RBSE Class 12th 2020 Biology-SS-42-2020 Previous Year Papers

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Paper details

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Board RBSE
Class Class 12th
Exam year 2020
Subject Biology-SS-42-2020
Resource type Previous Year Papers
Category RBSE Previous Year Question Papers
Website RBSE Solution

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Rajasthan Board Class 12th Biology-SS-42-2020 2020 solved Previous Year Question Papers

जीव विज्ञान (BIOLOGY)

उच्च माध्यमिक परीक्षा, 2020

समय : 3.15 घण्टे     पूर्णांक : 56

परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :

GENERAL INSTRUCTIONS TO THE EXAMINEES :

  1. परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न-पत्र पर नामांक अनिवार्यतः लिखें।
    Candidate must write first his / her Roll No. on the question paper compulsorily.
  2. सभी प्रश्न करने अनिवार्य हैं।
    All the questions are compulsory.
  3. प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें।
    Write the answer to each question in the given answer-book only.

No. of Questions — 30     No. of Printed Pages — 8     SS-42-Bio.

परीक्षा निर्देश (Exam Instructions)

(4) जिन प्रश्नों में आन्तरिक खण्ड हैं, उन सभी के उत्तर एक साथ ही लिखें।

For questions having more than one part, the answers to those parts are to be written together in continuity.

(5) प्रश्न-पत्र के हिन्दी व अंग्रेजी रूपांतर में किसी प्रकार की त्रुटि/अंतर/विरोधाभास होने पर हिन्दी भाषा के प्रश्न को ही सही मानें।

If there is any error / difference / contradiction in Hindi & English versions of the question paper, the question of Hindi version should be treated valid.

(6)

खण्ड (Section) प्रश्न संख्या (Q. Nos.) अंक प्रत्येक प्रश्न (Marks per question)
क (A) 1 – 3 1
ख (B) 4 – 24 2
ग (C) 25 – 27 3
घ (D) 28 – 30 4

(7) प्रश्न क्रमांक 4, 27, 28, 29 व 30 में आन्तरिक विकल्प हैं।

Question Nos. 4, 27, 28, 29 and 30 have internal choices.

SS-47-Bio.

खण्ड -अ
SECTION -A

  1. पुष्पके चार भागों के नाम लिखिए।
    Write the name of four flower parts.

    पुष्प के चार मुख्य भाग हैं: बाह्यदलपुंज (Calyx), दलपुंज (Corolla), पुंकेसर (Androecium), और स्त्रीकेसर (Gynoecium)।
    The four main parts of a flower are: Calyx, Corolla, Androecium, and Gynoecium.
  2. मृदा में किस तत्त्व की कमी के कारण मटर में मार्श स्पॉट रोग होता है?
    Marsh spot disease of pea is caused by deficiency of which element in soil?

    मैंगनीज (Manganese) की कमी के कारण मटर में मार्श स्पॉट रोग होता है।
    Marsh spot disease of pea is caused by deficiency of Manganese.
  3. अपारगम्य झिल्ली के दो उदाहरण लिखिए।
    Write two examples of impermeable membrane.

    अपारगम्य झिल्ली के दो उदाहरण हैं: (1) कोशिका भित्ति (Cell wall) – कुछ पदार्थों के लिए, (2) क्यूटिकल (Cuticle) – पौधों की पत्तियों पर।
    Two examples of impermeable membrane are: (1) Cell wall (for certain substances), (2) Cuticle (on plant leaves).
  4. एक वृद्धि अवरोधक हार्मोन का नाम लिखिए।
    Write the name of a growth inhibiting hormone.

    एब्सिसिक अम्ल (Abscisic acid) एक वृद्धि अवरोधक हार्मोन है।
    Abscisic acid is a growth inhibiting hormone.
  5. कपास की गोलक शलभ के प्रति प्रतिरोधी आनुवंशिकतः रूपान्तरित किस्म का नाम लिखिए।
    Write the name of Boll worm resistant genetically modified variety of cotton.

    बीटी कपास (Bt cotton) गोलक शलभ (Boll worm) के प्रति प्रतिरोधी आनुवंशिकतः रूपान्तरित किस्म है।
    Bt cotton is the Boll worm resistant genetically modified variety of cotton.
  6. नारियल तेल प्राप्ति के लिए नारियल फल का कौन सा भाग उपयोगी है?
    Which part of coconut fruit is used for yielding coconut oil?

    नारियल तेल प्राप्ति के लिए नारियल फल का भ्रूणपोष (Endosperm) भाग उपयोगी है।
    The endosperm part of coconut fruit is used for yielding coconut oil.
  7. मानव त्वचा के द्वारा कौन सा विटामिन संश्लेषित किया जाता है?
    Which vitamin is synthesised by human skin?

