RBSE Class 12th 2025 Economics-SS-10-2025 Previous Year Papers

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Board RBSE
Class Class 12th
Exam year 2025
Subject Economics-SS-10-2025
Resource type Previous Year Papers
Category RBSE Previous Year Question Papers
Website RBSE Solution

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Rajasthan Board Class 12th Economics-SS-10-2025 2025 solved Previous Year Question Papers

माध्यमिक परीक्षा, 2025
SENIOR SECONDARY EXAMINATION, 2025

अर्थशास्त्र
ECONOMICS

समय : 3 घण्टे (5 मिनिट पूर्णाक : 80)


परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :
GENERAL INSTRUCTIONS TO THE EXAMINEES :

  1. परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न पत्र पर नामांक अनिवार्यत: लिखें।
    Candidates must write first his/her Roll No. on the question paper compulsorily.
  2. सभी प्रश्न अनिवार्य हैं।
    All the questions are compulsory.
  3. प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें।
    Write the answer to each question in the given answer-sheet only.

SS-10-Economics 7006

खण्ड - अ / SECTION - A

I) बहुधिकल्पी प्रश्न : / Multiple choice questions:

i) 'जनरल थ्योरी ऑफ इंप्लायमेंट, इंटरेस्ट एंड मनी' पुस्तक के लेखक है -

Author of the book ‘General theory of employment, interest and money' -

  1. कीनेज (Keynes)
  2. रिकार्डो (Ricardo)
  3. एडम स्मिथ (Adam Smith)
  4. जे.के. मेहता (J.K. Mehta)

सही उत्तर: (a) कीनेज (Keynes)

व्याख्या: यह पुस्तक प्रसिद्ध अर्थशास्त्री जॉन मेनार्ड कीन्स द्वारा 1936 में लिखी गई थी, जो समष्टि अर्थशास्त्र की नींव मानी जाती है।

ii) निम्न में से कौन-सा समष्टि अर्थशास्त्र में निर्णयकर्ता नहीं हो सकता?

Which of the following could not be decision maker in macro economics?

  1. राज्य (State)
  2. भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India)
  3. उपभोक्ता (Consumer)
  4. भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (Securities and Exchange Board of India)

सही उत्तर: (c) उपभोक्ता (Consumer)

व्याख्या: समष्टि अर्थशास्त्र में निर्णयकर्ता सरकार, केंद्रीय बैंक और नियामक संस्थाएं होती हैं, जबकि उपभोक्ता व्यष्टि अर्थशास्त्र का विषय है।

iii) अंतिम शरण ऋणदाता कहलाता है -

The lender of last resort is called -

  1. व्यापारिक बैंक (Commercial bank)
  2. केन्द्रीय बैंक (Central bank)
  3. निजी बैंक (Private bank)
  4. सहकारी बैंक (Co-operative bank)

सही उत्तर: (b) केन्द्रीय बैंक (Central bank)

व्याख्या: केंद्रीय बैंक (भारत में RBI) वित्तीय संकट के समय बैंकों को अंतिम उपाय के रूप में ऋण प्रदान करता है, इसलिए इसे अंतिम शरण ऋणदाता कहा जाता है।

iv) निम्न में से कौन-सी परिसम्पत्ति मुद्रा के अतिरिक्त मूल्य संचय का कार्य कर सकती है?

Which of the following asset other than money can also act as a store of value?

  1. सोना (Gold)
  2. भूमि (Land)
  3. बंधपत्र (Bonds)
  4. उपरोक्त सभी (All of the above)

सही उत्तर: (d) उपरोक्त सभी (All of the above)

व्याख्या: सोना, भूमि और बंधपत्र सभी मूल्य संचय के साधन हैं क्योंकि ये समय के साथ अपना मूल्य बनाए रखते हैं या बढ़ाते हैं।

(iv) आय का वह भाग जो उपयोग नहीं किया गया, कहलाता है -

The part of income that is not consumed, is called

  1. बचत (Saving)
  2. उपयोग प्रवृत्ति (Consumption propensity)
  3. विनिवेश (Disinvestment)
  4. ह्रास (Depreciation)

सही उत्तर: बचत (Saving)

व्याख्या: आय का वह भाग जो उपभोग पर खर्च नहीं किया जाता, बचत कहलाता है। बचत = आय - उपभोग।

(vi) उपयोग माँग का सबसे महत्वपूर्ण निर्धारक है -

The most important determinant of consumption demand is

  1. बचत (Saving)
  2. उपयोग (Consumption)
  3. घरेलू आय (Household income)
  4. निवेश (Investment)

सही उत्तर: घरेलू आय (Household income)

व्याख्या: उपभोग माँग का सबसे महत्वपूर्ण निर्धारक घरेलू आय है। कीन्स के अनुसार, आय बढ़ने पर उपभोग बढ़ता है, लेकिन आय में वृद्धि की तुलना में कम अनुपात में।

(vii) निम्न में से कौन-सा प्रत्यक्ष कर है?

Which of the following is direct tax?

  1. सम्पत्ति कर (Wealth tax)
  2. उत्पाद कर (Excise tax)
  3. सीमा शुल्क (Custom duty)
  4. सेवा कर (Service tax)

सही उत्तर: सम्पत्ति कर (Wealth tax)

व्याख्या: प्रत्यक्ष कर वह कर है जिसका भार और प्रभाव एक ही व्यक्ति पर पड़ता है, जैसे सम्पत्ति कर, आयकर। उत्पाद कर, सीमा शुल्क और सेवा कर अप्रत्यक्ष कर हैं।

(viii) सार्वजनिक वस्तुओं का उदाहरण है -

Example of public goods is -

  1. राष्ट्रीय सुरक्षा (National security)
  2. सड़के (Roads)
  3. सरकारी प्रशासन (Government administration)
  4. उपरोक्त सभी (All of the above)

सही उत्तर: उपरोक्त सभी (All of the above)

व्याख्या: सार्वजनिक वस्तुएँ वे वस्तुएँ हैं जो गैर-प्रतिद्वंद्वी और गैर-अपवर्जनीय होती हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा, सड़कें और सरकारी प्रशासन सभी सार्वजनिक वस्तुओं के उदाहरण हैं।

(ix) निम्न में से कौन-सा देश और उसकी मुद्रा का गलत युग्म है?

Which of the following is an incorrect pair of country and its currency?

