RBSE Class 12th 2022 Hindi (Com)-SS-01-2022 Previous Year Papers

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Paper details

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Board RBSE
Class Class 12th
Exam year 2022
Subject Hindi (Com)-SS-01-2022
Resource type Previous Year Papers
Category RBSE Previous Year Question Papers
Website RBSE Solution

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Rajasthan Board Class 12th Hindi (Com)-SS-01-2022 2022 solved Previous Year Question Papers

SS-04-Hindi (C) – हिंदी (अनिवार्य)

उच्च माध्यमिक परीक्षा, 2022

समय : 2 घंटे 45 मिनट    पूर्णांक : 80

परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :

GENERAL INSTRUCTION TO THE EXAMINEES :

  1. परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न-पत्र पर नामांक अनिवार्यतः लिखें।
  2. सभी प्रश्न करने अनिवार्य हैं।
  3. प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें।
  4. जिन प्रश्नों में आन्तरिक खण्ड हैं, उन सभी के उत्तर एक साथ ही लिखें।
  5. प्रश्न का उत्तर लिखने से पूर्व प्रश्न का क्रमांक अवश्य लिखें।

$$-0]-प्राशक (C)

बहुविकल्पी प्रश्न

निम्नलिखित अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर नीचे दिए गए वस्तुनिष्ठ प्रश्नों के उत्तर अपनी उत्तर-पुस्तिका में लिखिए :

जो समझता है कि वह दूसरों का उपकार कर रहा है, वह अबोध है। जो समझता है कि वह दूसरों का अपकार कर रहा है, वह बुद्धिहीन है। कौन किसका उपकार करता है? कौन किसका अपकार कर रहा है? मनुष्य जी रहा है, अपनी इच्छा से नहीं, इतिहास विधाता की योजना के अनुसार। किसी को उससे सुख मिल जाए, बहुत अच्छी बात है; नहीं मिल सका तो कोई बात नहीं, परन्तु उसे अभिमान नहीं होना चाहिए। अभिमान तो नितांत गलत है। दुःख और सुख तो मन के विकल्प हैं। सुखी वह है जिसका मन वश में है, दुःखी वह है जिसका मन परवश है। जिसका मन अपने वश में नहीं है वही दूसरे के मन का छल करता है। अपने को छिपाने के लिए मिथ्या आडम्बर रचता है, दूसरों को फंसाने के लिए जाल बिछाता है।

  1. (1) उपर्युक्त गद्यांश का उचित शीर्षक है

    • (अ) सुख और दुःख
    • (ब) आडम्बर
    • (स) अबोध
    • (द) बुद्धिहीन

    सही उत्तर: (अ) सुख और दुःख

    व्याख्या: गद्यांश में सुख और दुःख की प्रकृति पर मुख्य रूप से चर्चा की गई है, इसलिए यह शीर्षक सबसे उपयुक्त है।

  2. (2) सुखी कौन है?

    • (अ) जिसका मन वश में है
    • (ब) जो मिथ्याडम्बर रचता है
    • (स) जिसका मन परवश है
    • (द) जो अभिमानी है

    सही उत्तर: (अ) जिसका मन वश में है

    व्याख्या: गद्यांश के अनुसार, "सुखी वह है जिसका मन वश में है" – यह स्पष्ट रूप से बताया गया है।

  3. (3) मनुष्य किसलिए जी रहा है?

    • (अ) अपनी इच्छा से
    • (ब) विधाता की योजना के अनुसार
    • (स) अभिमान करने के लिए
    • (द) जाल बिछाने के लिए

    सही उत्तर: (ब) विधाता की योजना के अनुसार

    व्याख्या: गद्यांश में कहा गया है, "मनुष्य जी रहा है, अपनी इच्छा से नहीं, इतिहास विधाता की योजना के अनुसार।"

  4. (4) मिथ्या आडम्बर कौन रचता है?

    • (अ) जो जीना चाहता है
    • (ब) जो मन के वश में नहीं है
    • (स) जिसका मन अपने वश में नहीं है
    • (द) जो बुद्धिहीन है

    सही उत्तर: (स) जिसका मन अपने वश में नहीं है

    व्याख्या: गद्यांश के अनुसार, "जिसका मन अपने वश में नहीं है वही... मिथ्या आडम्बर रचता है।"

  5. (5) अबोध कौन है?

