RBSE Class 12th 2020 Chemistry-SS-41-2020 Previous Year Papers

You opened the RBSE Class 12th 2020 Chemistry-SS-41-2020 Previous Year Papers page — a focused place to read the real previous year question paper for that subject and year. RBSE Solution keeps exam-year sets together so you can practise the same cycle your seniors faced.

Previous year papers reward patience: read instructions, note mark distribution, then attempt questions before peeking at solutions elsewhere on the site. This URL always loads the same free previous year papers content for Chemistry-SS-41-2020 (2020).

Use the details table to confirm class and year, then scroll to the paper images or PDF below. More subjects from 2020 are linked later on this page.

Paper details

Quick reference for this previous year papers page — confirm board, class, and year & subject before you study.

Board RBSE
Class Class 12th
Exam year 2020
Subject Chemistry-SS-41-2020
Resource type Previous Year Papers
Category RBSE Previous Year Question Papers
Website RBSE Solution

The table summarises this Previous Year Papers resource. Confirm RBSE, Class 12th, year 2020, and subject Chemistry-SS-41-2020 before studying.

RBSE Solution organises previous year papers so each URL carries chapter-specific guidance — better for students and for search engines than one generic paragraph for the whole class.

How to practise with this question paper

Stage one: read the Chemistry-SS-41-2020 question paper from 2020 without a timer and highlight command words — explain, prove, calculate, discuss. Stage two: attempt selected questions closed-book. Stage three: compare with solutions or teacher feedback.

Previous Year Papers work best when you log mistakes by topic, not only by question number. That log becomes your revision index before pre-boards.

RBSE Class 12th 2020 Chemistry-SS-41-2020

Scroll through the Previous Year Papers pages for Chemistry-SS-41-2020 (2020).

RBSE Class 12th 2020 Chemistry-SS-41-2020 Previous Year Papers 0
https://rbsesolution.com
RBSE Class 12th 2020 Chemistry-SS-41-2020 Previous Year Papers 1
https://rbsesolution.com
RBSE Class 12th 2020 Chemistry-SS-41-2020 Previous Year Papers 2
https://rbsesolution.com
RBSE Class 12th 2020 Chemistry-SS-41-2020 Previous Year Papers 3
https://rbsesolution.com
RBSE Class 12th 2020 Chemistry-SS-41-2020 Previous Year Papers 4
https://rbsesolution.com
RBSE Class 12th 2020 Chemistry-SS-41-2020 Previous Year Papers 5
https://rbsesolution.com
RBSE Class 12th 2020 Chemistry-SS-41-2020 Previous Year Papers 6
https://rbsesolution.com
RBSE Class 12th 2020 Chemistry-SS-41-2020 Previous Year Papers 7
https://rbsesolution.com
RBSE Class 12th 2020 Chemistry-SS-41-2020 Previous Year Papers 8
https://rbsesolution.com
RBSE Class 12th 2020 Chemistry-SS-41-2020 Previous Year Papers 9
https://rbsesolution.com
RBSE Class 12th 2020 Chemistry-SS-41-2020 Previous Year Papers 10
https://rbsesolution.com

Rajasthan Board Class 12th Chemistry-SS-41-2020 2020 solved Previous Year Question Papers

रसायन विज्ञान (CHEMISTRY)

उच्च माध्यमिक परीक्षा, 2020

समय : 3¼ घण्टे    पूर्णांक : 56

नोट : समीकरणों को आवश्यक शर्तों सहित संतुलित रूप में लिखिए।

परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :
GENERAL INSTRUCTIONS TO THE EXAMINEES :

  1. परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न-पत्र पर नामांक अनिवार्यतः लिखें।
    Candidates must write first his / her Roll No. on the question paper compulsorily.
  2. सभी प्रश्न करने अनिवार्य हैं।
    All the questions are compulsory.
  3. प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें।
    Write the answer to each question in the given answer-book only.

No. of Questions — 30    No. of Printed Pages — 11    [ S S-4 ] -Chem.

SS-4-Chemistry    [ Turn over ]

परीक्षा निर्देश (Exam Instructions)

(4) जिन प्रश्नों में आन्तरिक खण्ड हैं, उन सभी के उत्तर एक साथ ही लिखें।

For questions having more than one part, the answers to those parts are to be written together in continuity.

(5) प्रश्न-पत्र के हिन्दी व अंग्रेजी रूपांतर में किसी प्रकार की त्रुटि/अंतर/विरोधाभास होने पर हिन्दी भाषा के प्रश्न को ही सही मानें।

If there is any error / difference / contradiction in Hindi & English versions of the question paper, the question of Hindi version should be treated valid.

(6)

खण्ड (Section) प्रश्न संख्या (Q. Nos.) अंक प्रति प्रश्न (Marks per question)
अ (A) 1-3 1
ब (B) 4-24 2
स (C) 25-27 3
द (D) 28-30 4

(7) प्रश्न संख्या 2, 27, 28, 29 व 30 में आन्तरिक विकल्प हैं।

Question Nos. 2, 27, 28, 29 and 30 have internal choices.

SS-4-Chemistry

खण्ड -अ

SECTION - A

  1. काय-केद्धित घनीय संरचना में संकुलन दक्षता का मान लिखिए।

    Write the value of packing efficiency in body-centred cubic structure.

    उत्तर: काय-केद्रित घनीय (BCC) संरचना में संकुलन दक्षता का मान 68% होता है।

  2. परासरण की परिभाषा लिखिए।

    Write definition of Osmosis.

    उत्तर: परासरण (Osmosis) वह प्रक्रिया है जिसमें विलायक के अणु अर्धपारगम्य झिल्ली के माध्यम से विलयन के उच्च सांद्रण की ओर स्वतः गति करते हैं।

  3. कैडमियम-निकैल संचायक सेल में ऐनोड पर होने वाली अभिक्रिया का रासायनिक समीकरण लिखिए।

    Write the chemical equation of reaction taking place on the anode in cadmium-nickel storage cell.

    उत्तर: कैडमियम-निकैल संचायक सेल में ऐनोड पर होने वाली अभिक्रिया का रासायनिक समीकरण:

    Cd + 2OH → Cd(OH)2 + 2e

  4. वैद्युतअपघटन का फैराडे का प्रथम नियम लिखिए।

    Write Faraday’s first law of electrolysis.

