RBSE Class 12th 2020 Music Vocal Or Instrumental Or Dance-SS-16,63,64,65,66,67,68,69,70,71-2020 Previous Year Papers
Music Vocal Or Instrumental Or Dance-SS-16,63,64,65,66,67,68,69,70,71-2020 from the 2020 exam year is part of the Class 12th previous year papers archive on RBSE Solution. Many learners start here after finishing the textbook to see how questions were actually framed on the Rajasthan Board of Secondary Education (RBSE) paper.
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Paper details
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| Board | RBSE |
|---|---|
| Class | Class 12th |
| Exam year | 2020 |
| Subject | Music Vocal Or Instrumental Or Dance-SS-16,63,64,65,66,67,68,69,70,71-2020 |
| Resource type | Previous Year Papers |
| Category | RBSE Previous Year Question Papers |
| Website | RBSE Solution |
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How to practise with this question paper
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RBSE Class 12th 2020 Music Vocal Or Instrumental Or Dance-SS-16,63,64,65,66,67,68,69,70,71-2020
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Rajasthan Board Class 12th Music Vocal Or Instrumental Or Dance-SS-16,63,64,65,66,67,68,69,70,71-2020 2020 solved Previous Year Question Papers
नामांक Roll No.
No. of Questions — 9×4 SS-6,63,64,65,66,67,68,69,70,71
No. of Printed Pages — 4 Music (V & I & D)
संगीत — HVS अथवा वाद्य अथवा नृत्य
(MUSIC-VOCAL OR INSTRUMENTAL OR DANCE)
उच्च माध्यमिक परीक्षा, 2020
समय : 3¼ घण्टे
पूर्णांक : 24
परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :
GENERAL INSTRUCTIONS TO THE EXAMINEES :
- परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न-पत्र पर नामांक अनिवार्यतः लिखें।
Candidate must write first his / her Roll No. on the question paper compulsorily. - सभी प्रश्न करने अनिवार्य हैं।
All the questions are compulsory. - प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें।
Write the answer to each question in the given answer-book only.
SS-6,63,64,65,66,67,68,69,70,71-Music (V&I & D) [ Turn over
General Instructions (Page 2 of 11)
(4) जिन प्रश्नों में आन्तरिक खण्ड हैं, उन सभी के उत्तर एक साथ ही लिखें।
For questions having more than one part, the answers to those parts are to be written together in continuity.
(5) प्रश्न-पत्र के हिन्दी व अंग्रेजी रूपांतर में किसी प्रकार की त्रुटि/अंतर/विरोधाभास होने पर हिन्दी भाषा के प्रश्न को ही सही मानें।
If there is any error / difference / contradiction in Hindi & English versions of the question paper, the question of Hindi version should be treated valid.
(6) गायन विषय लेने वाले छात्र केवल भाग - अ के सभी प्रश्नों के ही उत्तर लिखें। सितार, सरोद, वायलिन, दिलरूबा अथवा इसराज, बांसुरी व गिटार विषय के परीक्षार्थी केवल भाग - ब के प्रश्नों के ही उत्तर लिखें तथा तबला व पखावज विषय के परीक्षार्थी केवल भाग - स के प्रश्नों के ही उत्तर लिखें तथा कथक नृत्य विषय के परीक्षार्थी केवल भाग - द के प्रश्नों के ही उत्तर लिखें।
Candidates offering vocal music should attempt only the questions of Part - A. Candidates offering Sitar, Sarod, Violin, Dilruba or Israj, Flute and Guitar should attempt only the questions of Part — B and candidates offering Tabla and Pakhawaj should attempt only the questions of Part — C and candidates offering Kathak Dance should attempt only the questions of Part — D.
(7) उत्तर-पुस्तिका के मुखपृष्ठ पर विषय स्पष्ट रूप से लिखें।
Write your subject clearly on the cover page of the answer book.
SS-6,63,64,65,66,67,68,69,70,71-Music (V & I & D)
भाग -अ (संगीत - गायन) PART-A (Music — Vocal)
अति लघूत्तरात्मक प्रश्न, प्रत्येक प्रश्न ५ अंक (शब्द सीमा 20 शब्द) :
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आलाप' अथवा तान' की परिभाषा दीजिए |
Give definition of ‘Alap’ or ‘Tan’.आलाप: राग के स्वरों को मात्रा और लय के नियमों से मुक्त होकर, धीमी गति में विस्तारपूर्वक गाना आलाप कहलाता है।
तान: राग के स्वरों को तीव्र गति में, लयबद्ध रूप से गाना तान कहलाता है।
-
पाठ्यक्रम की किसी राग का 'आरोह' लिखिए |
Write ‘Aroha’ of any Raga from syllabus.राग भैरव का आरोह: सा रे ग म प ध नि सां
राग पहचानिए : Identify the Raga :
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निधमपधमग।
Ni Dha Ma Pa Dha Ma Ga.राग: भैरवी
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सारेग,पग, धपग।
Sa Re Ga, Pa Ga, Dha Pa Ga.राग: यमन
-
ग्वालियर घराने के जन्मदाता का नाम बताइए |
Write the name of the founder of Gwalior Gharana.उत्तर: उस्ताद नाथन पीर बख्श (Nathan Peer Baksh)
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पं. भीमसेन जोशी किस घराने से सम्बन्धित हैं ?
Pt. Bhimsen Joshi is related to which Gharana ?उत्तर: पं. भीमसेन जोशी किराना घराने से सम्बन्धित हैं।
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पं. जसराज का जन्म कब व कहाँ हुआ ?
