RBSE Class 12th 2026 HINDI-SS-01 Previous Year Papers

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Paper details

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Board RBSE
Class Class 12th
Exam year 2026
Subject HINDI-SS-01
Resource type Previous Year Papers
Category RBSE Previous Year Question Papers
Website RBSE Solution

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RBSE Class 12th 2026 HINDI-SS-01

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Rajasthan Board Class 12th HINDI-SS-01 2026 solved Previous Year Question Papers

उच्च माध्यमिक परीक्षा, 2026

SENIOR SECONDARY EXAMINATION, 2026

हिंदी (अनिवार्य)

समय : 3 घण्टे [5 मिनट]    पूर्णांक : 80

No. of Questions – 20    ~SS-0I-Hindi(C)
No. of Printed Pages – 1


परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :

  1. परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न-पत्र पर नामांक अनिवार्यतः लिखें।
  2. सभी प्रश्न हल करना अनिवार्य हैं।
  3. प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें।
  4. जिन प्रश्नों में आंतरिक खंड हैं, उन सभी के उत्तर एक साथ ही लिखें।
  5. प्रश्न का उत्तर लिखने से पूर्व प्रश्न का क्रमांक अवश्य लिखें।

७&७-0|-]0| (C)

खण्ड - अ

निम्नलिखित बहुविकल्पीय प्रश्नों के उत्तर अपनी उत्तर-पुस्तिका में लिखिए। (1×2=2)

  1. चूरणवाले भगत जी चूरण बेचकर एक दिन में अधिकतम कितने पैसे कमाते हैं?

    • अ) चार आने
    • ब) छह आने
    • स) आठ आने
    • द) बारह आने

    सही उत्तर: द) बारह आने

    व्याख्या: पाठ के अनुसार, चूरणवाले भगत जी चूरण बेचकर एक दिन में अधिकतम बारह आने कमाते थे।

  2. पहलवान की ढोल पाठ में 'उठा पटक दे' के अर्थ को प्रकट करने वाली ढोल की ध्वनि इनमें से कौन-सी थी?

    • अ) आओ ढाकु-ढिना
    • ब) चट्-गिड़-धा
    • स) धी-गिड़-गिड़
    • द) चटाकू-चट-धा

    सही उत्तर: द) चटाकू-चट-धा

    व्याख्या: पाठ में 'उठा पटक दे' के अर्थ को प्रकट करने वाली ढोल की ध्वनि 'चटाकू-चट-धा' थी, जो पहलवान के दांव को दर्शाती है।

  3. अंबेडकर के विख्यात भाषण 'एनीहिलेशन ऑफ कास्ट' का हिंदी रूपांतर किस शीर्षक से किया गया?

    • अ) जाति-भेद की उच्छेद
    • ब) जाति-भेद का परिच्छेद
    • स) जाति-भेद का विच्छेद
    • द) जाति-भेद का परिशिष्ट

    सही उत्तर: अ) जाति-भेद की उच्छेद

    व्याख्या: डॉ. भीमराव अंबेडकर के प्रसिद्ध भाषण 'एनीहिलेशन ऑफ कास्ट' का हिंदी रूपांतर 'जाति-भेद की उच्छेद' शीर्षक से किया गया है।

  4. हरिवंशराय बच्चन का काव्य-दर्शन है?

    • अ) छायावाद
    • ब) प्रगतिवाद
    • स) हालावाद
    • द) प्रयोगवाद

    सही उत्तर: स) हालावाद

    व्याख्या: हरिवंशराय बच्चन का काव्य-दर्शन 'हालावाद' है, जो मदिरा (हाला) के प्रतीक के माध्यम से जीवन के सुख-दुख और रहस्य को अभिव्यक्त करता है।

प्रश्न 5: निराला की 'बादल' कविता किस काव्य खंड में प्रकाशित है?

  • अ) अणिमा
  • ब) परिमल
  • स) अनामिका
  • द) बेला
उत्तर: स) अनामिका
व्याख्या: सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' की 'बादल' कविता उनके काव्य संग्रह 'अनामिका' में प्रकाशित है। यह कविता प्रकृति और क्रांति के प्रतीक बादल का वर्णन करती है।

प्रश्न 6: “अर्थ गति गई कपि नहीं आयेउ” – तुलसीदास ने इस पंक्ति में 'कपि' कहकर किसे संबोधित किया है?

  • अ) बालि
  • ब) सुग्रीव
  • स) अंगद
  • द) हनुमान
उत्तर: द) हनुमान
व्याख्या: तुलसीदास रचित 'रामचरितमानस' के सुंदरकांड में यह पंक्ति आती है, जहाँ 'कपि' शब्द से हनुमान जी को संबोधित किया गया है। इसका अर्थ है कि हनुमान जी अर्थ (लक्ष्मण) को लेकर गए थे, परंतु अभी तक वापस नहीं आए।

प्रश्न 7: 'सिल्वर बेंडिंग' कहानी में बाल-ज्योति किसे कहा गया है?

  • अ) यशोधर पंत को
  • ब) भूषण को
  • स) किशनदा को
  • द) गिरीश को
उत्तर: स) किशनदा को
व्याख्या: 'सिल्वर बेंडिंग' कहानी में बाल-ज्योति किशनदा को कहा गया है। यह कहानी बाल-ज्योति नामक एक पात्र के माध्यम से बचपन और सामाजिक संबंधों को दर्शाती है।

प्रश्न 8: 'ईदगाह' कहानी के नायक पर सर्वाधिक प्रभाव किसका पड़ा?