    • (अ) जो समझता है कि वह दूसरों पर उपकार कर रहा है
    • (ब) अभिमानी मनुष्य
    • (स) जो बुद्धिहीन है
    • (द) मिथ्याचारी मनुष्य

    सही उत्तर: (अ) जो समझता है कि वह दूसरों पर उपकार कर रहा है

    व्याख्या: गद्यांश के प्रारंभ में ही कहा गया है, "जो समझता है कि वह दूसरों का उपकार कर रहा है, वह अबोध है।"

  6. (6) सुख और दुःख क्या हैं?

    • (अ) मिथ्या आडम्बर
    • (ब) अभिमान
    • (स) मन के विकल्प
    • (द) ईश्वर की योजना

    सही उत्तर: (स) मन के विकल्प

    व्याख्या: गद्यांश में स्पष्ट किया गया है, "दुःख और सुख तो मन के विकल्प हैं।"

$$-0]-प्रांगत (C)

अपठित पद्यांश

रोना और मचल जाना भी क्या आनंद दिलाते थे ।
बड़े-बड़े मोती से आँसू जयमाला पहनाते थे ।।
मैं रोई, माँ काम छोड़कर आई, मुझको उठा लिया ।
झाड़-पोंछ कर चूम-चूम कर गीले बालों को सुखा दिया ॥।
दादा ने चंदा दिखलाया नैन नीर-युत दमक उठे ।
धुली हुई मुस्कान देखकर सबके चेहरे चमक उठे ।
वह सुख का साम्राज्य छोड़कर मैं मतबाली बड़ी हुई |
लुटी हुई कुछ ठगी हुई-सी दौड़ द्वार पर खड़ी हुई ।

  1. "रोना और मचल जाना" क्या दिलाता था ?

    • (अ) आनन्द
    • (ब) भय
    • (स) दुःख
    • (द) क्रोध

    सही उत्तर: (अ) आनन्द। पद्यांश की पहली पंक्ति में स्पष्ट कहा गया है कि रोना और मचल जाना भी आनंद दिलाते थे।

  2. जयमाला किसकी बनी होती थी ?

    • (अ) फूलों की
    • (ब) मोतियों की
    • (स) आँसुओं की
    • (द) आनंद की

    सही उत्तर: (स) आँसुओं की। पंक्ति "बड़े-बड़े मोती से आँसू जयमाला पहनाते थे" से स्पष्ट है कि आँसू जयमाला के रूप में थे।

  3. सबके चेहरे क्यों चमक उठे ?

    • (अ) मुस्कान देखकर
    • (ब) आँसू देखकर
    • (स) रोने से
    • (द) चंदा देखकर

    सही उत्तर: (अ) मुस्कान देखकर। पंक्ति "धुली हुई मुस्कान देखकर सबके चेहरे चमक उठे" से स्पष्ट है।

  4. इस पद्यांश का शीर्षक क्या हो सकता है ?

    • (अ) जीवन
    • (ब) दादा
    • (स) बचपन
    • (द) जयमाला

    सही उत्तर: (स) बचपन। पद्यांश में बचपन की मासूमियत, रोना-मचलना, माँ का प्यार और दादा का स्नेह वर्णित है, जो बचपन की यादों को दर्शाता है।

  5. दादा ने कवयित्री को क्या दिखलाया ?

    • (अ) चंदा
    • (ब) मोती
    • (स) साम्राज्य
    • (द) नैन

    सही उत्तर: (अ) चंदा। पंक्ति "दादा ने चंदा दिखलाया" से स्पष्ट है।

  6. "नैन नीर-युत" का क्या अर्थ है ?

    • (अ) सुख
    • (ब) आँसू
    • (स) पानी
    • (द) आँसू भरी आँखें

    सही उत्तर: (द) आँसू भरी आँखें। 'नैन' का अर्थ आँखें और 'नीर' का अर्थ पानी/आँसू है, अतः 'नैन नीर-युत' का अर्थ आँसू भरी आँखें है।

2. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए :

  1. मौखिक अभिव्यक्ति का माध्यम ध्वनि है।
  2. भाषा का लिखित रूप लेखन कहलाता है।
  3. “घोड़ा सवारी के काम आता है।” वाक्य में लक्षणा शब्दशक्ति है।
  4. लक्षणों पर आंत अर्थ का बोध कराने वाली व्यंजना शब्द शक्ति होती है।
  5. ‘चारु-चन्द्र की चंचल किरणें’ उक्त काव्य-पंक्ति में अनुप्रास अलंकार है। वर्ण की आवृत्ति के कारण।
  6. जहाँ शब्द की आवृत्ति हो किन्तु अर्थ भिन्न हो वहाँ यमक अलंकार होता है।

3. निम्नलिखित अतिलघूत्तरात्मक प्रश्नों के उत्तर एक पंक्ति में दीजिए :