When and where Pt. Jasraj was born ?उत्तर: पं. जसराज का जन्म 28 जनवरी 1930 को हरियाणा के हिसार जिले के पिली मंडोरी गाँव में हुआ था।
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उस्ताद अल्लादिया खाँ के गुरु का नाम बताइए |
Write the name of Ustad Alladiya Khan’s Guru.उत्तर: उस्ताद अल्लादिया खाँ के गुरु उनके पिता उस्ताद अहमद खाँ थे।
लघूत्तरात्मक प्रश्न (शब्द सीमा 20-50 शब्द) :
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सन्धि प्रकाश राग' से आप क्या समझते हैं ?
What do you mean by ‘Sandhi Prakash Raga’ ?सन्धि प्रकाश राग: वे राग जो संधि काल (सूर्योदय और सूर्यास्त के समय) में गाए जाते हैं, सन्धि प्रकाश राग कहलाते हैं। इनमें कोमल रिषभ और कोमल धैवत का प्रयोग होता है। उदाहरण: राग भैरव, राग मारवा, राग पूरिया आदि।
प्रश्न पत्र – संगीत (वाद्य एवं नृत्य) 2020
लघूत्तरात्मक प्रश्न (प्रत्येक प्रश्न 2 अंक, शब्द सीमा 80-150 शब्द)
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‘नाट्यशास्त्र’ के कौन से अध्याय संगीत से सम्बन्धित हैं?
Which chapters of “Natya Shastra” are related to Music?‘नाट्यशास्त्र’ में संगीत से सम्बन्धित मुख्य अध्याय 28 से 33 तक हैं। इनमें स्वर, राग, ताल, वाद्य, गायन एवं नृत्य का विस्तृत वर्णन है। विशेष रूप से अध्याय 28 (स्वराध्याय), 29 (रागाध्याय), 30 (तालाध्याय), 31 (वाद्याध्याय), 32 (गीताध्याय) और 33 (नृत्याध्याय) संगीत के विभिन्न पहलुओं को समझाते हैं।
-
किराना घराने की मुख्य विशेषताएँ लिखिए।
Write main characteristics of Kirana Gharana.किराना घराने की मुख्य विशेषताएँ:
- स्वरों की शुद्धता एवं सूक्ष्मता पर बल
- मीड (गमक) का प्रयोग कम, सीधे स्वरों पर जोर
- राग विस्तार में बड़ी खुली तानों का प्रयोग
- आलाप में धीमी गति से राग का सौंदर्य प्रस्तुत करना
- बंदिशों में सरलता एवं भावपूर्णता
- प्रसिद्ध गायक: अब्दुल करीम खाँ, सवाई गंधर्व, भीमसेन जोशी
-
राग ‘भैरवी’ की ‘जाति’ और ‘गायन-समय’ लिखिए।
Write the ‘Jati’ and ‘Singing time’ of Raga ‘Bhairavi’.राग भैरवी:
- जाति: संपूर्ण-संपूर्ण (सातों स्वर आरोह-अवरोह में प्रयोग होते हैं)
- गायन-समय: प्रातःकाल (सुबह 6-9 बजे) – यह एक प्रातःकालीन राग है।
-
‘एकताल’ और ‘चौताल’ की समानताएँ लिखिए।
Write the similarities of ‘Ektala’ and ‘Chautala’.एकताल और चौताल की समानताएँ:
- दोनों में 12 मात्राएँ होती हैं
- दोनों के विभाग (ताली-खाली) समान होते हैं: 2+2+2+2+2+2
- दोनों में 6 ताली और 6 खाली का क्रम होता है
- दोनों का सम (पहली मात्रा) पर जोर होता है
- दोनों का प्रयोग ध्रुपद एवं ख्याल गायन में होता है
लघूत्तरात्मक प्रश्न (प्रत्येक प्रश्न 2 अंक, शब्द सीमा 80-150 शब्द)
-
‘संगीत रत्नाकर’ की संक्षिप्त व्याख्या कीजिए।
Describe ‘Sangeet Ratnakar’ briefly.‘संगीत रत्नाकर’ संगीत का एक प्राचीन एवं महत्वपूर्ण ग्रंथ है, जिसकी रचना 13वीं शताब्दी में पंडित शारंगदेव ने की थी। यह संस्कृत भाषा में लिखा गया है और इसमें सात अध्याय हैं। इसमें स्वर, राग, ताल, वाद्य, गायन, नृत्य एवं संगीत के सैद्धांतिक पहलुओं का विस्तृत वर्णन है। यह हिंदुस्तानी एवं कर्नाटक दोनों संगीत पद्धतियों का आधार माना जाता है।
-
‘तानपूरे’ का सचित्र अंग वर्णन कीजिए।
Describe the parts of “Tanpura” with diagram.तानपूरे के अंग:
- तुंबा (गोलाकार भाग): लौकी या लकड़ी का बना, ध्वनि उत्पन्न करने वाला मुख्य भाग
- डांडी (लंबा भाग): लकड़ी का बना, तारों को सहारा देता है
- पेटी (ऊपरी भाग): लकड़ी का पट्टा, जिस पर तार बंधे होते हैं
- मेरु (ऊपरी खूंटी): तारों को कसने-ढीला करने के लिए
- तार (4 तार): पंचम, षड्ज, षड्ज, मध्यम (नीचे से ऊपर)
- जवारी (घोड़ी): तारों को सहारा देने वाली हड्डी/लकड़ी
(चित्र के लिए तानपूरे का सामान्य आकार देखें)
-
राग ‘मालकौंस’ अथवा राग ‘खमाज’ का परिचय, आरोह-अवरोह सहित लिखिए।
Write the introduction of “Raga Malkauns” or “Raga Khamaj” with Aroha and Avaroha.राग मालकौंस:
- थाट: भैरवी
- जाति: औडव-औडव (पाँच स्वर)
- वादी: मध्यम (म)
- संवादी: षड्ज (स)
- आरोह: स, ग, म, ध, नि, स’
- अवरोह: स’, नि, ध, म, ग, स
- गायन-समय: रात्रि का दूसरा प्रहर (रात 9-12 बजे)
राग खमाज:
- थाट: खमाज
- जाति: संपूर्ण-संपूर्ण (सात स्वर)