  • अ) रणनवर गुरुजी का
  • ब) मंत्री गुरुजी का
  • स) वसंत-पाटिल का
  • द) सौंदलगेंकर गुरुजी का
उत्तर: द) सौंदलगेंकर गुरुजी का
व्याख्या: प्रेमचंद की कहानी 'ईदगाह' में नायक हामिद पर सर्वाधिक प्रभाव सौंदलगेंकर गुरुजी का पड़ता है, जो उसे नैतिकता और सहानुभूति का पाठ पढ़ाते हैं।

प्रश्न 9: जनसंचार के किस माध्यम में सर्वाधिक ज्ञानेन्द्रियाँ सक्रिय रहती हैं?

  • अ) समाचार पत्र में
  • ब) रेडियो में
  • स) इंटरनेट में
  • द) पत्रिकाओं में
उत्तर: स) इंटरनेट में
व्याख्या: इंटरनेट में दृष्टि (देखना), श्रवण (सुनना), और स्पर्श (टाइप करना/क्लिक करना) जैसी अनेक ज्ञानेन्द्रियाँ सक्रिय रहती हैं, जबकि समाचार पत्र और पत्रिकाओं में केवल दृष्टि, और रेडियो में केवल श्रवण इंद्रिय सक्रिय होती है।

प्रश्न 4 (भाग 1)

भारत में वेबसाइट पर विशेष पत्रकारिता करने वाले को क्या कहा जाता है?

  • अ) qe sles
  • ई) इंडियाइंफोलाइन
  • स) सीफी
  • द) रीडिंफ

उत्तर: इस प्रश्न का सही विकल्प स्पष्ट नहीं है। संभवतः 'इंडियाइंफोलाइन' (ई) सही हो सकता है, लेकिन पाठ में त्रुटि है।

प्रश्न 5

इनमें से पश्चिमी हिंदी की बोली है:

  • अ) मगही
  • ब) बुंदेली
  • स) बघेली
  • द) मेवाती

उत्तर: बुंदेली (ब) पश्चिमी हिंदी की बोली है। मगही पूर्वी हिंदी, बघेली पूर्वी हिंदी, और मेवाती राजस्थानी की बोली है।

प्रश्न xii

इनमें से किस भाषा की लिपि देवनागरी है?

  • अ) नेपाली
  • से) पंजाबी
  • द) अंग्रेजी

उत्तर: नेपाली (अ) भाषा की लिपि देवनागरी है। पंजाबी गुरुमुखी और अंग्रेजी रोमन लिपि में लिखी जाती है।

2. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

  1. शब्द शक्तियाँ ______ प्रकार की होती हैं।

    उत्तर: तीन (अभिधा, लक्षणा, व्यंजना)

  2. "टेन खिल गयी" वाक्य में ______ शब्द शक्ति है।

    उत्तर: लक्षणा (यहाँ 'टेन' का अर्थ 'टेनिस' नहीं, बल्कि 'खेल' या 'प्रतियोगिता' है)

  3. "नाक का मोती अधर की कांति से । बीज दाड़िम का समझकर भ्रांति से" में ______ अलंकार है।

    उत्तर: भ्रांतिमान अलंकार (एक वस्तु को दूसरी समझने की भ्रांति)

  4. जब काव्य में प्रयुक्त एक ही शब्द के भिन्न-भिन्न स्थानों में भिन्न-भिन्न अर्थ निकले वहाँ पर ______ अलंकार होता है।

    उत्तर: श्लेष अलंकार

  5. "अनुज्ञेय" शब्द के लिए अंग्रेजी पारिभाषिक शब्द ______ है।

    उत्तर: Permissible

  6. TRUST शब्द के लिए उपयुक्त हिंदी पारिभाषिक शब्द ______ है।

    उत्तर: न्यास (या ट्रस्ट)

निम्नलिखित अपठित पद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर अपनी उत्तर-पुस्तिका में लिखिए।

हे मातृभूमि! हमको वर दो, पढ़-लिखकर हम गुनना सीखें।
बोले न बुरा, देखे न बुरा, कुछ भी बुरा न सुनना सीखें।

हम खेल-खेल में पढ़ते जाएँ, पढ़-लिखकर नित बढ़ते जाएँ।
हम हारे नहीं, हम झुके नहीं, गिरी-शिखरों पर चढ़ते जाएँ।
विपदा से कभी न घबराएँ, सत्पथ को कभी न छोड़े हम।
बाधाओं पर बाधा आएँ, बाधाओं का रुख मोड़ें हम।

क्यों बने फ़कीर लकीरों के, हम नए सपने बुनना सीखें।

हे मातृभूमि! हमको वर दो, पढ़-लिखकर हम गुनना सीखें।

  1. पद्यांश में किससे नहीं घबराने की बात की जा रही है?