    मानव त्वचा के द्वारा विटामिन D (Vitamin D) संश्लेषित किया जाता है।
    Vitamin D is synthesised by human skin.
  8. कौन सा दृष्टि रंजक जन्तुओं को मंद प्रकाश में देखने में सहायक है?
    Which eye pigment helps animal to see in dim light?

    रोडोप्सिन (Rhodopsin) दृष्टि रंजक जन्तुओं को मंद प्रकाश में देखने में सहायक है।
    Rhodopsin is the eye pigment that helps animals to see in dim light.

SS-42-Bio.   |   Turn over

9. थायरॉइड ग्रंथि की “C” कोशिकाएँ कौन से हार्मोन का निर्माण करती हैं ?
Which hormone is synthesised by “C” cells of thyroid gland ?

उत्तर / Answer: थायरॉइड ग्रंथि की “C” कोशिकाएँ कैल्सीटोनिन (Calcitonin) हार्मोन का निर्माण करती हैं। यह हार्मोन रक्त में कैल्शियम के स्तर को कम करने में सहायक होता है।

10. कौन से रोग से बचाव के लिए व्यक्ति को टी.ए.बी. का टीका लगवाना चाहिये ?
For prevention of which disease, a person should be vaccinated with T.A.B. ?

उत्तर / Answer: टी.ए.बी. (T.A.B.) का टीका टाइफॉइड (Typhoid) रोग से बचाव के लिए लगवाया जाता है। यह टीका टाइफॉइड बुखार के विरुद्ध प्रतिरक्षा प्रदान करता है।

11. कब्जा संधि का एक उदाहरण लिखिए |
Write an example of hinge joint.

उत्तर / Answer: कब्जा संधि (Hinge joint) का उदाहरण कोहनी का जोड़ (Elbow joint) या घुटने का जोड़ (Knee joint) है। इसमें हड्डियाँ केवल एक ही तल में गति करती हैं, जैसे दरवाजे का कब्जा।

12. “गैस्ट्रलाभवन” को समझाइए |
Explain “Gastrulation”.

उत्तर / Answer: गैस्ट्रलाभवन (Gastrulation) भ्रूण विकास की वह प्रक्रिया है जिसमें ब्लास्टुला (Blastula) तीन रोगाणु परतों (Germ layers) – एक्टोडर्म (Ectoderm), मीसोडर्म (Mesoderm) और एंडोडर्म (Endoderm) – में परिवर्तित होता है। यह प्रक्रिया कोशिकाओं के प्रवासन (Migration) और पुनर्व्यवस्था (Reorganization) द्वारा होती है, जिससे भ्रूण के विभिन्न अंगों और ऊतकों का निर्माण होता है।

13. ई.ई.जी. का पूरा नाम लिखिए |
Write the full form of E.E.G.

उत्तर / Answer: ई.ई.जी. (E.E.G.) का पूरा नाम इलेक्ट्रोएन्सेफलोग्राम (Electroencephalogram) है। यह मस्तिष्क की विद्युतीय गतिविधि को रिकॉर्ड करने की एक विधि है।


खण्ड - ब
SECTION - B

14. जीवाणुभोजी को परिभाषित कीजिए तथा इसका एक उदाहरण लिखिए |
Define bacteriophage and write one example of it.

उत्तर / Answer: जीवाणुभोजी (Bacteriophage) एक प्रकार का विषाणु (Virus) है जो जीवाणुओं (Bacteria) को संक्रमित करता है और उनमें अपनी प्रतिकृति बनाता है। यह जीवाणुओं के लिए विशिष्ट होता है। उदाहरण: T4 फेज (T4 Phage) जो E. coli जीवाणु को संक्रमित करता है।

अथवा / OR
चिकित्सा के क्षेत्र में जैव प्रौद्योगिकी के दो महत्त्व लिखिए |
Write two importance of biotechnology in medical field.

उत्तर / Answer: चिकित्सा के क्षेत्र में जैव प्रौद्योगिकी के दो महत्त्व निम्नलिखित हैं:

  1. रिकॉम्बिनेंट DNA तकनीक द्वारा इंसुलिन का उत्पादन: मानव इंसुलिन को जीवाणुओं में उत्पन्न कर मधुमेह के उपचार में उपयोग किया जाता है।
  2. जीन थेरेपी (Gene Therapy): आनुवंशिक रोगों के उपचार के लिए दोषपूर्ण जीन को सही जीन से बदलना या उसे ठीक करना।

15. मद चक्र तथा आर्त्तव चक्र में अंतर लिखिए |
Write difference between estrus cycle and menstrual cycle.

