RBSE Class 9th 2024 Hindi-2024 Previous Year Papers
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Paper details
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| Board | RBSE |
|---|---|
| Class | Class 9th |
| Exam year | 2024 |
| Subject | Hindi-2024 |
| Resource type | Previous Year Papers |
| Category | RBSE Previous Year Question Papers |
| Website | RBSE Solution |
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RBSE Class 9th 2024 Hindi-2024
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Rajasthan Board Class 9th Hindi-2024 2024 solved Previous Year Question Papers
वार्षिक परीक्षा - 2023-24
विषय: हिन्दी | कक्षा: IX | समय: 3.45 घण्टे | पूर्णांक: 80
निर्देशः
- सभी प्रश्न अनिवार्य हैं।
- सभी प्रश्नों के अंक उनके सामने अंकित हैं।
गद्यांश
किसी विदेशी संस्कृति का संवाहक भाषा एक स्वतंत्र राष्ट्र की संस्कृति के लिए कितनी खतरनाक हो सकती है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि हमारे देश में अंग्रेजी के वर्चस्व से हमने मुक्ति पा ली, पर आजादी के साठ वर्ष बाद भी हम अंग्रेज़ी को आया के रूप में विदेशी सांस्कृतिक साम्राज्यवाद को गले लगा रहे हैं। जिस अंग्रेजी भाषा को ब्रिटिश शासन काल में भाषा और संस्कृति को छिन्न-भिन्न करने की एक सुनियोजित चाल के रूप में अपनाया गया था, उसे आज हम राष्ट्रीय स्वाभिमान के अभाव में स्वयं अपना रहे हैं। आज देश में सबसे अधिक सांस्कृतिक प्रदूषण अंग्रेजी के कारण फैल रहा है, जो इस बात का संकेत है कि हमारी राष्ट्रीय संस्कृति की जड़ें भीतर तक खोखली हो रही हैं। हमारे देश में भाषाई आतंकवाद पैदा करने में अंग्रेजी की प्रभावी भूमिका है। सम्पूर्ण देश में भावात्मक एकता का शंखनाद करने वाली हिंदी की उपेक्षा कर अंग्रेजी का अपनाना हमारी मानसिक दासता का परिचायक है। हमारे देश की भाषिक विविधता में सांस्कृतिक एकता का बोध हिंदी के माध्यम से ही जगाया जा सकता है। राष्ट्रीय भावना से प्रेरित होकर इस सत्य को जितनी जल्दी आत्मसात किया जाए, उतना ही हमारे लिए श्रेयस्कर है।
गद्यांश पर आधारित प्रश्न
-
स्वतंत्र राष्ट्र की संस्कृति के लिए किसे खतरनाक बताया गया है?
- (क) ब्रिटिश साम्राज्य
- (ख) विदेशी संस्कृति का संवाहक भाषा
- (ग) अंग्रेजी भाषा
- (घ) इनमें से कोई नहीं
सही उत्तर: (ख) विदेशी संस्कृति का संवाहक भाषा
व्याख्या: गद्यांश के अनुसार, "किसी विदेशी संस्कृति का संवाहक भाषा एक स्वतंत्र राष्ट्र की संस्कृति के लिए कितनी खतरनाक हो सकती है" से स्पष्ट है।
-
हम आज भी अंग्रेजी को क्यों अपना रहे हैं?
- (क) यह बोलने में अच्छी लगती है इसलिए
- (ख) राष्ट्रीय स्वाभिमान के अभाव के कारण
- (ग) विदेशी संस्कृति को अपनाने के कारण
- (घ) अपने को अच्छा दिखाने के कारण
सही उत्तर: (ख) राष्ट्रीय स्वाभिमान के अभाव के कारण
व्याख्या: गद्यांश में कहा गया है कि "उसे आज हम राष्ट्रीय स्वाभिमान के अभाव में स्वयं अपना रहे हैं।"
-
भारत में किसके कारण भाषायी अलगाववाद पनप रहा है?
- (क) आतंकवादियों के कारण
- (ख) विदेशी सम्पर्क के कारण
- (ग) अंग्रेजी भाषा के कारण
- (घ) हिंदी भाषा के कारण
सही उत्तर: (ग) अंग्रेजी भाषा के कारण
व्याख्या: गद्यांश में स्पष्ट है कि "हमारे देश में भाषाई आतंकवाद पैदा करने में अंग्रेजी की प्रभावी भूमिका है।"
-
देश में सांस्कृतिक एकता का बोध किससे हो सकता है?
