RBSE Class 12th 2023 Hindi-SS-01-2023 Previous Year Papers
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Paper details
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| Board | RBSE |
|---|---|
| Class | Class 12th |
| Exam year | 2023 |
| Subject | Hindi-SS-01-2023 |
| Resource type | Previous Year Papers |
| Category | RBSE Previous Year Question Papers |
| Website | RBSE Solution |
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RBSE Class 12th 2023 Hindi-SS-01-2023
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Rajasthan Board Class 12th Hindi-SS-01-2023 2023 solved Previous Year Question Papers
उच्च माध्यमिक परीक्षा, 2023
SENIOR SECONDARY EXAMINATION, 2023
हिंदी (अनिवार्य)
समय : 3 घण्टे 15 मिनट | पूर्णांक : 80
परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :
- परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न-पत्र पर नामांक अनिवार्यतः लिखें।
- सभी प्रश्न हल करना अनिवार्य हैं।
- प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें।
- जिन प्रश्नों में आन्तरिक खण्ड हैं, उन सभी के उत्तर एक साथ ही लिखें।
- प्रश्न का उत्तर लिखने से पूर्व प्रश्न का क्रमांक अवश्य लिखें।
S.No. : _ Roll No.
No. of Questions : 48 ५५.-]-प्रावां (C)
No. of Printed Pages : 7
खण्ड - अ
प्र. बहुविकल्पी प्रश्न
निम्नलिखित अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए वस्तुनिष्ठ प्रश्नों के उत्तर अपनी उत्तर-पुस्तिका में लिखिए -
आम यहाँ का विशेष मेवा है। इसमें रस भरा रहता है और इसका बौर वसन्त का अग्रदूत है। हमारे वहाँ अश्वत्थ (पीपल) को भी विशेष महत्ता दी गई है। श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान की विभूतियों में अश्वत्थ को भी माना गया है - 'अश्वत्थः सर्व वृक्षाणाम्।' भारतीय संस्कृति में जिन-जिन वस्तुओं को महत्ता दी गई है वे सब श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान की विभूतियों के रूप में आ गई हैं। भगवान बुद्ध को भी पीपल वृक्ष के ही नीचे बुद्धत्व प्राप्त हुआ था। इन वस्तुओं में हिमालय को, सरिताओं में गंगा को, पक्षियों में गरुड़ को तथा ऋतुओं में वसन्त ऋतु को महत्ता दी गई है। इन चीजों में कीर्ति, वाणी, स्मृति, बुद्धि और धृति (धैर्य) को महत्ता दी गई है। यह भी हमारी जातीय मनोवृत्ति का परिचायक है।
-
i) भगवान बुद्ध को बुद्धत्व जिस वृक्ष के नीचे प्राप्त हुआ था -
- अ) आम
- ब) अश्वत्थ ✓ सही उत्तर
- स) कर्णिकार
- द) अमलतास
व्याख्या: गद्यांश में स्पष्ट कहा गया है कि भगवान बुद्ध को पीपल वृक्ष (अश्वत्थ) के नीचे बुद्धत्व प्राप्त हुआ था।
-
ii) वसन्त का अग्रदूत किसे कहा गया है?