उत्तर / Answer: मद चक्र (Estrus cycle) और आर्त्तव चक्र (Menstrual cycle) में निम्नलिखित अंतर हैं:

क्रमांक मद चक्र (Estrus Cycle) आर्त्तव चक्र (Menstrual Cycle)
1. यह मुख्यतः गाय, भैंस, कुत्ता आदि स्तनधारियों में पाया जाता है। यह मनुष्य और वानरों में पाया जाता है।
2. इसमें गर्भाशय की अस्तर (Endometrium) का पुनर्अवशोषण होता है, रक्तस्राव नहीं होता। इसमें गर्भाशय की अस्तर टूटकर रक्तस्राव (मासिक धर्म) के रूप में बाहर निकलती है।
3. मद काल (Estrus period) में ही मादा संभोग के लिए ग्रहणशील होती है। मादा पूरे चक्र में संभोग के लिए ग्रहणशील रहती है, विशेषकर ओव्यूलेशन के समय।

प्रश्न 1

मधुमक्खी की एक जाति का नाम लिखिए तथा मधुमक्खी पालन के दो उपकरणों का नाम लिखिए।

Write name of a species of honey-bee and write name of two appliances of apiculture.

(2 अंक)

उत्तर:

  • मधुमक्खी की एक जाति: Apis mellifera (यूरोपीय मधुमक्खी) या Apis indica (भारतीय मधुमक्खी)।
  • मधुमक्खी पालन के दो उपकरण:
    1. धूम्रक (Smoker) – मधुमक्खियों को शांत करने के लिए।
    2. छत्ता फ्रेम (Hive frame) – शहद के छत्ते को संभालने के लिए।

प्रश्न 2

प्रतिबन्ध खण्ड लम्बाई बहुरूपिता चित्रण को समझाइए तथा इसका एक उपयोग लिखिए।

Explain restriction fragment length polymorphism and write one use of it.

(2 अंक)

उत्तर:

प्रतिबन्ध खण्ड लम्बाई बहुरूपिता (RFLP): यह एक आणविक जैविक तकनीक है जिसमें DNA को प्रतिबंध एंजाइमों द्वारा काटा जाता है, जिससे विभिन्न लंबाई के खंड प्राप्त होते हैं। ये खंड जेल वैद्युतकणसंचलन द्वारा अलग किए जाते हैं और विभिन्न व्यक्तियों में इनके पैटर्न में भिन्नता (बहुरूपिता) देखी जाती है।

एक उपयोग: RFLP का उपयोग DNA फिंगरप्रिंटिंग में किया जाता है, जैसे अपराधियों की पहचान या पितृत्व परीक्षण में।

प्रश्न 3

जैवनाशी क्या है? बैसिलस थूरिंजिएंसिस का जैवनाशी के रूप में किस प्रकार उपयोग किया जाता है?

What is biopesticide? How Bacillus thuringiensis is used as biopesticide?

(2 अंक)

उत्तर:

जैवनाशी (Biopesticide): ये प्राकृतिक स्रोतों (जैसे जीवाणु, कवक, पादप) से प्राप्त पदार्थ होते हैं जो कीटों, रोगों या खरपतवारों को नियंत्रित करते हैं। ये रासायनिक कीटनाशकों की तुलना में पर्यावरण के लिए कम हानिकारक होते हैं।

बैसिलस थूरिंजिएंसिस (Bt) का उपयोग: यह जीवाणु एक प्रोटीन (Cry प्रोटीन) उत्पन्न करता है जो कुछ कीटों (जैसे लेपिडोप्टेरा) के लिए विषैला होता है। Bt को फसलों पर छिड़का जाता है या आनुवंशिक रूप से संशोधित फसलों (जैसे Bt कपास) में इसका जीन डाला जाता है, जिससे पौधे स्वयं कीटों से रक्षा करते हैं।

प्रश्न 4

भाग-A में पादप का नाम तथा भाग-B में इससे सम्बन्धित उपयोगी पादप भाग है। निम्न को सुमेलित कीजिए:

Part — A contains the plant name and Part — B contains useful plant part related to them. Match the following:

(2 अंक)

उत्तर:

भाग-A (पादप का नाम) भाग-B (उपयोगी पादप भाग) सुमेलित क्रम
(A) मूंज (Munj) (ii) रेशे हेतु पर्ण (Leaves for fibres) A → ii
(B) लौंग (Clove) (i) शुष्क पुष्प कलिकाएँ (Dry flower buds) B → i
(C) कालीमिर्च (Black pepper) (iv) अपरिपक्व शुष्क ड्रप फल (Immature dry drupe fruit) C → iv
(D) सौंफ (Fennel) (iii) परिपक्व क्रिमोकॉर्प फल (Mature Cremocarp fruit) D → iii

सही सुमेलन: A-ii, B-i, C-iv, D-iii

खण्ड-ब (Section – B)

20. हृदय एवं परिसंचरण तंत्र संबंधी दो रोगों को समझाइए।

Explain two disorders related to heart and circulatory system.

