RBSE Class 12th 2023 Agriculture-SS-84-2023 Previous Year Papers
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Paper details
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| Board | RBSE |
|---|---|
| Class | Class 12th |
| Exam year | 2023 |
| Subject | Agriculture-SS-84-2023 |
| Resource type | Previous Year Papers |
| Category | RBSE Previous Year Question Papers |
| Website | RBSE Solution |
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RBSE Class 12th 2023 Agriculture-SS-84-2023
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Rajasthan Board Class 12th Agriculture-SS-84-2023 2023 solved Previous Year Question Papers
उच्च माध्यमिक परीक्षा, 2023
SENIOR SECONDARY EXAMINATION – 2023
कृषि विज्ञान
AGRICULTURE
समय : 3 घण्टे 15 मिनिट पूर्णांक : 56
No. of Questions – 20 No. of Printed Pages – 07 SS 84 Agriculture
परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :
GENERAL INSTRUCTIONS TO THE EXAMINEES :
- परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न पत्र पर नामांक अनिवार्यत: लिखें।
Candidate must write first his / her Roll No. on the question paper compulsorily. - सभी प्रश्न करने अनिवार्य हैं।
All the questions are compulsory. - प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें।
Write the answer to each question in the given answer-book only. - जिन प्रश्नों में आन्तरिक खण्ड हैं, उन सभी के उत्तर एक साथ ही लिखें।
For questions having more than one part, the answers to those parts are to be written together in continuity. - प्रश्न पत्र के हिन्दी व अंग्रेजी रूपान्तर में किसी प्रकार की त्रुटि / अन्तर / विरोधाभास होने पर हिन्दी भाषा के प्रश्न को ही सही मानें।
If there is any error / difference / contradiction in Hindi & English version of the question paper, the question of Hindi version should be treated valid. - प्रश्न का उत्तर लिखने से पूर्व प्रश्न का क्रमांक अवश्य लिखें।
Write down the serial number of the question before attempting it.
SS–84 Agriculture 32035 (Turn)
खण्ड - 'अ' / SECTION - 'A'
दिए गए बहुचयनात्मक प्रश्नों के सही उत्तर उत्तर-पुस्तिका में लिखिए :
Write the correct answer to the given multiple choice questions in the answer book.
-
सहजीवी जीवाणु है :
Symbiotic bacteria is :- (अ) नीली हरी शैवाल / Blue green algae
- (ब) क्लोस्ट्रीडियम / Clostridium
- (स) राइजोबियम / Rhizobium ✓
- (द) एजेटोबेक्टर / Azotobacter
राइजोबियम (Rhizobium) एक सहजीवी जीवाणु है जो फलीदार पौधों की जड़ों में ग्रंथिकाएँ बनाकर नाइट्रोजन स्थिरीकरण करता है।
-
धान फसल की जलमांग है :
Water requirement of paddy crop is :- (अ) 200 - 400 मि.मी. / 200 - 400 mm
- (ब) 900 - 2500 मि.मी. / 900 - 2500 mm ✓
- (स) 400 - 700 मि.मी. / 400 - 700 mm
- (द) 500 - 800 मि.मी. / 500 - 800 mm
धान (चावल) एक जलीय फसल है जिसे अधिक पानी की आवश्यकता होती है, लगभग 900-2500 मिमी प्रति मौसम।
-
जौ का वानस्पतिक नाम है :
Botanical name of barley is :- (अ) ज़ीया मेज / Zea mays
- (ब) ट्रिटिकम एस्टिवम / Triticum aestivum
- (स) होर्डीयम वल्गेयर एल. / Hordeum vulgare L. ✓
- (द) साइसर एरेटिनम एल. / Cicer arietinum L.
