RBSE Class 9th 2017 Hindi-A-2-35-2017 Previous Year Papers
You opened the RBSE Class 9th 2017 Hindi-A-2-35-2017 Previous Year Papers page — a focused place to read the real previous year question paper for that subject and year. RBSE Solution keeps exam-year sets together so you can practise the same cycle your seniors faced.
Previous year papers reward patience: read instructions, note mark distribution, then attempt questions before peeking at solutions elsewhere on the site. This URL always loads the same free previous year papers content for Hindi-A-2-35-2017 (2017).
Use the details table to confirm class and year, then scroll to the paper images or PDF below. More subjects from 2017 are linked later on this page.
Paper details
Quick reference for this previous year papers page — confirm board, class, and year & subject before you study.
| Board | RBSE |
|---|---|
| Class | Class 9th |
| Exam year | 2017 |
| Subject | Hindi-A-2-35-2017 |
| Resource type | Previous Year Papers |
| Category | RBSE Previous Year Question Papers |
| Website | RBSE Solution |
The table summarises this Previous Year Papers resource. Confirm RBSE, Class 9th, year 2017, and subject Hindi-A-2-35-2017 before studying.
RBSE Solution organises previous year papers so each URL carries chapter-specific guidance — better for students and for search engines than one generic paragraph for the whole class.
How to practise with this question paper
Stage one: read the Hindi-A-2-35-2017 question paper from 2017 without a timer and highlight command words — explain, prove, calculate, discuss. Stage two: attempt selected questions closed-book. Stage three: compare with solutions or teacher feedback.
Previous Year Papers work best when you log mistakes by topic, not only by question number. That log becomes your revision index before pre-boards.
RBSE Class 9th 2017 Hindi-A-2-35-2017
Scroll through the Previous Year Papers pages for Hindi-A-2-35-2017 (2017).
Rajasthan Board Class 9th Hindi-A-2-35-2017 2017 solved Previous Year Question Papers
वार्षिक परीक्षा सत्र 2076-207
कक्षा—IX ( नवमीं )
विषय—हिन्दी
समय : 3¼ घंटे पूर्णांक : 90
निर्देश :
- सभी प्रश्न हल करना अनिवार्य है।
- विद्यार्थी अपने नामांक प्रश्न-पत्र पर अनिवार्यतः लिखें।
- जिस प्रश्न के एक से अधिक भाग हैं, उन सभी भागों का उत्तर एक साथ ही लिखें, भिन्न-भिन्न दो स्थानों पर नहीं लिखें।
- प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें।
- प्रत्येक प्रश्न के अंक प्रश्न के सामने अंकित हैं।
प्रश्न 4:
निम्नलिखित अपठित गद्यांश को पढ़कर पूछे गये प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
मानव जाति ने अपने उद्भवकाल में ही प्रकृति की गोद में ही जन्म लिया और उसी से अपने भरण-पोषण की सामग्री प्राप्त की। सभी प्रकार के वन्य या प्राकृतिक उपादान ही उसके जीवन और जीविका के एकमात्र साधन थे। प्रकृति ने ही मानव जीवन को संरक्षण प्रदान किया। रामचन्द्र, सीता व लक्ष्मण ने भी पंचवटी नामक स्थान पर कुटिया बनाकर वनवास का लम्बा समय व्यतीत किया था।
वृक्षों की लकड़ी से मानव अनेक प्रकार के लाभ उठाता है। उसने लकड़ी को ईंधन के रूप में प्रयुक्त किया। इससे मकान व झोंपड़ियाँ बनाईं। इमारती लकड़ी से भवन निर्माण, कृषि यंत्र, परिवहन जैसे-रथ, ट्रक, रेलों के डिब्बे तथा फर्नीचर आदि बनाये जाते हैं। इस प्रकार वृक्षों से विभिन्न प्रत्यक्ष लाभों के अतिरिक्त परोक्ष फायदे भी हैं। जीवन-दायिनी ऑक्सीजन पेड़ों से प्राप्त होती है। वृक्षों के आधिक्य से बाढ़ नियंत्रण में सहायता मिलती है।
(क) उपर्युक्त गद्यांश का उचित शीर्षक बताइये।
उत्तर: उपर्युक्त गद्यांश का उचित शीर्षक "प्रकृति और मानव जीवन" या "वृक्षों का महत्व" हो सकता है।
खण्ड : 1
प्रश्न 1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
-
(i) वनवास-काल में राम, सीता व लक्ष्मण ने कहाँ पर निवास किया था?
