RBSE Class 12th 2024 Hindi (Compulsory)-SS-01-2024 Previous Year Papers

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Paper details

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Board RBSE
Class Class 12th
Exam year 2024
Subject Hindi (Compulsory)-SS-01-2024
Resource type Previous Year Papers
Category RBSE Previous Year Question Papers
Website RBSE Solution

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Rajasthan Board Class 12th Hindi (Compulsory)-SS-01-2024 2024 solved Previous Year Question Papers

उच्च माध्यमिक परीक्षा, 2024

SENIOR SECONDARY EXAMINATION, 2024

हिन्दी (अनिवार्य)

HINDI (COMPULSORY)

समय: 3 घण्टे 5 मिनट     पूर्णांक: 80


परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश:

  1. परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न पत्र पर नामांक अनिवार्यतः लिखें।
  2. सभी प्रश्न करने अनिवार्य हैं।
  3. सभी प्रश्नों का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें।
  4. जिन प्रश्नों में आंतरिक खण्ड हैं, उन सभी के उत्तर एक साथ ही लिखें।
  5. प्रश्न का उत्तर लिखने से पूर्व प्रश्न का क्रमांक अवश्य लिखें।

Roll No.: ___________     SI.No.: 839400

No. of Questions: 9     SS-0-Hindi(C)

No. of Printed Pages: 7

खण्ड-अ (SECTION - A)

निम्नलिखित बहुचयनात्मक प्रश्नों के उत्तर अपनी उत्तर पुस्तिका में लिखिए -

  1. 'अपने साथियों के प्रति श्रद्धा व सम्मान का भाव हो | निम्नलिखित में से किस शासन पद्धति को लेखक ने आवश्यक बताया है -

    • a) जीवन को
    • b) लोकतंत्र को
    • c) व्यवहार को (सही उत्तर)
    • d) परिवार को

    व्याख्या: लेखक ने व्यवहार को आवश्यक शासन पद्धति बताया है, क्योंकि व्यवहार से ही साथियों के प्रति श्रद्धा और सम्मान का भाव उत्पन्न होता है।

  2. निम्न में से किस पेड़ के फल इतने मजबूत होते हैं कि नए फूलों के निकल आने पर भी अपना स्थान नहीं छोड़ते हैं -

    • a) शिरीष (सही उत्तर)
    • b) अशोक
    • c) आम
    • d) नीम

    व्याख्या: शिरीष के फल इतने मजबूत होते हैं कि वे नए फूलों के आने पर भी अपना स्थान नहीं छोड़ते।

  3. 'बाणभट्ट की आत्मकथा' उपन्यास के लेखक हैं -

    • a) कबीर
    • b) फणीश्वर नाथ रेणु
    • c) धर्मवीर भारती
    • d) हजारी प्रसाद द्विवेदी (सही उत्तर)

    व्याख्या: 'बाणभट्ट की आत्मकथा' हजारी प्रसाद द्विवेदी द्वारा रचित एक प्रसिद्ध ऐतिहासिक उपन्यास है।

  4. 'पृथ्वी में पैदा होने वाला अन्न कुछ समय पश्चात् समाप्त हो जाता है, किन्तु निम्नलिखित में से जो रस कवि के अनुसार कभी चुकता नहीं है' -

    • a) भोज्य रस
    • b) अनुभव रस
    • c) साहित्य रस (सही उत्तर)
    • d) ओज रस

    व्याख्या: कवि के अनुसार साहित्य रस कभी समाप्त नहीं होता, क्योंकि यह आत्मा को तृप्त करने वाला और शाश्वत है।

  5. किस शायर की भाषा और प्रसंग सूरदास के वात्सल्य वर्णन की सादगी को याद दिलाते हैं -

    • a) फिराक गोरखपुरी (सही उत्तर)
    • b) दुष्यन्त कुमार
    • c) शमशेर बहादुर सिंह
    • d) कुँवर नारायण

    व्याख्या: फिराक गोरखपुरी की भाषा और प्रसंग सूरदास के वात्सल्य वर्णन की सादगी की याद दिलाते हैं, क्योंकि दोनों में सरलता और भावपूर्णता है।

  6. कवि गोस्वामी तुलसीदास के हृदय में निम्नलिखित में से किस समय करुण रस के बीच वीर रस के उदय के रूप की अनुभूति प्रदर्शित होती है -

    • a) राम का वनवास जाना
    • b) कुंभकरण का बिलख पड़ना
    • c) जगदम्बा की लीला दिखना
    • d) हनुमान का संजीवनी लेकर आ जाना (सही उत्तर)

    व्याख्या: हनुमान के संजीवनी लेकर आने पर तुलसीदास के हृदय में करुण रस के बीच वीर रस का उदय होता है, क्योंकि यह घटना करुणा और वीरता दोनों का संगम है।

खंड - ब (वस्तुनिष्ठ प्रश्न)

  1. निम्नलिखित में से भाषा का सीमित, अविकसित तथा आम बोलचाल वाला रूप कहलाता है —

    • आ) भाषा
    • ब) लिखित भाषा
    • स) बोली
    • द) खड़ी बोली

    व्याख्या: बोली भाषा का वह सीमित, अविकसित और स्थानीय रूप है जो आम बोलचाल में प्रयोग होता है।

  2. ‘Vigilance’ शब्द का सही अर्थ है —

    • आ) संयुक्त
    • ब) शपथ
    • स) संविभाग
    • द) सतर्कता

    व्याख्या: 'Vigilance' का हिंदी अर्थ 'सतर्कता' या 'चौकसी' होता है।

  3. मुद्रित माध्यमों में सबसे बड़ी शक्ति यह है कि छपे हुए शब्दों में निम्नलिखित गुण होता है —

    • आ) स्फूर्तता
    • ब) असुरक्षा
    • स) स्थायित्व
    • द) चाध्यता

    व्याख्या: मुद्रित माध्यमों में छपे शब्द स्थायी होते हैं, जिन्हें बार-बार पढ़ा और संदर्भित किया जा सकता है।