- (क) अंग्रेजी भाषा को अपनाने से
- (ख) हिंदी को सम्पर्क भाषा के रूप में अपनाने से
- (ग) विदेशी संस्कृति को अपनाने से
- (घ) भाषायी अलगाववाद को बढ़ाने से
सही उत्तर: (ख) हिंदी को सम्पर्क भाषा के रूप में अपनाने से
व्याख्या: गद्यांश के अनुसार, "हमारे देश की भाषिक विविधता में सांस्कृतिक एकता का बोध हिंदी के माध्यम से ही जगाया जा सकता है।"
-
हम विदेशी सांस्कृतिक साम्राज्यवाद को किस रूप में अपना रहे हैं?
- (क) विदेशी संस्कृति के रूप में
- (ख) विदेशी वस्तुओं के रूप में
- (ग) अंग्रेजी भाषा के रूप में
- (घ) इनमें से कोई नहीं
सही उत्तर: (ग) अंग्रेजी भाषा के रूप में
व्याख्या: गद्यांश में कहा गया है कि "हम अंग्रेज़ी को आया के रूप में विदेशी सांस्कृतिक साम्राज्यवाद को गले लगा रहे हैं।"
-
राष्ट्रीय भावना से प्रेरित होकर हमें कौन से सत्य को जल्दी आत्मसात कर लेना चाहिए?
- (क) सांस्कृतिक एकता का बोध हिंदी से
- (ख) भावात्मक एकता का बोध
- (ग) विदेशी सांस्कृतिक साम्राज्यवाद की प्रतीक
- (घ) उपर्युक्त सभी
सही उत्तर: (क) सांस्कृतिक एकता का बोध हिंदी से
व्याख्या: गद्यांश के अंत में कहा गया है कि "राष्ट्रीय भावना से प्रेरित होकर इस सत्य को जितनी जल्दी आत्मसात किया जाए, उतना ही हमारे लिए श्रेयस्कर है" जो सांस्कृतिक एकता के बोध से संबंधित है।
-
"सुनियोजित" शब्द में प्रत्यय है-
- (क) 'इत' प्रत्यय
- (ख) 'इय' प्रत्यय
- (ग) 'नि' प्रत्यय
- (घ) 'त' प्रत्यय
सही उत्तर: (क) 'इत' प्रत्यय
व्याख्या: 'सुनियोजित' शब्द 'सुनियोजन' में 'इत' प्रत्यय जोड़ने से बना है।
-
उपर्युक्त गद्यांश का उपयुक्त शीर्षक बताइए-
- (क) विदेशी संस्कृति और अंग्रेजी
- (ख) राष्ट्रभाषा और संस्कृति
- (ग) राष्ट्र की संस्कृति
- (घ) भाषिक विविधता
सही उत्तर: (ख) राष्ट्रभाषा और संस्कृति
व्याख्या: गद्यांश में राष्ट्रभाषा हिंदी के महत्व और विदेशी संस्कृति के प्रभाव पर चर्चा की गई है, अतः यह शीर्षक सबसे उपयुक्त है।
प्रश्न 2: निम्नलिखित काव्यांश को पढ़कर नीचे दिये गये प्रश्नों के उत्तर लिखिये-
विचार लो कि मर्त्य हो, न मृत्यु से डरो कभी,
परन्तु यों मरो कि याद जो करें सभी।
हुई न यों तो क्या मरे, क्या जिये,
मरा नहीं वही कि जो जिया न आपके लिए।
यही पशु-प्रवृति है कि आप-आप ही चरे,
वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे।
उसी उदार की कथा सरस्वती वरदान,
उसी उदार से धरा कृतार्थ भाव मानती।
उसी उदार की सदा सजीव कीर्ति है,
तथा उसी उदार को समस्त सृष्टि प्रणति है।
अखण्ड आत्मभाव जो असीम प्रेम में मरे,
वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे।
सहानुभूति चाहिए, महाविभूति है वही,
वशीकृता सदैव है बनी हुई स्वयं मही।
प्रश्नों के उत्तर:
-
मनुष्य का मृत्यु से क्यों नहीं डरना चाहिए?
