RBSE Class 12th 2023 Hindi-VU-01-2023 Previous Year Papers
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Paper details
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| Board | RBSE |
|---|---|
| Class | Class 12th |
| Exam year | 2023 |
| Subject | Hindi-VU-01-2023 |
| Resource type | Previous Year Papers |
| Category | RBSE Previous Year Question Papers |
| Website | RBSE Solution |
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RBSE Class 12th 2023 Hindi-VU-01-2023
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Rajasthan Board Class 12th Hindi-VU-01-2023 2023 solved Previous Year Question Papers
वरिष्ठ उपाध्याय परीक्षा, 2023
VARISTHA UPADHYAYA EXAMINATION, 2023
हिंदी (अनिवार्य)
समय : 3 घण्टे (5 मिनिट) &
५. बहुविकल्पी प्रश्न
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर अपनी उत्तर-पुस्तिका में लिखिए।
हमारे यहाँ आम का विशेष महत्व है। इसके रस भरा होता है और इसका वृक्ष अश्वत्थ (पीपल) का भी विशेष महत्व है। श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान की विभूतियों के रूप में वृक्षों में अश्वत्थ को तथा ऋतुओं में वसंत ऋतु को महत्ता दी गई है। यह सब माना गया है। अश्वत्थ: सर्व वृक्षाणाम्। भारतीय संस्कृति में लोगों की मान्यता है कि बुद्ध को भी अश्वत्थ वृक्ष के नीचे बुद्धत्व प्राप्त हुआ था। स्थावर वस्तुओं में हिमालय को, सरिताओं में गंगा को, पशुओं में सिंह को तथा ऋतुओं में वसंत ऋतु को महत्ता दी गई है। चलती-फिरती चीजों में वाणी, स्मृति, बुद्धि और धृति (धैर्य) को महत्ता दी गई है। यह भी हमारी जातीय मनोवृत्ति का परिचायक है।
-
(i) भगवान बुद्ध को बुद्धत्व जिस वृक्ष के नीचे प्राप्त हुआ था -
- आम
- अश्वत्थ
- कर्णिकार
- अमलतास
व्याख्या: गद्यांश के अनुसार, बुद्ध को अश्वत्थ (पीपल) वृक्ष के नीचे बुद्धत्व प्राप्त हुआ था।
-
(ii) 'आम' का अग्रदूत किसे कहा गया है?
- आम का बौर
- अश्वत्थ का बौर
- कर्णिकार का बौर
- अमलतास का बौर
व्याख्या: गद्यांश में स्पष्ट उल्लेख नहीं है, परंतु सामान्य ज्ञान के अनुसार आम का बौर (मंजरी) ही आम का अग्रदूत माना जाता है।
-
(iii) श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान की विभूतियों में माना गया है -
- वाणी को
- भगवान बुद्ध को
- भारतीय संस्कृति को
- अश्वत्थ को
व्याख्या: गद्यांश में कहा गया है कि श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान की विभूतियों के रूप में वृक्षों में अश्वत्थ को महत्ता दी गई है।
-
(iv) निम्नलिखित में से 'नदी' का पर्यायवाची है -
- लहर
- सरिता
- वीचि
- तरंग
व्याख्या: 'सरिता' शब्द 'नदी' का पर्यायवाची है। लहर, वीचि और तरंग 'लहर' के पर्यायवाची हैं।
-
(v) उपर्युक्त गद्यांश का उपयुक्त शीर्षक है -
- जातीय परिस्थिति
- हिमालय का महत्व
- भारतीय संस्कृति
- भाषा की उपयोगिता
व्याख्या: गद्यांश में भारतीय संस्कृति में विभिन्न वस्तुओं (वृक्ष, ऋतु, नदी आदि) के महत्व का वर्णन है, अतः 'भारतीय संस्कृति' उपयुक्त शीर्षक है।
-
(vi) 'जंगम' शब्द का विपरीतार्थ है -
- स्थावर
- गीता
व्याख्या: 'जंगम' का अर्थ चलने-फिरने वाला होता है, इसका विपरीत 'स्थावर' (स्थिर या अचल) है।
VU-01-Hindi (©) 3064
अपठित पद्यांश
निम्नलिखित अपठित पद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए वस्तुनिष्ठ प्रश्नों के उत्तर अपनी उत्तर-पुस्तिका में लिखिए -
भू-लोक का गौरव, प्रकृति का पुण्य लीला स्थल कहाँ?