    • अ) आँधी
    • ब) प्रशंसा
    • स) विघ्नों से ✓ सही उत्तर
    • द) निंदा

    व्याख्या: पद्यांश में कहा गया है "विपदा से कभी न घबराएँ" और "बाधाओं पर बाधा आएँ, बाधाओं का रुख मोड़ें हम", जो विघ्नों या बाधाओं से न घबराने की सीख देता है।

  2. पद्यांश में प्रयुक्त 'गुनना' शब्द का अर्थ है:

    • अ) गिनना
    • ब) सफल होना
    • स) मनन करना ✓ सही उत्तर
    • द) व्यवसाय करना

    व्याख्या: 'गुनना' का अर्थ है मनन करना, चिंतन करना या गुणों को आत्मसात करना। यहाँ कवि पढ़-लिखकर गुणों का मनन करने की बात कर रहे हैं।

  3. इनमें से 'गिरी' शब्द का पर्यायवाची है:

    • अ) पत्थर
    • ब) अचल ✓ सही उत्तर
    • स) सरिता
    • द) हिमानी

    व्याख्या: 'गिरी' का अर्थ पर्वत होता है। 'अचल' पर्वत का पर्यायवाची शब्द है, क्योंकि पर्वत अचल (न हिलने वाला) होता है।

  4. पद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए।

    उत्तर: पद्यांश का उचित शीर्षक "मातृभूमि से प्रार्थना" या "सीखने की प्रेरणा" हो सकता है।

  5. "क्यों बने फ़कीर लकीरों के" पंक्ति में कवि क्या कहना चाहता है?

    उत्तर: इस पंक्ति में कवि कहना चाहता है कि हमें पुरानी रूढ़ियों और परंपराओं के गुलाम नहीं बनना चाहिए। 'फ़कीर लकीरों के' का अर्थ है उन लकीरों (रूढ़ियों) का भिखारी बनना। कवि नए सपने देखने और नई राहें बनाने की प्रेरणा दे रहे हैं।

  6. पद्यांश में कवि क्या-क्या न करने की सीख दे रहा है?

    उत्तर: पद्यांश में कवि निम्नलिखित बातें न करने की सीख दे रहा है:

    • बुरा न बोलना
    • बुरा न देखना
    • बुरा न सुनना
    • हार न मानना
    • झुकना नहीं
    • विपदा से न घबराना
    • सत्पथ (सही रास्ता) न छोड़ना

4. निम्नलिखित अपठित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर अपनी उत्तर-पुस्तिका में लिखिए।

जीवित रहना एक कर्म है, जो जीवित है वह कर्म करेगा ही। कर्म रहित स्थिति मृत्यु है। महत्त्वपूर्ण बात तो यह है कि हर मनुष्य को अपने स्वभाव और योग्यता के अनुसार अथवा यों कहो कि स्वधर्मानुसार कर्म का चयन करने में स्वतंत्रता होनी चाहिए। जो कर्म मनुष्य की योग्यता और स्वभाव के अनुकूल होगा, वही उसके लिए शुभ भी होगा। उसी कर्म को पवित्र निःस्वार्थ भाव से करना अपने साथ मित्रता करना है। जो अपने से मित्रता करता है वह दूसरों को भी प्रिय हो जाता है।

  1. कर्म रहित स्थिति है

    • अ) जीवन की
    • ब) मृत्यु की
    • स) कर्मनिष्ठा की
    • द) श्रमनिष्ठा की

    व्याख्या: गद्यांश में स्पष्ट कहा गया है, "कर्म रहित स्थिति मृत्यु है।" अतः सही विकल्प 'मृत्यु की' है।

  2. गद्यांश में प्रयुक्त 'स्वधर्मानुसार' शब्द में संधि है

    • अ) अयादि संधि
    • ब) गुण संधि
    • स) वृद्धि संधि
    • द) यण् संधि

    व्याख्या: 'स्वधर्मानुसार' का संधि-विच्छेद 'स्वधर्म + अनुसार' है। यहाँ 'अ' + 'अ' = 'आ' (यण् संधि का नियम) हुआ है। अतः सही विकल्प 'यण् संधि' है।

  3. कौन-सा मनुष्य दूसरों को भी प्रिय हो जाता है?

    • अ) जो निःस्वार्थ भाव से व्यवहार नहीं करता है
    • ब) जिसका स्वभाव सहृदयता के प्रतिकूल हो
    • स) जो स्वयं से मित्रता करता है
    • द) जिसमें योग्यता का दर्प हो

    व्याख्या: गद्यांश के अंतिम वाक्य के अनुसार, "जो अपने से मित्रता करता है वह दूसरों को भी प्रिय हो जाता है।" अतः सही विकल्प 'जो स्वयं से मित्रता करता है' है।

(iv) गद्यांश का उपयुक्त शीर्षक लिखिए।

उत्तर: गद्यांश का उपयुक्त शीर्षक "मनुष्य की स्वतंत्रता और मित्रता" हो सकता है।

(v) मनुष्य को क्या करने की स्वतंत्रता होनी चाहिए?

उत्तर: मनुष्य को अपने विवेक और नैतिकता के अनुसार कार्य करने की स्वतंत्रता होनी चाहिए, जिससे वह अपने कर्तव्यों का पालन कर सके और समाज में सकारात्मक योगदान दे सके।

(vi) मनुष्य की स्वयं से मित्रता निभाने की क्या कसौटी है?

उत्तर: मनुष्य की स्वयं से मित्रता निभाने की कसौटी यह है कि वह अपने विचारों और कार्यों में ईमानदार रहे, आत्म-निरीक्षण करे और अपनी कमजोरियों को सुधारने का प्रयास करे।

5. निम्नलिखित अतिलघूत्तरात्मक प्रश्नों के उत्तर 20 शब्दों में लिखिए (1×6=6)

(i) बच्चों को बालकनी के खतरनाक किनारों से गिरने से कौन बचाता है?