  4. रेडियो पत्रकारों को निम्नलिखित में से किसका पूरा ध्यान रखना होता है —

    • आ) अपने पाठकों का
    • ब) अपने श्रोताओं का
    • स) अपने दर्शकों का
    • द) अपनी शुरुआत का

    व्याख्या: रेडियो एक श्रव्य माध्यम है, इसलिए रेडियो पत्रकारों को अपने श्रोताओं की आवश्यकताओं और रुचियों का ध्यान रखना होता है।

  5. निम्नलिखित में से जो आत्मकथात्मक उपन्यास गाथा निश्चय ही किशोर होते विद्यार्थियों के लिए हम कदम बन सकती है —

    • आ) जुलूस
    • ब) सिल्वर वैडिंग
    • स) अतीत में दबे पाँच
    • द) जूझ

    व्याख्या: 'जूझ' एक आत्मकथात्मक उपन्यास है जो किशोर विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायक है।

  6. निम्नलिखित में से “दबे स्वर में किसने कहा, 'मेहमान गए?'”

    • आ) बीवी बच्चों ने
    • ब) यशोधर बाबू की पत्नी ने
    • स) यशोधर बाबू ने
    • द) रिश्तेदार ने

    व्याख्या: यशोधर बाबू ने दबे स्वर में यह प्रश्न पूछा था।

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए —

  1. मौखिक भाषा को लिखित रूप देने के लिए लेखन चिह्नों का प्रयोग किया जाता है, उसे लिपि कहते हैं।

    उत्तर: लिपि

  2. 'दक्षता' के लिए सही अंग्रेजी शब्द है — Efficiency

    उत्तर: Efficiency

प्रश्न iii

'नक्षत्र हवा से बातें कर रहा है।' वाक्य में शब्द शक्ति है।

उत्तर: लक्षणा शब्द शक्ति

यहाँ 'नक्षत्र' का अर्थ 'चाँद' से है, जो मुख्य अर्थ न होकर लक्षित अर्थ है, अतः लक्षणा शब्द शक्ति है।

प्रश्न iv

जब शब्दार्थ की व्यंजना अर्थ पर निर्भर होती है। उसका पर्याय रख देने पर भी अभीष्ट की पूर्ति हो जाती है, वहाँ शब्द शक्ति होती है।

उत्तर: आर्थी व्यंजना शब्द शक्ति

आर्थी व्यंजना में शब्दार्थ व्यंजित होता है और पर्याय रखने पर भी अर्थ की पूर्ति हो जाती है।

प्रश्न v

जहाँ वास्तविक विरोध न होते हुए भी विरोध का आभास हो, वहाँ अलंकार होता है।

उत्तर: विरोधाभास अलंकार

विरोधाभास अलंकार में वास्तविक विरोध न होते हुए भी विरोध का आभास होता है।

प्रश्न vi

'भगवान भागें दुःख जनता देश की फूले - wel!' इस पंक्ति में निहित अलंकार है।

उत्तर: श्लेष अलंकार

यहाँ 'भागें' शब्द के दो अर्थ हैं - 'भागना' और 'भाग्य', अतः श्लेष अलंकार है।

अपठित गद्यांश पर आधारित प्रश्न

निम्नलिखित अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए सभी प्रश्नों के उत्तर अपनी उत्तर पुस्तिका में लिखिए - [6]

व्यक्ति को अपने जीवन में नाना प्रकार के लक्ष्य निर्धारित करने की अपेक्षा किसी एक उत्तम लक्ष्य को ही निश्चित करना चाहिए। जो व्यक्ति कई उद्देश्यों की पूर्ति का ख्वाब छोड़कर अर्जुन की तरह एक ही लक्ष्य को चिड़िया की आँख मानकर उस पर अपना सारा ध्यान केन्द्रित करता है, निश्चय ही सफलता उसके चरणों को चूमती है। एक ही साथ दो घोड़ों पर सवार होने वाले का फिसलकर नीचे गिरना निश्चित है। किसी पेड़ के तने, डालियों, पत्तों फूलों की अलग-अलग सेवा करने वाले को फलों से वंचित ही रहना पड़ेगा जबकि वह यदि मूल (जड़) को ही सींचे तो उसे फल की प्राप्ति होनी ही है। अतः व्यक्ति को एक ही उद्देश्य की प्राप्ति हेतु प्रयत्त करना चाहिए।

प्रश्न 1

व्यक्ति को अपने जीवन में सफल होने के लिए क्या निश्चित करना चाहिए?

उत्तर: व्यक्ति को अपने जीवन में सफल होने के लिए एक ही लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए।

प्रश्न 2

'नयन' शब्द का पर्यायवाची शब्द गद्यांश में से छाँटकर लिखिए।

उत्तर: आँख

प्रश्न 3

फल की प्राप्ति किसको सींचने से होती है?

उत्तर: फल की प्राप्ति मूल (जड़) को सींचने से होती है।

प्रश्न 4

इस गद्यांश से छाँटकर 'Ten' शब्द का विपरीतार्थ लिखिए।

उत्तर: अपेक्षा

प्रश्न 5

"चिड़िया की आँख" में निहित प्रतीकात्मक अर्थ को लिखिए।

उत्तर: केन्द्रित लक्ष्य

प्रश्न 6

उपर्युक्त गद्यांश का उपयुक्त शीर्षक लिखिए।

उत्तर: लक्ष्य की प्राप्ति

प्र.4) निम्नलिखित अपठित पद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर सभी प्रश्नों के उत्तर अपनी उत्तर पुस्तिका में लिखिए — 6

अपने नहीं अभाव मिटा पाया जीवन भर,
पर औरों के सभी अभाव मिटा सकता हूँ।
तूफानों - भूचालों की भयप्रद छाया में,
मैं ही एक अकेला हूँ जो गा सकता हूँ।
मेरे 'मैं' की संज्ञा भी इतनी व्यापक है,
इसमें मुझसे अगणित प्राणी आ जाते हैं।
मुझको अपने पर अदम्य विश्वास रहा है।
मैं खण्डहर को फिर से महल बना सकता हूँ।
जब-जब भी मैंने खण्डहर आबाद किए हैं,
प्रलय-मेघ भूचाल देख मुझकों शरमाए |
मैं मजदूर मुझे देवों की बस्ती से क्‍या
अगणित बार धरा पर मैंने स्वर्ग बनाए |

  1. कवि ने किसके अभाव मिटाने की बात कही है?

