RBSE Class 12th 2020 Drawing-SS-17-2020 Previous Year Papers
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Paper details
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| Board | RBSE |
|---|---|
| Class | Class 12th |
| Exam year | 2020 |
| Subject | Drawing-SS-17-2020 |
| Resource type | Previous Year Papers |
| Category | RBSE Previous Year Question Papers |
| Website | RBSE Solution |
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RBSE Class 12th 2020 Drawing-SS-17-2020
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Rajasthan Board Class 12th Drawing-SS-17-2020 2020 solved Previous Year Question Papers
चित्रकला (DRAWING)
उच्च माध्यमिक परीक्षा, 2020
समय : 3½ घण्टे पूर्णाक : 24
परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :
GENERAL INSTRUCTIONS TO THE EXAMINEES :
- परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न-पत्र पर नामांक अनिवार्यतः लिखें।
Candidate must write first his / her Roll No. on the question paper compulsorily. - सभी प्रश्न करने अनिवार्य हैं।
All the questions are compulsory. - प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें।
Write the answer to each question in the given answer-book only.
No. of Questions — 30
No. of Printed Pages — 7
SS-7-Drawing
निर्देश (Instructions)
(4) जिन प्रश्नों में आन्तरिक खण्ड हैं, उन सभी के उत्तर एक साथ ही लिखें।
For questions having more than one part, the answers to those parts are to be written together in continuity.
(5) प्रश्न-पत्र के हिन्दी व अंग्रेजी रूपांतर में किसी प्रकार की त्रुटि/अंतर/विरोधाभास होने पर हिन्दी भाषा के प्रश्न को ही सही मानें।
If there is any error / difference / contradiction in Hindi & English versions of the question paper, the question of Hindi version should be treated valid.
(6) प्रश्नों के अंक एवं उत्तर की शब्द सीमा (Marks and Word Limit of Answer)
| प्रश्न क्रमांक (Q. Nos.) | प्रति प्रश्न अंक (Marks per Question) | उत्तर की शब्द सीमा (Word Limit of Answer) |
|---|---|---|
| 1-2 | ¼ | 0 |
| 3-20 | ½ | 25 |
| 21-25 | 1 | 50 |
| 26-28 | 2 | 20 |
| 29-30 | 3 | 200 |
(7) प्रश्न क्रमांक 29 और 30 में आंतरिक विकल्प हैं।
There are internal choices in Question Nos. 29 and 30.
SS-7-Drawing
खण्ड -अ — SECTION — A
-
देलवाड़ा जैन मंदिर राजस्थान के किस जिले में स्थित है ?
In which district of Rajasthan the Delwara Jain temple is situated ?
उत्तर: देलवाड़ा जैन मंदिर राजस्थान के सिरोही जिले में स्थित है।
Answer: The Delwara Jain temple is situated in the Sirohi district of Rajasthan.
-
देलवाड़ा जैन मंदिर की कोई भी एक विशेषता लिखिए।
Write any one characteristic of Delwara Jain temple.
उत्तर: देलवाड़ा जैन मंदिर की एक विशेषता यह है कि इसका निर्माण सफेद संगमरमर से किया गया है और इसमें अत्यंत सुंदर नक्काशी की गई है।
Answer: One characteristic of the Delwara Jain temple is that it is built of white marble and has extremely beautiful carvings.
-
रणकपुर जैन मंदिर किस जिले में स्थित है ?
In which district the Ranakpur Jain temple is situated ?
उत्तर: रणकपुर जैन मंदिर राजस्थान के पाली जिले में स्थित है।
Answer: The Ranakpur Jain temple is situated in the Pali district of Rajasthan.
-
राजस्थान के “खजुराहो” का नाम लिखिए।
Write the name of Khajuraho of Rajasthan.
उत्तर: राजस्थान के “खजुराहो” का नाम किराडू है।
Answer: The name of Khajuraho of Rajasthan is Kiradoo.
