RBSE Class 8th 2020 Hindi-UP-01-2020 Previous Year Papers
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Paper details
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| Board | RBSE |
|---|---|
| Class | Class 8th |
| Exam year | 2020 |
| Subject | Hindi-UP-01-2020 |
| Resource type | Previous Year Papers |
| Category | RBSE Previous Year Question Papers |
| Website | RBSE Solution |
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RBSE Class 8th 2020 Hindi-UP-01-2020
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Rajasthan Board Class 8th Hindi-UP-01-2020 2020 solved Previous Year Question Papers
प्रारम्भिक शिक्षा पूर्णता प्रमाण पत्र परीक्षा, 2020
PRARAMBHIK SHIKSHA PURNATA PRAMAN-PATRA PARIKSHA, 2020
कक्षा-8 / CLASS-8
हिन्दी / HINDI
No. of Questions / कुल प्रश्नों की संख्या: 25
Time / समय: 2.30 घण्टे
No. of Printed Pages / कुल मुद्रित पृष्ठों की संख्या: 08
Maximum Marks / अधिकतम अंक: 80
परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश
- परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न-पत्र पर नामांक अनिवार्यतः लिखें।
- सभी प्रश्न अनिवार्य हैं।
- प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें।
- जिन प्रश्नों में आन्तरिक खण्ड हैं, उन सभी के उत्तर एक साथ ही लिखें।
- प्रश्न संख्या 1 से 8 तक (बहुविकल्पीय प्रश्नों) के उत्तर तालिका बनाकर उत्तर-पुस्तिका में लिखें।
प्रश्न-पत्र कोड: UP-01-HINDI-VIII
पृष्ठ संख्या: 1 of 8
निर्देश : सही उत्तर का चयन कीजिए :-
-
अपराजिता कहानी में किसका निचला भाग निष्प्राण, मांसपिंड मात्र था?
- (क) चन्द्रा
- (ख) इन्द्रा
- (ग) सुब्रहमण्यम्
- (घ) राम
व्याख्या: 'अपराजिता' कहानी में सुब्रहमण्यम् का निचला भाग निष्प्राण और मांसपिंड मात्र था, जो उनकी शारीरिक दुर्बलता को दर्शाता है।
-
“गाय बचेगी तो मनुष्य बचेगा, वह नष्ट हुई तो उसके साथ हम सभी यानी प्रकृति, पर्यावरण, हमारी सभ्यता भी नष्ट हो जाएगी।” कथन किसका है?
- (क) महाराजा दिलीप
- (ख) गाँधीजी
- (ग) सम्राट अशोक
- (घ) अकबर
व्याख्या: यह कथन महात्मा गाँधी का है, जो गाय की रक्षा को मानव सभ्यता और प्रकृति के अस्तित्व से जोड़ते हैं।
-
कवि गिरधर के अनुसार मनुष्य को सपने में भी किस वस्तु का अभिमान नहीं करना चाहिए?
- (क) घर का
- (ख) शरीर का
- (ग) वस्तुओं का
- (घ) दौलत का
व्याख्या: कवि गिरधर के अनुसार शरीर नश्वर है, इसलिए सपने में भी इसका अभिमान नहीं करना चाहिए।
-
“द्रौपदी की लाज राखी, तुरत बढ़ायो चीर।” उक्त पंक्ति में द्रौपदी की लाज किसने रखी?
- (क) राम ने
- (ख) कृष्ण ने
- (ग) शिव ने
- (घ) मीरा बाई ने
व्याख्या: यह पंक्ति महाभारत के प्रसंग से है, जहाँ भगवान कृष्ण ने द्रौपदी की लाज बचाने के लिए उनके चीर को बढ़ाया था।
[302] ए7-0- HINDI
प्रश्न 5
"वह नीले घोड़े का सवार, वह हल्दीघाटी का Geni" किसके लिए कहा गया है?
- महाराणा प्रताप
- महाराणा उदयसिंह
- पृथ्वीराज
- विक्रमादित्य
सही उत्तर: महाराणा प्रताप
यह पंक्ति महाराणा प्रताप के लिए कही गई है, जो हल्दीघाटी के युद्ध में नीले घोड़े पर सवार थे और उन्हें वीर योद्धा माना जाता है।
प्रश्न 6
भारत वर्ष में गाय के महत्व को दर्शाता है -
- गाय को सिर्फ पशु समझा जाता है।
- गाय को पवित्र और पूज्य मान अत्यंत आस्था का भाव रखना।
- गाय को एक धन मानना।
- गाय चौपाया प्राणी है उसे माँ के बराबर नहीं माना गया।
सही उत्तर: गाय को पवित्र और पूज्य मान अत्यंत आस्था का भाव रखना।
भारतीय संस्कृति में गाय को माता का दर्जा दिया जाता है और इसे पवित्र मानकर पूजा जाता है, जो इसके महत्व को दर्शाता है।
प्रश्न 7
"मोहन पाँचवीं कक्षा में पढ़ता है।" पंक्ति में विशेषण शब्द कौनसा है?