- वादी: गंधार (ग)
- संवादी: निषाद (नि)
- आरोह: स, ग, म, प, ध, नि, स’
- अवरोह: स’, नि, ध, प, म, ग, रे, स
- गायन-समय: रात्रि का प्रथम प्रहर (रात 6-9 बजे)
निबन्धात्मक प्रश्न (प्रत्येक प्रश्न 3 अंक, शब्द सीमा 300-400 शब्द)
-
हिन्दुस्तानी तथा कर्नाटक संगीत पद्धति में भिन्नताएँ स्पष्ट कीजिए।
Explain the differences between ‘Hindustani’ and ‘Karnatak’ music system.हिन्दुस्तानी एवं कर्नाटक संगीत में मुख्य भिन्नताएँ:
क्रम हिन्दुस्तानी संगीत कर्नाटक संगीत 1. उत्तर भारत में प्रचलित दक्षिण भारत में प्रचलित 2. 10 थाटों पर आधारित 72 मेलकर्ता रागों पर आधारित 3. गायन में ख्याल, ध्रुपद, ठुमरी प्रमुख गायन में कृति, वर्णम, कीर्तन प्रमुख 4. ताल प्रणाली में तालों की संख्या कम ताल प्रणाली में 35 तालें 5. स्वरों में मीड, गमक, आंदोलन का प्रयोग स्वरों में शुद्धता एवं स्थिरता पर बल 6. रागों में समय सिद्धांत महत्वपूर्ण रागों में समय सिद्धांत कम महत्वपूर्ण 7. वाद्यों में सितार, सरोद, तबला प्रमुख वाद्यों में वीणा, मृदंगम, घटम प्रमुख -
पाठ्यक्रम के किसी एक राग की ‘स्वरमालिका’ (सरगम गीत) लिपिबद्ध कीजिए।
Write the notation of ‘Swarmalika’ (Sargam Geet) of any one Raga from the syllabus.राग भैरवी की स्वरमालिका (सरगम गीत):
ताल: तीनताल (16 मात्राएँ)
लय: मध्य
स्वर संकेत: स = षड्ज, रे = ऋषभ,
भाग-ब (संगीत - स्वर वाद्य)
(सितार/सरोद/वॉयलिन/दिलरूबा-इसराज/बांसुरी/गिटार)
PART - B (Music — Melody Instrument)
(Sitar/Sarod/Violin/Dilruba-Israj/Flute/Guitar)
अति लघूत्तरात्मक प्रश्न, प्रत्येक प्रश्न 8 अंक (शब्द सीमा 20 शब्द):
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“कृन्तन” की परिभाषा लिखिए।
Write the definition of ‘Krintan’.
उत्तर: कृन्तन एक वादन शैली है जिसमें तारों को खींचकर या दबाकर स्वर को तोड़ा जाता है, जिससे एक विशिष्ट प्रकार की ध्वनि उत्पन्न होती है।
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पाठ्यक्रम के किसी राग का 'अवरोह' लिखिए।
Write the “Avaroha” of any Raga from your syllabus.
उत्तर: राग यमन का अवरोह: नि ध प म ग रे सा।
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“ज़ाफरख़ानी बाज” के प्रवर्तक का नाम लिखिए।
Write the founder’s name of ‘Zafarkhani Baaj’.
उत्तर: ज़ाफरख़ानी बाज के प्रवर्तक उस्ताद ज़ाफर खाँ हैं।
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“पं. रविशंकर” किस घराने से सम्बन्धित हैं?
“Pt. Ravi Shankar” is related to which Gharana?
उत्तर: पं. रविशंकर मैहर घराने से सम्बन्धित हैं।
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उस्ताद विलायत खाँ का जन्म कब व कहाँ हुआ?
Where and when Ustad Vilayat Khan was born?
उत्तर: उस्ताद विलायत खाँ का जन्म 28 अगस्त 1928 को गौरीपुर, बांग्लादेश में हुआ था।
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डॉ. एन. राजम को प्रदत्त किन्हीं दो पुरस्कारों का उल्लेख कीजिए।
Write the name of any two awards received by Dr. N. Rajam.
उत्तर: डॉ. एन. राजम को पद्मश्री और संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार प्राप्त हुए हैं।
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राग पहचानिये:
Identify the Raga:
म ग म ध नि ध म।
Ma Ga Ma Dha Ni Dha Ma.
नि सा, ग म प, ग म ग।
Ni Sa, Ga Ma Pa, Ga Ma Ga.
उत्तर: यह राग भीमपलासी है।
लघूत्तरात्मक प्रश्न, प्रत्येक प्रश्न 8 अंक (शब्द सीमा 20-50 शब्द):
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“श्री मल्लक्ष्यसंगीतम्” किस भाषा में लिखा गया है व इसमें कितने अध्याय हैं?
‘Shri Mallakshya Sangeetam’ is written in which language and how many chapters are in it?
उत्तर: “श्री मल्लक्ष्यसंगीतम्” संस्कृत भाषा में लिखा गया है। इसमें कुल 4 अध्याय हैं।
SS-6,63,64,65,66,67,68,69,70,7-Music (V & I & D)
प्रश्न पत्र – संगीत (वाद्य एवं नृत्य) – 2020
अति लघूत्तरात्मक प्रश्न (प्रत्येक प्रश्न 1 अंक)
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भरत ने नाट्यशास्त्र में कितने शुद्ध और विकृत स्वरों का उल्लेख किया है?
How many ‘Shuddha’ and ‘Vikrat’ swars are mentioned by Bharat in ‘Natya Shastra’?