उत्तर: मनुष्य का मृत्यु से इसलिए नहीं डरना चाहिए क्योंकि वह परोपकारधर्मा है और मृत्यु के बाद भी लोग उसे याद करते हैं। कवि कहते हैं कि मृत्यु से डरने की बजाय ऐसे मरना चाहिए कि सभी याद करें।
-
अमर कौन हो जाता है?
उत्तर: परोपकार करने वाला व्यक्ति अमर हो जाता है। कवि के अनुसार, जो दूसरों के लिए जीता और मरता है, उसकी कीर्ति सदा जीवित रहती है।
-
कवि के अनुसार मनुष्य कौन है?
उत्तर: कवि के अनुसार, वही मनुष्य है जो मनुष्य के लिए जीता-मरता है। अर्थात जो परोपकार और मानवता के लिए समर्पित हो।
-
पशु-प्रवृति क्या है?
उत्तर: पशु-प्रवृति अपने लिए ही जीना है। कवि कहते हैं कि जो केवल अपने स्वार्थ के लिए जीता है, वह पशु के समान है।
-
कैसी मृत्यु सुमृत्यु होती है?
उत्तर: वह मृत्यु सुमृत्यु होती है जिसमें मरने के बाद भी लोग याद करते हैं। अर्थात परोपकारी व्यक्ति की मृत्यु सुमृत्यु कहलाती है।
-
प्रस्तुत काव्यांश का उचित शीर्षक बताइये।
उत्तर: प्रस्तुत काव्यांश का उचित शीर्षक "परोपकार" या "मनुष्यता" है।
-
'मृत्यु' का विलोम शब्द लिखिये।
उत्तर: 'मृत्यु' का विलोम शब्द 'जीवन' है।
प्रश्न 3: रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-
-
वह बहुत फुर्तीला है। रेखांकित अंश विशेषण है।
-
विशेषण के कुल चार भेद होते हैं।
-
वर्णों के व्यवस्थित समूह को वर्णमाला कहते हैं।
-
पर्वत, नदी, नगर, पक्षी, फूल आदि उदाहरण जातिवाचक संज्ञा के हैं।
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'मोहन पुस्तक पढ़ता है' वाक्य में सकर्मक क्रिया है।
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'अनुज' में अनु उपसर्ग है।
-
सामाजिक में इक प्रत्यय है।
प्रश्न 4
(x) पर्यायवाची शब्द लिखिये-
- (क) कमल: पंकज, नीरज, जलज, सरोज, अरविंद
- (ख) राजा: नरेश, भूपति, महीपति, नृप, राजाधिराज
(xi) निम्नलिखित श्रुतिसम भिन्नार्थक शब्दों के अर्थ लिखिये-
- (क) तरंग – नुरंग: तरंग का अर्थ है लहर; नुरंग का अर्थ है रंगीन या सुंदर रंगों वाला।
- (ख) प्रमाण – प्रणाम: प्रमाण का अर्थ है सबूत या माप; प्रणाम का अर्थ है नमस्कार या आदरपूर्वक झुकना।
(xii) अर्थ की दृष्टि से वाक्य के भेद के नाम लिखिए।
अर्थ की दृष्टि से वाक्य के आठ भेद होते हैं:
- विधानवाचक वाक्य
- निषेधवाचक वाक्य
- प्रश्नवाचक वाक्य
- आज्ञावाचक वाक्य
- इच्छावाचक वाक्य
- संदेहवाचक वाक्य
- संकेतवाचक वाक्य
- विस्मयादिबोधक वाक्य
(xiii) 'हाथ गोबर करना' मुहावरे का अर्थ लिखकर वाक्य में प्रयोग कीजिए।
अर्थ: किसी काम को बिगाड़ देना या असफल कर देना।
वाक्य प्रयोग: राम ने परीक्षा की तैयारी तो बहुत अच्छी की थी, लेकिन आखिरी समय में अपना हाथ गोबर कर दिया और अच्छे अंक नहीं ला सका।
गद्यांश (तिब्बत पर आधारित)
तिब्बत की भूमि बहुत अधिक छोटे-बड़े जागीरों में बँटी है। इन जागीरों का बहुत ज्यादा हिस्सा लामों (विहारों) के हाथ में है। अपनी-अपनी जागीर में हर जागीरदार खुद खेती करता है, जिसके लिए मजदूर आसानी से मिल जाते हैं। खेती का इंतजाम देखने के लिए कहीं कोई भिक्षु नियुक्त किया जाता है, जो लामों के लिए गुलाम से कम नहीं होता। यहाँ की खेती के सुखियाँ भिक्षु (नम्से) बड़े भाग्यशाली पुरुष थे। वह बहन प्रेम से पिले, हालांकि उस वक्त उनका स्वास्थ्य ऐसा नहीं था कि उन्हें ऐसा ख्याल करना चाहिए था। यहाँ एक अच्छा मंदिर था, जिसमें अनेक विद्वानों (अनुवादकों) की हर एक शाखा की तीन पाठियाँ रखी हुई थीं, लेखक का आसन भी वहीं लगा।
(i) नम्से कौन थे?
