया जाता है। प्रजनक बीज का रंग पीला होता है और यह सबसे शुद्ध बीज श्रेणी है।

प्रश्न 15. पपेन किसे कहते हैं? पपीता से पपेन निकालने की विधि लिखिए।

What is Papain? Write the method of extracting papain from papaya.

उत्तर:

पपेन (Papain): पपेन एक प्रकार का एंजाइम (प्रोटीएज) है जो कच्चे पपीते के फल, पत्तियों और तने से प्राप्त होता है। इसका उपयोग मांस को नरम करने, पाचन में सहायता और दवाइयों में किया जाता है।

पपीता से पपेन निकालने की विधि:

  1. कच्चे पपीते के फल पर चाकू से हल्के-हल्के चीरे (incisions) लगाए जाते हैं।
  2. इन चीरों से एक सफेद दूधिया तरल (लेटेक्स) निकलता है, जिसे एकत्र कर लिया जाता है।
  3. एकत्रित लेटेक्स को धूप में या कम तापमान पर सुखाया जाता है।
  4. सूखने के बाद यह एक भूरे रंग का पाउडर बन जाता है, जिसे पपेन कहते हैं।

प्रश्न 16. वरणात्मक व अवरणात्मक शाकनाशी में अन्तर स्पष्ट कीजिए।

Differentiate between selective and non-selective herbicides.

उत्तर: वरणात्मक (Selective) और अवरणात्मक (Non-selective) शाकनाशी में निम्नलिखित अंतर हैं:

क्र.सं. वरणात्मक शाकनाशी (Selective Herbicide) अवरणात्मक शाकनाशी (Non-selective Herbicide)
1. यह केवल विशिष्ट खरपतवारों को नष्ट करता है, मुख्य फसल को नुकसान नहीं पहुँचाता। यह सभी प्रकार के पौधों (फसल और खरपतवार दोनों) को नष्ट कर देता है।
2. इसका उपयोग फसल उगने के बाद भी किया जा सकता है। इसका उपयोग आमतौर पर फसल बोने से पहले या कटाई के बाद किया जाता है।
3. उदाहरण: 2,4-D (गेहूँ की फसल में चौड़ी पत्ती वाले खरपतवारों के लिए)। उदाहरण: ग्लाइफोसेट (Glyphosate), पैराक्वाट (Paraquat)।

7. चने की बुवाई हेतु दो उन्नत किस्में, बीजदर व उपज प्रति हैक्टर लिखिए।

Write the two improved varieties, seed rate and yield per hectare for sowing gram crop.

उन्नत किस्में (Improved Varieties):

  1. राजस्थान चना-1 (Rajasthan Chana-1)
  2. राजस्थान चना-2 (Rajasthan Chana-2)

बीजदर (Seed Rate): 75-80 किग्रा प्रति हैक्टर

उपज (Yield): 15-20 क्विंटल प्रति हैक्टर

8. फलोंद्यान में पौधे लगाने की आयताकार व समोच्य रेखा विधियों का वर्णन कीजिए।

Describe the Rectangular and Contour methods of planting in orchard.

आयताकार विधि (Rectangular Method): इस विधि में पौधों को आयताकार पैटर्न में लगाया जाता है, जहाँ पंक्तियों के बीच की दूरी और पौधों के बीच की दूरी समान नहीं होती। यह विधि भूमि का अधिकतम उपयोग करती है और अंतर-फसल के लिए उपयुक्त है।

समोच्य रेखा विधि (Contour Method): इस विधि में पौधों को ढलान के समानांतर समोच्य रेखाओं पर लगाया जाता है। यह विधि मृदा अपरदन को रोकने और जल संरक्षण में सहायक है, विशेषकर पहाड़ी क्षेत्रों में।

9. फलोंद्यान में फल वृक्षों को पाले से बचाने के लिए कोई चार उपाय सुझाइये।

Suggest any four protective measures to protect fruit plants from frost in orchard.

  1. पौधों को पुआल या प्लास्टिक शीट से ढकना।
  2. बगीचे में धुआँ उत्पन्न करने वाले पदार्थ जलाना।
  3. पौधों के चारों ओर मल्चिंग करना।
  4. पाले के समय हल्की सिंचाई करना।

20. अचार को सुरक्षित रखने की कोई दो विधियों का वर्णन कीजिए।

Describe any two methods to preserve the pickles.