  1. निम्न पारिभाषिक शब्दों के अर्थ लिखिए :

    • (अ) Notice – सूचना
    • (ब) Circular – परिपत्र
  2. शब्द कोश क्या होता है?
    शब्द कोश वह संग्रह है जिसमें शब्दों के अर्थ, व्याकरणिक रूप और प्रयोग दिए जाते हैं।

  3. इंटरनेट पत्रकारिता से क्या आशय है?
    इंटरनेट पत्रकारिता से आशय इंटरनेट के माध्यम से समाचारों के प्रकाशन और प्रसारण से है।

  4. “भक्तिन” का वास्तविक नाम क्या था?
    “भक्तिन” का वास्तविक नाम लक्ष्मी था।

  5. यशोधर बाबू अपनी घरवाली के आधुनिकाओं सा आचरण करने पर क्या कहकर उसका मजाक उड़ाते थे?
    यशोधर बाबू अपनी घरवाली के आधुनिकाओं सा आचरण करने पर “अरे, तुम तो बड़ी आधुनिक हो गई हो” कहकर उसका मजाक उड़ाते थे।

  6. ‘सिल्वर वैडिंग’ से इस कहानी का क्या आशय है?
    ‘सिल्वर वैडिंग’ से आशय विवाह की 25वीं वर्षगांठ से है, जो इस कहानी का केंद्रीय प्रसंग है।

  7. ‘जूझ’ कहानी के आधार पर बताइये कि लेखक के पिता ने उसकी पढ़ाई क्यों छुड़वा दी?
    लेखक के पिता ने उसकी पढ़ाई इसलिए छुड़वा दी क्योंकि वे आर्थिक रूप से कमजोर थे और लेखक को घर के कामों में मदद करने की आवश्यकता थी।

  8. कविता से लगाव के बाद लेखक को अकेले रहना क्यों अच्छा लगने लगा?
    कविता से लगाव के बाद लेखक को अकेले रहना इसलिए अच्छा लगने लगा क्योंकि वह कविता रचने और उसके भावों में डूबने के लिए एकांत चाहता था।

  9. कवि रघुबीर सहाय की किन्हीं दो रचनाओं के नाम लिखिए।
    कवि रघुबीर सहाय की दो रचनाएँ हैं – ‘आत्महत्या के विरुद्ध’ और ‘हंसो और हंसाओ’।

  10. महादेवी वर्मा का जन्म कब और कहाँ हुआ था?
    महादेवी वर्मा का जन्म 26 मार्च 1907 को फर्रुखाबाद, उत्तर प्रदेश में हुआ था।

  11. स्कूल में लेखक का ध्यान पढ़ाई में कब लगने लगा? ‘जूझ’ कहानी के आधार पर बताइए।
    स्कूल में लेखक का ध्यान पढ़ाई में तब लगने लगा जब उसके पिता ने उसे पढ़ाई के महत्व को समझाया और वह स्वयं जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित हुआ।

खण्ड-ब (लघुत्तरात्मक प्रश्न)

6. “कार्य करने को लेकर” पाँच वाक्य लिखिये।

कार्य करने को लेकर पाँच वाक्य निम्नलिखित हैं:

  1. कार्य ही जीवन का आधार है।
  2. नियमित कार्य से व्यक्ति अनुशासित बनता है।
  3. बिना कार्य के जीवन निरर्थक है।
  4. कार्य करने से आत्मविश्वास बढ़ता है।
  5. ईमानदारी से किया गया कार्य सफलता दिलाता है।

7. “बात सीधी थी पर” कविता की मूल संवेदना क्या है?

इस कविता की मूल संवेदना जीवन की जटिलताओं और सरल बातों को भी उलझाने की मानवीय प्रवृत्ति पर आधारित है। कवि यह दर्शाता है कि सीधी-सादी बात को भी लोग अपने स्वार्थ और दृष्टिकोण के कारण जटिल बना देते हैं। यह कविता मानवीय संबंधों में पारदर्शिता और सरलता की आवश्यकता पर बल देती है।

8. “पतंगों के साथ-साथ चे भी उड़ रहे हैं” पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।

इस पंक्ति का आशय यह है कि पतंग उड़ाने के बहाने बच्चे अपनी कल्पनाओं और सपनों को भी आसमान में उड़ा रहे हैं। 'चे' शब्द बच्चों के मन की उड़ान को दर्शाता है, जो पतंग के साथ-साथ ऊँचाइयों को छूने की लालसा रखते हैं। यह बचपन की मासूमियत और स्वतंत्रता की चाह को व्यक्त करता है।

9. शिरीष को कालजयी अवधूत मानने के पीछे लेखक ने क्या तर्क दिये हैं?