वनवास-काल में राम, सीता और लक्ष्मण ने पंचवटी (नासिक के पास) में निवास किया था।
-
(ii) आदिकाल में मानव-जीवन किस पर आधारित था?
आदिकाल में मानव-जीवन प्रकृति पर आधारित था।
प्रश्न 2.
निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
हाय रे मानव, नियति के दास।
हाय रे मनुपुत्र, अपना ही उपहास।
प्रकृति की प्रच्छन्नता को जीत,
सिन्धु से आकाश तक सबको किये भयभीत,
सृष्टि को निज बुद्धि से करता हुआ परिमेय,
चीरता परमाणु की सत्ता असीम, अजेय,
बुद्धि के पवमान में उड़ता हुआ असहाय,
जा रहा तू किस दिशा की ओर निरुपाय-
लक्ष्य क्या? उद्देश्य क्या? क्या अर्थ?
यही नहीं यदि ज्ञात तो विज्ञान का श्रम व्यर्थ ।
सुन रहा आकाश चढ़ ग्रह-तारकों का नाद
-
(i) उपर्युक्त पद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए।
उपर्युक्त पद्यांश का उचित शीर्षक है – "मानव की विवशता" या "नियति के दास"।
-
(ii) कवि ने मनुष्य को किसका दास बताया है?
कवि ने मनुष्य को नियति (भाग्य) का दास बताया है।
-
(iii) सिन्धु से आकाश तक सब ओर किसका भय बना हुआ है?
सिन्धु से आकाश तक सब ओर मनुष्य का भय बना हुआ है, क्योंकि उसने अपनी बुद्धि से प्रकृति को जीत लिया है।
खण्ड : 2
प्रश्न 3. निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर पत्र लिखिए :
(अ) अपने विद्यालय के प्रधानाचार्य को एक प्रार्थना-पत्र जिसमें बुक-बैंक से पाठ्य पुस्तक दिलवाने का निवेदन किया गया हो।
सेवा में,
श्रीमान प्रधानाचार्य जी,
[विद्यालय का नाम],
[स्थान]।
दिनांक : [दिनांक]
विषय : बुक-बैंक से पाठ्य पुस्तक दिलवाने हेतु प्रार्थना-पत्र।
महोदय,
सविनय निवेदन है कि मैं आपके विद्यालय की कक्षा 9वीं का छात्र हूँ। मेरे पिता की आर्थिक स्थिति अत्यंत कमजोर है, जिसके कारण वे मुझे नई पाठ्य पुस्तकें खरीदकर नहीं दे सकते। अतः आपसे विनम्र प्रार्थना है कि कृपया मुझे विद्यालय के बुक-बैंक से पाठ्य पुस्तकें प्रदान करने की कृपा करें, ताकि मैं अपनी पढ़ाई जारी रख सकूँ।
आपकी अति कृपा होगी।
आपका आज्ञाकारी शिष्य,
[आपका नाम]
कक्षा : 9वीं
अनुक्रमांक : [अनुक्रमांक]
(ब) अपने मोहल्ले में व्याप्त गंदगी के सम्बन्ध में नगर पालिका को एक शिकायती पत्र।
सेवा में,
अध्यक्ष महोदय,
नगर पालिका,
[शहर का नाम]।
दिनांक : [दिनांक]
विषय : मोहल्ले में व्याप्त गंदगी के सम्बन्ध में शिकायत।
महोदय,
सविनय निवेदन है कि हमारे मोहल्ले [मोहल्ले का नाम] में पिछले कई दिनों से कूड़ा-कचरा नहीं उठाया गया है। सड़कों पर गंदगी का ढेर लगा हुआ है, जिससे दुर्गंध फैल रही है और मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है। इससे बीमारियाँ फैलने का खतरा उत्पन्न हो गया है।
अतः आपसे विनम्र प्रार्थना है कि कृपया शीघ्र ही सफाई कर्मचारियों को भेजकर मोहल्ले की सफाई करवाने की कृपा करें, ताकि निवासियों को स्वच्छ वातावरण मिल सके।
आपकी अति कृपा होगी।
भवदीय,
[आपका नाम]
पता : [पूरा पता]