    कवि ने श्रमिक जनों के अभाव मिटाने की बात कही है।

  2. कवि ने खण्डहर से महल बनाने हेतु किसकी आवश्यकता पर बल दिया है?

    कवि ने खण्डहर से महल बनाने हेतु अदम्य विश्वास की आवश्यकता पर बल दिया है।

  3. अदम्य व्यक्ति को देखकर कौन-कौन शर्माते हैं?

    अदम्य व्यक्ति को देखकर प्रलय-मेघ और भूकंप जैसी मुश्किल परिस्थितियाँ भी शर्माती हैं।

  4. जीवन में सुधार हेतु किसका महत्त्व अधिक बताया है?

    जीवन में सुधार हेतु श्रमिक वर्ग का महत्त्व अधिक बताया है।

  5. कवि ने अपने आप को क्या मानकर धरती पर स्वर्ग बनाने की बात कही है?

    कवि ने अपने आप को श्रमिक वर्ग का प्रतिनिधि मानकर धरती पर स्वर्ग बनाने की बात कही है।

  6. “बादल” का पर्याय पद्यांश से छाँट कर लिखिए।

    मेघ


खण्ड-ब (SECTION - B)

निम्नलिखित लघुत्तरात्मक प्रश्नों के उत्तर लगभग 40 शब्दों में लिखिए -

प्र.5) पत्रकार कितने प्रकार के होते हैं, प्रकार लिखते हुए उनकी परिभाषा दीजिए। [2]

पत्रकार तीन प्रकार के होते हैं:

  1. पूर्णकालिक पत्रकार - किसी समाचार संगठन में काम करने वाला नियमित वेतनभोगी कर्मचारी होता है।
  2. अंशकालीन पत्रकार - इसे स्ट्रिंगर भी कहते हैं। यह किसी समाचार संगठन के लिए एक निश्चित मानदेय पर काम करता है।
  3. फ्रीलांसर पत्रकार - यह भुगतान के आधार पर अलग-अलग अखबारों के लिए काम करता है।

प्र. 6) लेखक ने महामारी की रात्रि में विभीषिका को ललकारकर चुनौती देने वाली शक्ति को ढोलक के माध्यम से किस प्रकार वर्णित किया है? [2]

लेखक ने महामारी की रात्रि में विभीषिका को ललकारकर चुनौती देने वाली शक्ति को ढोलक के माध्यम से इस प्रकार वर्णित किया है कि सूर्यास्त के पश्चात् जब रात्रि का घना अँधेरा और उससे उत्पन्न विभीषिका चारों ओर फैल जाती थी, तब लुइटन पहलवान की ढोलक ही उस भयानक वातावरण को चुनौती दिया करती थी। संकेत यह है कि ऐसे वातावरण में भी पहलवान संध्या से सुबह तक ढोलक बजाता रहता था। वास्तव में गाँव में अर्धमृत और औषधि-उपचार प्राप्त करने वाले व्यक्तियों को लुइटन पहलवान की ढोलक संजीवनी शक्ति दिया करती थी।

प्र. 7) "बादल राग" कविता में क्रांति आकांक्षी वंचितों के प्रतिनिधित्व की अनुगूँज को स्पष्ट कीजिए। [2]

"बादल राग" कविता में क्रांति आकांक्षी वंचितों के प्रतिनिधित्व की अनुगूँज इस प्रकार स्पष्ट होती है कि यह एक प्रतीकात्मक या द्वि-अर्थक कविता है। कवि ने बादल को विप्लवी वीर और उसके गर्जन, वर्षण तथा जल-प्लवन को विप्लव अर्थात् क्रांति का प्रतीक बनाया है। बादल ने पृथ्वी के हृदय को दग्ध करने वाली ग्रीष्म आदि शोषक शक्तियों के विरुद्ध विप्लव की घोषणा कर दी है। युद्ध में अस्त्र-शस्त्र तथा वाहनों की आवश्यकता होती है, अतः कवि ने समीर-सागर पर तैर रहे बादल में युद्ध की नौका कल्पित किया है। इस युद्ध नौका से वह शत्रु पर मूसलाधार वर्षा, गर्जन और विद्युत-पात रूपी अस्त्र-शस्त्रों से प्रहार कर रहा है।

प्र. 8) सिन्धु सभ्यता में आकार की भव्यता के स्थान पर कला की भव्यता दिखाई देती है। पाठ के आधार पर लिखिए। [2]

सिन्धु सभ्यता में आकार की भव्यता के स्थान पर कला की भव्यता दिखाई देती है क्योंकि खुदाई में प्राप्त धातु और पत्थर की मूर्तियाँ, मृद्भांड, उन पर चित्रित मनुष्य, वनस्पति और पशु-पक्षियों की छवियाँ, सुंदर मुहरें, उन पर बारीकी से उत्कीर्ण आकृतियाँ, खिलौने, केश विन्यास और आभूषण आदि उस समय के लोगों के सौंदर्य-बोध के परिचायक हैं। इससे कहीं अधिक सौंदर्य-बोध कराती है वहाँ की सुघड़ लिपि। यदि गहराई से सोचें तो वहाँ की प्रत्येक नगर योजना भी सौंदर्य-बोध का ही एक प्रमाण प्रस्तुत करती है। बनी हुई पक्की नालियाँ बनाने के पीछे गंदगी से बचाव का जो उद्देश्य था, वह भी मूल रूप से स्वच्छता और सौंदर्य का ही बोध कराता है। आवास की सुंदर व्यवस्था हो या अन्न-भंडारण, सभी के पीछे अप्रत्यक्ष रूप से सौंदर्य-बोध काम कर रहा है। अतः यह स्पष्ट है कि सिंधु सभ्यता में किसी भी अन्य व्यवस्था से ऊपर सौंदर्य-बोध ही था।