फैला मनोहर गिरि हिमालय और गंगाजल जहाँ ॥
सम्पूर्ण देशों से अधिक किस देश का उत्कर्ष है?
उसका कि जो ऋषिभूमि है, वह कौन? भारतवर्ष है ॥
हाँ, वृद्ध भारतवर्ष ही संसार का सिरमौर है,
ऐसा पुरातन देश कोई विश्व में क्या और है?
भगवान की भव-भूतियों का यह प्रथम भण्डार है |
विधि ने किया नर-सृष्टि का पहले यहीं विस्तार है ॥
प्रश्न एवं उत्तर
-
कवि ने 'भू-लोक का गौरव' किसे बताया है?
- a) गंगा-जल को
- b) विश्व को
- c) भारतवर्ष को
- d) प्रकृति को
स्पष्टीकरण: पद्यांश की पंक्ति "भू-लोक का गौरव... वह कौन? भारतवर्ष है" से स्पष्ट है कि कवि ने भारतवर्ष को भू-लोक का गौरव बताया है।
-
निम्न में से 'नर-सृष्टि' का सर्वप्रथम विस्तार किया है -
- a) संसार ने
- b) विधि ने
- c) मनोहर गिरि ने
- d) भव-भूति ने
स्पष्टीकरण: पद्यांश की अंतिम पंक्ति "विधि ने किया नर-सृष्टि का पहले यहीं विस्तार है" के अनुसार विधि (ब्रह्मा) ने मनुष्य की सृष्टि का सर्वप्रथम विस्तार किया।
-
'अग्र' शब्द का विलोम है -
- a) वरदान
- b) अभिशाप
- c) विस्तार
- d) पुरातन
स्पष्टीकरण: 'अग्र' का अर्थ है आगे या श्रेष्ठ, इसका विलोम 'अभिशाप' (शाप या पीछे) नहीं है। यहाँ 'अग्र' का विलोम 'पृष्ठ' या 'पश्च' होता है, लेकिन दिए गए विकल्पों में 'अभिशाप' सही है क्योंकि 'अग्र' का अर्थ 'वरदान' से जुड़ा है और इसका विलोम 'अभिशाप' है।
-
निम्न में से भारत की श्रेष्ठता परिलक्षित होती है -
- a) विफल गर्व
- b) ऋषिभूमि और भवभूति
- c) सहदय चिंतक
- d) सुसजित क्षण
स्पष्टीकरण: पद्यांश में भारत को 'ऋषिभूमि' (ऋषियों की भूमि) और 'भव-भूतियों का प्रथम भण्डार' कहा गया है, जो इसकी श्रेष्ठता को दर्शाता है।
-
उपर्युक्त पद्यांश का उपयुक्त शीर्षक नीचे लिखे विकल्पों से छाँटिए -
- a) भारत की श्रेष्ठता
- b) मनुजकामना
- c) भावी सजग
- d) अग्नि समर
स्पष्टीकरण: पूरा पद्यांश भारतवर्ष की महिमा और श्रेष्ठता का वर्णन करता है, अतः 'भारत की श्रेष्ठता' सबसे उपयुक्त शीर्षक है।
-
"हाँ, वृद्ध भारतवर्ष ही संसार का सिरमौर है।" इस पंक्ति का सही आशय है -
- a) भारतभूमि संसार के सम्पूर्ण देशों में सर्वश्रेष्ठ है।
- b) जगत कल्याण में आदर्श
- c) बालोपयोगी साहित्य का सृजन
- d) विकृत परम्पराओं का खण्डन
स्पष्टीकरण: 'सिरमौर' का अर्थ सर्वश्रेष्ठ या मुकुट होता है। इस पंक्ति का आशय है कि भारतवर्ष संसार के सभी देशों में सबसे श्रेष्ठ है।
प्र.2) निम्नलिखित रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए -
- हिन्दी व्याकरण को मोटे तौर पर चार वर्गों में विभाजित किया गया है।
- भाषा को शुद्ध लिखने व बोलने संबंधी जानकारी देने वाले को व्याकरण कहते हैं।
- “लक्षित पुस्तक पढ़ रहा है।' वाक्य में लक्षणा शब्द शक्ति है।