मोबाइल : [मोबाइल नंबर]
खण्ड : 3
72. निम्न में से किसी एक विषय पर 300 शब्दों में निबन्ध लिखिये :
- समाज में नारी का स्थान
- इन्टरनेट - वरदान या अभिशाप
- मेरे आदर्श शिक्षक
- स्वच्छ भारत अभियान
73. 'छात्रावास' शब्द का संधि विच्छेद करते हुए संधि का नाम लिखिये।
उत्तर: छात्रावास = छात्र + आवास। यह दीर्घ संधि है (अ + आ = आ)।
74. 'आई' प्रत्यय का प्रयोग करते हुए तीन शब्द बनाइये।
उत्तर: लिखाई, पढ़ाई, बुनाई।
75. निम्नलिखित शब्दों में लगे उपसर्ग को छाँटिये :
अतिरिक्त, बदनाम, सजल, वेद
उत्तर: अतिरिक्त (अति), बदनाम (बद), सजल (स), वेद (वि)।
76. निम्न शब्दों के पर्यायवाची शब्द लिखिये (दो-दो) :
अम्बर, आँख, अग्नि, सूरज
उत्तर: अम्बर: आकाश, गगन; आँख: नेत्र, चक्षु; अग्नि: आग, अनल; सूरज: सूर्य, भास्कर।
77. निम्न शब्दों को शुद्ध करके लिखिये :
नारिओं, अकाश, पूज्यनीय, अगामी
उत्तर: नारियों, आकाश, पूजनीय, आगामी।
78. निम्नलिखित शब्दों के स्त्रीलिंग लिखिये :
बुद्धिमान, ठाकुर, हाथी, कवि
उत्तर: बुद्धिमती/बुद्धिमानी, ठकुराइन, हथिनी, कवयित्री।
79. स्वर व व्यंजन में क्या अन्तर है? स्वर के भेद लिखिये।
उत्तर: स्वर वे ध्वनियाँ हैं जिनके उच्चारण में वायु मुख से बिना किसी रुकावट के निकलती है, जैसे- अ, आ, इ, ई आदि। व्यंजन वे ध्वनियाँ हैं जिनके उच्चारण में वायु मुख में कहीं न कहीं रुकती है, जैसे- क, ख, ग आदि। स्वर के भेद: ह्रस्व (अ, इ, उ), दीर्घ (आ, ई, ऊ), प्लुत (ओ३म्)।
खण्ड : 4
80. निम्नलिखित गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिये :
हे भवानी ! तुमने मेरे हृदय को कैसा कर दिया? मुझे बल दो कि मैं राजवंश की रक्षा में अपना रक्त दे सकूँ। अपने लाल को दे सकूँ। यही राजपूतानी का व्रत है। यही राजपूतानी की मर्यादा है। यही राजपूतानी का धर्म है। मेरा हृदय वज्र का बना दो। माता के हृदय के स्थान पर, जिससे ममता के स्रोत बन्द हो जायें। भवानी ! मैं चित्तौड़ की सच्ची रानी बनूं।
प्रसंग: प्रस्तुत गद्यांश राजस्थान के गौरवशाली इतिहास से संबंधित है, जिसमें एक राजपूत रानी देवी भवानी से प्रार्थना कर रही है कि वह अपने राज्य और पुत्र की रक्षा के लिए बलिदान दे सके।
व्याख्या: रानी देवी भवानी से कहती है कि उन्होंने उसके हृदय को कठोर बना दिया है। वह प्रार्थना करती है कि उसे शक्ति दे कि वह राजवंश की रक्षा में अपना रक्त बहा सके और अपने पुत्र को भी बलिदान कर सके। यही राजपूतानी का व्रत, मर्यादा और धर्म है। वह चाहती है कि उसका हृदय वज्र के समान कठोर हो जाए, ताकि ममता के स्रोत बंद हो जाएं और वह चित्तौड़ की सच्ची रानी बन सके। यह गद्यांश राजपूत नारी के त्याग, बलिदान और कर्तव्यपरायणता को दर्शाता है।
प्रश्न 74. निम्नलिखित की सप्रसंग व्याख्या कीजिए :
मैंने हँसना सीखा है,
मैं नहीं जानती रोना,
बरसा करता पल-पल पर
मेरे जीवन में सोना।
मैं अब तक जान न पाई
कैसी होती है पीड़ा,
हँस-हँस जीवन में
कैसे करती है क्रीड़ा।