नम्से तिब्बत में खेती की देखरेख करने वाले भिक्षु थे, जो बड़े भाग्यशाली पुरुष माने जाते थे।
(ii) लेखक का आसन कहाँ लगाया गया था?
लेखक का आसन उस मंदिर में लगाया गया था जहाँ विद्वानों (अनुवादकों) की पाठियाँ रखी हुई थीं।
(iii) तिब्बत में जागीरों का अधिकतम भाग किसके पास है?
तिब्बत में जागीरों का अधिकतम भाग लामों (विहारों) के हाथ में है।
अथवा (दूसरा गद्यांश)
वहाँ छात्रावास के हर एक कमरे में हम चार छात्राएँ रहती थीं। उनमें पहली ही साथिन समझदार कुमारी मिलीं। सातवें दर्जे में वे मुझसे दो साल सीनियर थीं। वे कविता लिखती थीं और मैं थी बचपन से तुक मिलाती आई थी। बचपन में माँ लिखती थी, पद भी गाती थी। मीरा के पद विशेष रूप से गाती थी। सवेरे 'जागिए कृपा निधान गत वन बोले' यही सुना जाता था। प्रमाती गाती थी। शास को मीरा का कोई पद गाती थी। सुन-सुनकर मैंने भी ब्रजभाषा में लिखना आरंभ किया। यहाँ आकर देखा कि वहाँ की जी खड़ी बोली में लिखती थीं। मैं भी वैसा ही लिखने लगी। लेकिन वहाँ की जी कड़ी थी, प्रतिष्ठित हो चुकी थी। उनसे छिपकर-छिपाकर लिखती थी मैं।
(i) लेखिका के स्कूल के छात्रावास में कितनी छात्राएँ रहती थीं?
लेखिका के स्कूल के छात्रावास में हर कमरे में चार छात्राएँ रहती थीं।
(ii) छात्रावास में लेखिका की पहली साथिन कौन थी?
छात्रावास में लेखिका की पहली साथिन समझदार कुमारी थीं।
(iii) 'जागिए कृपा निधान गत वन बोले' किसकी पंक्ति है?
यह पंक्ति मीरा की है, जिसे लेखिका की माँ विशेष रूप से गाती थीं।
प्रश्न 5 (पद्यांश)
मानुष हों, तो वहीं रसखानि ब्रज के गाँव के।
जो पशु हों, तो कहाँ बसु मेरे, चरों नित गाय को धन मानूँ।
पाहन हों, तो वहीं गिरि को, जो कियो हरि छत्र पुरंदर को।
अथवा खग हों बसेरों करों मिलि कालिन्दी कूल कदम्ब को डाउन।
(i) कवि रसखान अगले जन्म में ब्रज में ही क्यों रहना चाहते हैं?
कवि रसखान अगले जन्म में ब्रज में ही रहना चाहते हैं क्योंकि ब्रजभूमि भगवान कृष्ण की लीलास्थली है और वहाँ की हर वस्तु में दिव्यता है। वे ब्रज के प्रति अपने अटूट प्रेम और भक्ति के कारण वहीं रहना चाहते हैं।
(ii) रसखान अगले जन्म में कौनसा पशु बनना चाहते हैं और क्यों?
रसखान अगले जन्म में गाय बनना चाहते हैं, क्योंकि गाय ब्रज में रहती है और उसका धन (दूध) भगवान कृष्ण को अर्पित होता है। इस प्रकार वे भगवान की सेवा में लगे रहेंगे।
(iii) कालिन्दी नदी के किनारे किस रूप में रहना चाही है?