हृदय एवं परिसंचरण तंत्र के दो प्रमुख रोग:

  1. उच्च रक्तचाप (Hypertension): इसमें धमनियों में रक्त का दबाव सामान्य से अधिक हो जाता है। इससे हृदय को रक्त पंप करने में अधिक मेहनत करनी पड़ती है और हृदयाघात का खतरा बढ़ जाता है।
  2. हृदयाघात (Myocardial Infarction / Heart Attack): इसमें हृदय की मांसपेशियों को रक्त की आपूर्ति करने वाली कोरोनरी धमनी में रुकावट आ जाती है, जिससे हृदय की मांसपेशियों की कोशिकाएं मरने लगती हैं।

21. क्रियाधार के आधार पर एन्जाइमों की नामकरण पद्धति को समझाइए।

Explain nomenclature of enzyme on the basis of chemical reaction.

एन्जाइमों का नामकरण क्रियाधार (Substrate) के आधार पर:

एन्जाइमों का नामकरण उनके क्रियाधार के अंत में "-एज़" (ase) प्रत्यय जोड़कर किया जाता है। उदाहरण के लिए:

  • यदि क्रियाधार यूरिया है, तो एन्जाइम यूरेज़ कहलाता है।
  • यदि क्रियाधार लैक्टोज है, तो एन्जाइम लैक्टेज़ कहलाता है।
  • यदि क्रियाधार माल्टोज है, तो एन्जाइम माल्टेज़ कहलाता है।

इस प्रकार, एन्जाइम का नाम उसके क्रियाधार के नाम पर रखा जाता है।

22. क्लिक्निंग किसे कहते हैं? मानव की भ्रूणीय अवस्थाओं में तृतीय से छठे सप्ताह के गर्भकाल में कौन से अंगों का निर्माण होता है?

What is Kliekning? In human embryonic stages, which organs are formed during third to sixth week of gestation?

क्लिक्निंग (Cleavage): यह एक कोशिकीय युग्मनज (Zygote) का बार-बार माइटोसिस विभाजन द्वारा अनेक कोशिकाओं (ब्लास्टोमियर) में विभाजित होने की प्रक्रिया है। इसके परिणामस्वरूप मोरुला और फिर ब्लास्टुला का निर्माण होता है।

तृतीय से छठे सप्ताह में अंगों का निर्माण (Organogenesis):

  • तीसरे सप्ताह: तंत्रिका तंत्र (न्यूरल ट्यूब) का निर्माण शुरू होता है।
  • चौथे सप्ताह: हृदय का निर्माण और धड़कन शुरू होती है। आंखों और कानों की कलियां बनने लगती हैं।
  • पांचवें सप्ताह: हाथ-पैरों की कलियां (Limb buds) दिखाई देने लगती हैं।
  • छठे सप्ताह: मस्तिष्क के विभिन्न भाग, यकृत, गुर्दे और फेफड़ों का विकास शुरू होता है।

23. सह-प्रभाविता को उदाहरण द्वारा समझाइए।

Explain co-dominance with example.

सह-प्रभाविता (Co-dominance): यह एक प्रकार की आनुवंशिक अंतःक्रिया है जिसमें विषमयुग्मजी (Heterozygous) अवस्था में दोनों एलील (Alleles) अपना-अपना प्रभाव अलग-अलग दिखाते हैं। इसमें कोई भी एलील दूसरे पर प्रभावी नहीं होता, बल्कि दोनों का प्रभाव संतान में एक साथ देखने को मिलता है।

उदाहरण: मनुष्य में ABO रक्त समूह प्रणाली। इसमें IA और IB एलील एक-दूसरे पर सह-प्रभावी होते हैं। यदि किसी व्यक्ति में दोनों एलील (IAIB) हों, तो उसका रक्त समूह AB होता है, जिसमें लाल रक्त कोशिकाओं पर A और B दोनों प्रकार के प्रतिजन (Antigens) पाए जाते हैं।

24. टिटनेस रोग के रोगकारक का नाम लिखिए। इस रोग का एक लक्षण व बचाव का एक उपाय बताइए।

Write the pathogen of Tetanus. Mention one symptom and a preventive measure of it.