सन्दर्भ : प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक में संकलित कविता से ली गई हैं।
प्रसंग : इन पंक्तियों में कवयित्री ने एक ऐसे व्यक्ति के जीवन का चित्रण किया है जो जीवन की कठिनाइयों के बावजूद सदैव प्रसन्न रहता है और हँसता-मुस्कुराता रहता है।
व्याख्या : कवयित्री कहती हैं कि मैंने केवल हँसना सीखा है, रोना मुझे नहीं आता। मेरे जीवन में हर पल सोना (सुख) बरसता रहता है। मैं अब तक यह नहीं जान पाई कि पीड़ा कैसी होती है और जीवन में हँसते-हँसते कैसे क्रीड़ा (खेल) की जाती है। अर्थात् मैं सदा प्रसन्न रहती हूँ और दुःख को मेरे पास आने का अवसर ही नहीं मिलता।
अथवा
थाल सजाकर किसे पूजने,
चले आते हो मतवाले।
कहाँ चले तुम राम-नाम का,
पीताम्बर तन पर डाले,
कहाँ चले ले चन्दन, अक्षत, बगल दबाये मृग-छाला ?
कहाँ चली वह सजी आरती, कहाँ चली जूही माला?
सन्दर्भ : प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक में संकलित कविता से ली गई हैं।
प्रसंग : कवि ने इन पंक्तियों में बाहरी आडम्बरों और दिखावे की पूजा पर व्यंग्य किया है। वे पूछते हैं कि तुम इतने सारे सामान लेकर किसे पूजने जा रहे हो?
व्याख्या : कवि कहते हैं कि हे मतवाले (भक्त) ! तुम थाल सजाकर किसे पूजने जा रहे हो? तुम पीले वस्त्र (पीताम्बर) पहनकर, राम-नाम लेकर कहाँ जा रहे हो? तुम चन्दन, अक्षत (चावल) और बगल में मृगछाला (मृगचर्म) दबाए कहाँ जा रहे हो? और वह सजी हुई आरती तथा जूही की माला कहाँ जा रही है? कवि का आशय है कि बाहरी दिखावे से ईश्वर की प्राप्ति नहीं होती, बल्कि सच्चे मन से भक्ति करनी चाहिए।
प्रश्न 75. निम्नलिखित में से कोई भी दो प्रश्नों के उत्तर (80 शब्दों) में दीजिए :
(i) “चारों तरफ जहरीले सर्प जुम रहे हैं।” पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।
इस पंक्ति का आशय यह है कि हमारे चारों ओर बुराइयाँ, दुर्गुण और खतरे फैले हुए हैं। 'जहरीले सर्प' का अर्थ है वे लोग या परिस्थितियाँ जो हमें नुकसान पहुँचा सकती हैं। यह पंक्ति हमें सचेत रहने का संदेश देती है कि हमें अपने आस-पास के वातावरण में व्याप्त बुराइयों से सावधान रहना चाहिए और उनसे बचने का प्रयास करना चाहिए।
(ii) पतन्नाधाय- इतिहास में क्यों प्रसिद्ध है ? लिखिए।
पतन्नाधाय (पतन्ना धाय) राजस्थान के इतिहास में एक प्रसिद्ध वीरांगना के रूप में जानी जाती हैं। वे मेवाड़ के राणा सांगा के समय में हुई थीं। जब मुगलों ने उनके पति को बंदी बना लिया, तो उन्होंने स्वयं युद्ध में जाकर अपने पति को मुक्त कराया। उनकी वीरता और साहस के कारण वे इतिहास में अमर हो गईं। उन्होंने स्त्री होते हुए भी युद्ध कौशल और शौर्य का परिचय दिया, जिसके लिए उन्हें सदैव याद किया जाता है।
6. निम्न में से किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर दीजिए : (उत्तर सीमा 40 शब्द) 3+3+3=9
(i) कर्ण ने श्रीकृष्ण को अपनी दानवीरता की परीक्षा कैसे दी?