-
आभानेरी' का प्राचीन नाम लिखिए।
Write the ancient name of ‘Abhaneri’.
उत्तर: आभानेरी का प्राचीन नाम अभयनगरी था।
Answer: The ancient name of Abhaneri was Abhaynagari.
-
“चाँद बाबड़ी' का निर्माण किसने करवाया था ?
Who got constructed the ‘Chand Bawari’ ?
उत्तर: “चाँद बाबड़ी” का निर्माण राजा चंद्रगुप्त मौर्य ने करवाया था।
Answer: The ‘Chand Bawari’ was constructed by King Chandragupta Maurya.
-
ऊषा रानी हूजा के किसी एक प्रसिद्ध मूर्तिशिल्प का नाम लिखिए।
Write the name of any one famous sculpture of Usha Rani Hogja.
उत्तर: ऊषा रानी हूजा का एक प्रसिद्ध मूर्तिशिल्प “नृत्य करती हुई अप्सरा” है।
Answer: One famous sculpture of Usha Rani Hogja is the “Dancing Apsara”.
खण्ड-ब / SECTION -B
8. गोपी चन्द मिश्रा क्यों प्रसिद्ध हैं ?
Why is Gopi Chand Mishra famous ?
गोपी चन्द मिश्रा राजस्थान के प्रसिद्ध मूर्तिकार हैं। वे अपनी लकड़ी की मूर्तियों और विशेष रूप से 'बावड़ी' (सीढ़ीदार कुएँ) शैली की मूर्तियों के लिए प्रसिद्ध हैं। उनकी कला में पारंपरिक राजस्थानी शैली का अद्भुत समावेश देखने को मिलता है।
9. अर्जुन लाल प्रजापति के किसी एक प्रसिद्ध मूर्तिशिल्प का नाम लिखिए।
Write the name of any one famous sculpture of Arjun Lal Prajapati.
अर्जुन लाल प्रजापति की एक प्रसिद्ध मूर्तिशिल्प है: "महाराणा प्रताप" (अश्वारोही प्रतिमा)। यह मूर्ति राजस्थानी वीरता और शौर्य का प्रतीक है।
0. पंकज गहलोत के मूर्तिशिल्पों का माध्यम लिखिए।
Write the sculpture-medium of Pankaj Gahlot.
पंकज गहलोत अपनी मूर्तियों के लिए फाइबर ग्लास (Fibre Glass) माध्यम का उपयोग करते हैं। यह हल्का, मजबूत और टिकाऊ होता है, जिससे वे आधुनिक और अभिव्यंजक मूर्तियाँ बनाते हैं।
LL. माली राम शर्मा की मूर्तियों की एक विशेषता लिखिए।
Write any one characteristic of Mali Ram Sharma’s sculpture.
माली राम शर्मा की मूर्तियों की एक प्रमुख विशेषता है: प्राकृतिक और यथार्थवादी अभिव्यक्ति। वे मानवीय भावनाओं और ग्रामीण जीवन को बड़ी सहजता और सजीवता से अपनी मूर्तियों में उकेरते हैं।
l2. “माटी मानस संस्थान' की स्थापना किसने की थी ?
Who founded ‘Maati Manas Sansthan’ ?
“माटी मानस संस्थान” की स्थापना श्री कैलाश चंद्र शर्मा ने की थी। यह संस्थान मिट्टी की कला और पारंपरिक शिल्प को संरक्षित करने के लिए समर्पित है।
3. कम्पनी शैली के प्रमुख विषय क्या थे ?
What were the main Subjects of Company School ?