प्र. 9) 'Ue' कहानी के लेखक के अनुसार दादा के जीवन शैली की दिनचर्या के बारे में लिखिए। [2]

'Ue' कहानी के लेखक के अनुसार दादा के जीवन शैली की दिनचर्या इस प्रकार थी कि दादा का ध्यान किसी काम की तरफ नहीं रहता था। वह मन लगाकर खेत में श्रम नहीं करता था, फसल में लागत नहीं लगाता था, लुगाई और बच्चों को काम में जोतकर खुद गाँव भर में खुले साँड़ की तरह घूमता था और अब अपनी मस्ती के लिए छोरा के जीवन की बलि चढ़ा रहा था। यह सब उन्होंने सुनाया।


खण्ड-स (SECTION — C)

प्रश्न संख्या 40 से 43 के उत्तर 60 से 80 शब्दों में लिखिए एवं 44 व 45 के उत्तर लगभग 100 शब्दों में लिखिए।

प्र. 40) "नील जल में या किसी की गौर झिलमिल देह जैसे हिल रही हो" — कविता के आधार पर इस पंक्ति को स्पष्ट कीजिए। [3]

इस पंक्ति में कवि ने प्रकृति के सौंदर्य का अद्भुत वर्णन किया है। 'नील जल' अर्थात नीले पानी में किसी गौर वर्ण (गोरी) की झिलमिलाती देह के हिलने जैसा प्रतीत होता है। यहाँ कवि ने जल में पड़ने वाली चाँदनी या किसी प्राकृतिक छटा को मानवीय सौंदर्य से जोड़कर एक सजीव चित्र प्रस्तुत किया है। यह पंक्ति प्रकृति और मानवीय भावनाओं के अंतर्संबंध को दर्शाती है।

अथवा

'किसी की पीड़ा को बहुत बड़े दर्शक वर्ग तक पहुँचाने वाले व्यक्ति उस पीड़ा के प्रति स्वयं संवेदनशील हो जाते हैं।' इस कथन में प्रकट वर्तमान युग की विडंबना को कविता के संदर्भ में समझाइए। [3]

यह कथन वर्तमान युग की विडंबना को उजागर करता है कि जो लोग मीडिया या अन्य माध्यमों से किसी की पीड़ा को बड़े दर्शक वर्ग तक पहुँचाते हैं, वे स्वयं उस पीड़ा के प्रति संवेदनशील हो जाते हैं। कविता के संदर्भ में यह विडंबना यह है कि पीड़ा को दिखाने वाले लोग उसे केवल एक वस्तु या समाचार के रूप में प्रस्तुत करते हैं, जबकि वास्तविक पीड़ा को भूल जाते हैं। यह दर्शाता है कि आज के युग में संवेदनशीलता का प्रदर्शन तो होता है, लेकिन वास्तविक मानवीय संवेदना खत्म होती जा रही है।

उत्तर

प्रश्न 44

प्रस्तुत पंक्ति के आधार पर कवि सूर्योदय से पहले आकाश में पल-पल परिवर्तित होते हुए सुरम्य वातावरण का चित्रण करते हुए कहता है कि सूर्योदय के समय आकाश गहरे नीले रंग का होता है, जिसमें सूर्य की चमकती हुई सफेद आभा दिखाई देने लगती है, तो ऐसा लगता है जैसे नीले जल में किसी सुन्दरी की गोरी देह झिलमिल कर रही हो। धीमी हवा व नमी के कारण सूर्य की किरणें हिलती हुई-सी प्रतीत होती हैं। सूर्य का श्वेत बिम्ब भी हिलता हुआ सा प्रतीत होता है।

प्रश्न 45

"हम इन्हें पानी नहीं देंगे तो इन्द्र भगवान हमें पानी कैसे देंगे?" लेखक के इस कथन के आधार पर हमारे सांस्कृतिक विश्वास के समर्थन में अपने विचार स्पष्ट कीजिए।

प्रस्तुत पंक्ति हमारे सांस्कृतिक विश्वास में समर्थन करती है क्योंकि गंगा को माँ के समान पूजा जाता है। गंगा को मोक्षदायिनी माना जाता है। यह हमारे धार्मिक संस्कारों में सम्मिलित हो गई है। भारत के सामाजिक और सांस्कृतिक परिवेश में नदियों का बड़ा महत्व है। इन्हीं के किनारे मानव बस्तियाँ बसना आरम्भ हुई, हमारे समाज का तथा सामाजिकता का विकास हुआ।

अथवा

'आदमी बिछा रहता है, और उसका मन अडिग रहता है।' इस कथन के आधार पर लेखक के बाजारवाद की भावना को लिखिए।

प्रश्न 46

"गुरुदेव, मुझे चाय मत पिलाइए। चाय-मट्ठी-लड्डू बस इतना ही सौदा है।" इस कथन के आधार पर कहानी के पात्र यशोधर बाबू की भीतरी मन की सहानुभूति के सम्बन्ध में नई पीढ़ी के संदेश को लिखिए।