कर्ण ने श्रीकृष्ण को अपनी दानवीरता की परीक्षा तब दी जब श्रीकृष्ण ने उनसे उनका कवच और कुंडल माँगे। कर्ण ने बिना किसी हिचकिचाहट के अपने कवच-कुंडल काटकर दे दिए, भले ही वे उनके जीवन रक्षक थे। इससे उनकी दानवीरता सिद्ध हुई।
(ii) राक्षस ताल को रावण क्यों कहते हैं?
राक्षस ताल को रावण इसलिए कहते हैं क्योंकि यह ताल (तालाब) रावण के नाम पर प्रसिद्ध है। कहा जाता है कि रावण ने इस ताल का निर्माण करवाया था या इसका संबंध रावण से जुड़ी किसी घटना से है।
(iii) “जो लाक्षागृह में जलते हैं, वे ही सूरमा निकलते हैं।” को कथा प्रसंग सहित समझाइये।
यह पंक्ति महाभारत के प्रसंग से संबंधित है। दुर्योधन ने पांडवों को लाक्षागृह (लाख का बना घर) में जलाने की योजना बनाई। पांडवों ने सुरंग बनाकर भागकर अपनी जान बचाई। इसका अर्थ है कि जो लोग कठिनाइयों (आग) में तपते हैं, वे ही वीर (सूरमा) बनकर निकलते हैं।
(iv) “तीर्थराज चित्तौड़ देखने को मेरी आँखें प्यासी।” पंक्ति से लेखक (कवि) का आशय स्पष्ट कीजिये।
इस पंक्ति में लेखक (कवि) ने चित्तौड़गढ़ को तीर्थराज (तीर्थों का राजा) कहा है। उनकी आँखें इसे देखने के लिए प्यासी हैं, अर्थात वे चित्तौड़ के दर्शन के लिए अत्यधिक उत्सुक और लालायित हैं। यह चित्तौड़ के प्रति उनकी श्रद्धा और प्रेम को दर्शाता है।
(v) कुम्भ पर्व पर नदी पर डुबकी लगाने वाले क्या कामना करते हैं? स्पष्ट करें।
कुम्भ पर्व पर नदी में डुबकी लगाने वाले लोग मोक्ष की कामना करते हैं। उनका विश्वास है कि इस पवित्र अवसर पर स्नान करने से उनके सभी पाप धुल जाते हैं और उन्हें जन्म-मरण के बंधन से मुक्ति मिल जाती है।
7. निम्न में से किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर दीजिये (उत्तर सीमा 40 शब्द) : 3+3+3=9
(क) अब 'लक्ष्मीनारायण' को “दरिद्रनारायण” बनना ही पड़ेगा, क्यों और किस प्रकार?
यह कथन समाज में व्याप्त असमानता और गरीबी को दूर करने के संदर्भ में है। 'लक्ष्मीनारायण' (धनी) को 'दरिद्रनारायण' (गरीब) बनना पड़ेगा, अर्थात धनवानों को अपने धन का उपयोग गरीबों की सेवा में करना चाहिए। यह सामाजिक न्याय और समानता स्थापित करने के लिए आवश्यक है।
(ख) पर्वत की अभिलाषा क्या है और क्यों है?
पर्वत की अभिलाषा है कि वह ऊँचा रहे और अपने शिखर पर बादलों को छू सके। उसकी यह अभिलाषा इसलिए है क्योंकि वह प्रकृति का एक अभिन्न अंग है और उसकी ऊँचाई ही उसकी पहचान है। वह सदा ऊँचा रहकर संसार को प्रेरणा देना चाहता है।
(ग) महर्षि दधीचि क्यों प्रसिद्ध हैं?
महर्षि दधीचि अपनी दानवीरता और त्याग के लिए प्रसिद्ध हैं। उन्होंने देवताओं के कहने पर अपनी हड्डियाँ दान कर दीं, जिनसे वज्र (इंद्र का अस्त्र) बनाया गया। इस वज्र से वृत्रासुर नामक राक्षस का वध हुआ। उनका त्याग अद्वितीय है।
(घ) “जसोदा हरि पालने झुलावे” पद में माता यशोदा की वत्सलता किस प्रकार व्यक्त हुई है?