- अ) आम का बौर ✓ सही उत्तर
- ब) अश्वत्थ का बौर
- स) कर्णिकार का बौर
- द) अमलतास का बौर
व्याख्या: गद्यांश के अनुसार, "आम ... का बौर वसन्त का अग्रदूत है।"
-
iii) श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान की विभूतियों में माना गया है -
- अ) वाणी को
- ब) अश्वत्थ को ✓ सही उत्तर
- स) भारतीय संस्कृति को
- द) आम को
व्याख्या: गद्यांश में उल्लेख है कि श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान की विभूतियों में अश्वत्थ (पीपल) को माना गया है।
-
iv) निम्नलिखित में से 'नदी' का पर्यायवाची है -
- अ) लहर
- ब) सरिता ✓ सही उत्तर
- स) वीचि
- द) तरंग
व्याख्या: 'सरिता' शब्द नदी का पर्यायवाची है। गद्यांश में भी 'सरिताओं में गंगा' का उल्लेख है।
-
v) उपर्युक्त गद्यांश का उपयुक्त शीर्षक है -
- अ) जातीय परिस्थिति
- ब) हिमालय के जीत
- स) भारतीय संस्कृति ✓ सही उत्तर
- द) आम का महत्त्व
व्याख्या: गद्यांश में भारतीय संस्कृति में विभिन्न वस्तुओं (आम, अश्वत्थ, हिमालय, गंगा, आदि) को दी गई महत्ता का वर्णन है, अतः 'भारतीय संस्कृति' सबसे उपयुक्त शीर्षक है।
-
vi) 'जंगम' शब्द का विपरीतार्थ है -
- अ) स्थावर ✓ सही उत्तर
- ब) स्मृति
- स) धृति
- द) कीर्ति
व्याख्या: 'जंगम' का अर्थ है चलने वाला या गतिशील, इसका विपरीत 'स्थावर' (स्थिर या अचल) है।
अपठित पद्यांश
निम्नलिखित अपठित पद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए वस्तुनिष्ठ प्रश्नों के उत्तर अपनी उत्तर-पुस्तिका में लिखिए -
भू-लोक का गौरव, प्रकृति का पुण्य लीला स्थल कहाँ?
फैला मनोहर गिरि हिमालय और गंगाजल जहाँ ||
सम्पूर्ण देशों से अधिक किस देश का उत्कर्ष है?
उसका कि जो ऋषिभूमि है, वह कौन? भारतवर्ष है ||हाँ, वृद्ध भारतवर्ष ही संसार का सिरमौर है,
ऐसा पुरातन देश कोई विश्व में क्या और है?
भगवान की भव-भूतियों का यह प्रथम भण्डार है |
विधि ने किया नर-सृष्टि का पहले यहीं विस्तार है ||
-
कवि ने 'भू-लोक का गौरव' किसे बताया है?
- a) गंगा-जल को
- b) विश्व को
- स) भारतवर्ष को
- d) प्रकृति को
व्याख्या: पद्यांश की पहली पंक्ति में 'भू-लोक का गौरव' भारतवर्ष को बताया गया है, जहाँ हिमालय और गंगाजल का मनोहर दृश्य है।
-
निम्न में से 'नर-सृष्टि' का सर्वप्रथम विस्तार किया है-
- a) संसार ने
- b) विधि ने
- c) गिरि ने
- d) भव-भूति ने
व्याख्या: पद्यांश की अंतिम पंक्ति 'विधि ने किया नर-सृष्टि का पहले यहीं विस्तार है' से स्पष्ट है कि विधि (ब्रह्मा) ने मानव सृष्टि का सर्वप्रथम विस्तार भारत में किया।
-
'नूतन' शब्द का विलोम है -
- a) वरदान
- b) अभिशाप
- c) विस्तार
- d) पुरातन
व्याख्या: 'नूतन' का अर्थ नया है, इसका विलोम 'पुरातन' (पुराना) होता है। पद्यांश में भी 'पुरातन देश' का प्रयोग हुआ है।
-
निम्न में से भारत की श्रेष्ठता परिलक्षित होती है -
- a) विफल गर्व
- b) ऋषिभूमि और भवभूति भण्डार
- c) सहदय चितक
- d) सुस्रजित क्षण
व्याख्या: पद्यांश में भारत को 'ऋषिभूमि' और 'भव-भूतियों का प्रथम भण्डार' कहा गया है, जो इसकी श्रेष्ठता को दर्शाता है।
-
उपर्युक्त पद्यांश का उपयुक्त शीर्षक नीचे लिखे विकल्पों से छाँटिए -