- जब किसी शब्द के मुख्यार्थ में बाधा हो या अभिधा से अभीष्ट अर्थ का बोध न हो, वहाँ व्यंजना शक्ति होती है।
- यदि कोई शब्द अपने एक से अधिक अर्थ प्रकट करे तो उस शब्द के कारण वहाँ श्लेष अलंकार होता है।
- “कनक कनक ते सौ गुनी, मादकता अधिकाय |" काव्य पंक्ति में प्रयुक्त यमक अलंकार है।
प्र.3) निम्नलिखित अतिलघूत्तरात्मक प्रश्नों के उत्तर एक पंक्ति में दीजिए -
-
निम्न पारिभाषिक शब्दों के अर्थ लिखिए -
- A) Premises – परिसर
- B) Quarterly – त्रैमासिक
-
“अनुभाग' शब्द के लिए पारिभाषिक शब्द लिखिए – Section
-
प्रमुख जनसंचार माध्यमों के नाम लिखिए – रेडियो, टेलीविजन, समाचार पत्र, इंटरनेट
-
“रे ये वैडिंग एनिवर्सरी वगैरह सब गोरे साहबों के चोंचले हैं” यह शब्द किसने कहे? – लेखक के पिता ने
-
लेखक सौंदलगेकर मास्टर के किस प्रकार नजदीक पहुँच गया? – लेखक ने उनके साथ बैठकर बातचीत की और उनके विचारों को समझा
-
कौनसे दो शहर दुनिया के पुराने नियोजित शहर माने जाते हैं? – मोहनजोदड़ो और हड़प्पा
-
मुअनजो-दड़ो की खुदाई अब क्यों बंद कर दी गई है? – भूजल स्तर बढ़ने और संरक्षण की समस्या के कारण
-
मौत के खिलाफ मनुष्य' नाम की किताब में लेखक ने क्या पढ़ा था? – मनुष्य की मृत्यु पर विजय पाने की क्षमता के बारे में
-
औरतों की आँखें किन-किन ताकतों ने ग्योली है? – सामाजिक रूढ़ियों, पुरुष प्रधानता और अंधविश्वास ने
खण्ड - व
निम्नलिखित लघुत्तरात्मक प्रश्नों के उत्तर अधिकतम 40 शब्दों में दीजिए -
3.4) मुद्रित माध्यमों में लेखन हेतु किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
मुद्रित माध्यमों में लेखन हेतु भाषा की शुद्धता, स्पष्टता, संक्षिप्तता, तथ्यों की सटीकता, पाठकों की रुचि, शीर्षक की आकर्षकता, और समाचार मूल्य का ध्यान रखना चाहिए। साथ ही, भाषा सरल और प्रभावशाली होनी चाहिए।
3.5) वर्तमान इंटरनेट पत्रकारिता के बारे में संक्षेप में लिखिए।
वर्तमान इंटरनेट पत्रकारिता तीव्र गति, वैश्विक पहुँच, मल्टीमीडिया सामग्री (वीडियो, ऑडियो, चित्र), और पाठकों की तत्काल प्रतिक्रिया की सुविधा प्रदान करती है। यह पारंपरिक मीडिया से अधिक लोकतांत्रिक और सुलभ है, लेकिन इसमें विश्वसनीयता और सत्यापन की चुनौतियाँ भी हैं।
3.6) “ग्रीन लेखन” के बारे में लिखिए।
ग्रीन लेखन पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास से संबंधित विषयों पर केंद्रित लेखन है। इसमें प्रकृति, जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण, और पारिस्थितिकी के मुद्दों को उठाया जाता है, जिससे जागरूकता बढ़े और पर्यावरण-अनुकूल व्यवहार को बढ़ावा मिले।
3.7) “बादल” कविता में किन-किन बिम्बों को चित्रित किया है?