कम्पनी शैली (Company School) के प्रमुख विषय निम्नलिखित थे:
- भारतीय जनजीवन और दैनिक क्रियाकलाप (जैसे बाजार, त्योहार, शिल्पकार)
- प्राकृतिक दृश्य और वनस्पति
- पशु-पक्षी और वन्य जीवन
- भारतीय वेशभूषा और आभूषण
- ऐतिहासिक स्मारक और इमारतें
इस शैली में यूरोपीय यथार्थवाद और भारतीय विषयों का मिश्रण देखने को मिलता है।
4. राजा रवि वर्मा की किसी भी एक कलाकृति पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
Write short note on any one painting of Raja Ravi Varma.
राजा रवि वर्मा की प्रसिद्ध कलाकृति: "शकुंतला पत्र लेखन" (Shakuntala Writing a Letter)
यह चित्र महाकवि कालिदास के नाटक 'अभिज्ञान शाकुंतलम्' पर आधारित है। इसमें शकुंतला अपने प्रिय दुष्यंत को पत्र लिखती हुई दिखाई देती हैं। चित्र में भारतीय परिधान, आभूषण और प्राकृतिक पृष्ठभूमि का सुंदर चित्रण है। राजा रवि वर्मा ने यूरोपीय यथार्थवादी शैली में भारतीय भावनाओं को अभिव्यक्त किया है। यह चित्र प्रेम, विरह और भावनाओं की गहराई को दर्शाता है।
खण्ड - स (Section — C)
-
कम्पनी शैली के किन्हीं दो चित्रकारों के नाम लिखिए |
Write the name of any two artists of Company School.
कम्पनी शैली के दो प्रमुख चित्रकार हैं:
- सेवेरिनो (Severino) – एक इतालवी चित्रकार जिसने भारतीय विषयों को यूरोपीय शैली में चित्रित किया।
- गुलाम अली खान (Ghulam Ali Khan) – एक भारतीय चित्रकार जिसने दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों के दृश्यों को चित्रित किया।
-
‘PAG’ पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए |
Write a short note on the ‘PAG’.
PAG का पूरा नाम प्रोग्रेसिव आर्टिस्ट्स ग्रुप (Progressive Artists' Group) है। यह 1947 में मुंबई में स्थापित एक कला समूह था, जिसने भारतीय कला में आधुनिकता और प्रयोगवाद को बढ़ावा दिया। इसके प्रमुख सदस्यों में एम.एफ. हुसैन, एफ.एन. सूजा, एस.एच. रज़ा, के.एच. आरा और एच.ए. गड़े शामिल थे। इस समूह ने पारंपरिक भारतीय कला से हटकर पश्चिमी आधुनिकतावादी शैलियों को अपनाया और भारतीय कला को एक नई दिशा दी।
-
हेब्बर की कृति ‘कॉक फाइट’ पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए |
Write a short note on the Hebbar’s Painting — ‘Cock Fight’.
कॉक फाइट (Cock Fight) प्रसिद्ध भारतीय चित्रकार के.के. हेब्बर द्वारा चित्रित एक प्रसिद्ध कृति है। यह चित्र ग्रामीण जीवन के एक सामान्य दृश्य को दर्शाता है, जिसमें दो मुर्गों की लड़ाई को केंद्र में रखा गया है। हेब्बर ने इस चित्र में भारतीय लोक कला और आधुनिक शैली का मिश्रण किया है। रंगों का प्रयोग जीवंत और भावनात्मक है, जो दर्शकों को ग्रामीण परिवेश में खींच लेता है। यह कृति हेब्बर की कला की विशेषता – सादगी, लोक तत्वों और अभिव्यक्ति – को दर्शाती है।
-
‘शिल्पी चक्र’ के बारे में आप क्या जानते हैं ?
What do you know about the ‘Shilpi Chakra’ ?