यशोधर बाबू का यह कथन उनकी आंतरिक सहानुभूति और नई पीढ़ी के प्रति उनके संदेश को दर्शाता है। वे चाहते हैं कि नई पीढ़ी भौतिक सुखों के पीछे न भागे, बल्कि सादगी और संतोष को अपनाए। उनका मानना है कि जीवन में केवल आवश्यक वस्तुओं से ही काम चलाया जा सकता है, अतिरिक्त सुख-सुविधाओं की आवश्यकता नहीं है। यह संदेश नई पीढ़ी को उपभोक्तावाद से बचने और सादगीपूर्ण जीवन जीने की प्रेरणा देता है।

अथवा

'भैंस चराते-चराते में फसलों पर, जंगली फूलों पर तुकबंदी करने लगा।' कविता रच लेने के आत्मविश्वास को लेखक की धारणा के आधार पर लिखिए।

'जूझ' पाठ के आधार पर हम कह सकते हैं क्योंकि लेखक के गुरुजी न. वा. सौंदलगेकर स्वयं कविता लिखते थे। वे कक्षा में कविता का पाठ हाव-भाव सहित करते थे। कविता के भाव उनके मुख पर झलकते थे। लेखक आनंद अपने गुरुजी से बहुत प्रभावित हुआ। भाषा के गुरुजी कवियों के संस्मरण भी सुनाया करते थे। एक बार गुरुजी ने मालती लता पर कविता सुनाई। लेखक आनंद समझ गया कि कवि भी हमारे जैसा हाड़मांस का होता है। मालती लता को लेखक ने गुरुजी के द्वार पर देखा था। लेखक के मन में प्रेरणा जाग्रत हुई। उसने सोचा कविता के लिए प्रकरण सोचना कोई बड़ी बात नहीं है। हम अपने आसपास, पड़ोस, प्राकृतिक दृश्य पर कविता लिख सकते हैं। वह खेतों में काम करता था, भैंस चराता था, लेखक ने उनका आधार लेकर तुकबंदी लिखना प्रारम्भ किया। वह मास्टरजी को दिखाता, मास्टरजी उसमें कुछ सुधार कर, कविता के तत्वों को समझाया करते थे और लेखक आनंद को प्रोत्साहित करते थे। गुरुजी छात्रों के सामने उसकी प्रशंसा करने लगे। समारोह में, सातवीं, आठवीं कक्षा के बालकों के सामने लेखक को काव्य पाठ करने को प्रेरित करते रहे। इससे लेखक में कविता रच लेने का आत्मविश्वास हो गया।

प्रश्न 47

"मुअनजो-वड़ो ताम्र काल के शहरों में सबसे बड़ा है।" इस कथन में सभ्यता और संस्कृति में वर्तमान धड़कती जिन्दगियों के प्रति पुरातात्विक जानकारी को पाठ के आधार पर लिखिए।

मुअनजो-वड़ो (मोहनजोदड़ो) ताम्र काल के शहरों में सबसे बड़ा है। यह सिंधु घाटी सभ्यता का एक प्रमुख नगर था। यहाँ की खुदाई से प्राप्त अवशेष बताते हैं कि यह एक सुनियोजित नगर था, जहाँ सड़कें, नालियाँ, स्नानागार और अनाज के भंडार थे। यह सभ्यता और संस्कृति में वर्तमान धड़कती जिन्दगियों के प्रति पुरातात्विक जानकारी प्रदान करती है कि प्राचीन काल में भी लोग सुव्यवस्थित जीवन जीते थे और उनकी सामाजिक, आर्थिक तथा सांस्कृतिक गतिविधियाँ विकसित थीं।

अथवा

"आधुनिक किस्म के अजनबी लोगों की भीड़ को देखकर यशोधर बाबू अँधेरे में ही घबरा रहे।" वर्तमान में आए परिवर्तन से हाशिए पर धकेले जाते मानवीय मूल्यों की मूल संवेदना कहानी के आधार पर लिखिए।

यशोधर बाबू का यह कथन वर्तमान में आए परिवर्तन से हाशिए पर धकेले जाते मानवीय मूल्यों की मूल संवेदना को दर्शाता है। आधुनिक समाज में भौतिकता और उपभोक्तावाद बढ़ गया है, जिससे पारंपरिक मानवीय मूल्य जैसे सहानुभूति, प्रेम, विश्वास और सादगी कम होते जा रहे हैं। यशोधर बाबू इस बदलाव से घबराते हैं क्योंकि वे पुरानी पीढ़ी के प्रतिनिधि हैं, जो मानवीय संबंधों को महत्व देते हैं। कहानी यह संदेश देती है कि आधुनिकता के नाम पर हमें अपने मानवीय मूल्यों को नहीं खोना चाहिए।

प्रश्न 4

अतीत के दबे पाँव पाठ के आधार पर हम कह सकते हैं कि ताम्रकाल के दो सबसे बड़े नियोजित शहर मुअनजोदड़ो और हड़प्पा को माना जाता है, क्योंकि ये शहर खुदाई से प्राप्त हुए हैं। ये पाँच हजार वर्ष पुराने शहर थे। ये दुनिया के सबसे पुराने शहर थे। ये नगर नगरयोजना की अनोखी मिसाल है। लेखक ने मुअनजोदड़ो के अजायबघर में निम्नांकित प्रदर्शित वस्तुएँ देखीं:

  • काला पड़ा गेहूँ के दाने
  • ताँबे और काँसे के बर्तन
  • थाल पर बने विशाल चित्रित मृद्भाण्ड
  • चौपड़ की गोटियाँ
  • दीपक
  • मापतौल के पत्थर
  • शीशे का दर्पण
  • मिट्टी की बैलगाड़ी
  • खिलौने
  • चक्की
  • कंघी
  • मिट्टी के कंगन
  • रंग-बिरंगे पत्थरों के मनकों का हार
  • पत्थर के औजार
  • ताँबे व काँसे की सुइयाँ
  • हाथी दाँत व ताँबे के सुए
  • नर्तकी व दाढ़ी वाले नरेश की मूर्ति

प्रश्न 5

"संपादकीय लेखन" में दायित्व किस पर निर्भर होता है? कोई एक उदाहरण लिखिए। [3]