लेखक के अनुसार शिरीष को कालजयी अवधूत मानने के पीछे निम्नलिखित तर्क हैं:

  • शिरीष का वृक्ष सदा हरा-भरा रहता है, जो समय की मार को सहन करता है।
  • यह कठोर से कठोर परिस्थितियों में भी जीवित रहता है, जैसे अवधूत संसार के मोह-माया से परे रहता है।
  • इसकी छाल और पत्तियाँ औषधीय गुणों से भरपूर हैं, जो मानवता की सेवा करती हैं।
  • यह वृक्ष अपने अस्तित्व से प्रकृति और मानव के बीच संतुलन बनाए रखता है।

10. जैनेन्द्र जी के अनुसार “विन पावर” क्या है? 'बाजार-दर्शन' पाठ के आधार पर समझाइए।

जैनेन्द्र जी के अनुसार “विन पावर” का अर्थ है जीतने की शक्ति। 'बाजार-दर्शन' पाठ में यह बताया गया है कि बाजार में सफलता पाने के लिए केवल धन या वस्तु का होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि ग्राहकों को आकर्षित करने और उनकी आवश्यकताओं को समझने की क्षमता ही वास्तविक शक्ति है। यह शक्ति व्यापारी को प्रतिस्पर्धा में आगे रखती है और उसे बाजार में स्थायित्व प्रदान करती है।

11. यशोधर बाबू ऑफिस से घर लेट क्यों पहुँचते थे?

यशोधर बाबू ऑफिस से घर लेट इसलिए पहुँचते थे क्योंकि वे अपने काम में इतने व्यस्त रहते थे कि समय का ध्यान नहीं रहता था। वे अपने कर्तव्यों को पूरी निष्ठा से निभाते थे और अक्सर अतिरिक्त कार्य करने में समय बिता देते थे। इसके अलावा, वे घर जाने से पहले कुछ समय अकेले बिताना पसंद करते थे, जिससे उन्हें मानसिक शांति मिलती थी।

12. द्वतता जी राव ने लेखक की मदद किस प्रकार की? 'जूझ' कहानी के आधार पर समझाइए।

'जूझ' कहानी में द्वतता जी राव ने लेखक की मदद यह करके की कि उन्होंने लेखक को शिक्षा के महत्व को समझाया और उसे पढ़ने के लिए प्रेरित किया। वे लेखक के गाँव में एक शिक्षित व्यक्ति थे और उन्होंने लेखक को किताबें उधार दीं तथा उसकी पढ़ाई में सहायता की। उनकी मदद से लेखक को आत्मविश्वास मिला और वह अपनी शिक्षा जारी रख सका।

खण्ड-स (निबंधात्मक प्रश्न)

13. “कैमरे में बंद अपाहिज” कविता में प्रश्नकर्ता का क्या उद्देश्य रहा है? उसके स्थान पर यदि आप होते तो साक्षात्कार किस प्रकार से लेते?

“कैमरे में बंद अपाहिज” कविता में प्रश्नकर्ता का उद्देश्य समाज में व्याप्त असमानता और मानवीय संवेदनहीनता को उजागर करना है। वह एक अपाहिज व्यक्ति से साक्षात्कार लेते हुए उसकी पीड़ा और संघर्ष को समझने का प्रयास करता है, लेकिन साथ ही वह मीडिया की सनसनीखेज प्रवृत्ति पर भी प्रश्न उठाता है।

यदि मैं उसके स्थान पर होता, तो साक्षात्कार इस प्रकार लेता:

  • सबसे पहले अपाहिज व्यक्ति से उसकी दैनिक जीवन की कठिनाइयों के बारे में पूछता।
  • उसकी आर्थिक स्थिति और सरकारी सहायता के बारे में जानकारी लेता।
  • समाज के व्यवहार और उसके प्रति लोगों की संवेदनहीनता पर चर्चा करता।
  • उसकी आशाओं और सपनों के बारे में पूछता, ताकि उसकी मानवीयता को सामने लाया जा सके।
  • साक्षात्कार को संवेदनशीलता और सम्मान के साथ समाप्त करता, बिना उसकी पीड़ा को सनसनीखेज बनाए।

अथवा

पर बताइये कि कवि ने किन उपमानों का प्रयोग कर कविता को गतिशीलता दी है? 'उषा' कविता के आधार पर बताइये कि किन उपमानों का प्रयोग किया जा सकता है?