  1. नमक विधि (Salt Method): अचार में पर्याप्त मात्रा में नमक मिलाकर रखा जाता है, जो बैक्टीरिया के विकास को रोकता है।
  2. तेल विधि (Oil Method): अचार को तेल में डुबोकर रखा जाता है, जो हवा के संपर्क को रोककर खराब होने से बचाता है।

21. "पशु-प्रजनन प्रबन्धन" हेतु ध्यान देने योग्य किन्हीं चार बिन्दुओं का वर्णन कीजिए।

Describe any four points to be considered for "Animal Breeding Management".

  1. उच्च गुणवत्ता वाले नर और मादा पशुओं का चयन।
  2. प्रजनन के लिए उपयुक्त समय और मौसम का ध्यान रखना।
  3. पशुओं को संतुलित आहार और स्वच्छ पानी उपलब्ध कराना।
  4. रोगों से बचाव के लिए नियमित टीकाकरण और स्वास्थ्य जाँच।

22. भेड़ की मेरीनो व मारवाड़ी नस्ल की उपयोगिता लिखिए।

Write the utility of Merino and Marwari breeds of sheep.

मेरीनो (Merino): यह नस्ल उच्च गुणवत्ता वाले ऊन के लिए प्रसिद्ध है, जो बारीक और मुलायम होता है। इसका उपयोग ऊनी वस्त्र बनाने में किया जाता है।

मारवाड़ी (Marwari): यह नस्ल मांस और ऊन दोनों के लिए उपयोगी है। यह कठोर जलवायु में भी जीवित रह सकती है और इसका ऊन मोटा होता है, जो कालीन बनाने में काम आता है।

23. पशुओं में खुरपका व मुँहपका रोग के कोई चार लक्षण लिखिए।

Write any four symptoms of foot and mouth disease in animals.

  1. मुँह और खुरों में छाले (ब्लिस्टर) बनना।
  2. अत्यधिक लार बहना (ड्रोलिंग)।
  3. लंगड़ापन और चलने में कठिनाई।
  4. बुखार और भूख में कमी।

24. निम्न पर टिप्पणी लिखिए :

Write short notes on following :

(अ) कृत्रिम गर्भाधान / (a) Artificial insemination

कृत्रिम गर्भाधान (Artificial Insemination): यह एक वैज्ञानिक विधि है जिसमें नर से शुक्राणु (semen) को एकत्र करके, उसे विशेष उपकरणों की सहायता से मादा के गर्भाशय या ग्रीवा में कृत्रिम रूप से प्रविष्ट कराया जाता है। इस विधि का उपयोग पशु प्रजनन में व्यापक रूप से किया जाता है।

लाभ:

  • एक उत्तम नर से अधिक से अधिक संतान प्राप्त की जा सकती है।
  • रोगों के संचरण का खतरा कम होता है।
  • भौगोलिक दूरी के बावजूद उत्तम नस्ल के शुक्राणु का उपयोग संभव है।
  • बांझपन की समस्या को दूर करने में सहायक।

(ब) संतति परीक्षण / (b) Progeny test

संतति परीक्षण (Progeny Test): यह एक आनुवंशिक विधि है जिसमें किसी नर या मादा पशु की आनुवंशिक गुणवत्ता का मूल्यांकन उसकी संतानों के प्रदर्शन के आधार पर किया जाता है। इस परीक्षण से यह पता चलता है कि पशु अपने वांछनीय गुणों (जैसे दूध उत्पादन, वृद्धि दर, रोग प्रतिरोधक क्षमता) को संतानों में कितनी प्रभावी रूप से स्थानांतरित कर सकता है।

महत्व: इसका उपयोग प्रजनन कार्यक्रमों में उत्तम नर (sire) के चयन के लिए किया जाता है, जिससे पशुधन की गुणवत्ता में सुधार होता है।


25. टिकाऊ खेती को परिभाषित कीजिए | इसके कोई चार सिद्धान्त समझाइये |

Define sustainable farming. Explain any four principles of it.

टिकाऊ खेती (Sustainable Farming) की परिभाषा: टिकाऊ खेती एक ऐसी कृषि प्रणाली है जो पर्यावरणीय स्वास्थ्य, आर्थिक लाभप्रदता और सामाजिक एवं आर्थिक समानता को बनाए रखते हुए वर्तमान और भविष्य की पीढ़ियों की खाद्य एवं वस्त्र आवश्यकताओं को पूरा करती है। यह प्राकृतिक संसाधनों का इस प्रकार उपयोग करती है कि वे नष्ट न हों और भविष्य के लिए भी उपलब्ध रहें।

चार सिद्धान्त (Principles):