  1. जापान-येन (Japan - Yen)
  2. भारत-रुपया (India - Rupee)
  3. ब्रिटेन-लीरा (Britain - Leera)
  4. संयुक्त राज्य अमेरिका-डॉलर (United State of America - Dollar)

सही उत्तर: ब्रिटेन-लीरा (Britain - Leera)

व्याख्या: ब्रिटेन की मुद्रा पाउंड स्टर्लिंग (£) है, न कि लीरा। लीरा तुर्की और पहले इटली की मुद्रा थी।

(x) निम्न में से कौन-सा टैरिफ से संबंधित है?

Which of the following is related to tariff?

  1. विशेष आर्थिक क्षेत्र (Special Economic Zone)
  2. व्यापार अवरोधक (Trade barrier)
  3. व्यापार सहायिका (Trade subsidy)
  4. मुक्त व्यापार (Free trade)

सही उत्तर: व्यापार अवरोधक (Trade barrier)

व्याख्या: टैरिफ आयातित वस्तुओं पर लगाया जाने वाला कर है, जो व्यापार अवरोधक का एक रूप है। यह अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को प्रतिबंधित करता है।

प्रश्न (xi) से (xvi) तक

(xi) बाजार अर्थव्यवस्था में सभी क्रियाकलापों का निर्धारण होता है -

  • अ) बाजार द्वारा
  • ब) उपभोक्ता द्वारा
  • स) उत्पादक द्वारा
  • द) सरकार द्वारा

All the economic activities are determined in market economy by -

  • A) Market
  • B) Consumer
  • C) Producer
  • D) Government

सही उत्तर: अ) बाजार द्वारा / A) Market

व्याख्या: बाजार अर्थव्यवस्था में उत्पादन, वितरण और उपभोग के सभी निर्णय बाजार की कीमतों और मांग-पूर्ति के आधार पर होते हैं, न कि सरकार या किसी एक व्यक्ति द्वारा।

(xii) विभिन्न बाजारों का अध्ययन संबंधित है -

  • अ) व्यष्टि अर्थशास्त्र से
  • ब) समष्टि अर्थशास्त्र से
  • स) व्यष्टि और समष्टि दोनों से
  • द) इनमें से कोई नहीं

Study of various markets is related to -

  • A) Micro economics
  • B) Macro economics
  • C) Both micro and macro
  • D) None of the above

सही उत्तर: अ) व्यष्टि अर्थशास्त्र से / A) Micro economics

व्याख्या: विभिन्न बाजारों (जैसे पूर्ण प्रतिस्पर्धा, एकाधिकार) का अध्ययन व्यष्टि अर्थशास्त्र के अंतर्गत किया जाता है, जो व्यक्तिगत इकाइयों के व्यवहार पर केंद्रित है।

(xiii) बजट रेखा का समीकरण है -

  • अ) M = P1 + P2x2
  • ब) M = P1x1 + P2x2
  • स) M = P1x1 + P2x2
  • द) M = P1x1 + P2x2

Equation of budget line is -

  • A) M = P1x1 + P2x2
  • B) M = P1x1 + P2x2
  • C) M = P1x1 + P2x2
  • D) M = P1x1 + P2x2

सही उत्तर: ब) M = P1x1 + P2x2 / B) M = P1x1 + P2x2

व्याख्या: बजट रेखा का समीकरण M = P1x1 + P2x2 है, जहाँ M आय, P1 और P2 वस्तुओं की कीमतें, तथा x1 और x2 उनकी मात्राएँ हैं।

(xiv) इनमें से कौन-सा वस्तु की माँग का निर्धारक है?

  • अ) वस्तु की कीमत
  • ब) उपभोक्ता की रुचि
  • स) उपभोक्ता के अधिमान
  • द) उपरोक्त सभी

Which of the following is a determinant of demand for a good?

  • A) Price of good
  • B) Consumer taste
  • C) Consumer preference
  • D) All of these

सही उत्तर: द) उपरोक्त सभी / D) All of these

व्याख्या: वस्तु की माँग कई कारकों पर निर्भर करती है, जिनमें वस्तु की कीमत, उपभोक्ता की रुचि और उपभोक्ता के अधिमान सभी शामिल हैं।

(xv) निम्न में से कौन-सा वक्र आयताकार अतिपरवलय आकृति का होता है?

  • अ) औसत परिवर्ती लागत वक्र
  • ब) कुल स्थिर लागत वक्र
  • स) औसत स्थिर लागत वक्र
  • द) कुल परिवर्ती लागत वक्र

Which of the following curve has rectangular hyperbola shape?

  • A) Average variable cost curve
  • B) Total fixed cost curve
  • C) Average fixed cost curve
  • D) Total variable cost curve

सही उत्तर: स) औसत स्थिर लागत वक्र / C) Average fixed cost curve

व्याख्या: औसत स्थिर लागत (AFC) वक्र आयताकार अतिपरवलय के आकार का होता है क्योंकि कुल स्थिर लागत स्थिर रहती है और उत्पादन बढ़ने पर AFC घटता है, जिससे वक्र एक अतिपरवलय बनाता है।

(xvi) कुल लागत और कुल परिवर्ती लागत के मध्य अंतर होता है -

  • अ) औसत लागत के बराबर
  • ब) कुल स्थिर लागत के बराबर
  • स) सीमांत लागत के बराबर
  • द) औसत स्थिर लागत के बराबर

Difference between total cost and total variable cost is equal to -

  • A) Average cost
  • B) Total fixed cost
  • C) Marginal cost
  • D) Average fixed cost

सही उत्तर: ब) कुल स्थिर लागत के बराबर / B) Total fixed cost

व्याख्या: कुल लागत (TC) = कुल स्थिर लागत (TFC) + कुल परिवर्ती लागत (TVC)। अतः TC - TVC = TFC, जो कुल स्थिर लागत के बराबर है।

xvii) पूर्ण प्रतियोगिता की एक सर्वाधिक प्रतिष्ठित विशेषता है -

The single most distinguishing characteristic of perfect competition is:

  1. वस्तु विभेद (Goods discrimination)
  2. एक फर्म का कीमत स्वीकारक व्यवहार (Price taking behaviour of a firm)
  3. अतिरेक लाभ (Excess profit)
  4. कीमत दृढ़ता (Price rigidity)

सही उत्तर / Correct Answer: b) एक फर्म का कीमत स्वीकारक व्यवहार (Price taking behaviour of a firm)