उत्तर: भरत ने नाट्यशास्त्र में 7 शुद्ध स्वरों और 22 विकृत स्वरों (श्रुतियों) का उल्लेख किया है।
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“इमदाद खानी बाज” की दो विशेषताएँ लिखिए।
Write two characteristics of ‘Imdad Khani Baaj’.
उत्तर: इमदाद खानी बाज की दो विशेषताएँ:
- इसमें मिजराब (जवा) का प्रयोग अधिक होता है, जिससे मीड और गमक जैसी क्रियाएँ सरलता से की जा सकती हैं।
- इस बाज में तारों पर उंगलियों के स्थान पर मिजराब से बजाने पर बोल स्पष्ट और मधुर निकलते हैं।
-
राग बिहाग की जाति और गायन-समय लिखिए।
Write the Jati and Singing time of Raga “Bihag”.
उत्तर: राग बिहाग की जाति – संपूर्ण-संपूर्ण (सात स्वर आरोह और अवरोह में) है। गायन-समय – रात्रि का दूसरा प्रहर (लगभग 9 बजे से 12 बजे तक) है।
-
“त्रिताल” और “पंजाबी ताल” की समानताएँ लिखिए।
Write the similarities of ‘Tritala’ and ‘Punjabi’ tala.
उत्तर: त्रिताल और पंजाबी ताल की समानताएँ:
- दोनों तालों में 16 मात्राएँ होती हैं।
- दोनों तालों के विभाग (ताली-खाली) समान होते हैं – 4, 4, 4, 4 मात्राओं के चार विभाग।
लघूत्तरात्मक प्रश्न (प्रत्येक प्रश्न 2 अंक, शब्द सीमा 100-150 शब्द)
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“समय चक्र” में पूर्वांग और उत्तरांग को समझाइए।
Explain the ‘Poorvang’ and ‘Uttrang’ in ‘Samaya Chakra’.
उत्तर: समय चक्र में रागों को उनके गायन-समय के अनुसार दो भागों में बांटा गया है:
- पूर्वांग: इसमें वे राग आते हैं जिनका गायन-समय दिन के पहले भाग (प्रातः 12 बजे से मध्यरात्रि 12 बजे तक) में होता है। इन रागों में षड्ज, ऋषभ, गंधार, मध्यम स्वरों का प्रभाव अधिक होता है।
- उत्तरांग: इसमें वे राग आते हैं जिनका गायन-समय रात्रि के पहले भाग (मध्यरात्रि 12 बजे से प्रातः 12 बजे तक) में होता है। इन रागों में पंचम, धैवत, निषाद स्वरों का प्रभाव अधिक होता है।
-
अपने चयनित वाद्य का सचित्र अंग वर्णन कीजिए।
Describe the parts of your selected instrument with diagram.
उत्तर: (यहाँ सितार का वर्णन किया गया है)
सितार के प्रमुख अंग:
- तुंबा (Tumba): सितार का निचला गोलाकार भाग, जो लौकी या कद्दू से बनता है।
- डांडी (Dandi): लकड़ी की लंबी पट्टी जो तुंबा से जुड़ी होती है, जिस पर फ्रेट (पर्दे) लगे होते हैं।
- पेटी (Peti): डांडी के ऊपरी सिरे पर लगा लकड़ी का खोखला भाग, जिसमें खूंटियाँ लगी होती हैं।
- खूंटियाँ (Khuntiyan): तारों को कसने और ढीला करने के लिए।
- तार (Taar): मुख्यतः 7 तार (4 बजाने वाले, 3 चिकारी के) और 11-13 सहायक तार (तरफदार)।
- पर्दे (Parde): धातु के गोलाकार फ्रेट जो डांडी पर बंधे होते हैं।
- जवारी (Jawari): तुंबा पर लगी हड्डी की पट्टी जिस पर तार टिकते हैं और ध्वनि उत्पन्न होती है।
(चित्र का वर्णन: एक सितार का चित्र जिसमें तुंबा, डांडी, पेटी, खूंटियाँ, तार और पर्दे स्पष्ट रूप से दर्शाए गए हैं।)
-
राग भैरवी अथवा राग वृन्दावनी सारंग का परिचय आरोह-अवरोह सहित लिखिए।
Write the introduction of ‘Raga Bhairavi’ or ‘Raga Vrindavani Sarang’ with Aroha and Avaroha.
उत्तर (राग भैरवी):
- थाट: भैरवी
- जाति: संपूर्ण-संपूर्ण
- वादी स्वर: म (मध्यम)
- संवादी स्वर: स (षड्ज)
- गायन समय: प्रातःकाल (सूर्योदय के समय)
- आरोह: स रे ग म प ध नि सां
- अवरोह: सां नि ध प म ग रे स
- पकड़: ग म ध नि सां, नि ध प म ग रे स
अथवा (राग वृन्दावनी सारंग):
- थाट: काफी
- जाति: औड़व-संपूर्ण (आरोह में 5, अवरोह में 7 स्वर)
- वादी स्वर: ग (गंधार)
- संवादी स्वर: नि (निषाद)
- गायन समय: दोपहर (लगभग 12 बजे से 3 बजे तक)
- आरोह: नि स ग म प नि सां
- अवरोह: सां नि प म ग रे स
- पकड़: नि स ग म प नि, प म ग रे स
निबन्धात्मक प्रश्न (प्रत्येक प्रश्न 3 अंक, शब्द सीमा 300-400 शब्द)
-
हिन्दुस्तानी तथा कर्नाटक संगीत पद्धति की तुलनात्मक विवेचना कीजिए।
Describe the comparative study of Hindustani and Karnatak Music System.