- मोहन
- पाँचवीं
- कक्षा
- पढ़ता
सही उत्तर: पाँचवीं
'पाँचवीं' शब्द 'कक्षा' की विशेषता बताता है, इसलिए यह विशेषण है।
प्रश्न 8
'यश' शब्द का विलोम शब्द क्या है?
- सुयश
- विवश
- अपयश
- श्रीयश
सही उत्तर: अपयश
'यश' का अर्थ कीर्ति या प्रसिद्धि है, जबकि 'अपयश' का अर्थ बदनामी या कलंक है, इसलिए यह विलोम शब्द है।
निर्देश : अति लघूत्तरात्मक प्रश्न :-
9. कोसीथल ठाकुर की माँ ने राणा जी का संदेश पढ़कर क्या कहा?
उत्तर: कोसीथल ठाकुर की माँ ने राणा जी का संदेश पढ़कर कहा कि वह अपने पुत्र को युद्ध में जाने से नहीं रोकेंगी, क्योंकि क्षत्राणी का धर्म है कि वह पुत्र को वीरगति प्राप्त करने के लिए प्रेरित करे।
10. महाराजा को बिजली से आम शिकायत क्या है?
उत्तर: महाराजा को बिजली से शिकायत है कि वह बिना बताए आती-जाती रहती है और कभी-कभी तेज आवाज करके लोगों को डरा देती है।
11. “शक्ति और क्षमा” कविता के आधार पर बताइए कि शक्तिशाली को क्षमा शोभा देती है। क्यों?
उत्तर: शक्तिशाली को क्षमा इसलिए शोभा देती है क्योंकि उसमें दूसरों को दंड देने की शक्ति होते हुए भी वह उन्हें क्षमा करता है। यह उसकी महानता और उदारता को दर्शाता है। कमजोर व्यक्ति की क्षमा का कोई महत्व नहीं होता, क्योंकि उसके पास दंड देने की शक्ति ही नहीं होती।
12. “मोहनि मूरति, साँवरि सूरति, नैना बने बिसाल” पंक्ति का अर्थ लिखिए।
उत्तर: इस पंक्ति का अर्थ है कि भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति अत्यंत मोहक (मनमोहक) है, उनका रंग साँवला (श्याम) है, और उनकी आँखें बहुत बड़ी और सुंदर हैं।
13. दिए गए शब्दों का वाक्यों में प्रयोग कीजिए -
- पृथ्वी – पृथ्वी हमारा घर है, हमें इसकी रक्षा करनी चाहिए।
- आकाश – आकाश में तारे चमक रहे हैं।
14. “आवट” और “आई” प्रत्यय लगाकर दो-दो शब्द बनाइए।
उत्तर:
- आवट प्रत्यय से शब्द: सजावट, बनावट
- आई प्रत्यय से शब्द: पढ़ाई, लिखाई
निर्देश : लघुत्तरात्मक प्रश्न :-
15. ऐसे कौन से कारण हैं, जिनसे सड़क दुर्घटनाएँ हो जाती हैं? चार कारणों के बारे में समझाइए।
उत्तर: सड़क दुर्घटनाओं के चार प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:
- तेज गति से वाहन चलाना: वाहनों को तेज गति से चलाने से नियंत्रण खोने का खतरा बढ़ जाता है, जिससे दुर्घटना हो सकती है।
- यातायात नियमों का पालन न करना: जैसे लाल बत्ती पर न रुकना, गलत दिशा में चलना आदि।
- शराब या नशीली दवाओं का सेवन करके वाहन चलाना: इससे ध्यान भटकता है और प्रतिक्रिया समय धीमा हो जाता है।
- सड़क की खराब स्थिति: जैसे गड्ढे, टूटी सड़कें या अपर्याप्त रोशनी।
16. निम्नलिखित मुहावरों का अर्थ स्पष्ट करते हुए वाक्यों में प्रयोग कीजिए -
- अपना उल्लू सीधा करना – अर्थ: अपना स्वार्थ साधना।
वाक्य: रमेश ने अपना उल्लू सीधा करने के लिए झूठ बोला। - ईद का चाँद होना – अर्थ: बहुत दिनों बाद दिखाई देना।
वाक्य: तुम तो ईद के चाँद हो गए हो, कई महीनों बाद मिले हो।
17. चने में फूल लग जाने की खबर अखबारों में छपने पर सरकारी महकमों पर क्या असर हुआ?