व्याख्या: पूर्ण प्रतियोगिता में अनेक विक्रेता और क्रेता होते हैं, जिससे कोई भी एक फर्म बाजार कीमत को प्रभावित नहीं कर सकती। इसलिए फर्म को बाजार द्वारा निर्धारित कीमत को स्वीकार करना पड़ता है, यही इसकी सबसे प्रमुख विशेषता है।

xviii) यदि माँग तथा पूर्ति वक्र दोनों दार्यी ओर शिफ्ट हों तो संतुलन कीमत में -

If demand and supply curves both shift to the right, the equilibrium price will:

  1. वृद्धि होगी (Increase)
  2. कमी होगी (Decrease)
  3. अपरिवर्तित रहेगी (Remain unchanged)
  4. उपरोक्त में से कोई भी (Any of the above)

सही उत्तर / Correct Answer: d) उपरोक्त में से कोई भी (Any of the above)

व्याख्या: जब माँग और पूर्ति दोनों दाईं ओर शिफ्ट होते हैं, तो संतुलन कीमत में वृद्धि, कमी या अपरिवर्तित रहना तीनों संभव है, यह इस बात पर निर्भर करता है कि दोनों शिफ्टों की मात्रा कितनी है।

2) रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए :

Fill in the blanks:

  1. मुद्रा विनिमय का एक सर्वमान्य माध्यम है। (Money is the commonly accepted as medium of exchange.)
  2. उपभोग फलन आय तथा उपयोग में संबंध की व्याख्या करता है। (Consumption function describes the relation between consumption and income.)
  3. अन्तर्राष्ट्रीय लेन देन में स्थिरता लाने के लिए अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की स्थापना की गई। (The International Monetary Fund (IMF) has been setup to ensure stability in international transactions.)
  4. समाजवादी अर्थव्यवस्था का निकटतम उदाहरण चीन है। (The closest example of a socialist economy is the China.)
  5. आगम का लागत पर आधिक्य लाभ कहलाता है। (The excess of revenue over cost is called profit.)
  6. फर्म के निर्बाध प्रवेश तथा बहिर्गमन से अभिप्राय है कि बाजार कीमत सदैव न्यूनतम औसत लागत के बराबर होती है। (Free entry and exit of the firm implies that the market price will always equal to minimum average cost.)

3) अति लघुत्तरात्मक प्रश्न :

Very short answer:

i) महामंदी का यूरोप और उत्तरी अमेरिका पर क्या प्रभाव पड़ा था?
What was the impact of Great Depression on Europe and North America?

उत्तर: महामंदी (1929-1933) का यूरोप और उत्तरी अमेरिका पर गहरा प्रभाव पड़ा। इससे बड़े पैमाने पर बेरोजगारी बढ़ी, उत्पादन में भारी गिरावट आई, बैंक विफल हुए, और व्यापार में कमी आई। लाखों लोग बेरोजगार हो गए और आर्थिक गतिविधियाँ ठप हो गईं।

Answer: The Great Depression (1929-1933) had a severe impact on Europe and North America. It led to massive unemployment, a sharp decline in production, bank failures, and a reduction in trade. Millions of people became unemployed and economic activities came to a halt.

खण्ड-अ (Section-A)

अति लघु उत्तरात्मक प्रश्न (Very Short Answer Questions)

  1. डिजिटल सौदों का कोई एक माध्यम लिखिए।
    Write any one medium of digital transactions.

    उत्तर: डिजिटल सौदों का एक माध्यम UPI (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) है, जिसके द्वारा मोबाइल ऐप के माध्यम से तुरंत भुगतान किया जा सकता है।

  2. सीमांत उपयोग प्रवृति से आप क्या समझते हैं?
    What do you understand by marginal propensity to consume?

    उत्तर: सीमांत उपयोग प्रवृति (MPC) आय में वृद्धि के उस अनुपात को कहते हैं जो उपभोग पर व्यय किया जाता है। इसे ΔC/ΔY से दर्शाया जाता है, जहाँ ΔC उपभोग में परिवर्तन और ΔY आय में परिवर्तन है।

  3. निवेश को समझाइये।
    Explain the investment.

    उत्तर: निवेश का अर्थ है पूँजीगत वस्तुओं (जैसे मशीनरी, भवन, उपकरण) के स्टॉक में वृद्धि करना। यह उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए किया जाता है और अर्थव्यवस्था में कुल माँग का एक महत्वपूर्ण घटक है।

  4. निर्गत गुणक की गणना का सूत्र लिखिए।
    Write the formula to calculate the output multiplier.

    उत्तर: निर्गत गुणक (Output Multiplier) का सूत्र है:

    K = 1 / (1 - MPC) या K = 1 / MPS

    जहाँ MPC = सीमांत उपभोग प्रवृति और MPS = सीमांत बचत प्रवृति।

  5. वार्षिक वित्तीय ब्यौरे का आशय स्पष्ट कीजिए।
    Clarify the meaning of annual financial document.

    उत्तर: वार्षिक वित्तीय ब्यौरा (Annual Financial Statement) वह दस्तावेज है जो सरकार द्वारा प्रत्येक वर्ष संसद में प्रस्तुत किया जाता है। इसमें सरकार की अनुमानित आय (प्राप्तियाँ) और व्यय का विवरण होता है, जिसे आम बजट भी कहा जाता है।

  6. विदेशी विनिमय बाजार से क्या आशय है?
    What is meant by foreign exchange market?

    उत्तर: विदेशी विनिमय बाजार वह बाजार है जहाँ विभिन्न देशों की मुद्राओं का क्रय-विक्रय किया जाता है। यह बैंकों, वित्तीय संस्थानों और व्यापारियों का एक वैश्विक नेटवर्क है जो मुद्रा विनिमय दर निर्धारित करता है।

  7. अर्थव्यवस्था की कोई एक केन्द्रीय समस्या लिखिए।
    Write any one central problem of an economy.

    उत्तर: अर्थव्यवस्था की एक केन्द्रीय समस्या "क्या उत्पादन किया जाए?" (What to produce?) है। इसमें यह निर्णय लिया जाता है कि सीमित संसाधनों का उपयोग करके कौन-सी वस्तुएँ और सेवाएँ उत्पादित की जाएँ।

  8. सीमान्त उपयोगिता से आपका क्या आशय है?
    What do you mean by marginal utility?

    उत्तर: सीमान्त उपयोगिता (Marginal Utility) किसी वस्तु की एक अतिरिक्त इकाई के उपभोग से प्राप्त होने वाली अतिरिक्त संतुष्टि है। इसे MU = ΔTU/ΔQ से दर्शाया जाता है, जहाँ ΔTU कुल उपयोगिता में परिवर्तन और ΔQ उपभोग की गई इकाइयों में परिवर्तन है।

  9. उत्पादन फलन क्या है?
    What is production function?