उत्तर: हिन्दुस्तानी और कर्नाटक संगीत भारतीय शास्त्रीय संगीत की दो प्रमुख शाखाएँ हैं। दोनों की उत्पत्ति एक ही स्रोत (सामवेद) से हुई है, लेकिन समय के साथ इनमें अंतर विकसित हुए।
समानताएँ:
- दोनों में स्वर, राग और ताल की अवधारणा समान है।
- दोनों में मुख्यतः 7 शुद्ध स्वर (सा, रे, ग, म, प, ध, नि) प्रयोग होते हैं।
- दोनों में रागों का वर्गीकरण थाट/मेल के आधार पर होता है।
अंतर:
- राग प्रणाली: हिन्दुस्तानी में रागों को 10 थाटों में बांटा गया है, जबकि कर्नाटक में 72 मेलकर्ता राग हैं।
- गायन शैली: हिन्दुस्तानी में ख्याल, ध्रुपद, ठुमरी आदि गायन शैलियाँ प्रमुख हैं, जबकि कर्नाटक में कृति, वर्णम, रागमालिका आदि।
- ताल प्रणाली: हिन्दुस्तानी में तालों की संख्या लगभग 30-40 है, जबकि कर्नाटक में 108 ताल हैं।
- वाद्य: हिन्दुस्तानी में तबला, सितार, सरोद प्रमुख हैं, जबकि कर्नाटक में मृदंगम, वीणा, वायलिन प्रमुख हैं।
- प्रभाव: हिन्दुस्तानी संगीत पर मुगल और फारसी संगीत का प्रभाव अधिक है, जबकि कर्नाटक संगीत अधिक पारंपरिक और धार्मिक है।
दोनों पद्धतियाँ भारतीय संगीत की समृद्ध परंपरा का प्रतिनिधित्व करती हैं और आज भी जीवंत हैं।
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पंजाबी ताल अथवा त्रिताल को दुगुन सहित लिखिए।
Write Punjabi Tala or Tritala with Dugun.
अथवा / OR
अपने पाठ्यक्रम के किसी राग की रज़ाखानी गत को स्वरलिपिबद्ध कीजिए।
Write the notation of any one Raga’s Razakhani Gata from your syllabus.
उत्तर (त्रिताल दुगुन सहित):
त्रिताल (16 मात्राएँ):
मात्रा 1 2 3 4 5 6 7 8 भाग-स (संगीत - ताल वाद्य) (तबला/पखावज)
PART - C (Rhythm Instruments) (Tabla/Pakhawaj)
अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न (प्रत्येक प्रश्न हेतु शब्द सीमा 20 शब्द)
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हाथ से ताल प्रदर्शन की रीति क्या कहलाती है?
What is called the presentation of Tala by hand?
उत्तर: हाथ से ताल प्रदर्शन की रीति 'क्रिया' कहलाती है।
-
"जरब" की परिभाषा दीजिए।
Define 'Jarab'.
उत्तर: जरब तबले का एक वादन शैली है जिसमें बोलों को तीव्र गति से बजाया जाता है, जिससे एक विशेष लयात्मक प्रभाव उत्पन्न होता है।
-
ऐसी दो तालों के नाम लिखिए जिनमें आठवीं मात्रा पर खाली आता है।
Write the names of two talas which are having Khali on 8th beat.
उत्तर: दो तालें जिनमें आठवीं मात्रा पर खाली आता है: (1) तीन ताल (त्रिताल), (2) एक ताल।
-
"त्रिताल" का परिचय लिखिए।
Write introduction of Tritala.
उत्तर: त्रिताल (तीन ताल) 16 मात्राओं की एक ताल है जिसमें 4 विभाग होते हैं (4+4+4+4)। इसकी ताली 1, 5, 13 पर और खाली 9वीं मात्रा पर होती है। यह सबसे लोकप्रिय तालों में से एक है।
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"बाँसुरी" और "शहनाई", वाद्यों की किस श्रेणी में आते हैं?
"Flute and Shehnai" come in which category of Instruments?
उत्तर: बाँसुरी और शहनाई 'सुषिर वाद्य' (Wind Instruments) श्रेणी में आते हैं, जिनमें फूंक मारकर ध्वनि उत्पन्न की जाती है।
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तत वाद्यों के कोई दो उदाहरण दीजिए।
Give example of any two string instruments.
उत्तर: तत वाद्यों (String Instruments) के दो उदाहरण: (1) सितार, (2) वीणा।
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"अजराड़ा बाज" के प्रवर्तक का नाम लिखिए।
Write the name of the founder of 'Ajrada Baaj'.
उत्तर: अजराड़ा बाज के प्रवर्तक पंडित सिद्धार खाँ हैं।
-
"बाज" से क्या तात्पर्य है?
What is the meaning of Baaj?
उत्तर: बाज से तात्पर्य तबला या पखावज वादन की एक विशेष शैली या परंपरा से है, जो गुरु-शिष्य परंपरा में विकसित हुई है।
लघूत्तरात्मक प्रश्न (प्रत्येक प्रश्न हेतु शब्द सीमा 20-50 शब्द)
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रिला को विस्तार से समझाइए।
Explain 'Rela' in detail.