  1. मृदा स्वास्थ्य का संरक्षण (Soil Health Conservation): मिट्टी की उर्वरता और संरचना को बनाए रखने के लिए जैविक खाद, हरी खाद, फसल चक्र और न्यूनतम जुताई का उपयोग किया जाता है।
  2. जल संसाधनों का कुशल उपयोग (Efficient Use of Water Resources): जल संरक्षण के लिए ड्रिप सिंचाई, वर्षा जल संचयन और मल्चिंग जैसी तकनीकों का उपयोग किया जाता है, जिससे पानी की बर्बादी कम होती है।
  3. जैव विविधता का संरक्षण (Conservation of Biodiversity): विभिन्न प्रकार की फसलों, पशुओं और लाभकारी जीवों (जैसे मधुमक्खी, केंचुआ) को प्रोत्साहित किया जाता है, जिससे पारिस्थितिकी तंत्र संतुलित रहता है।
  4. रासायनिक आदानों का न्यूनतम उपयोग (Minimal Use of Chemical Inputs): रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के स्थान पर जैविक विकल्पों (जैव उर्वरक, जैव कीटनाशक) का उपयोग किया जाता है, जिससे पर्यावरण प्रदूषण कम होता है और मानव स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता।

26. वानस्पति प्रवर्द्धन की निम्नांकित विधियों का उपयुक्त चित्र बनाइये |

Draw the suitable diagram of following vegetative propagation methods :

(i) साधारण दाब विधि / (i) Simple Layering Method

साधारण दाब विधि (Simple Layering): इस विधि में एक शाखा को मोड़कर मिट्टी में दबा दिया जाता है, जबकि उसका सिरा मिट्टी के बाहर रहता है। दबे हुए भाग से जड़ें निकलती हैं और बाद में इसे मूल पौधे से अलग कर दिया जाता है।

(चित्र: एक शाखा को जमीन की ओर मोड़कर मिट्टी में दबाया गया है, शाखा का सिरा बाहर निकला हुआ है। दबे हुए भाग से जड़ें निकल रही हैं।)

(ii) माउन्ट या टीला दाब विधि / (ii) Mount Layering Method

माउन्ट या टीला दाब विधि (Mount Layering): इस विधि में पौधे के आधार पर मिट्टी का टीला बनाया जाता है, जिससे तने के निचले भाग से नई जड़ें और अंकुर निकलते हैं। बाद में इन अंकुरों को अलग करके नए पौधे तैयार किए जाते हैं।

(चित्र: एक पौधे के आधार पर मिट्टी का टीला बनाया गया है, जिसमें से कई नए अंकुर निकल रहे हैं।)

(iii) बैज ग्राफ्टिंग विधि / (iii) Wedge Grafting Method

बैज ग्राफ्टिंग विधि (Wedge Grafting): इस विधि में वंशज (scion) के निचले सिरे को पच्चर (wedge) के आकार में काटा जाता है और इसे प्रवर्ध (rootstock) के तने में बने चीरे में फिट किया जाता है। दोनों भागों को मिलाकर बांध दिया जाता है ताकि प्रवर्ध और वंशज के कैम्बियम स्तर मिल सकें।

(चित्र: प्रवर्ध के तने में एक चीरा लगा है, वंशज के निचले सिरे को पच्चर के आकार में काटकर उस चीरे में डाला गया है और बांध दिया गया है।)


27. जैली क्या है ? जैली बनाने की विधि का वर्णन कीजिए |

What is Jelly ? Explain the method of Jelly preparation.

जैली (Jelly) क्या है: जैली एक पारदर्शी, अर्ध-ठोस खाद्य पदार्थ है जो फलों के रस को चीनी के साथ पकाकर और उसमें पेक्टिन (एक प्राकृतिक गाढ़ा करने वाला पदार्थ) मिलाकर बनाया जाता है। यह फलों के स्वाद और सुगंध को संरक्षित करता है और इसे ब्रेड, टोस्ट आदि के साथ खाया जाता है।

जैली बनाने की विधि (Method of Jelly Preparation):