उत्तर: माता-पिता या अभिभावक बच्चों को बालकनी के खतरनाक किनारों से गिरने से बचाते हैं।

(ii) 'कैमरे में बंद अपाहिज' कविता में साक्षात्कारकर्ता कार्यक्रम को रोचक बनाने के लिए क्या करना चाहता है?

उत्तर: साक्षात्कारकर्ता कार्यक्रम को रोचक बनाने के लिए अपाहिज से भावनात्मक और संवेदनशील सवाल पूछना चाहता है।

(iii) बाज़ार का जादू किस राह से काम करता है?

उत्तर: बाज़ार का जादू विज्ञापन और आकर्षक प्रस्तुति के माध्यम से उपभोक्ताओं को लुभाकर काम करता है।

(iv) 'पहलवान की ढोलक' पाठ में नए राजकुमार के राज्य प्रबंधन अपने हाथ में लेने पर अखाड़े का स्थान किस खेल ने ले लिया?

उत्तर: नए राजकुमार के राज्य प्रबंधन संभालने पर अखाड़े का स्थान क्रिकेट ने ले लिया।

(v) लड़कों के मन में कौन-से गुरुजी की दहशत बैठी हुई थी?

उत्तर: लड़कों के मन में कड़ी अनुशासन वाले गुरुजी की दहशत बैठी हुई थी।

(vi) यशोधर बाबू की पत्नी के चचेरे भाई का क्या नाम था?

उत्तर: यशोधर बाबू की पत्नी के चचेरे भाई का नाम 'रमेश' था।

खंड-4: निम्नलिखित लघूत्तरात्मक प्रश्नों के उत्तर 40 शब्दों में दीजिए (2×7=14)

6. जनसंचार के मुद्रित माध्यम का संक्षिप्त विवरण लिखिए।

उत्तर: जनसंचार के मुद्रित माध्यम में समाचार पत्र, पत्रिकाएँ, पुस्तकें आदि शामिल हैं। ये माध्यम सूचना, शिक्षा और मनोरंजन प्रदान करते हैं। मुद्रित माध्यम स्थायी होते हैं और पाठकों को गहन विश्लेषण का अवसर देते हैं। ये जनता तक विचारों और समाचारों को पहुँचाने का प्रभावी साधन हैं।

7. बीट रिपोर्टिंग क्या है? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: बीट रिपोर्टिंग पत्रकारिता की एक शैली है जिसमें पत्रकार किसी विशिष्ट क्षेत्र (जैसे शिक्षा, अपराध, राजनीति) की नियमित रूप से रिपोर्टिंग करता है। यह गहन और विशेषज्ञ रिपोर्टिंग सुनिश्चित करता है, जिससे पाठकों को विश्वसनीय और विस्तृत जानकारी मिलती है।

8. रेडियो नाटक के बारे में संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।

उत्तर: रेडियो नाटक एक श्रव्य माध्यम है जो ध्वनि प्रभाव, संवाद और संगीत के माध्यम से कहानी प्रस्तुत करता है। इसमें दृश्य तत्व नहीं होते, इसलिए श्रोता अपनी कल्पना से दृश्यों का निर्माण करते हैं। रेडियो नाटक मनोरंजन और जागरूकता फैलाने का प्रभावी साधन है।

खण्ड – स : दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

9. गंगा पहलवान ने अपनी मृत्यु के संबंध में क्या कहा था?

उत्तर: गंगा पहलवान ने अपनी मृत्यु के संबंध में कहा था कि वह कुश्ती के अखाड़े में ही मरना चाहता है। वह चाहता था कि उसकी मृत्यु कुश्ती लड़ते हुए या अखाड़े में ही हो, न कि बीमारी या बुढ़ापे से घर पर।

10. “देख आईने में चाँद उतर आया है।” पंक्ति का प्रतीकार्थ लिखिए।

उत्तर: इस पंक्ति का प्रतीकार्थ है कि आईने में देखने पर ऐसा प्रतीत होता है मानो चाँद (सुंदर चेहरा) उसमें उतर आया हो। यह किसी अत्यंत सुंदर स्त्री के मुखड़े की ओर संकेत करता है, जो चाँद के समान चमकीला और आकर्षक है।

11. कहानी के अनुसार ईख की अच्छी कीमत कब मिल जाती है?

उत्तर: कहानी के अनुसार, ईख की अच्छी कीमत तब मिल जाती है जब बाजार में ईख की कमी होती है या जब त्योहारों के समय मांग बढ़ जाती है। किसान को सही समय पर ईख बेचने से अच्छा लाभ मिलता है।

12. यशोधर बाबू को उनके बेटे ने क्या गिफ्ट दिया और क्यों?