- a) भारत की श्रेष्ठता
- b) मनुज का मन
- c) भावी सजग
- d) अग्नि समर
व्याख्या: पूरा पद्यांश भारतवर्ष की श्रेष्ठता, उसकी ऋषिभूमि और भव-भूतियों के भण्डार होने का वर्णन करता है, अतः 'भारत की श्रेष्ठता' सबसे उपयुक्त शीर्षक है।
-
"हाँ, वृद्ध भारतवर्ष ही संसार का सिरमौर है।" इस पंक्ति का सही आशय है -
- a) भारतभूमि संसार के सम्पूर्ण देशों में सर्वश्रेष्ठ
- b) जगत में आदर्श
- c) बालोपयोगी साहित्य का सृजन
- d) विकृत परम्पराओं का खण्डन
व्याख्या: 'सिरमौर' का अर्थ सर्वश्रेष्ठ या मुकुट होता है। कवि कहते हैं कि प्राचीन भारतवर्ष ही संसार के सभी देशों में सबसे श्रेष्ठ है।
प्र.2) निम्नलिखित रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए -
- हिन्दी व्याकरण को मोटे तौर पर तीन वर्गों में विभाजित किया गया है।
- भाषा को शुद्ध लिखने व बोलने संबंधी जानकारी देने वाले शास्त्र को व्याकरण कहते हैं।
- "लक्षित पुस्तक पढ़ रहा है।" वाक्य में लक्षणा शब्द शक्ति है।
- जब किसी शब्द के मुख्यार्थ में बाधा हो या अभिधा से अभीष्ट अर्थ का बोध न हो, वहाँ व्यंजना शब्द शक्ति होती है।
- जब कोई शब्द अपने एक से अधिक अर्थ प्रकट करे तो उस शब्द के कारण वहाँ श्लेष अलंकार होता है।
- "कनक कनक ते सौ गुनी, मादकता अधिकाय |" काव्य पंक्ति में प्रयुक्त यमक अलंकार है।
3.3) निम्नलिखित अतिलघूत्तरात्मक प्रश्नों के उत्तर एक पंक्ति में दीजिए -
-
निम्न पारिभाषिक शब्दों के अर्थ लिखिए -
- A) Premises - परिसर
- B) Quarterly - त्रैमासिक
-
"अनुभाग" शब्द के लिए पारिभाषिक शब्द लिखिए।
उत्तर: सेक्शन (Section) -
प्रमुख जनसंचार माध्यमों के नाम लिखिए।
उत्तर: रेडियो, टेलीविजन, समाचार पत्र, इंटरनेट -
"अरे ये चैडिंग वाड वगैरह सब गोरे लोगों के चोंचले हैं" यह शब्द किसने कहे?
उत्तर: यह शब्द लेखक के पिता ने कहे। -
लेखक सौंदलगेकर मास्टर के किस प्रकार नजदीक पहुँच गया?
उत्तर: लेखक सौंदलगेकर मास्टर के पास उनके घर जाकर और उनसे बातचीत करके नजदीक पहुँच गया। -
कौनसे दो शहर दुनिया के पुराने नियोजित शहर माने जाते हैं?
उत्तर: मोहनजोदड़ो और हड़प्पा दुनिया के पुराने नियोजित शहर माने जाते हैं। -
मुअनजो-दड़ों की खुदाई अब क्यों बंद कर दी गई है?
उत्तर: मुअनजो-दड़ों की खुदाई इसलिए बंद कर दी गई है क्योंकि खुदाई से प्राचीन अवशेषों को नुकसान पहुँच रहा था। -
"मौत के खिलाफ मनुष्य" नाम की किताब में लेखक ने क्या पढ़ा था?
उत्तर: लेखक ने इस किताब में मनुष्य की मृत्यु पर विजय पाने की क्षमता के बारे में पढ़ा था। -
औरतों की आँखे किन-किन ताकतों ने खोली है?
उत्तर: औरतों की आँखे शिक्षा, जागरूकता और सामाजिक आंदोलनों ने खोली है।
खण्ड – अ
प्र. 3 (X)
“निशा निमंत्रण' के गीत में कवि ने किस भावात्मक चित्रण की कोशिश की है?
कवि ने रात्रि के सौंदर्य और उसके आकर्षण का भावात्मक चित्रण किया है। रात को एक सुंदर निमंत्रण के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जो मन को मोह लेती है।
प्र. 3 (XI)
महादेवी के प्रति अनमोल आत्मीयता से युक्त भक्तिन के बहाने क्या संदेश दिया गया है?