“बादल” कविता में बादलों के गरजने, बिजली चमकने, वर्षा की बूँदों, हवा के झोंकों, और प्रकृति के सौंदर्य जैसे बिम्बों को चित्रित किया गया है। ये बिम्ब कविता में गतिशीलता और प्राकृतिक ऊर्जा का संचार करते हैं।
3.8) “वह सीधी थी पर” कविता का मूल भाव लिखिए।
इस कविता का मूल भाव स्त्री की सादगी, सहजता और उसकी आंतरिक शक्ति को उजागर करना है। कविता में दिखाया गया है कि बाहरी सीधापन और सरलता के बावजूद स्त्री में अदम्य साहस और संघर्ष करने की क्षमता होती है।
3.9) मनुष्य को कौन-कौन से दुर्गुण घायल कर बेकार बना देते हैं?
मनुष्य को क्रोध, लोभ, अहंकार, ईर्ष्या, आलस्य, और निराशा जैसे दुर्गुण घायल कर बेकार बना देते हैं। ये दुर्गुण उसकी मानसिक शांति, सामाजिक संबंधों और कार्यक्षमता को नष्ट कर देते हैं, जिससे वह जीवन में आगे नहीं बढ़ पाता।
3.10) “आर मेघा पानी” में लोक प्रचलित विश्वास और विज्ञान का पक्ष अपने शब्दों में लिखिए।
“आर मेघा पानी” में लोक विश्वास है कि बादलों की गर्जना और बिजली से वर्षा होती है, जिसे देवताओं का प्रकोप या आशीर्वाद माना जाता है। विज्ञान के अनुसार, यह जल चक्र का परिणाम है, जहाँ जलवाष्प संघनित होकर बादल बनते हैं और वर्षा करते हैं।
खण्ड - स
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए -
4.1) “कैमरे में बंद अपाहिज” करुणा जगाने के मकसद से शुरू कार्यक्रम क्रूर बन जाता है। इस कथन का अर्थ स्पष्ट कीजिए। (उत्तर शब्द सीमा 60-80 शब्द)
इस कथन का अर्थ है कि जब मीडिया दर्शकों में करुणा जगाने के लिए अपाहिज या पीड़ित लोगों की दुर्दशा को दिखाता है, तो यह मानवीय संवेदना को भुनाने का प्रयास बन जाता है। यह कार्यक्रम शुरू में भले ही सहानुभूति जगाने के लिए बनाया गया हो, लेकिन जब इसे बार-बार दिखाया जाता है या सनसनीखेज बनाया जाता है, तो यह पीड़ितों की गरिमा को ठेस पहुँचाता है और क्रूरता में बदल जाता है। दर्शकों की संवेदनशीलता कम हो जाती है और यह मनोरंजन का साधन बन जाता है।
खण्ड - स
प्र. 3. (ज) हरिबंशराय बच्चन' कवि परिचय लिखिए | (उत्तर शब्द सीमा 80-100 शब्द)
हरिबंशराय बच्चन (1907-2003) हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध कवि एवं लेखक थे। उनका जन्म इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश में हुआ। वे हिंदी साहित्य की 'प्रगतिवादी' और 'रहस्यवादी' धारा के प्रमुख कवि माने जाते हैं। उनकी प्रसिद्ध रचनाओं में 'मधुशाला', 'मधुबाला', 'मधुकलश' और 'निशा निमंत्रण' शामिल हैं। 'मधुशाला' उनकी सबसे लोकप्रिय कृति है, जिसमें जीवन, प्रेम और दर्शन का अनूठा संगम है। बच्चन जी की भाषा सरल, प्रवाहपूर्ण और संगीतमय है। उन्हें साहित्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। उनकी कविताओं में मानवीय संवेदनाओं और जीवन के यथार्थ का गहरा चित्रण मिलता है।
अथवा
प्र. 3. (ज) 'सेग कुमार' का लेखक परिचय लिखिए | (उत्तर शब्द सीमा 80-100 शब्द)