    उत्तर: फैराडे का प्रथम नियम: किसी विद्युतअपघटन में इलेक्ट्रोड पर मुक्त होने वाले पदार्थ का द्रव्यमान (m) सेल में प्रवाहित विद्युत आवेश (Q) के समानुपाती होता है।

    m ∝ Q या m = ZQ

    जहाँ Z विद्युत रासायनिक तुल्यांक है।

  5. कोलॉइडी विलयन बनाने की विद्युतीय परिक्षेपण विधि का नामांकित चित्र बनाइए।

    Draw a labelled diagram of electrical dispersion method for preparation of colloidal solution.

    उत्तर: विद्युतीय परिक्षेपण विधि (Bredig's Arc Method) में दो धातु के इलेक्ट्रोडों को ठंडे जल में डुबोकर उनके बीच विद्युत चाप उत्पन्न किया जाता है। चाप के कारण धातु वाष्पित होकर संघनित होती है और कोलॉइडी कण बनाती है।

    (चित्र में दिखाया गया है: एक बीकर में जल, दो धातु इलेक्ट्रोड, विद्युत स्रोत से जुड़े, इलेक्ट्रोडों के बीच चाप, और कोलॉइडी विलयन का निर्माण।)

  6. [Ni(CO)4] में Ni की ऑक्सीकरण अवस्था लिखिए।

    Write oxidation state of Ni in [Ni(CO)4].

    उत्तर: [Ni(CO)4] में Ni की ऑक्सीकरण अवस्था 0 (शून्य) है।

    व्याख्या: CO एक उदासीन लिगन्ड है, इसलिए संकुल का कुल आवेश शून्य है, अतः Ni की ऑक्सीकरण अवस्था 0 होती है।

  7. उभयदंती लिगन्ड की परिभाषा लिखिए।

    Write definition of ambidentate ligand.

    उत्तर: उभयदंती लिगन्ड (Ambidentate ligand) वे लिगन्ड होते हैं जिनमें दो या दो से अधिक दाता परमाणु होते हैं, लेकिन किसी समय केवल एक परमाणु के माध्यम से धातु आयन से जुड़ते हैं। उदाहरण: NO2 (नाइट्राइट आयन) N या O परमाणु से जुड़ सकता है।

  8. वुर्ट्ज अभिक्रिया का रासायनिक समीकरण लिखिए।

    Write chemical equation of Wurtz reaction.

    उत्तर: वुर्ट्ज अभिक्रिया में दो एल्किल हैलाइड सोडियम धातु की उपस्थिति में शुष्क ईथर में अभिक्रिया करके उच्च एल्केन बनाते हैं।

    2R–X + 2Na → R–R + 2NaX

    उदाहरण: 2CH3Cl + 2Na → CH3–CH3 + 2NaCl

  9. सक्सीनिक अम्ल का IUPAC नाम लिखिए।

    Write IUPAC name of succinic acid.

    उत्तर: सक्सीनिक अम्ल का IUPAC नाम ब्यूटेन-1,4-डाइओइक अम्ल (Butane-1,4-dioic acid) है।

  10. एथिल आइसोथायोसायनेट का रासायनिक सूत्र लिखिए।

    Write chemical formula of ethyl isothiocyanate.

    उत्तर: एथिल आइसोथायोसायनेट का रासायनिक सूत्र C2H5NCS या CH3CH2N=C=S है।

खण्ड - अ (Section - A)

प्रश्न 11.

उस ऐमीनो अम्ल का नाम लिखिए जो प्रकाशिक रूप से अक्रिय होता है।

Write the name of amino acid which is optically inactive.

उत्तर: ग्लाइसिन (Glycine) वह ऐमीनो अम्ल है जो प्रकाशिक रूप से अक्रिय होता है। इसका सूत्र H₂N-CH₂-COOH है। इसमें कोई चिरल कार्बन परमाणु नहीं होता, इसलिए यह प्रकाशिक समावयवता नहीं दर्शाता।

प्रश्न 12.

डैक्रॉन बहुलक की एकलक इकाइयाँ लिखिए।

Write monomer units of polymer dacron.

उत्तर: डैक्रॉन बहुलक की एकलक इकाइयाँ निम्नलिखित हैं:

  1. एथिलीन ग्लाइकॉल (Ethylene glycol) - HO-CH₂-CH₂-OH
  2. टेरेफ्थैलिक अम्ल (Terephthalic acid) - HOOC-C₆H₄-COOH

ये दोनों एकलक संघनन बहुलकीकरण द्वारा डैक्रॉन बनाते हैं।

प्रश्न 13.

प्रकाशीय समावयवता की परिभाषा लिखिए।

Write definition of optical isomerism.

उत्तर: प्रकाशीय समावयवता (Optical isomerism) वह समावयवता है जिसमें यौगिकों के अणु सूत्र और संरचना समान होते हैं, लेकिन वे समतल-ध्रुवित प्रकाश के तल को विपरीत दिशाओं में घुमाते हैं। ऐसे समावयवी प्रकाशीय समावयवी (optical isomers) कहलाते हैं। यह गुण चिरल कार्बन परमाणु (चार भिन्न समूहों से जुड़ा कार्बन) की उपस्थिति के कारण होता है।


खण्ड - ब (Section - B)

प्रश्न 4.

(a) क्रिस्टलीय एवं अक्रिस्टलीय ठोसों में कोई दो अंतर लिखिए।

(b) अशुद्धता दोष को दर्शाने वाला चित्र बनाइए।

(a) Write any two differences between crystalline and amorphous solids.

(b) Draw the diagram showing impurity defect.

उत्तर (a): क्रिस्टलीय एवं अक्रिस्टलीय ठोसों में दो अंतर:

क्रिस्टलीय ठोस (Crystalline solids) अक्रिस्टलीय ठोस (Amorphous solids)
1. इनमें कणों की व्यवस्था नियमित एवं आवर्ती होती है। 1. इनमें कणों की व्यवस्था अनियमित होती है।
2. ये एक निश्चित गलनांक रखते हैं। 2. ये एक निश्चित गलनांक नहीं रखते, बल्कि तापमान की एक सीमा में पिघलते हैं।

उत्तर (b): अशुद्धता दोष (Impurity defect) का चित्र:

अशुद्धता दोष में, किसी विदेशी आयन (अशुद्धि) को क्रिस्टल जालक में शामिल किया जाता है। उदाहरण के लिए, NaCl क्रिस्टल में Sr²⁺ आयन मिलाने पर, प्रत्येक Sr²⁺ आयन दो Na⁺ आयनों के स्थान पर आता है, जिससे एक Na⁺ आयन का रिक्त स्थान (vacancy) उत्पन्न होता है।

चित्र (Diagram):
Na⁺  Cl⁻  Na⁺  Cl⁻
Cl⁻  Sr²⁺ Cl⁻  ☐   (☐ = रिक्त स्थान / vacancy)
Na⁺  Cl⁻  Na⁺  Cl⁻

प्रश्न 5.