भक्तिन के माध्यम से सेवा, समर्पण और आत्मीयता का संदेश दिया गया है। यह दर्शाता है कि सच्चा प्रेम और भक्ति बिना किसी स्वार्थ के होती है, जो रिश्तों को अनमोल बनाती है।
खण्ड – ब
निम्नलिखित लघुत्तरात्मक प्रश्नों के उत्तर अधिकतम 40 शब्दों में दीजिए –
प्र. 4
मुद्रित माध्यमों में लेखन हेतु किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
मुद्रित माध्यमों में लेखन के लिए भाषा की शुद्धता, स्पष्टता, संक्षिप्तता, तथ्यात्मकता, पाठक रुचि, शीर्षक की आकर्षकता और संपादन का ध्यान रखना चाहिए।
प्र. 5
वर्तमान इंटरनेट पत्रकारिता पर संक्षेप में लिखिए।
वर्तमान इंटरनेट पत्रकारिता तीव्र गति, वैश्विक पहुँच, मल्टीमीडिया सामग्री, सोशल मीडिया एकीकरण और तत्काल अपडेट पर आधारित है। यह पारंपरिक पत्रकारिता से अधिक संवादात्मक और लोकतांत्रिक है।
प्र. 6
'गीत लेखन' के बारे में लिखिए।
गीत लेखन एक कला है जिसमें भावनाओं, विचारों और कथाओं को लयबद्ध और मधुर शब्दों में व्यक्त किया जाता है। इसमें छंद, तुक, और संगीतात्मकता का विशेष ध्यान रखा जाता है।
प्र. 7
'पतंग' कविता में किन-किन बिम्बों को चित्रित किया है?
'पतंग' कविता में आकाश, धागा, हवा, उड़ान, बादल, और बच्चों के उत्साह जैसे बिम्बों को चित्रित किया गया है। ये बिम्ब स्वतंत्रता और आनंद का प्रतीक हैं।
प्र. 8
“बात सीधी थी पर' कविता का मूल भाव लिखिए।
कविता का मूल भाव यह है कि सरल बातों को भी जटिल बना दिया जाता है। यह संवादहीनता और गलतफहमी को उजागर करती है, जो रिश्तों में दूरियाँ पैदा करती है।
प्र. 9
मनुष्य को कौन-कौन से दुर्गुण घावल बना देते हैं?
अहंकार, लोभ, क्रोध, ईर्ष्या, आलस्य, और असत्य जैसे दुर्गुण मनुष्य को घावल (दुर्बल) बना देते हैं। ये उसके चरित्र और व्यक्तित्व को नष्ट करते हैं।
प्र. 10
'काले मेघा पानी दे' में लोक प्रचलित विश्वास और विज्ञान का इंद्र चित्रण अपने शब्दों में लिखिए।
लोक विश्वास में इंद्र को वर्षा का देवता माना जाता है, जबकि विज्ञान के अनुसार वर्षा बादलों और जलचक्र का परिणाम है। कविता में दोनों दृष्टिकोणों का सम्मिलित चित्रण है, जो प्रकृति के प्रति आस्था और वैज्ञानिक समझ को दर्शाता है।
खण्ड – स
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए –
प्र. 11
“कैमरे में बंद अपाहिज' करुणा जगाने के मकसद से शुरू कार्यक्रम क्रूर बन जाता है।” इस कथन का आशय लिखिए। (उत्तर शब्द सीमा 60-80 शब्द)
इस कथन का आशय है कि जब अपाहिज व्यक्ति की पीड़ा को मीडिया में दिखाकर करुणा जगाने का प्रयास किया जाता है, तो वह क्रूर बन जाता है। क्योंकि यह उसकी गरिमा को ठेस पहुँचाता है और उसे एक प्रदर्शन की वस्तु बना देता है। सच्ची करुणा निजी और संवेदनशील होनी चाहिए, न कि सार्वजनिक प्रदर्शन।
अथवा
“भवितव्यता सुखद है।” 'सहर्ष स्वीकारा है' के आधार पर समझाइए। (उत्तर शब्द सीमा 60-80 शब्द)