    उत्तर: उत्पादन फलन (Production Function) उत्पादन के साधनों (जैसे श्रम, पूँजी) और उत्पादित वस्तुओं की मात्रा के बीच तकनीकी संबंध को दर्शाता है। इसे Q = f(L, K) के रूप में व्यक्त किया जाता है, जहाँ Q उत्पादन, L श्रम और K पूँजी है।

  10. पूर्ण प्रतिस्पर्धा बाजार में अधिपूर्ति का अर्थ समझाइये।
    Explain the meaning of excess supply in perfect competitive market.

    उत्तर: पूर्ण प्रतिस्पर्धा बाजार में अधिपूर्ति (Excess Supply) वह स्थिति है जब किसी वस्तु की बाजार कीमत संतुलन कीमत से अधिक होती है, जिसके कारण वस्तु की पूर्ति (Supply) माँग (Demand) से अधिक हो जाती है। इस स्थिति में विक्रेता कीमत कम करने को बाध्य होते हैं।

  11. पूर्ण प्रतिस्पर्धा बाजार क्या है?
    What is perfect competitive market?

    उत्तर: पूर्ण प्रतिस्पर्धा बाजार (Perfect Competitive Market) वह बाजार संरचना है जिसमें अनेक क्रेता और विक्रेता होते हैं, सभी फर्में एक समान वस्तु बेचती हैं, और किसी भी क्रेता या विक्रेता के पास कीमत को प्रभावित करने की शक्ति नहीं होती। इसमें प्रवेश और निकास पूर्णतः स्वतंत्र होता है।


खण्ड-ब (Section-B)

लघु उत्तरात्मक प्रश्न (Short Answer Questions)

  1. आपके अनुसार पूँजीवादी अर्थव्यवस्था के कोई दो प्रमुख लक्षण बताइये।
    According to you explain any two main features of capitalist economy.

    उत्तर: पूँजीवादी अर्थव्यवस्था के दो प्रमुख लक्षण निम्नलिखित हैं:

    1. निजी सम्पत्ति का अधिकार (Right to Private Property): व्यक्तियों को अपनी सम्पत्ति (भूमि, पूँजी, मशीनरी आदि) पर स्वामित्व और उपयोग का अधिकार होता है। वे इसे खरीद, बेच या हस्तांतरित कर सकते हैं।
    2. बाजार तंत्र (Market Mechanism): कीमतें माँग और पूर्ति के बल द्वारा निर्धारित होती हैं। सरकार का हस्तक्षेप न्यूनतम होता है और उत्पादन के निर्णय लाभ को ध्यान में रखकर लिए जाते हैं।
  2. यदि उपयोग फलन C = 40 + 0.75 Y तथा निवेश I = 0 करोड़ रुपये हो तो प्रत्याशित समस्त माँग का मूल्य ज्ञात कीजिए।
    If consumption function C = 40 + 0.75 Y and investment I = 0 crore rupee are given then calculate the value of expected aggregate demand.

    हल:

    प्रत्याशित समस्त माँग (Aggregate Demand) = उपभोग (C) + निवेश (I)

    दिया गया है:

    • C = 40 + 0.75Y
    • I = 0 करोड़ रुपये

    समस्त माँग (AD) = C + I = (40 + 0.75Y) + 0 = 40 + 0.75Y

    संतुलन की स्थिति में, AD = Y (राष्ट्रीय आय)

    अतः, Y = 40 + 0.75Y

    Y - 0.75Y = 40

    0.25Y = 40

    Y = 40 / 0.25 = 160 करोड़ रुपये

    अतः प्रत्याशित समस्त माँग का मूल्य 160 करोड़ रुपये होगा।

प्रश्न 6: सरकार बजट द्वारा स्थिरीकरण कार्य कैसे करती है? विवेचना कीजिए।

How does the government perform stability work through budget? Discuss.

उत्तर: सरकार बजट के माध्यम से अर्थव्यवस्था में स्थिरता लाने का कार्य करती है। यह मुख्यतः दो प्रकार से होता है:

  1. मंदी के समय: जब अर्थव्यवस्था में मंदी होती है, तो सरकार करों में कमी करती है और सार्वजनिक व्यय बढ़ाती है। इससे लोगों की क्रय शक्ति बढ़ती है और मांग में वृद्धि होती है, जिससे उत्पादन और रोजगार बढ़ता है।
  2. मुद्रास्फीति के समय: जब अर्थव्यवस्था में मुद्रास्फीति होती है, तो सरकार करों में वृद्धि करती है और सार्वजनिक व्यय कम करती है। इससे मांग कम होती है और कीमतों पर नियंत्रण पाया जाता है।

इस प्रकार, बजट के राजस्व और व्यय नीतियों के समायोजन द्वारा सरकार आर्थिक स्थिरता बनाए रखती है।


प्रश्न 7: दी गई भुगतान संतुलन तालिका में अज्ञात पदों को ज्ञात कीजिए।

Find the missing values in the balance of payments table given below -

S.No Items Value (in million $)
1 निर्यात (Export) 160
2 आयात (Import) 240
3 व्यापार संतुलन (Trade Balance) 0
4 अदृश्य (Net Invisibles) 0
5 चालू खाते का शेष (Current Account Balance) 2050

उत्तर: तालिका में दिए गए आंकड़ों के अनुसार:

  • व्यापार संतुलन = निर्यात - आयात = 160 - 240 = -80 (मिलियन डॉलर)। लेकिन तालिका में 0 दिया गया है, जो संभवतः अदृश्य मदों के शुद्ध प्रभाव को दर्शाता है।
  • चालू खाते का शेष = व्यापार संतुलन + अदृश्य (शुद्ध) = 0 + 0 = 0, लेकिन तालिका में 2050 दिया गया है। यह विसंगति संभवतः तालिका में त्रुटि या अतिरिक्त मदों के कारण है।

सही गणना के अनुसार, यदि निर्यात 160 और आयात 240 है, तो व्यापार संतुलन -80 होगा। चालू खाते का शेष ज्ञात करने के लिए अदृश्य मदों का शुद्ध मान जोड़ना होगा।


प्रश्न 8: अवमूल्यन और पुनर्मूल्यन में भेद कीजिए।

Distinguish between devaluation and revaluation.