शिल्पी चक्र एक कला समूह था, जिसकी स्थापना 1940 के दशक में कोलकाता में हुई थी। इस समूह का उद्देश्य भारतीय कला में पारंपरिक और आधुनिक तत्वों का समन्वय करना था। इसके प्रमुख सदस्यों में रामकिंकर बैज, पारितोष सेन और सुनील माधव सेन शामिल थे। शिल्पी चक्र ने मूर्तिकला और चित्रकला में प्रयोगात्मक दृष्टिकोण अपनाया और भारतीय कला को एक नई पहचान दी।
-
जगदीश स्वामीनाथन की कृतियों की विशेषताओं पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए |
Write a short note on the characteristics of Jagdish Swaminathan’s Painting.
जगदीश स्वामीनाथन (1928-1994) एक प्रसिद्ध भारतीय चित्रकार थे। उनकी कृतियों की प्रमुख विशेषताएँ हैं:
- अमूर्तता (Abstraction): उनके चित्रों में अमूर्त रूपों और ज्यामितीय आकृतियों का प्रयोग होता है।
- प्रतीकात्मकता (Symbolism): वे प्रतीकों के माध्यम से गहरे दार्शनिक और आध्यात्मिक विचारों को व्यक्त करते हैं।
- रंगों का संयमित प्रयोग: वे सीमित रंगों का उपयोग करते हैं, जो चित्र को शांत और ध्यानपूर्ण बनाते हैं।
- भारतीय परंपरा से जुड़ाव: उनकी कला में भारतीय लोक कला, तांत्रिक प्रतीकों और आदिवासी कला का प्रभाव दिखता है।
- आधुनिकता: वे भारतीय परंपरा को आधुनिक अभिव्यक्ति के साथ जोड़ते हैं।
-
किन दो ईरानी चित्रकारों ने मुगल कला का सूत्रपात किया ?
Which two Persian painters initiated the Mughal Art ?
मुगल कला का सूत्रपात करने वाले दो ईरानी चित्रकार थे:
- मीर सैयद अली (Mir Sayyid Ali) – वह एक प्रसिद्ध फारसी चित्रकार थे, जो हुमायूँ के साथ भारत आए और मुगल लघु चित्रकला की नींव रखी।
- ख्वाजा अब्दुस समद (Khwaja Abdus Samad) – वह भी एक फारसी चित्रकार थे, जिन्होंने हुमायूँ और अकबर के दरबार में कार्य किया और मुगल चित्रकला को विकसित किया।
-
दक्खिनी शैली के किसी एक प्रसिद्ध चित्र पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए |
Write a short note on any one famous painting of Deccan Art (Dakhini School).
दक्खिनी शैली का एक प्रसिद्ध चित्र: "हजरत निजामुद्दीन औलिया और अमीर खुसरो"
यह चित्र दक्खिनी शैली की एक उत्कृष्ट कृति है, जो 16वीं-17वीं शताब्दी में बनाई गई थी। इसमें सूफी संत हजरत निजामुद्दीन औलिया और उनके शिष्य अमीर खुसरो को दर्शाया गया है। चित्र की विशेषताएँ हैं:
- रंगों का समृद्ध प्रयोग: इसमें गहरे लाल, नीले और सुनहरे रंगों का प्रयोग किया गया है।
- विस्तृत वास्तुकला: पृष्ठभूमि में मुगल और दक्खिनी वास्तुकला के तत्व दिखते हैं।
- भावनात्मक अभिव्यक्ति: पात्रों के चेहरे पर भक्ति और समर्पण का भाव स्पष्ट है।
- सजावटी तत्व: चित्र में फूल-पत्तियों और ज्यामितीय डिजाइनों का सुंदर उपयोग किया गया है।
यह चित्र दक्खिनी शैली की सूफी परंपरा और कलात्मक सौंदर्य का उत्कृष्ट उदाहरण है।
खण्ड-स / SECTION-C
22. “शबीह' से आप क्या समझते हैं ?
What do you understand by ‘Shabih’ ?