उत्तर: चने में फूल लग जाने की खबर अखबारों में छपने पर सरकारी महकमों में हड़कंप मच गया। अधिकारी घबरा गए और तुरंत जांच के आदेश दिए गए। कई अधिकारियों ने मामले को दबाने की कोशिश की, लेकिन खबर फैलने से उनकी नींद उड़ गई।
18. “हमारी भी सुनो” पाठ के आधार पर बिजली बचाने के कौन-कौन से तरीके आप अपनाएंगे?
उत्तर: “हमारी भी सुनो” पाठ के आधार पर बिजली बचाने के निम्नलिखित तरीके अपनाए जा सकते हैं:
- अनावश्यक बल्ब और पंखे बंद कर देना चाहिए।
- दिन के समय प्राकृतिक रोशनी का उपयोग करना चाहिए।
- बिजली के उपकरणों को स्टैंडबाय मोड में नहीं छोड़ना चाहिए।
- एलईडी बल्ब का उपयोग करना चाहिए जो कम बिजली खाते हैं।
9. “वह मातृभूमि का रखवाला" पंक्ति के आधार पर महाराणा प्रताप ने किस प्रकार मातृभूमि की रक्षा की?
महाराणा प्रताप ने अपने जीवनकाल में मातृभूमि की रक्षा के लिए अनेक संघर्ष किए। वे मेवाड़ की स्वतंत्रता और गौरव के लिए सदैव तत्पर रहे। उन्होंने मुगलों के सामने घुटने नहीं टेके और जंगलों में रहकर भी संघर्ष जारी रखा। हल्दीघाटी के युद्ध में वीरता से लड़े और अपनी मातृभूमि की रक्षा का संकल्प निभाया। वे सच्चे अर्थों में मातृभूमि के रखवाले थे।
20. कवि गिरधर के अनुसार बिना विचारे काम क्यों नहीं करना चाहिए?
कवि गिरधर के अनुसार बिना विचारे काम करने से हानि होती है। विचारपूर्वक किया गया कार्य सफल होता है, जबकि बिना सोचे-समझे किया गया काम पछतावे का कारण बनता है। इसलिए किसी भी कार्य को करने से पहले उसके परिणामों पर विचार करना आवश्यक है।
21. स्वच्छ रहने से हमारे एवं हमारे समाज पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
स्वच्छ रहने से हमारे स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। हम बीमारियों से बचे रहते हैं और मानसिक रूप से प्रसन्न रहते हैं। समाज में स्वच्छता का वातावरण बनता है, जिससे सामूहिक स्वास्थ्य में सुधार होता है और समाज में एकता एवं सहयोग की भावना बढ़ती है।
22. निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए -
हठीले हम्मीर की पुण्य धरा रणथंभौर का स्मरण आते ही सभी के मन में इस धरा को देखने की स्वत: इच्छा होती है। अब यह क्षेत्र वन्य क्षेत्र के रूप में विकसित है। अरावली एवं विंध्याचल की सुरम्य पर्वतमाला के मध्य स्थित विश्व प्रसिद्ध रणथंभौर बाघ अभयारण्य को देखने की परिवार के सदस्यों की तीव्र उत्कण्ठा हुई। सभी ने मिलकर रणथंभौर के भ्रमण का कार्यक्रम तैयार किया। हम सभी 9 अक्टूबर रात्रि 11.00 बजे जयपुर से रेल द्वारा सवाई माधोपुर के लिए रवाना हुए। एकाएक मेरी बेटी ने पूछा, "पिताजी यहाँ से सवाई माधोपुर कितनी दूरी पर है?" मैंने बेटी को बताया कि रेलमार्ग द्वारा जयपुर से सवाई माधोपुर की दूरी लगभग 132 किलोमीटर है। हम रात्रि 2.30 बजे सवाई माधोपुर पहुँचे। वहाँ हमने रेलवे स्टेशन के पास ही एक होटल में कमरा लिया और कुछ समय आराम किया।
(क) उपर्युक्त गद्यांश का शीर्षक लिखिए।
रणथंभौर की यात्रा
(ख) सभी के मन में किस धरा को देखने की स्वतः इच्छा हुई?