  1. फलों का चयन और तैयारी: अच्छी गुणवत्ता वाले, पके हुए फल (जैसे अंगूर, सेब, आंवला) लें। फलों को धोकर छोटे टुकड़ों में काट लें।
  2. रस निकालना: कटे हुए फलों को पानी में उबालें जब तक वे नरम न हो जाएं। फिर इसे मलमल के कपड़े या छलनी से छानकर साफ रस अलग कर लें।
  3. पेक्टिन परीक्षण: रस में पेक्टिन की मात्रा जांचने के लिए थोड़े से रस में एल्कोहल मिलाएं। यदि जेल जैसा थक्का बनता है, तो पेक्टिन पर्याप्त है। यदि नहीं, तो बाहरी पेक्टिन मिलाना पड़ सकता है।
  4. चीनी मिलाना: रस में बराबर मात्रा में चीनी (या स्वादानुसार) मिलाएं और अच्छी तरह मिलाएं।
  5. पकाना: मिश्रण को तेज आंच पर उबालें, फिर आंच धीमी करके लगातार चलाते हुए पकाएं जब तक कि यह गाढ़ा न हो जाए। जैली का तापमान लगभग 105°C (220°F) तक पहुंचना चाहिए।
  6. जेल परीक्षण: थोड़ी मात्रा में जैली को ठंडी प्लेट पर डालें। यदि यह जम जाती है और उंगली से खींचने पर सिकुड़ती है, तो जैली तैयार है।
  7. भराई और सील करना: गर्म जैली को साफ, सूखे और गर्म जार में डालें। ऊपर थोड़ी जगह छोड़ें। जार को तुरंत ढक्कन से बंद करें और उल्टा रख दें ताकि वैक्यूम सील बन जाए।
  8. भंडारण: जार को ठंडा होने दें, फिर ठंडी और अंधेरी जगह पर स्टोर करें।

28. मूँगफली की वैज्ञानिक खेती का निम्नलिखित बिन्दुओं के आधार पर वर्णन कीजिए :

(अ) जलवायु (Climate): मूँगफली की खेती के लिए गर्म और आर्द्र जलवायु उपयुक्त होती है। इसके लिए 20°C से 30°C तापमान तथा 50-75 सेमी वार्षिक वर्षा आवश्यक है। अधिक ठंड या पाला फसल के लिए हानिकारक होता है।

(ब) चार उन्नत किस्में (Four improved varieties):

  • जी.जी. 2 (GG 2)
  • जी.जी. 7 (GG 7)
  • जी.जी. 11 (GG 11)
  • जी.जी. 20 (GG 20)

(स) बीजदर एवं बीजोपचार (Seed rate and Seed treatment): बीजदर 80-100 किग्रा प्रति हेक्टेयर होती है। बीजोपचार के लिए बीजों को कार्बेन्डाजिम या थीरम 2 ग्राम प्रति किग्रा बीज की दर से उपचारित करना चाहिए।

(द) दो प्रमुख रोग (Two important diseases):

  • तना गलन रोग (Stem rot) – इसके नियंत्रण के लिए बीजोपचार एवं फसल चक्र अपनाएँ।
  • पत्ती धब्बा रोग (Leaf spot) – इसके लिए मैन्कोजेब या कार्बेन्डाजिम का छिड़काव करें।

अथवा

सरसों की वैज्ञानिक खेती का निम्नलिखित बिन्दुओं के आधार पर वर्णन कीजिए :

(अ) जलवायु (Climate): सरसों की खेती के लिए ठंडी एवं शुष्क जलवायु उपयुक्त होती है। इसके लिए 10°C से 25°C तापमान तथा 25-40 सेमी वार्षिक वर्षा आवश्यक है। पाला फसल के लिए हानिकारक होता है।

(ब) चार उन्नत किस्में (Four improved varieties):

  • वरुणा (Varuna)
  • पूसा बोल्ड (Pusa Bold)
  • पूसा जय किसान (Pusa Jaikisan)
  • आर.एच. 30 (RH 30)

(स) बीजदर एवं बीजोपचार (Seed rate and Seed treatment): बीजदर 4-5 किग्रा प्रति हेक्टेयर होती है। बीजोपचार के लिए बीजों को कार्बेन्डाजिम 2 ग्राम प्रति किग्रा बीज की दर से उपचारित करना चाहिए।

(द) दो प्रमुख रोग (Two important diseases):

  • झुलसा रोग (Blight) – इसके नियंत्रण के लिए मैन्कोजेब का छिड़काव करें।
  • सफेद रतुआ रोग (White rust) – इसके लिए बीजोपचार एवं फसल चक्र अपनाएँ।

SS-84-Agriculture (Supp.)