जौ का वानस्पतिक नाम Hordeum vulgare L. है, जो पोएसी (Poaceae) कुल का सदस्य है।
-
आलू का कुल है :
The family of potato is :- (अ) एपिएसी / Apiaceae
- (ब) फैबेसी / Fabaceae
- (स) पोएसी / Poaceae
- (द) सोलेनेसी / Solanaceae ✓
आलू (Solanum tuberosum) सोलेनेसी (Solanaceae) कुल का सदस्य है, जिसमें टमाटर, बैंगन और मिर्च भी शामिल हैं।
SS-84-Agriculture
प्रश्न पत्र (Page 3 of 7)
बहुविकल्पीय प्रश्न
(v) दशहरी उन्नत किस्म है :-
- (अ) आम
- (ब) पपीता
- (स) केला
- (द) अमरूद
Dussehri is an improved variety of :-
- (A) Mango
- (B) Papaya
- (C) Banana
- (D) Guava
सही उत्तर: (अ) आम / (A) Mango
दशहरी आम की एक प्रसिद्ध उन्नत किस्म है, जो अपने स्वाद और सुगंध के लिए जानी जाती है।
(vi) पपीता के पौधे लगाने हेतु गड्ढे का आकार रखते हैं :-
- (अ) 30 x 30 x 30 सेमी.
- (ब) 90 x 90 x 90 सेमी.
- (स) 50 x 50 x 50 सेमी.
- (द) 45 x 45 x 45 सेमी.
Suitable pit size for papaya plantation is :-
- (A) 30 x 30 x 30 Cm.
- (B) 90 x 90 x 90 Cm.
- (C) 50 x 50 x 50 Cm.
- (D) 45 x 45 x 45 Cm.
सही उत्तर: (ब) 90 x 90 x 90 सेमी. / (B) 90 x 90 x 90 Cm.
पपीता के पौधों की जड़ों को फैलने के लिए पर्याप्त स्थान देने हेतु 90 x 90 x 90 सेमी. आकार का गड्ढा उपयुक्त होता है।
(vii) किस नस्ल के सींग जलेबी आकार के होते हैं :-
- (अ) सूरती
- (ब) मुर्रा
- (स) नीली
- (द) भदावरी
Which breed's horns are jalebi shaped?
- (A) Surti
- (B) Murrah
- (C) Nili
- (D) Bhadawari
सही उत्तर: (द) भदावरी / (D) Bhadawari
भदावरी भैंस की नस्ल के सींग जलेबी (मुड़े हुए) आकार के होते हैं, जो इसकी पहचान है।
(viii) पेल्ट (खाल) के लिए उपयुक्त नस्ल है :-
- (अ) बीकानेरी
- (ब) अविकालीन
- (स) अविवस्त्र
- (द) कराकुल
Suitable breed for pelt is :-
- (A) Bikaneri
- (B) Avikalin
- (C) Avivastra
- (D) Karakul
सही उत्तर: (द) कराकुल / (D) Karakul
कराकुल भेड़ की नस्ल अपनी उच्च गुणवत्ता वाली पेल्ट (खाल) के लिए प्रसिद्ध है, जिसका उपयोग फर उद्योग में होता है।
(ix) एंथ्रेक्स बीमारी का रोग जनक है :-
- (अ) क्लोस्ट्रीडियम शोवियाई
- (ब) छनित वायरस
- (स) बेसीलस एंथ्रेसिस
- (द) स्ट्रेप्टोकोकाई एगेलेक्शिया
The causal organism of Anthrax disease :-
- (A) Clostridium chauvoei
- (B) Filter virus
- (C) Bacillus anthracis
- (D) Streptococci agalactiae
सही उत्तर: (स) बेसीलस एंथ्रेसिस / (C) Bacillus anthracis
एंथ्रेक्स एक जीवाणुजन्य रोग है, जो बेसीलस एंथ्रेसिस (Bacillus anthracis) नामक जीवाणु के कारण होता है।
प्रश्न 4: रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए / Fill in the blanks
-
FU रोकने के लिए किया जाता है।
Mulch is used to stop evaporation (वाष्पोत्सर्जन).
-
बूँद बूँद सिंचाई का अविष्कार .................. में हुआ था।
Drip irrigation was invented in Israel (इज़राइल).
-
गलघोंटू रोग में पशु को ................. लेने में तकलीफ होती है।
In Galghontu disease, the animal has difficulty in breathing (साँस).
-
राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड की स्थापना सन् ................ में की गई।
The national dairy development board was established in the year 1965.