उत्तर: अवमूल्यन और पुनर्मूल्यन में निम्नलिखित अंतर हैं:

क्र. अवमूल्यन (Devaluation) पुनर्मूल्यन (Revaluation)
1 इसमें सरकार द्वारा घरेलू मुद्रा के मूल्य को विदेशी मुद्रा के सापेक्ष आधिकारिक रूप से कम किया जाता है। इसमें सरकार द्वारा घरेलू मुद्रा के मूल्य को विदेशी मुद्रा के सापेक्ष आधिकारिक रूप से बढ़ाया जाता है।
2 इससे निर्यात सस्ता और आयात महंगा हो जाता है। इससे निर्यात महंगा और आयात सस्ता हो जाता है।
3 इसका उपयोग भुगतान संतुलन घाटे को कम करने के लिए किया जाता है। इसका उपयोग मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है।

प्रश्न 9: सकारात्मक आर्थिक विश्लेषण तथा आदर्शक आर्थिक विश्लेषण की विवेचना कीजिए।

Discuss the positive economic analysis and the normative economic analysis.

उत्तर: सकारात्मक और आदर्शक आर्थिक विश्लेषण में निम्नलिखित अंतर हैं:

  • सकारात्मक आर्थिक विश्लेषण (Positive Economic Analysis): यह तथ्यों पर आधारित होता है और 'क्या है' का अध्ययन करता है। यह वस्तुनिष्ठ होता है और इसे सत्यापित किया जा सकता है। उदाहरण: "भारत में बेरोजगारी दर 5% है।"
  • आदर्शक आर्थिक विश्लेषण (Normative Economic Analysis): यह मूल्य निर्णयों पर आधारित होता है और 'क्या होना चाहिए' का अध्ययन करता है। यह व्यक्तिपरक होता है और इसे सत्यापित नहीं किया जा सकता। उदाहरण: "सरकार को बेरोजगारी कम करनी चाहिए।"

प्रश्न 10: उपयोगिता क्या है? एक उदाहरण की सहायता से समझाइए।

What is utility? Explain with the help of an example.

उत्तर: उपयोगिता (Utility) किसी वस्तु या सेवा की वह क्षमता है जो मानवीय आवश्यकताओं को संतुष्ट करती है। यह एक व्यक्तिपरक अवधारणा है, जो व्यक्ति की पसंद और आवश्यकता पर निर्भर करती है।

उदाहरण: गर्मी के दिनों में एक गिलास ठंडे पानी की उपयोगिता बहुत अधिक होती है क्योंकि यह प्यास बुझाता है। वहीं, सर्दी के दिनों में उसी पानी की उपयोगिता कम हो जाती है। इस प्रकार, उपयोगिता समय और परिस्थिति के अनुसार बदलती है।


प्रश्न 11: श्रम के कुल उत्पाद वक्र का रेखाचित्र बनाइए।

Draw the diagram of total production curve of labour.

उत्तर: श्रम के कुल उत्पाद वक्र (Total Product Curve) को निम्नलिखित प्रकार से दर्शाया जाता है:

[यहाँ एक रेखाचित्र होगा जिसमें X-अक्ष पर श्रम (Labour) और Y-अक्ष पर कुल उत्पाद (Total Product) दर्शाया गया है। वक्र प्रारंभ में तेजी से बढ़ता है, फिर धीमी गति से बढ़ता है, और अंत में गिरने लगता है।]

वक्र के तीन चरण होते हैं:

  1. बढ़ते प्रतिफल का चरण: जहाँ कुल उत्पाद तेजी से बढ़ता है।
  2. स्थिर प्रतिफल का चरण: जहाँ कुल उत्पाद धीमी गति से बढ़ता है।
  3. ह्रासमान प्रतिफल का चरण: जहाँ कुल उत्पाद गिरने लगता है।

प्रश्न 12: औसत उत्पाद और सीमांत उत्पाद में भेद कीजिए।

Distinguish between average product and marginal product.

उत्तर: औसत उत्पाद और सीमांत उत्पाद में निम्नलिखित अंतर हैं:

क्र. औसत उत्पाद (Average Product) सीमांत उत्पाद (Marginal Product)
1 यह कुल उत्पाद को श्रम की इकाइयों से विभाजित करने पर प्राप्त होता है। यह श्रम की एक अतिरिक्त इकाई लगाने से कुल उत्पाद में होने वाले परिवर्तन को दर्शाता है।
2 सूत्र: AP = TP / L सूत्र: MP = ΔTP / ΔL
3 यह प्रति इकाई श्रम की उत्पादकता बताता है। यह अतिरिक्त श्रम की उत्पादकता बताता है।

प्रश्न 13: एक फर्म के कुल संप्राप्ति वक्र का रेखाचित्र बनाइए।

Draw the diagram of total revenue curve for a firm.

उत्तर: एक फर्म के कुल संप्राप्ति वक्र (Total Revenue Curve) को निम्नलिखित प्रकार से दर्शाया जाता है:

[यहाँ एक रेखाचित्र होगा जिसमें X-अक्ष पर बेची गई मात्रा (Quantity Sold) और Y-अक्ष पर कुल संप्राप्ति (Total Revenue) दर्शाया गया है। पूर्ण प्रतिस्पर्धा में यह एक सीधी रेखा होती है जो मूल बिंदु से निकलती है, जबकि एकाधिकार में यह एक उल्टे U आकार का वक्र होता है।]

पूर्ण प्रतिस्पर्धा में, कीमत स्थिर रहती है, इसलिए कुल संप्राप्ति वक्र एक सीधी रेखा होती है। एकाधिकार में, कीमत घटती है, इस

प्रश्न 15 (अथवा)

निम्नलिखित बुनियादी राष्ट्रीय आय विश्लेषण कीजिए:

  1. बाजार कीमत पर सकल घरेलू उत्पाद
  2. साधन लागत पर सकल घरेलू उत्पाद
  3. बाजार कीमत पर शुद्ध घरेलू उत्पाद

अथवा

निम्नलिखित अवधारणाओं का विश्लेषण कीजिए:

  1. शुद्ध निवेश
  2. मूल्यह्रास
  3. मध्यवर्ती वस्तुएँ

Analyse the following concepts:

  1. Net investment
  2. Depreciation
  3. Intermediate goods

समाधान (पहला विकल्प):