संपादकीय लेखन में दायित्व समाचार पत्र या पत्रिका के वैचारिक रुझान और उसकी नीति पर निर्भर होता है। संपादकीय किसी एक व्यक्ति का विचार न होकर समग्र पत्र-समूह की राय होता है, इसलिए इसमें संपादक या लेखक का नाम नहीं लिखा जाता।

उदाहरण: यदि कोई समाचार पत्र पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक है, तो उसका संपादकीय वनों की कटाई या प्रदूषण जैसे मुद्दों पर सरकार की नीतियों की आलोचना या समर्थन करेगा, जो उस अखबार की छवि को दर्शाता है।

अथवा

विशेष लेखन के क्षेत्र खेलों के बारे में पत्र-पत्रिका में लिखने वालों को किन-किन बातों की जानकारी होनी चाहिए, विस्तारपूर्वक समझाइए।

खेलों के बारे में पत्र-पत्रिका में लिखने वालों को निम्नलिखित बातों की जानकारी होनी चाहिए:

  • खेल के नियम और तकनीक: उस खेल के सभी नियमों, रणनीतियों और तकनीकी पहलुओं की गहरी समझ होनी चाहिए।
  • खिलाड़ियों और टीमों का इतिहास: प्रमुख खिलाड़ियों, टीमों, उनके रिकॉर्ड और उपलब्धियों की जानकारी आवश्यक है।
  • वर्तमान घटनाक्रम: हाल के मैचों, टूर्नामेंटों, चोटों और स्थानांतरणों की जानकारी होनी चाहिए।
  • सांख्यिकी और डेटा: खेल से संबंधित आँकड़ों, जैसे स्कोर, औसत, और प्रतिशत का विश्लेषण करने की क्षमता।
  • लेखन शैली: रोचक, सटीक और पाठकों को आकर्षित करने वाली भाषा का प्रयोग करना चाहिए।
  • नैतिकता और निष्पक्षता: किसी भी पक्षपात से बचते हुए तथ्यात्मक और संतुलित रिपोर्टिंग करनी चाहिए।

प्रश्न 6

"आलोक धन्वा" का कवि परिचय लिखिए। [4]

आलोक धन्वा हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध कवि हैं। उनका जन्म 2 जुलाई, 1948 को बिहार के मुंगेर जिले में हुआ था। वे समकालीन हिंदी कविता के महत्वपूर्ण हस्ताक्षर हैं। उनकी कविताओं में सामाजिक यथार्थ, मानवीय संवेदनाएँ और प्रकृति के प्रति प्रेम झलकता है। उनकी प्रमुख रचनाओं में "जंगल की आग", "पानी का पुल", "दूसरी बार" आदि शामिल हैं। उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार सहित कई सम्मान प्राप्त हुए हैं।

अथवा

फणीश्वर नाथ रेणु का लेखक परिचय लिखिए।

हिंदी साहित्य में आँचलिक उपन्यासकार और कहानीकार के रूप में प्रतिष्ठित फणीश्वरनाथ रेणु का जन्म 4 मार्च, 1921 ई. में बिहार के अररिया जिले के औराही हिंगना में हुआ था। इन्होंने भारत छोड़ो आंदोलन में हिस्सा लिया तथा नेपाली जनता को राजशाही दमन से मुक्ति दिलाने में भरपूर योगदान दिया। इनकी प्रमुख रचनाएँ हैं:

  • उपन्यास: मैला आँचल, परती परिकथा, दीर्घतपा, कितने चौराहे, जुलूस
  • कहानी संग्रह: ठुमरी, अग्निखोर, आदिम रात्रि की महक, एक श्रावणी दोपहरी की धूप
  • संस्मरण: ऋणजल, धनजल, वनतुलसी की गंध
  • रिपोर्ताज: नेपाली क्रांति कथा

रेणु ने अपनी रचनाओं में अंचल की समस्याओं की ओर लोगों का ध्यान खींचा। अप्रैल, सन् 1977 में पटना में इनका निधन हुआ था।

प्र.6

खण्ड-द (SECTION - D)

निम्नलिखित पद्यांश की सप्रसंग व्याख्या लिखिए

मैं जला हृदय में अग्नि, दहा करता हूँ,
सुख-दुःख दोनों में मग्न रहा करता हूँ,
जग भव-सागर तरने को नाव बनाए,
मैं भव मौजों पर मस्त बहा करता हूँ!

मैं यौवन का वेग लिए फिरता हूँ,
बराबर में अवसाद लिए फिरता हूँ,
जो मुझको बाहर हँसा, रुलाती भीतर,
मैं, हाय, किसी की याद लिए फिरता हूँ!

अथवा

ऊपर से ठीक ठाक
पर अंदर से
न तो उसमें कसाव था
न ताकत!

बात ने, जो एक शरारती बच्चे की तरह
मुझसे खेल रही थी
मुझे पसीना पोंछते देख कर पूछा -
"क्या तुमने भाषा को
सहूलियत से बरतना कभी नहीं सीखा ?"