'उषा' कविता में कवि ने प्रकृति के विभिन्न उपमानों का प्रयोग कर कविता को गतिशीलता प्रदान की है। कविता में उषा (सुबह) को एक नवजात शिशु, एक नर्तकी, और एक चित्रकार के रूप में चित्रित किया गया है। ये उपमान कविता में गति और जीवंतता लाते हैं।

कविता में प्रयुक्त उपमानों के आधार पर निम्नलिखित उपमानों का प्रयोग किया जा सकता है:

  • उषा को एक नवजात शिशु के रूप में देखा जा सकता है, जो धीरे-धीरे जागता है और दुनिया को नई रोशनी देता है।
  • उषा को एक नर्तकी के रूप में देखा जा सकता है, जो अपनी लय और मुद्राओं से प्रकृति को सजीव करती है।
  • उषा को एक चित्रकार के रूप में देखा जा सकता है, जो आसमान और धरती पर रंगों का बिखराव करती है।
  • उषा को एक संगीतकार के रूप में देखा जा सकता है, जो पक्षियों के कलरव और हवा की सरसराहट से सुबह का संगीत रचती है।

इन उपमानों के माध्यम से कवि ने उषा की सुंदरता और उसकी गतिशीलता को सजीव रूप में प्रस्तुत किया है, जिससे पाठक को प्रकृति के इस अद्भुत दृश्य का अनुभव होता है।

प्रश्न 4. 'का आचार समाज शांति और समता की स्थापना में किस प्रकार सहायक हो सकता है?

उत्तर: 'का आचार' (करुणा का आचार) समाज में शांति और समता स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह व्यक्ति को दूसरों के प्रति सहानुभूति, दया और सम्मान का भाव विकसित करने में सहायक होता है। जब लोग करुणा के आधार पर व्यवहार करते हैं, तो वे ईर्ष्या, द्वेष और हिंसा से दूर रहते हैं। इससे सामाजिक तनाव कम होता है और समानता की भावना बढ़ती है। करुणा का आचार सभी वर्गों, जातियों और धर्मों के लोगों को एक समान दृष्टि से देखने की प्रेरणा देता है, जिससे समाज में शांति और समता स्थापित होती है।

अथवा

प्रश्न 4. संजीवनी पठित कहानी 'पहलवान की ढोलक' की थाप मृत गाँव में किस प्रकार संजीवनी भरती थी? 'पहलवान की ढोलक' के आधार पर लिखिए।

उत्तर: 'पहलवान की ढोलक' कहानी में ढोलक की थाप मृत गाँव में संजीवनी का काम करती थी। गाँव में जब कोई उत्सव या खुशी का अवसर नहीं होता था, तब पहलवान की ढोलक की आवाज़ गाँव वालों को एकत्रित करती थी। इसकी थाप सुनकर लोग अपने दुख-दर्द भूल जाते थे और उत्साह से भर जाते थे। ढोलक की लय और ताल गाँव में जीवन का संचार करती थी, जिससे सूना और उदास गाँव फिर से जीवंत हो उठता था। यह ढोलक गाँव की सांस्कृतिक चेतना और एकता का प्रतीक थी।

प्रश्न 5. 'वैडिंग' कहानी में यशोधर बाबू और उनकी पत्नी के बीच वैचारिक अंतर में पीढ़ी के बीच का वैचारिक अंतर दिखाई देता है। उदाहरण द्वारा स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: 'वैडिंग' कहानी में यशोधर बाबू और उनकी पत्नी के बीच वैचारिक अंतर स्पष्ट रूप से पीढ़ीगत अंतर को दर्शाता है। यशोधर बाबू आधुनिक विचारों के व्यक्ति हैं, जो बेटी की शादी में दिखावे और रीति-रिवाजों को महत्व नहीं देते। वे सादगी और व्यावहारिकता पर जोर देते हैं। उदाहरण के लिए, वे बेटी की शादी में बड़े खर्च और दहेज का विरोध करते हैं। दूसरी ओर, उनकी पत्नी पारंपरिक विचारों की हैं, जो सामाजिक रीति-रिवाजों और दिखावे को महत्वपूर्ण मानती हैं। वे शादी में पारंपरिक रस्मों और बड़े आयोजन की पक्षधर हैं। यह अंतर पुरानी और नई पीढ़ी के बीच के वैचारिक मतभेद को उजागर करता है।