  • बाजार कीमत पर सकल घरेलू उत्पाद (GDP at Market Price): यह किसी देश में एक वर्ष में उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं के बाजार मूल्य का योग है। इसमें उत्पादन पर अप्रत्यक्ष कर (जैसे GST) शामिल होते हैं और सब्सिडी घटा दी जाती है।
  • साधन लागत पर सकल घरेलू उत्पाद (GDP at Factor Cost): यह उत्पादन के साधनों (भूमि, श्रम, पूंजी, उद्यम) को दिए गए भुगतानों का योग है। इसे बाजार कीमत पर GDP में से अप्रत्यक्ष कर घटाकर और सब्सिडी जोड़कर प्राप्त किया जाता है।
  • बाजार कीमत पर शुद्ध घरेलू उत्पाद (NDP at Market Price): यह बाजार कीमत पर सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में से मूल्यह्रास (पूंजी की खपत) घटाकर प्राप्त किया जाता है। यह दर्शाता है कि अर्थव्यवस्था में कितना नया मूल्य जोड़ा गया है।

समाधान (दूसरा विकल्प):

  • शुद्ध निवेश (Net Investment): यह सकल निवेश में से मूल्यह्रास घटाकर प्राप्त किया जाता है। यह अर्थव्यवस्था में पूंजी स्टॉक में वास्तविक वृद्धि को दर्शाता है।
  • मूल्यह्रास (Depreciation): यह उत्पादन प्रक्रिया में पूंजीगत वस्तुओं (जैसे मशीनरी) के घिसावट या अप्रचलन के कारण उनके मूल्य में होने वाली कमी है। इसे पूंजी की खपत भी कहते हैं।
  • मध्यवर्ती वस्तुएँ (Intermediate Goods): ये वे वस्तुएँ हैं जिनका उपयोग अन्य वस्तुओं के उत्पादन में कच्चे माल या इनपुट के रूप में किया जाता है। इनका मूल्य अंतिम वस्तु के मूल्य में शामिल हो जाता है, इसलिए राष्ट्रीय आय की गणना में इन्हें शामिल नहीं किया जाता (दोहरी गणना से बचने के लिए)।

प्रश्न 15

योजनागत व्यय और गैर योजनागत व्यय क्या होता है? समझाइए।

What are the plan and non-plan expenditure? Explain.

अथवा

राजस्व व्यय और पूँजीगत व्यय से क्या आशय है? समझाइये।

What is meant by revenue expenditure and capital expenditure? Explain.

समाधान (पहला विकल्प):

  • योजनागत व्यय (Plan Expenditure): यह वह व्यय है जो सरकार द्वारा पंचवर्षीय योजनाओं के तहत किया जाता है। इसका उद्देश्य आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है, जैसे बुनियादी ढाँचा (सड़क, बिजली), शिक्षा, स्वास्थ्य, और कृषि विकास पर खर्च।
  • गैर योजनागत व्यय (Non-Plan Expenditure): यह वह व्यय है जो योजना के दायरे में नहीं आता और सरकार के नियमित कार्यों के लिए आवश्यक होता है। इसमें ब्याज भुगतान, रक्षा, प्रशासन, सब्सिडी, और पेंशन शामिल हैं।

समाधान (दूसरा विकल्प):

  • राजस्व व्यय (Revenue Expenditure): यह वह व्यय है जो सरकार की दिन-प्रतिदिन की कार्यप्रणाली के लिए किया जाता है और इससे कोई संपत्ति नहीं बनती या देयता कम नहीं होती। उदाहरण: वेतन, ब्याज भुगतान, सब्सिडी, रक्षा व्यय।
  • पूँजीगत व्यय (Capital Expenditure): यह वह व्यय है जो संपत्तियों (जैसे भवन, मशीनरी, सड़क) के निर्माण या अधिग्रहण पर किया जाता है या देयताओं को कम करता है। इससे अर्थव्यवस्था की उत्पादन क्षमता बढ़ती है। उदाहरण: बुनियादी ढाँचा परियोजनाएँ, ऋण वसूली।

प्रश्न 16

उपभोक्ता के संतुलन को रेखाचित्र की सहायता से स्पष्ट कीजिए।

Clarify the consumer equilibrium with the help of diagram.

अथवा

माँग के नियम को एक रेखाचित्र की सहायता से स्पष्ट कीजिए।

Clarify the law of demand with the help of diagram.

समाधान (पहला विकल्प): उपभोक्ता संतुलन (Consumer Equilibrium)

उपभोक्ता संतुलन वह स्थिति है जहाँ उपभोक्ता अपनी सीमित आय से अधिकतम संतुष्टि प्राप्त करता है। इसे अनधिमान वक्र विश्लेषण (Indifference Curve Analysis) द्वारा समझाया जाता है।

रेखाचित्र: (एक काल्पनिक रेखाचित्र का वर्णन)

  • X-अक्ष पर वस्तु X की मात्रा और Y-अक्ष पर वस्तु Y की मात्रा लें।
  • एक बजट रेखा (AB) बनाएँ जो उपभोक्ता की आय और वस्तुओं की कीमतों को दर्शाती है।
  • तीन अनधिमान वक्र (IC1, IC2, IC3) बनाएँ, जहाँ IC2 उच्चतम संतुष्टि स्तर है जो बजट रेखा को स्पर्श करता है।
  • स्पर्श बिंदु (E) पर बजट रेखा और अनधिमान वक्र एक-दूसरे को स्पर्श करते हैं। इस बिंदु पर सीमांत प्रतिस्थापन दर (MRS) वस्तुओं की कीमतों के अनुपात के बराबर होती है।

स्पष्टीकरण: बिंदु E पर उपभोक्ता संतुलन में होता है क्योंकि वह अपनी बजट बाधा के भीतर उच्चतम संभव अनधिमान वक्र (IC2) पर पहुँच जाता है। किसी अन्य बिंदु पर, वह या तो कम संतुष्टि प्राप्त करेगा या अपनी आय से अधिक खर्च करेगा।

समाधान (दूसरा विकल्प): माँग का नियम (Law of Demand)

माँग का नियम कहता है कि अन्य बातें समान रहने पर, किसी वस्तु की कीमत बढ़ने पर उसकी माँग घट जाती है और कीमत घटने पर माँग बढ़ जाती है। कीमत और माँग के बीच विपरीत संबंध होता है।

रेखाचित्र: (एक काल्पनिक रेखाचित्र का वर्णन)

  • X-अक्ष पर वस्तु की माँगी गई मात्रा (Quantity Demanded) और Y-अक्ष पर कीमत (Price) लें।
  • एक नीचे की ओर झुकी हुई माँग वक्र (Demand Curve) बनाएँ, जो बाएँ से दाएँ नीचे जाती है।
  • माँग वक्र पर दो बिंदु A और B लें। बिंदु A पर कीमत अधिक (P1) और माँग कम (Q1) है। बिंदु B पर कीमत कम (P2) और माँग अधिक (Q2) है।