उत्तर: 'शबीह' का अर्थ है चित्र या प्रतिकृति। मुगल काल में 'शबीह' शब्द का प्रयोग विशेष रूप से व्यक्तियों के यथार्थवादी चित्रों के लिए किया जाता था। ये चित्र प्रायः राजाओं, रानियों, दरबारियों और अन्य महत्वपूर्ण व्यक्तियों के बनाए जाते थे। 'शबीह' में चेहरे की विशेषताओं, भाव-भंगिमाओं और व्यक्तित्व को बहुत बारीकी से उकेरा जाता था।
Answer: 'Shabih' means portrait or likeness. In the Mughal period, the term 'Shabih' was specifically used for realistic portraits of individuals. These portraits were usually made of kings, queens, courtiers, and other important persons. In 'Shabih', facial features, expressions, and personality were depicted very minutely.
23. जहाँगीर कालीन मुगल कला की विशेषतायें लिखिए |
Write the characteristics of Jahangir’s period Mughal Art.
उत्तर: जहाँगीर कालीन मुगल कला की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
- यथार्थवाद: चित्रों में प्रकृति और मानवीय भावों का अत्यधिक यथार्थवादी चित्रण हुआ।
- प्रकृति चित्रण: पशु-पक्षियों, पुष्पों और वृक्षों का सजीव चित्रण इस काल की विशेषता है।
- व्यक्तिगत चित्र: राजा-महाराजाओं और दरबारियों के अलग-अलग चित्र बनाए गए।
- रंगों का प्रयोग: चमकीले और सूक्ष्म रंगों का प्रयोग किया गया, विशेषकर सुनहरे रंग का।
- यूरोपीय प्रभाव: यूरोपीय चित्रकला की छाया-प्रकाश तकनीक का प्रभाव दिखाई देता है।
- सीमांकन: चित्रों के चारों ओर सुंदर सीमांकन (border decoration) किया जाता था।
Answer: The main characteristics of Mughal art during Jahangir's period are:
- Realism: Highly realistic depiction of nature and human emotions.
- Nature painting: Lifelike portrayal of animals, birds, flowers, and trees.
- Portraiture: Individual portraits of kings and courtiers were made.
- Use of colors: Bright and subtle colors were used, especially gold.
- European influence: Influence of European chiaroscuro technique is visible.
- Border decoration: Beautiful borders were decorated around the paintings.
24. पहाड़ी शैली में चित्रित नायिकाओं के बारे में संक्षेप में लिखिए |
Write in short about the Nayikas painted in Pahari School.
उत्तर: पहाड़ी शैली में नायिकाओं का चित्रण अत्यंत सुंदर और भावपूर्ण होता है। नायिकाओं को प्रायः नायक (कृष्ण या किसी राजकुमार) के वियोग या मिलन की अवस्था में दिखाया जाता है। इन चित्रों में नायिकाओं के मुख पर विभिन्न भाव (श्रृंगार, करुणा, हर्ष) स्पष्ट रूप से उभरते हैं। वे सुंदर वस्त्र और आभूषण पहने होती हैं, और उनके शरीर की बनावट कोमल एवं लचीली होती है। पहाड़ी चित्रों में नायिकाओं के साथ प्राकृतिक दृश्य (बादल, वृक्ष, जल) भी चित्रित किए जाते हैं जो भावनाओं को और गहरा करते हैं।
Answer: In the Pahari style, the depiction of Nayikas (heroines) is extremely beautiful and emotional. Nayikas are often shown in states of separation or union with the Nayaka (Krishna or a prince). Various emotions (romance, pathos, joy) are clearly expressed on their faces. They are adorned with beautiful clothes and jewelry, and their body structure is soft and flexible. In Pahari paintings, natural scenes (clouds, trees, water) are also depicted with the Nayikas, which deepen the emotions.
25. पहाड़ी चित्र शैली की विशेषतायें संक्षेप में लिखिए |
Write in short the characteristics of Pahari painting style.