प्रश्न 5: एक शब्द या एक पंक्ति में उत्तर दीजिए / Answer in one word or one line
-
अर्सिचित कृषि किसे कहते हैं?
What is Unirrigated farming?
उत्तर: वह कृषि जिसमें फसलों की सिंचाई के लिए वर्षा जल पर निर्भर रहना पड़ता है, उसे असिंचित कृषि कहते हैं।
Answer: Farming that depends only on rainwater for irrigation is called unirrigated farming.
-
अमरूद की कोई दो उन्नतशील किस्में लिखिए।
Write any two improved varieties of Guava.
उत्तर: अमरूद की दो उन्नत किस्में हैं – (1) लखनऊ-49 (सरदार) और (2) अलाहाबाद सफेदा।
Answer: Two improved varieties of guava are (1) Lucknow-49 (Sardar) and (2) Allahabad Safeda.
-
उत्तम किस्म की जैली किस फल से तैयार होती है?
Which fruit makes the best quality "JELLY"?
उत्तर: उत्तम किस्म की जैली अमरूद (Guava) के फल से तैयार होती है।
Answer: The best quality jelly is made from guava fruit.
-
पेक्टिन परीक्षण में काम आने वाले उपकरण का नाम लिखिए।
Write the name of the equipment used in pectin test.
उत्तर: पेक्टिन परीक्षण में प्रयुक्त उपकरण का नाम "जेलीमीटर" (Jellymeter) है।
Answer: The equipment used in pectin test is called "Jellymeter".
-
एक विदेशी नस्ल की बकरी का नाम लिखिए।
Write name of one exotic Goat breed.
उत्तर: एक विदेशी नस्ल की बकरी का नाम "सानेन" (Saanen) है।
Answer: One exotic goat breed is "Saanen".
-
मुर्रा नर एवं सूरती भैंस के प्रजनन से उत्पन्न हुई नस्ल का नाम लिखिए।
Write the name of breed obtained by breeding Murrah male and Surti buffalo.
उत्तर: मुर्रा नर एवं सूरती भैंस के प्रजनन से उत्पन्न नस्ल का नाम "मेहसाना" (Mehsana) है।
Answer: The breed obtained by crossing Murrah male and Surti buffalo is "Mehsana".
-
पशुओं में चयापचयी (उपापचयी) जनित रोग का नाम लिखिए।
Write the name of metabolic disease in animals.
उत्तर: पशुओं में एक चयापचयी जनित रोग "कीटोसिस" (Ketosis) है।
Answer: One metabolic disease in animals is "Ketosis".
-
एन. डी. डी. बी. का पूरा नाम लिखिए।
Write the full name of N.D.D.B.
उत्तर: एन. डी. डी. बी. का पूरा नाम "राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड" (National Dairy Development Board) है।
Answer: The full name of N.D.D.B. is "National Dairy Development Board".
लघुउत्तरात्मक प्रश्न (शब्द सीमा लगभग 50 शब्द)
Short answer type questions (Word limit approximately 50 words)
4) मृदा उर्वरता को प्रभावित करने वाले कोई तीन प्राकृतिक कारक लिखिए।
Write any three natural causes affecting the soil fertility.
उत्तर: मृदा उर्वरता को प्रभावित करने वाले तीन प्राकृतिक कारक निम्नलिखित हैं:
- जलवायु: तापमान, वर्षा और आर्द्रता मृदा में कार्बनिक पदार्थों के अपघटन को प्रभावित करते हैं।
- मूल सामग्री: मृदा का निर्माण जिस चट्टान से हुआ है, उसके खनिज संघटन से उर्वरता प्रभावित होती है।
- स्थलाकृति: ढलान वाली भूमि पर अपरदन अधिक होता है, जिससे उर्वरता कम हो जाती है।
5) मृदा के जलीय क्षरण को प्रभावित करने वाले कोई तीन कारक लिखिए।
Write any three factors affecting the water erosion of soil.