  • रोगकारक (Pathogen): क्लॉस्ट्रीडियम टिटैनी (Clostridium tetani) – एक जीवाणु।
  • लक्षण (Symptom): जबड़े की मांसपेशियों में ऐंठन (Lockjaw) या शरीर की मांसपेशियों में कठोरता व ऐंठन।
  • बचाव का उपाय (Preventive measure): टिटनेस का टीका (Tetanus vaccine / टिटनेस टॉक्सॉइड) लगवाना।

खण्ड-स (Section – C)

25. कोशिकीय भ्रूणपोष की संरचना का सचित्र वर्णन कीजिए।

Describe the structure of cellular endosperm with diagram.

कोशिकीय भ्रूणपोष (Cellular Endosperm): यह भ्रूणपोष विकास का एक प्रकार है जिसमें द्वितीयक केंद्रक का विभाजन कोशिका भित्ति के निर्माण के साथ होता है। प्रत्येक विभाजन के बाद कोशिका भित्ति बनती है, जिससे भ्रूणपोष कोशिकीय रूप में विकसित होता है।

संरचना:

  • प्रारंभ में, द्वितीयक केंद्रक (Triploid nucleus) विभाजित होता है और प्रत्येक विभाजन के साथ कोशिका भित्ति का निर्माण होता है।
  • इस प्रकार बनी कोशिकाएं भ्रूणपोष ऊतक का निर्माण करती हैं।
  • यह भ्रूणपोष प्रायः संपूर्ण भ्रूणकोष को भर देता है और भ्रूण के विकास के लिए पोषण प्रदान करता है।
  • उदाहरण: नारियल के गूदे (Coconut kernel) में कोशिकीय भ्रूणपोष पाया जाता है।

(चित्र: एक कोशिकीय भ्रूणपोष का नामांकित चित्र बनाएं जिसमें कोशिकाएं, कोशिका भित्ति और भ्रूण दिखाया गया हो।)

26. जीन-विनिमय को परिभाषित कीजिए। जीन-विनिमय को सचित्र समझाइए।

Define crossing over. Explain crossing over with diagram.

जीन-विनिमय (Crossing Over): यह अर्धसूत्री विभाजन (Meiosis) के प्रथम प्रावस्था (Prophase I) में होने वाली एक प्रक्रिया है, जिसमें समजात गुणसूत्रों (Homologous chromosomes) के क्रोमैटिडों के बीच आनुवंशिक पदार्थ (DNA) का आदान-प्रदान होता है। इससे नए जीन संयोजन (Recombination) बनते हैं।

सचित्र व्याख्या:

  1. अर्धसूत्री विभाजन के प्रारंभ में, समजात गुणसूत्र जोड़े बनाते हैं (Synapsis)।
  2. प्रत्येक जोड़े में चार क्रोमैटिड (Tetrad) होते हैं।
  3. दो गैर-बहन क्रोमैटिड (Non-sister chromatids) एक-दूसरे को पार करते हैं और उनके बीच संपर्क बिंदु बनता है जिसे काइआज़्मा (Chiasma) कहते हैं।
  4. काइआज़्मा पर क्रोमैटिड टूट जाते हैं और टूटे हुए भाग आपस में जुड़ जाते हैं, जिससे जीनों का आदान-प्रदान होता है।
  5. इस प्रक्रिया के परिणामस्वरूप, नए संयोजन वाले गुणसूत्र बनते हैं जो माता-पिता से भिन्न होते हैं।

(चित्र: समजात गुणसूत्रों का जोड़ा, काइआज़्मा का बनना, और जीन विनिमय के बाद नए संयोजन वाले गुणसूत्र दिखाएं।)

27. परासरण को समझाइए तथा थिसेल कीप द्वारा परासरण प्रदर्शन का नामांकित चित्र बनाइए।

अथवा

एन्जाइम क्रियाविधि के ताला कुंजी सिद्धान्त को समझाइए तथा प्रतिरूप का नामांकित चित्र बनाइए।

Explain the osmosis and draw a labelled diagram of demonstration of osmosis by thistle funnel.

OR

Explain lock and key theory of enzyme action and draw a labelled diagram of model.