प्रसंग: प्रस्तुत काव्यांश कवि कुँवर नारायण द्वारा रचित “बात सीधी थी पर” शीर्षक कविता से लिया गया है। इसमें कवि ने कविता रचना में सहज, सरल और व्यवहार में आने योग्य शब्दों का सावधानी से प्रयोग करने की बात कही है, क्योंकि प्रायः चमत्कार के चक्कर में भाषा दुरूह हो जाती है।

व्याख्या: कवि कहता है कि शब्दों की जोड़-तोड़ करने पर कविता ऊपर से तो अच्छी और ठीक-ठाक प्रतीत होती है, परन्तु उसकी आन्तरिक अभिव्यक्ति ढीली और प्रभावहीन हो जाती है। उस अभिव्यक्ति में न तो कसावट थी और न अर्थ की गंभीरता ही, जिसके कारण वह कविता प्रभावहीन हो गई।

तब बात ने शरारती बच्चे की तरह कवि से क्रीड़ा करते हुए पूछा- तुम मुझसे खेलते हुए भी व्यर्थ का परिश्रम क्यों कर रहे हो ? अपनी बेवकूफी भरी मेहनत पर पसीना क्यों बहा रहे हो ? क्या तुमने अब तक भाषा को सहजता, सरलता और सुविधा से प्रयोग करना नहीं सीखा ? यदि नहीं सीखा तो यह तुम्हारी अक्षमता है, अयोग्यता है।

विशेष:

  • कवि ने कविताओं की आडम्बरपूर्ण भाषा पर व्यंग्य किया है तथा भावानुसार सहज, सरल, उपयुक्त भाषा प्रयोग का संदेश दिया है।
  • भाषा साहित्यिक खड़ी बोली, प्रतीकात्मक, लाक्षणिक और मुहावरेदार है। मुक्तक छंद है। उपमा, अनुप्रास, आक्षेप एवं मानवीकरण अलंकारों का सहज प्रयोग द्रष्टव्य है।

प्र. 47

निम्नलिखित गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या लिखिए - [6]

यह मैंने भक्तिन के प्रस्ताव को अवकाश न देने के लिए कहा था, पर उसके परिणाम ने मुझे विस्मित कर दिया। भक्तिन ने परम रहस्य का उद्घाटन करने की मुद्रा बनाकर और पोपला मुँह मेरे कान के पास लाकर हौले-हौले बताया कि उसके पास पाँच बीसी और पाँच रुपया गड़ा रखा है। उसी से वह सब प्रबंध कर लेगी। फिर लड़ाई तो कुछ अमरौती खाकर आई नहीं हैं। जब सब ठीक हो जाएगा, तब यहीं लौट आएँगे। भक्तिन की कंजूसी के प्राण पूंजीभूत होते-होते पर्वताकार बन चुके थे; इस उदारता के डाइनामाइट ने क्षण भर में उन्हें उड़ा दिया।

अथवा

पर एक बात देखी है कि अगर तीस-चालीस मन गेहूँ उगाना है तो किसान पाँच-छह सेर अच्छा गेहूँ अपने पास से लेकर जमीन में बीज बनाकर फेंक देता है। उसे बुवाई कहते हैं। यह जो सूखे हम अपने घर का पानी इन पर फेंकते हैं वह भी बुवाई है। यह पानी गली में बोएँगे तो सारे शहर, कस्बे, गाँव पर पानीवाले बादलों की फसल आ जाएगी। हम बीज बनाकर पानी देते हैं फिर काले मेघा से पानी माँगते हैं। सब ऋषि-मुनि कह गए हैं कि पहले खुद दो तब देवता तुम्हें चौगुना-अठगुना करके लौटाएँगे। भइया, यह तो हर आदमी का आचरण है, जिससे सबका आचरण बनता है।

सप्रसंग व्याख्या

सन्दर्भ: उपर्युक्त गद्यांश हमारी पाठ्य पुस्तक आरोह भाग-2 के फणीश्वर नाथ 'रेणु' द्वारा रचित "काले मेघा पानी दे" पाठ से अवतरित है। प्रस्तुत गद्यांश में दादी माँ द्वारा दान के महत्व का वर्णन किया गया है।

व्याख्या: प्रस्तुत गद्यांश के माध्यम से लेखक कहना चाहते हैं कि वह मेंढक मण्डली पर पानी फेंकने से मना करते हैं और रूठ कर बैठ जाते हैं, तो दादी दान का महत्व बताती हुई कहती है कि देख बेटा! यदि किसी खेत में तीस-चालीस मन गेहूँ उगाना है तो किसान पाँच-छह किलो गेहूँ से पहले बुआई करनी पड़ेगी, तभी जाकर वह अच्छी फसल प्राप्त कर सकेगा। ऐसे ही पानी वाले बादल भी हमारे लिए फसल जैसे ही हैं। जब हम इसे गली, शहर, कस्बे आदि को तर करेंगे तो पानी फसल के रूप में बादल बनकर बरसेगा। हमारे ऋषि-मुनि भी यही कहते हैं कि पहले खुद दो तब भगवान तुम्हें चौगुना-आठगुना करके लौटा देंगे और यही सबका आचरण बनना चाहिए।


कर्मचारी चयन बोर्ड, दिल्ली में विभिन्न पदों पर आवेदन आमंत्रित करने हेतु समाचार पत्र में प्रकाशनार्थ निर्धारित प्रारूप में एक विज्ञप्ति लिखिए - [4]

अथवा

अबस विद्यालय रामपुर में स्काउटिंग प्रवृत्ति विकसित करने हेतु आवश्यक सामग्री क्रय करने हेतु 'निविदा' लिखिए।

प्रधानाचार्य
क, ख, ग, उच्च माध्यमिक विद्यालय
बजाज नगर, जयपुर

क्रमांक : लेखा/नि.सू./2022-23     दिनांक : 20 अगस्त, 2022

निविदा सूचना

इस विद्यालय के सत्र 2022-23 की खेल सामग्री की आपूर्ति हेतु अधोहस्ताक्षरकर्ता द्वारा निविदाएँ आमंत्रित की जाती हैं। निविदा फार्म विद्यालय कार्यालय से ₹00/- रुपये शुल्क देकर दिनांक 25-08-22 से 10-09-22 तक प्रातः 10.00 बजे से सायं 3.00 बजे तक कार्य दिवस में प्राप्त किए जा सकते हैं। भरे हुए निविदा प्रपत्र इस कार्यालय में दिनांक 5-09-22 सायं 3.00 बजे तक जमा करवाए जा सकते हैं।

प्राप्त निविदाएँ 5-09-22 को सायं 4.30 बजे उपस्थित निविदा दाताओं के समक्ष खोली जाएँगी। आपूर्ति से संबंधित विस्तृत विवरण निविदा-प्रपत्र में दिया गया है।