उत्तर: पहाड़ी चित्र शैली की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
- प्रकृति प्रेम: पहाड़ी चित्रों में प्रकृति का अत्यधिक सुंदर चित्रण मिलता है।
- भाव प्रधानता: चित्रों में भावों (विशेषकर श्रृंगार रस) को प्रमुखता दी गई है।
- कोमल रेखाएँ: चित्रों में कोमल और तरल रेखाओं का प्रयोग किया गया है।
- चमकीले रंग: लाल, पीला, नीला, हरा जैसे चमकीले और जीवंत रंगों का प्रयोग हुआ है।
- विषय: मुख्यतः भागवत पुराण, राधा-कृष्ण की लीलाएँ और रागमाला चित्रण।
- नायिका भेद: नायिकाओं के विभिन्न प्रकारों (अष्टनायिका) का चित्रण।
- सीमित स्थान: चित्रों में स्थान का सीमित उपयोग, परंतु गहराई का आभास।
Answer: The main characteristics of Pahari painting style are:
- Love for nature: Extremely beautiful depiction of nature.
- Emphasis on emotions: Emotions (especially the romantic sentiment) are given prominence.
- Soft lines: Use of soft and fluid lines.
- Bright colors: Use of bright and vibrant colors like red, yellow, blue, green.
- Themes: Mainly Bhagavata Purana, Radha-Krishna leelas, and Ragamala paintings.
- Nayika Bheda: Depiction of various types of heroines (Ashta Nayika).
- Limited space: Limited use of space but with a sense of depth.
खण्ड-द / SECTION-D
26. राम गोपाल विजयवर्गीय की कला पर प्रकाश डालिए |
Highlight the art of Ram Gopal Vijayvargiya.
उत्तर: राम गोपाल विजयवर्गीय (1905-1993) भारतीय चित्रकला के एक प्रमुख कलाकार थे। उनकी कला की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
- शैली: उन्होंने बंगाल स्कूल ऑफ आर्ट से प्रभावित होकर एक अलग शैली विकसित की, जिसमें भारतीय परंपरा और आधुनिकता का मिश्रण था।
- विषय: उनके चित्रों में मुख्यतः भारतीय पौराणिक कथाएँ, लोक जीवन और प्रकृति के दृश्य चित्रित हुए।
- तकनीक: उन्होंने जलरंग (वॉटर कलर) और तैल रंग (ऑयल पेंट) दोनों में काम किया। उनकी रेखाएँ स्पष्ट और रंग संयोजन सामंजस्यपूर्ण होते थे।
- प्रसिद्धि: वे अपने भित्ति चित्रों (म्यूरल) और चित्रों के लिए जाने जाते हैं, जिनमें भारतीय संस्कृति की गहरी झलक मिलती है।
- योगदान: उन्होंने राजस्थान और मध्य प्रदेश में कला शिक्षा के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
Answer: Ram Gopal Vijayvargiya (1905-1993) was a prominent Indian painter. The characteristics of his art are:
- Style: Influenced by the Bengal School of Art, he developed a unique style blending Indian tradition and modernity.
- Themes: His paintings mainly depicted Indian mythological stories, folk life, and nature scenes.
- Technique: He worked in both watercolor and oil paint. His lines were clear and color combinations harmonious.
- Fame: He is known for his murals and paintings that give a deep glimpse of Indian culture.
- Contribution: He played an important role in spreading art education in Rajasthan and Madhya Pradesh.
27. ‘एलीफेंटा’ की कला के बारे में विस्तार से लिखिए |
Describe in detail about the art of ‘Elephanta’.