सभी के मन में हठीले हम्मीर की पुण्य धरा रणथंभौर को देखने की स्वतः इच्छा हुई।
(ग) रेलवे स्टेशन पहुँच कर लेखक व उसके परिवार ने क्या किया?
रेलवे स्टेशन पहुँच कर लेखक व उसके परिवार ने स्टेशन के पास ही एक होटल में कमरा लिया और कुछ समय आराम किया।
(घ) रणथंभौर बाघ अभयारण्य किन पर्वतमालाओं के मध्य स्थित है?
रणथंभौर बाघ अभयारण्य अरावली एवं विंध्याचल पर्वतमालाओं के मध्य स्थित है।
23. निम्नलिखित में से किसी एक की सप्रसंग व्याख्या कीजिए – (8)
पद्यांश – 1
लाठी में गुन बहुत है, सदा राखिए संग।
नदियाँ नाला जहाँ पड़ै, तहाँ बचावत अंग।
तहाँ बचावत अंग, झपट कुत्ते को मारै।
दुश्मन, दामनगीर, ताही का मस्तक फारै।
कह गिरधर कविराय, सुनो हे धुर के साठी।
सब हथियारन छोड़, हाथ में राखिए लाठी।
सप्रसंग व्याख्या:
प्रसंग: प्रस्तुत पद्यांश 'गिरधर कविराय' द्वारा रचित है। इसमें कवि ने लाठी के महत्व और उपयोगिता का वर्णन किया है।
व्याख्या: कवि कहते हैं कि लाठी में अनेक गुण हैं, इसलिए इसे सदा अपने साथ रखना चाहिए। यह नदी-नालों को पार करते समय शरीर की रक्षा करती है। यह झपटने वाले कुत्ते को मार सकती है और दुश्मन के सिर को फोड़ सकती है। कवि गिरधर कहते हैं कि हे साथियों, सभी हथियारों को छोड़कर केवल लाठी को ही हाथ में रखो। लाठी एक सरल, सुलभ और बहुउपयोगी हथियार है जो हर समय काम आता है।
पद्यांश – 2
क्षमाशील हो रिपु समक्ष
तुम हुए विनत जितना ही।
दुष्ट कौरवों ने तुमको
कायर समझा उतना ही।
क्षमा शोभती उस भुजंग को
जिसके पास गरल हो,
उसको क्या, जो दंतहीन,
विषरहित, विनीत, सरल हो।
सप्रसंग व्याख्या:
प्रसंग: प्रस्तुत पद्यांश महाकवि 'मैथिलीशरण गुप्त' द्वारा रचित 'युगधारा' से लिया गया है। इसमें युधिष्ठिर की क्षमाशीलता और कौरवों की दुष्टता का वर्णन है।
व्याख्या: कवि कहते हैं कि हे युधिष्ठिर, तुम शत्रु के सामने जितने अधिक विनम्र और क्षमाशील हुए, उतना ही दुष्ट कौरवों ने तुम्हें कायर समझा। क्षमा उसी सर्प को शोभा देती है जिसके पास विष (गरल) हो। यदि सर्प दंतहीन, विषहीन, विनीत और सरल हो तो उसकी क्षमा का कोई मूल्य नहीं। अर्थात् क्षमा तभी सार्थक है जब उसमें शक्ति हो, अन्यथा वह दुर्बलता मानी जाती है।
24. अपने आपको अनिता मानते हुए अपनी बहन सपना को बोर्ड परीक्षा तैयारी हेतु प्रेरक पत्र लिखिए। (8)
पत्र:
परीक्षा भवन,
नई दिल्ली
दिनांक: 15 जनवरी, 2020
प्रिय बहन सपना,
स्नेहपूर्वक पत्र लिख रही हूँ। आशा है तुम स्वस्थ और प्रसन्न होगी। मुझे पता चला कि तुम्हारी बोर्ड परीक्षाएँ निकट हैं और तुम थोड़ी घबराई हुई हो। मैं तुम्हें याद दिलाना चाहती हूँ कि तुमने पूरे साल मेहनत की है, अब बस आत्मविश्वास के साथ परीक्षा देना है।
परीक्षा की तैयारी के लिए कुछ सुझाव:
- समय सारणी बनाकर पढ़ाई करो – प्रतिदिन कम से कम 6-7 घंटे पढ़ो।
- कठिन विषयों को सुबह के समय पढ़ो जब मस्तिष्क ताजा हो।
- पिछले वर्षों के प्रश्नपत्र हल करो – इससे परीक्षा का पैटर्न समझ में आएगा।
- लिखने का अभ्यास करो – उत्तरों को साफ-सुथरा और व्यवस्थित लिखो।