अथवा

प्रश्न 5. एक विद्यार्थी के जीवन में गुरु का क्या महत्त्व होता है? 'जूझ' कहानी के आधार पर उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: 'जूझ' कहानी में गुरु का महत्व स्पष्ट रूप से दर्शाया गया है। गुरु विद्यार्थी के जीवन में मार्गदर्शक का कार्य करता है। कहानी में नायक को पढ़ाई जारी रखने में कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, लेकिन उसके गुरु उसे प्रोत्साहित करते हैं और सही दिशा दिखाते हैं। उदाहरण के लिए, जब नायक पढ़ाई छोड़ने का मन बनाता है, तो गुरु उसे समझाते हैं कि शिक्षा ही जीवन में सफलता का मार्ग है। गुरु न केवल शैक्षिक बल्कि नैतिक मार्गदर्शन भी प्रदान करते हैं, जिससे विद्यार्थी आत्मविश्वासी बनता है और अपने लक्ष्य को प्राप्त करता है।

प्रश्न 6. हरिवंश राय बच्चन का कवि परिचय लिखिए।

उत्तर: हरिवंश राय बच्चन (1907-2003) हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध कवि थे। उनका जन्म इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश में हुआ था। वे हिंदी कविता में छायावादी युग के बाद के प्रमुख कवि माने जाते हैं। उनकी प्रसिद्ध रचनाओं में 'मधुशाला', 'मधुबाला', 'मधुकलश' और 'निशा निमंत्रण' शामिल हैं। 'मधुशाला' उनकी सबसे लोकप्रिय कृति है, जिसमें जीवन, प्रेम और दर्शन का अनूठा संगम है। बच्चन जी की कविताओं में हाशिए के लोगों के प्रति सहानुभूति और जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण दिखाई देता है। उन्हें 1976 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था।

अथवा

प्रश्न 6. धर्मवीर भारती का लेखक परिचय लिखिए।

उत्तर: धर्मवीर भारती (1926-1997) हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध लेखक, कवि और पत्रकार थे। उनका जन्म इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश में हुआ था। वे हिंदी साहित्य में प्रयोगवादी और नई कविता के प्रमुख हस्ताक्षर माने जाते हैं। उनकी प्रसिद्ध रचनाओं में उपन्यास 'गुनाहों का देवता', कविता संग्रह 'सात गीत वर्ष', 'ठंडा लोहा' और निबंध संग्रह 'ठेले पर हिमालय' शामिल हैं। 'गुनाहों का देवता' उनका सबसे चर्चित उपन्यास है, जो प्रेम और त्याग की मार्मिक कहानी है। भारती जी ने 'धर्मयुग' पत्रिका का संपादन भी किया। उनकी रचनाओं में सामाजिक यथार्थ और मानवीय संवेदनाओं का गहरा चित्रण मिलता है।

खण्ड - द

प्रश्न 7. निम्नलिखित पद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए:

ज़िंदगी में जो कुछ है, जो भी है
सहर्ष स्वीकार है;
इसलिये कि जो कुछ भी मेरा है
वह तुम्हें प्यारा |

गरीबी यह, ये गंभीर अनुभव सब
यह विचार-वैभव सब
इंढेता यह, भीतर की सरिता यह अभिनव सब
मौलिक है, मौलिक है
इसलिये कि पल-पल में
जो कुछ भी जाग्रत है अपलक है -
संवेदन तुम्हारा है |

सन्दर्भ: प्रस्तुत पद्यांश हरिवंश राय बच्चन की कविता से लिया गया है। यह कविता जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण और आत्म-स्वीकृति का संदेश देती है।

प्रसंग: कवि कहता है कि जीवन में जो कुछ भी है, चाहे वह सुख हो या दुख, उसे सहर्ष स्वीकार करना चाहिए। क्योंकि जो कुछ भी उसका है, वह उसके प्रिय को प्यारा है।

व्याख्या: कवि कहता है कि जीवन में जो कुछ भी है, चाहे वह गरीबी हो, गंभीर अनुभव हों, या विचारों का वैभव हो, सब कुछ मौलिक है। यहाँ तक कि अंदर की नदी (भावनाओं का प्रवाह) भी मौलिक है। यह सब इसलिए मौलिक है क्योंकि हर पल जो कुछ भी जाग्रत होता है, वह संवेदन उसके प्रिय का है। कवि यहाँ जीवन की हर स्थिति को स्वीकार करने और उसे अपने प्रिय (ईश्वर या प्रेमी) से जोड़ने की बात करता है। यह आत्म-स्वीकृति और जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण को दर्शाता है।

अथवा

सन्दर्भ: प्रस्तुत पद्यांश हरिवंश राय बच्चन की कविता से लिया गया है। यह कविता जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण और आत्म-स्वीकृति का संदेश देती है।