उत्तर: रिला तबला वादन की एक महत्वपूर्ण शैली है जिसमें बोलों को अत्यंत तीव्र गति (द्रुत लय) में बजाया जाता है। इसमें विशेष रूप से 'धा', 'तिन', 'ना', 'कट', 'गे' जैसे बोलों का प्रयोग होता है। रिला में बोलों की पुनरावृत्ति और लयात्मक संरचना पर जोर दिया जाता है, जिससे एक सतत ध्वनि प्रवाह उत्पन्न होता है। यह तबले की प्रस्तुति में चरमोत्कर्ष लाने के लिए प्रयोग किया जाता है।
लय के मुख्य भेद
लय के तीन मुख्य भेद होते हैं:
- विलम्बित लय – धीमी गति
- मध्य लय – मध्यम गति
- द्रुत लय – तेज गति
चक्करदार तिहाई
पाठ्यक्रम की किसी ताल में एक चक्करदार तिहाई का उदाहरण:
ताल: तीनताल (16 मात्रा)
चक्करदार तिहाई: धा धिं धिं धा | धा धिं धिं धा | धा तिं तिं ता | ता धिं धिं धा | धा धिं धिं धा | धा तिं तिं ता | ता धिं धिं धा | धा धिं धिं धा | धा तिं तिं ता ||
यह तिहाई तीन बार दोहराई गई है और प्रत्येक आवृत्ति के अंत में सम पर आकर मिलती है।
स्वामी रामशंकरदास का जन्म-स्थान व जन्मतिथि
जन्म-स्थान: गाँव बड़गाँव, जिला झुंझुनू, राजस्थान
जन्मतिथि: 15 अगस्त 1915
पखावज और तबला वादकों के नाम
पखावज वादक:
- पंडित अयोध्या प्रसाद
- पंडित पुरुषोत्तम दास
तबला वादक:
- उस्ताद अल्ला रक्खा खान
- पंडित किशन महाराज
लघूत्तरात्मक प्रश्न (प्रत्येक 2 अंक, शब्द सीमा 100-150 शब्द)
झपताल और सूलताल में अन्तर
क्र. झपताल सूलताल 1 मात्राएँ: 10 मात्राएँ: 10 2 विभाग: 4 (2+3+2+3) विभाग: 4 (2+2+2+4) 3 ताली-खाली: ताली 1,2,4; खाली 3 ताली 1,2,3; खाली 4 4 बोल: धिं ना धिं धिं ना | तिं ना धिं धिं ना बोल: धा धिं धा धिं | धा तिं ता तिं | ता तिं ता तिं | धा धा धा धा 5 लय: मध्यम लय: विलम्बित या मध्यम अपने चयनित वाद्य का सचित्र वर्णन
चयनित वाद्य: तबला
तबला एक प्रमुख भारतीय ताल वाद्य है। इसमें दो भाग होते हैं:
- दायाँ तबला (दया): लकड़ी का बना, ऊपर चमड़ा मढ़ा, स्वर उत्पन्न करता है।
- बायाँ तबला (बायाँ): धातु या मिट्टी का बना, गहरी ध्वनि देता है।
चित्र: [यहाँ तबले का चित्र होगा जिसमें दायाँ और बायाँ तबला दिखाया गया है।]
पाठ्यक्रम के किसी ताल वादक का जीवन परिचय
ताल वादक: पंडित किशन महाराज
पंडित किशन महाराज का जन्म 3 सितंबर 1923 को वाराणसी में हुआ। वे बनारस घराने के प्रसिद्ध तबला वादक थे। उन्होंने पंडित हरि महाराज से तबला सीखा। उन्हें पद्म श्री (1973) और पद्म भूषण (2002) से सम्मानित किया गया। उनकी शैली में बोल, लयकारी और तिहाइयों का विशेष प्रयोग होता था।
निबन्धात्मक प्रश्न (प्रत्येक 3 अंक, शब्द सीमा 300-400 शब्द)
ताल 'झूमरा' या 'दीपचंदी' की दुगुन, तिगुन एवं चौगुन
ताल: झूमरा (14 मात्रा)
बोल: धिं धिं ना धा | तिं तिं ना धा | धिं धिं ना धा | तिं तिं ना धा
दुगुन (दोगुनी गति): प्रति मात्रा में दो बोल
धिं धिं ना धा तिं तिं ना धा | धिं धिं ना धा तिं तिं ना धा | ...
तिगुन (तीन गुनी गति): प्रति मात्रा में तीन बोल
धिं धिं ना धा तिं तिं ना धा धिं धिं ना धा | तिं तिं ना धा धिं धिं ना धा तिं तिं ना धा | ...
चौगुन (चार गुनी गति): प्रति मात्रा में चार बोल
धिं धिं ना धा तिं तिं ना धा धिं धिं ना धा तिं तिं ना धा | ...
राजस्थान के किन्हीं दो लोक अवनद्ध वाद्यों का सचित्र वर्णन
1. ढोलक: यह राजस्थान का प्रमुख लोक वाद्य है। यह लकड़ी का बना होता है, दोनों ओर चमड़ा मढ़ा होता है। इसे हाथों से बजाया जाता है। इसका उपयोग भजन, लोकगीत और नृत्य में होता है।
चित्र: [यहाँ ढोलक का चित्र होगा]
2. नगाड़ा: यह धातु का बना होता है, एक ओर चमड़ा मढ़ा होता है। इसे डंडों से बजाया जाता है। इसका उपयोग शादी-विवाह और त्योहारों में होता है।
चित्र: [यहाँ नगाड़े का चित्र होगा]
बनारस घराना और अजगराड़ा बाज की प्रमुख विशेषताएँ
बनारस घराना:
- स्थापना: पंडित राम सहाय द्वारा 18वीं शताब्दी में
- विशेषता: बोलों का स्पष्ट उच्चारण, तिहाइयों का प्रचुर प्रयोग
- शैली: खुली और गूँजती ध्वनि, बायें तबले का विशेष प्रयोग
- प्रमुख वादक: पंडित किशन महाराज, पंडित शमा प्रसाद
अजगराड़ा बाज:
- स्थापना: उस्ताद सिद्धार खान द्वारा
- विशेषता: तेज गति, जटिल लयकारी, छोटे बोलों का प्रयोग
- शैली: सूक्ष्म और सटीक, दायें तबले पर अधिक जोर
- प्रमुख वादक: उस्ताद हबीबुद्दीन खान, उस्ताद अहमद जान थिरकवा
भाग-द (कथक नृत्य) / Part-D (Kathak Dance)
अति लघु उत्तरीय प्रश्न (प्रत्येक प्रश्न 5 अंक, शब्द सीमा 20 शब्द)
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“अभिनय” के कितने अंग होते हैं?