उत्तर: मृदा के जलीय क्षरण को प्रभावित करने वाले तीन कारक:
- वर्षा की तीव्रता और अवधि: अधिक तीव्र और लंबी वर्षा से जल का बहाव बढ़ता है, जिससे क्षरण अधिक होता है।
- ढलान की लंबाई और ढाल: लंबी और तीव्र ढलान पर जल का वेग बढ़ जाता है, जिससे क्षरण बढ़ता है।
- मृदा की बनावट और संरचना: बालूयुक्त मृदा में जल का रिसाव अधिक होता है, जबकि चिकनी मृदा में जल का बहाव अधिक होता है, जिससे क्षरण प्रभावित होता है।
6) खरपतवार को परिभाषित कीजिए। इसकी कोई दो विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
Define weed. Describe any two characteristics of weed.
उत्तर: खरपतवार वे अवांछित पौधे हैं जो खेतों में फसलों के साथ उगते हैं और फसलों से पोषक तत्व, जल, प्रकाश और स्थान छीन लेते हैं।
दो विशेषताएं:
- प्रतिकूल परिस्थितियों में जीवित रहने की क्षमता: खरपतवार सूखा, बाढ़, उच्च तापमान आदि प्रतिकूल परिस्थितियों में भी आसानी से जीवित रह सकते हैं।
- अधिक बीज उत्पादन क्षमता: खरपतवार बहुत अधिक मात्रा में बीज पैदा करते हैं, जो लंबे समय तक मृदा में निष्क्रिय रह सकते हैं और अनुकूल परिस्थितियों में अंकुरित हो जाते हैं।
7) सम्पर्क शाकनाशी व स्थानान्तरित शाकनाशी में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
Explain the difference between contact herbicides and translocated herbicides.
उत्तर:
| सम्पर्क शाकनाशी (Contact Herbicides) | स्थानान्तरित शाकनाशी (Translocated Herbicides) |
|---|---|
| ये केवल उन्हीं भागों को नष्ट करते हैं जिनके संपर्क में आते हैं। | ये पौधे के अंदर प्रवेश करके जाइलम या फ्लोएम के माध्यम से पूरे पौधे में पहुंच जाते हैं। |
| ये वार्षिक खरपतवारों के लिए प्रभावी होते हैं। | ये बारहमासी खरपतवारों के लिए अधिक प्रभावी होते हैं। |
| उदाहरण: पैराक्वाट, डाइक्वाट | उदाहरण: 2,4-D, ग्लाइफोसेट |
8) माउण्ट या स्टूल दाब का चित्र बनाइए।
Draw a diagram of Mount or stool layering.
उत्तर: माउण्ट या स्टूल दाब एक प्रवर्धन विधि है जिसमें मातृ पौधे के तने के आधार पर मिट्टी चढ़ा दी जाती है, जिससे तने के भूमिगत भाग से जड़ें निकलती हैं। चित्र निम्नलिखित है:
मातृ पौधा
|
तना (मिट्टी से ढका)
/ | \
जड़ें
|
नए पौधे
9) पैबन्द कलिकायन को समझाइए।
Explain the patch budding.
उत्तर: पैबन्द कलिकायन (Patch Budding) एक कलम विधि है जिसमें प्रवर्धन के लिए प्ररोह से एक आयताकार या चौकोर छाल का टुकड़ा (पैबन्द) काटकर उसी आकार के स्टॉक पर लगाया जाता है। यह विधि मोटी छाल वाले पौधों जैसे रबर, काजू, आम आदि में प्रयोग की जाती है। इसमें कैम्बियम परत का मिलान आवश्यक होता है ताकि संवहनी ऊतक जुड़ सकें।
10) उद्यान में पौधे लगाते समय कोई तीन सावधानियां लिखिए।
Write any three precautions while planting in the garden.
उत्तर: उद्यान में पौधे लगाते समय तीन सावधानियां:
- गड्ढे की तैयारी: पौधा लगाने से पहले गड्ढे को अच्छी तरह खोदकर उसमें सड़ी हुई खाद मिलानी चाहिए।
- जड़ों की सुरक्षा: पौधे की जड़ों को सूखने से बचाना चाहिए और उन्हें मोड़कर नहीं लगाना चाहिए।
- उचित गहराई: पौधे को उचित गहराई पर लगाना चाहिए, न अधिक गहरा और न अधिक उथला, ताकि जड़ गर्दन मिट्टी के स्तर पर रहे।
11) उद्यानों में अफलन के कोई तीन बाह्य कारक लिखिए।
Write any three external factors of unfruitfulness in gardens.