27°C ताप पर यूरिया के 0.01 M विलयन का परासरण दाब ज्ञात कीजिए। (R = 0.0821 L atm K⁻¹ mol⁻¹)

Calculate the osmotic pressure of 0.01 M solution of urea at 27 °C temperature. (R = 0.0821 L atm K⁻¹ mol⁻¹)

हल:

परासरण दाब (π) का सूत्र: π = CRT

जहाँ, C = सांद्रता (M), R = गैस स्थिरांक, T = तापमान (K)

दिया गया है:

  • C = 0.01 M
  • T = 27°C = 27 + 273 = 300 K
  • R = 0.0821 L atm K⁻¹ mol⁻¹

π = 0.01 × 0.0821 × 300

π = 0.01 × 24.63

π = 0.2463 atm

अतः, 27°C पर 0.01 M यूरिया विलयन का परासरण दाब 0.2463 atm है।

प्रश्न 6.

यदि 298 K पर CH₃COOH, HCl एवं NaCl के लिए अनन्त तनुता पर मोलर चालकताओं के मान क्रमशः 390.5, 425.4 एवं 126.4 S cm² mol⁻¹ हैं तो CH₃COONa की अनन्त तनुता पर मोलर चालकता ज्ञात कीजिए।

If the value of molar conductivities at infinite dilution for CH₃COOH, HCl and NaCl are 390.5, 425.4 and 126.4 S cm² mol⁻¹ respectively at 298 K. Calculate the molar conductivity at infinite dilution of CH₃COONa.

हल:

कोलराउश के नियम (Kohlrausch's law) के अनुसार, अनन्त तनुता पर मोलर चालकता आयनों की व्यक्तिगत चालकताओं का योग होती है।

दिया गया है:

  • Λ°(CH₃COOH) = 390.5 S cm² mol⁻¹
  • Λ°(HCl) = 425.4 S cm² mol⁻¹
  • Λ°(NaCl) = 126.4 S cm² mol⁻¹

हम जानते हैं:

Λ°(CH₃COOH) = Λ°(H⁺) + Λ°(CH₃COO⁻) = 390.5 ...(1)

Λ°(HCl) = Λ°(H⁺) + Λ°(Cl⁻) = 425.4 ...(2)

Λ°(NaCl) = Λ°(Na⁺) + Λ°(Cl⁻) = 126.4 ...(3)

हमें ज्ञात करना है: Λ°(CH₃COONa) = Λ°(Na⁺) + Λ°(CH₃COO⁻)

समीकरण (1) + (3) - (2) करने पर:

[Λ°(H⁺) + Λ°(CH₃COO⁻)] + [Λ°(Na⁺) + Λ°(Cl⁻)] - [Λ°(H⁺) + Λ°(Cl⁻)]

= Λ°(Na⁺) + Λ°(CH₃COO⁻)

= 390.5 + 126.4 - 425.4

= 516.9 - 425.4

= 91.5 S cm² mol⁻¹

अतः, CH₃COONa की अनन्त तनुता पर मोलर चालकता 91.5 S cm² mol⁻¹ है।

7. (a) झाग प्लवन विधि का नामांकित चित्र बनाइए।

Draw a labelled diagram of froth floatation method.

7. (b) निस्तापन एवं भर्जन में कोई दो अंतर लिखिए।

Write any two differences between calcination and roasting.

Differences between Calcination and Roasting:

  1. Calcination is carried out in the absence of air (or limited supply of air), while roasting is carried out in the presence of excess air (oxygen).
  2. Calcination involves thermal decomposition of carbonate or hydrated ores (e.g., CaCO₃ → CaO + CO₂), whereas roasting involves heating of sulphide ores to convert them into oxides (e.g., 2ZnS + 3O₂ → 2ZnO + 2SO₂).

8. (a) संक्रमण तत्व अन्तराकाशी यौगिक क्यों बनाते हैं?

Why transition elements form interstitial compounds?

Transition elements form interstitial compounds because they have vacant spaces (interstices) in their crystal lattices. Small atoms like H, C, N, or B can occupy these interstitial sites without significantly distorting the metal lattice. This results in compounds with unique properties such as high hardness, high melting points, and metallic conductivity.

8. (b) लैन्थेनाइड तत्वों में बाईं ओर से दाईं ओर जाने पर परमाणविक त्रिज्याएँ घटती हैं। समझाइए।

The atomic radii of lanthanide elements decreases on moving from left to right. Explain.

This phenomenon is known as lanthanide contraction. As we move from left to right across the lanthanide series (La to Lu), the nuclear charge increases by one unit with each element. The added electrons enter the inner 4f orbitals, which have poor shielding effect. Therefore, the effective nuclear charge experienced by the outer electrons increases, pulling them closer to the nucleus, resulting in a gradual decrease in atomic radii.


9. (a) K₃[Fe(C₂O₄)₃] संकुल का IUPAC नाम लिखिए।

Write IUPAC name of complex K₃[Fe(C₂O₄)₃].

IUPAC Name: Potassium trioxalatoferrate(III)

Explanation: The complex anion is [Fe(C₂O₄)₃]³⁻. Oxalate (C₂O₄²⁻) is a bidentate ligand, so three oxalate ligands are named as "trioxalato". Iron is in +3 oxidation state, indicated as "ferrate(III)". The counter ion is potassium.

9. (b) संयोजकता बंध सिद्धान्त के आधार पर, [NiCl₄]²⁻ संकुल आयन की ज्यामिति एवं चुम्बकीय प्रकृति लिखिए।

Write the geometry and magnetic nature of the complex ion [NiCl₄]²⁻ on the basis of valence bond theory.

Geometry: Tetrahedral

Magnetic nature: Paramagnetic

Explanation: In [NiCl₄]²⁻, nickel is in +2 oxidation state (Ni²⁺) with electronic configuration [Ar] 3d⁸. Chloride (Cl⁻) is a weak field ligand, so it does not cause pairing of electrons. Thus, Ni²⁺ has two unpaired electrons in the 3d orbitals. The complex undergoes sp³ hybridization, giving a tetrahedral geometry. Due to the presence of two unpaired electrons, it is paramagnetic.