उत्तर: यशोधर बाबू को उनके बेटे ने एक रेडियो गिफ्ट दिया था। उसने यह गिफ्ट इसलिए दिया ताकि यशोधर बाबू अकेलेपन में रेडियो सुनकर अपना समय बिता सकें और उन्हें मनोरंजन मिल सके।

निम्नलिखित दीर्घ उत्तरीय प्रश्नों के उत्तर 60-80 शब्दों में दीजिए।

13. 'कुँवर नारायण' का साहित्यिक परिचय लिखिए।

उत्तर: कुँवर नारायण हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध कवि, आलोचक और कहानीकार हैं। उनका जन्म 1927 ई. में उत्तर प्रदेश के फैजाबाद में हुआ। वे नई कविता के महत्वपूर्ण हस्ताक्षर हैं। उनकी प्रमुख रचनाएँ हैं – 'चक्रव्यूह', 'आत्मजयी', 'वाजश्रवा के बहाने' आदि। उनकी कविताओं में मानवीय संवेदना, दार्शनिकता और आधुनिक जीवन की जटिलताओं का चित्रण मिलता है।

अथवा

'हजारी प्रसाद द्विवेदी' का साहित्यिक परिचय लिखिए।

उत्तर: हजारी प्रसाद द्विवेदी हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध निबंधकार, आलोचक और उपन्यासकार थे। उनका जन्म 1907 ई. में बलिया (उत्तर प्रदेश) में हुआ। वे हिंदी साहित्य के इतिहास लेखन में अग्रणी माने जाते हैं। उनकी प्रमुख रचनाएँ हैं – 'कबीर', 'साहित्य का मर्म', 'बाणभट्ट की आत्मकथा', 'चारु चंद्रलेख' आदि। उनकी शैली में गंभीरता, विद्वता और सरसता का अद्भुत संगम है।

14. 'छोटा मेरा खेत' कविता काव्य रचना और कृषि कर्म की प्रभावी तुलना करती है। कथन की समीक्षा कीजिए।

उत्तर: 'छोटा मेरा खेत' कविता में कवि ने काव्य रचना की तुलना कृषि कर्म से की है। जिस प्रकार किसान अपने खेत में बीज बोता है, उसे सींचता है और फिर फसल काटता है, उसी प्रकार कवि अपने मन के खेत (कल्पना) में शब्द रूपी बीज बोता है, भावनाओं से सींचता है और कविता रूपी फसल काटता है। यह तुलना अत्यंत प्रभावी है क्योंकि दोनों में ही धैर्य, परिश्रम और सृजनात्मकता की आवश्यकता होती है।

अथवा

कविता में व्यक्त प्राकृतिक सौंदर्य की विवेचना कीजिए।

उत्तर: प्रस्तुत कविता में प्राकृतिक सौंदर्य का अत्यंत सजीव और मनोरम चित्रण किया गया है। कवि ने खेत, हरियाली, फूल, पत्तियाँ, पक्षियों की चहचहाहट और बहती हवा का वर्णन किया है। प्रकृति के विभिन्न रूपों – सुबह की लालिमा, शाम की शीतलता, बादलों की छटा – को बड़ी कुशलता से उकेरा गया है। यह चित्रण पाठक के मन में प्रकृति के प्रति प्रेम और आकर्षण उत्पन्न करता है।

15. गाँव पर लोक मान्यताएँ हावी रहती हैं। 'काले मेघा पानी दे' कहानी के आलोक में कथन की समीक्षा कीजिए।

उत्तर: 'काले मेघा पानी दे' कहानी में गाँव के जीवन पर लोक मान्यताओं का गहरा प्रभाव दिखाया गया है। किसान वर्षा के लिए ईश्वर से प्रार्थना करते हैं, इंद्र देवता को मनाने के लिए अनुष्ठान करते हैं और विभिन्न लोक देवताओं पर विश्वास करते हैं। वे मानते हैं कि यदि उनके कर्म शुद्ध होंगे तो वर्षा होगी। यह दर्शाता है कि गाँव में वैज्ञानिक दृष्टिकोण के अभाव में लोक मान्यताएँ और अंधविश्वास हावी रहते हैं, जो कभी-कभी लाभदायक तो कभी हानिकारक सिद्ध होते हैं।

अथवा

अंबेडकर की कल्पना के आदर्श समाज का स्वरूप स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: डॉ. भीमराव अंबेडकर ने एक ऐसे आदर्श समाज की कल्पना की थी जो समानता, स्वतंत्रता और भाईचारे पर आधारित हो। उनके अनुसार आदर्श समाज में जाति-पाँति, ऊँच-नीच का भेदभाव नहीं होगा। सभी को शिक्षा, रोजगार और सम्मान के समान अवसर मिलेंगे। महिलाओं को पुरुषों के समान अधिकार प्राप्त होंगे। यह समाज लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित होगा जहाँ हर व्यक्ति को अपने विचार व्यक्त करने की स्वतंत्रता होगी और सामाजिक न्याय सुनिश्चित किया जाएगा।

— S-01-Hindi (C) —

16. “सिल्वर वेडिंग” पाठ पीढ़ी-अंतराल की समस्याओं का ज्वलंत चित्र प्रस्तुत करता है। उक्त कथन की समीक्षा कीजिए।

यह कथन पूर्णतः सत्य है। “सिल्वर वेडिंग” पाठ में लेखिका मन्नू भंडारी ने पीढ़ी-अंतराल (Generation Gap) की समस्या को बड़े ही मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया है। पाठ में माँ और बेटी के बीच के मतभेदों को दर्शाया गया है। माँ पुरानी परंपराओं और मूल्यों में विश्वास करती है, जबकि बेटी आधुनिक विचारधारा की अनुयायी है। यह अंतर उनके व्यवहार, सोच और जीवनशैली में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। लेखिका ने इस संवादहीनता और अलगाव को बड़े ही ज्वलंत चित्रण के माध्यम से प्रस्तुत किया है, जो पाठक को सोचने पर मजबूर कर देता है।