परासरण (Osmosis): यह एक विशेष प्रकार का विसरण (Diffusion) है जिसमें विलायक (Solvent) के अणु अर्धपारगम्य झिल्ली (Semipermeable membrane) के माध्यम से कम सांद्रता वाले विलयन से अधिक सांद्रता वाले विलयन की ओर गति करते हैं। यह तब तक जारी रहता है जब तक दोनों ओर सांद्रता बराबर न हो जाए।

थिसेल कीप द्वारा परासरण प्रदर्शन:

  • एक थिसेल कीप (Thistle funnel) के मुख पर अर्धपारगम्य झिल्ली (जैसे सेलोफेन या पादप कोशिका झिल्ली) बांध दी जाती है।
  • कीप में चीनी या नमक का गाढ़ा विलयन भर दिया जाता है।
  • कीप को एक बीकर में रखे शुद्ध जल में इस प्रकार डुबोया जाता है कि झिल्ली वाला भाग पानी में रहे।
  • कुछ समय बाद, परासरण के कारण जल के अणु झिल्ली से होकर कीप के अंदर गाढ़े विलयन में प्रवेश करते हैं, जिससे कीप में विलयन का स्तर ऊपर चढ़ने लगता है।

(चित्र: थिसेल कीप, बीकर, जल, गाढ़ा विलयन, अर्धपारगम्य झिल्ली, और विलयन स्तर में वृद्धि दर्शाता नामांकित चित्र बनाएं।)


अथवा (OR)

एन्जाइम क्रियाविधि का ताला-कुंजी सिद्धांत (Lock and Key Theory):

यह सिद्धांत एमिल फिशर (Emil Fischer) ने 1894 में प्रस्तावित किया था। इसके अनुसार, एन्जाइम की सतह पर एक विशिष्ट आकार का सक्रिय स्थल (Active site) होता है, जो एक ताले (Lock) की तरह होता है। क्रियाधार (Substrate) एक कुंजी (Key) की तरह होता है जो इस ताले में बिल्कुल फिट

खण्ड - द् (SECTION - D)

प्रश्न 28.

(i) हैच-स्लैक चक्र कौन से पादपों में होता है?

(ii) C₄ चक्र की क्रियाविधि को समझाइए।

(iii) C₄ चक्र का आरेख चित्र बनाइए।

(4+2+1=7)

अथवा

(i) अमोनीकरण किसे कहते हैं?

(ii) नाइट्रीकरण व विनाइट्रीकरण को समझाइए।

(iii) नाइट्रोजन चक्र का आरेख चित्र बनाइए।

(4+2+1=7)

(i) In which plants Hatch-Slack cycle takes place?

(ii) Explain mechanism of C₄ cycle.

(iii) Draw a line diagram of C₄ cycle.

(4+2+1=7)

OR

(i) What is ammonification?

(ii) Explain nitrification and denitrification.

(iii) Draw a line diagram of nitrogen cycle.

(4+2+1=7)

उत्तर (Answer):

(i) हैच-स्लैक चक्र (C₄ चक्र) C₄ पादपों में होता है, जैसे मक्का, गन्ना, ज्वार, बाजरा आदि। ये पादप उच्च तापमान और शुष्क परिस्थितियों में भी प्रकाश-संश्लेषण कुशलतापूर्वक करते हैं।

(ii) C₄ चक्र की क्रियाविधि: इसमें दो प्रकार की कोशिकाएँ शामिल होती हैं - मीसोफिल कोशिकाएँ और बंडल शीथ कोशिकाएँ। मीसोफिल कोशिकाओं में CO₂ को फॉस्फोइनॉल पाइरूवेट (PEP) से जोड़कर ऑक्सैलोएसिटिक अम्ल (OAA) बनता है, जो मैलेट या एस्पार्टेट में बदलकर बंडल शीथ कोशिकाओं में जाता है। वहाँ यह CO₂ छोड़ता है, जो कैल्विन चक्र (C₃ चक्र) में प्रवेश करती है।

(iii) C₄ चक्र का आरेख: (रेखीय आरेख - मीसोफिल कोशिका → OAA → मैलेट → बंडल शीथ कोशिका → CO₂ → कैल्विन चक्र → ग्लूकोज)


प्रश्न 29.

(i) मानव कर्ण की आंतरिक संरचना का नामांकित चित्र बनाइए।

(ii) सुनने की क्रियाविधि को समझाइए।

(iii) कर्ण के कोई दो रोगों/दोषों का नाम लिखिए।

(4+2+1=7)

अथवा

(i) प्रतिवर्ती क्रिया को परिभाषित कीजिए।

(ii) प्रतिवर्ती क्रिया की क्रियाविधि को समझाइए।

(iii) प्रतिवर्ती चाप का रेखीय आरेख बनाइए।

(4+2+1=7)

(i) Draw a labelled diagram of internal structure of human ear.

(ii) Explain the mechanism of hearing.

(iii) Write any two diseases/defects of ear.

(4+2+1=7)

OR

(i) Define reflex action.

(ii) Explain mechanism of reflex action.

(iii) Draw a line diagram of reflex action.