10. (a) एल्किल ऐमीन, अमोनिया से अधिक क्षारकीय हैं। समझाइए।

Alkyl amines are more basic than ammonia. Explain.

Alkyl amines are more basic than ammonia because the alkyl group (R) is an electron-donating group (+I effect). This increases the electron density on the nitrogen atom, making it more available for protonation. In contrast, ammonia has only hydrogen atoms attached to nitrogen, which have no such electron-donating effect. Therefore, alkyl amines have a greater tendency to accept a proton (H⁺) and are stronger bases.

10. (b) निम्नलिखित रासायनिक अभिक्रिया के क्रम में [A] तथा [B] को पहचानिए एवं रासायनिक सूत्र लिखिए:

Identify and write chemical formula of [A] and [B] in the following sequence of reaction:

C₆H₅NO₂ ———6[H] (Sn + HCl)———→ [A] ———NaNO₂ + HCl (273-278 K)———→ [B]

[A] = Aniline (C₆H₅NH₂)

[B] = Benzenediazonium chloride (C₆H₅N₂⁺Cl⁻)

Explanation: Nitrobenzene (C₆H₅NO₂) is reduced by Sn/HCl (6[H]) to form aniline (C₆H₅NH₂). Aniline then reacts with NaNO₂ and HCl at low temperature (273-278 K) to form benzenediazonium chloride (C₆H₅N₂⁺Cl⁻), which is a diazonium salt.

प्रश्न 21

(a) निम्नलिखित हैलोअम्लों को उनकी अम्लीयता के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित कीजिए :

Cl₃CCOOH, Cl₂CHCOOH, ClCH₂COOH

(b) कार्बोक्सिलिक अम्ल, फ़ीनॉल से अधिक अम्लीय क्यों होते हैं?


अथवा

(a) निम्नलिखित हैलोअम्लों को उनकी अम्लीयता के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित कीजिए :

FCH₂COOH, ClCH₂COOH, BrCH₂COOH

(b) ऐल्डिहाइड नाभिकस्नेही योगात्मक क्रियाओं के प्रति कीटोन की तुलना में अधिक क्रियाशील होते हैं। समझाइए।

(a) Arrange the following haloacids in increasing order of their acidity.

Cl₃CCOOH, Cl₂CHCOOH, ClCH₂COOH

(b) Why carboxylic acids are more acidic than phenol?


OR

(a) Arrange the following haloacids in increasing order of their acidity.

FCH₂COOH, ClCH₂COOH, BrCH₂COOH

(b) Aldehydes are more reactive than ketones towards nucleophilic addition reactions. Explain.

हल / Solution

प्रथम विकल्प (First Option):

(a) अम्लीयता का बढ़ता क्रम: ClCH₂COOH < Cl₂CHCOOH < Cl₃CCOOH

कारण: क्लोरीन परमाणुओं की संख्या बढ़ने से -I प्रभाव बढ़ता है, जिससे ऋणावेश का स्थायित्व बढ़ता है और अम्लीयता बढ़ती है।

(b) कार्बोक्सिलिक अम्ल फ़ीनॉल से अधिक अम्लीय होते हैं क्योंकि कार्बोक्सिलेट आयन (RCOO⁻) में ऋणावेश दो ऑक्सीजन परमाणुओं पर अनुनाद द्वारा विस्थानित होता है, जबकि फ़ीनॉक्साइड आयन (C₆H₅O⁻) में ऋणावेश केवल एक ऑक्सीजन परमाणु पर केंद्रित होता है। इस प्रकार कार्बोक्सिलेट आयन अधिक स्थायी होता है, जिससे कार्बोक्सिलिक अम्ल अधिक अम्लीय होता है।


द्वितीय विकल्प (Second Option):

(a) अम्लीयता का बढ़ता क्रम: BrCH₂COOH < ClCH₂COOH < FCH₂COOH

कारण: विद्युत ऋणात्मकता का क्रम F > Cl > Br होता है, अतः -I प्रभाव F का सबसे अधिक होता है, जिससे FCH₂COOH सबसे अधिक अम्लीय होता है।

(b) ऐल्डिहाइड कीटोन की तुलना में नाभिकस्नेही योगात्मक क्रियाओं के प्रति अधिक क्रियाशील होते हैं क्योंकि:

  • ऐल्डिहाइड में कार्बोनिल कार्बन से एक H जुड़ा होता है, जबकि कीटोन में दो एल्किल समूह जुड़े होते हैं। एल्किल समूह +I प्रभाव द्वारा कार्बोनिल कार्बन पर धनावेश को कम करते हैं, जिससे नाभिकस्नेही आक्रमण कम होता है।
  • एल्किल समूह स्टेरिक बाधा उत्पन्न करते हैं, जिससे नाभिकस्नेही का आक्रमण मुश्किल हो जाता है।

प्रश्न 22

(a) DNA और RNA में कोई दो अंतर लिखिए।

(b) क्या होता है जब ग्लूकोस ब्रोमीन जल से अभिक्रिया करता है? रासायनिक समीकरण दीजिए।


(a) Write any two differences between DNA and RNA.

(b) What happens when glucose reacts with bromine water? Give chemical equation.

हल / Solution

(a) DNA और RNA में अंतर:

DNA RNA
इसमें डीऑक्सीराइबोज़ शर्करा पाई जाती है। इसमें राइबोज़ शर्करा पाई जाती है।
इसमें थाइमिन (T) क्षारक पाया जाता है। इसमें थाइमिन के स्थान पर यूरेसिल (U) क्षारक पाया जाता है।
यह द्विकुंडलित (double-stranded) होता है। यह सामान्यतः एकल कुंडलित (single-stranded) होता है।

(कोई भी दो अंतर लिखे जा सकते हैं।)

(b) ग्लूकोस ब्रोमीन जल से अभिक्रिया करके ग्लूकोनिक अम्ल बनाता है। यह एक ऑक्सीकरण अभिक्रिया है जिसमें ग्लूकोस का एल्डिहाइड समूह (-CHO) कार्बोक्सिलिक अम्ल समूह (-COOH) में ऑक्सीकृत हो जाता है।

रासायनिक समीकरण:

C₆H₁₂O₆ (ग्लूकोस) + Br₂ + H₂O → C₆H₁₂O₇ (ग्लूकोनिक अम्ल) + 2HBr

प्रश्न 23

(a) संघनन एवं योगात्मक बहुलकीकरण में कोई दो अंतर लिखिए।

(b) जैवनिम्नीकरणीय एवं अजैवनिम्नीकरणीय बहुलकों में विभेद कीजिए।


(a) Write any two differences between condensation and addition polymerization.