अथवा

मुअनजो-दड़ो सभ्यता की विशेषताओं का चित्रण कीजिए।

मुअनजो-दड़ो सभ्यता (सिंधु घाटी सभ्यता) की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

  • नगर नियोजन: यह सभ्यता अपने सुनियोजित नगरों के लिए प्रसिद्ध थी। नगरों की सड़कें सीधी और एक-दूसरे को समकोण पर काटती थीं।
  • जल निकासी व्यवस्था: यहाँ की जल निकासी व्यवस्था अत्यंत उन्नत थी। हर घर में स्नानागार और शौचालय होते थे, जो मुख्य नालियों से जुड़े होते थे।
  • विशाल स्नानागार: मुअनजो-दड़ो में एक विशाल स्नानागार (ग्रेट बाथ) मिला है, जो धार्मिक अनुष्ठानों के लिए प्रयोग किया जाता था।
  • कृषि और व्यापार: यहाँ के लोग कृषि (गेहूँ, जौ, कपास) और व्यापार (मेसोपोटामिया से) में संलग्न थे।
  • मोहरें और लिपि: यहाँ से अनेक मोहरें मिली हैं, जिन पर पशुओं और देवी-देवताओं के चित्र उकेरे गए हैं। उनकी लिपि अभी तक पूरी तरह पढ़ी नहीं जा सकी है।

17. निम्नलिखित गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए:

“जब उसने कोयले की मोटी रेखा से अपने साम्राज्य की सीमा निश्चित कर चौके में प्रतिष्ठित हुई, तब मैंने समझ लिया कि इस सेवक का साथ टेढ़ी खीर है। अपने भोजन के संबंध में बीतराग होने पर भी मैं पाक-विद्या के लिए परिवार में प्रख्यात हूँ और कोई भी पाक-कुशल दूसरे के काम में नुक्ताचीनी बिना किए रह नहीं सकता। पर जब छूत-पांक पर प्राण देनेवाले व्यक्तियों का, बात-बात पर भूखा मरने का स्मरण हो आया और भक्तिन की शंकाकुल दृष्टि में छिपे हुए निषेध का अनुभव किया, तब कोयले की रेखा मेरे लिए लक्ष्मण के धनुष से खींची हुई रेखा के समान दुर्लघ्य हो गई।”

संदर्भ: प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक के ‘भक्तिन’ नामक पाठ से लिया गया है, जिसकी लेखिका महादेवी वर्मा हैं।

प्रसंग: लेखिका अपनी सेविका भक्तिन के स्वभाव और उसके द्वारा रसोई में बनाई गई सीमा रेखा का वर्णन कर रही हैं। भक्तिन ने कोयले से एक रेखा खींचकर अपना अधिकार क्षेत्र निर्धारित कर लिया था, जिसे लेखिका ने चुनौती देने का विचार किया, परंतु बाद में उसकी भावनाओं का सम्मान करते हुए उस रेखा को लाँघना उचित नहीं समझा।

व्याख्या: लेखिका कहती हैं कि जब भक्तिन ने कोयले की मोटी रेखा खींचकर रसोई में अपने साम्राज्य की सीमा निश्चित कर ली और उसी में प्रतिष्ठित हो गई, तब मैंने समझ लिया कि इस सेवक का साथ देना बहुत कठिन है। लेखिका स्वयं पाक-कला में निपुण हैं और भोजन के प्रति उदासीन होने पर भी वे दूसरे के काम में दोष निकालने से बच नहीं पातीं। लेकिन जब उन्हें छूत-पांक (शुद्धता-अशुद्धता) पर प्राण देने वाले लोगों की याद आई और भक्तिन की शंकित दृष्टि में छिपे निषेध का अनुभव हुआ, तब वह कोयले की रेखा उनके लिए लक्ष्मण रेखा के समान दुर्लंघ्य हो गई। इस प्रकार लेखिका ने भक्तिन की भावनाओं का सम्मान किया और उसकी सीमा का उल्लंघन नहीं किया।

अथवा

“इन बातों को आज पचास से ज़्यादा बरस होने को आए पर ज्यों-की-त्यों मन पर दर्ज हैं। कभी-कभी कैसे-कैसे संदर्भों में ये बातें मन को कचोट जाती हैं, हम आज देश के लिए करते क्या हैं? माँगें हर क्षेत्र में बड़ी-बड़ी हैं—पर त्याग का कहीं नाम-निशान नहीं हैं। अपना स्वार्थ आज एकमात्र लक्ष्य रह गया है। हम चटखाँरे लेकर इसके या उसके भ्रष्टाचार की बातें करते हैं पर क्यों कभी हमने जाँचा है कि अपने स्तर पर, अपने दायरे में हम उसी भ्रष्टाचार का अंग तो नहीं बन रहे हैं? काले बादलों के दल के दल उमड़ते हैं, पानी-बरसात होती है, पर गगरी फूटी की फूटी रह जाती है, बैल पियासे के पियासे रहे जाते हैं। आखिर कब बदलेगी यह स्थिति?”