(4+2+1=7)

उत्तर (Answer):

(i) मानव कर्ण की आंतरिक संरचना: इसमें तीन भाग होते हैं - बाह्य कर्ण (पिन्ना, कर्ण नलिका, कर्ण पटह), मध्य कर्ण (हथौड़ा, निहाई, रकाब अस्थियाँ, यूस्टेशियन नलिका), और आंतरिक कर्ण (अर्धवृत्ताकार नलिकाएँ, कोक्लिया, कॉर्टी अंग)।

(ii) सुनने की क्रियाविधि: ध्वनि तरंगें पिन्ना द्वारा एकत्रित होकर कर्ण नलिका से होती हुई कर्ण पटह तक पहुँचती हैं। कर्ण पटह के कंपन से मध्य कर्ण की अस्थियाँ (हथौड़ा, निहाई, रकाब) कंपित होती हैं। ये कंपन अंडाकार खिड़की के माध्यम से कोक्लिया में पहुँचते हैं, जहाँ कॉर्टी अंग में बाल कोशिकाएँ उत्तेजित होती हैं। ये उत्तेजना श्रवण तंत्रिका के माध्यम से मस्तिष्क तक पहुँचती है, जहाँ ध्वनि का अनुभव होता है।

(iii) कर्ण के दो रोग/दोष: (1) ओटिटिस मीडिया (मध्य कर्ण का संक्रमण), (2) बहरापन (श्रवण हानि)।

अथवा (OR) उत्तर:

(i) प्रतिवर्ती क्रिया: यह एक तीव्र, अनैच्छिक और स्वचालित क्रिया है जो किसी उद्दीपन के प्रति शरीर की तत्काल प्रतिक्रिया होती है, जैसे गर्म वस्तु से हाथ हटाना।

(ii) प्रतिवर्ती क्रिया की क्रियाविधि: उद्दीपन ग्राही (रिसेप्टर) को उत्तेजित करता है, जो संवेदी तंत्रिका के माध्यम से संकेत रीढ़ की हड्डी (या मस्तिष्क) तक भेजता है। वहाँ यह संकेत एक अंतर्ग्रथन (सिनैप्स) के माध्यम से मोटर तंत्रिका में स्थानांतरित होता है, जो प्रभावक (मांसपेशी या ग्रंथि) तक संकेत पहुँचाकर प्रतिक्रिया उत्पन्न करता है।

(iii) प्रतिवर्ती चाप का रेखीय आरेख: (रेखीय आरेख - उद्दीपन → ग्राही → संवेदी तंत्रिका → रीढ़ की हड्डी (अंतर्ग्रथन) → मोटर तंत्रिका → प्रभावक → प्रतिक्रिया)

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प्रश्न 30

(अ) अंतःश्वसन एवं निःश्वसन की क्रियाविधि का नामांकित चित्र बनाइए।

(ब) अंतःश्वसन एवं निःश्वसन की क्रियाविधि को समझाइए।

अथवा

(अ) मानव हृदय की आन्तरिक संरचना का नामांकित चित्र बनाइए।

(ब) हृदय एवं परिसंचरण तंत्र सम्बन्धी किन्हीं तीन रोगों का वर्णन कीजिए।

विकल्प 1: अंतःश्वसन एवं निःश्वसन

(अ) नामांकित चित्र

अंतःश्वसन (Inspiration) और निःश्वसन (Expiration) की क्रियाविधि का चित्र निम्नलिखित भागों को दर्शाता है:

  • फेफड़े (Lungs) - वायुकोश (Alveoli) सहित
  • डायाफ्राम (Diaphragm) - अंतःश्वसन में नीचे की ओर धंसता है, निःश्वसन में ऊपर उठता है
  • पसलियाँ (Ribs) - अंतःश्वसन में ऊपर और बाहर की ओर जाती हैं, निःश्वसन में नीचे और अंदर
  • अंतरापसलीय पेशियाँ (Intercostal muscles) - बाह्य पेशियाँ अंतःश्वसन में सिकुड़ती हैं, आंतरिक पेशियाँ निःश्वसन में
  • वक्ष गुहा (Thoracic cavity) - आयतन में परिवर्तन दर्शाता है

(चित्र में तीरों द्वारा वायु के प्रवाह और पेशियों की गति को दर्शाया जाता है।)