29. अमरूद की वैज्ञानिक खेती का निम्नलिखित बिन्दुओं के आधार पर वर्णन कीजिए :

(अ) चार उन्नत किस्में: अमरूद की चार उन्नत किस्में निम्नलिखित हैं:

  1. लखनऊ-49 (सरदार)
  2. अलाहाबाद सफेदा
  3. हिसार सफेदा
  4. बीबीसी-1 (बंगलौर ब्लू)

(ब) प्रवर्धन विधि: अमरूद का प्रवर्धन मुख्यतः बीज द्वारा तथा कलम विधि (गूटी, स्टूलिंग) द्वारा किया जाता है। व्यावसायिक खेती में गूटी विधि (एयर लेयरिंग) सर्वोत्तम मानी जाती है।

(स) संधाई व काट-छाँट: अमरूद के पौधों को प्रारंभिक वर्षों में एक तने वाला बनाने के लिए संधाई की जाती है। काट-छाँट में रोगग्रस्त, सूखी तथा आपस में उलझी शाखाओं को हटाया जाता है। फल तोड़ने के बाद हल्की काट-छाँट लाभदायक होती है।

(द) दो प्रमुख रोग:

  1. फल सड़न रोग (Fruit Rot): यह कवक जनित रोग है, जिसमें फल सड़ने लगते हैं। नियंत्रण के लिए बोर्डो मिश्रण का छिड़काव करें।
  2. पत्ती धब्बा रोग (Leaf Spot): इसमें पत्तियों पर भूरे धब्बे बन जाते हैं। नियंत्रण के लिए मैन्कोजेब का छिड़काव करें।

अथवा

बेर की वैज्ञानिक खेती का निम्नलिखित बिन्दुओं के आधार पर वर्णन कीजिए :

(A) चार उन्नत किस्में: बेर की चार उन्नत किस्में निम्नलिखित हैं:

  1. गोला
  2. सेव
  3. काठा
  4. उमरान

(ब) प्रवर्धन विधि: बेर का प्रवर्धन मुख्यतः बीज द्वारा तथा कलम विधि (गूटी, स्टूलिंग) द्वारा किया जाता है। व्यावसायिक खेती में गूटी विधि (एयर लेयरिंग) सर्वोत्तम मानी जाती है।

(स) संधाई व काट-छाँट: बेर के पौधों को प्रारंभिक वर्षों में एक तने वाला बनाने के लिए संधाई की जाती है। काट-छाँट में रोगग्रस्त, सूखी तथा आपस में उलझी शाखाओं को हटाया जाता है। फल तोड़ने के बाद हल्की काट-छाँट लाभदायक होती है।

(द) दो प्रमुख रोग:

  1. फल सड़न रोग (Fruit Rot): यह कवक जनित रोग है, जिसमें फल सड़ने लगते हैं। नियंत्रण के लिए बोर्डो मिश्रण का छिड़काव करें।
  2. पत्ती धब्बा रोग (Leaf Spot): इसमें पत्तियों पर भूरे धब्बे बन जाते हैं। नियंत्रण के लिए मैन्कोजेब का छिड़काव करें।

30. भैंस की मुर्र नस्ल का वर्णन निम्नांकित बिन्दुओं के आधार पर कीजिए :

  1. (A) उत्पत्ति स्थान
  2. (ब) वितरण
  3. (स) कोई दो विशेषताएँ
  4. (द) उपयोगिता

अथवा

भैंस की भदावरी नस्ल का वर्णन निम्नांकित बिन्दुओं के आधार पर कीजिए :

  1. (A) उत्पत्ति स्थान
  2. (ब) वितरण
  3. (स) कोई दो विशेषताएँ
  4. (द) उपयोगिता

Describe the Murrah breed of buffalo on the basis of following points :

  1. (a) Origin
  2. (b) Distribution
  3. (c) Any two characteristics
  4. (d) Utility

OR

Describe the Bhadawari breed of buffalo on the basis of following points :

  1. (a) Origin
  2. (b) Distribution
  3. (c) Any two characteristics
  4. (d) Utility

Solution (Murrah breed):

  • Origin: Murrah breed originated in the states of Haryana and Punjab (India), particularly in the districts of Rohtak, Hisar, and Jind.
  • Distribution: It is widely distributed across India, especially in Punjab, Haryana, Uttar Pradesh, and also exported to other countries for dairy purposes.
  • Any two characteristics:
    • It has a massive, wedge-shaped body with a deep chest and strong limbs.
    • The horns are short, tightly curved, and spirally twisted inward.
  • Utility: It is primarily a high-yielding dairy breed, known for producing rich, high-fat milk (6-8% fat). It is also used for draught purposes in some regions.

Solution (Bhadawari breed):

  • Origin: Bhadawari breed originated in the Agra and Etawah districts of Uttar Pradesh, India.
  • Distribution: It is mainly found in the central and western parts of Uttar Pradesh, as well as in some adjoining areas of Madhya Pradesh.
  • Any two characteristics:
    • It has a medium-sized, compact body with a copper or light brown coat color.
    • The horns are long, flat, and curved backward, often with a distinctive shape.
  • Utility: It is a good dairy breed, known for producing milk with high fat content (up to 8-10%). It is also valued for its hardiness and ability to thrive on low-quality feed.