सेग कुमार (जन्म: 1939) हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध लेखक एवं कवि हैं। उनका जन्म बिहार के सीतामढ़ी जिले में हुआ। वे मुख्यतः कहानीकार और उपन्यासकार के रूप में जाने जाते हैं। उनकी प्रमुख रचनाओं में 'सिल्वर वेडिंग', 'दूसरा आदमी', 'एक और जीवन' और 'आदमी का जहर' शामिल हैं। उनकी कहानियाँ मध्यमवर्गीय जीवन, पारिवारिक संबंधों और सामाजिक यथार्थ का मार्मिक चित्रण करती हैं। सेग कुमार की भाषा सरल, सहज और संवादात्मक है। उन्होंने साहित्य अकादमी पुरस्कार सहित कई प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त किए हैं। उनकी रचनाओं में मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक विसंगतियों का गहरा विश्लेषण मिलता है।
प्र. 4. 'संयुक्त परिवार वाले उस दौर में पति ने हमारा पक्ष कभी नहीं लिया।' इस कथन को 'सिल्वर वेडिंग' पाठ के प्रासंगिक वर्तमान परिप्रेक्ष्य में तर्क लिखिए | (उत्तर शब्द सीमा 120 शब्द)
यह कथन 'सिल्वर वेडिंग' पाठ में पत्नी की पीड़ा को दर्शाता है, जो संयुक्त परिवार में पति के तटस्थ रवैये से उत्पन्न होती है। वर्तमान परिप्रेक्ष्य में, यह स्थिति अब भी प्रासंगिक है, हालाँकि बदलाव आए हैं। आज के समय में, पति-पत्नी के बीच समानता और संवाद बढ़ा है, लेकिन कई परिवारों में पति अभी भी पत्नी के पक्ष में खड़ा नहीं होता, खासकर पारंपरिक संयुक्त परिवारों में। यह पत्नी की भावनात्मक सुरक्षा और आत्मसम्मान को प्रभावित करता है। पाठ में दर्शाया गया संघर्ष आज भी उतना ही सच है, जहाँ पति का तटस्थ रवैया पत्नी को अकेला और असुरक्षित महसूस कराता है। वर्तमान में, महिलाओं की जागरूकता और आर्थिक स्वतंत्रता ने इस स्थिति को चुनौती दी है, लेकिन अब भी कई महिलाएँ इसी तरह के संघर्ष का सामना करती हैं।
अथवा
प्र. 4. 'रोते-धोते पाठशाला फिर से शुरू हो गई।' इस कथन में 'जूझ' पाठ के आधार पर किसान-मजदूर की संघर्ष झाँकी चित्रित कीजिए | (उत्तर शब्द सीमा 120 शब्द)
यह कथन 'जूझ' पाठ में किसान-मजदूर परिवारों की विवशता और संघर्ष को दर्शाता है। पाठ में, बच्चों को पढ़ाई के लिए विद्यालय भेजा जाता है, लेकिन वे रोते-धोते जाते हैं क्योंकि उनके परिवारों को उनकी मजदूरी की आवश्यकता होती है। यह किसान-मजदूर वर्ग की गरीबी और शिक्षा के प्रति उनकी दुविधा को उजागर करता है। बच्चों को पढ़ाई और काम के बीच चयन करना पड़ता है, जो उनके जीवन को कठिन बना देता है। यह संघर्ष झाँकी दर्शाती है कि कैसे गरीबी और सामाजिक परिस्थितियाँ बच्चों की शिक्षा को बाधित करती हैं। पाठ में, बच्चों की मजबूरी और परिवार की आर्थिक स्थिति के बीच का टकराव स्पष्ट रूप से चित्रित किया गया है, जो किसान-मजदूर वर्ग के जीवन की कठोर वास्तविकता को दर्शाता है।
खण्ड - द
प्र. 5. (ल) निम्नलिखित पद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए - [2+4=6]
पद्यांश:
गुंचे पंखड़ियो की नाजुक गिरहें खोले हैं
या उड़ जाने को रंगों-बू गुलशन में पर खोले हैं |
तारे आँखें झपकावे हैं जर्रा-जर्रा सोये हैं
तुम भी सुनो हो अरे! मगर सन्नाटे कुछ बोले है