स्पष्टीकरण: जैसे-जैसे कीमत P1 से घटकर P2 होती है, माँगी गई मात्रा Q1 से बढ़कर Q2 हो जाती है। यह माँग वक्र के ढलान से दर्शाया जाता है। यह नियम आय प्रभाव, प्रतिस्थापन प्रभाव और सीमांत उपयोगिता ह्रास नियम पर आधारित है।

प्रश्न 7 (L7)

हिन्दी: निम्न तालिका में एक प्रतिस्पर्धी फर्म की कुल लागत (Tc) को दर्शाया गया है। वस्तु की कीमत (P) ₹0 प्रति इकाई है। उत्पादन के प्रत्येक स्तर पर लाभ (π) की गणना कीजिए।

English: The following table shows the total cost (Tc) of a competitive firm. Given Price of the good is Rs.0. Calculate the profit (π) at each level of output.

उत्पादन स्तर (Output level) कुल लागत (Total cost ₹)
0 22
1 CS (38)
2 46

हल / Solution:

लाभ (π) = कुल राजस्व (TR) – कुल लागत (TC)

कुल राजस्व (TR) = कीमत (P) × उत्पादन स्तर (Q)

यहाँ P = ₹0, अतः TR = 0 × Q = ₹0 (सभी स्तरों पर)

इसलिए, लाभ (π) = 0 – TC = –TC (हानि)

  • उत्पादन स्तर 0: π = 0 – 22 = –₹22
  • उत्पादन स्तर 1: π = 0 – 38 = –₹38
  • उत्पादन स्तर 2: π = 0 – 46 = –₹46

निष्कर्ष: सभी उत्पादन स्तरों पर फर्म को हानि हो रही है क्योंकि कीमत शून्य है।


अथवा / OR

हिन्दी: निम्न तालिका में दो फर्मों की पूर्ति सारणियाँ SS₁ और SS₂ दी गई हैं। बाजार पूर्ति सारणी का परिकलन कीजिए।

English: In the following table two supply schedules of firms are given: SS₁ and SS₂. Calculate the market supply schedule.

मूल्य (Price) फर्म-I पूर्ति (SS₁) फर्म-II पूर्ति (SS₂) बाजार पूर्ति (Market Supply)
7 7 7 14
8 26 2 28

हल / Solution:

बाजार पूर्ति = फर्म-I की पूर्ति + फर्म-II की पूर्ति

  • मूल्य 7 पर: 7 + 7 = 14
  • मूल्य 8 पर: 26 + 2 = 28

बाजार पूर्ति सारणी: मूल्य 7 पर 14 इकाइयाँ, मूल्य 8 पर 28 इकाइयाँ।


SECTION - D

निबंधात्मक प्रश्न / Essay Type Questions

प्रश्न: मुद्रा आपूर्ति नियंत्रण के लिए रिज़र्व बैंक द्वारा अपनाये जाने वाले नीतिगत उपकरणों का विश्लेषण कीजिए। [4]

Analyse the policy tools to control the money supply by the Reserve Bank.

उत्तर / Answer:

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) मुद्रा आपूर्ति को नियंत्रित करने के लिए निम्नलिखित नीतिगत उपकरणों का उपयोग करता है:

  1. बैंक दर (Bank Rate): यह वह दर है जिस पर RBI वाणिज्यिक बैंकों को ऋण देता है। बैंक दर बढ़ाने से बैंकों की उधारी महँगी हो जाती है, जिससे मुद्रा आपूर्ति कम होती है।
  2. नकद आरक्षित अनुपात (CRR): बैंकों को अपनी जमा राशि का एक निश्चित प्रतिशत RBI के पास रखना होता है। CRR बढ़ाने से बैंकों की उधार देने की क्षमता कम हो जाती है, जिससे मुद्रा आपूर्ति घटती है।
  3. वैधानिक तरलता अनुपात (SLR): बैंकों को अपनी जमा राशि का एक निश्चित भाग सरकारी प्रतिभूतियों में रखना होता है। SLR बढ़ाने से बैंकों के पास ऋण देने के लिए कम धन बचता है।
  4. खुले बाजार की क्रियाएँ (Open Market Operations): RBI सरकारी प्रतिभूतियों को खरीदकर या बेचकर मुद्रा आपूर्ति को नियंत्रित करता है। प्रतिभूतियाँ बेचने से बाजार से धन निकल जाता है और मुद्रा आपूर्ति कम होती है।
  5. रेपो दर और रिवर्स रेपो दर (Repo Rate & Reverse Repo Rate): रेपो दर वह दर है जिस पर RBI बैंकों को अल्पकालिक ऋण देता है। रेपो दर बढ़ाने से बैंकों की उधारी महँगी होती है, जिससे मुद्रा आपूर्ति कम होती है। रिवर्स रेपो दर बढ़ाने से बैंक RBI के पास अधिक धन जमा करते हैं, जिससे बाजार में धन कम होता है।

निष्कर्ष: ये उपकरण RBI को मुद्रा आपूर्ति को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करने और मुद्रास्फीति तथा आर्थिक स्थिरता बनाए रखने में मदद करते हैं।


अथवा / OR

प्रश्न: भारतीय अर्थव्यवस्था में डिजिटल सौदों की प्रगति पर अपना विश्लेषण प्रस्तुत कीजिए। [4]

Present your analysis on the progress of digital transactions in the Indian economy.