कवि कालिन्दी (यमुना) नदी के किनारे पक्षी (खग) बनकर रहना चाहते हैं, ताकि वे कदम्ब के पेड़ पर बसेरा कर सकें और भगवान कृष्ण की लीलाओं का आनंद ले सकें।
प्रश्न 6 (कविता)
पीले मीठे अमरूदों में अब लाल लाल चित्तियाँ पड़ीं,
पके अब पुनहले मधुर बेर, ओट से तर की डाल जड़ी!
लहलह पालक, महमह धनिया, लौकी औ सेमफलीं फैली,
टमाटर हुए लाल, तो बेल की बढ़ी हरी थैली!
(इस कविता में फलों और सब्जियों के पकने और बढ़ने का वर्णन किया गया है।)
खंड-ग (व्याकरणिक प्रश्न)
अति लघुत्तरात्मक प्रश्न
-
काव्यांश किस कविता से लिया गया है? इसके कवि कोन हैं?
यह प्रश्न काव्यांश पर आधारित है। काव्यांश के अभाव में उत्तर देना संभव नहीं है। कृपया काव्यांश प्रदान करें।
-
कविता में अमरूदों की क्या विशेषता बताई गई है?
यह प्रश्न काव्यांश पर आधारित है। काव्यांश के अभाव में उत्तर देना संभव नहीं है। कृपया काव्यांश प्रदान करें।
-
"लहलह पालक, महमह धनिया" से क्या आशय है?
इस पंक्ति का आशय है कि पालक हरी-भरी (लहलहाती) है और धनिया सुगंधित (महकती) है। यह सब्जियों की ताजगी और सुंदरता को दर्शाता है।
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"जाकर थाने में रिपोर्ट कर दूँगा" यह किसका कथन है?
यह कथन गोपाल प्रसाद का है।
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उपभोक्ता संस्कृति हमारी किस नींव को हिला रही है?
उपभोक्ता संस्कृति हमारी पारंपरिक संस्कृति और मानवीय मूल्यों की नींव को हिला रही है।
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साइलेंट वैली कहाँ है?
साइलेंट वैली केरल राज्य में स्थित है।
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"मानसरोवर का जल" से कवि का क्या आशय है?
मानसरोवर का जल पवित्र और निर्मल माना जाता है। कवि का आशय है कि वह ऐसे पवित्र और निर्मल जल की तलाश में है जो आध्यात्मिक शांति प्रदान करे।
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"न सीधी गति" से क्या आशय है?
"न सीधी गति" का आशय है कि जीवन की राह सीधी और सरल नहीं है, बल्कि इसमें उतार-चढ़ाव और कठिनाइयाँ आती हैं।
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बच्चों के काम पर जाने की जवाबदेही कवि किसकी मानते हैं?
कवि बच्चों के काम पर जाने की जवाबदेही अभिभावकों और समाज की मानते हैं।
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बंजर जमीन से क्या तात्पर्य है?
बंजर जमीन से तात्पर्य ऐसी भूमि से है जो खेती योग्य नहीं होती या जिसमें फसल नहीं उगाई जा सकती।
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लेखिका के पिता को आई.सी.एस. की परीक्षा में बैठने से क्यों रोक दिया गया था?
लेखिका के पिता को आई.सी.एस. की परीक्षा में बैठने से इसलिए रोक दिया गया था क्योंकि वे उस समय की आयु सीमा से अधिक उम्र के हो चुके थे।
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गोपाल प्रसाद पेशे से क्या था?
गोपाल प्रसाद पेशे से एक नौकर था।
लघुत्तरात्मक प्रश्न
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छोटी बच्ची को एक्ट के प्रति प्यार क्यों उमड़ आया?