(ब) क्रियाविधि का विवरण

अंतःश्वसन (Inspiration) - सक्रिय प्रक्रिया
  1. बाह्य अंतरापसलीय पेशियाँ (External intercostal muscles) सिकुड़ती हैं, जिससे पसलियाँ ऊपर और बाहर की ओर उठती हैं।
  2. डायाफ्राम (Diaphragm) सिकुड़कर नीचे की ओर धंसता है (चपटा हो जाता है)।
  3. इससे वक्ष गुहा (Thoracic cavity) का आयतन बढ़ जाता है।
  4. वक्ष गुहा में दाब कम (Intrapleural pressure negative) हो जाता है, जो वायुमंडलीय दाब से कम होता है।
  5. वायुमंडलीय दाब अधिक होने के कारण वायु फेफड़ों में प्रवेश करती है (वायुकोशों तक पहुँचती है)।
निःश्वसन (Expiration) - निष्क्रिय प्रक्रिया (सामान्यतः)
  1. बाह्य अंतरापसलीय पेशियाँ शिथिल हो जाती हैं, पसलियाँ अपनी मूल स्थिति में वापस आ जाती हैं (नीचे और अंदर)।
  2. डायाफ्राम शिथिल होकर ऊपर उठता है (गुंबदाकार हो जाता है)।
  3. वक्ष गुहा का आयतन घट जाता है।
  4. वक्ष गुहा में दाब बढ़ जाता है (वायुमंडलीय दाब से अधिक)।
  5. अधिक दाब के कारण वायु फेफड़ों से बाहर निकल जाती है।

नोट: गहरी साँस लेने (Forced expiration) में आंतरिक अंतरापसलीय पेशियाँ और उदर की पेशियाँ भी सक्रिय होती हैं।


विकल्प 2: मानव हृदय एवं परिसंचरण तंत्र के रोग

(अ) मानव हृदय की आन्तरिक संरचना का नामांकित चित्र

मानव हृदय की आन्तरिक संरचना में निम्नलिखित भाग शामिल हैं:

  • अलिंद (Atria) - दायाँ अलिंद (Right atrium) और बायाँ अलिंद (Left atrium)
  • निलय (Ventricles) - दायाँ निलय (Right ventricle) और बायाँ निलय (Left ventricle)
  • कपाट (Valves) - त्रिवलन कपाट (Tricuspid valve), द्विवलन/माइट्रल कपाट (Bicuspid/Mitral valve), फुफ्फुसीय कपाट (Pulmonary valve), महाधमनी कपाट (Aortic valve)
  • रक्त वाहिकाएँ - महाशिरा (Vena cava), फुफ्फुसीय शिरा (Pulmonary vein), फुफ्फुसीय धमनी (Pulmonary artery), महाधमनी (Aorta)
  • पट (Septum) - अंतरालिंदी पट (Interatrial septum) और अंतरानिलय पट (Interventricular septum)
  • पेसमेकर (SA node) और AV node

(चित्र में रक्त प्रवाह की दिशा तीरों द्वारा दर्शाई जाती है।)

(ब) हृदय एवं परिसंचरण तंत्र से सम्बन्धित तीन रोग

1. उच्च रक्तचाप (Hypertension)

कारण: धमनियों में रक्त का दाब सामान्य से अधिक होना (140/90 mmHg से ऊपर)। तनाव, मोटापा, नमक का अधिक सेवन, धूम्रपान, आनुवंशिकता।

लक्षण: सिरदर्द, चक्कर आना, साँस फूलना, धुंधला दिखना।

प्रभाव: हृदय पर अतिरिक्त भार, हृदयाघात, स्ट्रोक, गुर्दे की क्षति का खतरा बढ़ जाता है।

2. हृदयाघात (Myocardial Infarction / Heart Attack)

कारण: कोरोनरी धमनियों में रुकावट (रक्त का थक्का या एथेरोस्क्लेरोसिस) के कारण हृदय की मांसपेशी को ऑक्सीजन की आपूर्ति बंद हो जाना।

लक्षण: सीने में तीव्र दर्द (बाएँ हाथ, जबड़े, पीठ तक फैलता है), पसीना आना, मतली, साँस लेने में कठिनाई।

प्रभाव: हृदय की मांसपेशी के ऊतक मर जाते हैं, हृदय की पम्पिंग क्षमता कम हो जाती है, जानलेवा हो सकता है।

3. एथेरोस्क्लेरोसिस (Atherosclerosis)

कारण: धमनियों की भीतरी दीवारों पर वसा, कोलेस्ट्रॉल, कैल्शियम और अन्य पदार्थों का जमा होना (प्लाक बनना), जिससे धमनियाँ संकरी और कठोर हो जाती हैं।

लक्षण: प्रारंभ में कोई लक्षण नहीं; बाद में सीने में दर्द (एनजाइना), पैरों में दर्द, साँस फूलना।

प्रभाव: रक्त प्रवाह बाधित होता है, जिससे हृदयाघात, स्ट्रोक, परिधीय धमनी रोग का खतरा बढ़ जाता है।