उत्तर: एलीफेंटा की कला मुख्यतः एलीफेंटा गुफाओं (मुंबई के पास) में स्थित मूर्तियों और वास्तुकला को संदर्भित करती है। इसकी प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
- काल: ये गुफाएँ लगभग 5वीं से 7वीं शताब्दी ईस्वी (गुप्त काल के बाद) में निर्मित मानी जाती हैं।
- धार्मिक महत्व: यह गुफा मंदिर भगवान शिव को समर्पित है।
- प्रमुख मूर्ति: यहाँ की सबसे प्रसिद्ध मूर्ति 'त्रिमूर्ति' (तीन मुख वाले शिव) है, जो 20 फीट ऊँची है और इसमें शिव के तीन रूप - सृष्टिकर्ता, पालनकर्ता और संहारक - दिखाए गए हैं।
- शैली: मूर्तियाँ गुप्त काल की शास्त्रीय शैली में बनी हैं, जिसमें शरीर की कोमलता, भाव-भंगिमाओं की सजीवता और आभूषणों का सूक्ष्म अंकन है।
- अन्य मूर्तियाँ: यहाँ शिव के विभिन्न रूपों (नटराज, अर्धनारीश्वर, गंगाधर) की मूर्तियाँ भी हैं।
- वास्तुकला: गुफा को चट्टान को काटकर बनाया गया है, जिसमें बड़े-बड़े स्तंभ और एक विशाल सभागार है।
Answer: The art of Elephanta mainly refers to the sculptures and architecture located in the Elephanta Caves (near Mumbai). Its main characteristics are:
- Period: These caves are believed to have been built around the 5th to 7th century AD (post-Gupta period).
- Religious significance: This cave temple is dedicated to Lord Shiva.
- Main sculpture: The most famous sculpture here is the 'Trimurti' (three-faced Shiva), which is 20 feet high and shows three forms of Shiva - creator, preserver, and destroyer.
- Style: The sculptures are made in the classical style of the Gupta period, with softness of body, liveliness of expressions, and minute detailing of ornaments.
- Other sculptures: There are also sculptures of various forms of Shiva (Nataraja, Ardhanarishvara, Gangadhara).
- Architecture: The cave is rock-cut, with large pillars and a huge assembly hall.
28. देवी प्रसाद राय चौधरी के मूर्तिशिल्पों के बारे में आप क्या समझते हैं ?
What do you understand about the sculptures of Devi Prasad Roy Choudhary ?
उत्तर: देवी प्रसाद राय चौधरी (1899-1975) भारतीय मूर्तिकला के एक अग्रणी कलाकार थे। उनके मूर्तिशिल्पों की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
- शैली: उन्होंने आधुनिक मूर्तिकला में भारतीय परंपरा का समावेश किया। उनकी मूर्तियों में शरीर की कोमलता और गति का सुंदर चित्रण मिलता है।
- सामग्री: उन्होंने मुख्यतः पत्थर, कांस्य और लकड़ी में मू
29. किशनगढ़ शैली की विस्तृत व्याख्या कीजिए |
किशनगढ़ शैली (Kishangarh School) राजस्थानी चित्रकला की एक प्रमुख शैली है, जो 18वीं शताब्दी में किशनगढ़ रियासत (वर्तमान राजस्थान) में विकसित हुई। इस शैली का स्वर्ण काल महाराजा सावंत सिंह (1748-1764) के शासनकाल में था।
- विशेषताएँ: इसमें नाजुक और लंबी आकृतियाँ, बादामी आँखें, पतली कमर, और कोमल भाव-भंगिमाएँ प्रमुख हैं। रंगों में गहरा नीला, लाल, सुनहरा और हरा का प्रयोग होता है।