इस पद में माता यशोदा श्रीकृष्ण को पालने में झुलाती हैं और उनके प्रति अपने असीम प्रेम और वात्सल्य को व्यक्त करती हैं। वह उन्हें लोरी सुनाती हैं, उनकी सुंदरता का वर्णन करती हैं और उनकी रक्षा की कामना करती हैं। यह माता के हृदय की कोमल भावनाओं को दर्शाता है।
8. निम्न में से किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर लगभग 50 शब्दों में दीजिए : 2+2+2+2=8
(क) भामाशाह का समाधि स्थल कहाँ स्थित है?
भामाशाह का समाधि स्थल राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले में स्थित है। वे महाराणा प्रताप के प्रमुख सेनापति और विश्वासपात्र थे, जिन्होंने अपनी संपत्ति दान कर महाराणा की सहायता की थी।
(ख) कबीर ने ईश्वर का निवास स्थान कहाँ बताया और वह कैसे मिलता है?
कबीर ने ईश्वर का निवास स्थान हृदय में बताया है। उनके अनुसार ईश्वर मंदिर या मस्जिद में नहीं, बल्कि प्रत्येक प्राणी के हृदय में वास करते हैं। वह सच्चे मन, प्रेम और भक्ति से मिलते हैं, न कि बाहरी आडंबरों से।
(ग) फ्रेंड कौन था और वह लेखिका को कब और कहाँ मिला?
फ्रेंड एक अंग्रेज व्यक्ति था जो लेखिका महादेवी वर्मा को उनके बचपन में मिला था। वह लेखिका के पिता के मित्र थे और उनसे मिलने आते थे। उन्होंने लेखिका को अंग्रेजी सीखने में मदद की और उनके जीवन पर गहरा प्रभाव डाला।
(घ) डॉ. अब्दुल कलाम का पूरा नाम क्या था?
डॉ. अब्दुल कलाम का पूरा नाम अबुल पाकिर जैनुलाब्दीन अब्दुल कलाम था। वे भारत के 11वें राष्ट्रपति थे और एक महान वैज्ञानिक के रूप में प्रसिद्ध हैं। उन्हें 'मिसाइल मैन' के नाम से भी जाना जाता है।
(ङ) संसार को तपोबन क्यों कहा गया है?
संसार को तपोबन इसलिए कहा गया है क्योंकि यहाँ मनुष्य को विभिन्न प्रकार के कष्टों और कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। यह संसार एक तपस्या स्थल के समान है, जहाँ व्यक्ति अपने कर्मों और संघर्षों से तपकर शुद्ध और महान बनता है।
9. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिये : 4+4=8
(क) स्वामी विवेकानन्द का सामान्य परिचय देते हुए उनकी रचनाओं का नाम लिखिये।
स्वामी विवेकानन्द का जन्म 12 जनवरी 1863 को कोलकाता में हुआ था। उनका मूल नाम नरेन्द्रनाथ दत्त था। वे रामकृष्ण परमहंस के प्रमुख शिष्य थे। उन्होंने 1893 में शिकागो में विश्व धर्म सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व किया और वेदांत दर्शन का प्रचार किया। उनकी प्रमुख रचनाएँ हैं: 'राजयोग', 'ज्ञानयोग', 'कर्मय
(क) सड़क दुर्घटनाओं से बचने के चार उपाय बताइये। सड़क दुर्घटनाओं से बचने के चार उपाय निम्नलिखित हैं: (ख) दुर्घटना स्थल पर दी जाने वाली प्राथमिक चिकित्सा के बारे में बताइये व संकेत फलक का प्रयोग क्यों किया जाता है? बताइये। प्राथमिक चिकित्सा: दुर्घटना स्थल पर प्राथमिक चिकित्सा में निम्नलिखित कदम शामिल हैं: संकेत फलक का प्रयोग: संकेत फलक (जैसे त्रिकोणीय चेतावनी बोर्ड) का प्रयोग दुर्घटना स्थल पर आने वाले अन्य वाहनों को सचेत करने के लिए किया जाता है, ताकि वे धीमी गति से आएं और दुबारा दुर्घटना न हो। (ग) निम्नलिखित का उपयोग क्यों किया जाता है:20. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिये (दो प्रश्नों के)