(b) Differentiate between biodegradable and non-biodegradable polymers.

हल / Solution

(a) संघनन एवं योगात्मक बहुलकीकरण में अंतर:

योगात्मक बहुलकीकरण संघनन बहुलकीकरण
इसमें कोई छोटा अणु (जैसे H₂O, NH₃) उत्पन्न नहीं होता। इसमें छोटे अणु (जैसे H₂O, NH₃, HCl) उत्पन्न होते हैं।
यह मुख्यतः द्विबंध युक्त मोनोमरों से होता है (जैसे एथिलीन, स्टाइरीन)। यह दो क्रियात्मक समूहों वाले मोनोमरों से होता है (जैसे डाइअमीन + डाइकार्बोक्सिलिक अम्ल)।
उदाहरण: पॉलिथीन, पॉलिस्टाइरीन उदाहरण: नायलॉन-66, टेरीलीन

(कोई भी दो अंतर लिखे जा सकते हैं।)

(b) जैवनिम्नीकरणीय एवं अजैवनिम्नीकरणीय बहुलकों में विभेद:

जैवनिम्नीकरणीय बहुलक अजैवनिम्नीकरणीय बहुलक
ये सूक्ष्मजीवों द्वारा विघटित हो जाते हैं। ये सूक्ष्मजीवों द्वारा विघटित नहीं होते।
ये पर्यावरण के अनुकूल होते हैं। ये पर्यावरण प्रदूषण का कारण बनते हैं।
उदाहरण: PHBV, पॉलिलैक्टिक अम्ल (PLA) उदाहरण: पॉलिथीन, पॉलिस्टाइरीन

प्रश्न 24

(a) ब्यूट-2-ईन के ज्यामितीय समावयवियों की संरचनाएँ बनाइए।

(b) न्यूमान प्रक्षेपण सूत्र द्वारा एथेन के संरूपणों की संरचनाएँ बनाइए।


खण्ड-स
SECTION — C

दिये गये उद्धरण को पढ़कर अधोलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए :

कणों के आकार के आधार पर विलयनों को तीन भागों में बाँटते हैं - वास्तविक विलयन, कोलॉइड एवं निलम्बन | कोलॉइड एक विषमांगी तंत्र होता है जिसमें एक पदार्थ बहुत बारीक कणों के रूप में (परिक्षिप्त प्रावस्था) एक दूसरे पदार्थ में परिक्षेपित रहता है जिसे परिक्षेपित माध्यम कहते हैं | कोलॉइड को विभिन्न मापदंडों के आधार पर पुनः वर्गीकृत किया गया है | कोलॉइडी विलयनों द्वारा विभिन्न गुण दर्शाये जाते हैं जैसे - टिन्डल प्रभाव, ब्राउनी गति, वैद्युत कण संचलन एवं स्कंदन आदि |

Read the given paragraph and write answers of the following questions :

On the basis of particle size, solutions may be divided into three types — true solutions, colloids, and suspensions. Colloid is a heterogeneous system in which one substance is dispersed (dispersed phase) as very fine particles in another substance called dispersion medium. Colloids are further classified on the basis of various criteria. Colloidal solutions exhibited various properties like — Tyndall effect, Brownian movement, electrophoresis and coagulation etc.

25.

(a) द्रवस्नेही एवं द्रवविरोधी कोलॉइड में कोई दो अंतर लिखिए।
Write any two differences between lyophilic and lyophobic colloids.

उत्तर / Answer:

क्रमांक द्रवस्नेही कोलॉइड (Lyophilic) द्रवविरोधी कोलॉइड (Lyophobic)
1. इनमें परिक्षिप्त प्रावस्था का विलायक के प्रति आकर्षण अधिक होता है। (The dispersed phase has high affinity for the dispersion medium.) इनमें परिक्षिप्त प्रावस्था का विलायक के प्रति आकर्षण नहीं होता या बहुत कम होता है। (The dispersed phase has little or no affinity for the dispersion medium.)
2. ये प्रतिवर्ती (reversible) कोलॉइड होते हैं। (These are reversible colloids.) ये अनुत्क्रमणीय (irreversible) कोलॉइड होते हैं। (These are irreversible colloids.)

(b) वैद्युत कण संचलन को परिभाषित कीजिए।
Define the electrophoresis.

उत्तर / Answer:

वैद्युत कण संचलन (Electrophoresis) वह प्रक्रिया है जिसमें कोलॉइडी कण विद्युत क्षेत्र के प्रभाव में अपने आवेश के अनुसार विपरीत आवेश वाले इलेक्ट्रोड की ओर गति करते हैं। (Electrophoresis is the process in which colloidal particles move towards the oppositely charged electrode under the influence of an electric field.)

(c) क्या होता है जब प्रकाश पुंज कोलॉइडी विलयन में से गमन करता है?
What happens when a beam of light is passed through a colloidal solution?

उत्तर / Answer:

जब प्रकाश पुंज कोलॉइडी विलयन में से गमन करता है, तो प्रकाश का प्रकीर्णन होता है और प्रकाश पथ दिखाई देने लगता है। इस प्रभाव को टिन्डल प्रभाव (Tyndall effect) कहते हैं। (When a beam of light passes through a colloidal solution, the light gets scattered and the path of light becomes visible. This effect is called the Tyndall effect.)


दिये गये उद्धरण को पढ़कर अधोलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए :

साबुन दीर्घ श्रृंखला वाले वसा अम्लों के सोडियम या पोटैशियम लवण होते हैं | सोडियम लवण वाले साबुन, वसा को सोडियम हाइड्रॉक्साइड के जलीय विलयन के साथ गर्म करके बनाये जाते हैं। इस अभिक्रिया को साबुनीकरण कहते हैं |

संश्लिष्ट अपमार्जक वह शोधन अभिकर्मक हैं जिनमें साबुन के सभी गुण होते हैं, परन्तु वास्तव में साबुन नहीं होते, अतः इन्हें 'साबुनविहीन साबुन' भी कहा जाने लगा |

अपमार्जक लम्बी श्रृंखला वाले हाइड्रोकार्बन तथा सल्फ्यूरिक अम्ल के व्युत्पन्न होते हैं। अपमार्जकों को मुख्यतः तीन वर्गों में बाँटा गया है - (i) ऋणायनी (ii) धनायनी (iii) अनायनिक अपमार्जक |

Read the given paragraph and write answers of the following questions :

Soaps are sodium or potassium salts of long chain fatty acids. Soaps containing sodium salts are prepared by heating fat with aqueous solution of sodium hydroxide. This reaction is called saponification.