छोटी बच्ची को एक्ट (अधिनियम) के प्रति प्यार इसलिए उमड़ आया क्योंकि उसने सुना था कि यह अधिनियम बाल-श्रम को रोकने और बच्चों को शिक्षा का अधिकार दिलाने में मदद करता है। वह चाहती थी कि सभी बच्चे पढ़-लिख सकें।
-
"जिसे तुम आदमी समझते हो, उसकी तरफ हाथ की नहीं, पाँव की अंगुली से इशारा करते हो।" व्यंग्य को स्पष्ट कीजिए।
इस व्यंग्य का आशय है कि जिस व्यक्ति को हम इंसान समझते हैं, वह वास्तव में इंसान नहीं है। उसकी ओर हाथ से इशारा करना भी उचित नहीं, बल्कि पैर की अंगुली से इशारा करना अधिक उपयुक्त है। यह उस व्यक्ति के पतन और अमानवीय व्यवहार को दर्शाता है।
-
नरिंस की पत्नी फ्रीदा ने ऐसा क्यों कहा होगा कि "मेरी छत पर बैठने वाली चिड़िया मेरे बारे में सारी बातें जानती है?"
फ्रीदा ने ऐसा इसलिए कहा होगा क्योंकि वह अपने पति नरिंस के व्यवहार से आहत थी। उसे लगता था कि उसके पति उसकी भावनाओं को नहीं समझते, जबकि एक छोटी चिड़िया भी उसकी पीड़ा को भाँप सकती है। यह उसकी अकेलेपन और उपेक्षा की भावना को दर्शाता है।
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मनुष्य ईश्वर को कहाँ-कहाँ ढूँढ़ता फिरता है?
मनुष्य ईश्वर को मंदिरों, मस्जिदों, गिरजाघरों, तीर्थ स्थानों, पहाड़ों, जंगलों और गुफाओं में ढूँढ़ता फिरता है, जबकि ईश्वर उसके हृदय में ही वास करता है।
-
कवि को कोयल से ईर्ष्या क्यों हो गई है?
कवि को कोयल से ईर्ष्या इसलिए हो गई है क्योंकि कोयल बिना किसी चिंता के स्वतंत्र रूप से गाती है और आनंदित रहती है, जबकि मनुष्य जीवन की समस्याओं और बंधनों में जकड़ा हुआ है।
-
गोपाल प्रसाद के दकियानूसी विचार क्या थे?
गोपाल प्रसाद के दकियानूसी विचार थे कि महिलाओं को घर के कामों तक सीमित रहना चाहिए और उन्हें शिक्षा या बाहर काम करने की आवश्यकता नहीं है। वह पुरानी परंपराओं में विश्वास करता था।
-
लेखिका की परदादी ने क्या व्रत ले रखा था और क्यों?
लेखिका की परदादी ने मौन व्रत ले रखा था। उन्होंने यह व्रत इसलिए लिया था क्योंकि वे अपने पति की मृत्यु के बाद सांसारिक बातों से विरक्त हो गई थीं और आध्यात्मिक साधना में लीन रहना चाहती थीं।
दीर्घ उत्तरात्मक प्रश्न
-
किन घटनाओं से पता चलता है कि हीरा और मोती में गहरी दोस्ती थी?
हीरा और मोती की गहरी दोस्ती का पता निम्नलिखित घटनाओं से चलता है:
- दोनों एक साथ खेलते थे और एक-दूसरे का साथ कभी नहीं छोड़ते थे।
- जब मोती बीमार पड़ा, तो हीरा उसकी सेवा में दिन-रात लगा रहा।
- दोनों एक-दूसरे के लिए अपनी जान भी देने को तैयार रहते थे।
- उनकी दोस्ती इतनी गहरी थी कि वे एक-दूसरे के बिना अधूरे महसूस करते थे।
अथवा
'बच्चे काम पर जा रहे हैं' कविता का संदेश लिखिए।
इस कविता का मुख्य संदेश है कि बाल-श्रम एक गंभीर सामाजिक समस्या है। कवि बच्चों के बचपन को बचाने और उन्हें शिक्षा का अधिकार दिलाने की बात करता है। वह समाज से आग्रह करता है कि बच्चों को कारखानों और खेतों में काम करने के बजाय स्कूल भेजा जाए, ताकि वे अपने सपनों को पूरा कर सकें और एक बेहतर भविष्य का निर्माण कर सकें।
-
लेखिका ने अपनी नानी को कभी देखा भी नहीं, फिर भी वह उनके व्यक्तित्व से क्यों प्रभावित थी?
लेखिका अपनी नानी के व्यक्तित्व से इसलिए प्रभावित थी क्योंकि उसने अपनी माँ और अन्य परिवारजनों से नानी के बारे में बहु