हम हो या किस्मत हो हमारी दोनों को इक ही काम मिला
किस्मत हमको रो लेवे है हम किस्मत को रो ले हैं |
जो मुझको बदनाम करे हैं काश वे इतना सोच सके
मेरा परदा खोले हैं या अपना परदा खोल रहे हैं |
सन्दर्भ: प्रस्तुत पद्यांश हरिबंशराय बच्चन द्वारा रचित कविता 'मधुशाला' से लिया गया है। यह कविता जीवन, प्रेम और दर्शन के गूढ़ रहस्यों को उजागर करती है।
प्रसंग: इस पद्यांश में कवि ने जीवन की नश्वरता, भाग्य की विडंबना और समाज के पाखंड पर व्यंग्य किया है। कवि कहता है कि जीवन में सब कुछ क्षणिक है, और हम अपने भाग्य से लड़ते हुए ही जीवन बिता देते हैं।
व्याख्या: कवि कहता है कि फूलों की कलियाँ अपनी पंखुड़ियाँ खोल रही हैं, मानो वे उड़ने के लिए अपने पंख खोल रही हों। तारे आँखें झपका रहे हैं और हर कण सोया हुआ है। कवि कहता है कि हे सुनने वाले! तुम भी सुनो, लेकिन इस सन्नाटे में कुछ बोल रहा है। कवि आगे कहता है कि हम और हमारी किस्मत दोनों का एक ही काम है - किस्मत हमें रुलाती है और हम किस्मत को रोते हैं। अंत में कवि उन लोगों पर व्यंग्य करता है जो उसे बदनाम करते हैं, और कहता है कि काश वे सोच सकें कि वे मेरा परदा खोल रहे हैं या अपना ही परदा खोल रहे हैं। इस प्रकार, कवि ने जीवन की क्षणभंगुरता, भाग्य की विडंबना और समाज के पाखंड को गहराई से चित्रित किया है।
अथवा
पद्यांश:
नभ में पाँति-बँधे बगुलों के पंख,
चुराए लिए जातीं वे मेरी आँखें |
कजरारे बादलों की छाई नभ छाया,
तैरती साँझ की सतेज श्वेत काया |
हौले-हौले जाती मुझे बाँध निज माया से ।
उसे कोई तनिक रोक लेता |
वह तो चुराए लिए जाती मेरी आँखें
नभ में पाँती-बँधी बगुलो की पाँखें |
सन्दर्भ: प्रस्तुत पद्यांश सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' द्वारा रचित कविता 'बादल राग' से लिया गया है। यह कविता प्रकृति के सौंदर्य और मानवीय भावनाओं के बीच के संबंध को दर्शाती है।
प्रसंग: इस पद्यांश में कवि ने आकाश में उड़ते बगुलों के पंखों की सुंदरता और उनके मोहक प्रभाव का वर्णन किया है। कवि कहता है कि बगुलों के पंख उसकी आँखों को चुरा ले जाते हैं, और वह उन्हें रोक नहीं पाता।
व्याख्या: कवि कहता है कि आकाश में पंक्तिबद्ध बगुलों के पंख मेरी आँखों को चुरा ले जाते हैं। कजरारे बादलों की छाया आकाश में छाई हुई है, और तैरती हुई शाम की सफेद काया सुंदर दिखाई देती है। वह (बगुलों की पंक्ति) धीरे-धीरे मुझे अपनी माया में बाँध लेती है। कवि कहता है कि काश कोई उसे रोक लेता, लेकिन वह तो मेरी आँखों को चुराए लिए जाती है - आकाश में पंक्तिबद्ध बगुलों के पंख। इस प्रकार, कवि ने प्रकृति के इस अद्भुत दृश्य को शब्दों में पिरोया है, जो मानव मन को मोह लेता है।
प्रश्न 3.46
निम्नलिखित गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए: [2+4=6]
जेठ की जलती धूप में, धरती निर्धूप अग्निकुण्ड बनी हुई थी, शिरीष नीचे से ऊपर तक फूलों से लद गया था। कम फूल इस प्रकार की गरमी में फूल सकने की हिम्मत करते हैं। कर्णिकार और आरगवध...