संदर्भ: प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक के ‘जूझ’ नामक पाठ से लिया गया है, जिसके लेखक आनंद यादव हैं।

प्रसंग: लेखक अपने बचपन की घटनाओं को याद करते हुए वर्तमान समाज की स्थिति पर टिप्पणी कर रहे हैं। वे आज के लोगों के स्वार्थ और त्याग की कमी पर चिंता व्यक्त कर रहे हैं।

व्याख्या: लेखक कहते हैं कि इन बातों को आज पचास से अधिक वर्ष बीत जाने पर भी वे मन पर उसी तरह अंकित हैं। कभी-कभी विभिन्न संदर्भों में ये बातें मन को व्यथित कर देती हैं। वे प्रश्न करते हैं कि हम आज देश के लिए क्या कर रहे हैं? हर क्षेत्र में बड़ी-बड़ी माँगें हैं, परंतु त्याग का कहीं नामोनिशान नहीं है। आज केवल अपना स्वार्थ ही एकमात्र लक्ष्य रह गया है। हम दूसरों के भ्रष्टाचार पर हँसते हैं और चर्चा करते हैं, परंतु कभी यह नहीं जाँचते कि कहीं हम स्वयं अपने स्तर पर उसी भ्रष्टाचार का हिस्सा तो नहीं बन रहे हैं। लेखक ने लोकोक्ति के माध्यम से कहा है कि जैसे काले बादल उमड़कर बरसते हैं, परंतु फूटी गगरी में पानी नहीं ठहरता और बैल प्यासे ही रह जाते हैं, उसी प्रकार हमारे प्रयासों का कोई सार्थक परिणाम नहीं निकलता। अंत में वे प्रश्न करते हैं कि आखिर यह स्थिति कब बदलेगी?

8. निम्नलिखित पद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए।

पहला पद्यांश:

अंगना-अंग से लिपटे भी
आतंक अंके पर काँप रहे हैं।
धनी, वज्-गर्जन से बादल!
ART मुख ढाँप रहे हैं।
जीर्ण बाहु, हे शीर्ण शरीर;
तुझे बुलाता कृषक अधीर,
ऐ विप्लव के वीर!
चूस लिया है उसका सार,
हाड़-मात्र ही है आधार,
ऐ जीवन के पारावार!

सप्रसंग व्याख्या:

संदर्भ: प्रस्तुत पद्यांश हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध कवि सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' द्वारा रचित कविता 'बादल राग' से लिया गया है। इसमें कवि ने बादलों को संबोधित करते हुए किसानों की दयनीय दशा और विप्लव की आवश्यकता का चित्रण किया है।

प्रसंग: कवि कहता है कि बादल गरज रहे हैं, लेकिन वे केवल डरावने हैं। किसान का शरीर जीर्ण-शीर्ण हो चुका है, उसकी सारी शक्ति चूस ली गई है, और वह केवल हड्डियों का ढाँचा रह गया है। वह विप्लव के वीर को पुकारता है, जो उसके जीवन में नवजीवन ला सके।

व्याख्या: कवि कहता है कि बादल आपस में लिपटे हुए हैं, लेकिन उनकी गर्जना से आतंकित होकर लोग काँप रहे हैं। बादल अपने मुँह को ढाँप रहे हैं, मानो वे भी इस दुःख से विमुख होना चाहते हैं। किसान, जिसकी बाहें जीर्ण और शरीर शीर्ण हो चुका है, अधीर होकर विप्लव के वीर को बुलाता है। उसका सारा सार चूस लिया गया है, केवल हड्डियाँ ही आधार बची हैं। वह जीवन के पारावार (सागर) को पुकारता है, जो उसे नया जीवन दे सके।

विशेष: इस पद्यांश में कवि ने किसानों की शोषित दशा को मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया है। 'विप्लव के वीर' और 'जीवन के पारावार' जैसे शब्दों के माध्यम से कवि ने क्रांति और नवजीवन की आवश्यकता पर बल दिया है। भाषा में चित्रात्मकता और संगीतात्मकता है।


दूसरा पद्यांश (अथवा):

सो अनुराग कहाँ अब भाई। उठहु न सुनि मम बच बिकलाई।।
जौं जनतेऊँ बन sep Peete। fig बचन मनतेएँ नहिं ओहू॥
सुत बित-नोरि भवन परिवारा। होहिं जाहिं जग aS बारा।।
अस बिचारि fare जागहु ताता। मिलइ न जगत सहोदर भ्राता।
जथा पंख faq खग अति दीना। म॒नि fag फनि करिबर कर हीना॥
अस मम जिबन बंधु बिनु-तोंही। जौं जड़ दैव जिआवै मोहीं॥

सप्रसंग व्याख्या:

संदर्भ: प्रस्तुत पद्यांश गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित 'रामचरितमानस' के 'अयोध्याकांड' से लिया गया है। यह भरत के वचन हैं, जो वन में भरतजी भरतजी से कहते हैं।

प्रसंग: भरतजी भरतजी को संबोधित करते हुए कहते हैं कि अब वह प्रेम कहाँ रहा? वे उनके वचन सुनकर भी नहीं उठते। यदि वे जानते कि वन में रहना इतना कठिन होगा, तो वे कभी उनके वचनों पर विश्वास नहीं करते।