Synthetic detergents are cleansing agents that have all the properties of soaps, but actually are not soaps, hence they are also called 'soapless soaps'.

Detergents are derivatives of long chain hydrocarbons and sulphuric acid. Detergents are mainly classified into three categories - (i) anionic (ii) cationic (iii) non-ionic detergents.

26.

(a) साबुनीकरण अभिक्रिया को समझाइए।
Explain the saponification reaction.

उत्तर / Answer:

साबुनीकरण (Saponification) वह अभिक्रिया है जिसमें वसा (एस्टर) को सोडियम हाइड्रॉक्साइड या पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड के जलीय विलयन के साथ गर्म करने पर साबुन (फैटी अम्ल का लवण) और ग्लिसरॉल प्राप्त होते हैं। (Saponification is the reaction in which fat (ester) is heated with aqueous solution of sodium hydroxide or potassium hydroxide to produce soap (salt of fatty acid) and glycerol.)

उदाहरण / Example:
वसा + NaOH → साबुन + ग्लिसरॉल
(Fat + NaOH → Soap + Glycerol)

(b) संश्लिष्ट अपमार्जकों के तीन वर्गों के नाम लिखिए।
Write the names of three classes of synthetic detergents.

उत्तर / Answer:

संश्लिष्ट अपमार्जकों के तीन वर्ग निम्नलिखित हैं / The three classes of synthetic detergents are:

  1. ऋणायनी अपमार्जक (Anionic detergents) - जिनमें ऋणावेशित भाग होता है। (Contain negatively charged part.)
  2. धनायनी अपमार्जक (Cationic detergents) - जिनमें धनावेशित भाग होता है। (Contain positively charged part.)
  3. अनायनिक अपमार्जक (Non-ionic detergents) - जिनमें कोई आवेश नहीं होता। (Contain no charge.)

(c) साबुन और संश्लिष्ट अपमार्जक में कोई दो अंतर लिखिए।
Write any two differences between soap and synthetic detergent.

उत्तर / Answer:

क्रमांक साबुन (Soap) संश्लिष्ट अपमार्जक (Synthetic Detergent)
1. ये वसा अम्लों के सोडियम/पोटैशियम लवण होते हैं। (These are sodium/potassium salts of fatty acids.) ये हाइड्रोकार्बन और सल्फ्यूरिक अम्ल के व्युत्पन्न होते हैं। (These are derivatives of hydrocarbons and sulphuric acid.)
2. कठोर जल में ये अवक्षेप बनाते हैं, अतः सफाई कम करते हैं। (They form precipitate in hard water, thus less effective.) कठोर जल में भी ये अवक्षेप नहीं बनाते, अतः सफाई प्रभावी रहती है। (They do not form precipitate in hard water, thus remain effective.)

प्रश्न 26 (a) साबुन कठोर जल में कार्य क्यों नहीं करते हैं?

साबुन कठोर जल में कार्य नहीं करते क्योंकि कठोर जल में कैल्शियम (Ca²⁺) और मैग्नीशियम (Mg²⁺) आयन होते हैं। ये आयन साबुन के सोडियम या पोटैशियम लवणों से अभिक्रिया करके अघुलनशील कैल्शियम या मैग्नीशियम साबुन (अवक्षेप) बनाते हैं, जिससे झाग नहीं बनता और सफाई प्रभावित होती है।

प्रश्न 26 (b) धनायनिक अपमार्जक का कोई एक उदाहरण लिखिए।

धनायनिक अपमार्जक का उदाहरण: सेटिलट्राइमेथिलअमोनियम ब्रोमाइड (Cetyltrimethylammonium bromide) या बेंजाल्कोनियम क्लोराइड (Benzalkonium chloride)।

प्रश्न 26 (c) साबुनीकरण अभिक्रिया का रासायनिक समीकरण लिखिए।

साबुनीकरण अभिक्रिया का रासायनिक समीकरण:

वसा (ट्राइग्लिसराइड) + सोडियम हाइड्रॉक्साइड → साबुन (सोडियम लवण) + ग्लिसरॉल

उदाहरण: C₃H₅(OOCC₁₇H₃₅)₃ + 3NaOH → 3C₁₇H₃₅COONa + C₃H₅(OH)₃

(स्टीयरिक अम्ल का ट्राइग्लिसराइड) (सोडियम हाइड्रॉक्साइड) (सोडियम स्टीयरेट-साबुन) (ग्लिसरॉल)

प्रश्न 27 (a) बेंजिल क्लोराइड में हैलोजन परमाणु से बंधित कार्बन की संकरित अवस्था लिखिए।

बेंजिल क्लोराइड (C₆H₅CH₂Cl) में हैलोजन परमाणु (Cl) से बंधित कार्बन (CH₂ समूह का कार्बन) sp³ संकरित होता है।

प्रश्न 27 (b) द्विअणुक नाभिकस्नेही प्रतिस्थापन अभिक्रिया (SN2) की क्रियाविधि समझाइए।

SN2 अभिक्रिया की क्रियाविधि:

  1. यह एक एक-चरणीय अभिक्रिया है जिसमें नाभिकस्नेही (Nu⁻) और हैलोएल्केन (R-X) एक साथ अभिक्रिया करते हैं।
  2. नाभिकस्नेही उस कार्बन पर आक्रमण करता है जिससे हैलोजन जुड़ा होता है, जबकि हैलोजन परमाणु (X⁻) एक साथ निकलता है।
  3. इस प्रक्रिया में एक संक्रमण अवस्था बनती है जिसमें नाभिकस्नेही और हैलोजन दोनों कार्बन से आंशिक रूप से जुड़े होते हैं।
  4. इस अभिक्रिया में कार्बन का विन्यास उलट जाता है (वाल्डन व्युत्क्रमण)।
  5. अभिक्रिया की दर [R-X] और [Nu⁻] दोनों पर निर्भर करती है, इसलिए इसे द्विअणुक कहते हैं।

वैकल्पिक प्रश्न 27 (a) एलिल क्लोराइड में हैलोजन परमाणु से बंधित कार्बन की संकरित अवस्था लिखिए।

एलिल क्लोराइड (CH₂=CH-CH₂Cl) में हैलोजन परमाणु (Cl) से बंधित कार्बन (CH₂ समूह का कार्बन) sp³ संकरित होता है।