प्रधानाचार्य
क, ख, ग, उच्च मा. विद्यालय
बजाज नगर, जयपुर

प्र.9) निम्नलिखित विषयों में से किसी एक विषय पर सारगर्भित निबंध लिखिए। (शब्द सीमा 300 शब्द) [5]

  1. मेक इन इंडिया अभियान
  2. बेटी बचाओं, बेटी पढ़ाओं
  3. विद्यार्थी जीवन में अनुशासन की महत्ता
  4. पर्वतीय क्षेत्र की मेरी यात्रा

मेक इन इंडिया अभियान

मेक इन इंडिया अभियान 25 सितंबर 2014 को प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किया गया था। यह भारत में निवेश के लिए दुनिया भर के शीर्ष व्यापार निवेशकों को आकर्षित करने की एक पहल है। यह सभी निवेशकों के लिए देश में कहीं भी किसी भी क्षेत्र में अपना व्यवसाय स्थापित करने का एक बड़ा अवसर है। इस आकर्षक योजना में विदेशी कंपनियों के लिए भारत में विनिर्माण इकाइयाँ स्थापित करने के लिए संसाधनपूर्ण प्रस्ताव हैं। भारत सरकार द्वारा शुरू किया गया मेक इन इंडिया अभियान प्रभावी भौतिक बुनियादी ढांचे के निर्माण पर केंद्रित है। इसका मतलब व्यापार के लिए वैश्विक केंद्र बनाने के लिए देश में डिजिटल नेटवर्क के बाजार में सुधार करना भी था।

इस पहल का प्रतीक कई पहियों वाला एक विशाल शेर है। यह शांतिपूर्ण प्रगति और देश के जीवंत भविष्य का मार्ग दर्शाता है। कई पहियों वाला एक विशाल चलने वाला शेर साहस, शक्ति, दृढ़ता और ज्ञान का प्रतिनिधित्व करता है।

यह अभियान क्यों?

यह राष्ट्रीय कार्यक्रम देश को वैश्विक व्यापार केंद्र में बदलने के लिए डिजाइन किया गया था। क्योंकि इसमें स्थानीय और विदेशी कंपनियों के लिए आकर्षक प्रस्ताव शामिल हैं। यह अभियान कई मूल्यवान और सम्मानित नौकरियाँ पैदा करने पर केंद्रित है। यह देश के युवाओं की स्थिति में सुधार के लिए लगभग हर क्षेत्र में कौशल वृद्धि भी प्रदान कर रहा है।

मेक इन इंडिया के फायदे

इस योजना के सफल कार्यान्वयन से निश्चित रूप से निम्नलिखित प्रमुख उद्देश्य पूरे होंगे:

  1. देश में ठोस विकास और मूल्यवान रोजगार सृजन सुनिश्चित करना।
  2. शीर्ष निवेशकों की मदद से देश विनिर्माण क्षेत्र में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनेगा।
  3. इससे दोनों पक्षों यानी निवेशकों और हमारे देश को लाभ मिलेगा।
  4. मेक इन इंडिया से कंपनियों को वैश्विक बाजार में अपनी ब्रांड वैल्यू बनाने में भी मदद मिलेगी।
  5. यह निश्चित रूप से भारतीय सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि के साथ-साथ भारतीय मुद्रा के मूल्य को बढ़ाने में भी मदद करेगा।
  6. हमारे अपने निवेशक देश में ही रुकेंगे, जो संसाधनों की कमी और नीतिगत मुद्दों पर स्पष्टता के कारण अपना कारोबार भारत से बाहर ले जाने की योजना बना रहे थे।
  7. इस तथ्य के कारण दुनिया भर की कंपनियां मेक इन इंडिया प्रोजेक्ट में भारी निवेश कर रही हैं।

मेक इन इंडिया की नीति संरचना

निवेशकों पर किसी भी तरह का बोझ कम करने के लिए भारत सरकार बड़ी कोशिश कर रही है। इसके फलस्वरूप व्यावसायिक संस्थाओं के सभी प्रश्नों के समाधान हेतु एक समर्पित वेब पोर्टल की व्यवस्था है। सरकार ने एक समर्पित बैक-एंड सपोर्ट टीम बनाई है, ताकि 72 घंटे की अवधि के भीतर प्रतिक्रिया दी जा सके।

निवेशकों के लिए काम करने और विश्व नेता बनने के लिए सरकार द्वारा विमानन, रसायन, आईटी, ऑटोमोबाइल, कपड़ा, बंदरगाह, फार्मास्यूटिकल्स, पर्यटन, कल्याण और रेलवे जैसे लगभग 25 प्रमुख क्षेत्रों की पहचान की गई है।

मेक इन इंडिया के नुकसान

आइए अब नजर डालते हैं मेक इन इंडिया के कुछ संभावित नुकसानों पर। इन पहलुओं पर सरकार को कुछ सुधारात्मक उपाय करने चाहिए।

  1. कृषि की लापरवाही
  2. प्राकृतिक संसाधनों की कमी
  3. छोटे उद्यमियों को नुकसान
  4. भूमि का विघटन
  5. विनिर्माण आधारित अर्थव्यवस्था
  6. अंतर्राष्ट्रीय ब्रांडों में रुचि
  7. प्रदूषण
  8. चीन के साथ खराब रिश्ते

निष्कर्ष

विकास और प्रगति लाकर भारत को बेरोजगारी से मुक्त करने के लिए इस नीति की तत्काल आवश्यकता है। हम युवाओं की बेरोजगारी की समस्या का समाधान करके भारत में गरीबी को काफी हद तक कम कर सकते हैं। इस प्रकार इस अभियान की सफलता के बाद देश की अर्थव्यवस्था नई ऊंचाई हासिल करेगी। इससे, बदले में, देश में विभिन्न सामाजिक मुद्दों का समाधान हो सकता है।