इस कथन का अर्थ है कि भाग्य या नियति को सकारात्मक रूप से स्वीकार करना चाहिए। 'सहर्ष स्वीकारा है' में लेखिका ने जीवन की अनिश्चितताओं को खुशी से अपनाने का संदेश दिया है। भवितव्यता को सुखद मानकर उसे स्वीकार करने से मानसिक शांति और संतोष मिलता है।
प्र. 12
“अकस्मात् गाँव पर यह आपदा हुआ।” इस कथन के आधार पर चुनौतिपूर्ण परिस्थितियों को लिखिए। (उत्तर शब्द सीमा 60-80 शब्द)
इस कथन से तात्पर्य है कि अचानक आई प्राकृतिक या सामाजिक आपदा ने गाँव को चुनौतियों से भर दिया। इन परिस्थितियों में भोजन, पानी, आश्रय, स्वास्थ्य सेवाओं की कमी, संचार व्यवस्था का टूटना, और सुरक्षा की समस्या उत्पन्न होती है। ग्रामीणों को इन कठिनाइयों का सामना सामूहिक प्रयास और धैर्य से करना पड़ता है।
अथवा
“चार्ली चैप्लिन किसी भी संस्कृति को विदेशी नहीं लगते।” इस कथन से आप कहाँ तक सहमत हैं? अपने विचार लिखिए। (उत्तर शब्द सीमा 60-80 शब्द)
मैं इस कथन से पूरी तरह सहमत हूँ। चार्ली चैप्लिन का हास्य और मानवीय संवेदनाएँ सार्वभौमिक हैं। उनके पात्र गरीबी, अन्याय, और संघर्ष को दर्शाते हैं, जो हर संस्कृति में समान रूप से समझे जाते हैं। उनकी कला भाषा और सीमाओं से परे जाकर सभी को जोड़ती है, इसलिए वे कहीं भी विदेशी नहीं लगते।
खण्ड-स (Section-C)
प्र. 3.3) 'हरिवंशराय बच्चन' कवि परिचय लिखिए | (उत्तर शब्द सीमा 80-100 शब्द) [4]
हरिवंशराय बच्चन (1907-2003) हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध कवि एवं लेखक थे। इनका जन्म 27 नवंबर 1907 को इलाहाबाद में हुआ। इनकी प्रमुख रचनाएँ 'मधुशाला', 'मधुबाला', 'मधुकलश' आदि हैं। 'मधुशाला' ने इन्हें विशेष ख्याति दिलाई। बच्चन जी की कविताओं में जीवन दर्शन, प्रेम, विरह और रहस्यवाद के तत्व मिलते हैं। उनकी भाषा सरल, प्रवाहपूर्ण और संगीतमय है। वे हिंदी साहित्य के 'छायावादी युग' के प्रमुख कवियों में से एक हैं। उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार और पद्म भूषण से सम्मानित किया गया।
अथवा
प्र. 3.3) 'सिल्वर वैडिंग' लेखक परिचय लिखिए | (उत्तर शब्द सीमा 80-100 शब्द) [4]
'सिल्वर वैडिंग' नामक पाठ के लेखक मनोहर श्याम जोशी हैं। इनका जन्म 9 अगस्त 1933 को अजमेर, राजस्थान में हुआ। वे हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध कथाकार, उपन्यासकार और व्यंग्यकार हैं। इनकी प्रमुख रचनाओं में 'कसप', 'हरियाली और रास्ता', 'टोपी शुक्ला' आदि शामिल हैं। जोशी जी की लेखनी में यथार्थवाद, सामाजिक चेतना और मानवीय संवेदनाओं का गहरा चित्रण मिलता है। उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार, पद्म श्री और व्यास सम्मान से सम्मानित किया गया।
प्र. 3.4) "संयुक्त परिवार वाले उस दौर में पति ने हमारा पक्ष कभी नहीं लिया।" इस कथन को 'सिल्वर वैडिंग' पाठ के प्रासंगिक वर्तमान परिप्रेक्ष्य में तर्क लिखिए | (उत्तर शब्द सीमा 120 शब्द) [6]