व्याख्या: भरतजी कहते हैं कि हे भाई! अब वह प्रेम कहाँ गया? तुम मेरे व्याकुल वचन सुनकर भी नहीं उठते। यदि मैं जानता कि वन में रहना इतना कठिन होगा, तो मैं तुम्हारे वचनों पर विश्वास नहीं करता। पुत्र, धन, स्त्री, घर और परिवार सब संसार में आते-जाते रहते हैं। ऐसा विचार कर हे तात! जागो, क्योंकि संसार में सहोदर भाई नहीं मिलता। जैसे पंखहीन पक्षी अत्यंत दीन होता है, मणिहीन सर्प और हाथी के बिना हाथी दुखी होता है, वैसे ही मेरा जीवन तुम्हारे बिना है। यदि मुझे जड़ दैव जीवित रखे, तो भी मैं तुम्हारे बिना अधूरा हूँ।

विशेष: इस पद्यांश में भरतजी की भरतजी के प्रति अगाध प्रेम और विरह-वेदना का मार्मिक चित्रण है। तुलसीदास ने उपमाओं (पंखहीन पक्षी, मणिहीन सर्प) के माध्यम से भाई के महत्व को स्पष्ट किया है। भाषा अवधी है और भावों में गहरी करुणा है।

9.

जिला खेल अधिकारी, जिला पाली राजस्थान द्वारा खेल सामग्री की आपूर्ति हेतु निर्धारित प्रपत्र में एक निविदा लिखिए।

निविदा सूचना

दिनांक: [तिथि]

जिला खेल अधिकारी,
जिला पाली, राजस्थान

खेल सामग्री की आपूर्ति हेतु निविदा आमंत्रित की जाती है। इच्छुक ठेकेदार/फर्म निर्धारित प्रपत्र में अपनी निविदा प्रस्तुत कर सकते हैं।

निविदा विवरण:

  • कार्य का नाम: खेल सामग्री की आपूर्ति
  • निविदा जमा करने की अंतिम तिथि: [तिथि]
  • निविदा खोलने की तिथि: [तिथि]
  • जमा करने का स्थान: कार्यालय, जिला खेल अधिकारी, पाली

निविदा प्रपत्र कार्यालय से प्राप्त किए जा सकते हैं। सभी नियम एवं शर्तें निविदा प्रपत्र में उल्लिखित हैं।

धन्यवाद,
जिला खेल अधिकारी, पाली

अथवा

आयुक्त, नगर निगम अलवर की तरफ से राष्ट्रीय एकता दिवस के उपलक्ष्य में रैली आयोजित करने हेतु निर्धारित प्रपत्र में एक ज्ञापन लिखिए।

ज्ञापन

दिनांक: [तिथि]

आयुक्त महोदय,
नगर निगम, अलवर

विषय: राष्ट्रीय एकता दिवस के उपलक्ष्य में रैली आयोजित करने हेतु ज्ञापन

महोदय,

राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर नगर निगम अलवर द्वारा एक रैली आयोजित करने का प्रस्ताव है। इस रैली का उद्देश्य नागरिकों में राष्ट्रीय एकता और अखंडता की भावना को बढ़ावा देना है।

प्रस्तावित रैली का विवरण:

  • तिथि: [तिथि]
  • समय: प्रातः 8:00 बजे
  • स्थान: नगर निगम कार्यालय से प्रारंभ होकर शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए वापस कार्यालय पर समाप्त
  • प्रतिभागी: नगर निगम कर्मचारी, स्कूली छात्र, गणमान्य नागरिक

अतः आपसे अनुरोध है कि इस रैली के आयोजन हेतु आवश्यक अनुमति एवं संसाधन उपलब्ध कराने की कृपा करें।

धन्यवाद,
[नाम]
[पदनाम]


20.

निम्नलिखित विषयों में से किसी एक विषय पर लगभग 300 शब्दों में निबंध लिखिए।

  1. इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और हमारा समाज
  2. मेरे सपनों का भारत
  3. हमारे पारंपरिक खेल
  4. राजस्थान का समृद्ध भौतिक परिदृश्य

नमूना निबंध: इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और हमारा समाज

इलेक्ट्रॉनिक मीडिया आज के युग में समाज का एक अभिन्न अंग बन चुका है। टेलीविजन, रेडियो, इंटरनेट और सोशल मीडिया जैसे माध्यमों ने सूचना और मनोरंजन के क्षेत्र में क्रांति ला दी है।

इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का समाज पर गहरा प्रभाव पड़ता है। यह लोगों को जागरूक करता है, शिक्षित करता है और मनोरंजन प्रदान करता है। समाचार चैनल देश-दुनिया की घटनाओं से अवगत कराते हैं, जिससे लोग सूचित रहते हैं। शैक्षिक कार्यक्रम ज्ञानवर्धन में सहायक होते हैं।

हालांकि, इसके कुछ नकारात्मक पहलू भी हैं। अत्यधिक उपयोग से समय की बर्बादी होती है और स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है। भ्रामक सूचना और अफवाहें फैलाने में भी यह माध्यम सक्षम है। सोशल मीडिया पर साइबर बुलिंग और गोपनीयता का उल्लंघन जैसी समस्याएं भी देखने को मिलती हैं।

निष्कर्षतः, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया एक शक्तिशाली उपकरण है जिसका सकारात्मक उपयोग समाज के विकास में सहायक हो सकता है। इसके दुष्प्रभावों से बचने के लिए जागरूकता और संयम आवश्यक है।