वैकल्पिक प्रश्न 27 (b) एक अणुक नाभिकस्नेही प्रतिस्थापन अभिक्रिया (SN1) की क्रियाविधि समझाइए।

SN1 अभिक्रिया की क्रियाविधि:

  1. प्रथम चरण (धीमा): हैलोएल्केन (R-X) का आयनन होता है और एक कार्बोकैटायन (R⁺) तथा हैलाइड आयन (X⁻) बनता है। यह दर-निर्धारण चरण है।
  2. द्वितीय चरण (तेज): नाभिकस्नेही (Nu⁻) कार्बोकैटायन पर आक्रमण करता है और उत्पाद (R-Nu) बनता है।
  3. कार्बोकैटायन समतलीय होता है, इसलिए नाभिकस्नेही दोनों ओर से आक्रमण कर सकता है, जिससे रेसिमीकरण (दोनों विन्यासों का मिश्रण) हो सकता है।
  4. अभिक्रिया की दर केवल [R-X] पर निर्भर करती है, इसलिए इसे एक अणुक कहते हैं।

खण्ड - द (Section - D)

प्रश्न 28

(a) किसी रासायनिक अभिक्रिया के लिए अर्धायु की परिभाषा लिखिए।

(b) अभिक्रिया की कोटि एवं अणुसंख्यता में कोई दो अंतर लिखिए।

(c) A → 3B अभिक्रिया के लिए, अभिकारक की सांद्रता 0.05 M से 20 मिनट में परिवर्तित होकर 0.03 M हो जाती है। औसत वेग की गणना सेकंड तथा मिनट दोनों इकाइयों में कीजिए।

(a) अर्धायु की परिभाषा: किसी रासायनिक अभिक्रिया में अर्धायु (Half-life) वह समय है जिसमें अभिकारक की प्रारंभिक सांद्रता आधी रह जाती है। इसे t1/2 से प्रदर्शित करते हैं।

(b) अभिक्रिया की कोटि एवं अणुसंख्यता में अंतर:

क्रम अभिक्रिया की कोटि (Order of Reaction) अणुसंख्यता (Molecularity)
1. यह अभिक्रिया वेग व्यंजक में सांद्रता पदों के घातांकों का योग है। यह अभिक्रिया के धीमे पद में भाग लेने वाले अणुओं की संख्या है।
2. यह प्रायोगिक रूप से निर्धारित की जाती है और भिन्नात्मक भी हो सकती है। यह सैद्धांतिक रूप से निर्धारित की जाती है और सदैव पूर्णांक होती है।

(c) औसत वेग की गणना:

अभिक्रिया: A → 3B

प्रारंभिक सांद्रता [A]1 = 0.05 M

अंतिम सांद्रता [A]2 = 0.03 M

समय अंतराल (Δt) = 20 मिनट = 20 × 60 = 1200 सेकंड

सांद्रता में परिवर्तन (Δ[A]) = [A]2 - [A]1 = 0.03 - 0.05 = -0.02 M

औसत वेग = -Δ[A]/Δt = -(-0.02)/20 = 0.02/20 = 0.001 M मिनट-1

सेकंड में: औसत वेग = 0.02/1200 = 1.67 × 10-5 M सेकंड-1

उत्तर: मिनट में औसत वेग = 0.001 M मिनट-1, सेकंड में औसत वेग = 1.67 × 10-5 M सेकंड-1


अथवा

(a) प्रथम कोटि अभिक्रिया की परिभाषा लिखिए।

(b) अभिक्रिया वेग एवं विशिष्ट अभिक्रिया वेग में विभेद कीजिए।

(c) प्लैटिनम सतह पर NH3 का अपघटन शून्य कोटि की अभिक्रिया है। N2 एवं H2 के उत्पादन की दर क्या होगी जब वेग स्थिरांक का मान 5 × 10-4 mol L-1 s-1 हो?

(a) प्रथम कोटि अभिक्रिया की परिभाषा: वह अभिक्रिया जिसका वेग अभिकारक की सांद्रता की प्रथम घात के समानुपाती होता है, प्रथम कोटि अभिक्रिया कहलाती है। उदाहरण: रेडियोधर्मी क्षय।

(b) अभिक्रिया वेग एवं विशिष्ट अभिक्रिया वेग में विभेद:

क्रम अभिक्रिया वेग (Rate of Reaction) विशिष्ट अभिक्रिया वेग (Specific Reaction Rate)
1. यह समय के साथ अभिकारक या उत्पाद की सांद्रता में परिवर्तन की दर है। यह वह वेग स्थिरांक है जब अभिकारकों की सांद्रता इकाई होती है।
2. यह अभिकारकों की सांद्रता पर निर्भर करता है। यह केवल ताप पर निर्भर करता है, सांद्रता पर नहीं।

(c) NH3 के अपघटन की दर:

NH3 का प्लैटिनम सतह पर अपघटन: 2NH3 → N2 + 3H2

यह शून्य कोटि की अभिक्रिया है, अतः वेग = k = 5 × 10-4 mol L-1 s-1

अभिक्रिया वेग = -½ d[NH3]/dt = d[N2]/dt = ⅓ d[H2]/dt = k

N2 के उत्पादन की दर = d[N2]/dt = k = 5 × 10-4 mol L-1 s-1

H2 के उत्पादन की दर = d[H2]/dt = 3k = 3 × 5 × 10-4 = 1.5 × 10-3 mol L-1 s-1

उत्तर: N2 के उत्पादन की दर = 5 × 10-4 mol L-1 s-1, H2 के उत्पादन की दर = 1.5 × 10-3 mol L-1 s-1

प्रश्न 29

(अ) वर्ग-5 के तत्त्वों का सामान्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखिए।

उत्तर: वर्ग-5 (नाइट्रोजन परिवार) के तत्त्वों का सामान्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास ns² np³ है।

(ब) H₂O एक द्रव तथा H₂S गैस क्यों है?