उत्तर: उद्यानों में अफलन के तीन बाह्य कारक:
- परागण की कमी: परागण करने वाले कीटों की अनुपस्थिति या प्रतिकूल मौसम के कारण परागण नहीं हो पाता।
- पोषक तत्वों की कमी: नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश आदि की कमी से फूल और फल नहीं बनते।
- प्रतिकूल जलवायु: अत्यधिक ठंड, गर्मी, वर्षा या सूखा फूलों और फलों के विकास को प्रभावित करता है।
12) पशुपालन में पशु आवास प्रबन्धन को समझाइए।
Explain animal housing management in animal husbandry.
उत्तर: पशु आवास प्रबन्धन का अर्थ पशुओं के लिए उपयुक्त आश्रय की व्यवस्था करना है। इसमें पशुओं को मौसम की मार (गर्मी, सर्दी, वर्षा) से बचाना, स्वच्छ वातावरण प्रदान करना, पर्याप्त स्थान देना, उचित वेंटिलेशन और प्रकाश की व्यवस्था करना शामिल है। अच्छे आवास से पशुओं का स्वास्थ्य बेहतर रहता है, दुग्ध उत्पादन बढ़ता है और रोगों का खतरा कम होता है।
13) कृषि में गौ-मूत्र के महत्व को समझाइए।
Explain the importance of cow urine in agriculture.
उत्तर: कृषि में गौ-मूत्र का महत्व:
- प्राकृतिक कीटनाशक: गौ-मूत्र में कीटनाशक गुण होते हैं, जो फसलों को कीटों और रोगों से बचाते हैं।
- पोषक तत्वों का स्रोत: इसमें नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश और सूक्ष्म पोषक तत्व होते हैं, जो मृदा की उर्वरता बढ़ाते हैं।
- जैविक खाद: गौ-मूत्र का उपयोग जैविक खाद बनाने में किया जाता है, जो मृदा के स्वास्थ्य को स
SECTION - 'C'
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (शब्द सीमा लगभग 100 शब्द)
Long answer type questions (Word limit approximately 100 words).6) भारत में प्रमाणित जैविक कृषि को समझाइए।
Explain certified organic agriculture in India.
उत्तर: भारत में प्रमाणित जैविक कृषि एक ऐसी कृषि प्रणाली है जो रासायनिक उर्वरकों, कीटनाशकों और आनुवंशिक रूप से संशोधित जीवों (GMOs) के उपयोग के बिना फसलों को उगाने की विधि है। इसे राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम (NPOP) के तहत प्रमाणित किया जाता है, जो कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) द्वारा संचालित है। प्रमाणन प्रक्रिया में खेत का निरीक्षण, मिट्टी और पानी का परीक्षण, और उत्पादन प्रक्रियाओं का दस्तावेजीकरण शामिल है। प्रमाणित जैविक उत्पादों पर "जैविक" लोगो लगा होता है, जो उपभोक्ताओं को गुणवत्ता और शुद्धता का आश्वासन देता है।
7) फलपाक (जैम) बनाने की विधि का वर्णन कीजिए।
Describe the method of preparing "JAM".
उत्तर: फलपाक (जैम) बनाने की विधि निम्नलिखित है:
- सामग्री चयन: ताजे, पके हुए फल (जैसे आम, अमरूद, सेब) लें। फलों को धोकर छीलें और बीज निकाल दें।
- फलों को पकाना: फलों के टुकड़ों को थोड़े पानी में नरम होने तक उबालें। फिर इसे मैश करें या पीस लें।
- चीनी मिलाना: फलों के गूदे में बराबर मात्रा में चीनी (1:1 अनुपात) मिलाएं। अच्छी तरह मिलाएं।
- पकाना: मिश्रण को धीमी आंच पर लगातार चलाते हुए पकाएं जब तक यह गाढ़ा न हो जाए। इसमें नींबू का रस (प्रति किलो फल में 2-3 चम्मच) मिलाएं ताकि जैम सेट हो सके।
- परीक्षण: जैम की एक बूंद ठंडे पानी में डालें; यदि वह फैलती नहीं है और जम जाती है, तो जैम तैयार है।
- भराई: गर्म जैम को स्टरलाइज़ किए गए जार में भरें और ढक्कन कसकर बंद करें। ठंडा होने पर स्टोर करें।
8) पशुओं में गलघोंटू रोग का रोगजनक और इसके कोई चार लक्षण लिखिए।
Write the causal organism and its any four symptoms of Haemorrhagic Septicemia (Galghontu) in animals.