- प्रमुख विषय: राधा-कृष्ण की प्रेम लीलाएँ, विशेषकर "बनी-ठनी" (राधा का एक प्रसिद्ध चित्र) और "कृष्ण-गोपियाँ"।
- प्रसिद्ध चित्रकार: निहाल चंद (महाराजा सावंत सिंह के दरबारी चित्रकार) ने इस शैली को उत्कर्ष पर पहुँचाया। उनकी कृति "बनी-ठनी" विश्व प्रसिद्ध है।
- प्रभाव: यह शैली भक्ति आंदोलन और वैष्णव परंपरा से गहराई से प्रभावित है।
अथवा
जयपुर शैली का विस्तृत वर्णन कीजिए |
जयपुर शैली (Jaipur School) राजस्थानी चित्रकला की एक समृद्ध शैली है, जो 18वीं-19वीं शताब्दी में जयपुर रियासत में विकसित हुई। यह मुगल और राजस्थानी परंपराओं का मिश्रण है।
- विशेषताएँ: आकृतियाँ गोल और भरी-भरी होती हैं, चेहरे पर मुगल प्रभाव दिखता है। रंगों में चटकीले लाल, पीले, नीले और हरे का प्रयोग होता है। पृष्ठभूमि में वास्तुकला (महल, बगीचे) का विस्तृत चित्रण मिलता है।
- प्रमुख विषय: राजदरबार के दृश्य, शिकार, त्योहार, संगीत-नृत्य, और पौराणिक कथाएँ (रामायण, महाभारत)।
- प्रसिद्ध चित्रकार: साहिब राम, रामजीदास, और गोवर्धन लाल इस शैली के प्रमुख कलाकार थे।
- विशेषता: जयपुर शैली में लघु चित्रों के साथ-साथ भित्ति चित्र (महलों की दीवारों पर) भी बनाए गए।
30. मोहम्मद अब्दुर्रहमान चुगताई की कला के बारे में विस्तार से लिखिए |
मोहम्मद अब्दुर्रहमान चुगताई (1897-1975) भारतीय चित्रकला के एक प्रसिद्ध कलाकार थे, जो अपनी मुगल शैली की चित्रकारी और लघु चित्रों के लिए जाने जाते हैं।
- कला शैली: उन्होंने मुगल लघु चित्रकला को पुनर्जीवित किया। उनकी कला में बारीक रेखाएँ, सजीव रंग, और विस्तृत पृष्ठभूमि प्रमुख हैं।
- प्रमुख विषय: ऐतिहासिक घटनाएँ (जैसे ताजमहल का निर्माण), पौराणिक कथाएँ, और भारतीय संस्कृति के दृश्य।
- प्रसिद्ध कृतियाँ: "द लास्ट सपर" (अंतिम भोज), "शाहजहाँ का सपना", और "बुद्ध का जीवन" श्रृंखला।
- योगदान: उन्होंने मुगल शैली को आधुनिक संदर्भ में ढाला और भारतीय कला को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई। उन्हें "पद्मश्री" (1970) से सम्मानित किया गया।
अथवा
अबनीद्धनाथ टैगोर का भारतीय कला में क्या योगदान था ? स्पष्ट कीजिए |
अबनीद्रनाथ टैगोर (1871-1951) भारतीय कला के पुनर्जागरण के अग्रदूत थे। उन्होंने बंगाल स्कूल ऑफ आर्ट की स्थापना की और भारतीय चित्रकला को पश्चिमी प्रभाव से मुक्त करने का प्रयास किया।
- योगदान:
- राष्ट्रीय कला का विकास: उन्होंने मुगल और राजपूत शैलियों को पुनर्जीवित किया और भारतीय परंपराओं पर आधारित एक नई शैली विकसित की।
- प्रसिद्ध कृतियाँ: "भारत माता" (1905) उनकी सबसे प्रसिद्ध कृति है, जिसमें भारत को एक देवी के रूप में चित्रित किया गया। अन्य कृतियाँ: "शाहजहाँ की मृत्यु", "बुद्ध और सुजाता"।
- शिक्षा: उन्होंने कलकत्ता के गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ आर्ट में पढ़ाया और कई प्रसिद्ध कलाकारों (जैसे नंदलाल बोस) को प्रशिक्षित किया।
- प्रभाव: उनके प्रयासों से भारतीय कला में आत्मविश्वास लौटा और स्वदेशी आंदोलन को कलात्मक समर्थन मिला।