How many parts of “Abhinaya”?अभिनय के चार अंग होते हैं: आंगिक, वाचिक, आहार्य और सात्विक।
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संगीत रत्नाकर के अनुसार संगीत की परिभाषा लिखिए।
Write the definition of Music according to ‘Sangeet Ratnakar’.संगीत रत्नाकर के अनुसार, “गीतं वाद्यं तथा नृत्यं त्रयं संगीतमुच्यते” अर्थात गीत, वाद्य और नृत्य इन तीनों के सम्मिलन को संगीत कहते हैं।
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‘नाट्य’ क्या है?
What is ‘Natya’?नाट्य वह कला है जिसमें अभिनय, संवाद, संगीत और नृत्य के माध्यम से किसी कथा या भाव को प्रस्तुत किया जाता है। यह नृत्य, गीत और वाद्य का सम्मिलित रूप है।
-
शास्त्रीय नृत्यों के साथ गाई जाने वाली दो गायन शैलियों के नाम लिखिए।
Write names of two singing styles which are used with classical dances.शास्त्रीय नृत्यों के साथ गाई जाने वाली दो गायन शैलियाँ हैं: (1) ध्रुपद, (2) ख्याल।
सुमेलित कीजिए / Match the following:
क्र. वस्तु सही मिलान 5. बनारस घराना (Banaras Gharana) सितारा देवी (Sitara Devi) 6. लखनऊ घराना (Lucknow Gharana) बिंदादीन महाराज (Bindadeen Maharaj) 7. कालबेलिया नृत्य (Kalbeliya Dance) गुलाबो (Gulabo) 8. कुचिपुड़ि नृत्य (Kuchipudi Dance) सितेन्द्र योगी (Sitendra Yogi) व्याख्या: बनारस घराने की प्रसिद्ध नृत्यांगना सितारा देवी हैं। लखनऊ घराने के प्रवर्तक बिंदादीन महाराज हैं। कालबेलिया नृत्य राजस्थान का लोक नृत्य है जिसे गुलाबो ने प्रसिद्ध किया। कुचिपुड़ि नृत्य के प्रसिद्ध कलाकार सितेन्द्र योगी हैं।
लघूत्तरात्मक प्रश्न (प्रत्येक प्रश्न 1 अंक, शब्द सीमा 20-50 शब्द)
प्रश्न 9. ‘लास्य’ व ‘तांडव’ में अंतर स्पष्ट कीजिए।
Write the difference between ‘Lasya’ and ‘Tandav’.
उत्तर: लास्य कोमल, मधुर एवं स्त्री प्रधान नृत्य है, जिसमें भाव-प्रधानता होती है। तांडव उग्र, तीव्र एवं पुरुष प्रधान नृत्य है, जिसमें लय-प्रधानता होती है। लास्य में हाव-भाव और सौंदर्य पर बल दिया जाता है, जबकि तांडव में शक्ति और गति का प्रदर्शन होता है।
प्रश्न 10. ‘नृत्त’ व ‘नृत्य’ को संक्षेप में समझाइए।
Explain ‘Nritt’ and ‘Nritya’ briefly.
उत्तर: नृत्त में केवल शुद्ध नृत्य क्रियाएँ (मुद्राएँ, गति, लय) होती हैं, इसमें भाव या अभिनय नहीं होता। नृत्य में भाव, रस और अभिनय का समावेश होता है, जो किसी कथा या भावना को व्यक्त करता है। नृत्त तकनीकी पक्ष है, जबकि नृत्य अभिव्यंजनात्मक पक्ष।
प्रश्न 11. राजस्थानी लोक नृत्यों के साथ बजने वाले ‘चार’ वाद्यों के नाम लिखिए।
Write the names of ‘four’ instruments which are played with Rajasthani folk dances.
उत्तर: राजस्थानी लोक नृत्यों में प्रयुक्त चार प्रमुख वाद्य हैं:
- ढोल
- नगाड़ा
- सारंगी
- मंजीरा
प्रश्न 12. केवल पुरुषों द्वारा किए जाने वाले नृत्य की विशेषताएँ लिखिए।
Write characteristics of the dance which is presented only by men.
उत्तर: केवल पुरुषों द्वारा किए जाने वाले नृत्य (जैसे भवाई, कच्छी घोड़ी) की विशेषताएँ: इसमें तीव्र गति, शक्ति प्रदर्शन, उछल-कूद, और वीर रस की प्रधानता होती है। वेशभूषा पारंपरिक होती है, और इसमें अक्सर युद्ध या शौर्य का प्रदर्शन किया जाता है।
प्रश्न 13. शास्त्रीय व लोकनृत्य के दो-दो कलाकारों के नाम लिखिए।
Write names of two classical and two folk dance artists.
उत्तर:
- शास्त्रीय नृत्य कलाकार: पंडित बिरजू महाराज (कथक), मृणालिनी साराभाई (भरतनाट्यम)
- लोक नृत्य कलाकार: गुलाबो सपेरा (कालबेलिया), भंवरी देवी (गेर नृत्य)
लघूत्तरात्मक प्रश्न (प्रत्येक प्रश्न 2 अंक, शब्द सीमा 100-150 शब्द)
प्रश्न 14. “तराना” गायन शैली की व्याख्या कीजिए।
Describe ‘Tarana’ singing style.