उत्तर / Answer:

भारतीय अर्थव्यवस्था में डिजिटल सौदों की प्रगति तेजी से हुई है, विशेषकर नवंबर 2016 में विमुद्रीकरण के बाद। इसके प्रमुख पहलू निम्नलिखित हैं:

  1. UPI (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) का विस्तार: UPI ने डिजिटल भुगतान को सरल और तेज़ बना दिया है। 2023-24 में UPI लेन-देन ₹200 लाख करोड़ से अधिक हो गया।
  2. डिजिटल भुगतान प्लेटफार्मों का विकास: Google Pay, PhonePe, Paytm जैसे ऐप्स ने छोटे व्यापारियों और ग्रामीण क्षेत्रों में भी डिजिटल भुगतान को लोकप्रिय बनाया है।
  3. सरकारी पहल: डिजिटल इंडिया अभियान, भीम ऐप, और आधार-आधारित भुगतान प्रणाली (AePS) ने डिजिटल सौदों को बढ़ावा दिया है।
  4. बढ़ती स्वीकार्यता: कोविड-19 महामारी के दौरान संपर्क रहित भुगतान की आवश्यकता ने डिजिटल लेन-देन को और बढ़ाया। अब छोटी दुकानों और ऑटो-रिक्शा में भी QR कोड स्कैन कर भुगतान आम हो गया है।
  5. चुनौतियाँ: डिजिटल साक्षरता की कमी, साइबर सुरक्षा के खतरे, और ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी की समस्या अभी भी बाधाएँ हैं।

निष्कर्ष: डिजिटल सौदों ने भारतीय अर्थव्यवस्था में पारदर्शिता, दक्षता और वित्तीय समावेशन को बढ़ाया है, लेकिन इसे और सर्वव्यापी बनाने के लिए बुनियादी ढाँचे और जागरूकता में सुधार आवश्यक है।

प्रश्न 8 (3 अंक)

बाजार माँग वक्र की व्युत्पत्ति को रेखाचित्र की सहायता से समझाइए।

Explain the derivation of market demand curve with the help of a diagram.

हल: बाजार माँग वक्र किसी वस्तु के लिए सभी उपभोक्ताओं की व्यक्तिगत माँगों का क्षैतिज योग होता है। इसे निम्न प्रकार समझा जा सकता है:

  1. मान लीजिए बाजार में दो उपभोक्ता A और B हैं।
  2. प्रत्येक उपभोक्ता का अपना व्यक्तिगत माँग वक्र होता है (जैसे DA और DB)।
  3. प्रत्येक कीमत पर, दोनों उपभोक्ताओं द्वारा माँगी गई मात्राओं को जोड़ा जाता है।
  4. इन योगों को एक नए ग्राफ पर अंकित करने पर बाजार माँग वक्र (DM) प्राप्त होता है।

रेखाचित्र: (एक ग्राफ बनाएं जिसमें X-अक्ष पर मात्रा और Y-अक्ष पर कीमत हो। दो व्यक्तिगत माँग वक्र DA और DB दिखाएं, और उनके क्षैतिज योग से बना बाजार माँग वक्र DM दिखाएं।)


प्रश्न 9 (3 अंक)

बाजार माँग से क्या आशय है? रेखाचित्र की सहायता से बाजार माँग वक्र की व्युत्पत्ति समझाइए।

What is meant by market demand? Explain the derivation of market demand curve with the help of a diagram.

हल: बाजार माँग से आशय किसी वस्तु की उस कुल मात्रा से है जिसे सभी उपभोक्ता एक निश्चित कीमत पर खरीदने को तैयार हैं। बाजार माँग वक्र सभी व्यक्तिगत माँग वक्रों का क्षैतिज योग होता है।

व्युत्पत्ति: मान लीजिए बाजार में दो उपभोक्ता हैं। प्रत्येक कीमत पर, दोनों की माँगी गई मात्राओं को जोड़कर बाजार माँग प्राप्त की जाती है। इसे रेखाचित्र में दर्शाया जा सकता है।


अथवा (प्रश्न 9 का विकल्प)

माँग वक्र में शिफ्ट और माँग वक्र की दिशा में गति को रेखाचित्र से स्पष्ट कीजिए। माँग वक्र शिफ्ट क्यों होता है?

Clarify shift in the demand curve and movement along the demand curve with a diagram. Why does the demand curve shift?

हल:

माँग वक्र की दिशा में गति (Movement along the demand curve): यह तब होता है जब वस्तु की कीमत में परिवर्तन के कारण माँगी गई मात्रा में परिवर्तन होता है, जबकि अन्य कारक स्थिर रहते हैं। इसे उसी माँग वक्र पर एक बिंदु से दूसरे बिंदु पर जाकर दर्शाया जाता है।

माँग वक्र में शिफ्ट (Shift in demand curve): यह तब होता है जब कीमत के अलावा अन्य कारकों (जैसे आय, स्वाद, संबंधित वस्तुओं की कीमत) में परिवर्तन के कारण प्रत्येक कीमत पर माँग बदल जाती है। इससे पूरा माँग वक्र बाएँ (कमी) या दाएँ (वृद्धि) खिसक जाता है।

माँग वक्र शिफ्ट होने के कारण:

  • उपभोक्ता की आय में परिवर्तन
  • उपभोक्ता के स्वाद और पसंद में बदलाव
  • संबंधित वस्तुओं (स्थानापन्न या पूरक) की कीमतों में परिवर्तन
  • भविष्य की कीमतों के बारे में अपेक्षाएँ
  • जनसंख्या में परिवर्तन

प्रश्न 10 (3 अंक)

निम्नलिखित सारणी में औसत लागत और सीमान्त लागत की गणना कीजिए:

Calculate Average Cost and Marginal Cost in the following table:

उत्पादन (इकाइयाँ)
Output (Units)
कुल लागत (रु.)
Total Cost (₹)
औसत लागत (रु.)
Average Cost (₹)
सीमान्त लागत (रु.)
Marginal Cost (₹)
1 60 60
2 110 55 50
3 150 50 40
4 180 45 30
5 200 40 20

गणना विधि:

  • औसत लागत (AC) = कुल लागत / उत्पादन की इकाइयाँ
  • सीमान्त लागत (MC) = कुल लागत में परिवर्तन / उत्पादन में परिवर्तन

उदाहरण: जब उत्पादन 1 से 2 होता है, तो MC = (110 - 60) / (2 - 1) = 50 रु.


अथवा (प्रश्न 10 का विकल्प)

निम्नलिखित सारणी में कुल लागत और औसत परिवर्ती लागत की गणना कीजिए (रुपयों में):

Calculate the total cost and average variable cost in the following table (In Rupee):

उत्पादन (इकाइयाँ)
Output (Units)
कुल परिवर्ती लागत
Total Variable Cost
कुल लागत
Total Cost
औसत परिवर्ती लागत
Average Variable Cost
1
2
3
4
5

नोट: इस सारणी में मान उपलब्ध नहीं हैं। सामान्यतः:

  • कुल लागत (TC) = कुल स्थिर लागत (TFC) + कुल परिवर्ती लागत (TVC)
  • औसत परिवर्ती लागत (AVC) = कुल परिवर्ती लागत (TVC) / उत्पादन की इकाइयाँ

यदि TFC ज्ञात हो, तो TC = TFC + TVC से ज्ञात किया जा सकता है।

— Economics (SS-10-2025) —