प्रस्तुत कथन 'सिल्वर वैडिंग' पाठ में यशोधर बाबू की पत्नी द्वारा कहा गया है। संयुक्त परिवार में पति का पक्ष न लेना उस समय की सामाजिक स्थिति को दर्शाता है, जहाँ पति परिवार के अन्य सदस्यों के दबाव में होता था। वर्तमान परिप्रेक्ष्य में, यह स्थिति बदल गई है। आज के समय में पति-पत्नी के बीच समानता और आपसी समझ बढ़ी है। पति अब पत्नी के पक्ष में खड़ा होता है और उसकी भावनाओं का सम्मान करता है। यह बदलाव शिक्षा, आर्थिक स्वतंत्रता और सामाजिक जागरूकता के कारण संभव हुआ है।
अथवा
प्र. 3.4) "रोते-धोते पाठशाला फिर से शुरु हो गई।" इस कथन में 'जूझ' पाठ के आधार पर किसान-मजदूर की संघर्ष कथा चित्रित कीजिए | (उत्तर शब्द सीमा 120 शब्द) [6]
प्रस्तुत कथन 'जूझ' पाठ से लिया गया है, जो लेखक आनंद यादव की आत्मकथा है। यह कथन किसान-मजदूर परिवार के बच्चे की पढ़ाई के संघर्ष को दर्शाता है। लेखक को पढ़ाई जारी रखने के लिए कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। परिवार की आर्थिक स्थिति खराब होने के बावजूद वह पढ़ाई नहीं छोड़ता। 'रोते-धोते पाठशाला फिर से शुरु हो गई' का अर्थ है कि कठिन परिस्थितियों में भी वह अपनी शिक्षा को जारी रखता है। यह किसान-मजदूर वर्ग के बच्चों की शिक्षा के प्रति संघर्ष और दृढ़ संकल्प को उजागर करता है।
खण्ड-द (Section-D)
प्र. 5) निम्नलिखित पद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए - [2+4=6]
पद्यांश:
नौरस गुंचे वत्सलता नाजुक पंख खोले हैं
या उड़ जाने को रंगों-बू गुलशन में पर खोले हैं।
तारे आँखें झपकावे हैं जर्रा-जर्रा सोये हैं
तुम भी सुनो हो यारो! शब में सन्नाटे कुछ बोले हैं
हम हो या किस्मत हो हमारी दोनों को इक ही काम मिला
(किस्मत हमको रो लेवे है हम किस्मत को रो ले हैं।
जो मुझको बदनाम करे हैं काश वे इतना सोच सके
मेरा परदा खोले हैं या अपना परदा खोले हैं।
नभ में पाँति-बँधी बगुलों के पंख,
चुराए लिए जातीं वे मेरी आँखें।
कजरारे बादलों की छाई नभ छावा,
तैरती साँझ की सतेज श्वेत काया।
हौले-हौले जाती मुझे बाँध निज माया से।
उसे कोई तनिक रोक ले।
वह तो चुगए लिए जाती मेरी आँखें
और ये पाँती-बँधी बगुलों की पाँखें।
सन्दर्भ: प्रस्तुत पद्यांश हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध कवि हरिवंशराय बच्चन की कविता से लिया गया है। यह कविता उनकी प्रसिद्ध रचना 'मधुशाला' या अन्य काव्य संग्रह से संबंधित हो सकती है।
प्रसंग: इस पद्यांश में कवि ने प्रकृति के सौंदर्य, मानवीय भावनाओं और जीवन के द्वंद्व को चित्रित किया है। पहले भाग में रात के सन्नाटे और किस्मत के साथ संघर्ष को दर्शाया गया है, जबकि दूसरे भाग में बगुलों की उड़ान और प्रकृति के मोहक दृश्य का वर्णन है।