सन्दर्भ: प्रस्तुत गद्यांश हजारीप्रसाद द्विवेदी द्वारा रचित निबंध 'शिरीष के फूल' से लिया गया है।
प्रसंग: लेखक ने ग्रीष्म ऋतु की प्रचंड गर्मी में शिरीष के वृक्ष पर खिले फूलों का वर्णन किया है। वे बताते हैं कि जब सारी धरती अग्निकुंड जैसी जल रही होती है, तब भी शिरीष का पेड़ फूलों से लद जाता है।
व्याख्या: लेखक कहते हैं कि जेठ मास की तपती धूप में धरती सूर्य के समान अग्निकुंड बन गई है। ऐसी भीषण गर्मी में शिरीष का वृक्ष नीचे से ऊपर तक फूलों से लद गया है। बहुत कम फूल ऐसे होते हैं जो इस प्रकार की गर्मी में खिलने का साहस करते हैं। कर्णिकार और आरगवध जैसे फूल भी इस गर्मी में मुरझा जाते हैं, लेकिन शिरीष के फूल इस कठोर परिस्थिति में भी खिलकर अपनी विशेषता दर्शाते हैं।
प्रश्न 3.47
निम्नलिखित गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए: [2+4=6]
"जाति-प्रथा का श्रम विभाजन मनुष्य की स्वेच्छा पर निर्भर नहीं रहता। मनुष्य की व्यक्तिगत रुचि का इसमें कोई स्थान अथवा महत्व नहीं रहता। 'पूर्व लेख' ही इसका आधार है। इस आधार पर हमें यह स्वीकार करना पड़ेगा कि आज के उद्योगों में गरीबी बहुत से लोग निर्धारित कार्य को 'अरुचि' के साथ केवल विवशतावश करते हैं। ऐसी स्थिति स्वभावतः मनुष्य को दुर्भावना से ग्रस्त रहकर टालू काम करने और कम काम करने के लिए प्रेरित करती है। ऐसी स्थिति में जहाँ काम करने वालों का न दिल लगता हो न दिमाग, कोई कुशलता कैसे प्राप्त की जा सकती है।"
सन्दर्भ: प्रस्तुत गद्यांश डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा रचित निबंध 'जाति-प्रथा का श्रम विभाजन' से लिया गया है।
प्रसंग: लेखक ने जाति-प्रथा के आधार पर होने वाले श्रम विभाजन की आलोचना की है। वे बताते हैं कि यह विभाजन व्यक्ति की रुचि और स्वेच्छा पर आधारित नहीं है, बल्कि जन्म से निर्धारित होता है।
व्याख्या: लेखक कहते हैं कि जाति-प्रथा पर आधारित श्रम विभाजन मनुष्य की अपनी इच्छा पर निर्भर नहीं करता। इसमें व्यक्ति की निजी रुचि और भावना का कोई महत्व नहीं है। इसका आधार केवल 'पूर्व लेख' अर्थात जन्म से निर्धारित जाति है। इसी कारण आज के उद्योगों में अनेक गरीब लोग विवश होकर वह कार्य करते हैं जिसमें उनकी रुचि नहीं होती। ऐसी स्थिति स्वाभाविक रूप से मनुष्य को दुर्भावना से ग्रस्त कर देती है, जिससे वह काम को टालने और कम काम करने लगता है। जब काम करने वाले का न तो मन लगता है और न ही दिमाग, तो उस कार्य में कुशलता प्राप्त करना असंभव हो जाता है।
प्रश्न 3.48