उत्तर:
रोगजनक (Causal Organism): गलघोंटू रोग Pasteurella multocida नामक जीवाणु के कारण होता है। यह एक ग्राम-नेगेटिव, छड़ के आकार का जीवाणु है।
चार लक्षण (Four Symptoms):
- तेज बुखार (104-106°F) और अवसाद।
- गले और सिर में सूजन (एडिमा) जो जीभ और गले तक फैल जाती है, जिससे सांस लेने में कठिनाई होती है।
- मुंह से झागदार लार का निकलना और नाक से खूनी स्राव।
- अचानक मृत्यु, विशेषकर तीव्र मामलों में, और शव परीक्षण में आंतरिक अंगों में रक्तस्राव पाया जाता है।
SECTION - 'D'
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (शब्द सीमा लगभग 200 शब्द)
Long answer type questions (Word limit approximately 200 words).9) जौ की वैज्ञानिक खेती का वर्णन निम्न बिन्दुओं के आधार पर कीजिए -
i) महत्व और जलवायु
ii) बीज दर और बीज उपचार
iii) चार उन्नतशील किस्में
iv) उपज प्रति हेक्टेयरDescribe the scientific cultivation of Barley crop on the basis of following points :
i) Importance and Climate
ii) Seed rate and seed treatment
iii) Four improved varieties
iv) Yield per hectareउत्तर:
i) महत्व और जलवायु (Importance and Climate): जौ एक महत्वपूर्ण रबी फसल है, जिसका उपयोग मानव भोजन (दलिया, आटा), पशु चारा, और माल्ट उद्योग (बियर, व्हिस्की) में होता है। यह ठंडी जलवायु की फसल है, जो 12-20°C तापमान में अच्छी तरह बढ़ती है। इसे हल्की से मध्यम दोमट मिट्टी, जिसका pH 6.0-7.5 हो, में उगाया जाता है। यह सूखा सहनशील फसल है और कम वर्षा वाले क्षेत्रों में भी उगाई जा सकती है।
ii) बीज दर और बीज उपचार (Seed rate and seed treatment): बीज दर 80-100 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर होती है। बीज उपचार के लिए बीजों को कार्बेन्डाजिम या थीरम (2-3 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज) से उपचारित किया जाता है ताकि मृदाजनित रोगों से बचाव हो सके। बुवाई से पहले बीजों को 12 घंटे पानी में भिगोने से अंकुरण दर बढ़ती है।
iii) चार उन्नतशील किस्में (Four improved varieties): जौ की चार उन्नत किस्में निम्नलिखित हैं:
- RD-2503: अधिक उपज देने वाली, रोग प्रतिरोधी किस्म।
- BH-393: सूखा सहनशील और माल्ट उद्योग के लिए उपयुक्त।
- K-603: दाने बड़े और चारे के लिए अच्छी।
- PL-426: जल्दी पकने वाली, उत्तर भारत के लिए उपयुक्त।
iv) उपज प्रति हेक्टेयर (Yield per hectare): उन्नत किस्मों और उचित प्रबंधन से जौ की औसत उपज 30-40 क्विंटल प्रति हेक्टेयर (3-4 टन प्रति हेक्टेयर) होती है। सिंचित क्षेत्रों में यह 50 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक भी पहुंच सकती है।
प्रश्न 20 (Question 20)
मोठ की वैज्ञानिक खेती (Scientific Cultivation of Moth Bean)
निम्नलिखित बिन्दुओं के आधार पर मोठ की वैज्ञानिक खेती का वर्णन कीजिए:
- महत्व एवं जलवायु (Importance and Climate) – मोठ एक महत्वपूर्ण दलहनी फसल है जो शुष्क एवं अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में उगाई जाती है। इसके लिए गर्म एवं शुष्क जलवायु उपयुक्त होती है, तथा 25-35°C तापमान अनुकूल रहता है।
- बीजदर एवं बीज उपचार (Seed Rate and Seed Treatment) – बीजदर 12-15 किग्रा प्रति हेक्टेयर होती है। बुवाई से पूर्व बीजों को राइजोबियम कल्चर से उपचारित करना लाभदायक होता है।
- चार उन्नतशील किस्में (Four Improved Varieties) – आरएमओ-40, आरएमओ-225, जवाहर मोठ-1, एवं सीए-1-2-1 प्रमुख उन्नत किस्में हैं।
- उपज प्रति हेक्टेयर (Yield per Hectare) – सामान्यतः 8-10 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उपज प्राप्त होती है, जबकि उन्नत किस्मों से 12-15 क्विंटल तक उपज ली जा सकती है।
व्याख्या: मोठ की खेती कम पानी एवं कम उर्वरता वाली भूमि में भी सफलतापूर्वक की जा सकती है। बीज उपचार से नाइट्रोजन स्थिरीकरण बढ़ता है, जिससे उपज में वृद्धि होती है।
अनार की वैज्ञानिक खेती (Scientific Cultivation of Pomegranate)
निम्नलिखित बिन्दुओं के आधार पर अनार की वैज्ञानिक खेती का वर्णन कीजिए:
- जलवायु एवं भूमि (Climate and Soil) – अनार के लिए गर्म एवं शुष्क जलवायु उपयुक्त होती है। यह विभिन्न प्रकार की मिट्टी में उगाया जा सकता है, किंतु दोमट एवं बलुई दोमट मिट्टी सर्वोत्तम होती है।
- चार उन्नतशील किस्में (Four Improved Varieties) – भगवा, गणेश, मृदुला, एवं अरकता प्रमुख उन्नत किस्में हैं।
- पादप प्रवर्धन (Plant Propagation) – अनार का प्रवर्धन प्रायः कलम विधि (स्टेम कटिंग) द्वारा किया जाता है। बीज द्वारा भी प्रवर्धन संभव है, किंतु कलम विधि अधिक प्रचलित है।
- पौधे लगाने की विधि (Planting Method) – पौधों को 4-5 मीटर की दूरी पर गड्ढों में लगाया जाता है। गड्ढों में गोबर की खाद एवं उर्वरक मिलाकर भरा जाता है।
व्याख्या: अनार एक बहुवर्षीय फलदार पौधा है जिसकी खेती से अच्छा आर्थिक लाभ प्राप्त किया जा सकता है। उचित जल निकासी एवं नियमित सिंचाई से फलों की गुणवत्ता बढ़ती है।
पपीता की वैज्ञानिक खेती (Scientific Cultivation of Papaya)
निम्नलिखित बिन्दुओं के आधार पर पपीता की वैज्ञानिक खेती का वर्णन कीजिए:
- जलवायु एवं भूमि (Climate and Soil) – पपीता के लिए गर्म एवं आर्द्र जलवायु उपयुक्त होती है। यह अच्छी जल निकासी वाली दोमट मिट्टी में अच्छी उपज देता है।
- चार उन्नतशील किस्में (Four Improved Varieties) – पूसा जायंट, पूसा डेलिशियस, को-1, एवं सनराइज सोलो प्रमुख उन्नत किस्में हैं।
- पादप प्रवर्धन (Plant Propagation) – पपीता का प्रवर्धन प्रायः बीज द्वारा किया जाता है। नर्सरी में बीज बोकर पौध तैयार की जाती है।
- पौधे लगाने की विधि (Planting Method) – पौधों को 1.8-2.0 मीटर की दूरी पर गड्ढों में लगाया जाता है। प्रति हेक्टेयर लगभग 2000-2500 पौधे लगाए जाते हैं।
व्याख्या: पपीता एक शीघ्र फल देने वाली फसल है जो 8-10 माह में फल देना शुरू कर देती है। उचित सिंचाई एवं खाद प्रबंधन से अच्छी उपज प्राप्त की जा सकती है।