व्याख्या: कवि कहते हैं कि नाजुक पंखों वाले फूल खिले हैं या रंग-बिरंगी तितलियाँ उड़ने को तैयार हैं। रात में तारे टिमटिमा रहे हैं और सब कुछ सोया हुआ है। कवि कहता है कि हम और हमारी किस्मत दोनों का एक ही काम है - हम एक-दूसरे को रुलाते हैं। दूसरे भाग में, आकाश में बगुलों की पंक्ति देखकर कवि की आँखें मोहित हो जाती हैं। कजरारे बादल और साँझ की सुंदरता उसे अपनी ओर खींचती है। कवि चाहता है कि कोई उसे रोके, लेकिन वह बगुलों की पंक्ति उसकी आँखें चुरा ले जाती है।
प्र.6) निम्नलिखित गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए।
(अमलतास) की बात में भूल नहीं रहा हूँ। वे भी तुलना नहीं की जा सकती। बहुत को इस तरह पन्द्रह दिन के लिए खंखड़ आस-पास बहुत हैं। लेकिन शिरीप के साथ आरग्बध की “बीस दिन के लिए फूलता है, वसंत ऋतु के पलाश की भाँति। कबीरदास लहक उठता पसंद नहीं था। यह भी क्या कि दस दिन फूले और फिर 'के-खंखड़ दिन दूस फूला फूलिके खंखड़ भया पलास!'
जाति-प्रथा का श्रम विभाजन मनुष्य की स्वेच्छा पर निर्भर नहीं रहता। मनुष्य की व्यक्तिगत भावना तथा व्यक्तिगत रुचि का इसमें कोई स्थान अथवा महत्व नहीं रहता। पूर्व जन्म ही इसका आधार है। इस आधार पर हमें यह स्वीकार करना पड़ेगा कि आज के उद्योगों में गरीबी और उत्पीड़न इतनी बड़ी समस्या नहीं जितनी यह कि बहुत से लोग निर्धारित कार्य को 'अरूचि' के साथ केवल विवशतावश करते हैं। ऐसी स्थिति स्वभावतः मनुष्य को दुर्भावना से ग्रस्त रहकर टालू काम करने और कम काम करने के लिए प्रेरित करती है। ऐसी स्थिति में जहाँ काम करने वालों का न दिल लगता हो न दिमाग, कोई कुशलता कैसे प्राप्त की जा सकती है।
सप्रसंग व्याख्या:
प्रसंग: प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक से लिया गया है। इसमें लेखक ने जाति-प्रथा पर आधारित श्रम विभाजन की समस्या पर प्रकाश डाला है। साथ ही, फूलों की तुलना के माध्यम से जीवन की क्षणभंगुरता और सौंदर्य का वर्णन किया गया है।
व्याख्या: लेखक कहता है कि वह अमलतास के फूलों को नहीं भूला है, लेकिन उनकी तुलना शिरीष के फूलों से नहीं की जा सकती। शिरीष के फूल बीस दिन तक खिलते हैं, जबकि पलाश के फूल केवल दस दिन खिलते हैं और फिर मुरझा जाते हैं। कबीरदास ने भी कहा है कि पलास का फूल दो दिन ही खिलता है और फिर सूख जाता है। इसके बाद लेखक जाति-प्रथा पर आधारित श्रम विभाजन की ओर मुड़ता है। वह कहता है कि यह विभाजन मनुष्य की स्वेच्छा या रुचि पर निर्भर नहीं करता, बल्कि पूर्व जन्म के कर्मों पर आधारित है। इस कारण आज के उद्योगों में गरीबी और उत्पीड़न से बड़ी समस्या यह है कि लोग विवश होकर अरुचिकर कार्य करते हैं। ऐसी स्थिति में मनुष्य दुर्भावना से ग्रस्त होकर काम टालता है और कम काम करता है। जब काम करने वाले का न तो मन लगता है और न ही दिमाग, तो कुशलता प्राप्त करना असंभव है।
प्र.7) सचिव, माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, राजस्थान, अजमेर की ओर से बोर्ड की पाठ्यपुस्तकें क्रय करने हेतु विज्ञप्ति तैयार कीजिए।
विज्ञप्ति
सचिव, माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, राजस्थान, अजमेर