प्रसंग: कवि कहता है कि जीवन में जो कुछ भी है, चाहे वह सुख हो या दुख, उसे सहर्ष स्वीकार करना चाहिए। क्योंकि जो कुछ भी उसका है, वह उसके प्रिय को प्यारा है।

व्याख्या: कवि कहता है कि जीवन में जो कुछ भी है, चाहे वह गरीबी हो, गंभीर अनुभव हों, या विचारों का वैभव हो, सब कुछ मौलिक है। यहाँ तक कि अंदर की नदी (भावनाओं का प्रवाह) भी मौलिक है। यह सब इसलिए मौलिक है क्योंकि हर पल जो कुछ भी जाग्रत होता है, वह संवेदन उसके प्रिय का है। कवि यहाँ जीवन की हर स्थिति को स्वीकार करने और उसे अपने प्रिय (ईश्वर या प्रेमी) से जोड़ने की बात करता है। यह आत्म-स्वीकृति और जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण को दर्शाता है।

प्रश्न 18. निम्नलिखित गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए : (2+4=6)

गद्यांश: भक्तिन और मेरे बीच में सेवक-स्वामी का संबंध है, यह कहना कठिन है; क्योंकि ऐसा कोई स्वामी नहीं हो सकता, जो इच्छा होने पर भी सेवक को अपनी सेवा से हटा न सके और ऐसा कोई सेवक भी नहीं सुना गया जो स्वामी के चले जाने का आदेश पाकर अवज्ञा से हँस दे । भक्तिन को नौकर कहना उतना ही असंगत है जितना अपने घर में बारी-बारी से आने-जाने वाले अंधेरे-उजाले और आँगन में फूलने वाले गुलाब और आम को सेवक मानना । वे जिस प्रकार एक अस्तित्व रखते हैं, जिसे सार्थकता देने के लिये ही सुख दुख देते हैं, उसी प्रकार भक्तिन का स्वतंत्र व्यक्तित्व अपने विकास के परिचय के लिये ही मेरे जीवन को घेरे हुए है।

सप्रसंग व्याख्या:

संदर्भ: प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक में संकलित 'भक्तिन' नामक पाठ से लिया गया है, जिसकी लेखिका महादेवी वर्मा हैं। इसमें लेखिका ने अपनी सेविका भक्तिन के साथ अपने संबंधों की गहराई को व्यक्त किया है।

प्रसंग: लेखिका यह बताना चाहती हैं कि भक्तिन के साथ उनका संबंध सामान्य सेवक-स्वामी का नहीं है, बल्कि यह एक आत्मीय और स्वाभाविक संबंध है, जो पारंपरिक बंधनों से परे है।

व्याख्या: लेखिका कहती हैं कि भक्तिन और उनके बीच सेवक-स्वामी का संबंध है, यह कहना कठिन है। इसका कारण यह है कि कोई भी स्वामी अपने सेवक को सेवा से हटा सकता है, लेकिन लेखिका ऐसा नहीं कर सकतीं। वहीं, कोई सेवक स्वामी के आदेश की अवज्ञा नहीं करता, लेकिन भक्तिन ऐसा करती हैं। लेखिका के अनुसार, भक्तिन को नौकर कहना उतना ही अनुचित है जितना कि घर में आने-जाने वाले अंधेरे-उजाले या आँगन में खिलने वाले गुलाब और आम को सेवक मानना। जिस प्रकार प्रकृति के ये तत्व अपने स्वतंत्र अस्तित्व के कारण ही सुख-दुख देते हैं, उसी प्रकार भक्तिन का स्वतंत्र व्यक्तित्व अपने विकास के लिए ही लेखिका के जीवन में व्याप्त है। यह संबंध पारस्परिक सम्मान और आत्मीयता पर आधारित है, न कि स्वामित्व या सेवा पर।


अथवा

गद्यांश: कुछ देर जीजी चुप, फिर मठरी मेरे मुँह में डालती हुई बोली, “देख बिना त्याग के दान नहीं होता | अगर तेरे पास लाखों -करोड़ों रुपये हैं और उसमें से तू दो-चार रुपये किसी को दे दे तो यह क्या त्याग हुआ । त्याग तो वह होता है कि जो चीज तेरे पास भी कम है, जिसकी तुझको भी ज़रूरत है तो अपनी ज़रूरत पीछे रख कर दुसरे के कल्याण के लिए उसे दे तो त्याग तो वह होता है, दान तो वह होता है, उसी का फल मिलता है ।”

सप्रसंग व्याख्या:

संदर्भ: प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक में संकलित 'जूझ' नामक पाठ से लिया गया है, जिसके लेखक आनंद यादव हैं। इसमें लेखक की माँ (जीजी) उन्हें त्याग और दान का महत्व समझा रही हैं।

प्रसंग: लेखक अपनी माँ से कुछ माँगते हैं, तो माँ उन्हें त्याग और दान के वास्तविक अर्थ को समझाते हुए कहती हैं कि सच्चा त्याग वही है जो अपनी आवश्यकता को त्यागकर दूसरों के कल्याण के लिए किया जाए।

व्याख्या: जीजी (माँ) कुछ देर चुप रहने के बाद लेखक के मुँह में मठरी डालते हुए कहती हैं कि बिना त्याग के दान नहीं होता। वे समझाती हैं कि यदि किसी के पास लाखों-करोड़ों रुपये हैं और वह उसमें से दो-चार रुपये किसी को दे देता है, तो यह त्याग नहीं कहलाता। सच्चा त्याग वह है जब कोई व्यक्ति अपनी आवश्यकता की वस्तु को, जो उसके पास कम मात्रा में है, दूसरे के कल्याण के लिए दे देता है। ऐसा करने पर ही वह दान कहलाता है और उसी का फल मिलता है। इस प्रकार, जीजी त्याग और दान के वास्तविक स्वरूप को स्पष्ट करती हैं कि सच्चा दान तभी होता है जब उसमें त्याग का भाव हो।


प्रश्न 19. अपने विद्यालय के लिये खेलकूद सामग्री क्रय करने हेतु निविदा तैयार कीजिए।

निविदा सूचना

राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, जयपुर

दिनांक: 15 फरवरी, 2022

विद्यालय के लिए खेलकूद सामग्री क्रय करने हेतु पृथक-पृथक या संयुक्त रूप से निम्नलिखित वस्तुओं की आपूर्ति हेतु पंजीकृत फर्मों/विक्रेताओं से सीलबंद निविदाएँ आमंत्रित की जाती हैं।

क्र. सं. वस्तु का नाम मात्रा गुणवत्ता/विशिष्टता
1 क्रिकेट बैट 10 विलो काष्ठ, प्रीमियम गुणवत्ता
2 क्रिकेट बॉल 20 लेदर, अंतर्राष्ट्रीय मानक
3 फुटबॉल 10 सिंथेटिक चमड़ा, साइज-5
4 बैडमिंटन रैकेट 15 जोड़ी एल्युमिनियम फ्रेम, नायलॉन स्ट्रिंग
5 बैडमिंटन शटलकॉक 30 फेदर शटलकॉक
6 चेस बोर्ड 10 लकड़ी का, फोल्डिंग

निविदा शर्तें:

  1. निविदा पत्र 20 फरवरी, 2022 को दोपहर 3:00 बजे तक प्राप्त हो जाना चाहिए।
  2. निविदा के साथ 5000 रुपये की जमानत राशि (ईएमडी) संलग्न करना अनिवार्य होगा।
  3. निविदा खोलने की तिथि: 21 फरवरी, 2022 को प्रातः 11:00 बजे।
  4. विद्यालय को किसी भी निविदा को बिना कारण बताए अस्वीकार करने का अधिकार सुरक्षित है।
  5. सभी वस्तुएँ निर्धारित गुणवत्ता और मानक के अनुसार होंगी।

इच्छुक फर्में अपनी निविदा प्राचार्य, राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, जयपुर के कार्यालय में जमा करा सकती हैं।

प्राचार्य
राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, जयपुर


अथवा

सचिव मा. शिक्षा बोर्ड, राजस्थान अजमेर की ओर से दसवीं और बारहवीं की बोर्ड परीक्षा तिथि परिवर्तन की विज्ञप्ति तैयार कीजिए।

विज्ञप्ति

माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, राजस्थान, अजमेर

दिनांक: 10 फरवरी, 2022

विषय: दसवीं एवं बारहवीं बोर्ड परीक्षा तिथियों में परिवर्तन

माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, राजस्थान, अजमेर द्वारा आयोजित वर्ष 2022 की दसवीं एवं बारहवीं की बोर्ड परीक्षाओं की तिथियों में निम्नानुसार परिवर्तन किया गया है। यह परिवर्तन प्रशासनिक कारणों एवं परीक्षार्थियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए किया गया है।

कक्षा पूर्व निर्धारित तिथि परिवर्तित तिथि समय
दसवीं 1 मार्च, 2022 5 मार्च, 2022 प्रातः 8:30 से 11:45 बजे तक
बारहवीं 2 मार्च, 2022 6 म