- स्वास्थ्य का ध्यान रखो – पर्याप्त नींद लो, पौष्टिक भोजन खाओ और थोड़ा व्यायाम करो।
- आत्मविश्वास रखो – तुम होशियार हो और तुमने अच्छी तैयारी की है।
याद रखो, परीक्षा केवल तुम्हारे ज्ञान का माप है, तुम्हारी क्षमता का नहीं। शांत मन से पढ़ो और परीक्षा में अपना सर्वश्रेष्ठ दो। मुझे विश्वास है कि तुम अवश्य सफल होगी।
तुम्हारी बहन की शुभकामनाएँ सदैव तुम्हारे साथ हैं।
तुम्हारी प्यारी बहन,
अनिता
अथवा
(दूसरा विकल्प – पृष्ठ पर स्पष्ट नहीं है, अतः केवल प्रश्नांश उपलब्ध है।)
प्रश्न 1: विद्यालय में छात्र और अध्यापक के बीच बातचीत को अपने शब्दों में संवाद के रूप में लिखिए।
संवाद:
छात्र: गुरु जी, नमस्ते। क्या मैं आपसे कुछ पूछ सकता हूँ?
अध्यापक: हाँ, बेटा, पूछो। क्या परेशानी है?
छात्र: सर, आज के गणित के पाठ में मुझे एक सवाल समझ नहीं आया। क्या आप मुझे फिर से समझा सकते हैं?
अध्यापक: बिल्कुल। कौन सा सवाल है? मैं तुम्हें आसानी से समझा दूँगा।
छात्र: धन्यवाद, सर। वह सवाल है - एक त्रिभुज के तीनों कोणों का योग 180 डिग्री क्यों होता है?
अध्यापक: यह बहुत अच्छा सवाल है। देखो, त्रिभुज के तीनों कोणों को मिलाकर एक सीधी रेखा बनती है, इसलिए उनका योग 180 डिग्री होता है। मैं तुम्हें चित्र बनाकर समझाता हूँ।
छात्र: जी, सर। अब मुझे समझ आ गया। आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।
अध्यापक: कोई बात नहीं, बेटा। पढ़ाई में मन लगाओ और कोई भी शंका हो तो बेझिझक पूछो।
प्रश्न 2: निम्न में से किसी एक विषय पर निबंध लिखिए -
विकल्प:
- मोबाइल फोन के दुष्प्रभाव
- बालिका शिक्षा
- विद्यार्थी जीवन में अनुशासन
- भारत में बेरोजगारी की समस्या
निबंध (उदाहरण के रूप में 'विद्यार्थी जीवन में अनुशासन' विषय पर):
प्रस्तावना: विद्यार्थी जीवन जीवन का सबसे महत्वपूर्ण और निर्माण काल होता है। इस समय में सीखी गई आदतें और संस्कार जीवन भर साथ रहते हैं। अनुशासन विद्यार्थी जीवन की सबसे बड़ी आवश्यकता है। अनुशासन का अर्थ है नियमों और मर्यादाओं का पालन करना। यह विद्यार्थी को सही दिशा में आगे बढ़ने में मदद करता है।
अनुशासन का महत्व: अनुशासन विद्यार्थी के जीवन को व्यवस्थित बनाता है। यह समय का सदुपयोग करना सिखाता है। अनुशासित विद्यार्थी अपने लक्ष्य को निर्धारित करके उसे प्राप्त करने में सफल होता है। पढ़ाई, खेलकूद और अन्य गतिविधियों में संतुलन बनाए रखना अनुशासन से ही संभव है।
अनुशासन के लाभ: अनुशासित विद्यार्थी शिक्षकों और माता-पिता का आदर करता है। वह समय पर अपना काम करता है और परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करता है। अनुशासन से आत्मविश्वास बढ़ता है और व्यक्तित्व का विकास होता है। यह विद्यार्थी को जिम्मेदार नागरिक बनने में सहायता करता है।
उपसंहार: विद्यार्थी जीवन में अनुशासन एक ऐसा खजाना है जो जीवन भर काम आता है। प्रत्येक विद्यार्थी को अपने जीवन में अनुशासन को अपनाना चाहिए। अनुशासन ही सफलता की कुंजी है।