उत्तर: तराना हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की एक गायन शैली है, जिसमें निरर्थक शब्दों (जैसे ताना, देम, तोम, नोम) का प्रयोग किया जाता है। यह शैली मध्य या द्रुत लय में गाई जाती है और इसमें बोल-बांट, तानों और लयकारी पर जोर होता है। तराना की उत्पत्ति फारसी संगीत से मानी जाती है, और इसे अमीर खुसरो ने लोकप्रिय बनाया। इसमें सरगम और बोलों का मिश्रण होता है, जो श्रोताओं को लयात्मक आनंद प्रदान करता है।
प्रश्न 15. जयपुर व लखनऊ घरानों की विशेषताओं की तुलनात्मक विवेचना कीजिए।
Give comparative study of the characteristics of Jaipur and Lucknow Gharanas.
उत्तर: जयपुर घराने में लयकारी, ठेका और बोल-बांट पर अधिक बल दिया जाता है, जबकि लखनऊ घराने में भाव-प्रधानता, अभिनय और नाजुक हरकतों पर जोर होता है। जयपुर घराने की बंदिशें तीव्र गति और जटिल लय पैटर्न के लिए जानी जाती हैं, जबकि लखनऊ घराने में ठुमरी, दादरा और गजल का प्रभाव अधिक है। जयपुर घराने में पैरों की थाप और चक्कर प्रमुख हैं, जबकि लखनऊ घराने में मुद्राओं और चेहरे के भावों पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
प्रश्न 16. अपने पाठ्यक्रम में से किसी एक शास्त्रीय नृत्य के बारे में जानकारी दीजिए।
Explain any one classical dance from your syllabus.
उत्तर: कथक उत्तर भारत का प्रमुख शास्त्रीय नृत्य है। इसकी उत्पत्ति कथा वाचन की परंपरा से हुई। कथक में तीव्र गति के चक्कर, पैरों की थाप (तत्कार), और अभिनय प्रमुख हैं। यह नृत्य ताल और लय पर आधारित है। कथक के तीन प्रमुख घराने हैं: जयपुर, लखनऊ और बनारस। इसमें मुख्यतः वंदना, आमद, परन, तोड़े, और तुकड़े प्रस्तुत किए जाते हैं। वेशभूषा में घूमरदार लहंगा, चोली और ओढ़नी शामिल है।
निबन्धात्मक प्रश्न (प्रत्येक प्रश्न 3 अंक, शब्द सीमा 300-400 शब्द)
प्रश्न 17. पाठ्यक्रम की किसी एक ताल को ठाह, दुगुन व चौगुन सहित लिखिए।
Write any one tala with Thah, Dugun and Chaugun from syllabus.
उत्तर: ताल: तीनताल (16 मात्राएँ)
ठाह (मूल लय): धा धिं धिं धा | धा धिं धिं धा | धा तिं तिं ता | ता धिं धिं धा ||
दुगुन (दोगुनी गति): धाधिं धिंधा धाधिं धिंधा धातिं तिंता ताधिं धिंधा ||
चौगुन (चौगुनी गति): धाधिंधिंधाधाधिंधिंधाधातिंतिंताताधिंधिंधा ||
विभाग: तीनताल में 4-4-4-4 मात्राओं के चार विभाग होते हैं। पहले विभाग पर ताली (सम), दूसरे पर खाली (तीसरी मात्रा), तीसरे पर ताली (9वीं मात्रा), और चौथे पर ताली (13वीं मात्रा) लगती है।
प्रश्न 8
“पं. गोपीकृष्ण” का जीवन परिचय व संगीत के क्षेत्र में योगदान लिखिए।
Write life sketch and contribution in the field of Music of ‘Pt. Gopi Krishna’.
अंक: 4+4=8
जीवन परिचय
पंडित गोपीकृष्ण का जन्म 1930 में कोलकाता में हुआ था। वे कथक नृत्य के प्रसिद्ध गुरु पंडित शंभू महाराज के शिष्य थे। उन्होंने कथक नृत्य को विश्व स्तर पर पहचान दिलाई। वे एक उत्कृष्ट नर्तक, कोरियोग्राफर और शिक्षक थे। उन्होंने कई वर्षों तक भारतीय कला केंद्र, नई दिल्ली में अध्यापन किया।
संगीत के क्षेत्र में योगदान
- कथक नृत्य में ताल और लय के प्रयोग को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया।
- उन्होंने कथक को शास्त्रीय संगीत के साथ समन्वित कर प्रस्तुत किया।
- अनेक शिष्यों को प्रशिक्षित किया जो आज देश-विदेश में कथक का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं।
- उन्हें पद्म श्री, संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार जैसे प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त हुए।
- उन्होंने कथक नृत्य में अभिनय और भाव-भंगिमाओं को विशेष महत्व दिया।
प्रश्न 9
“कथक” नृत्य का संक्षिप्त इतिहास लिखिए।
Write short history of Kathak Dance.
अंक: 3
कथक नृत्य का संक्षिप्त इतिहास
कथक नृत्य भारत के प्रमुख शास्त्रीय नृत्यों में से एक है। इसकी उत्पत्ति उत्तर भारत में हुई। 'कथक' शब्द संस्कृत के 'कथा' से बना है, जिसका अर्थ कहानी सुनाना है। प्राचीन काल में मंदिरों में कथाकार कहानियों को नृत्य और अभिनय के माध्यम से प्रस्तुत करते थे।
मुगल काल में कथक ने दरबारी कला का रूप ले लिया। इस समय इसमें तकनीकी पक्ष और ताल-लय पर अधिक जोर दिया गया। लखनघराना, जयपुर घराना और बनारस घराना कथक के प्रमुख घराने हैं।
आधुनिक काल में पंडित बिरजू महाराज, पंडित शंभू महाराज और पंडित गोपीकृष्ण जैसे कलाकारों ने कथक को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई। आज कथक नृत्य भारतीय संस्कृति का एक महत्वपूर्ण अंग है।
SS-6,63,64,65,66,67,68,69,70,71-Music (V & I & 7)
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