दिनांक: [तिथि]
बोर्ड की पाठ्यपुस्तकों की खरीद हेतु सूचना
माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, राजस्थान, अजमेर द्वारा शैक्षणिक सत्र 2023-24 के लिए बोर्ड की पाठ्यपुस्तकें क्रय की जानी हैं। इच्छुक प्रकाशक/विक्रेता निर्धारित प्रपत्र में अपनी बोली/प्रस्ताव कार्यालय में जमा करा सकते हैं।
महत्वपूर्ण शर्तें:
- पुस्तकें बोर्ड द्वारा निर्धारित मानकों एवं गुणवत्ता के अनुरूप हों।
- बोली पत्र 15 दिनों के भीतर कार्यालय में जमा करना अनिवार्य है।
- आरक्षित मूल्य से कम बोली स्वीकार नहीं की जाएगी।
- बोर्ड बिना कारण बताए किसी भी बोली को अस्वीकार करने का अधिकार सुरक्षित रखता है।
अधिक जानकारी के लिए कार्यालय से संपर्क करें।
सचिव
माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, राजस्थान, अजमेर
अथवा
अपने विद्यालय में कार्यालय सामग्री क्रय करने हेतु निविदा
निविदा सूचना
विद्यालय का नाम: [विद्यालय का नाम]
दिनांक: [तिथि]
विद्यालय में कार्यालय सामग्री (जैसे- कागज, पेन, फाइल, इंक, स्टेपलर आदि) की खरीद हेतु सीलबंद निविदाएँ आमंत्रित की जाती हैं।
निविदा संबंधी शर्तें:
- निविदा पत्र 10 दिनों के भीतर विद्यालय कार्यालय में जमा करना होगा।
- सामग्री की गुणवत्ता मानकों के अनुरूप होनी चाहिए।
- न्यूनतम बोली को प्राथमिकता दी जाएगी।
- विद्यालय प्रशासन किसी भी निविदा को बिना कारण बताए अस्वीकार कर सकता है।
विस्तृत सूची एवं प्रपत्र विद्यालय कार्यालय से प्राप्त किए जा सकते हैं।
प्रधानाचार्य
[विद्यालय का नाम]
प्र.8) निम्नलिखित विषयों में से किसी एक विषय पर सारगर्भित निबंध लिखिए। (शब्द सीमा 300 शब्द)
- कोरोना महामारी – एक अभिशाप
- युवा शक्ति एवं चुनौतियाँ
- साक्षरता अभियान के बढ़ते कदम
- समाज में नारी योगदान
निबंध: कोरोना महामारी – एक अभिशाप
कोरोना महामारी (COVID-19) ने पूरे विश्व को अपनी चपेट में ले लिया। यह एक ऐसा अभिशाप साबित हुआ जिसने मानव जीवन के हर पहलू को प्रभावित किया। सबसे पहले, इसने लाखों लोगों की जान ली और स्वास्थ्य व्यवस्था को चरमरा दिया। अस्पतालों में बिस्तरों की कमी, ऑक्सीजन की किल्लत और दवाओं का अभाव आम हो गया।
आर्थिक दृष्टि से, लॉकडाउन के कारण उद्योग-धंधे बंद हो गए, बेरोजगारी बढ़ी और गरीबी ने विकराल रूप धारण कर लिया। प्रवासी मजदूरों को पैदल ही अपने गाँव लौटना पड़ा। शिक्षा क्षेत्र में ऑनलाइन कक्षाओं ने डिजिटल विभाजन को उजागर किया, जहाँ गरीब बच्चे शिक्षा से वंचित रह गए।
मानसिक स्वास्थ्य पर भी इसका गहरा प्रभाव पड़ा। अकेलापन, चिंता और अवसाद ने लोगों को घेर लिया। सामाजिक दूरी ने रिश्तों को कमजोर किया। हालाँकि, इस महामारी ने हमें एकजुटता, स्वच्छता और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का पाठ भी पढ़ाया, लेकिन कुल मिलाकर यह एक अभिशाप ही रही, जिसने मानवता को गहरे घाव दिए।