सचिव, माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, राजस्थान, अजमेर की ओर से बोर्ड की पाठ्यपुस्तकें क्रय करने हेतु विज्ञप्ति तैयार कीजिए।
विज्ञप्ति
माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, राजस्थान, अजमेर
दिनांक: [दिनांक]
बोर्ड द्वारा संचालित विद्यालयों हेतु पाठ्यपुस्तकों की खरीद के लिए इच्छुक प्रकाशकों/विक्रेताओं से आवेदन आमंत्रित किए जाते हैं।
विवरण:
- कक्षा 1 से 12 तक की बोर्ड द्वारा निर्धारित पाठ्यपुस्तकें
- अनुमानित मात्रा: [मात्रा]
- अंतिम तिथि: [तिथि] तक
इच्छुक प्रतिष्ठान निर्धारित प्रपत्र में आवेदन बोर्ड कार्यालय में जमा करा सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए बोर्ड की वेबसाइट देखें।
सचिव
माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, राजस्थान, अजमेर
अथवा
अपने विद्यालय में कार्यालय सामग्री क्रय करने हेतु एक निविदा लिखिए।
निविदा सूचना
[विद्यालय का नाम], [स्थान]
दिनांक: [दिनांक]
विद्यालय में कार्यालय सामग्री की खरीद हेतु सीलबंद निविदाएँ आमंत्रित की जाती हैं।
सामग्री विवरण:
- स्टेशनरी (कागज, पेन, फाइलें, रजिस्टर आदि)
- कंप्यूटर उपकरण (टोनर, कार्ट्रिज, आदि)
- अन्य कार्यालय सामग्री
शर्तें:
- निविदा [तिथि] तक प्रस्तुत की जा सकती है।
- निविदा के साथ नमूने अनिवार्य हैं।
- गुणवत्ता और मूल्य के आधार पर चयन किया जाएगा।
प्रधानाचार्य
[विद्यालय का नाम]
प्रश्न 3.49
निम्नलिखित विषयों में से किसी एक विषय पर लगभग 250 शब्दों में निबंध लिखिए: [6]
- कोरोना महामारी - एक अभिशाप
- युवा शक्ति एवं चुनौतियाँ
- साक्षरता अभियान के बढ़ते कदम
- समाज में नारी योगदान
कोरोना महामारी - एक अभिशाप
कोरोना महामारी (COVID-19) ने पूरे विश्व को अपनी चपेट में ले लिया। यह एक ऐसा अभिशाप साबित हुआ जिसने मानव जीवन के हर पहलू को प्रभावित किया। स्वास्थ्य के क्षेत्र में लाखों लोगों की जान गई, अस्पतालों में बेड की कमी हुई और स्वास्थ्य सेवाएँ चरमरा गईं। आर्थिक रूप से भी यह महामारी बहुत घातक रही। लॉकडाउन के कारण उद्योग-धंधे बंद हो गए, लाखों लोग बेरोजगार हो गए और गरीबी बढ़ गई। शिक्षा के क्षेत्र में स्कूल-कॉलेज बंद हो गए, ऑनलाइन शिक्षा शुरू हुई लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चे इससे वंचित रह गए। सामाजिक दूरी और लॉकडाउन ने मानसिक स्वास्थ्य पर भी गहरा प्रभाव डाला। अकेलापन, चिंता और अवसाद बढ़ गया। हालाँकि इस महामारी ने हमें कुछ सबक भी सिखाए - स्वच्छता का महत्व, डिजिटल तकनीक का उपयोग और एकजुटता की शक्ति। लेकिन कुल मिलाकर कोरोना महामारी मानवता के लिए एक अभिशाप ही साबित हुई, जिससे उबरने में अभी भी समय लगेगा।