उत्तर: H₂O में अंतर-आण्विक हाइड्रोजन बंध (H-bonding) पाया जाता है, जबकि H₂S में हाइड्रोजन बंध नहीं बनता क्योंकि सल्फर की विद्युत-ऋणात्मकता कम होती है। हाइड्रोजन बंध के कारण H₂O के अणु एक-दूसरे से अधिक जुड़े रहते हैं, जिससे यह द्रव अवस्था में रहता है। H₂S में केवल दुर्बल वान्डर वाल्स बल होते हैं, जिससे यह गैस अवस्था में रहता है।

(स) निम्नलिखित अभिक्रिया को पूर्ण कीजिए:

2NaOH (ठंडा व तनु) + Cl₂ →

उत्तर: 2NaOH (ठंडा व तनु) + Cl₂ → NaCl + NaOCl + H₂O

(सोडियम हाइपोक्लोराइट बनता है)

(द) XeOF₄ की संरचना बनाइए।

उत्तर: XeOF₄ की संरचना वर्ग पिरामिडी (Square Pyramidal) होती है।

केंद्रीय परमाणु Xe, 4 F परमाणु वर्ग के कोनों पर, 1 O शीर्ष पर तथा 1 एकाकी युग्म (lone pair) नीचे की ओर होता है।

        O
        |
    F—Xe—F
        |
        F
       / \
      F   (एकाकी युग्म)
    

अथवा

(अ) वर्ग-6 के तत्त्वों का सामान्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखिए।

उत्तर: वर्ग-6 (ऑक्सीजन परिवार) के तत्त्वों का सामान्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास ns² np⁴ है।

(ब) क्लोरीन की इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी का मान फ्लोरीन से अधिक क्यों होता है? समझाइए।

उत्तर: फ्लोरीन का परमाणु आकार बहुत छोटा होता है, जिससे इसमें इलेक्ट्रॉन घनत्व अधिक होता है। नए इलेक्ट्रॉन के प्रवेश करने पर इलेक्ट्रॉन-इलेक्ट्रॉन प्रतिकर्षण अधिक होता है, जिससे ऊर्जा मुक्त होने की बजाय कम होती है। क्लोरीन का आकार बड़ा होने से प्रतिकर्षण कम होता है और नया इलेक्ट्रॉन अधिक सहजता से जुड़ता है, जिससे इसकी इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी अधिक (अधिक ऋणात्मक) होती है।

(स) निम्नलिखित अभिक्रिया को पूर्ण कीजिए:

XeF₆ + O₂F₂ → (143 K पर)

उत्तर: XeF₆ + O₂F₂ → XeF₄ + O₂ + F₂

(या XeF₆ + O₂F₂ → XeF₄ + O₂F₂; यह अभिक्रिया XeF₆ को XeF₄ में अपचयित करती है)

(द) H₃PO₂ की संरचना बनाइए।

उत्तर: H₃PO₂ (हाइपोफॉस्फोरस अम्ल) की संरचना:

        O
        ||
    H—P—OH
        |
        H
    

इसमें दो H परमाणु सीधे P से जुड़े होते हैं (जो अम्लीय नहीं हैं) और एक H ऑक्सीजन से जुड़ा होता है (अम्लीय H)। यह एक प्रबल अपचायक है।

प्रश्न 30

(a) आइसोब्यूटिल ऐल्कोहॉल का संरचना सूत्र लिखिए।

उत्तर: आइसोब्यूटिल ऐल्कोहॉल का संरचना सूत्र है:

CH3–CH(CH3)–CH2–OH

या (CH3)2CHCH2OH

(b) क्या होता है जब डाइएथिल ईथर सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में क्लोरीन से अभिक्रिया करता है? रासायनिक समीकरण दीजिए।

डाइएथिल ईथर सूर्य के प्रकाश में क्लोरीन से अभिक्रिया करके क्लोरीन प्रतिस्थापन उत्पाद देता है। इस अभिक्रिया में ईथर के एल्किल समूहों में हाइड्रोजन परमाणु क्लोरीन द्वारा प्रतिस्थापित हो जाते हैं।

रासायनिक समीकरण:

C2H5–O–C2H5 + Cl2 C2H5–O–C2H4Cl + HCl

(यह एक मुक्त मूलक क्लोरीनीकरण अभिक्रिया है, जिसमें विभिन्न क्लोरीनयुक्त उत्पाद बन सकते हैं।)

(c) निम्नलिखित अभिक्रिया अनुक्रमों को पूरा कीजिए एवं उत्पाद [A] एवं [B] के नाम लिखिए:

OH + CCl4 + 4KOH → [A] → [B]

पूर्ण अभिक्रिया:

C6H5OH + CCl4 + 4KOH → C6H5Cl3 (ट्राइक्लोरोफिनॉल) + 4KCl + 3H2O

उत्पादों के नाम:

  • [A] = ट्राइक्लोरोफिनॉल (2,4,6-ट्राइक्लोरोफिनॉल)
  • [B] = यहाँ [B] का स्पष्ट उल्लेख नहीं है, संभवतः यह अगला उत्पाद है। सामान्यतः यह अभिक्रिया रीमर-टीमैन अभिक्रिया के समान होती है, जहाँ [A] सैलिसिलैल्डिहाइड हो सकता है।

अथवा

(a) तृतीयक-ब्यूटिल ऐल्कोहॉल का संरचना सूत्र लिखिए।

उत्तर: तृतीयक-ब्यूटिल ऐल्कोहॉल का संरचना सूत्र है:

(CH3)3C–OH

या CH3–C(CH3)2–OH

(b) क्या होता है जब डाइएथिल ईथर की वाष्प को एलुमिना पर 653 K ताप पर प्रवाहित किया जाता है? रासायनिक समीकरण दीजिए।

डाइएथिल ईथर की वाष्प को एलुमिना (Al2O3) पर 653 K ताप पर प्रवाहित करने पर निर्जलीकरण होता है और एथिलीन गैस बनती है।

रासायनिक समीकरण:

C2H5–O–C2H5 2CH2=CH2 + H2O

(यह एक निर्जलीकरण अभिक्रिया है जिसमें ईथर से पानी निकल जाता है और एल्कीन बनती है।)

(c) निम्नलिखित अभिक्रिया अनुक्रमों को पूरा कीजिए एवं उत्पाद [A] तथा [B] के नाम लिखिए:

+ HOH → उबालने पर [A] → Br2 जल → [B]

पूर्ण अभिक्रिया:

यह अभिक्रिया संभवतः फिनॉल या ऐरोमैटिक यौगिक के ब्रोमीनीकरण को दर्शाती है।

C6H5OH + H2O → (उबालने पर) C6H5OH (फिनॉल) + Br2 जल → C6H2Br3OH (2,4,6-ट्राइब्रोमोफिनॉल) + 3HBr

उत्पादों के नाम:

  • [A] = फिनॉल (C6H5OH)
  • [B] = 2,4,6-ट्राइब्रोमोफिनॉल (C6H2Br3OH)